तुल्यकाली उपग्रह से मौसम से संबंधित अंतरिक्ष-आधारित सूचनाएँ प्राप्त होती हैं |
भारतीय मौसम विभाग (आई.एम.डी) की स्थापना 1875 में की गई थी, जिसका मुख्यालय कलकत्ता में था।
विश्व मौसम विज्ञान संस्थान, दिन के एक निश्चित समय पर मौसम संबंधी प्रेक्षणों को अवलोकित तथा अभिलिखित करता है |
हवा के वजन समय और जगह के साथ लगातार परिवर्तित होता है। यह परिवर्तन हवा के निरंतर गतिशीलता, उसकी परिवर्तित तापमान और उसमे उपस्थित जलीय वाष्प की मात्रा में भिन्नता - इस परिवर्तन की कारण है।
वर्तमान में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय नई दिल्ली के विज्ञानं भवन में स्थित है |
पूरे विश्व में इन वेधशालाओं में अवलोकन सामान्यतः आठ प्रेक्षण घंटों 00, 03, 06, 09, 12,15, 18, 21; ग्रिनिच माध्य समयद्ध पर लिए जाते हैं। लेकिन व्यावहारिक कारणों से कुछ वेधशालाएँ केवल दिन के समय सीमित संख्या में दैनिक ऊपरी वायु प्रेक्षण ही लेती हैं।
जिस मानचित्र के द्वारा पृथ्वी या उसके किसी भाग के मौसमी परिघटनाओं को समतल धरातल पर प्रदर्शित किये जाते है, उसे मौसम मानचित्र कहा जाता है।
निर्द्रव वायुदाबमापी यंत्र से वायुदाब को स्वचालित रूप से अभिलिखित किया जाता है |
वायु या हवा के वेग को मापने के लिए पवन-वेगमापी या एनीमोमीटर का उपयोग होता है।
मौसम चार्ट वह चार्ट हैं, जो एक निश्चित समय पर और एक विस्तारित क्षेत्र पर मौसम के सभी या प्रमुख तत्वों को प्रदर्शित करने के लिए मौसम चिन्हों का प्रयोग किया करते है|
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा मौसम सबंधी परिघटनाओं के संख्या तथा तत्वों का अभिलेखन एवं जाँच किया जाता है |
निर्द्रव वायुदाबमापी में कोई तरल पदार्थ प्रयोग नहीं होता है। जबकि पारद वायुदाबमापी में, पारे का प्रयोग किया जाता है ।
मौसम तत्वों कुछ प्रतीकों की मदद से मौसम के मानचित्र पर दिखाया जाता है। ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं और मौसम प्रतीकों के नाम से जाना जाता है। अलग-अलग मौसम की घटनाएं इन प्रतीकों की मदद से पहचानी जा सकती है। जैसे की -
1. वायुदाब: एक जगह का वायुमंडलीय दबाव के प्रतिरूप को समदाब रेखाओं के द्वारा दर्शाया जाता है।
2. तापमान: किसी भी जगह का तापमान दिखाने के लिए समताप रेखाओं का उपयोग किया जाता है।
3. हवा: हवाओं के वेग और दिशा को तीर द्वारा दिखाया जाता है। इस पद्धति को सन 1806 में एडमिरल ब्यूफोर्ट द्वारा तैयार किया गया था और ब्यूफोर्ट पैमाने के नाम में जाना जाता है।
4. मेघ: मेघ या मेघों की मात्रा एवं उसकी प्रकृति को दर्शाने के लिए वृत्त का उपयोग किया जाता है |
5. वर्षा: वर्षा और अन्य वायुमंडलीय घटना को दिखाने के लिए कुछ प्रतीकों और अक्षरों का उपयोग किया जाता है।
91वां संविधान संशोधन मंत्रिमंडल के लिए लोकसभा या (राज्यों में विधानसभा) के कुल सदस्यों का 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होने को अनिवार्य करता है|
अनुच्छेद 361 के अनुसार, राष्ट्रपति या राज्य का राज्यपाल स्वयं के द्वारा किये जाने वाले किसी भी कार्य या अपनी शक्तियों के लिए किसी भी अदालत के लिए उत्तरदायी नहीं होगा|
भारत के संविधान का अनुच्छेद 80 भारत के राष्ट्रपति को राज्य सभा के लिए 12 सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार देता है|
अधिकारी वर्ग सिविल सेवकों और संबंधित अधिकारियों से मिलकर बनता है, इसलिए ये स्थायी कार्यकारी होते हैं|
स्विट्जरलैंड को बहु निदेशकों वाला राष्ट्र माना जाता है| इसकी कार्यकारी शक्ति संघीय परिषद में निहित है| इसमें सात सदस्य होते हैं, जो स्विस संसद द्वारा चुने जाते हैं|
भारत के संविधान के अनुच्छेद 74(1) में साफ शब्दों में यह कहा गया है कि ‘एक मंत्रिपरिषद होगा, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा और सहायता और सलाह के लिए उसका भी प्रमुख राष्ट्रपति होगा, जो सलाह के अनुसार कार्य करेगा|’
कुल संख्या का एक-छठवां हिस्सा राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है| ये वे सदस्य होते हैं, जिन्होंने कला, साहित्य और सामाजिक सेवा आदि के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किए होते हैं|
राज्यसभा के लिए केंद्रशासित प्रदेशों से चार सदस्यों का चुनाव किया जाता है| तीन सदस्य दिल्ली से और एक सदस्य पोंडिचेरी से चुना जाता है| अन्य केंद्रशासित प्रदेश राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं|
हाँ, संविधान के अनुच्छेद 71 के अनुसार, राष्ट्रपति या उप-राष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न होने वाले सभी विवाद और शंकाओं की जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाएगी और उसका निर्णय अंतिम होगा|
उप-राष्ट्रपति को राज्यसभा के ऐसे संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है जिसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित किया गया हो और जिसे लोकसभा की सहमति प्राप्त हो| उपराष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व नोटिस देना आवश्यक है|
उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत के सिद्धांत के अनुसार होता है। चुनाव ‘गुप्त मत पत्र’ के द्वारा होता है|
राष्ट्रपति संसद या राज्य की विधान सभा में से किसी का भी सदस्य नहीं होगा| यदि ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित होता है, तो उसे राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने से पूर्व ही उस पद से त्यागपत्र देना होगा|
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति यदि भारत का नागरिक नहीं है तो वह राष्ट्रपति पद की योग्यता नहीं रखता है| वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो| वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित किए जाने की योग्यता रखता हो| वह कोई भी सरकारी लाभ का पद धारण न करता हो|
हां, संविधान के अनुच्छेद 57 के अनुसार, राष्ट्रपति की दोबारा नियुक्ति हो सकती है|
राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्य करते हैं| इस निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के चुने गए सदस्य और राज्यों व दिल्ली और पोंडिचेरी के केंद्रशासित प्रदेशों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं|
शब्द ‘अधिकारी-वर्ग’ ‘ब्यूरो’ से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है- एक कार्यालय या एक पद| अधिकारी-वर्ग का संबंध सिविल सेवा की व्यवस्था से है, जहाँ आधिकारिक प्रशासन एक पदानुक्रमित पद्धति में विभाजित है| इन नौकरशाहों का प्रमुख कार्य सरकार के राजनीतिक नेताओं दवार लिए गए निर्णयों को लागू करना है|
यदि लोकसभा एक मंत्री या मंत्रिपरिषद के खिलाफ सरल बहुमत के साथ एक अविश्वास प्रस्ताव पास करता है, तो सरकार को इस्तीफा देना होगा| मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए सभी निर्णय सामूहिक निर्णय होते हैं, इसलिए सभी मंत्री जिम्मेदार होते हैं| इसे ही सामूहिक उत्तरदायित्व कहते हैं|
हाँ, ऐसा दो स्थितियों में हो सकता है| पहला, राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को संबोधित कर अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग कर सकता है| दूसरा, राष्ट्रपति को संविधान का अतिक्रमण करने पर महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा पद से हटाया जा सकता है|
संघीय कार्यकारी में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद शामिल होते हैं| भारत ने सरकार की संसदीय प्रणाली को अपनाया है, तो राष्ट्रपति के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर करना अनिवार्य हो जाता है|
उपग्रहों से क्रमवीक्षण करते हुए इसके द्वारा अभिलेखित किये जाने वाली पंक्तियों की लम्बाई को दृश्य क्षेत्र के रूप में जाना जाता है|
विश्लेषित सूचनाओं को विषयी मानचित्रों के भिन्न-भिन्न रूप में रेखांकित किया जा सकता है| मात्रात्मक मापन के विभिन्न आंकड़ों को सारणी के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है|
उपग्रहों द्वारा सुदूर संवेदन करने के लिए संवेदकों को सतह से 700 – 900 किलोमीटर ऊपर ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाता है जिनके कक्षीय परिक्रमा सूर्य तुल्य कालिक है|
पृथ्वी के सतह से टकराने के बाद ऊर्जा के कुछ हिस्से वस्तु द्वारा अवशोषित हो जाती है एवं कुछ प्रतिबिंबित हो कर वायुमंडल में प्रवेश कर जाती है|
सुदूर संवेदन में इस्तेमाल के लिए प्राकृतिक ऊर्जा स्त्रोत के रूप में हम सूर्य एवं कृत्रिम ऊर्जा स्तोत्र के रूप में फ्लेश्गन तथा राडार में उपयुक्त ऊर्जा बिंब का इस्तेमाल कर सकते हैं|
विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम के आकार, तरंग दैर्ध्य व उनकी आवृत्ति के आधार पर ऊर्जा तरंगों को गामा किरणें, ऐक्स किरणें, पराबैंगनी किरणें, दृश्य किरणें, अवरक्त किरणें, माइक्रोवेव व रेडियो तरंगों में वर्गीकृत किया जाता है।
प्रकाश की गति से का किसी दिकस्थान अथवा माध्यम से ऊर्जा का प्रकाश की गति से होने वाले प्रबंधन को विद्युत् चुंबकीय विकिरण कहा जाता है।
किसी भी फोटोग्राफीय अथवा अफोटोग्राफीय साधन द्वारा पृथ्वी के प्राकृतिक एवं मानव निर्मित वस्तुओं के स्थायी अभिलेखन को प्रतिबिंब कहा जाता है|
सेंसर (संवेदक) एक ऐसा उपकरण है जो किसी भौतिक राशि को मापने का कार्य करता है तथा इसे एक ऐसे संकेत में परिवर्तित कर देता है जिसे किसी पर्यवेक्षक या यंत्र द्वारा पढ़ा जा सकता है।
विद्युत् चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित विभिन्न तरंगों के तरंग दैर्घ्य के अलग अलग परिसर को कहा जाता है| संतत् स्पेक्ट्रम में तरंग दैर्घ्य की परिसर जैसे हरे बैंड का परिसर 0.5 से 0.6 माक्रोमीटर तक तथा अवरक्त बैंड का परिसर 0.7 से 1.1 से माक्रोमीटर तक होता है।
यह अंकीय संख्या के एक ब्यूह है,जिनमे अंकीय संख्या पंक्तियों एवं स्तंभों के क्रमानुसार व्यवस्थित होते हैं एवं इनकी विशेषतायें इन्के तीब्रता मान होते हैं|
किसी भी वस्तु को छुए बिना उसके संपर्क में ज्ञान आहरण करने की प्रक्रिया को सुदूर संवेदन कहा जाता है|
कृत्रिम रूप से उत्पादित रंगीन बिम्ब जिसमें नीला, हरा और लाल रंग उन तरंग क्षेत्रों को निर्दिष्टि किया जाता है जो प्राक्रतिक रूप से अलग होते हैं। उदाहरण के तौर पर एक मानक त्रियक रंगी मिश्र में नीला रंग हरे विकिरण क्षेत्र (0.5 से 0.6 माक्रोमीटर) को, हरा रंग लाल विकिरण क्षेत्र (0.6 से 0. 7 माक्रोमीटर)| अतः लाल रंग अवरक्त क्षेत्रा (0.7 से 0.8 माक्रोमीटर) वाले विकीरण क्षेत्रों को निर्दिष्टि किए जाते हैं।
विद्युत-चुम्बकीयस्पेक्ट्रम: विद्युत-चुम्बकीय विकिरण का सांतत्यक रूप जिसका परिसर उच्च आवृति वाली लघुतरंगी कास्मिक (अंतरक्षीयतरंगों) सेलेकर निम्न आवृति वाली दीर्घ तरंगीरेडियोतरंगोंतक होता है।
पुशब्रूम क्रमवीक्षक के दृश्य क्षेत्र 60 कि.मी x 1000 मी = 60000 मी.
धरातलीय विभेदन = 5 मी.
सुदूर संवेदन के नियमानुसार विदेदन के कार्य क्षेत्रा को क्षेत्रीय विभेदन से विभाजित करने से ही हम संसूचकों की संख्या प्राप्त कर सकते है| अतएव उपरोक्त क्रमवीक्षक में लगे संसूचक की संख्या है 60000/5=12000
जिस तरह से एक अच्छा तथा साफ चश्मा मानव की देखने की क्षमता को बढ़ता है, ठीक उसी तरह उन्नत मान के सवेदक भूपृष्ट की उन वस्तुओं की भी पहचान करने में भी सफल है, जिनके मध्य की दूरी अत्यंत कम होती है| संवेदक के विभेदन क्षमता बढ़ने के साथ ही पृथ्वी के सतह की छोटी से छोटी वस्तुओं को पहचानना आसन हो जाता है|
पुशब्रूम क्रमवीक्षक में अनेकों संसूचक होते हैं | इनकी संख्या विदेदन के कार्य क्षेत्र को क्षेत्रीय विभेदन से विभाजित करने से प्राप्त संख्या के समान होती है|
बहुवर्णक्रमीय (मल्टीस्पेक्ट्रल) स्केनर सुदूर संवेदन उपग्रहों में लगा वह संवेदक है जो विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के चार अलग अलग बैंन्ड़ो में प्रतिबिंब प्राप्त कर सकता है| यह मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं :
1. विस्कब्रूम क्रमवीक्षक
2. पुशब्रूम क्रमवीक्षक
विभिन्न संवेदकों के तरंग दैर्घ्य भिन्न भिन्न प्रकार के होते हैं जैसे
|
फोटोग्राफिक प्रतिबिंब |
अंकीय प्रतिबिंब |
|
वे तस्वीरें जिन्हें विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र के 0.3 माइक्रोमीटर से 0.9 माइक्रोमीटर में प्राप्त किया जाता है| |
अलग अलग पिक्चर तत्व अथवा पिक्सेल को मिला कर प्रतिबिंब तैयार होता है| |
|
इस में चार अलग अलग तरह के इमल्सन वाली फिल्म का इस्तेमाल किया जाता है: श्याम-श्वेत, रंगीन, श्याम-श्वेत, अवरक्त रंगीन अवरक्त | |
दो आयामी प्रतिबिंबों में प्रत्येक पिक्चर तत्व का निर्दिष्ट स्थान तथा गहनता भी होती है| |
|
फोटोग्राफ को बड़े या छोटे आकार में प्राप्त किया जा सकता है| |
अंकीय प्रतिबिंब का विवर्तन एक निर्दिष्ट सीमा रेखा के मध्य ही किया जा सकता है, वरना इस में सूचनाओं के ह्रास होने की संभाबना भी होती है| |
ii.
|
चाक्षुष निर्वचन |
अंकीय बिम्ब प्रकृमण तकनीक |
|
चाक्षुष निर्वचन के माध्यम से किसी भी वस्तुको देख कर उसकी पहचान की जा सकती है| |
इस प्रक्रिया में अंकीय प्रतिबिंब से उभय हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के प्रयोग से भूपृष्ट के बस्तुओं की सूचना प्राप्त की जाती है| |
|
इस प्रक्रिया में वस्तुओं को सिर्फ मानव चक्षु के क्षमता के अनुसार पहचाना जाता है| |
जबकि यह प्रक्रिया कम्पूटरीकृत है| |
भारतीय संविधान में 2001 से 2003 की अवधि में, दस संशोधन किए गए थे।
सोवियत संघ में 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएसयू) का शासन समाप्त हो गया और नवगठित रूसी संघ ने 1993 में एक नया संविधान अंगीकृत किया था।
संसद द्वारा पारित कानून यदि संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है, तो न्यायपालिका के पास यह अधिकार है कि वह घोषित कानून को निरस्त कर दें।
भारत का संविधान तैयारकरने के लिए संविधान सभा का गठन किया गया था।
42वाँ संशोधन द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51-ए में मूलभूत कर्तव्यों का एक संभाग शामिल किया गया।
स्विट्जरलैंड, रूस और इटली की जनता संविधान संशोधन की प्रक्रिया में भाग लेती हैं।
भारत के संविधान की समीक्षा करने के लिए भारत सरकार द्वारा, 2000 में आयोग गठित किया गया था।
नागरिक अधिकारों पर राज्य की प्रतिरोधी शक्ति को सीमित करता है: उदाहरण के लिए
दो अनुच्छेद जिसमे संसद के सामान्य बहुमत से संशोधन किये जा सकते हैं, वे हैं:
1. अनुच्छेद 5 से 11 - भारतीय नागरिकता से संबंधित प्रावधान।
2. अनुच्छेद 81 - निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित प्रावधान।
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है क्योंकि इसने समय-समय पर उत्पन्न होने वाली स्थितियों और परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया दिया है। संविधान को लागू करते समय, लचीलेपन की विवेचना राजनीतिक कार्यप्रणालियों और न्यायिक फैसलों दोनों द्वारा दिखाया गया है।
संशोधन प्रक्रिया और कानून बनाने की प्रक्रिया के आधार पर संविधान दो प्रकार के होते हैं-
1. लचीला संविधान वह है जिसमें कानून निर्माण के प्रक्रिया के अनुसार ही संविधान में संशोधन किया जा सकता है।
2. कठोर संविधान वह है जिसमें संविधान में संशोधन करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
भारतीय संविधान कठोर और लचीला दोनों है क्योंकि संविधान के कुछ भागों को सामान्य बहुमत से संशोधन किया जा सकता है, जबकि संविधान के कुछ प्रावधानों में संशोधन विशेष बहुमत द्वारा किए जा सकते हैं।
संविधान में 52वें संशोधन कानून, 1985 के द्वारा दसवीं अनुसूची को जोड़ा गया। संशोधन का उद्देश्य संघीय या राज्य विधायकों द्वारा एक पार्टी से दूसरे पार्टी में दलबदल को रोकना था।
दलबदल विरोधी संशोधन (52वाँ और 91वाँ संशोधन), मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से 18 साल करना (73वाँ और 74वाँ संशोधन) राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति का परिणाम हैं।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368, संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है। संशोधन, संसद में साधारण बहुमत या विशेष बहुमत से हो सकता है;अर्थात, प्रत्येक सदन की कुल सदस्यों का बहुमत और प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से या विशेष बहुमत से और राज्य विधायिकाओं के आधे के समर्थन से संशोधन हो सकता है।
संविधान सभा में संवैधानिक संशोधन के बारे में जीवंत बहस हुई थी। संविधान की लचीलेपन पर टिप्पणी करते समय समय जे.एल. नेहरू ने संविधान सभा को ध्यान दिलाया था कि, “जब हम चाहते हैं कि यह संविधान ठोस और स्थायी हो, जैसा कि हम इसे बना सकते हैं, संविधान में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। कुछ लचीलापन होना चाहिए। अगर आप कोई भी चीज़ कठोर और स्थायी बनाते हैं, तो आप देश के लोगों के जीवन और विकास को रोकते हैं .... किसी भी हालत में, हम इस संविधान को इतना कठोर नहीं बना सकते हैं कि यह बदलती परिस्थितियों में अंगीकृत न की जा सके। जबकि दुनिया में उथलपुथल है और हम संक्रमण की बहुत तीव्र दौर से गुजर रहे हैं, तो आज जो भी हम करते हैं वह कल पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता है”। संशोधन के प्रावधान, संसद को संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधन करने के अधिकार और संघराज्य में संशोधन की अत्यधिक परंपरागत अवधारणा के बीच निस्संदेह एक समझौता था।
पहला संशोधन, 1950 में पारित किया गया जिसके द्वारा भारत के संविधान में अनुच्छेद 31ए और 31बी शामिल किया गया था। अनुच्छेद 31ए बतलाता है कि किसी एक राज्य द्वारा, दूसरे राज्य के अधिकार को प्राप्त करने से संबंधित कोई भी कानून इस आधार पर निरस्त माना जाएगा क्योंकि यह भारतीय संविधान के भाग III में प्रदत्त अधिकारों के साथ असंगत या अधिकारों को कम करना है। अनुच्छेद 31बी नौवीं अनुसूची में निर्दिष्ट अधिनियम और विनियम को विधिमान्य घोषित करता है और भूमि सुधार कानून की चुनौती को सरकारी संरक्षण प्रदान करता है।
पिछले कई सालों से भारतीय संविधान में सामाजिक और आर्थिक विकास लाने के लिए साथ ही साथ भारतीय समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों के सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए कई बार संशोधित किया गया है, जिससे इस दिशा में सभी सरकारी कार्यों को एक वैधानिक मंजूरी मिल रही हैं। किसी भी जीवित जीव की तरह, भारतीय संविधान निरंतर बढ़ रहा है और गतिशील है। जनवरी 1950 में इसके लागू होने की तारीख से इसके द्वारा रचित विषय-वस्तु की प्रक्रिया रुकी नहीं है। न्यायिक व्याख्याओं और संवैधानिक संशोधन के माध्यम से इसको और भी विकसित किया जा रहा है।
भारतीय संविधान के 42वें संशोधन को “भारत का छोटा संविधान” कहा जाता है। इस संशोधन में मौलिक कर्तव्यों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया। इस संशोधन ने संविधान के बहुत-बड़े भाग को प्रभावित किया। यह केशवानंद मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को पलटने का भी एक प्रयास था। 42वें संशोधन ने न्यायपालिका की न्यायिक पुनरावलोकन के अधिकार पर भी प्रतिबंध लगाया। इस संशोधन ने संविधान के प्रस्तावना, सातवीं अनुसूची और अनुच्छेदों में परिवर्तन किया।
यह संशोधन सर्वाधिक विवादास्पद संशोधन था। यह संशोधन लगभग संविधान को दोबारा लिखने जैसा था। इसमें आपातकाल की अतिवादी राजनीति परिलक्षित होती है। इस संशोधन के द्वारा लगाए गए अधिकांश प्रतिबंधों को 1978 के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया था।
वे प्रावधान जिनसे भारतीय संविधान के प्रावधानों में कुछ खास अंतर नहीं हुआ, तकनीकी या प्रशासनिक संशोधन के रूप में संदर्भित किये जाते हैं। इन संशोधनों से मूल प्रावधानों का केवल स्पष्टीकरण, व्याख्या और मामूली संशोधन आदि हुए हैं। ये संशोधन केवल कानूनी अर्थ में हैं और इनसे प्रावधानों में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं हुआ है।
तकनीकी संशोधन के कुछ उदाहरण हैं-
1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल की गई। (15वाँ संशोधन)
2. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में 55वें संशोधन के द्वारा वृद्धि की गई।
3. विधायिका में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों को 10 साल बढ़ाने से संबंधित प्रावधान के लिए पाँच बार संशोधन हुए हैं। लेकिन इन संशोधनों से मूल प्रावधान में कोई अंतर नहीं हुआ है।
कुछ देशों में संशोधन की प्रक्रिया बहुत कठोर है जबकि कुछ अन्य देशों में यह अपेक्षाकृत सरल है। आयरलैंड के संविधान ने संसद में एक सामान्य बहुमत प्रक्रिया अपनाई है, जिसके बाद इसे जनता के समक्ष जनमत संग्रह के द्वारा पेश किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में संशोधन तभी किया जा सकता है, जबकि यह संसद में पूर्ण बहुमत राज्य विधानसभा में बहुमत और साथ ही साथ अधिकांश मतदाता द्वारा समर्थित हो।
कनाडा के संविधान में संशोधन करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। भारतीय संविधान ने संशोधन करने का अधिकार मुख्य रूप से केंद्रीय संसद को प्रदान किया है, हालाँकि कुछ मामलों में राज्य विधानसभा का समर्थन भी आवश्यक है। भारतीय संविधान में अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया को अपनाया गया है, क्योंकि इसमें कई बार संशोधन किया गया है। संविधान के अधिकांश प्रावधान, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत के साथ संवैधानिक संशोधन अधिनियम पारित करके किया जा सकता है अर्थात सदन की कुल सदस्यता तथा सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से। संसद द्वारा विधेयक पारित होने के बाद यह राष्ट्रपति के पास उनकी स्वीकृति के लिए भेजा जाता है और उनकी स्वीकृति प्राप्त होते ही यह एक अधिनियम बन जाता है।
सभी अनुच्छेद इस तरीके से संशोधित नहीं किए जा सकते हैं। संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों में किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इस संबंध में दोनों सदनों का अधिकार समान हैं। संवैधानिक संशोधन बिल के संबंध में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। संसद द्वारा पारित संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति अपनी स्वीकृति देने से मना नहीं कर सकते हैं।
लेकिन 1973 में केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार संसद संविधान के बुनियादी ढांचे में संशोधन नहीं कर सकती है। 1980 में मिनर्वा मिल मामले में अदालत के फैसले स्पष्ट करता है कि न्यायिक समीक्षा के मामले अनिवार्य रूप से बुनियादी संरचना का एक हिस्सा होते हैं।
A.
पाई-आरेख
B.
गणित
C.
सांख्यिकी
D.
नीतियों
सांख्यिकी को तथ्यों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है। इस प्रकार, अर्थशास्त्र में प्रयोगहोने वाले दोनों मात्रात्मक और गुणात्मक तथ्यों को सांख्यिकी के रूप में जाना जाता है।
A.
आँकड़ों की व्यवस्था
B.
विभिन्न आर्थिक कारकों
C.
सांख्यिकीय आँकड़ों
D.
अवलोकन
अर्थशास्त्र में, सांख्यिकी की सहायता से आर्थिक समस्याओं तथा उनके समाधानों के लिए नियम बनाने का अध्ययन किया जाता है|
A.
उत्पादन
B. बचत
C. निवेश
D. वितरण
उत्पादक को उपलब्ध संसाधनों की मदद से किस प्रकार की वस्तु का उत्पादन करना है यह सोचना होता हैं |
A.
संसाधनों
के वैकल्पिक
उपयोग होते
हैं
B. सभी संख्याएँ सांख्यिकी हैं
C. समष्टि-अर्थशास्त्र बड़े समुच्चयों का अध्ययन करता है
D. सांख्यिकी केवल मात्रात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है
सभी संख्याएँ सांख्यिकी नहीं हैं परन्तुसांख्यिकी को संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है| यहाँ तक कि गुणात्मक विशेषताएँ जैसे खूबसूरती, ईमानदारी आदि को भी संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है|
A.
सांख्यिकी
झूठ के तंतु
है
B. सांख्यिकी झूठ का इन्द्रधनुष है
C. सांख्यिकी तथ्यों को संख्याओं में व्यक्त करता है
D. झूठ के तीन प्रकार हैं- झूठ, सफेद झूठ तथासांख्यिकी
सांख्यिकी में आंकड़े अधूरे,गलत और जानबूझकर हेरफेर किए हो सकते हैं तथा पक्षपातपूर्ण लोगों द्वारा सांख्यिकी आंकड़ों के गलत उपयोग से गलत निष्कर्ष निकल सकता हैं|
A.
वितरण
B.
उपभोग
C.
उत्पादन
D.
उपरोक्त सभी
आर्थिक क्रिया वह क्रिया है जिसका संबंध दुर्लभ साधनों या संसाधनों के प्रयोग से है|
A.
आँकड़ों
का समूह
B. केवल शब्दों में व्यक्त
C. अनेक कारणों से प्रभावित
D. व्यवस्थित रूप से संकलित
बहुवचन रूप में सांख्यिकी से हमारा तात्पर्य उन संख्यात्मक तत्वों से हैं जो पर्याप्त सीमा तक अनेक प्रकार के कारणों से प्रभावित होतें हैं|
A. आँकड़ों का संकलन
B. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण
C. आँकड़ों का विशलेषण
D.
उपरोक्त सभी
सांख्यिकी एक गणितीय विज्ञान है जोकि संकलन, विश्लेषण, निर्वचन या स्पष्टीकरण तथा आकंड़ों के प्रस्तुतीकरण से संबंधित है|
A.
सांख्यिकी
B. आँकड़ों का संपादन
C. आँकड़ों का विशलेषण
D. उपरोक्त सभी
सांख्यिकी किसी विशेष जांच के क्षेत्र से संबंधित तथ्यों केसमूह होते हैं|एक अकेली संख्या, संमक नहीं कहलाती क्योंकि उससे कोई निष्कर्ष नहीं निकला जा सकता |
A.
सांख्यिकी
विज्ञान से
B. सांख्यिकीनियम से
C. दोनों (1) तथा (2)
D. इनमें से कोई नहीं
एकवचन के रूपमें सांख्यिकीवह विज्ञान है जिसमें संकलन, विश्लेष्ण, निर्वचन तथा संख्यात्मकआंकड़ों के प्रस्तुतीकरण में उपयोग होने वाली विधियाँ शामिल हैं|
A.
तथ्यों
का समूह
B. संख्याओं में व्यक्त
C. अनेक कारणों से प्रभावित
D. उपरोक्त्त सभी
एक अकेली संख्या, समंक नही कहलाती क्योंकि उससे कोई निष्कर्ष नहीं निकला जा सकता तथा गुणात्मक तत्वों को सांख्यिकी नहीं कहा जाता और आँकड़ों पर किसी एक प्रकार के कारण का प्रभाव नहीं पड़ता|
A.
रमेश
की ज़ेब में 50रूपए
का नोट है
B. भारत में औसत जन्म दर 18 प्रति हज़ार है जबकि अमरीका में यह 8प्रति हज़ार है
C. पिछले 15वर्षों में भारत ने क्रिकेट के 60 मैच जीते है तथा 50 हारे है
D. दसवी कक्षा के विद्यार्थियों का औसत ज़ेब खर्च 500 रूपए प्रति माह हैं
सांख्यिकी से अभिप्राय आँकड़ों के औसतों या समूहों से है जिनका किसी अन्वेषण या किसी घटना से संबंध होता है|
अर्थशास्त्र में निम्न समस्याओं का अध्ययन सम्मिलित है:
सन
अर्थशास्त्र वह सामाजिक विज्ञान है जो मनुष्य की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन, अनुकूलतम क्षमता के साथ संसाधनों के आबंटन के संबंध में करता है|
अनुभवजन्य विश्लेषण एक जांच है जहां तथ्य निरीक्षणों के माध्यम से एकत्रित किये जाते हैं।
सांख्यिकी उन आंकडों या तथ्यों के समूह से संबंधित होती है जिनका विश्लेषण किया जाना है।
सांख्यिकीय विधि में प्रथम दो चरण आंकडों का संग्रहण और संगठन हैं।
सांख्यिकीय विश्लेषण आंकडे संग्रहित करने और जांच के दिये गए क्षेत्र में निर्वचन प्रदान करने की विधि है।
सांख्यिकी या आंकडों को एक दूसरे के संबंध में रखा जाता है ताकि उनकी आसानी से तुलना की जा सके।
A. सामाजिक परिवर्तन
B. ऐतिहासिक परंपराएँ
C. पौराणिक कहानियाँ
D. उल्लेखनीय युद्ध
अधिकांश राष्ट्र जटिल ऐतिहासिक परंपराओं का एकीकरण हैं; उन्होंने राष्ट्र के भीतर अलग-अलग तरीकों से रहनेवाले विविध समूहों को एक साथ पिरोया है। उदाहरण के लिए, जर्मन जाति ने जर्मन पहचान (राष्ट्र) गठित की है।
A. पवित्र
B. बातचीत योग्य
C. कठोर
D. जरूरत अनुसार
कुछ बुनियादी आदर्शों और सिद्धांतों पर सहमत होकर कोई अपनी एक बुनियादी राजनीतिक और नैतिक पहचान बना सकता है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं इस पर संविधान शासनानुरूप प्रतिबंध लगाता है। यह मौलिक मूल्यों को परिभाषित करता है जिसका हमें अतिक्रमण नहीं करना चाहिए।
A. एकात्मक प्रकार
B. अलिखित संविधान
C. संघवाद
D. एक सदनीय
संघवाद के सिद्धांत को अमेरिकी संविधान से लिया गया लेकिन भारतीय संविधान निर्माताओं ने इसे भारतीय जरूरतों के अनुरूप सुधारा और परिवर्तित किया। परिणामस्वरूप भारत एकात्मक प्रकृति के साथ संघीय राष्ट्र है।
A. उद्देश्य-प्रस्ताव
B. शक्ति का बँटबारा
C. संविधान की प्रस्तावना
D. न्यायिक प्रणाली।
यह संविधान का ही कृत्य है जिसने सरकार को समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनाया है। भारतीय जनता की आकांक्षा भारतीय संविधान में प्रदान की गई हैं जो संविधान की प्रस्तावना में परिलक्षित होती है।
A. न्याय संगत समाज
B. काल्पनिक आदर्श वाला राष्ट्र
C. धार्मिक राष्ट्र
D. अंतरराष्ट्रीय संगठन
भारतीय संविधान ने सरकार को सकारात्मक कल्याणकारी कदम उठाने का अधिकार प्रदान किया जिनमें से कुछ कानूनी रूप से प्रवर्तनीय हैं।इसके अलावा इसने सरकार को समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने और एक न्याय संगत समाज के निर्माण के लिए सक्षम बनाया।
A. पं. नेहरू
B. बी. आर. अम्बेडकर
C. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
D. डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में संविधान हॉल में हुई थी, जिसे अब संसद भवन का सेंट्रल हॉल कहा जाता है। उद्घाटन सत्र की शुरूआत आचार्य कृपलानी द्वारा प्रस्तावित, संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा के भाषण से सुबह 11 बजे शुरू हुई थी।
A. दास-प्रथा
B. रंगभेद
C. राजनीतिक हिंसा
D. साम्राज्यवाद