A.
घटक दण्ड आरेख
B.
अंतर्विभक्त दण्ड आरेख
C.
विचलन दण्ड आरेख
D.
सरल दण्ड आरेख
घटक दंड-आरेख: · इसको उप-आरेख भी कहते हैं| · इसका उपयोग विभिन्न घटक भागों के आकार की तुलना करने के लिए किया जाता है| · यह इन अभिन्न अंगों के मध्य संबंध की सूचना देता है|
A.
प्रतिशत दण्ड आरेख
B.
सरल दण्ड आरेख
C.
विचलन दण्ड आरेख
D.
बहुगुणी दण्ड आरेख
सरल दंड- आरेख · यह केवल एक ही चार (या एक ही प्रकार के संख्यात्मक तथ्यों ) के विभिन्न मूल्यों को दण्डों द्वारा प्रकट करते है| · दंड की ऊँचाई या लंबाई चर के परिमाण को प्रकट करती है| · यह या तो क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर आधार पर बनाया जाता है|
A.
पाई आरेख
B.
दण्ड आरेख
C.
आयतचित्र
D.
बहुभुज
वृत्त आरेख एक ऐसा वित्तिय आरेख हैए जिसके क्षेत्र को आनुपातिक रूप से क्षेत्रों या घटकों में विभाजित किया जाता हैए जिन्हें यह दर्शाता है। वृत्त चार्ट या पाई आरेख भी कहते हैं l
A.
दण्ड आरेख
B.
आयात चित्र
C.
वृत्त आरखे
D.
दोनों (A) तथा (C)
ज्यामितीय आरेख को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है: · दंड आरेख और · वृत्त आरेख
बारंबारता वक्र बारंबारता बहुभुज के बिंदुओं से निकटतम गुजरते हुए मुक्त-हस्त से वक्र बनाकर प्राप्त किया जा सकता है| इसका मुख्य उद्देश्य सममितीय रूप में आयत चित्र द्वारा ढके हुए क्षेत्र को आलेखित रूप में प्रस्तुत करना है|
A.
ऊपर की ओर बढ़ता हुआ
B.
नीचे की ओर घटता हुआ
C.
X-अक्ष के समानांतर
D.
Y-अक्ष के समानांतर
से कम तोरण वक्र को वर्ग अंतराल की ऊपरीसीमा के सम्मुख आलेखित किया जाता है।बारंबारताओं के आलेखन द्वारा हमें एक बढ़ता हुआ वक्र प्राप्त होता है।
A.
आवृति चित्र
B.
बारंबारता बहुभुज
C.
आवृति वक्र
D.
इनमें से कोई नही
बारंबारता बहुभुज एक वक्र के रूप में बारंबारता वितरण की एक चित्रमय प्रस्तुति है जिसे क्रमिक आयतों के ऊपरी छोर के मध्य बिंदुओं को जोड़ कर आयत चित्र पर आरोपित किया जाता है।
A.
सतत श्रृंखला
B.
विविक्त श्रृंखला
C.
व्यक्तिगत श्रृंखला
D.
इनमें से कोई नही।
आयत चित्र एक द्विविम आरेख है| यह आयतों का समुच्चय है| यह वर्ग बारंबारता के लिए आनुपातिक वर्ग सीमाओं और क्षेत्रफलों के बीच के अंतराल पर आधारित है। यह संतत बारंबारता वितरण से संबधित होता है|
स्थानिक वर्गीकरण में आंकड़ों का वर्गीकरण भौगोलिक विभाजन के आधार पर किया जाता है, जैसे: • महाद्वीप • देश • राज्य, आदि|
A.
स्थान के आधार पर
B.
समय के आधार पर
C.
मौलिकता के आधार पर
D.
उद्देश्य के आधार पर
कालिक वर्गीकरण में, आंकड़ों को समय अवधि के आधार वर्गीकृत किया जाता है: जैसे: • दिन • हफ्ते • महीने • साल • दशक आदि में
A.
सामान्य उद्देश्य तथा विशेष उद्देश्य सारणी
B.
द्विगुणी
C.
मौलिक तथा स्युत्पन्न सारणी
D.
समय सारणी
जटिल सारणी को निम्न में वर्गीकृत कर सकते हैं: · द्विगुणी सारणी · त्रिगुणी सारणी · बहुगुणी सारणी यह सारणी आंकड़ों के एक से अधिक गुणों को प्रकट करती है|
A.
शीर्षक
B.
पंक्ति शीर्षक
C.
उपशीर्षक
D.
इनमें से कोई नहीं
स्तंभ में दिए शीर्षक को उप-शीर्षक कहते हैंजो स्तंब के अंतर्गत दी गई संख्याओं की व्याख्या करता है | पंक्ति के शीर्षक को अवशीर्ष या अवशीर्ष मदें कहते हैं| उप-शीर्षक या स्तंभ शीर्षक तथा अवशीर्ष या पंक्ति शीर्षक जितना मुमकिन हो उतना संक्षिप्त में होने चाहिए|
A.
शीर्ष
टिप्पणी
B.
पाद टिप्पणी
C. हस्त टिप्पणी
D. स्रोत टिप्पणी
एक अच्छी सारणी में निम्न बातें आवश्यक रूप से होनी चाहिए: · सारणी संख्या · शीर्षक · उप-शीर्षक या स्तंभ शीर्षक तथा अवशीर्ष या पंक्ति शीर्षक · सारणी का मुख्य भाग · शीर्ष टिप्पणी तथा माप की इकाई · पाद टिप्पणी · स्रोत टिप्पणी
A.
सारणी की संख्या
B.
शीर्षक
C.
शीर्ष टिप्पणी
D.
अपरोक्त सभी
एक अच्छी सारणी में निम्न बातें आवश्यक रूप से होनी चाहिए: · सारणी संख्या · शीर्षक · उप-शीर्षक या स्तंभ शीर्षक तथा अवशीर्ष या पंक्ति शीर्षक · सारणी का मुख्य भाग · शीर्ष टिप्पणी तथा माप की इकाई · पाद टिप्पणी · स्रोत टिप्पणी
सारणीबद्ध प्रस्तुतीकरण में आंकड़ों को उनकी विशेषताओं और लक्षणों के आधार पर उनकी पंक्तियों तथा स्तंभों में प्रस्तुत किया जाता है|
कालिक वर्गीकरण मैं आंकड़ों को समय अवधि के आधार वर्गीकृत किया जाता है। जैसेः दिन, हफ्ते, महीने, साल, दशक, आदि में।
यह एक वक्र के रूप में बारंबारता वितरण की एक चित्रमय प्रस्तुति है जिसे क्रमिक आयतों के ऊपरी छोर के मध्य बिंदुओं को जोड़ कर आयत चित्र पर आरोपित किया जाता है।
यह एक ऐसा वृत्तीय आरेख है, जिसके क्षेत्र को आनुपातिक रूप से क्षेत्रों या घटकों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें यह दर्शाता है। इसे वृत चाट भी कहते है।
संचयी बारंबारता दो प्रकार की होती हैं:
• से कम
• से अधिक
इसको काल श्रेणी आलेख भी कहते हैं| इसमें काल को X-अक्ष पर आलेखित किया जाता है|
और चर का मान Y-अक्ष पर आलेखित किया जाता है|
एक सारणी की पंक्तियां को अवशीर्ष के द्वारा पहचाना जाता है। सरल शब्दों में, ये पंक्ति शीर्षक हैं। हम क्षैतिज आधार पर अवशीर्ष के अंकों को पढते हैं।
एक सांख्यिकीय सारणी पंक्तियों और स्तम्भों में आंकडों की एक सुव्यवस्थित प्रस्तुति है।
उपशीर्षक स्तम्भ शीर्षक हैं। इनका एक स्तम्भ की विषय वस्तु की व्याख्या करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
जब एक स्थान को वर्गीकृत चर के रूप में प्रयोग किया जाता है तो इस वर्गीकरण को स्थानिक वर्गीकरण कहा जाता है। यह स्थान कोई गांव, कस्बा, राज्य, देश आदि हो सकता है।
वर्गीकृत सूचना को एक व्यवस्थित सारणी में प्रस्तुत करने को सारणीकरण कहा जाता है।
दंड आरेख के दो प्रकार हैं-
क) सरल दंड आरेख
ख) बहु दंड आरेख
दो या दो से अधिक चरों की तुलना करने के लिए बहु दंड आरेखों का प्रयोग किया जाता है। ये आंकडों के दो या दो से अधिक समुच्चयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
एक तालिका में प्रस्तुत करने के लिए आंकडों को चार तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है-
1. कालानुक्रमिक वर्गीकरण
2. मात्रात्मक वर्गीकरण
क) असतत
ख) सतत
3. भौगोलिक वर्गीकरण
4. गुणात्मक वर्गीकरण
क) द्वन्द्वभाजक
ख) बहुभाजक
उन वर्गीकृत सारिणयों को मौलिक सारणियां कहा जाता है जिसमें सांख्यिकीय सूचनाएं ऐसे संग्रहित आंकडों के रूप में होती है जिसमें वे मूल रूप से संग्रहित की गयी है।
व्युत्पन्न सारिणयां मौलिक से व्युत्पन्न होती हैं। ये मूल विवरणों से कुल योग, अनुपात, प्रतिशत और अन्य सांख्यिकीय गणनाएं तैयार करती है।
एक वस्तु या व्यक्ति की कुछ विशेषताएं मापनीय या गैर मापनीय हो सकती है।एक मात्रा जिससे एक श्रंखला के संख्यात्मक मानों की कल्पना की जा सकती है को एक चर कहा जाता है अर्थात् एक मापनीय विशेषता को चर में रूप में जाना जाता है और श्रंखला के अंदर प्रत्येक मान को विचर या प्रेक्षण कहा जाता है। उदाहरण के लिए ऊंचाई, और वजन आदि। गैर मापनीय विशेषताएं वो होती है जिन्हें मापा नहीं नहीं जा सकता है परंतु विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है ऐसी विशेषताओं को गुण कहा जाता है। उदाहरण के लिए मातृ भाषा, रंगरूप, र्इमानदारी, धर्म इत्यादि।
1) एक सांख्यिकीय सारणी सरल और संक्षिप्त होनी चाहिए जिससे कि यह आसानी से समझ में आये। यह अतिव्यापन और संदेहों से मुक्त होनी चाहिए।
2) एक सांख्यिकीय सारणी पूर्ण और सुगम होनी चाहिए। इसमें एक उपयुक्त शीर्षक, स्तम्भ शीर्षक, उपशीर्षक और पादटिप्पणी होनी चाहिए।
3) एक तालिका की आकर्षक सजावट वाली होनी चाहिए जो कि आंखों और मन को भाए जिससे कि पाठक बिना किसी तनाव के इसे समझ सके।
सारणीयन या सारणीबद्ध प्रस्तुतिकरण आंकडों के आवश्यक लक्षण और मुख्य विशेषताओं को बाहर निकालने की एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें सुव्यवस्थित तरीके से वर्गीकृत आंकडों का प्रस्तुतिकरण होता है।
* तुलना- यह चरों के बीच की तुलना को समझने के लिए बहुत आसान है।
* सरलीकरण- यह आंकडों को उनके वर्गीकरण के अनुसार सरल करता है।
* पहचान- आंकडों को उपयुक्त संख्या और शीर्षक में व्यवस्थित करने के बाद, इसे ग्राफों के रूप में आसानी से प्रस्तुत किया जा सकता है।
* विश्लेषण- सारणीकरण सारणियों द्वारा आकडों के विश्लेषण आसान बनाता है।
*सही प्रस्तुति- सारणी संक्षेप में मूल्यों को प्रस्तुत करती है और इसे ग्राफ में प्रस्तुत करने में मदद करती है।
सामान्य उद्देश्य सारणी का कोई विशेष महत्व नहीं होता है क्योंकि इनका विभिन्न रूपों में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर, इसे पिछली रिपोर्टों और परिपत्रों के पर आधार पर दिया जाता है।
विशिष्ट उद्देश्य सारणियां विशिष्ट उद्देश्यों के लिए दी जाती है। ये उस विशेष समूह के उद्देश्यों को पूरा करती हैं जिसके लिए ये बनायी गयी हैं। ये संक्षिप्त होती है और विशिष्ट उद्देश्य के लिए लक्षित होती हैं।
द्वितीयक आँकड़ों के दो मुख्य स्रोत हैं: प्रकाशित स्रोत तथा अप्रकाशित स्रोत|
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सी.एस.ओ) भारत की सांख्यिकीय गतिविधियों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है| यह प्राथमिक आँकड़े इकठ्ठा करती है|
आँकड़े, वे एकत्रित सूचनाए हैं जो विश्लेषण के लिए प्रयोग किए जाते हैं और जिनसे कोई सार्थक निष्कर्ष या परिणाम निकाले जा सकते है।
राष्ट्रीय प्रतिदर्श संगठन या NSSO भारत सरकार का वह संगठन है जो नियमित रूप से सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक, कृषि और औद्योगिक सर्वेक्षणों के संचालन में शामिल रहता है।
प्राथमिक आंकड़ें अन्वेषक द्वारा सीधे प्रतिदर्श या जनसंख्या से एकत्रित किये जाते है, जबकि द्वितीयक आंकड़ें अन्य एजेंसियों द्वारा एकत्रित किये जाते है और इसे अन्वेषक द्वारा उपयोग किया जाता है।
द्वितीयक आंकड़ें निम्न से प्राप्त किया जा सकते हैं-
1. प्रकाशित स्रोतों जैसे किताबों, पत्रिका, सरकारी सर्वेक्षण रिपोर्टों आदि।
2. अप्रकाशित स्रोतों जैसे शोध पत्रों।
द्वितीयक आंकड़ें उन आंकड़ों को दर्शाते हैं जिन्हें कुछ अन्य व्यक्तियों या एजेंसी द्वारा संगृहीत किया जाता है और अन्वेषक द्वारा उपयोग किया जाता है। यह प्रकाशित या अप्रकाशित रूप में हो सकता है।
प्रश्नावली अध्ययन के उद्देश्य के अनुसार अन्वेषक द्वारा तैयार किये गये प्रश्नों का एक समुच्चय है। इसका प्राथमिक आंकड़ें को संगृहीत करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
प्रतिदर्श विधि में जनसंख्या से केवल चयनित प्रतिदर्शों का अध्ययन किया जाता है। ये प्रतिदर्श पूरी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रेषित प्रश्नावली विधि प्राथमिक आंकड़ें संगृहीत करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधि है।
यादृच्दिक प्रतिचयन विधि में, प्रतिदर्शों को यादृच्छिक आधार पर चुना जाता है। इस विधि में, समूह में प्रत्येक मान के चयनित होने का बराबर मौका मिलता है।
प्राथमिक आंकड़ों को एकत्रित करने के लिए प्रयोग होने वाली सभी विधियां महंगी है।
जो आंकडें नियुक्त प्रगणक द्वारा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किये जाते हैं उन्हें प्राथमिक आंकड़ें कहा जाता है।
अप्रतिचयन त्रुटियाँ आमतौर पर माप उपकरणों में त्रुटि से आती हैं।
प्रतिचयन त्रुटियाँ सर्वेक्षण में संयोगवश होती हैं|
सांख्यिकी में त्रुटियाँ दो प्रकार की होती हैं:
• प्रतिचयन त्रुटियाँ
• अप्रतिचयन त्रुटियाँ
सांख्यिकी में, त्रुटी का अर्थ है अनुमानित मूल्य और समष्टि विशेष के वास्तविक मूल्य के बीच अंतर।

1.
प्रत्यक्ष
व्यक्तिगत
अन्वेषण
2. अप्रत्यक्ष
व्यक्तिगत
अन्वेषण
3. संवाददाताओं
से सूचना
4. प्रेषित
प्रश्नावली
विधि
5. प्रगणक
की मदद से
प्रश्नावली
के माध्यम
से सूचना
प्रतिचयन की दो विधियाँ होती हैं:
• यादृच्छिक प्रतिचयन और
• अयादृच्छिक प्रतिचयन
यादृच्छिक प्रतिचयन विधि में, जनसंख्या से प्रतिदर्श यादृच्छिकता से लिए जाते हैं जिसमें जनसंख्या के सभी तत्वों के चयनित होने की समान संभावना होती है।
अयादृच्छिक प्रतिचयन विधि में, जनसंख्या के सभी तत्वों के चयनित होने की समान संभावना नहीं होती है। जनसंख्या के सदस्य न्याय, उद्देश्य, सुविधा आदि के आधार पर चुने जाते हैं।
A.
सांख्यिकीय श्रृंखला
B.
व्यवस्था
C.
वर्गीकरण
D.
संगठन
वर्गीकरण, आँकड़ों को समानता तथा सादृश्यता के आधार पर वर्गों या विभागों में क्रमानुसार रखने की क्रिया है और इनसे व्यक्तिगत इकाइयों की भिन्नताओं में पाए जाने वाले गुणों की एकता को व्यव्क्त किया जाता है|
A.
दो प्रकार
B.
तीन प्रकार
C.
चार प्रकार
D.
पांच प्रकार
व्यक्तिगत श्रेणी, विविक्त श्रेणी और संतत श्रेणी इन तीन प्रकार से सांख्यिकीय श्रेणियों को निर्माण के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है|
A. भौगोलिक वर्गीकरण
B. मात्रात्मक वर्गीकरण
C. गुणात्मक वर्गीकरण
D. कालानुक्रमिक वर्गीकरण
कालानुक्रमिक वर्गीकरण में आँकड़ों को समय के अनुसार वर्गों में बांटा जाता है जैसे, दिन, हफ्ते, महीने, साल, दशक आदि|
A. अपरिष्कृत श्रेणीयां
B. व्यक्तिगत श्रेणियां
C. बारंबारता
D. सरणी
हर व्यक्तिगत मद की सूचना दर्ज की जाती है। परिमाण के आरोही या अवरोही क्रम में आँकड़ों को रखना सारणी कहलाता है|
परास, अधिकतम और निम्नतम चरों के मान के बिच का अंतर होता है| यहवर्गों की संख्या के निर्धारण के लिए आवश्यक है|
उदाहरणकेलिए: बच्चोंकेएकसमूहसेइंद्रधनुषमेंउनकेप्रीयरंगकाएकसर्वेक्षणकियागया| अगरपीलारंग30बारचुनागया, तोपीलेरंगको30कीबारंबारतामिलेगी|
A.
बारंबारता
B. श्रेणी
C. वर्ग
D. वितरण
ऊपरी और निचले वर्ग सीमा के बीच के अंतर वर्ग अंतराल कहा जाता है। उदाहरण के लिए, 0-10, 10-20, 20-30 आदि
A. L2-L1
B. (L2-L1)/2
C. L1+L2
D.
(L1+L2)/2
मध्य-बिन्दु निम्न तथा उच्च सीमा का आधा होता है| संख्यानुसार इसको निम्न प्रकार लिखा जा सकता है: उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के योग को 2 से भाग किया जाता हैं |
A. अपवर्जी विधि
B. समावेशी विधि
C. दोनों (1) तथा (2)
D. इनमें से कोई नहीं
उदाहरण के लिए: अगर विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों को 5-10, 10-15 आदि के समूह में बांटा गया हो, तो जिन विद्यार्थियों के अंक 5 या उससे अधिक परन्तु 10 से कम हैं उन्हें 5-10 वाले समूह में सम्मिलित किया जाएगा|
चर एक वस्तु या विशेषताओं को संदर्भित करता हैं, जिनको मापा जाना संभव है और जिसके मान समय के साथ बदलते रहते हैं| दो प्रकार के चर हैं: संतत चर और विविक्त चर
A.
भौगोलिक
वर्गीकरण
B. गुणात्मक वर्गीकरण
C. मात्रात्मक वर्गीकरण
D. कालानुक्रमिकवर्गीकरण
कालानुक्रमिक वर्गीकरणमेंआँकड़ोंकोसमयकेअनुसारवर्गोंमेंबांटाजाताहैजैसे, दिन, हफ्ते, महीने, साल, दशकआदि|
सरलता, संक्षेप तथा तार्किक रूप में आँकड़ों का प्रस्तुतिकरण ताकि एक सामान्य व्यक्ति आँकड़ों को एक नज़र में समझ सके|
वर्ग सीमा को निर्धारित करने की दो विधियाँ निम्न हैं,
· समावेशी विधि
· अपवर्जी विधि
परास, अधिकतम और निम्नतम चरों के मान के बिच का अंतर होता है|
सामान्य विशेषताओं के आधार पर निम्न तिन प्रकार की श्रेणीयां होती हैं:
· काल श्रेणी
· स्थानिक श्रेणी
· स्थिति श्रेणी
निर्माण के आधार पर निम्न तिन प्रकार की श्रेणीयां होती है:
· व्यक्तिगत श्रेणी
· विविक्त श्रेणी
· संतत श्रेणी
वर्गीकरण के उद्देश्य निम्न है:
· सरल रूप में तथ्यों को प्रस्तुत करना
· तथ्योंया आकड़ों को तुलनायोग्य बनाना
अपवर्जी श्रृंखला में, वर्गों की उच्च वर्ग सीमाओं को संबंधित वर्गों में सम्मिलित नहीं किया जाता है, उदाहरण के लिए, 10-15, 15-20, 20-25 आदि।
विविक्त चरों के आधार पर बनायी जाने वाली सांख्यिकीय श्रृंखला को विविक्त श्रृंखला कहा जाता है।
द्विचर वितरण दो चरों की बारंबारता वितरण को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में छात्रों द्वारा प्राप्त किये गये अंक।
आंकड़ों
में 50 % मदों
का मान मध्यिका
से कम और 50 % मदों
का मान
मध्यिका से
अधिक होता है |
B.
बहुलक
C.
समापवर्तक
D.
बारम्बारता
माध्य
ज्ञात करने
के लिए पद
विचलन विधि:
B.
35 C.
28 D.
20
समांतर माध्य 10 सेटीमीटर और मध्यिका 15 सेटीमीटर से श्रृंखला के बहुलक का मूल्य होगा-
बहुलक
= 3
मध्यिका – 2
समांतर माध्य
= 3(15) - 2(10)
= 45 – 20
= 25 सेटीमीटर
गुणात्मक
आंकड़ों की
स्थिति में
मध्यिका एक उचित
औसत है|
B.
हरात्मक
माध्य C.
समांतर
माध्य D.
भारित
समांतर
माध्य
जब
विभिन्न
मदों को उनकी
महत्ता के
अनुसार भार
निर्धारित
करके उनका
समांतर
माध्य
परिकलित
किया जाता है
तो ऐसे माध्य
को भारित
समांतर माध्य
कहते हैं।
B.
32.375 C.
29.375 D.
30.375
B.
C.
D.
पद
विचलन विधि
का सूत्र
B.
मध्यिका C.
माध्य
D.
बहुलक
केंद्रीय
प्रवृत्ति
के माप है
·
समांतर
माध्य
·
गुणोत्तर
माध्य
·
मध्यिका
·
चतुर्थक
·
बहुलक
B.
यह
किसी एक
प्रेक्षण का
प्रतिनिधित्व
करता है। C.
यह
आँकड़ों की
बुनियादी
विशेषताओं
का वर्णन
करता है। D.
यह
तुलना की
सुविधा
प्रदान करता
हैं।
केंद्रीय
प्रवृत्ति
के माप से
अभिप्राय उन
विधियों से
है, जिनसे
किसी शृंखला
के
प्रेक्षणों
के लिए ऐसा मूल्य
ज्ञात हो जो
उस संपूर्ण
शृंखला का
प्रतिनिधित्व
करे।
बहुलक चर के उस मूल्य को कहा जाता है जो श्रेणी में सबसे अधिक बार आता है।
चतुर्थक
वे माप है जो
किसी
श्रृंखला को
चार बराबर
भागों में
विभाजित
करते हैं।
यदि एक सांख्यिकीय
श्रेणी को चार बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, तो
प्रत्येक
भाग के अंतिम
मूल्य को एक
चतुर्थक कहा
जाता है।
आंकडें
पहले से ही
आरोही क्रम
में व्यवस्थित
है। इसलिए,
मध्यिका = 145 सेटीमीटर
मध्यिका
का अर्थ मध्य-मूल्य
है। यह एक ऐसा
मूल्य है जो
श्रेणी को दो
बराबर में
विभाजित
करता है जब
इसे आरोही या
अवरोही क्रम
में व्यवस्थित
किया जाता
है।
केन्द्रीय प्रवृत्ति वितरण के मूल्य की एक माप है जिसे एक श्रेणी के
लिए सबसे
अधिक
प्रतिनिधि मूल्य के
रूप में माना
जाता है।
खुले सिरे वाले वर्ग अंतराल की स्थिति में, समांतर माध्य की गणना असंभव होगी जब तक कि अज्ञात सीमाओं का मान नहीं ले लेते।
समांतर माध्य दो प्रकार के हो सकते हैं- क) सरल समांतर माध्य ख) भारित समांतर माध्य
समान्तर माध्य का केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। समान्तर माध्य या माध्य को सभी प्रेक्षणों के मूल्यों के योग को उनकी कुल संख्याओं से विभाजन के रूप में परिभाषित किया जाता है। B.
20 C.
25 D.
50
B.
60. C.
80. D.
100.
विचरण
गुणांक मानक
विचलन का
प्रतिशत रूप
है। इस
प्रकार
विचरण
गुणांक =(मानक
विचलन/माध्य) X100
किसी
श्रृंखला के
माध्य से
मानक विचलन के
वर्ग से विचरण
प्राप्त हो
सकता है। इस
प्रकार,
विचरण = (मानक
विचलन)2
मानक
विचलन को
परिक्षेपण का
सर्वश्रेष्ठ
माप माना
जाता है।
A.
केवल
50 % मदों
का मान
मध्यिका से
कम होता है SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
पद विचलन विधि
द्वारा
माध्य ज्ञात
करने के लिए
प्रयुक्त सूत्र
में A
क्या
प्रदर्शित
करता है ?
A.
कल्पित
माध्यSOLUTION
जहां,
X = चर का मान
A = कल्पित माध्य
d =
कल्पिक माध्य से विचलन
N = प्रेक्षणों की कुल संख्या
i = समान गुणक
A.
25SOLUTION
बहुलक
का मान 25 सेटीमीटर
है।
A.
गुणात्मक
आंकड़ों की
स्थिति में
मध्यिका एक अनुपयुक्त औसत
हैSOLUTION
A.
मध्यिका
SOLUTION
अंक
10
15
20
x
30
35
छात्रों की संख्या
8
4
12
4
5
2
A.
28SOLUTION
अंक
(X)
छात्रों की संख्या
(f)
(fX)
10
8
80
15
4
60
20
12
240
X
4
4x
30
5
150
35
2
70
∑f=35
∑fX=600+4x
दिए
गए सूत्र का
प्रयोग करके
हम अज्ञात मद
का मान 29.375 या 29 प्राप्त
करते है |
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: CSOLUTION
इस
सूत्र का
प्रयोग करके
माध्य
प्राप्त
करें|
B.
C.
D.
Right Answer is: DSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
परास
SOLUTION
A.
यह
समस्त
आँकड़ें का
प्रतिनिधित्व
करता है।SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
मध्यिका
का ज्ञात
कीजिए।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
श्रेणी की
मध्यिका
है- 
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
15SOLUTION
A.
24.SOLUTION
S=80
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION