CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 168201 यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त जीव मंडल निचय :


A.

नीलगिरी है।

B.

पंचमढ़ी है।

C.

कंचनजंगा है।

D.

ग्रेट निकोबार है।

Right Answer is: A

SOLUTION

नीलगिरी, नंदा देवी, सुन्दर वन वे जैव मंडल निचय हैं जो यूनेस्को द्वारा विश्व नेटवर्क पर मान्यता प्राप्त हैं।


Q. 168202 सुदंर वन जीव मंडल निचय :


A.

पंजाब में स्थित है।

B.

गुजरात में स्थित है।

C.

कर्नाटक में स्थित है।

D.

पश्चिम बंगाल में स्थित है।

Right Answer is: D

SOLUTION

सुदंर वन जीव मंडल निचय पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के दलदली डेल्टा में स्थित है। यह 9,630 वर्ग किलोमीटर के एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ मैंग्रोव वन, दलदल मिट्टी और वनाच्छादित द्वीप पाए जाते हैं।


Q. 168203 देश में कुल कितने वन्य प्राणी अभयवन हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

देश में कुल 512 वन्य प्राणी अभयवन हैं।  


Q. 168204 संरक्षण का क्या अर्थ है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संरक्षण का अर्थ प्राकृतिक संसाधनों का बचाव, सुरक्षा एवं उनका प्रभावी इस्तेमाल है।


Q. 168205 सीआईटीईएस का क्या अभिप्राय है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह विश्व की लुप्तप्राय फौना और फ़्लोरा प्रजातियों हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन है।


Q. 168206 दुनिया के किन हिस्सो में उष्णकटिबंधीय पर्णपाती जंगल पाए जाते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वे भारत, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और मध्य अमेरिका के बड़े हिस्से में पाए जाते हैं।


Q. 168207 किस प्रकार की जलवायु परिस्थितियों में खट्टे फल की खेती की जाती हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

गर्म शुष्क गर्मी और बरसात के हल्के सर्दियों में।


Q. 168208 शंकुधारी वन के उपयोग बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

इस प्रकार के जंगलों की लकड़ी नरम होती है इसलिए सामान्य रूप से इसकी लकड़ी उद्योगों में उपयोग में नहीं लायी जाती हैं। इस प्रकार के जंगलों की लकड़ी का उपयोग आमतौर पर माचिस, लुगदी बनाने समाचार प्रिंट का कागज बनाने आदि में लायी जाती हैं।


Q. 168209 दुनिया के किन हिस्सो में मौसमी चरागाह पाये जाते है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मध्य अक्षांश और महाद्वीपों के आंतरिक भाग वे भाग हैं जहां मौसमी चरागाह स्थित है।


Q. 168210 संरक्षण का क्या अर्थ है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी उपयोग है।


Q. 168211 जंगल शब्द क्या निरूपित करता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक खास जगह या मानव जाति की मदद के बिना एक क्षेत्र में में उगने वाले पेड़ो के समूह को जंगल के रूप में जाना जाता है।


Q. 168212 वे दो कारक कौन से हैं जिन पर वनस्पतियों का विकास ज्यादातर निर्भर करता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वनस्पति के सभी प्रकार का विकास मुख्य रूप से तापमान और वर्षा पर निर्भर करता है।


Q. 168213 आमतौर पर उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में पाए जाने वाले दो कठोर लकड़ी के पेड़ो का नाम बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

आमतौर पर उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन में पाए जाने वाले दो कठोर लकड़ी के पेड़ शीशम और महोगनी हैं।


Q. 168214 मानसून हवाओं की प्रकृति को भारत में कैसे वर्णित किया जा सकता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मानसून हवाओं की प्रकृति को सर्दियों और गर्मियों के दौरान भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दबाव के वितरण से परिभाषित किया जा सकता है।


Q. 168215 आप 'जलवायु' शब्द से क्या समझते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक क्षेत्र में लगातार लंबी अवधि के लिए मौसम की स्थिति का औसत कम से कम तीन दशकों तक जलवायु कहा जाता है।


Q. 168216 ठंड के मौसम की जलवायु में भारत के सबसे अधिक आरामदायक क्षेत्रों का उल्लेख करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

ठंड के मौसम के मौसम में सबसे अधिक आरामदायक क्षेत्रों में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आंतरिक हिस्से हैं।


Q. 168217 भारतीय मौसम को हिमालय कैसे प्रभावित करता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

हिमालय की शिखर चोटियाँ प्रभावी जलवायु विभाजक के रूप में कार्य करती हैं। यह आर्कटिक क्षेत्र से उठने वाली ठंडी हवाओं से भारत की रक्षा करता है। भारत में वर्षा होने में हिमालय का महत्त्वपूर्ण योगदान है। हिमालय भारत में उष्णकटिबंधीय जलवायु, गर्म और नम ग्रीष्मकाल और शुष्क शीतकाल का स्पर्श देता है।


Q. 168218 भारत का सबसे ठंडा क्षेत्र कौन-सा है और क्यों?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

हिमालय के आस-पास के क्षेत्र जैसे जम्मू एवं कश्मीर व हिमाचल प्रदेश भारत में सबसे ठंडे क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र बहुत ऊंचाई पर स्थित हैं। सर्दियों के मौसम में यहाँ भारी बर्फ़बारी होती है और तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है।


Q. 168219 पारंपरिक भारतीय मौसम क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मौसम

माह (भारतीय कैलेंडर के अनुसार)

माह (भारतीय कैलेंडर के अनुसार)

वसंत

चैत्र-वैशाख

मार्च - अप्रैल

ग्रीष्म

ज्येष्ठ-आषाढ़

मई - जून

वर्षा

श्रावण-भाद्र

जुलाई - अगस्त

शरद

अश्विन-कार्तिक

सितम्बर - अक्टूबर

हेमंत

मार्गशिर्षा-पौष

नवंबर - दिसंबर

शिशिर

माघ-फाल्गुन

जनवरी - फ़रवरी


Q. 168220 मानसून के पीछे लौटते मौसम की चार मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पीछे लौटते दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

i) उत्तर-पश्चिम भारत में कम दबाव का क्षेत्र कमजोर

ii) बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों की घटना के साथ जुड़े है।

iii) दक्षिण में कम दबाव का क्षेत्र का स्थानांतरण

iv) सर्दियों में भारत के पूर्वी तट के साथ भारी बारिश।

 


Q. 168221 निम्न शब्दों को परिभाषित करे: क) लू ख) सूखा
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

i) लू - यह गर्म और शुष्क हवा है जो गर्मी के मौसम के दौरान उत्तरी मैदानों में बहती है।

ii) सूखा - सूखे को पानी की भारी कमी के रूप में परिभाषित किया जाता है औसत वर्षा सामान्य से बहुत कम है।

 


Q. 168222 कारण दे: 1) उत्तर-पश्चिम तड़ितझंझा को पश्चिम बंगाल में 'काल बैसाखी' कहा जाता है। 2) राजस्थान में ज्यादा बारिश प्राप्त नहीं होती है।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1) उत्तर-पश्चिम पूर्व मानसून की गरज हैं और पश्चिम बंगाल में उनकी तीव्रता की वजह से 'काल बैसाखी' कहा जाता है ।

2) राजस्थान में अरावली श्रृंखला हवाओं की दिशा के समानांतर स्थित है और बारिश के असर हवाऍ राजस्थान को सुखा छोड़ आगे बढ़ जाती है।

 


Q. 168223 दिए गए नक्शे पर, शीत ऋतु के दौरान और गर्मी के मौसम के दबाव क्षेत्रों और मानसूनी हवाओं की दिशा को चिह्नित करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सर्दियों के दौरान दबाव का क्षेत्र और मानसूनी हवाओं की दिशा:

गर्मियों के दौरान दबाव का क्षेत्र और मानसूनी हवाओं की दिशा:


Q. 168224 सूखा रोकने के उद्देश्य से उठाए गए सरकार की पहल के किन्ही भी दो कदमो के नाम बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सूखे को रोकने के लिए दो महत्वपूर्ण सरकारी पहल हैं:

1. योजना आयोग की सिफारिश पर, सरकार ने 1967 में अध्ययन और बाढ़ की भविष्यवाणी करने के लिए "सूखा रिसर्च यूनिट (DRU)" की स्थापना की।

2. सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (डीपीएपी) 1973 में एकीकृत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था। यह 96 सूखा प्रभावित जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है।


Q. 168225 भारत के प्रमुख बाढ़ संभावित क्षेत्रों के नाम लिखे।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

निचली ब्रह्मपुत्र घाटियाँ, पंजाब-हरियाणा के मैदान, गंगा-यमुना के दोआब, चंबल के जलग्रहण क्षेत्र, बेतवा, घाघरा, गंडक और कोसी दामोदर के जलग्रहण क्षेत्र और बंगाल में सुब्रनेखा नदियों और महानदी के डेल्टा क्षेत्र, कावेरी और कृष्णा भी बाढ़ संभावित क्षेत्र माने जाते हैं।


Q. 168226 भारत के दो वर्षा वाले तंत्रो का वर्णन करें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

दक्षिण पश्चिम मानसून के दो वर्षा वाले तंत्र हैं:

1. अरब सागर शाखा: यह शाखा पश्चिमी घाट के किनारे उत्तर की जाती है और तटीय क्षेत्रों में वर्षा का कारण बनती है।

2. बंगाल की खाड़ी शाखा: बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर पूर्व दिशा की ओर बहती है। यह बंगाल की खाड़ी से नमी को ऊपर उठाता है और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा का कारण बनता है और फिर देश के उत्तर पश्चिमी भाग की ओर बहती है और उत्तरी मैदानी इलाकों में बारिश के कारण बनता है।


Q. 168227 मानसून में विच्छेदन'' की अवधारणा के बारे में बताएं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के सूखे और आर्द्र दौर को मानसून के विच्छेदन के रूप में जाना जाता है। भारी वर्षा सूखे के अंतराल के साथ जुड़ा हुआ है। जबकि यह एक हिस्से में भारी बाढ़ का कारण बनता है और यह अन्य में सूखे के लिए जिम्मेदार हो सकता है। ये विच्छेदन मानसून द्रोणिका (अंतःउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) की गति से जुड़े हुए हैं।


Q. 168228 पश्चिमी घाट और राजस्थान में शुष्क दौर के कारणों की व्याख्या करे।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पश्चिमी तट सूखे का अनुभव करता है जब नम हवाऍ तट के समानांतर बहती हैं। पश्चिमी राजस्थान में तापमान का बढ़ना बारिश की हवाओं को रोकता है और यह शुष्क दौर चलता है।


Q. 168229 दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम की चार मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

i)  उत्तर-पश्चिम भारत में कम दबाव का क्षेत्र कमजोर है। 

ii) देश भर में तापमान में गिरावट आती है। 

iii) दक्षिण में कम दबाव का क्षेत्र के स्थानांतरण होता है। 

iv) बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों की उत्पत्ति, भारत के पूर्वी तट के साथ भारी बारिश का कारण है।


Q. 168230 पश्चिमी विक्षोभ के मूल बिंदु क्या है? इसके अलावा, भारत की जलवायु पर उनके प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूमध्य सागर पश्चिमी विक्षोभ के मूल बिंदु है। भारतीय जलवायु पर उनके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

i) उत्तरी मैदानों और पश्चिमी हिमालय में मौसम की स्थिति पर प्रभाव

ii) उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में सर्दियों की बारिश का कारण

iii) रात के तापमान में वृद्धि


Q. 168231 भारत के मौसम और जलवायु को प्रभावित प्रमुख कारकों के नाम बताइये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत की मौसम और जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक नीचे वर्णित हैं:

i) अक्षांशीय सीमा

ii) समुद्र से दूरी

iii) हिमालय पर्वतमाला

iv) प्राकृतिक भूगोल

v) मानसून हवाऍ

vi) ऊपरी हवाओ का परिसंचरण

vii) पश्चिमी विक्षोभ

viii) उष्णकटिबंधीय चक्रवात

ix) एल नीनो

x) दक्षिणी दोलन


Q. 168232 भारतीय जलवायु पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के दो प्रभाव का उल्लेख करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय जलवायु पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रभाव इस प्रकार हैं:

i) दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान, इन चक्रवातों की आवृत्ति और दिशा में भारत के अधिकांश वर्षा के स्वरूप को निर्धारित करते हैं।

ii) पीछे हटते मानसून मौसम के दौरान, ये पूर्वी तट के साथ मौसम की स्थिति को प्रभावित करते हैं।


Q. 168233 दक्षिणी दोलन और भारत की जलवायु पर इसके प्रभाव का वर्णन करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

दक्षिणी दोलन मौसम परिवर्तन की एक पद्धति है जो हिंद और प्रशांत महासागर के बीच घटित होती है। दक्षिणी दोलन के कारण, एक उच्च दबाव का क्षेत्र हिंद महासागर के साथ विकसित होता है और इसके विपरीत भी। दक्षिणी दोलन के प्रभाव के तहत, दक्षिण पश्चिम मानसून के कमजोर होने की संभावना होती है।


Q. 168234 चेन्नई में क्यों गर्मियों की तुलना में सर्दियों में अधिक वर्षा होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

चेन्नई या कोरोमंडल तट पश्चिमी घाट में स्थित है इसलिए यह दक्षिण-पश्चिम मानसून (ग्रीष्म ऋतु) के मौसम के दौरान अधिक वर्षा प्राप्त नहीं कर पाता है। सर्दियों के मौसम में दक्षिण-पश्चिम मानसून का स्थान पूर्वोत्तर व्यापार हवाऐं ले लेती हैं और वे बंगाल की खाड़ी को पार करते समय आर्द्रता प्राप्त करती हैं। इन वापस आती मानसूनी हवाओं से कोरोमंडल तट विशेषकर चेन्नई में भारी वर्षा होती है।


Q. 168235 भारत के प्रारूप मानचित्र पर वार्षिक वर्षा को दर्शाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

 


Q. 168236 ठंड के मौसम की जलवायु की कोई भी तीन विशेषताएं लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सर्दी या ठंड के मौसम की जलवायु की तीन मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

क) ठंड के मौसम की जलवायु मध्य नवंबर से शुरू होती है और फरवरी तक रहता है।

ख) ठंडे महीने दिसंबर और जनवरी हैं।

ग) पश्चिमी विक्षोभ देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में और जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी वर्षा का कारण है।


Q. 168237 गर्मी या गर्म मौसम जलवायु की कोई भी तीन विशेषताएं लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

गर्मी या गर्म मौसम के मौसम के तीन मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं

i)  गर्म मौसम की जलवायु मार्च में शुरू होती है और मई के महीने में समाप्त होता है।

ii) अधिकतम तापमान उत्तरी मैदानों में 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर उठ सकता है जबकि अधिक ऊंचाई में और तटीय क्षेत्रों का तापमान मध्यम बना हुआ रहता है।

iii) लू, आम के लिए बारिश और कल बैसाखी इस मौसम में आम घटना है।


Q. 168238 पश्चिमी विक्षोभ के मूल बिंदु क्या है? इसके अलावा भारत की जलवायु पर उनके दो प्रमुख प्रभावो का उल्लेख कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूमध्य सागर पश्चिमी विक्षोभ के मूल बिंदु है। भारत की जलवायु पर पश्चिमी विक्षोभ के दो प्रमुख प्रभाव  इस प्रकार हैं:

i) वे सर्दियों के मौसम में भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में वर्षा का कारण है।

ii) वे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का कारण है।


Q. 168239 'तापमान और वर्षा ग्राफ' क्या है? इसकी कोई दो विशेषताऍ लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह एक विशेष रूप से डिजाइन ग्राफ है जिसका तापमान का मौसमी वितरण और एक खास जगह की वर्षा को दिखाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

तापमान और वर्षा ग्राफ के दो मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1. यह एक जगह के मौसमी बदलाव की एक झलक देता है।

2. यह संबंधित जगह का प्रतिनिधित्व कर जलवायु के प्रकार को समझने में मदद करता है।

 


Q. 168240 अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र शब्द का अर्थ क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विषुवत वृत्त पर स्थित अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र एक निम्न वायुदाब वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र में व्यापारिक पवनें मिलती हैं। अतः इस क्षेत्र में वायु ऊपर उठने लगती है। जुलाई के महीने में आई.टी.सी.शेड. 20° से 25° उ. अक्षांशों के आस-पास गंगा के मैदान में स्थित हो जाता है। इसे कभी-कभी मानसूनी गर्त भी कहते हैं। यह मानसूनी गर्त, उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत पर तापीय निम्न वायुदाब के विकास को प्रोत्साहित करता है। आई.टी.सी.शेड. के उत्तर की ओर खिसकने के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवनें 40° और 60° पूर्वी देशांतरों के बीच विषुवत वृत्त को पार कर जाती हैं। कोरियोलिस बल के प्रभाव से विषुवत वृत्त को पार करने वाली इन व्यापारिक पवनों की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर हो जाती है। यही दक्षिण-पश्चिम मानसून है। शीत ऋतु में आई.टी.सी.शेड. दक्षिण की ओर खिसक जाता है। इसी के अनुसार पवनों की दिशा दक्षिण-पश्चिम से बदलकर उत्तर-पूर्व हो जाती है, यही उत्तर-पूर्व मानसून है।


Q. 168241 आप 'दक्षिण-पश्चिम मानसून' को कैसे परिभाषित करेंगे?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अप्रैल और मई के दौरान जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर सीधा चमकता है, हिंद महासागर के उत्तर में बड़ा भूभाग तीव्रता से गर्म हो जाता है। इस उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में एक गहन कम दबाव के गठन का कारण बनता है। चूँकि दक्षिण में हिंद महासागर का दबाव अधिक होता है जैसे पानी धीरे-धीरे गर्म हो जाता है, कम दबाव की सेल भूमध्य रेखा के पार दक्षिण पूर्व व्यापारिक हवाओ को आकर्षित करती है। ये स्तिथि अंतः उष्णकटिबंदिय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति को उत्तर की ओर शिफ्ट में मदद करते हैं। दक्षिण पश्चिम मानसून इस प्रकार देखा जा सकता है दक्षिण पूर्व व्यापारिक हवाओं की एक निरंतरता भूमध्य रेखा को पार करने के बाद भारतीय उपमहाद्वीप की ओर सीधे रास्ते के रूप में कोरिओलिस बल की वजह से प्रवेश करती है। इक्वेटोरियल गर्म धाराओं के ऊपर से गुजरती है, वे बहुतायत में  नमी से भरी हुई होती है। भूमध्य रेखा पार करने के बाद, वे एक दक्षिण-पश्चिम दिशा का पालन करती है। यही कारण है कि वे दक्षिण पश्चिम मानसून के रूप में जाना जाता है।


Q. 168242 आप वृष्टि छाया क्षेत्र से क्या समझते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पहाड़ की ओर हवा का पक्ष जहां ज्यादा बारिश नहीं होती है  वृष्टि छाया क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। पहाड़ों के शिखर पार करने के बाद हवाऍ पहाड़ के दूसरी तरफ ढलान के साथ उतर जाती है और गर्म हो जाती है। यह हवाओं की नमी को कम कर देता है। नतीजतन, ये हवाऍ कम वर्षा का कारण बनती है, जैसे- पश्चिमी घाट के पूर्वी।


Q. 168243 भारतीय मानसून के तंत्र को समझाने के लिए तीन प्रक्रियाओं की सूची दें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय मानसून को समझने की तीन प्रक्रियाऍ हैं:

1. दबाव और हवाओं की सतह वितरण।

2. विश्व मौसम को नियंत्रित करने वाले कारकों की वजह से ऊपरी हवा का परिसंचरण और विभिन्न हवाओ और जेट धाराओं की आना।

3.  पश्चिमी विक्षोभ और उष्णकटिबंधीय गड्ढों के कारण मौसम की स्थिति से वर्षा होती है।


Q. 168244 भारतीय उप महाद्वीप के ऊपर हवा प्रणाली के उत्क्रमण के कारण क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पवन प्रणाली के उत्क्रमण के प्रमुख कारण हैं:

1. गर्म जलवायु के मौसम के कारण भूभाग पर अधिक उच्च दबाव के क्षेत्र का गठन।

2. समुद्र के स्तर से ऊपर तिब्बती पठार से अधिक उच्च दबाव के क्षेत्र का गठन।

3. पूर्व की जेट स्ट्रीम से उप उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम का रिप्लेसमेंट।


Q. 168245 अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र के महत्व को समझाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) एक कम दबाव क्षेत्र है, भूमध्य रेखा पर स्थित है यह व्यापार हवाओं की एकाग्रता है, इसलिए यह एक क्षेत्र है जहां हवाऍ तेज गति से बहती है। जुलाई में अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र, (गंगा के मैदान के ऊपर) 20°-25° उत्तर अक्षांश के आसपास स्थित है, कभी- कभी इसे भी मानसूनी नदी भी कहा जाता है। इस मानसूनी नदी उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में थर्मल के कम विकास को प्रोत्साहित करती है। अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र के कारण, दक्षिणी गोलार्द्ध के व्यापार हवाऍ 40  डिग्री और 60 डिग्री पूर्व देशांतर के बीच भूमध्य रेखा को पार करती है। और कोरिओलिस बल के कारण दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व से बहाना शुरू करती है। सर्दियों में यह दक्षिण की ओर चला जाता है और इसलिए उत्तर-पूर्व से दक्षिण और दक्षिण पश्चिम में हवाओं में बदल जाता है।


Q. 168246 पवन उत्क्रमण के क्या कारण हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पवन उत्क्रमण के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

1. उच्च दबाव का क्षेत्र अरब सागर के ऊपर 20º दक्षिण में बनता है।

2. समुद्र के स्तर से ऊपर तिब्बती पठार से अधिक उच्च दबाव के क्षेत्र का गठन होता है।

3. उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट का पूर्वी जेट स्ट्रीम से।


Q. 168247 भारत का सबसे ठंडा हिस्सा कौनसा हैं और क्यों?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जम्मू और कश्मीर सहित हिमालय क्षेत्र  और हिमाचल प्रदेश भारत का सबसे ठंडा हिस्से हैं। इस तथ्य के कारण यह है कि यह जगह विशाल ऊंचाई पर स्थित है। इन क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होती है और सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से नीचे बना रहता है।


Q. 168248 पारंपरिक भारतीय मौसम क्या हैं
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मौसम

महीने (भारतीय कैलेंडर के अनुसार)

महीने (भारतीय कैलेंडर के अनुसार)

वसंत

चैत्र-वैशाख

मार्च-अप्रैल

ग्रीष्म

ज्येष्ठा -आषाढ़

मई-जून

वर्षा

श्रवण -भाद्र

जुलाई-अगस्त

शरद

अश्विन -कार्तिक

सितंबर-अक्टूबर

हेमंत

मृगशिरा-पुष्य

नवम्बर-दिसम्बर

शिशिर

माघ-फाल्गुन

जनवरी-फरवरी


Q. 168249 बरसात के मौसम की विशेषताओं का वर्णन करो।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

बरसात के मौसम की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1. उत्तरी मैदानों के ऊपर कम दबाव हवाऍ तेज होती है।

2. दक्षिण-पूर्व व्यापारिक हवाऍ दक्षिण-पश्चिमी दिशा से शुरू होकर दक्षिण-पश्चिम मानसून को लाती है।

3. बारिश और मानसून की स्थिति की उम्मीद जाती हैं।

4. वर्षा की मात्रा मानसून की आवाजाही को निर्धारित करती है या अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र  उत्तर से दक्षिण और इसके विपरीत भी।

5. बारिश की शुरुआत में कभी- कभी पूरे या देश के एक हिस्से से काफी अधिक देरी हो जाती है।

6. बारिश कभी-कभी सामान्य की तुलना में काफी पहले खत्म हो जाती है।


Q. 168250 चेन्नई में गर्मियों की तुलना में सर्दियों में अधिक बारिश क्यों होती है समझाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

चेन्नई या कोरोमंडल तट जो पश्चिमी घाट वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित है, वे (गर्मियों में) दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान ज्यादा वर्षा प्राप्त नहीं करते है। सर्दियों के मौसम में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर व्यापारिक हवाओं की जगह है और वे बंगाल की खाड़ी पार करते समय नम हो जाती है। ये पीछे हटती मानसूनी हवाऍ विशेष रूप से कोरोमंडल तट में चेन्नई के लिए इसलिए वर्षा करने वाली हवाऍ बन जाती है।


Q. 168251 भारत के मानचित्र पर वार्षिक वर्षा को दर्शाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

 


Q. 168252 भारत में वर्षा के असमान वितरण के कारणों पर चर्चा करें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत में वर्षा के असमान वितरण का कारण:

1. ऊंचाई और घने जंगलों के कारण भारी वर्षा पहाड़ी और वन क्षेत्रों में दर्ज की गई है जो वातावरण को ठंडा करने के लिए और वर्षाबूंदों को बरसने पर मजबूर करता है।

2.  ऊँचे पहाड़ों के बिना क्षेत्र मानसून के मौसम की बारिश के बादलों के टकराने की असफलता के कारण केवल अल्प वर्षा प्राप्त करते है।

3. हवाओं के रास्ते में वाले स्थानो पर अधिक वर्षा होती है। बारिश की छाया या हवा की अनुवात दिशा में कम वर्षा होती है।


Q. 168253 तमिलनाडु में सर्दियों के मौसम में बारिश क्यों होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

चेन्नई या कोरोमंडल तट जो पश्चिमी घाट वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित है, वे (गर्मियों में) दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान ज्यादा वर्षा प्राप्त नहीं करते है। सर्दियों के मौसम में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वोत्तर व्यापारिक हवाओं की जगह है और वे बंगाल की खाड़ी पार करते समय नम हो जाती है। ये पीछे हटती मानसूनी हवाऍ विशेष रूप से कोरोमंडल तट में चेन्नई के लिए इसलिए वर्षा करने वाली हवाऍ बन जाती है।


Q. 168254 पेडोजेनेसिस किसे कहा जाता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा निर्माण या गठन बहुत ही जटिल प्रक्रियाओं से होते हैं, मृदा विशारद के तहत इन प्रक्रियाओं को पेडोजेनेसिस कहा जाता है |


Q. 168255 किस मृदा में सोडियम का अनुपात अधिक होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मरुस्थली मृदा में सोडियम का अनुपात

अधिक होता है।


Q. 168256 भारत के किस राज्य में शुष्क मृदा पायी जाती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत के राजस्थान में शुष्क मृदा पायी जाती है|


Q. 168257 मृदा विज्ञान क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा विज्ञान में मृदा का अध्ययन एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में किया जाता है। इसके अन्तर्गत मृदानिर्माण, मृदा का वर्गीकरण, मृदा के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों का अध्ययन, उर्वरकता का अध्ययन आदि किया जाता है।


Q. 168258 मृदा में मुख्यतः कितनी संस्तर या क्षितिज दिखाई देते हैं? उनके नाम बताएं
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा में मुख्यतः 3 संस्तर या क्षितिज पाए जाते हैं | वे हैं :

1) ऊपरी खंड संस्तर

2) संक्रमण खंड संस्तर

3) जनक चट्टान


Q. 168259

  मृदा  क्या हैं मृदा  की प्रमुख घटक  के नाम बताएं <div class= A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पृथ्वी ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक मिश्रित कणों को मृदा या मृदा कहते हैं।

खनिज कण, ह्यूमस, जल तथा वायु मृदा के प्रमुख घटक होते हैं।


Q. 168260 किसी देश की कृषि का मुख्य आधार क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

देश की कृषि का मुख्य आधार उस देश की मृदा होती हैं|


Q. 168261 भारत के कौन सा परिषद् ने भारतीय मृदाओं को उनकी प्रकृति और गुणों के कितने वर्गों में वर्गीकृत किया हैं ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (;आई.सी.ए.आर) ने भारतीय मृदाओं को उनकी प्रकृति और गुणों के आधार पर 8 वर्गीकृत किया है।


Q. 168262 अवनालिका अपरदन क्या है? भारत में यह कहा पाया जाता हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अवनालिका अपरदन सामान्यतः तीव्र ढालों पर होता है। वर्षा से गहरी हुई अवनालिकाएँ कृषि भूमियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में खंडित कर देती हैं जिससे वे कृषि के लिए अनुपयुक्त हो जाती हैं। भारत में चंबल घाटी, अवनालिका अपरदन का एक मुख्य उदाहरण है।


Q. 168263 भारत के कितने प्रतिशत क्षेत्र में जलोढ़ मृदा पायी जाती हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत के लगभग 40% भाग में पाई जाती है | यह मृदा अत्यंत ऊपजाऊ है |


Q. 168264 जलोढ़ मृदा किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार कि होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह नदियों द्वारा लायी गयी मृदा है| इस मृदा में पोटाश की बहुलता होती है लेकिन नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है|

यह मृदा दो प्रकार की होती है : बांगर और खादर| पुरानी जलोढ़ मृदा को बांगर और नयी जलोढ़ मृदा को खादर कहा जाता है|


Q. 168265 लाल मृदा क्या हैं और कहाँ पाया जाती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

लाल मृदा का निर्माण जलवायु परिवर्तन की वजह से रवेदार और कायांतरित शैलों के विघटन और वियोजन से होता | इस मृदा का लाल रंग आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है, लेकिन जलयोजित रूप में यह पीली दिखाई देती है| इस मृदा में सिलिका और आयरन की बहुलता होती है| ये मृदा आमतौर पर छोटानागपुर पठार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में पायी जाती हैं।


Q. 168266 ह्यूमस कैसे बनते है? मृदा की उर्वरता को वृद्धि करने के लिए इस ह्यूमस का क्या महत्व है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

ह्यूमस एक जैविक पदार्थ होते हैं जो पौधों तथा वनस्पति के विघटन से बनती हैं| यह मृदा की उर्वरता को बढ़ाती है और मृदा को गहरे रंगों में बदलती है |


Q. 168267 रंग और संरचना के आधार पर भारत की मिट्टियों को वर्गीकृत करे
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

उत्पत्ति, रंग, संयोजन तथा अवस्थिति के आधार पर भारत की मिट्टियों को निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया गया हैः

        i.            जलोढ़ मृदाएँ

      ii.            काली मृदाएँ

    iii.            लाल और पीली मृदाएँ

    iv.            लैटेराइट मृदाएँ

      v.            शुष्क मृदाएँ

    vi.            लवण मृदाएँ

  vii.            पीटमय मृदाएँ

viii.            वन मृदाएँ


Q. 168268 डेक्कन लावा से किस प्रकार की मृदा का निर्माण होता है? इस मृदा के दो प्रमुख विशेषताओं की उल्लेख करों।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

काली मृदा डेक्कन लावा से प्राप्त होती  है। मृदा के इस प्रकार के दो महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं:
1) यह आम तौर पर, चिकनी, गहरी और अप्रवेश्य होता है।
2) यह मृदा चूना, लोहा, मैग्नीशियम, पोटाश और एल्यूमीनियम से बने होते हैं, लेकिन फास्फोरस, नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं ।


Q. 168269 आई.सी.ए.आर. ने यू.एस.डी.ए. मृदा वर्गीकरण के अनुसार भारत की मिट्टियों को किन किन क्रम में वर्गीकृत किया है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

आई.सी.ए.आर. ने यू.एस.डी.ए. मृदा वर्गीकरण के अनुसार भारत की मिट्टियों को निम्नलिखित

क्रम में वर्गीकृत किया है।


Q. 168270 मृदा का विभिन्न संस्तर या क्षितिज के बारे में संक्षेप में चर्चा करें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा तीन अलग स्तरों में समाविष्ट होती हैं, जिसे क्षितिज कहा जाते हैं:
क संस्तर: यह मृदा का सबसे उपरी स्तर है, जहां पौधों के विकास के लिए आवश्यक जैविक सामग्री, खनिज पदार्थ, पोषक तत्वों और पानी पर्याप्त मात्रा में रहते है।

ख संस्तर: संस्तर संस्तर तथा संस्तर के बीच संक्रमण खंड होता है जिसे नीचे व ऊपर दोनों से पदार्थ प्राप्त होते हैं। इसमें कुछ जैव पदार्थ होते हैं तथापि खनिज पदार्थ का अपक्षय स्पष्ट नजर आता है।

संस्तर: इस संस्तर की रचना ढीली जनक सामग्री से होता है। यह परत मृदा निर्माण की प्रक्रिया में प्रथम अवस्था होती है और अंततः ऊपर की दो परतें इसी से बनती है।


Q. 168271

  रेगुर  मृदा और लैटेराइट  मृदा के बीच  अंतर बताएं<div class= A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

 रेगुर मृदा

लैटेराइट मृदा

1. यह मृदा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा  से बनती हैं |

1. इसका निर्माण मानसूनी जलवायु की आर्द्रता और शुष्कता के क्रमिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न विशिष्ट परिस्थितियों में होता है.

 2. नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की उपस्थिति के कारण, इस मृदा का रंग काला होता हैं|

लौह-ऑक्साइड और पोटाश की उपस्थिति के कारण,  इस मृदा का रंग लाल होता हैं|

3. यह मृदा कपास की खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त होती है |

2. यह मिटटी उपजाऊ नही हैं पर फिर भी केरल में काजू इस मृदा में उगाई जाती हैं|

4. यह मृदा महाराष्ट्र के 'दक्कन ट्रॅप' क्षेत्र में पाए जाते हैं |

3. यह मृदा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में पायी जाती हैं|


Q. 168272 मृदा उर्वरता को बढ़ाने के लिए किन-किन उपायों को अपनाया जाता हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा उर्वरता, मृदा में पर्याप्त मात्रा में ह्यूमस तथा पोषक तत्वों के उपस्थिति को संदर्भित करता है| मृदा में उर्वरता में वृद्धि करने के लिए निम्न उपायों को अपनाया जाता हैं:

        i.            प्राकृतिक उपाय:

a)      शस्यावर्तन करना

b)      फसलों के संयोजन करना

c)      भूमि को बंजर छोड़ना

 

      ii.            अ-प्राकृतिक तरीके:

 

a)      खाद और उर्वरकों को इस्तेमाल करके

a)      वनस्पति और पशु अपशिष्ट पदार्थों का विघटन

b)      रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल


Q. 168273 मृदा निर्माण में जनक सामग्री की क्या भूमिका है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा निर्माण में जनक सामग्री की भूमिका को निम्नलिखित आधार पर विचार किया जाता हैं:  

1. रंग: मृदा लावा द्वारा गठित होने से काले  रंग की होती है। जबकि मृदा में लोह तत्व की उपस्थिति होने से लाल रंग का होती हैं। नदी घाटी में पाए गए मृदा भूरे रंग का होता है।

2. प्रजनन क्षमता: इसकी आधार पर मृदा उपजाऊ और अनुप्जाऊ होते हैं | मैदानों के जलोढ़ मृदा उपजाऊ माना जाता है, जबकि डेक्कन पठार के लेटराइट और पीले रंग की मृदा की उर्वरता बहुत कम होते हैं।


3. कण: इसकी आधार पर मृदा उपजाऊ और अनुउपजाऊ होते हैं | जलोढ़ मृदा बहुत महीन कणों वाले होते हैं जबकि दक्षिण के पठार की मृदा उनके जनक चट्टान के  कारण, मोटे कणों वाली होती हैं।


Q. 168274 समोच्च जुताई क्या हैं? हम कैसे मिटटी को क्षय होने से रोक सकते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समोच्च जुताई: इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कृषि कार्य जैसे बुआई, जुताई, भूपरिष्करण, खरपतवार नियंत्रण इत्यादि समोच्च रेखा पर किये जाते हैं | अर्थात इन कार्यों की दिशा खेत के ढाल के समानांतर न होकर लम्बवत होती है जिससे मृदा अपरदन में कमी आती है|

मृदा क्षय: यह अत्यधिक और अनुचित भूमि उपयोग के कारण जमीन की उर्वरता कम होने को संदर्भित करते हैं | हम निम्न कुछ तकनीकों से, मृदा की ये क्षय को रोक सकते हैं:
1. भूमि बंजर रखना
2. शस्यावर्तन करना
3. फसलों का संयोजन करना


Q. 168275 जलोढ़ मृदा और काली मृदा के बीच अंतर बताएं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जलोढ़ मृदा

काली मृदा

1. यह नदियों द्वारा लायी गयी मृदा है |

1. ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा  से बनी होती हैं|

2. यह मृदा सभी खरीफ और रबी फसलों के लिए उपयोगी हैं|

 2. यह मृदा कपास की खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त होती है

3. इस मृदा में पोटाश की बहुलता होती है, लेकिन नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है|

3.  इसमें आयरन, चूना, एल्युमीनियम जीवांश और मैग्नीशियम की बहुलता होती है|

 


Q. 168276 यह

  काली  मृदा की प्रमुख  विशेषताओं को  दर्शाएँ <div class= A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह मृदा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा  से बनी ये काली  मिटटी, भारत में लगभग 5 लाख वर्ग-किमी. क्षेत्रों में फैली है | इस मृदा में निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं पाये जाते हैं:

·         इसका निर्माण बेसाल्ट चट्टानों के टूटने-फूटने से होता है|

·         इसमें आयरन, चूना, एल्युमीनियम जीवांश और मैग्नीशियम की बहुलता होती है|

·         इस मृदा का काला रंग टिटेनीफेरस मैग्नेटाइट और जीवांश (ह्यूमस) की उपस्थिति के कारण होता है|

·         इस मृदा को रेगुर मृदा के नाम से भी जाना जाता है|

·         काली मृदा कपास की खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त होती है इसलिए इसे काली कपास की मृदा भी कहा जाता है|

·         इस मृदा की अन्य फसलों में गन्ना, केला, ज्वार, तंबाकू, रेंड़ी, मूँगफली और सोयाबीन आदि उगाई जाती है|


Q. 168277 भारत के मानचित्रों पर भारत के मृदा के प्रमुख प्रकारों को दर्शाएँ
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Description: Description: Description: Bharat-mrida.jpg 


Q. 168278 भारत के प्रमुख मृदा के बारे में विस्तृत वर्णन करे
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

उत्पत्तिए रंग, संयोजन तथा अवस्थिति के आधार पर भारत की मिट्टियों को निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया गया हैः

जलोढ़ मृदाएँ : उत्तर के विस्तृत मैदान तथा प्रायद्वीपीय भारत के तटीय मैदानों में मिलती है। यह अत्यंत ऊपजाऊ है  यह भारत के लगभग 40% भाग में पाई जाती है| यह मृदा सतलज, गंगा,यमुना, घाघरा,गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाई जाती है | इस मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और वनस्पति अंशों की कमी पाई जाती है |  इस मृदा की प्रमुख फसलें खरीफ और रबी जैसे-दालें, कपास, तिलहन, गन्ना और गंगा-ब्रह्मपुत्र घाटी में जूट प्रमुख से उगाया जाता है| भांभर और तराई क्षेत्रों में पुरातन जलोढ़, डेल्टाई भागों नवीनतम जलोढ़, मध्य घाटी में नवीन जलोढ़ मृदा पाई जाती है| पुरातन जलोढ़ मृदा के क्षेत्र को भांभर और नवीन जलोढ़ मृदा के क्षेत्र  को खादर  कहा जाता है|

 

काली मृदाएँ : यह मृदा ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा  से बनती है| भारत में यह लगभग 5 लाख वर्ग-किमी. में फैली है | महाराष्ट्र में इस मृदा का सबसे अधिक विस्तार है इस मृदा में चूना, पोटाश, मैग्निशियम, एल्यूमिना और लोहा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है|  यह बहुत ही उपजाऊ मिटटी है। इस मृदा की मुख्य फसल कपास है और अन्य फसलों में गन्ना, केला, ज्वार, तंबाकूमूँगफली और सोयाबीन आदि उगाई जाती है|

 

लाल मृदा : लाल मृदा का विकास दक्कन के पठार के पूर्वी तथा दक्षिणी भाग में कम वर्षा वाले उन क्षेत्रों में हुआ है, जहाँ रवेदार आग्नेय चट्टानें पाई जाती हैं।

पीली और लाल मृदाएँ : ये ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के कुछ भागों और मध्य गंगा के मैदान के दक्षिणी भागों में पाई जाती है। इस मृदा का लाल रंग रवेदार तथा कायांतरित चट्टानें लोह के व्यापक विसरण के कारण होता है। जलयोजित होने के कारण यह पीली दिखाई पड़ती है। महीने कणों वाली लाल और पीली मृदाएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं । इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फाँस्पफोरस और ह्यूमस की कमी होती है।

लैटेराइट मृदाएँ:  लैटेराइट मृदाएँ उच्च तापमान और भारी वर्षा के क्षेत्रों में विकसित होती हैं | ये मृदाएँ उष्ण कटिबंधीय वर्षा के कारण हुए तीव्र निक्षालन का परिणाम हैं| इन मृदाओं में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फाँस्फेट और कैल्सियम की कमी होती है तथा लौह-ऑक्साइड और पोटाश की अधिकता होती है। फसलों के लिए उपजाऊ बनाने के लिए इन मृदाओं में खाद और उर्वरकों की भारी मात्रा डालनी पड़ती है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल लैटेराइट मृदाएँ पायी जाती हैं |

शुष्क मृदाएँ : यह मृदा शुष्क और अर्धशुष्क प्रदेशों जैसे - पश्चिमी राजस्थान और अरावली पर्वत के क्षेत्रों, उत्तरी गुजरात, दक्षिणी हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाई जाती है| सिंचाई के सहारे गेंहू, गन्ना, कपास, ज्वार, बाजरा  उगाये जाते हैं| जहाँ सिंचाई की सुविधा नहीं है वहाँ यह भूमि बंजर पाई जाती है|

लवण मृदाएँ : शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों, दलदली व अधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में यह मृदा पाई जाती है|  शुष्क भागों में अधिक सिंचाई के कारण एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल-प्रवाह दोषपूर्ण होने एवं जलरेखा उपर-नीचे होने के कारण इस मृदा का जन्म होता है| इस प्रकार की मृदा में भूमि की निचली परतों से क्षार या लवण वाष्पीकरण द्वारा उपरी परतों तक आ जाते हैं| इस मृदा में सोडियम, कैल्सियम और मैग्निशियम की मात्रा अधिक पायी जाने से प्रायः यह मृदा अनुत्पादक हो जाती है|

पीटमय मृदाएँ : इस मृदा में ज़्यादातर जैविक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं| यह सामान्यतः आद्रप्रदेशों में मिलती है| दलदली मृदा ओडिशा के तटीय भागों, सुंदरवन के डेल्टाई क्षेत्रों, बिहार के मध्यवर्ती क्षेत्रों, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी एवं केरल के तटों पर पाई जाती है |

 

वन मृदाएँ : इन मृदाओं का निर्माण पर्वतीय पर्यावरण में होता है। इस पर्यावरण में परिवर्तन के अनुसार मृदाओं का गठन और संरचना बदलती रहती हैं। हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों में ये अम्लीय और कम ह्यूमस वाली होती हैं, जबकि निचली घाटियों में पाई जाने वाली मृदाएँ उर्वर होती है|


Q. 168279

  मृदा  संरक्षण के बारे  में संक्षेप में  लिखे <div class= A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा संरक्षण, ऐसी एक प्रबंधन परिकल्पना हैं जो पृथ्वी की सतह से मृदा को अपरदित होने से या लवणीकृत, अम्लीकरण, या अन्य रासायनिक संदूषण से रोकती हैं।

निम्नलिखित उपायों से मृदा को संरक्षित कर सकते हैं :

वृक्षारोपण: नदी घाटियों, बंजर भूमियों तथा पहाड़ी ढालों पर वृक्ष लगाने से इन प्रदेशों में मृदा का अपरदन कम हो जाता हैं। मरूस्थलीय सीमान्त क्षेत्रों में पवन-अपरदन को नियंत्रित करने के लिए यह एक प्रभावी उपाय है। भारत के कुछ क्षेत्रों जैसे शिवालिक पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकने के लिए पुनःबनीकरण या वृक्षारोपण जरुरी है|

नियोजित चराई: पहाड़ी ढालों पर मवेशियों की संख्या और चराई की वहन क्षमता के अनुसार होना चाहिए। अत्यधिक चराई से पहाड़ी ढालों की मृदा ढीली हो जाती है और जल इन ढीली मृदा को आसानी से बहा ले जाता है। इन क्षेत्रों में नियोजित चराई से वनस्पति के आवरण के बचाया जा सकता है।  इस प्रकार इन क्षेत्रों के मृदा अपरदन को निम्न प्रकार से कम किया जा सकता है।

सीढ़ीदार कृषि: पर्वतीय प्रदेशों में खेती के लिए ढलान के आर-पार समतल चबूतरे या सीढ़ी बनाये जाते हैं, और इसी तरह, वर्षा जल के प्रवाह को धीमा किया जाता है |

नदी बांध : नदियों में आयी बाढ़ को नियंत्रित करने और मृदा का अपरदन को रोकने के लिए नदी बांध बनाये जाते है| इससे मृदा की उवर्रता, साथ ही जल संसाधनों के संरक्षण तथा भूमि को समतल करने में भी सहायता मिलती है।

समोच्च जुताई: इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कृषि कार्य जैसे बुआई, जुताई, भूपरिष्करण, खरपतवार नियंत्रण इत्यादि समोच्च रेखा पर किये जाते हैं| अर्थात इन कार्यों की दिशा खेत के ढाल के समानांतर न होकर लम्बवत होती है जिससे मृदा अपरदन में कमी आती है|

शस्यावर्तन: शस्यावर्तन के द्वारा ऐसे खेतों की उर्वरता भी बनी रहती है, जिनमें लगातार कोई कोई फसल की खेती होती है। यह विधि उन क्षेत्रों के लिए उपर्युक्त है, जहाँ जनसंख्या के दबाव के कारण खेती के लिए भूमि कम रह गई है।  

अन्य तरीकों: भारी बारिश के क्षेत्रों में, द्रोणी कृषि अपनाया जाना चाहिए। तेज हवाओं के क्षेत्रों में हवारोधी तथा वातरोधी बेल्ट के रूप में लंबे पेड़ लगाना चाहिए।


Q. 168280 मृदा अपरद

   मृदा  अपरदन के कारकों  का वर्णन करे <div class= A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा अपरदन के प्रमुख कारकों में शामिल हैं:

खड़ी ढलान: खड़ी ढलान बहते पानी का वेग को प्रभावित करते हैं। खड़ी ढलान पर, मृदा का कटाव की तीव्रता बढ़ जाती है।
मूसलाधार वर्षा: भारी वर्षा मृदा के कणों को ढीला कर देती है और मृदा को खोदके बाहर ले आती है, और इसी तरह अवनाली या अवनालों का निर्माण होता है ।

तेज हवायें : हवाओं और धूल भरे तूफान शुष्क क्षेत्रों में मृदा को दूर तक उड़ा ले जाते है।

अति चराई: अधिक चराई के कारण, वनस्पति के पतली पर्त पशुओं द्वारा नष्ट हो जाती है।
अत्यधिक खेती: सश्यावर्तन मृदा की उर्वरता बनाए रखता है। लेकिन अधिक फसल उगाना और स्थानांतर कृषि मृदा की उर्वरता को कम करके उसे बांझ बना देता है।
वनों की कटाई: वनों की कटाई तथा वन आवरण को हटाने का मतलब सतह के उस क्षेत्र में मृदा अपरदन को बढ़ावा देता है | पेड़ों की अंधाधुंध काटना भी मृदा अपरदन का एक मुख्य कारण है| भारत के शिवालिक पहाड़ियों में यह अपरदन मुख्य है| मनुष्य के द्वारा खेती के अवैज्ञानिक तरीकों एवं भूमि का दुरुपयोग, या विरूपण आदि मृदा अपरदन के लिए उत्तरदायी है।


Q. 168281 मृदा अपरदन क्या है? यह कितने प्रकार का होता हैं? मृदा अपरदन को रोकने के लिए किन किन उपायों को अपनाया जाता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समुद्र धाराओं, हवा, पानी, या बर्फ आदि द्वारा मृदा एवं चट्टानों का विस्थापन को ही मृदा अपरदन कहलाता हैं |

मृदा का कटाव या मृदा अपरदन के दो प्रकार हैं : वे हैं: परत अपरदन और अवनालिका अपरदन

परत अपरदन: यह अपरदन समतल भूमियों पर मूसलाधार वर्षा के बाद होता है और इसमें मृदा का हटना आसानी से दिखाई भी नहीं देता, किंतु यह अधिक हानिकारक है क्योंकि इससे मिटटी की सूक्ष्म और अधिक उर्वर ऊपरी परत हट जाती है।

अवनालिका अपरदन: यह अपरदन सामान्यतः तीव्र ढालों पर होता है। वर्षा से गहरी हुई अवनालिकाएँ कृषि भूमियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में खंडित कर देती हैं जिससे वे कृषि के लिए अनुपयुक्त हो जाती हैं। भारत में चंबल नदी घाटी, अवनालिका अपरदन का एक मुख्य उदाहरण है।

मृदा संरक्षण के उपाय: मृदा एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जो प्रतिनियत प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपरदित हो रही है |  इसलिए इसके संरक्षण आवश्यक है। इसे निमोक्त तरीके से संरक्षित कर सकते हैं:
 

  1. वनीकरण, पुनःवनीकरण और अंधाधुंध वनों की कटाई पर रोक।
  2. अत्यधिक चराई पर नियंत्रण।
  3. खेती से पहले पहाड़ी ढलानों को सीढ़ीदार करना|
  4. समोच्च जुताई को अपनाना।
  5. ढलानों के तरफ बांध का निर्माण।
  6. शुष्क क्षेत्रों में मृदा की नमी को नियंत्रण करने के लिए पट्टी फसलों की उत्पाद  


Q. 168282 मृदा क्या हैं? मृदा निर्माण तथा पेदोजेनिसिस को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन करों
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मृदा शैल, मलवा और जैव सामग्री का सम्मिश्रण होती है जो पृथ्वी की सतह पर विकसित होते हैं। मृदा निर्माण तथा पेदोजेनिसिस को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों  में शामिल हैं : जनक सामग्री, उच्चावच, जलवायु, वनस्पति तथा अन्य जीव रूप और समय।

  • जनक सामग्री: जनक चट्टान की संरचना और बनावट मृदा के गठन के लिए एक महत्वपूर्ण कारक हैं|  मृदा मुख्यतः जनक सामग्री तथा जनक चट्टान के अपक्षय की प्रक्रिया के द्वारा बनती हैं
  • उच्चावच: भूमि की ढलान उसकी गहराई और उर्वरता की मात्रा को निर्धारित करता है। अगर, भूमि की ढलान खड़ी है, तो मृदा की परत पतली और कम उपजाऊ होंगे । दूसरी ओर, यदि ढलान कम है तो मृदा की परत गहरी और समृद्ध तथा अधिक उपजाऊ होंगी ।
  • जलवायु: जलवायु के तत्व जैसे तापमान और वर्षा, मृदा निर्माण में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं | जलवायु, पानी के रिसाव की मात्रा और वहाँ मौजूद सूक्ष्म जीव भी जनक चट्टान के अपक्षय की मात्रा को प्रभावित करते हैं|
  • प्राकृतिक वनस्पति: वनस्पति बड़ी मात्रा में विघटित होकर मृदा में  ह्यूमस की मात्रा को बढाते हैं | देश की घनी वन क्षेत्रों में सबसे अच्छी मृदा पायी जाती हैं।


Q. 168283 सबसे अप्रत्याशित और अत्यधिक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा :


A.

ज्वालामुखी है।

B.

भूकंप है।

C.

बाढ़ है।

D.

उष्णकटिबंधीय चक्रवात है।

Right Answer is: B

SOLUTION

भूकंप सबसे ज्यादा अपूर्वसूचनीय और विध्वंसक प्राकृतिक आपदा है। भूकंपों की उत्पत्ति विवर्तनिकी से सम्बंधित है। ये विध्वंसक होते है और विस्तृत क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। भूकंप पृथ्वी की ऊपरी सतह में विवर्तनिक गतिविधियों से निकली ऊर्जा से पैदा होते हैं। ये न सिर्फ बस्तियों, बुनियादी ढाँचे, परिवहन व संचार व्यवस्था, उद्योग और अन्य विकासशील क्रियाओं को ध्वस्त करता है, अपितु लोगों के पीढ़ियों से संचित पदार्थ और सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत भी नष्ट कर देता है।


Q. 168284 मौसमविज्ञान संबंधी सूखा:


A.

अपर्याप्त वर्षा की लम्बी अवधि होती है।

B.

निम्न मृदा आर्द्रता होती है।

C.

विभिन्न जल संग्रहण, जलाशय, जलभूत और झीलों इत्यादि का स्तर वृष्टि द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति के बाद भी नीचे गिरना होता है।

D.

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता होती है।

Right Answer is: A

SOLUTION

यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक अपर्याप्त वर्षा होती है और इसका सामयिक और स्थानिक वितरण भी असंतुलित होता है।


Q. 168285 भारत में सबसे अधिक उष्णकटिबंधीय चक्रवात :


A.

आंतरिक हिस्सों में आते हैं।

B.

तट के निकट आते हैं।

C.

दक्कन ट्रैप में आते हैं।

D.

उत्तरी भाग में आते हैं।

Right Answer is: B

SOLUTION

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की आवृत्ति देश के भीतरी हिस्सों की ओर तट से कम होती जाती है।


Q. 168286 सबसे विनाशकारी विशाल लहरें :


A.

ज्वारीय लहरें होती हैं।

B.

महासागरीय धाराएँ होती हैं।

C.

सुनामी लहरें होती हैं।

D.

चक्रवाती लहरें होती हैं।

Right Answer is: C

SOLUTION

सबसे विनाशकारी विशाल लहरें सुनामी लहरें होती हैं। सुनामी आमतौर पर प्रशांत महासागरीय तट पर, जिसमें अलास्का, जापान, फिलिपाइन, दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे द्वीप, इंडोनेशिया और मलेशिया तथा हिन्द महासागर में म्यांमार, श्रीलंका और भारत के तटीय भागों में आती है।


Q. 168287 आपदा प्रबंधन पर विश्व सम्मेलन का आयोजन:


A.

योकोहामा में हुआ था।

B.

शंघाई में हुआ था।

C.

फुकेत में हुआ था।

D.

चेन्नई में हुआ था।

Right Answer is: A

SOLUTION

मई 1994 में यॉकोहामा, जापान में आपदा प्रबंध पर विश्व संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में 'यॉकोहामा रणनीति तथा सुरक्षित संसार के लिए कार्य योजना' को अपनाया गया था।


Q. 168288 एक विनाशकारी सुनामी :


A.

25 जनवरी 2004 को आई।

B.

26 दिसंबर 2004 को आई।

C.

25 दिसंबर 2005 को आई।

D.

24 दिसंबर 2003 को आई।

Right Answer is: B

SOLUTION

इस सुनामी का आरम्भ इंडोनेशिया से हुआ और इसका विस्तार क्षेत्र सम्पूर्ण हिन्द महासागर था जिसके कारण भारत सहित दुनिया के कई देशों में भारी तबाही हुई। इस आपदा में तीन लाख से भी ज़्यादा लोगों की जान गई।


Q. 168289 प्राकृतिक संकट :


A.

प्राकृतिक घटना के कारण आने वाला संकट है।

B.

मानव गतिविधियों के कारण आने वाला संकट है।

C.

मंद परिवर्तन के कारण आता है।

D.

तीव्र परिवर्तन के कारण आता है।

Right Answer is: A

SOLUTION

प्राकृतिक संकट प्राकृतिक घटना के कारण आने वाला संकट है।


Q. 168290 सुनामी के आने का कारण :


A.

वर्षा होती है।

B.

भूकंप होता है।

C.

आँधी-तूफान होता है।

D.

उच्च ज्वार होता है।

Right Answer is: B

SOLUTION

जब भूकंप आता है या ज्वालामुखी विस्फोट होता है तब सुनामी आती है।


Q. 168291 इनमें से किस नदी में मजौली नदीय द्वीप स्थित है?


A.

गंगा

B.

बह्मपुत्र

C.

गोदावरी

D.

सिंधु

Right Answer is: B

SOLUTION

मजौली नदीय द्वीप बह्मपुत्र नदी में स्थित है। यह द्वीप विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप है।


Q. 168292 तूफान महोर्मि :


A.

भूकंप के कारण उत्पन्न होता है।

B.

ज्वालामुखी के कारण उत्पन्न होता है।

C.

तूफान के कारण उत्पन्न होता है।

D.

पृथ्वी के घूर्णन के कारण होता है।

Right Answer is: C

SOLUTION

तूफान महोर्मि तटीय बाढ़ या सुनामी जैसे बढ़ते जल की घटना होती है जो आमतौर पर मौसम की कम दबाव प्रणाली के साथ जुड़ी होती है। यह तूफान के कारण उत्पन्न होता है।    


Q. 168293 प्राकृतिक आपदाएँ :


A.

संकट की तुलना में अपेक्षाकृत कम तीव्रता वाली होती हैं।

B.

संकट की तुलना में अपेक्षाकृत आकस्मिक और बड़े पैमाने पर आपदा का कारण बनती है।

C.

अपेक्षाकृत छोटे पैमाने पर होती हैं।

D.

बिना किसी नुकसान वाली आपदा होती हैं।

Right Answer is: B

SOLUTION

प्राकृतिक आपदाएँ संकट की तुलना में अपेक्षाकृत आकस्मिक और बड़े पैमाने पर आपदा का कारण बनती हैं।


Q. 168294 सर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना कब और क्यों की गयी थी? सर्वे ऑफ इंडिया का वर्तमान कार्य क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सर्वे ऑफ इंडिया 1767 में स्थापित किया गया था। इसे पूरे देश के अप-टू-डेट नक्शे को तैयार करने हेतु गहन स्थलाकृतिक सर्वेक्षण शुरू करने के लिए स्थापित किया गया था। सर्वे ऑफ इंडिया पूरे देश के लिए विभिन्न पैमाने पर नक्शे का निर्माण करता है। यह पूरे देश के स्थलाकृतिक मानचित्रण का 1: 250000, 1: 50000 और 1: 25000 पैमाने पर उत्तरदायित्व लेता है।

 


Q. 168295 नीचे दिए गए उपकरणों को पहचानें और प्रत्येक का उपयोग भी बताए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

a. रोटामीटर: इसे नक्शे की सतह पर दूरी को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।

 

b. कम्पास: इसे दिशा निर्धारित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।


Q. 168296 दुनिया ने प्राचीन भारत की कल्पना कैसे थी?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

महाभारत के दौर में दुनिया के पानी से घिरा हुआ होने की कल्पना की थी। प्राचीन भारतीय विद्वानों ने दुनिया को सात 'द्वीपों' में विभाजित माना है। ये पुष्कर द्वीप, जम्बू द्वीप, साका द्वीप, शाल्मली द्वीप, प्लास्का द्वीप, कुसा द्वीप, और क्रौसा द्वीप, हैं।


Q. 168297 एटलस मानचित्र पर एक टिप्पणी लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एटलस मानचित्र दुनिया एक घिरे रूप में महाद्वीपों और देशों के नक्शो का संग्रह हैं। ये बहुत छोटे पैमाने के नक्शे हैं। ये मानचित्र काफी बड़े क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और वर्तमान की अत्यधिक सामान्यीकृत भौतिक या सांस्कृतिक विशेषताओ की तस्वीर को दर्शाता है। एटलस में नक्शे आमतौर पर रंगो द्वारा मुद्रित होते हैं और भूमि के उच्चावच को विभिन्न परतो द्वारा रंग से दिखाया जाता है। परम्परागत संकेत और प्रतीकों का उपयोग प्राकृतिक और मानव निर्मित विशेषताओ को दर्शाने के लिए किया जाता हैं। यहाँ तक कि स्थानों के नाम के अक्षरो की शैली और आकार बहुत अधिक जानकारी देते है। बड़ा स्थानों के नाम के लिए बड़े अक्षरों और बोल्ड प्रिंट का उपयोग किया जाता हैं और छोटे शहरों में छोटे प्रिंट से उनका नाम लिखा जाता है।


Q. 168298 आधुनिक काल में नक्शा बनाने की कला में सुधार करने के लिए बनाये गए घटनाक्रम क्या थे?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

निम्नलिखित घटनाक्रम की वजह से कला और नक्शा बनाने के विज्ञान के प्रारंभिक आधुनिक काल में पुनर्जिवित किया गया था:

(i) एक समतल सतह पर चापान्तर के परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए व्यापक प्रयास।

(ii) नक्शे वास्तविक निर्देश, सही दूरी और सही ढंग से क्षेत्र को मापने के लिए विभिन्न अनुमानों पर तैयार किये जाते है।

(iii) एरियल फोटोग्राफी सर्वेक्षण की जमीन पर विधि पूरक और नक्शा बनाने को प्रेरित करती है।


Q. 168299 1:50,000 अर्थ है कि :


A.

1 किलोमीटर, 50,000 किलोमीटर को व्यक्त करता है।

B.

1 मील, 50,000 मील को व्यक्त करता है।

C.

मानचित्र की 1 इकाई धरातल पर 50,000 इकाई को व्यक्त करती है।

D.

1 इंच 50,000 इंच को व्यक्त करती है।

Right Answer is: C

SOLUTION

1: 50,000 निरूपक भिन्न मापनी है। यह मानचित्र पर दी गई दूरी तथा धरातल पर उन्हीं दूरियों के बीच के संबंध को व्यक्त करती है।


Q. 168300 प्रकथन मापनी तथा आलेखी मापनी की आम समस्या:


A.

मानचित्र को घटाने या बढ़ाने पर मापनी परिवर्तित हो जाती है।

B.

समझने में कठिन है।

C.

यह विधियां केवल उन्हीं के लिए उपयुक्त है, जो मापनी में प्रयुक्त विशिष्ट इकाई से परिचित हों।

D.

माप की सभी प्रणालियों में प्रयोग नहीं की जा सकती है।

Right Answer is: C

SOLUTION

प्रकथन मापनी तथा आलेखी मापनी में माप की दोनों प्रणालियों की इकाइयाँ दी जा सकती हैं। जो लोग माप की एक प्रणाली से परिचित हैं , हो सकता है कि दूसरी माप प्रणाली में दिए गए मापनी के प्रकथन को न समझ सकते हों। ये  विधियां केवल उन्हीं के लिए उपयुक्त है, जो मापनी में प्रयुक्त विशिष्ट इकाई से परिचित हों।


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