एक परियोजना रिपोर्ट के दो उद्देश्य हो सकते है :
· एक परियोजना के परिणाम निरीक्षणों की रूपरेखा और गहन जानकारियों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती है।
· यह परियोजना के उद्देश्य के बारें में संक्षिप्त रूप से जानकारियां प्रदान करती है।
प्राथमिक आंकड़ों को इकट्ठा करने के लिए निम्नलिखित पद्धतियों को प्रयोग किया जा सकता है:
· प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार,
· अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार,
· संवाददाताओं से सूचना,
· प्रेषित प्रश्नावली
· प्रगणक, आदि द्वारा भरा प्रश्न पत्र
द्वितीयक आंकड़े वे आंकड़े हैं जिन्हें किसी अन्य व्यक्ति या संस्थान के द्वारा किसी अन्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए एकत्र किया जाता है । ये आंकड़े प्रकाशित या अप्रकाशित रिपोर्ट के रूप में होते हैं।
जब द्वितीयक आंकड़ों को प्रयोग किया जाता है तो संदर्भग्रन्थ सूची को उल्लिखित किया जाता है। यह द्वितीयक आंकड़ों के स्रोत का विवरण देता है जैसे पत्रिकाएँ, शोधपत्र, सरकारी प्रकाशन, संयुक्त स्टॉक कम्पनी की वार्षिक रिपोर्ट आदि को परियोजना का विकास करने के लिए प्रयोग किया जाता है। आम तौर पर इसे रिपोर्ट के नीचे लिखा जाता है।
किसी भी परियोजना के निर्माण में सबसे पहला चरण होता है, उद्देश्य निर्धारित करना। उद्देश्य बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि सर्वे या परियोजना का लक्ष्य उद्देश्य पर ही केन्द्रित होता है। प्राथमिक, द्वितीयक या दोनों ही प्रकार के आंकड़े एकत्र करने का निर्णय, आंकड़ों के आकार का निर्णय, लक्षित समूह, प्रस्तुतिकरण के लिए उपकरण और आंकड़ों का विश्लेषण आदि परियोजना के उद्देश्य पर ही निर्भर है। इसलिए उद्देश्य को सावधानी पूर्वक तय करना चाहिए।
किसी भी परियोजना रिपोर्ट को तैयार करने में निम्न पांच कदम महत्वपूर्ण होते हैं:
· परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के चरण निम्नलिखित हैः
· अध्यनन का क्षेत्र या समस्या को पहचानना
· लक्ष्य समूह का चुनाव
· आंकड़ों का संकलन
· आंकड़ों का संगठन एवं प्रस्तुतीकरण
· आंकड़ों का विश्लेषण एवं व्याख्या
· उपसंहार
· ग्रंथ सूची

वृत्त
आरेख में,
भोजन और वस्त्र = 360 / 100 X 60 = 2160
ईंधन और अन्य = 360 / 100 X 25 = 900
आवास = 360 / 100 X 15 = 540
परियोजना का उद्देश्य या प्रकृति वांछित आंकड़ों के संकलन की विधि को निर्धारित करती है।
यदि परियोजना के लिए प्राथमिक आंकड़ो की आवश्यकता है, तो प्राथमिक आंकड़ा संग्रह की विधि जैसे कि प्रश्नावली या प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार के माध्यम से आंकड़ें संगृहीत किये जा सकते है।
यदि परियोजना को किसी और के द्वारा पहले से किये गये कार्य के उपयोग की आवश्यकता है, तो हम द्वितीयक स्रोत के संकलित आंकड़ों जैसे कि संस्थाओं के आंतरिक अभिलेख, समाचारपत्र आदि का प्रयोग कर सकते है।
रेखाचित्रीय
प्रस्तुतिकरण
बहुत ही
उपयोगी है।
इसके मुख्य
लाभ हैं:
(i) ये आकर्षक
और प्रभावी
होते हैं जो
देखने वाले
के मस्तिष्क
पर बहुत गहरा
प्रभाव
डालते हैं।
(ii) इन्हें तुरंत और सरल तुलना करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
(iii) इन्हें एक अनपढ़ भी आसानी से समझ सकता है |
तीन
प्रकार के
दंड आरेख होते
हैं:
सरल दंड
आरेख: ये
लम्बवत एवं
ऊर्ध्वाकार
बार की
सहायता से एक
प्रकार के ही
चर को
प्रदर्शित करते
हैं।
बहु दंड
आरेख: इन्हें
आंकड़ों के दो
या दो से अधिक
सेट को
प्रदर्शित
करने के लिए
प्रयोग किया जाता
है।
प्रतिशत
दंड आरेख:
इन्हें
प्रतिशत के
आधार पर आंकड़ों
के एक समूह के
विभिन्न
हिस्सों को
प्रदर्शित
करने के लिए
प्रयोग किया
जाता है।
| विज्ञापन | प्रभावित परिवार |
| टेलीवीजन समाचारपत्र पत्रिकाएँ सिनेमा बिक्री प्रतिनिधि प्रदर्शनी स्टॉल रेडियो | 47 30 20 25 15 10 18 |
दंड आरेख

अवलोकन: अधिकतर लोगों को उत्पाद के बारे में या तो टीवी या समाचार पत्र के माध्यम से पता चला।
एक अच्छी प्रश्नावली की आवश्यकताएं निम्नलिखित हैं:
1. प्रश्नों की सीमित संख्या: प्रश्नों की संख्या यदि संभव हो तो सीमित होनी चाहिए। सामन्यत पंद्रह से बीस प्रश्न आवश्यक प्रविष्टि के लिए पर्याप्त होते हैं।
2. सरल: प्रश्नों की भाषा सरल और समझने योग्य होनी चाहिए। यह स्पष्ट होनी चाहिए । यह द्विअर्थी नहीं होनी चाहिए।
3. तार्किक रूप से प्रबंधित: प्रश्नों को तार्किक रूप से प्रबंधित किया जाना चाहिए। प्रश्नों का एक उचित क्रम होना चाहिए।
4. सन्दर्भों से सम्बन्धित: प्रश्न दिए गए सन्दर्भों से संबंधित होने चाहिए। वे सन्दर्भों से परे नहीं होने चाहिए।
5. व्यक्तिगत सवालों से बचना चाहिए: व्यक्तिगत प्रश्नों से जितना हो सके बचना चाहिए। उदाहरण के लिए, आय, बिक्री की मात्रा आदि से संबंधित प्रश्न नहीं पूछने चाहिए।
परियोजना को विकसित करते हुए, निम्न क़दमों को उठाया जाना चाहिए:
1. उद्देश्य: परियोजना की प्रवृत्ति और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। उद्देश्य के आधार पर आवश्यक आंकड़ों को एकत्र किया जा सकता है।
2.जनसँख्या: सबसे पहले हमें लक्षित समूह को स्पष्ट करना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर हम परिवारों में जागरूकता पर अध्ययन करना चाहते हैं, तो हमें उन परिवारों को चयन करना होगा जिन पर हम अध्ययन करना चाहते हैं, अर्थात यदि हम अमीर परिवारों का अध्ययन करना चाहते हैं, या गरीबों पर या मध्य वर्ग पर।
3. आंकड़ों का स्रोत: एक और महत्वपूर्ण बिंदु है आंकड़ों के स्रोत के बारे में निर्धारण करना, हम प्राथमिक आंकड़ों को या द्वितीयक आंकड़ों को प्रयोग कर रहे हैं। द्वितीयक आंकड़ों को बहुत ही सावधानी से प्रयोग करना चाहिए। प्राथमिक आंकड़ों को व्यक्तिगत साक्षात्कार या प्रश्नावली को मेल करने के द्वारा एकत्र किया जा सकता है।
4. आंकड़ों का विश्लेषण: आंकड़ों के विश्लेषण के लिए, रणनीतिक तकनीकें जैसे केंद्रीय प्रवृत्ति को मापना, संवितरण के माप आदि को विश्लेषण के आवश्यकता के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है।
5. रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण: रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे बहुत ही ख़ूबसूरती से प्रस्तुत किया जाना चाहिए| रिपोर्ट में एक उचित शीर्षक होना चाहिए। रिपोर्ट को प्रस्तुत करते समय, रणनीतिक तालिकाएँ, आरेखण या चित्रों को प्रयोग किया जा सकता है।
6. व्याख्या और निष्कर्ष: किसी भी सांख्यकीय परियोजना में अंतिम चरण है व्याख्या, अर्थात एकत्र किए गए आंकड़ों से एक निष्कर्ष निकालना और विश्लेषण करना। परियोजना की व्याख्या सही से करनी चाहिए नहीं तो जांच का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
प्रश्नावली
उपभोक्ता का नाम:
आवास
परिवार के सदस्यों की संख्या
औसत मासिक आय (रु में):
क. रु.1000 तक
ख. रु. 1000 से रु. 2000 के बीच
ग. रु. 2000 से रु 5000. के बीच
घ. रु. 5000 से रु. 10000 के बीच
ङ. रु 10000. से अधिक
5. आपका व्यवसाय: सेवा (), व्यापार ( ) अन्य ( )
6. आपके आवास से फेयर प्राइस दुकान कितनी दूर है?
क. 200 मीटर तक
ख. 500 मीटर तक
ग. 1 किलोमीटर तक
घ. 5000 मीटर तक
7. क्या आप फेयर प्राइस दुकान से राशन खरीदते हैं?
हां () नहीं ()
8. आप फेयर प्राइस दुकान से कौन सा सामान खरीदते हैं: चीनी (), गेंहू (), चावल (), घी (), अन्य (), दालें ()
9. अगर आप अपना राशन फेयर प्राइस दुकान से नहीं खरीदते हैं तो क्यों?
क. लम्बी कतारें
ख. खराब सामान
ग. मूल्यों में थोडा ही अंतर
घ. समय का अभाव
ङ. संबंधित वस्तुओं का न होगा
च. आपके घर से दूरी
10. अगर आप अपना राशन फेयर प्राइस दुकान से खरीदते हैं तो क्यों?
क. कम मूल्य
ख. कम आय
ग. फेयर प्राइस दुकान मेरे घर के पास है
11. क्या आप केवल चीनी ही खरीदते हैं? हां (), नहीं ()
अगर हाँ, तो क्या कारण हैं?
क. खुले बाज़ार में चीनी के मूल्यों और राशन की दुकान में चीनी के मूल्यों में बहुत अंतर है।
ख. चीनी आसानी से उपलब्ध है। दूसरे सामान सामान्य रूप से भंडार में नहीं होते हैं।
12. क्या आप गेंहू खरीदते हैं? हाँ (), नहीं ()
अगर नहीं तो क्या कारण है?
क. गेंहू खराब गुणवत्ता का है
ख. अक्सर गेंहू की अनुपलब्धता
ग. चावल का प्रयोग
घ. सीधे आटा का प्रयोग
13. आपके विचार से राशन प्रणाली में क्या सुधार किए जाने चाहिए:
क. हर प्रकार के सामानों की हर समय उपलब्धता
ख. दूसरे सामानों की उपलब्धता जैसे जूते, कपडे आदि
ग. फेयर प्राइस दुकानों की संख्या में वृद्धि
|
अंतर का आधार |
प्राथमिक आंकड़े |
द्वितीयक आंकड़े |
|
1. परिभाषा |
इन्हें सबसे पहली बार एकत्र किया जाता है। |
ये पहले से ही किसी और के द्वारा एकत्र किए गए होते हैं। |
|
2. परिशोधन |
इन आंकड़ों के परिशोधन की आवश्यकता नहीं होती हैं | |
इनमें परिशोधन की आवश्यकता होती है। |
|
3. आंकड़ों की प्रवृत्ति |
ये मूल आंकड़ों के रूप में होते हैं, जिन पर सांख्यकीय पद्धतियों का प्रयोग किया जा सकता है। |
ये पहले से ही निर्मित आंकड़े होते हैं। |
|
4. सम्पादन |
निष्कर्ष निकालने के लिए इन्हें संपादित किए जाने की आवश्यकता होती है। |
इन्हें प्रयोग करने के लिए और निष्कर्ष निकालने के लिए सम्पादन की आवश्यकता होती है। |
|
5. समय और धन |
प्राथमिक आंकड़ों को एकत्र करने के लिए काफी समय और धन चाहिए। |
इन आंकड़ों का प्रयोग समय और धन बचाता है। |
|
6. सावधानियां |
प्राथमिक आंकड़ों के प्रयोग के लिए बहुत अधिक सावधानियों की आवश्यकता नहीं होती है | |
द्वितीयक आंकड़ों के प्रयोग में सावधानियों की आवश्यकता होती है। |
सीमांत अवसर लागत, अन्य वस्तु की वह मात्रा है जो एक निश्चित वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन के लिए त्यागी जाती है|
A.
तकनीक के स्तर में गिरावट
B.
भूस्खलन
C.
संसाधनों में वृद्धि
D.
भयंकर बाढ़
उत्पादन संभावना वक्र दाएँ की ओर खिसक सकता है जब, • संसाधनों में वृद्धि हो या • तकनीक में सुधार हो, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है |
A. अवसर लागत
B. सीमांत अवसर लागत
C. लागत
D.
वैकल्पिक मूल्य
किसी वस्तु के उत्पादन की अवसर लागत, त्यागे गए दूसरे सर्वोत्तम पूर्व निश्चित वैकल्प का मूल्य होता है |
A.
जब सीमांत अवसर लागत शून्य हो
B.
घटती सीमांत अवसर लागत की स्थिति में
C.
स्थिर सीमांत अवसर लागत की स्थिति में
D.
बढ़ती सीमांत अवसर लागत की स्थिति में
समान्यत: उत्पादन संभावना वक्र मूल बिंदु के नतोदर होता है |
A.
120 किलो गेहूँ
B.
90 टन गेहूँ
C.
30 टन गेहूँ
D.
3/4
किसी वस्तु के उत्पादन की अवसर लागत, त्यागे गए दूसरे सर्वोत्तम पूर्व निश्चित वैकल्प का मूल्य है|
A. दाईं ओर शिफ्ट
B. बाईं ओर शिफ्ट
C. दाईं ओर घूमने
D. बाईं ओर घूमने
संसाधनों में वृद्धि होने पर एक देश दोनों ही प्रकार के वस्तुओं का अधिक उत्पादन कर सकता है | इस स्थिति को उत्पादन संभावना के दाईं ओर शिफ्ट के द्वारा दर्शाया जाता है |
A.
शून्य सीमांत अवसर लागत
B.
घटती हुई सीमांत अवसर लागत
C.
बढ़ती हुई सीमांत अवसर लागत
D.
स्थिर सीमांत अवसर लागत
उत्पादन संभावना वक्र के नतोदर होने का कारण बढ़ती हुई सीमांत अवसर लागत है| यह बताता है कि एक वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन के लिए, अन्य वस्तुओं के उत्पादन का त्याग करना पड़ता है|
A. संभावित उत्पादन > वास्तविक उत्पादन
B. संभावित उत्पादन = वास्तविक उत्पादन
C. संभावित उत्पादन < वास्तविक उत्पादन
D. इनमें से कोई नहीं
उत्पादन संभावना वक्र, दो वस्तुओं के सभी संभावित संयोजनों को दर्शाता है जो दिए हुए संसाधनों तथा तकनीक के पूर्ण और सर्वोत्तम उपयोग के द्वारा उत्पादित किये जा सकते हैं|
A.
संसाधन का पूर्ण और कुशलता से उपयोग किया जाता है
उत्पादन संभावना वक्र, दो वस्तुओं के सभी संभावित संयोजनों को दर्शाता है जो दिए हुए संसाधनों तथा तकनीक के पूर्ण और सर्वोत्तम उपयोग के द्वारा उत्पादित किये जा सकते हैं|
A.
आय का कारक वितरण से
B.
तकनीक के चयन से
C.
उत्पाद का चयन
D.
संसाधन के आबंटन से
अर्थव्यवस्था की तीन आधारभूत समस्याएँ हैं: 1. क्या उत्पादन किया जाए? 2. कैसे उत्पादन किया जाए ? 3. किसके लिए उत्पादन किया जाए?
A.
वस्तुओं तथा सेवाओं के बाज़ार मूल्य से
B.
तकनीक के चयन से
C. आय के वितरण से
D.
संसाधन के आबंटन से
अर्थव्यवस्था की तीन आधारभूत समस्याएँ हैं: 1. क्या उत्पादन किया जाए? 2. कैसे उत्पादन किया जाए ? 3. किसके लिए उत्पादन किया जाए?
A.
एक सीधी रेखा के रूप में
B.
मूल बिंदु ‘O’ के उन्नतोदर के रूप में
C. मूल बिंदु ‘O’ के नतोदर के रूप में
D.
वृत्त के रूप में
कुछ विशेष परिस्थितिओं में उत्पादन संभावना वक्र का ढलान मूल बिंदु ‘O’ के नतोदर नहीं होता है |
A.
उपभोक्ताओं का
B.
उद्योगपतियों का
C.
सरकार का
D.
निजी फर्मों का
केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में सभी आर्थिक गतिविधियों पर सरकार का पूरा नियंत्रण होता है|
A. व्यष्टि स्तर पर
B. समष्टि स्तर पर
C. व्यष्टि के साथ-साथ समष्टि स्तर पर
D. इनमें से कोई नहीं
बेरोज़गारी से संबंधित मुद्दे किसी देश की समस्या है इसलिए इसका अध्ययन समष्टि स्तर पर किया जाता है |
A.
थोक कीमत सूचकांक
B.
समग्र माँग
C.
बाज़ार माँग
D.
राष्ट्रीय आय
व्यष्टि अर्थशास्त्र में आर्थिक समस्याओं का अध्ययन व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों से होता है|
सामान्यत तीन प्रकार की अर्थव्यवस्थाएँ होती हैं ; 1. बाज़ार अर्थव्यवस्था 2. केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था 3. मिश्रित अर्थव्यवस्था
संसाधनों की दुर्लभता और वैकल्पिक प्रयोग चयन की समस्या को उत्त्पन्न करते है|
A. संसाधन की पूर्ति > संसाधनों के लिए माँग
B. संसाधन की पूर्ति < संसाधनों के लिए माँग
C. संसाधन की पूर्ति = संसाधनों के लिए माँग
D. संसाधनों का असीमित भंडार
संसाधनों की दुर्लभता और वैकल्पिक प्रयोग चयन की समस्या को उत्त्पन्न करते है| संसाधन की पूर्ति < संसाधनों के लिए माँग परिस्थिति दुर्लभता की स्थिति को परिभाषित करती है |
समष्टि अर्थशास्त्र में पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया जाता है| इसका आय के स्तर का निर्धारण तथा रोज़गार से सरोकार है| समष्टि अर्थशास्त्र में निम्न विषय-वस्तु शामिल है:
• राष्ट्रीय आय का सिद्धांत
• निर्गत तथा रोज़गार का सिद्धांत|
वह अर्थव्यवस्था जिसमें पूंजीवादी अर्थव्यवस्था तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था दोनों के गुण सम्मिलित होते हैं मिश्रित अर्थव्यवस्था कहलाती है | उदाहरण के लिए, आधुनिक समय में अधिकतम अर्थव्यवस्थाएँ, मिश्रित अर्थव्यवस्था है जैसे; भारत, दक्षिण अफ्रीका आदि|
उस भूमि पर 20 किलो चावल उत्पादित करने की अवसर लागत 50 टन गेहूँ होगी |
उत्पादन संभावना वक्र, दो वस्तुओं के सभी संभावित संयोजनों को दर्शाता है जोकि दिए हुए संसाधनों तथा तकनीक के पूर्ण और सर्वोत्तम उपयोग के द्वारा उत्पादित किये जा सकते हैं|
उत्पादन संभावना वक्र की विशेषताए निम्नलिखित हैं:
1- इसकी ढलान नीचे की ओर बाएँ से दाएँ तरफ होती है- यह दर्शाता है कि एक वस्तु का उत्पादन, संसाधनों की पूर्ण नियोजन स्थिति में अन्य वस्तु के उत्पादन के संसाधनों को स्थानांतरित करके ही बढ़ाया जा सकता है|
2- यह मूल बिंदु के नतोदर होता है- यह दर्शाता है कि एक वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन के लिए, अन्य वस्तुओं के उत्पादन का त्याग करना पड़ता है|
वह संस्थाएँ और संगठन जो लोगों को कार्य के अवसर और कमाने के माध्यम उपलब्ध कराते हैं, सामूहिक रूप से अर्थव्यवस्था या सामान्य अर्थव्यवस्था कहलाये जाते हैं|
उदाहरण के लिए, भारतीय अर्थव्यवस्था में वे सभी उत्पादन इकाइयाँ सम्मिलित हैं जो भारत के आर्थिक क्षेत्र में वस्तुएँ और सेवाएँ प्रदान करती हैं|
व्यष्टि अर्थशास्त्र से अभिप्राय अध्ययन के उस क्षेत्र से है जिसमें व्यक्तिगत आर्थिक इकाई का अध्ययन किया जाता है| इसका मुख्य रूप से व्यक्तिगत वस्तु की कीमतों का निर्धारण तथा उत्पादन के कारकों से सरोकार है|
इसको कीमत का सिद्धांत भी कहा जाता है|
उदाहरण के लिए:
• व्यक्तिगत फर्म
• व्यक्तिगत उपभोक्ता
व्यष्टि अर्थशास्त्र में शामिल विषय क्षेत्र हैं :
• माँग का सिद्धांत
• उत्पादन का सिद्धांत
• उत्पादन मूल्य निर्धारण का सिद्धांत
• वितरण का सिद्धांत, आदि |
|
बाज़ार अर्थव्यवस्था |
योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था |
|
आर्थिक गतिविधियाँ: माँग और पूर्ति की बाज़ार शक्तियों से आयोजित होती है उत्पादन: उत्पादक कीमत: माँग और पूर्ति की शक्तियों द्वारा कीमतों का निर्धारण किया जाता है | |
आर्थिक गतिविधियाँ: केंद्रीय सत्ता सभी आवश्यक आर्थिक गतिविधियों की योजना बनाती है उत्पादन: सार्वजनिक तथा निजी उद्यम को सरकार के निर्देशों का पालन करते हैं कीमत: कीमतों का निर्धारण सरकार द्वारा किया जाता है | |
केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था की निम्नलिखित विशेषताएं है :
•सभी आर्थिक गतिविधियों पर सरकार का पूरा नियंत्रण होता है|
• सरकार, वस्तुओं और सेवाओं की कीमत और मात्रा निर्धारित करती है; इसलिए बाज़ार में किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा नहीं होती है|
• यह अर्थव्यवस्था राष्ट्र हित और समाज कल्याण के सिद्धांत पर कार्य करती है|
• उदाहरण के लिए, उत्तरी कोरिया, क्यूबा आदि देशों की अर्थव्यवस्था लगभग समाजवादी अर्थव्यवस्था है |
प्राकृतिक आपदा जैसे, बाढ़ तथा भूकंप की स्थिति में उत्पादक संसाधनों का नाश होता है जो उत्पादन की क्षमता में बाधा उत्पन्न करता है| परिणामस्वरूप उत्पादन संभावना वक्र बाएँ ओर खिसक जाती है|
मान लीजिये किसी अर्थव्यवस्था में केवल दो वस्तुएं उत्पादित होती है – पूंजीगत वस्तुएं और उपभोक्ता वस्तुएं | ऐसी स्थिति में उत्पादन संभावना वक्र में निम्न परिवर्तन होगा :

जैसा की चित्र से अनुमान लगाया जा सकता है कि मूल उत्पादन संभावना वक्र AB है| जब,संसाधनों के नाश के कारण उत्पादन संभावना वक्र बाएँ ओर खिसक जाता है, तब नया उत्पादन संभावना वक्र A1B1 स्थापित हो जाता है|
अर्थव्यवस्था की तीन आधारभूत समस्याएँ हैं:
1. क्या उत्पादन किया जाए? - क्या उत्पादन किया जाए की समस्या, में उपभोक्ता वस्तुओं तथा पूँजीगत वस्तुओं के मध्य चयन सम्मिलित होता है| इसके पीछे मार्गदर्शक सिद्धांत यह है कि एक अर्थव्यवस्था के संसाधनों का आबंटन इस प्रकार करना चाहिए कि वह अधिकतम सतुष्टि प्रदान कर सके|
2. कैसे उत्पादन किया जाए ? - इसमें तकनीक का चयन सम्मिलित है| इसमें श्रम प्रधान तकनीक तथा पूँजी प्रधान तकनीक के मध्य चयन सम्मिलित होता है| उत्पादन की तकनीक के चयन के पीछे मार्गदर्शक सिद्धांतयह है कि उत्पादन की उस तकनीक का प्रयोग होना चाहिए जिससे प्रति इकाई उत्पादन लागत न्यूनतम हो और जिसमें दुर्लभ संसाधनों की कम से कम मात्रा में प्रयोग की जाती हो |
3. किसके लिए उत्पादन किया जाए? - यह समस्या, आय और निर्गत के वितरण से संबंधित है| वितरण के पीछे मार्गदर्शक सिद्धांत यह है कि जहाँ तक संभव हो प्रत्येक उत्पादक कारक और उपभोक्ता की आवश्यक व महत्त्वपूर्ण जरूरतें पूरी हों |
साकारात्मक अर्थशास्त्र तथा आदर्शक अर्थशास्त्र में अंतर इस प्रकार है :
|
स कारात्मक अर्थशास्त्र |
आदर्शक अर्थशास्त्र |
|
दी हुई परिस्थिति में क्या था, क्या है और क्या हो सकता है इसकी व्याख्या करता है| |
क्या होना चाहिए इसकी व्याख्या करता है| |
|
इसमें कथनों का अनुभवजन्य सत्यापन किया जा सकता है| |
इसमें कथनों के लिए सत्यापन दिए जाते है| |
|
यह तथ्यों के लिए कोई सुझाव नहीं देता| |
यह किसी नीति के मुद्दे पर सही और गलत का सुझाव देता है| |
|
उदाहरण: भारत आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है| |
उदाहरण: किसानों को ब्याज रहित या कम ब्याज दर पर ऋण मिलना चाहिए| |
वह अर्थव्यवस्था जिसमे उत्पादन के सभी माध्यम, निजी स्वामित्व के अंतर्गत होते हैं बाजार अर्थव्यवस्था कहलाती है |
• वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों का निर्धारण माँग और पूर्ति के द्वारा किया जाता है|
• विक्रेता, उत्पादित होने वाली वस्तु के प्रकार और मात्रा को तय करते है|
• इस अर्थव्यवस्था का उदेश्य है ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाना होता है |
• चूँकि कोई भी देश पूर्ण रूप से मुक्त बाज़ार प्रणाली का अनुसरण नहीं कर सकते इसलिए सरकार बाज़ार को अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करती है|
• उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका, हांगकांग आदि देशों की अर्थव्यवस्था लगभग पूंजीवादी अर्थव्यवस्था है |
मांग की कीमत लोच कम होने पर किसी वस्तु की कीमत में होने वाले परिवर्तन से मांगी गई मात्रा में कम परिवर्तन होता है|
चीनी और चाय की मांग बेलोचदार होती है क्योंकि लोगों को इनकी आदत पड़ जाती है और इनका दूसरी वस्तुओं से पूर्णत: स्थानापन्न नहीं किया जा सकता|
किसी वस्तु की मांग तब अधिक लोचदार होती है जब लोगों के पास उसका स्थानापन्न करने के लिए दूसरी वस्तुए भी होती हैं|
जब मांग वक्र Y-अक्ष के समांतर होता है तो इसका अर्थ है कि यह पूर्णत: बेलोचदार है|
प्रतिस्थापन वस्तुए वे होती हैं जो एक दूसरे के स्थान पर उपभोग की जा सकती हैं| अगर चाय महंगी हो जाय तो लोग कॉफ़ी से काम चला सकते हैं, और उसी प्रकार इसके विपरीत भी संभव है|
जब उपभोक्ताओं की आय काम हो जाती है तब कुछ वस्तुओं की कीमत बढ़ने पर उनकी मांग की मात्रा भी बढ़ जाती है, ऐसी वस्तुओं को तब गिफ्फन वस्तु कहा जाता है|
A.
अन्य
वस्तु की
मांग में कमी
होगी
स्थानापन्न
वस्तुओं के
जोड़े में से
किसी एक की
कीमत में
वृद्धि होने
से कुछ
उपभोक्ता
दूसरी वस्तु
के उपभोक्ता
में
परिवर्तित
हो जाएगें|
इसके कारण
दूसरी वस्तु
की मांग की
मात्रा बढ़
जाएगी|
उस
वस्तु की
कीमत में
परिवर्तन
होता है
किसी
वस्तु की
अपनी कीमतों
में परिवर्तन
से उसकी मांग
की मात्रा कम
हो जाती है
जिससे मांग
वक्र पर
संचलन होता
है|
मांग
वक्र पर बाई
ओर खिसकाव होता
है
उपभोक्ता
की आय में कमी
के कारण सभी
कीमतों पर
मांग की
मात्रा कम हो
जाती है
जिससे मांग
वक्र में बाई
ओर खिसकाव होता
है|
बजट
रेखा की प्रवणता
xx-अक्ष
पर रखी गई
वस्तु की
कीमत और y-अक्ष
पर रखी गई
वस्तु की
कीमत के
अनुपात के
ऋणात्मक मान
से पता चलती
है|
एक अनधिमान वक्र एक उपभोक्ता के तटस्थ संयोजनों का रेखाचित्रीय प्रस्तुतीकरण करता है| यह तटस्थता उपभोक्ता की रूचि और अधिमानों पर आधारित होती है|
B.
C.
D.
उपभोक्ता
के अधिमान इस प्रकार
होती है कि जैसे-जैसे
उपभोक्ता वस्तु
Y की अधिक
से अधिक मात्रा
प्राप्त करता
जाएगा,
वैसे-वैसे
वस्तु Y के लिए
वस्तु X के
रूप में
भुक्तान
करने की उसकी
तत्परता कम होती
जाती है|अत:
इनकी सीमांत
प्रतिस्थापन
दर B.
C.
D.
उपभोक्ता
का ईष्टतम बिंदु
वह होता है जहाँ
उसकी बजट रेखा
और उच्चतम अनधिमान
वक्र स्पर्शरेखिय
होते हैं| इस
बिंदु पर
अनधिमान वक्र
की ढ़लान और
बजट रेखा की
ढ़लान एक
सामान होती
है|
अगर वस्तुओं की कीमत बदल जाए तो X और Y के प्राप्य संयोग भी बदल जाते हैं क्योंकि कीमतों में बदलाव से उपभोक्ति की आय की क्रय शक्ति बदल जाती है और इसलिए उसके प्राप्य संयोजन भी बदल जाते हैं|
ह्रासमान
सीमांत उपयोगिता
नियम यह कहता है
कि किसी वस्तु
की अतिरिक्त इकाई
के उपभोग से, प्राप्त
होने वाली अतिरिक्त
उपयोगिता में
त्वरित दर से गिरावट
होती है| इस
कारण MU वक्र
नीचे की ओर
ढालू होता है|
B. C. TU= D. MU= TUn+1 - TUn
जब
सीमांत
उपयोगिता
शून्य होती
है तो इससे अधिक
उपभोग से
उपयोगिता घटती
है क्योंकि
यहाँ सीमांत
उपयोगिता
ऋणात्मक
होती है| जब
सीमांत
उपयोगिता
शून्य हो उससे
कम उपभोग
स्तर पर हर
अतिरिक्त
इकाई के
उपभोग से कुल
उपयोगिता
में बढौतरी
मुमकिन होती
है| अत: सीमांत
उपयोगिता
शून्य होने
पर उपभोक्ता अधिक्तम
कुल
संतुष्टि पा
रहा होता है|
जब सीमांत उपयोगिता धनात्मक होती है तब हर अतिरिक्त इकाई के उपभोग से अधिक संतुष्टि की पूर्ति होती है जिसके कारण कुल उपयोगिता बढ़ती हुई होती है|
उपयोगिता
किसी उपभोक्ता
की जरुरत को संतुष्ट
करने की शक्ति
या गुण है।
ह्रासमान सीमांत उपयोगिता नियम यह कहता है कि किसी वस्तु की अतिरिक्त इकाई के उपभोग से, प्राप्त होने वाली अतिरिक्त उपयोगिता में त्वरित दर से गिरावट होती है|
IC का ढाल
उस दर को
दर्शाता है
जिस पर एक
उपभोक्ता
एक वस्तु का
दूसरी वस्तु
के लिए
प्रतिस्थापन
करने के लिए
तैयार होता
है। इसे
प्रतिस्थापन
की सीमांत दर
कहा जाता है। बजट रेखा दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोजनों को प्रकट करती है जिसे उपभोक्ता अपनी दी हुई आय और वस्तुओं की दी हुई कीमतों पर खरीद सकता है। वे संयोजन जो बजट रेखा से ऊपर होते हैं वे उपभोक्ता के लिए अप्राप्य होते हैं| एक उपभोक्ता केवल उन संयोजनों को खरीदसकता है जो केवल उसकी बजट रेखा या इसके अंदर आते हैं। अनधिमान मानचित्र एक उपभोक्ता के विभिन्न संतुष्टि स्तर को दर्शाने वाले अनधिमान वक्रों का समूह होता है। उपभोक्ता के दिए हुए अनधिमान मानचित्र और बजट रेखा के आधार पर वह संयोजन जिस पर उपभोक्ता को अधिक्तम संतुष्टि प्राप्त होता है वह उपभोक्ता संतुलन कहलाता है।
अनधिमानवक्रएकउपभोक्ताकेतटस्थसंयोजनोंकारेखाचित्रीयप्रस्तुतीकरणकरताहै।यहतटस्थताउपभोक्ताकीरूचिऔरअधिमानोंपरआधारितहोतीहै।
किसी
वस्तु का
उपभोग करने
के लिए
उपभोक्ता
की क्षमता को
प्रभावित
करने वाले दो
कारक वस्तु
की कीमत और
उपभोक्ता
की आय हैं।
किसी
वस्तु का उपभोग
करने के लिए
उपभोक्ता
की इच्छा को
प्रभावित
करने वाले दो
कारक
संबंधित वस्तुओं
की कीमत और
उपभोक्ता
की रूचि और
पसंद हैं। आवश्यकताओं
की तुलना में संसाधन
दुर्लभ हैं B.
उनके
वैकल्पिक
प्रयोग हैं C.
दोनों
(1)
तथा (2)
D.
संसाधन
प्रकृति का
मुफ्त उपहार
नहीं है
संसाधनों
की दुर्लभता
और वैकल्पिक
प्रयोग चयन
की समस्या को
उत्त्पन्न करते
है |
आय का अधिक होना B. असीमित आवश्यकताएं C. साधनों के वैकल्पिक उपयोग D. सीमित (दुर्लभ) साधन असीमित इच्छाओं को पूरा करने के लिए दुर्लभ संसाधनों के वैकल्पिक उपयोगों में चयन की समस्या, आधारभूत आर्थिक समस्या है|
उत्पादन
संभावना
अनुसूची एक
तालिका
विवरण है जो
दो वस्तुओं
के उत्पादन
की विभिन्न
संभावनाओं
को प्रकट
करती है, जिनका
उत्पादन दिए
हुए
संसाधनों और
तकनीक के पूर्ण
और
सर्वोत्तम
नियोजन से
किया जा सकता
है|
वक्र
के अंदर की ओर
(बाई ओर) कोई भी
बिंदु संसाधनों
के अल्प
उपयोग को
प्रदर्शित
करती है|
यदि
किसान गाजर
की बजाए आलू
उगाने का निश्चय
करता है तो
उसके द्वारा
उत्पादित
आलू की अवसर
लागत गाजर का
मूल्य होगी|
उत्पादन
संभावना
वक्र दाई की
ओर शिफ्ट के
कारण निम्न
है, • संसाधनों
में वृद्धि
हो या • तकनीक
में सुधार हो, जिससे
उत्पादन
क्षमता में
वृद्धि हो
यह
वाक्य आदर्शक वाक्य
है क्योंकि
इसमें यह
बताने का
प्रयास किया
गया है कि क्या
होना चाहिए
और आर्थिक
समस्या का
समाधान किस
प्रकार होना
चाहिए|
विकासशील
अर्थशास्त्र
का उद्देश्य
संसाधनों की
वृद्धि और
देश का
आर्थिक
विकास है|
कल्याणकारी
अर्थशास्त्र
सामाजिक
कल्याण के
लिए
संसाधनों के अनुकूल
आबंटन पर
केंद्रित है| समूहों, समुदायों
तथा समाज के
विपरीत इसका
सरोकार व्यक्तिगत
कल्याण से
होता है |
आर्थिक
नियम वे नियम
होते है जो
आर्थिक
गतिविधियों
से जुड़े संबंधो
का नियमन
करते है| आर्थिक
नियमों में
शामिल है: • सकारात्मक
अर्थशास्त्र
विश्लेषण • आदर्शक
अर्थशास्त्र
विश्लेषण
उत्पादन
संभावना वक्र
के बाहर की ओर
(दाई ओर) कोई भी
बिंदु अप्राप्य
संयोजन को
प्रदर्शित
करती है|
उत्पादन
संभावना
वक्र,
वस्तुओं
के संभावित
संयोजनों
जिनको
अर्थव्यवस्था
में
उत्पादित
किया जा सकता
है, को
दर्शाता है| उदाहरण
के लिए,
संयोजन A, B, C, D, E
तथा F संसाधनों
के पूर्ण
उपयोग को
दर्शा रहें
हैं |
सीमांत
अवसर लागत, अन्य
वस्तु की वह
मात्रा है जो
एक निश्चित
वस्तु की एक
अतिरिक्त
इकाई के
उत्पादन के
लिए त्यागी
जाती है|
किसी
वस्तु के
उत्पादन की
अवसर लागत, त्यागे
गए दूसरे
सर्वोत्तम
पूर्व
निश्चित वैकल्प
का मूल्य है|
उत्पादन
संभावना
वक्र, दो वस्तुओं
के सभी
संभावित
संयोजनों को
दर्शाता है
जोकि दिए हुए
संसाधनों
तथा तकनीक के
पूर्ण और
सर्वोत्तम
उपयोग के
द्वारा
उत्पादित किये
जा सकते हैं|इसको
सीमांत
उत्पादन
संभावना या ‘रूपांतरण
वक्र’
भी कहते
हैं|
हर
अर्थव्यवस्था
को संसाधनों
के आबंटन की
समस्या का
सामना करना
पड़ता है
क्योंकि
संसाधन
सीमित होते
हैं|
वह
संस्थाएँ और
संगठन जो
लोगों को
कार्य के अवसर
और कमाने के
माध्यम
उपलब्ध
कराते हैं, सामूहिक
रूप से
अर्थव्यवस्था
या सामान्य
अर्थव्यवस्था
कहलाये जाते
हैं|
सीमांत
अवसर लागत, अन्य
वस्तु की वह
मात्रा है जो
एक निश्चित
वस्तु की एक
अतिरिक्त
इकाई के
उत्पादन के
लिए त्यागी
जाती है|
असीमित
इच्छाओं को
पूरा करने के
लिए दुर्लभ संसाधनों
के वैकल्पिक
उपयोगों में
चयन की समस्या, आधारभूत
आर्थिक
समस्या है| आर्थिक
समस्या
उत्पन्न
होने के तीन
मुख्य कारण
हैं: 1. असीमित
आवश्यकताएँ
या इच्छाएँ 2. सीमित
संसाधन 3. संसाधनों
के वैकल्पिक
उपयोग
कैसे
उत्पादन
किया जाए, में श्रम
प्रधान
तकनीक तथा
पूँजी
प्रधान तकनीक
के मध्य चयन
सम्मिलित
होता है| उत्पादन
की तकनीक के
चयन के पीछे
मार्गदर्शक सिद्धांत
यह है कि
उत्पादन की
उस तकनीक का
प्रयोग होना
चाहिए जिससे
प्रति इकाई
उत्पादन लागत
न्यूनतम हो
और जिसमें
दुर्लभ
संसाधनों का कम
से कम मात्रा
में प्रयोग
किया जाती हो |
यदि
मांग की
मात्रा में
आनुपातिक
परिवर्तन वस्तु
की कीमत में
आनुपातिक
परिवर्तन से
अधिक होता है, तब
वस्तु को
लोचदार या
इकाई से अधिक
लोचदार होना
कहा जाता है।
किसी
वस्तु की
कीमत, उपभोक्ता
की आय या
संबंधित वस्तुओं
की कीमत में
परिवर्तन
होने से इसकी
मांग की
मात्रा में
होने वाला
परिवर्तन
क्रमशः कीमत
के संबंध में
मांग की लोच,
आय के संबंध
में मांग की लोच
या संबंधित
वस्तुओं की
कीमत के
संबंध में
मांग की लोच
होती है। एक वस्तु की मांग पूर्णत: बेलोदार तब होती है, जब उसकी कीमत में परिवर्तन होने पर मांग की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
कॉफ़ी
और चाय
स्थानापन्न
वस्तुए हैं|
इसलिए यदि
कॉफी की कीमत
बढ़ जाती है, तो
उपभोक्ता
चाय की
निर्धारित
कीमत पर चाय
की अधिक मात्रा
का उपभोग
करने के लिए
तैयार हो
जाएगा जिसके
कारण चाय का
मांग
वक्रदाई ओर
खिसक जाएगा।
उपभोक्ता
के लिए जिन
वस्तुओं का
प्रतिस्थापन
प्रभाव उसके
आय प्रभाव से
अधिक होता है,
उपभोक्ता
की आय में
वृद्धि होते
ही ऐसी वस्तुओं
के लिए
उपभोक्ता
की मांग कम हो
जाती है| ऐसी
वस्तुओं को
निम्नस्तरीय
वस्तुएं कहा
जाता है|
जब
एक वस्तु की
कीमत बढ़ने पर
उसका आय
प्रभाव उसके
प्रतिस्थापन
प्रभाव से
अधिक होता है
तब उसकी मांग
की मात्रा भी
बढ़ जाती है, ऐसी
वस्तुओं को
तब गिफ्फन
वस्तु कहा
जाता है|SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
A. उपभोक्ता की रूचि और अधिमानों सेSOLUTION
A.
SOLUTION
द्वारा
प्राप्त की
जा सकती है|
A.
SOLUTION
A. परिवर्तित हो सकते हैSOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
A. MU= TUn+2 - TUn+1
![]()
SOLUTION
यह समीकरण सही नहीं हो सकता क्योंकि यह , औसत उपयोगिता दिखता है ना कि सीमांत उपयोगिता|
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION