A. सरदार पटेल
B. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
C. राजेंद्र प्रसाद
D. पं. जवाहर लाल नेहरू
पं. जवाहर लाल नेहरू वर्ष 1946 में उद्देश्य-प्रस्ताव, संविधान सभा में लाये थे।
A. अव्यवहार्य
B. अभूतपूर्व
C. संकुचित
D. निरपेक्ष
अधिकांश पुराने संविधान खुद को काफी हद तक निर्णय लेने की शक्ति और सरकार के सत्ता पर कुछ पाबंदी लगाने तक ही सीमित रखते थे।
A. राष्ट्रीय आपातकाल
B. चुनाव
C. प्राकृतिक आपदा
D. त्योहारी मौसम में
राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान इन अधिकारों को सीमित किया जा सकता है और संविधान में यह उल्लिखित है कि किन परिस्थितियों में इन अधिकारों को वापस लिया जा सकता है।
A. राजनीतिक पार्टी
B. शासनाधीन सूची
C. निर्देशक सिद्धांत
D. अधिकार
संविधान कई प्रकार से सरकार की शक्ति को सीमित करता है। सरकार की शक्ति को सीमित करने का सबसे सामान्य तरीका कुछ मौलिक अधिकारों का निर्दिष्ट होना है जो हम सभी नागरिकों को प्राप्त है और जिसको किसी भी सरकार को कभी भी उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
A. मौलिक अधिकार
B. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
C. मौलिक कर्तव्य
D. राजनीतिक अधिकार
राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत जन-कल्याण करने के लिए सरकार के दिशा-निर्देश हैं, लेकिन वे मौलिक अधिकारों की तरह प्रवर्तनीय नहीं हैं। आय और धन की असमानता को कम करना राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत के तहत दिशानिर्देश है।
A. संविधान
B. दंड संहिता
C. प्रस्तावना
D. अध्यादेश
यदि संसद को कानून पारित करने का अधिकार है; तो कोई प्राधिकारी अवश्य होना चाहिए जो संसद को कानून बनाने का अधिकार प्रदान करता है। यह संविधान प्रदान करता है। यही (संसद) वह प्राधिकारी है जिसको सरकार गठन करने का अधिकार है।
A. राजनीतिक पार्टी
B. संसद
C. दबाव समूह
D. जनता
लोकतांत्रिक संविधान में, मोटे तौर पर जनता देश के लिए सरकार, नीतियों और कानूनों के बारे में निर्णय लेती है। वे अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं जो कानून बनाते हैं।
A. लोकतांत्रिक प्रकृति
B. स्वेच्छाचारी प्रकृति
C. रुढिवादी प्रकृति
D. अपर्याप्त प्रकृति के
राजतंत्रीय संविधान वाले देश में, सम्राट सभी शक्तियों का स्त्रोत होता है। उन्हें अपने देश में कानून के बारे में फैसला करने का अधिकार होता है, जैसे कि नेपाल में 2008 से पहले और सऊदी अरब में।
A. निश्चित क्षेत्र
B. बजट का आवंटन
C. शक्ति का पृथक्करण
D. विकेन्द्रीकरण
संविधान सरकार में अधिकार का, बुनियादी आवंटन निर्दिष्ट करता है। यह फैसला करता है कि कानून का इस्तेमाल कौन कर सकता है। सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियाँ शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित हैं।
A. सरकार
B. चुनाव
C. सार्वजनिक घोषणा
D. सुरक्षा
संविधान मौलिक सिद्धांतों का संग्रह है जिसके अनुसार किसी देश की शासन व्यवस्था चलती है।
A. बर्लिन की दीवार
B. रूस का विघटन
C. अब्दुल रहमान आरिफ
D. सद्दाम हुसैन
तानाशाह सद्दाम हुसैन के सरकार का इराक पर अमेरिकी हमले के बाद पतन हो गया। उसके पतन के बाद नया संविधान तैयार किया गया।
A. न्यायोचित
B. गैर-न्यायोचित
C. सार्वजनिक नीति
D. झूठा अधिकार
भारतीय संविधान के तहत गारंटित अधिकार इस अर्थ में मौलिक अधिकार हैं कि उनको देश के कानून में शामिल किया गया है कि और वे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
A. मुद्रा
B. प्राकृतिक संसाधन
C. बुनियादी सिद्धांत
D. स्वतंत्रता
किसी भी समूह या समाज के लिए सार्वजनिक रूप से घोषित कुछ बुनियादी नियमों की जरूरत होती है जो उस समूह के सभी सदस्यों को न्यूनतम समन्वय प्राप्त करने के लिए ज्ञात होना चाहिए। लेकिन इन नियमों को केवल ज्ञात ही नहीं होना चाहिए, बल्कि यह लागू भी होना चाहिए।
ऐसा करने का कारण यह है कि सरकार मनमाने ढंग से काम नहीं कर सके और लोगों के अधिकारों और अपने उत्तरदायित्वों का अतिक्रमण नहीं कर सके। संविधान में सरकार पर नियंत्रण के तरीके निर्धारित किये गये हैं ताकि वह कोई अनुचित कानून नहीं बना सके और अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सके।
संविधान को संसद से श्रेष्ठ मानने का कारण यह है कि संसद के गठन की प्रक्रिया भी संविधान द्वारा ही निर्धारित की गयी है। यहां तक कि संसद के गठन की प्रक्रिया और कार्य भी संविधान द्वारा ही निर्धारित किए गए हैं।
संविधान सामान्यतः लिखित नियमों (कानूनों) और अलिखित (परिपाटियों, परंपराओं) का एक संग्रह है, जो सरकार के विभिन्न संस्थाओं के कर्तव्यों, शक्तियों, कार्यों को स्थापित करने का प्रयास करता है। यह राज्य और व्यक्ति के बीच के संबंध को परिभाषित करता है। यह सरकार के विभिन्न अंगों की शक्ति को परिभाषित करता है।
संविधान सरकार की शक्तियों को कई तरह से सीमित करता है। सरकार की शक्तियों को सीमित करने का सबसे सरल तरीका यह है कि नागरिकों के रूप में हमारे मौलिक अधिकारों को स्पष्ट कर दिया जाए और कोई भी सरकार कभी भी उसका उल्लंघन न कर सके। इन अधिकारों का वास्तविक स्वरूप और व्याख्याएँ भिन्न-भिन्न संविधानों में बदलती रहती हैं। लेकिन अधिकतर संविधानों में कुछ विशेष मौलिक अधिकार सदैव पाये जाते हैं। नागरिकों को मनमाने ढंग से बिना किसी कारण के गिरफ़्तार करने के विरुद्ध सुरक्षा प्राप्त है। यह सरकार की शक्तियों के ऊपर एक मूलभूत सीमा है। नागरिकों को सामान्यतः कुछ मौलिक स्वतंत्रताओं का अधिकार है जैसे भाषण की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की आवाज पर काम करने की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता आदि। व्यवहार में, इन अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल में सीमित किया जा सकता है और संविधान उन परिस्थितियों का उल्लेख भी करता है जिनमें इन अधिकारों को वापिस लिया जा सकता है।
भारत के संविधान को “उधार लिया हुआ संविधान” कहा जाता है क्योंकि इसके निर्माताओं ने दुनिया के अन्य संविधानों से सर्वोत्तम विशेषताओं को लिया। ब्रिटिश संविधान से कानून निर्माण की विधि, कानून का शासन, एकल नागरिकता और सबसे महत्वपूर्ण सरकार का संसदीय स्वरूप लिया। अमेरिका संविधान से न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा, मौलिक अधिकार, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने का प्रावधान लिया। आयरलैंड के संविधान से राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति चुनाव की विधि और राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा के सदस्यों के मनोनीत करने का तरीका लिया। सशक्त केंद्रीय सरकार वाली संघात्मक व्यवस्था और अपशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के हाथ में देने को कनाडा के संविधान से लिया गया। जर्मनी के वाईमर संविधान से आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना और ऑस्ट्रेलिया के संविधान से समवर्ती सूची का प्रावधान लिया गया था। फ्रांस के संविधान ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों के प्रति प्रेरित किया।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 का भारतीय संविधान पर बहुत प्रभाव पड़ा था। संघीय ढाँचा, संघीय न्यायपालिका की शक्ति, राज्यपाल का पद इस अधिनियम से लिया गया था।
संविधान बुनियादी नियमों का एक ऐसा समूह उपलब्ध कराता है जिससे समाज के सदस्यों में एक न्यूनतम समन्वय और विश्वास बना रहे। यह उस शक्ति-केंद्र की पहचान करता है जहाँ निर्णय लिए जाते हैं, यानी कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होती है। यह, यह भी तय करता है कि सरकार कैसे गठित होगी। संविधान का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि वह सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किये जाने वाले कानूनों पर कुछ सीमाएँ लगाए, अर्थात सरकार कभी भी संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध कानून नहीं बना सकती है। यह सरकार को ऐसी क्षमता प्रदान करती है जिससे वह जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना कर सके।
आखिरी और शायद सबसे महत्त्वपूर्ण चीज यह है कि संविधान किसी समाज की बुनियादी पहचान होता है। इसका अर्थ यह है कि संविधान के माध्यम से ही किसी समाज की एक सामूहिक इकाई के रूप में पहचान होती है।
(1) ब्रिटिश संविधान से
(I) कानून के शासन का विचार
(II) कानून निर्माण की विधि
(2) अमेरिकी संविधान से
(I) मौलिक अधिकारों की सूची
(II) न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता|
विभिन्न मुद्दों के लिए संविधान सभा की आठ मुख्य कमेटियाँ थीं। आम तौर पर जवाहरलाल नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, मौलाना आजाद, आदि इन कमेटियों की अध्यक्षता करते थे। प्रत्येक कमेटी ने आम तौर पर संविधान के कुछ-कुछ प्रावधनों का प्रारूप तैयार किया जिन पर बाद में पूरी संविधान सभा में चर्चा की गई। कई प्रावधनों पर निर्णय मत विभाजन करके भी लिए गए। हर तर्क और शंका का समाधन बहुत ही सावधानी से किया गया, लिखित रूप में उनका जवाब दिया गया। दो वर्ष और ग्यारह महीने की अवधि में संविधान सभा की बैठकें 166 दिनों तक चलीं। इसके सत्र अखबारों और आम लोगों के लिए खुले हुए थे।
अलिखित संविधान यु.के. (ब्रिटेन) के संविधान की तरह होता है जो किसी विशेष संस्था द्वारा विशेष अवधि में लिखा हुआ दस्तावेज नहीं होता है। इसके प्रावधान सम्मेलनों, परिपाटियों और परंपराओं, न्यायिक उदाहरणों, संसद द्वारा पारित कानून आदि के रूप में कई वर्षों से संग्रहित हुए होते हैं। लिखित संविधान भारत और अमेरिका के संविधान की तरह होते है जो संविधान बनाने वाली संस्था (संविधान सभा) द्वारा निश्चित समय पर तैयार किए गए होते हैं।
संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया गया था। कैबिनेट मिशन योजना के तहत 1946 में संविधान सभा निर्वाचित किया गया था। संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमण मत पद्धति से हुआ था। जनसंख्या के आधार पर विभिन्न प्रांतों को सीटें दी गई थीं। मुसलमान, सिख और सामान्य उम्मीदवारों को आबादी में उनके अनुपात से सीटें भी आरक्षित की गईं थी। संविधान सभा के 389 सदस्यों में से 292 सदस्य प्रांतों के प्रतिनिधि थे, 93 सदस्य देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे और शेष चार सदस्य मुख्य आयुक्त क्षेत्र से आए थे। प्रांतीय चुनाव में मुस्लिम लीग ने 73 सीट, कांग्रेस ने 208 और निर्दलीय और अन्य ने 9 सीट पर जीत हासिल की थी।
पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष चुने गए थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य-प्रस्ताव पेश किया जो 22 जनवरी 1947 को पारित हुआ और भारत के संविधान के प्रस्तावना का हिस्सा बना। संविधान का मसौदा 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा पारित किया गया था। यह 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ था।
कुछ सिद्धांतों पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही सहमति बनी थी। एक तरह से संविधान सभा केवल उन सिद्धांतों को मूर्त रूप और आकार दे रही थी जो उसने राष्ट्रीय आंदोलन से विरासत में प्राप्त किए थे। संविधान लागू होने के कई दशक पूर्व से ही राष्ट्रीय आंदोलन में उन प्रश्नों पर चर्चा हुई थी जो संविधान बनाने के लिए प्रासंगिक थे, जैसे - भारत में सरकार का स्वरूप और संरचना कैसी होनी चाहिए, हमें किन मूल्यों का समर्थन करना चाहिए, किन असमानताओं को दूर किया जाना चाहिए। उन बहसों से प्राप्त निष्कर्षों को ही संविधान में अंतिम रूप प्रदान किया गया। राष्ट्रीय आंदोलन से जिन सिद्धांतों को संविधान सभा में लाया गया उसका सर्वोत्तम सारांश हमें नेहरू द्वारा 1946 में प्रस्तुत ‘उद्देश्य-प्रस्ताव’ (इस प्रस्ताव में संविधान सभा के उद्देश्यों को परिभाषित किया गया था) में मिलता है। इस प्रस्ताव में संविधान की सभी आकांक्षाओं और मूल्यों को समाहित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधर पर हमारे संविधान में समानता, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, संप्रभुता और एक सर्वजनीन पहचान जैसी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को संस्थागत स्वरूप दिया गया। अतः हमारा संविधान केवल नियमों और प्रक्रियाओं की भूलभुलैया नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी सरकार बनाने की नैतिक प्रतिबद्धता है जो राष्ट्रीय आंदोलन में लोगों को दिये गये आश्वासनों को पूरा करेगी।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में ‘उद्देश्य-प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया, जिसे 22 जनवरी 1947 को पारित किया गया और भारत के संविधान के प्रस्तावना का हिस्सा बना।
उद्देश्य-प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु
1. भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य है;
2. भारत ब्रिटेन के अधिकार में आने वाले भारतीय क्षेत्रों, देशी रियासतों और देशी रियासतों के बाहर के ऐसे क्षेत्र जो हमारे संघ का अंग बनना चाहते हैं, का एक संघ होगा;
3. संघ की इकाइयाँ स्वायत्त होंगी और उन सभी शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का संपादन करेंगी जो संघीय सरकार को नहीं दी गईं;
4. संप्रभु और स्वतंत्र भारत तथा इसके संविधान की समस्त शक्तियों और सत्ता का स्रोत जनता है;
5. भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, कानून के समक्ष समानता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा कानून और सार्वजनिक नैतिकता की सीमाओं में रहते हुए भाषण, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना, व्यवसाय, संगठन और कार्य करने की मौलिक स्वतंत्रता की गारंटी और सुरक्षा दी जायेगी।
6. अल्पसंख्यकों, पिछड़े व जनजातीय क्षेत्र, दलित व अन्य पिछड़े वर्गों को समुचित सुरक्षा दी जायेगी।
7. गणराज्य की क्षेत्रीय अखंडता तथा थल, जल और आकाश में इसके संप्रभु अधिकारों की रक्षा सभ्य राष्ट्रों के कानून और न्याय के अनुसार की जायेगी;
8. विश्वशांति और मानव कल्याण के विकास के लिए देश स्वेच्छापूर्वक और पूर्ण योगदान करेगा।
A.
वजन
B.
कद
C.
कक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त अंक
D.
सुन्दरता
सांख्यिकी केवल संख्यात्मक आकड़ों के समूह का अध्ययन करती है, यह केवल मात्रात्मक आंकड़ों पर लागू होती है और गुणात्मक पहलू का अध्ययन नहीं करती है जैसे बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, गरीबी, खूबसूरती, कल्याण आदि |
A.
वितरण
B.
प्रौद्योगिकी
C.
प्रबंधन
D.
विज्ञान
अर्थशास्त्र के अध्ययन में सम्मिलित हैं| उत्पादन, उपभोग तथा वितरण की आर्थिक गतिविधियाँ और आर्थिक पहलु जो इन आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं|
अर्थशास्त्र वह सामाजिक विज्ञान है जो मनुष्य की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन, अनुकूलतम क्षमता के साथ संसाधनों के आवंटनके संबंध में करता है|
A.
सिमित उपयोग
B.
असीमित उपयोग
C.
वैकल्पिक उपयोग
D.
समान उपयोग
उपलब्ध संसाधनों की पूर्ति उनकी माँग की तुलना में सीमित होती है और संसाधनों के विविधया वैकल्पिक उपयोग होते हैं जैसे लकड़ी का उपयोग ईंधन या फर्नीचर बनाने के लिए किया जा सकता है|
A. इच्छाओं
B. बजट
C.
स्वाद
D.
शर्तों
मनुष्य की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती तथा विशाल होती हैं| कुछ इच्छाएं आवर्ती होती हैं जबकि कुछ इच्छाएं आर्थिक कारकों के कारण उत्पन्न होती हैं|
A.
अल्फ्रेड मार्शल
B.
कीन्स
C.
सैमुएलसन
D.
गोटफ्राइड अच्चंवाल
सन 1749 में जर्मन वैज्ञानिक गोटफ्राइड अच्चंवालद्वारा सांख्यिकी शब्द सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था।
A.
प्राथमिक विधि द्वारा
B.
माध्यमिक विधि द्वारा
C.
एक व्यवस्थित तरीके से
D.
संयोग से
बेढ़ंगे ढंग से एकत्र आंकडें भ्रामक निष्कर्ष करने के लिए नेतृत्व करेंगे। इस प्रकार, आंकडें केवल व्यवस्थित तरीके से एकत्र किये जाने चाहिए।
बहुवचन अर्थ से, सांख्यिकी, संख्यात्मक रूप में तथ्यों का कुल जोड़ भी है| उदाहरण के लिए, विभिन्न वर्षो में देश की जनसँख्या में वृद्धि|
संविधान राष्ट्र की प्रगति का वाहक है। यह राष्ट्र को आने वाले वर्षों के लिए विकास का विशेष मार्ग बतलाकर, देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाता है। ज्यों-ज्यों राष्ट्र आगे बढ़ता है, इसे अपने के अनुरूप संविधान बनाने की आवश्यकता उत्पन्न होती है, क्योंकि संविधान तैयार करते समय कोई भी संवैधानिक विशेषज्ञ यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता है कि, कुछ दशकों के बाद देश को कौन-सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए संविधान अनुकूलक होना चाहिए और किसी भी संविधान को वर्षों तक जीवित रहने में संशोधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय संविधान लचीला है क्योंकि इसमें लगभग सौ संशोधन हो चुके हैं।
संसद की संविधान में संशोधन करने के अधिकार के संबंध में, केशवनंद भारती मामला सबसे महत्वपूर्ण मामला है। सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित किया और अनुच्छेद 368 के प्रावधान के तहत संसद के संविधान में संशोधन करने के अधिकार को सीमित किया। श्री केशवानंद भारती ने केरल भूमि सुधार कानून 1969, की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि इस अधिनियम में अनुच्छेद 25, 26, 24, 19(1) और 31 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।
केशवानंद भारती मामले में ये सवाल उठाए गए;
1. क्या अनुच्छेद 368 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के प्रावधानों को संशोधन किया जा सकता है?
2. संविधान में संशोधन के संबंध में संसद की क्या अधिकार हैं?
न्यायालय ने इस मामले में निम्नलिखित सिद्धांतों को स्पष्ट किया।
1. अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकार के प्रावधानों में संशोधन किया जा सकता है
2. संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन करने का अधिकार है।
3. हालाँकि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार देता है, लेकिन संविधान के मूल ढाँचे को बदलने का अधिकार नहीं देता है।
4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक समीक्षा का अधिकार, संविधान की मूल ढाँचे का एक हिस्सा है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 संशोधन की प्रक्रिया प्रदान करता है। इस अनुच्छेद के अनुसार संशोधन संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास सहमति के लिए भेजा जाता है। कुछ मामलों में राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाने से पहले राज्य विधायिकाओं के आधे से इसकी पुष्टि जरूरी होती है। यह विशेष रूप से संघीय प्रणाली को काम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि संसद में बहुमत वाला कोई भी दल संघीय प्रणाली का काम नहीं कर सकता और यह सुनिश्चित करने के लिए, कि संसद में बहुमत वाली कोई भी पार्टी संविधान की एक संघीय विशेषता को केवल अपनी संख्या बल का उपयोग कर परिवर्तित नहीं कर सकती है। अतः यह कहा जा सकता है कि संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को अलग-अलग तरीके से संशोधित किया जाता है। संविधान संशोधन की तीन प्रक्रिया प्रदान करता है; सामान्य बहुमत से संशोधन, संसद में विशेष बहुमत से संशोधन और संसद में विशेष बहुमत और राज्य विधान सभाओं के आधे के अनुमोदन द्वारा संशोधन।
सामान्य बहुमत द्वारा संशोधन: संशोधन विधेयक संसद के दोनों में किसी भी सदन में पेश किया जाता है। वहाँ सामान्य बहुमत से पारित होने के बाद इसे दूसरे सदन में पेश किया जाता है, वहाँ भी यही प्रक्रिया दोहरायी जाती है। जब विधेयक दोनों सदनों से पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया से संशोधन किए जाने वाले अनुच्छेद 2, 3 और 4 हैं (नए राज्यों के गठन, राज्य की सीमाओं में परिवर्तन और राज्यों के नाम बदलने से संबंधित हैं);अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 11 हैं (नागरिकता से संबंधित हैं); अनुच्छेद 81 (निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन से संबंधित हैं) आदि।
संसद में विशेष बहुमत द्वारा संशोधन: वस्तुतः इस प्रक्रिया से पूरे संविधान में संशोधन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के अनुसार संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। सदन में कुल सदस्यों के बहुमत के साथ-साथ, सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जाता है। विधेयक के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पास होने के बाद, इसे राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाता है।
संसद में विशेष बहुमत और राज्य विधायिकाओं के आधे का समर्थन: आम तौर पर यह प्रक्रिया संघीय विशेषताओं के संबंध में निर्धारित की गयी है, उदाहरणस्वरूप अनुच्छेद 54 और 55 (राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित)। अनुच्छेद 73 और 162 (केंद्र सरकार और राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति की सीमा से संबंधित); भाग XI के अध्याय 1 (संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण) आदि।
A. मजहबी राजनीति
B. धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र
C. सांप्रदायिक राष्ट्र
D. राष्ट्रमंडल
उस प्रकार की सरकार जो नागरिक कानून को नहीं स्वीकार करती है, धार्मिक ग्रंथों और पुरोहितों द्वारा निर्दिष्ट परमेश्वर की इच्छा की व्याख्या करके चलती है।
A. अनुच्छेद 31
B. अनुच्छेद 61
C. अनुच्छेद 71
D. अनुच्छेद 51
इस अनुच्छेद के अनुसार, भारत न तो सीमाओं का उल्लंघन और न ही अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा है।
A. जनता का लोकतंत्र
B. समाजवादी सरकार
C. संसदीय लोकतंत्र
D. अध्यक्षात्मक लोकतंत्र
भारत ने इंग्लैंड के “वेस्टमिंस्टर मॉडल” को अपनाया है। इस प्रणाली में कार्यपालिका सामूहिक रूप से विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
A. नियंत्रण और संतुलन
B. कार्यपालिका की असीमित शक्ति
C. संसदीय सर्वोच्चता
D. जातीय पहचान
यह विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच नियंत्रण और संतुलन रखती है – हालाँकि ये एक दूसरे से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, संविधान इनके एक दूसरे के कार्य पर नियंत्रक के रूप में कार्य करता है और एक दूसरे की शक्ति को संतुलित करता है।
A. भाग I
B. भाग II
C. भाग III
D. भाग IV
संविधान कुछ राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत निर्धारित करता है हालाँकि जो देश के शासन में मौलिक अधिकार की तरह कानून द्वारा समर्थित नहीं हैं लेकिन कानून बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
A. के.एम. मुंशी
B. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. सोमनाथ लाहिड़ी
D. आलादि कृष्णास्वामी अय्यर
सरदार वल्लभ भाई पटेल एक साथ दो विभाग के मंत्री थे। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने भारत के और किसी विभाजन को नामुमकिन कर दिया और रियासतों को भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया।
A. संविधान में संशोधन
B. संविधान के अनुच्छेद 312 के प्रस्ताव के तहत
C. अधिनियम
D. कार्यकारी आदेश
अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय सेवा गठित की जा सकती है और जो राज्य और केंद्र सरकार दोनों में वरिष्ठ पदों को संचालित करती है।
A. जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार
B. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
C. शोषण के विरुद्ध अधिकार
D. भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 21 प्रामाणिक रूप से कहता है कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर, किसी भी व्यक्ति को जीवन या उसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
A. संविधान
B. संसद
C. जनता
D. कार्यपालिका
संविधान अंतिम शक्ति जनता के हाथों में निहित करता है। यह भारतीय जनता द्वारा निर्मित, अधिनियमित और अंगीकृत किया गया है।
A. रूसी क्रांति
B. अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणापत्र
C. संयुक्त राष्ट्र चार्टर
D. फ्रांसीसी क्रांति
ये तीन बुनियादी सिद्धांत अर्थात स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ही वो मूल सिद्धांत थे जिसके आधार पर फ्रांसीसी क्रांति हुई थी। ये आदर्श दांते, रूसो और वॉल्टेयर जैसे प्रख्यात विद्वानों द्वारा प्रतिपादित किए गए थे।
A. 44वें संविधान संशोधन
B. 52वें संविधान संशोधन
C. 42वें संविधान संशोधन
D. 60वें संविधान संशोधन
42वें संविधान संशोधन के द्वारा प्रस्तावना में दो बदलाव किए गए थे। पहला इसने भारत की विशिष्टता “संप्रभु लोकतांत्रिक गणतंत्र” को “संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणतंत्र” कर दिया। दूसरा ‘राष्ट्र की एकता’ पद को ‘राष्ट्र की एकता और अखंडता’ में परिवर्तित कर दिया गया ।
A. इंग्लैंड
B. संयुक्त राज्य अमेरिका
C. आयरलैंड
D. फ्रांस
संयुक्त राज्य अमेरिका पचास राज्यों और संघीय जिलों से मिलकर बना एक संघीय संवैधानिक गणतंत्र है।
A. लिखित
B. गुप्त भाषा में लिखित, ताकि केवल सरकार ही समझ सकें
C. अलिखित
D. बदलाव करना असंभव
संसदीय संप्रभुता के सिद्धांत के अनुसार, संसद अपनी इच्छानुसार कोई भी कानून पारित कर सकती है। इसके विपरीत, जिन देशों में विधिबद्ध (लिखित) संविधान हैं, वहाँ विधायिका को सामान्यतः संविधान के खिलाफ कानून पारित करने से वंचित किया गया है।
A. केवल रियासतों के प्रतिनिधि
B. सरकार द्वारा मनोनीत
C. प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित
D. सीधे जनता द्वारा निर्वाचित
संविधान सभा के सदस्य, कैबिनेट मिशन योजना द्वारा सुझाए गए सिफारिश के अनुसार, प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से चुने गए थे।
A. मौलिक अधिकार
B. प्रस्तावना
C. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
D. संवैधानिक उपचारों का अधिकार
डॉ बी आर अम्बेडकर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32, अर्थात संवैधानिक उपचार के रूप में इसे 'दिल और संविधान की आत्मा' कहा है।
A. विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, कलकत्ता
B. टाउन हॉल, बम्बई
C. अल्बर्ट हॉल, जयपुर
D. सेंट्रल हॉल, नई दिल्ली
इनकी पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को नई दिल्ली के संविधान हॉल में हुई थी जो अब संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल के नाम से जाना जाता है।
A. फ्रांसीसी संविधान
B. दक्षिण अफ्रीका के संविधान
C. सोवियत संघ के संविधान
D. ब्रिटेन के संविधान
भारतीय संविधान निर्माता सोवियत संघ के औद्योगीकरण में पंचवर्षीय योजनाओं की सफलता के साथ चकित थे और भारत के आधुनिकीकरण के लिए सोवियत संघ के नियोजित मॉडल वाली अर्थव्यवस्था को अपनाना चाहते थे।
A. समाजवाद
B. संघात्मक
C. संप्रभु
D. गणराज्य
‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द प्रस्तावना में आपातकाल (1975-1977) के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार के औचित्य को दर्शाने के लिए जोडे गये थे।
A. प्रस्तावना
B. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
C. सार्वभौम वयस्क मताधिकार
D. उद्देश्य-प्रस्ताव
राष्ट्रीय आंदोलन से जिन सिद्धांतों को संविधान सभा में लाया गया उसका सर्वोत्तम सारांश हमें नेहरू द्वारा 1946 में प्रस्तुत ‘उद्देश्य-प्रस्ताव’ में मिलता है। इस प्रस्ताव में संविधान की सभी आकांक्षाओं और मूल्यों को समाहित किया गया था।
A. समर्थन
B. औचित्य
C. मांग
D. मतदान
संविधान को अधिकार इस तथ्य से मिलते है की संविधान सभा के सदस्य एक सार्वजनिक बोध में संलिप्त थे । इसके सदस्यों ने चर्चा और तर्कपूर्ण बहसों पर काफी जोर दिया।
A. अलग निर्वाचन क्षेत्र
B. अप्रत्यक्ष चुनाव
C. सार्वभौम वयस्क मताधिकार
D. राष्ट्रीय ध्वज
संविधान का केवल एक प्रावधान जो बिना किसी बहस के पारित किया गया था: सार्वभौम मताधिकार अर्थात् सभी नागरिक एक निश्चित उम्र प्राप्त करने पर धर्म, जाति, शिक्षा, लिंग या आय की परवाह किए बगैर मतदान के हकदार होंगे।
A. जनमत संग्रह
B. पहलकदमी
C. वापस बुलाना
D. जनमत संग्रह
किसी राजनीतिक प्रश्न पर जनता की राय जानने के लिए, मतदाता के पास मतदान करने के लिए भेजने को जनमत संग्रह कहते हैं।
A. गवर्नर जनरल के परिषद
B. ब्रिटिश कैबिनेट
C. कैबिनेट मिशन
D. विधान सभा
संविधान सभा की रचना मोटे तौर पर ब्रिटिश कैबिनेट की समिति — “कैबिनेट मिशन” द्वारा प्रस्तावित सुझाव के आधार पर हुई थी।
A. परिषद
B. विधानसभा
C. समिति
D. दल
संविधान सभा के सदस्य 1935 में स्थापित प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से चुने गए।
A. उपयोगी संस्था
B. विस्तृत
C. कानूनी मसौदा
D. जीवंत दस्तावेज़
भारतीय संविधान को ‘जीवंत’ दस्तावेज के रूप में उल्लिखित किया गया है। प्रावधानों को बदलने की संभावना के बीच संतुलन कायम करके और ऐसे बदलावों को सीमाबद्ध करके, संविधान ने सुनिश्चित किया है कि यह लोगों द्वारा सम्मानित एक दस्तावेज के रूप में अस्तित्व में रहेगा।
A. स्वतंत्रता
B. कठोरता और लचीलापन
C. अधिकार
D. निर्णय लेना
एक संविधान को आधिकारिक रूप में कुछ मूल्यों, मानकों और प्रक्रियाओं के बीच सही संतुलन कायम करना चाहिए और साथ ही साथ अपने संचालन में, बदलती जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसरण करने के लिए, पर्याप्त लचीलापन होना चाहिए।
A. नगालैंड
B. मणिपुर
C. सिक्किम
D. जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर असामान्य सामाजिक-राजनीतिक परिस्थियों और पाकिस्तान से युद्ध के पश्चात भारत का हिस्सा बना था। उस समय कश्मीरी संस्कृति और परंपराओं की विशिष्टता को बचाए रखने के लिए, भारत ने इसकी अलग संविधान की मांग को मंजूर कर लिया था।
A. सत्ता का बंटवारा
B. चुनाव
C. बहुसंख्यकवाद
D. बाध्यकारी कानून
अच्छी तरह से तैयार की गई संविधान समाज में शक्ति का विभाजन समझदारी से करता है, ताकि कोई भी समूह संविधान को उलट नहीं सकें। यह अक्सरहाँ विभिन्न संस्थाओं में शक्तियों के विभाजन द्वारा किया जाता है। जैसे कि भारतीय संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक समान धरातल पर अधिकार दी गई है।
A. भारत
B. अमेरिका
C. ब्रिटेन
D. फ्रांस
अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के बाद, अमेरिका के विभिन्न प्रांत एक संघ के गठन के लिए और जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा लिखित संविधान तैयार करने के लिए एक साथ आए।
A. ब्रिटिश संविधान
B. कनाडा के संविधान
C. आयरिश संविधान
D. फ्रांसीसी संविधान
हमारे संविधान में विभिन्न प्रावधानों को विभिन्न संविधानों से लिया गया है। ब्रिटिश से हमने संसदीय सरकार का प्रारूप लिया है। कनाडा से हमने अवशिष्ट शक्तियाँ; आयरिश से राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत लिये है और फ्रांसीसी संविधान से स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार को लिया हैं।
A. 1951
B. 1959
C. 1962
D. 1990
1990 में संविधान द्वारा बहु-दलीय लोकतंत्र की शुरुआत की गई पर अनेक क्षेत्रों में नरेश के पास अंतिम शक्तियाँ बनी रहीं।
A. 4
B. 5
C. 6
D. 7
नेपाल में 1948, 1951, 1959, 1962 और 1990 में पांच संविधान तैयार किए गए। इन सभी संविधानों को नेपाल के राजा द्वारा ‘स्वीकृति’ दी गई थी।
A. लोकतांत्रिक पृष्ठभूमि
B. प्रदत्त अधिकार
C. ठोस दस्तावेज़
D. लचीलापन
दुनिया में वो संविधान जो जनता के प्रतिनिधियों द्वारा तैयार किए गए हैं उनको बहुत अधिक वैधता प्राप्त है। चूँकि प्रतिनिधियों को जनता का बहुत ज्यादा विश्वास प्राप्त होता है, फलतः उनमें चर्चा करने की क्षमता और समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व का सम्मान प्राप्त होता है।
A. युद्ध
B. राष्ट्रीय आंदोलन
C. औपनिवेशीकरण
D. एकीकरण
भारत, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के सफलतम संविधान, लोकप्रिय राष्ट्रीय आंदोलनों के के बाद बनाए गए हैं।
A. धार्मिक विचारों का
B. लचीलापन का
C. लिखित दस्तावेज का
D. जन-समर्थन का
अनेक देशों में संविधान इसीलिए निष्प्रभावी होते हैं क्योंकि वे सैनिक शासकों या ऐसे अलोकप्रिय नेताओं के द्वारा बनाये जाते हैं जिनके पास लोगों को अपने साथ लेकर चलने की क्षमता नहीं होती। उदाहरणस्वरूप इराक में सद्दाम शासन के पतन के बाद, इराक के लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ नए संविधान बनाया।
A. मामूली संशोधन
B. पुनर्मूल्यांकन
C. जनमत संग्रह
D. संवैधानिक संशोधन
कुछ देशों के संविधान पूर्ण जनमत संग्रह के अधीन हैं, जहाँ सभी लोग संविधान की वांछनीयता पर वोट देते हैं।
A. ऊर्जा
B. ब्लैक रेस
C. यूरेनियम
D. प्रकृति
दक्षिण अफ्रीका के संविधान सरकार को कई जिम्मेदारियां प्रदान करती है: यह चाहती है कि सरकार प्रकृति के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उपाय करें, लोगों या समूहों के खिलाफ अनुचित भेदभाव को रोकने का प्रयास करें और सरकार क्रमशः सभी के लिए पर्याप्त आवास सुनिश्चित करें।
A. सरदार हुकुम सिंह
B. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
C. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
D. सरदार पटेल
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने महात्मा गांधी के कथन को उद्धृत किया कि स्वराज का मतलब स्वतंत्र रूप से चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों की इच्छाओं की अभिव्यक्ति होगा।
यह आंकडों के संग्रहण, विश्लेषण, निर्वचन या स्पष्टीकरण और प्रस्तुतिकरण से संबंधित गणितीय विज्ञान है।
सांख्यिकीय विश्लेषण के पांच चरण निम्न हैं-
* आंकड़ों का संकलन
* आंकड़ों का संगठन
* आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण
* आंकड़ों का विश्लेषण
* आंकड़ों का निर्वचन
सांख्यिकी
की दो सीमाएं
निम्न हैं-
* परिणाम
गलत साबित हो
सकते हैं
* व्यक्तिगत
इकाइयों के
लिए उपयोगी
नहींहैं
एकवचन के रूप में, सांख्यिकी वह विज्ञान है जिसमें सांख्यात्मक आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण, निवर्चन और प्रस्तुतिकरण में प्रयुक्त विधियों को शामिल किया जाता है।
सांख्यिकी
के ये दो लाभ
हैं-
* निर्णय
लेने में मदद
करती है
* योजना
बनाने के लिए
उपयोगीहै
बहुवचन में सांख्यिकी अध्ययन के किसी भी क्षेत्र में एक निश्चित उद्देश्य के साथ एक व्यवस्थित तरीके से संख्यात्मकतथ्यों तथा आंकडों के संकलनसे उल्लेखित किया जाताहै, उदाहरण के लिए विभिन्न वर्षों में देश की जनसंख्या में वृद्धि आदि।
सांख्यिकी को दो प्रकार से परिभाषित किया गया है- एकवचन और बहुवचन।
सांख्यिकीय उपकरण निर्यात, आयात, उत्पादन आदि के संबंध में विभिन्न निर्णय लेने में सरकार की मदद करते हैं। इन तथ्यों और आंकडों के आधार पर योजनाओं को क्रियान्वित किया जाता है। राष्ट्रीय संसाधनों का समुचित उपयोग करने के लिए नियोजन सबसे अच्छा तरीका है।
एक डॉक्टर, या वकील या व्यापारी के रूप में एक आदर्श घर का पिता कार्य करता है और धन कमाता है। मां भी एक बैंक या एक कॉलेज या स्कूल में कार्य करती है। बड़ा भाई या बहन कॉल सेंटर में कार्यकरते है। वे सभी धन के लिए कार्य करते हैं। इन्हें आर्थिक क्रियाएं कहा जाता है। मां परिवार के लिए खाना भी बनाती है। पिता आपके होमवर्क कराने में मदद करते है। भाई बाजार से खाद्य सामग्री लाता है यह सभी गैर आर्थिक क्रियाएं हैं।
एकवचन अर्थ में सांख्यिकी:
· यह वह विज्ञान है जिसमें संकलन, विश्लेष्ण, निर्वचन तथा संख्यात्मक आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण में उपयोग होने वाली विधियाँ शामिल हैं|
· इस विधि का उपयोग जनसंख्या प्राचल का निष्कर्ष निकालने में किया जाता है|
अर्थशास्त्र विभिन्न अर्थ शास्त्रियों द्वारा विभिन्न प्रकार से परिभाषित किया गया है|
संपत्ति परिभाषा: ‘’अर्थशास्त्र एक विज्ञान हैं जो राष्ट्र की संपत्ति की प्रकृति तथा कारण की जाँच करता है|’’
कल्याण परिभाषा: ‘’ अर्थशास्त्र जीवन के सामान्य व्यवसाय के संबंध में मानवजाति का अध्ययन करता है,इसके अंतर्गत यह आय कैसे प्राप्त होती है तथा व्यय कैसे होता है इसका अध्ययन करताहै| ‘’
लियोनेल रॉबिंस ने अर्थशास्त्र को निम्न प्रकार से परिभाषित किया:
‘’ अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो अंतिम तथा सिमित माध्यम के संबंध में मानव व्यवहार का अध्ययन करता है और जिसके वैकल्पिक उपयोग हैं
वितरण का अध्ययन: इसमें वेतन, किराया, ब्याज तथा लाभ के रूप में विभिन्न उत्पादन के कारकों की आय के वितरण का अध्ययन किया जाता है| इसमें विभिन्न पहलु सम्मिलित होते हैं जैसे की :
अर्थशास्त्र और सांख्यिकी के बिच निम्न संबंध हैं:
·
·
·
बहुवचन अर्थ में सांख्यिकी-
· यूल और केंडल के अनुसार:
‘’ सांख्यिकी से हमारा तात्पर्य उन संख्यात्मक तत्वों से हैं जो पर्याप्त सीमा तक अनेक प्रकार के कारणों से प्रभावित होतेंहैं|’’
· ए. एल.बाउले के अनुसार:
“आँकड़े अनुसंधान के किसी विभाग में तथ्यों की संख्या के रूप में ऐसे विवरण होते हैं, जिन्हें एक-दुसरे के संबंधित रूप में प्रस्तुत किया जाता है|”
एकवचन अर्थ में सांख्यिकी-
· बूडिंगटन के अनुसार:
‘’सांख्यिकीअनुमानतथासंभावनाओंकाविज्ञानहै| ‘’
· बाउले के अनुसार:
“सांख्यिकी को सहीमायने में औसत का विज्ञान कहा जाता है|”
अर्थशास्त्र उत्पादन, उपभोग तथा वितरण की आर्थिक गतिविधियाँका अध्ययन करता हैं:
· उपभोग का अध्ययन:
उपभोक्ता का प्रमुख उद्देश्य होता है अधिकतम संतुष्टि| विभिन्न वस्तुओं के उपभोग के लिए यह उपभोक्ता के व्यवहार का अध्ययन करता है|
· उत्पादन का अध्ययन:
इसमें विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन की दि हुई लागत और कीमत के स्तर पर उत्पादक के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है|इसका उद्देश्य है अधिकतम लाभ| उत्पादक को उपलब्ध संसाधनों की मदद से किस प्रकार की वस्तु का उत्पादन करना है यह सोचना होता हैं|उदाहरण के लिए: पुरानी तकनीक
· वितरण का अध्ययन:
इसमें वेतन, किराया, ब्याज तथा लाभ के रूप में विभिन्न उत्पादन के कारकों की आय के वितरण का अध्ययन किया जाता है| इसमें विभिन्न पहलु सम्मिलित होते हैं जैसे की :
बेरोज़गारी, गरीबी, प्रति व्यक्ति आय,आधारिक संरचना आदि|
आर्थिक समस्याओं के विभिन्न कारण हैं:
· मनुष्य की असीमित इच्छाएं:
मनुष्य की इच्छाएंकभी खत्म नहीं होती तथा विशाल होती हैं| कुछ इच्छाएंआवर्ती होती हैं जबकि कुछ इच्छाएंआर्थिक कारकों के कारण उत्पन्न होती हैं|
· सीमित संसाधन:
उपलब्ध संसाधनों की पूर्ति उनकी माँग की तुलना में सीमित होती है|उदाहरण के लिए:खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनकी पूर्ति सीमित है|
· संसाधनों के विविध या वैकल्पिकउपयोग:
लकड़ी का उपयोग ईंधन या फर्नीचर बनाने के लिए किया जा सकता है|इसका चुनाव लाभप्रदता पहलु को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए|
सांख्यिकी के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं-
1. सांख्यिकी जटिल आंकडों को सरल करती है।
2. सांख्यिकी निश्चित रूप से तथ्यों को प्रस्तुत करती है।
3. सांख्यिकी तुलना की तकनीक प्रदान करती है।
4. सांख्यिकी संबंधों का अध्ययन करती है।
5. सांख्यिकी नीतियों के निर्धारण में मदद करती है।
6.
सांख्यिकी
पूर्वानुमान
में मदद करती
है।
7.
सांख्यिकी
परीक्षण
करने और
सिद्धांतों
को तैयार
करने में मदद
करती है।
यदि चरों
को संख्यात्मक
रूप में मापा
जाता है, तो
यह मात्रात्मक
आकडें है। एक
कथन जैसे ''भारत
में चावल का
उत्पादन 1974-75
में 39.58 मिलियन
टन से बढकर 1984-85
में 58.64 मिलियन
टन हो गयाएक
मात्रात्मक
तथ्य है।
कभी-कभी
चरों को संख्यात्मक
रूप में मापना
संभव नहीं
होता है। ये
एक व्यक्ति
या समूह के
गुण हैं जिन्हें
मात्रात्मक
रूप से नहीं
मापा जा सकता
है इसलिए
जितना संभव
हो उतना इन्हें
विशुद्ध रूप
से दर्ज करना
महत्वपूर्ण
है। उदाहरण
के लिए लिंग और
कौशल। हम
लोगों को
अकुशल/कुशल/अधिक
कुशल के रूप
में वर्गीकृत
कर सकते हैं।
इस तरह की
गुणात्मक
जानकारी का
अर्थशास्त्र
में भी
प्रयोग किया
जाता है और
मात्रात्मक
जानकारी व्यवस्थित
ढंग से
संग्रहित की
जाती है।
सांख्यिकी की विशेषताएँ निम्न हैं:
यह तथ्यों का कुल जोड़ है जो कि किसी विशेष जांच के क्षेत्र से संबंधित है। सामान्य या पृथक चीज़ों को सांख्यिकी के रूप में नहीं परिभाषित किया जा सकता।
यह बहुत से कारणों से प्रभावित होतें है| उदाहरण के लिए, कृषि उत्पादन विभिन्न कारकों से निर्धारित होता है जैसे: बरसात, मृदा स्थिति, उपयोग किए जाने वाले उर्वरक आदि|
इनकों संख्या में व्यक्त किया जा सकता है| यहाँ तक कि गुणात्मक विशेषताएँ जैसे खूबसूरती, ईमानदारी आदि को भी संख्या के संबंध में निश्चित समंक देना होता है|
यह शुद्धता के उचित मानक के अनुसार प्रगणित हो सकते हैं, खासतौर पर सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए|
यह पूर्व निर्धारित उद्देश्य के लिए संकलित किए जाते हैं| सांख्यिकी विश्लेषण का लक्ष्य या उद्देश्य स्पष्ट रूप से परिभाषित होना चाहिए|
उन्हें एक दूसरे के संबंध में रखा जाता है| सांख्यिकी विश्लेषण के लिए, संकलित आंकड़े कुछ इकाई के लिए तुलनात्मक होने चाहिए, सामान्यतः समय या जगह|
A. अनुच्छेद 17
B. अनुच्छेद 16
C. अनुच्छेद 18
D. अनुच्छेद 19
भारत के संविधान में, स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से 22 में उल्लिखित हैं। यह भाषण और अभिव्यक्ति की और भारतीय भूक्षेत्र के किसी भी भाग में बसने या रहने की और संघ या यूनियन आदि के गठन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
A. संविद
B. संविधान
C. कानून
D. परंपरा
संविधान बुनियादी सिद्धांतों का संग्रह प्रदान करता है जो समाज के सदस्यों के बीच न्यूनतम सहयोग की अनुमति देते हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने राष्ट्र को एक ऐसा दस्तावेज प्रदान किया, जो लोगों के मूलभूत मूल्यों को प्रतिष्ठापित (निरुपित) करता था। इसी कारण से हमारा संविधान एक जीवंत वास्तविकता बन गया, जबकि दुनिया के अनेक संविधान समाप्त हो गए।
(1) फ्रांस के संविधान से उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रावधान लिए।
(2) आयरलैंड के संविधान से उन्होंने राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत लिए।
राष्ट्रीय आंदोलन से जिन सिद्धांतों को संविधान सभा में लाया गया उसका सर्वोत्तम सारांश हमें नेहरू द्वारा 1946 में प्रस्तुत ‘उद्देश्य-प्रस्ताव’ में मिलता है। समानता, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, संप्रभुता और एक सर्वजनीन पहचान जैसे प्रस्तावों में संविधान की आकांक्षाओं और मूल्यों को समाहित किया गया था।
संविधान सभा के सदस्यों ने चर्चा और तर्कपूर्ण बहसों पर काफी जोर दिया। उन्होंने सिर्फ अपने हितों की बात नहीं की बल्कि अपनी सोच और फैसले के पक्ष में अन्य सदस्यों को सैद्धांतिक कारण दिए। संविधान सभा का विस्तृत विचार-विमर्श जिसमें हर अनुच्छेद को लेकर विस्तृत और बारीकी से बातचीत हुई है, वह “सार्वजनिक विवेक” की भावना का सम्मान है।