CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 170101 विनिमय बिल के संदर्भ में छूट से क्या आशय है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

देय तिथि से पूर्व छूट पर स्वीकर्ता द्वारा बिल का भुगतान, छूट पर बिल का भुगतान कहलाता है। बिल पर देय राशि तथा देय तिथि से पूर्व चुकाई गई राशि का अन्तर बिल पर छूट कहलाती है।


Q. 170102 बिल के नवीकरण का क्या अर्थ है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जब बिल के स्वीकर्ता द्वारा परिपक्वता के समय प्रस्तुति पर बिल का भुगतान नहीं जाये, तो पुराने बिल को रद्द कर दिया गया है और नए सिरे से भुगतान की नई शर्तों के साथ एक बिल जारी किया जाता है। इसे बिल का नवीकरण कहा जाता है।


Q. 170103 बिल के परिपक्वता तिथि से पहले भुगतान को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कभी कभी बिल का स्वीकर्ता बिल का परिपक्वता पूर्व भुगतान करता है, जिसके कारण वह इसकी परिपक्वता से पहले बिल का भुगतान स्वीकार करने के लिए धारक से एक अनुरोध करता है। यदि धारक ऐसा करने के लिए सहमत होता है तो बिल का भुगतान कर दिया जाता है।


Q. 170104 बिल की अवधि तथा अनुग्रह दिवस से क्या तात्पर्य है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

बिल की अवधि से आश्य उस समय से है जिसके पश्चात स्वीकर्ता बिल की राशि का भुगतान करेगा। इस प्रकार प्रत्येक बिल की भुगतान तिथि निर्धारित करते समय उसकी देय तिथि में तीन दिन और जोड़ दिये जाते हैं। यह तीन दिन रियायती दिन या अनुग्रह के दिन कहलाते हैं।


Q. 170105 प्रतिज्ञा पत्र के कितने पक्षकार होते हैं
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रतिज्ञ पत्र के दो पक्षकार होते हैः एक प्रतिज्ञा–पत्र का लेखक तथा दूसरा प्राप्तकर्ता देनदार लेखक तथा लेनदार प्रतिज्ञा-पत्र का प्राप्तकर्ता होता है।


Q. 170106 अनुग्रह दिवस से आप क्या समझते हैं ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विनिमय विपत्रों के भुगतान की देय तिथि में जोडे़ जाने वाले अतिरिक्त तीन दिवसों को अनुग्रह दिवस के रूप में जाना जाता है।


Q. 170107 15 जनवरी 2010 को, ए ने बी को 1,500 रु का माल बेचा तथा इसी तिथि को दो माह को एक बिल लिखा गया, जिसे बी द्वारा विधिवत् स्वीकृत किया गया। परिपक्वता तिथि पर, बि ने बिल का भुगतान कर दिया। बी की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170108 रश्मी ने रमन से 6,000 रु उधार लिये। रश्मी ने 24 फरवरी 2010 को इसके लिए 3 माह का बिल स्वीकार किया। परिपक्वता तिथि को यह बिल अनादरित हो गया। रमन ने 150 रु निकराई व्यय के चुकाये।
रश्मी की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170109 अनुग्रह बिल को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अनुग्रह बिल ऐसा विनिमय बिल होता है जिसे एक पार्टी पर लिखा तथ स्वीकार किया जाता है जिससे उसे भुनाया जा सके। इसे किसी भी अंतर्निहित व्यापार लेनदेन के बिना वित्तपोषण के उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है।


Q. 170110 एरिक ने मार्च 1 को बोस्टन को 20,000 रु के मूल्य का माल बेचा तथा दो महीने का बिल प्राप्त किया। 1 अप्रैल को बिल को बैंक से 5% वार्षिक बट्टे पर भुना लिया गया। परिपक्वता पर बिल का भुगतान नहीं किया गया। बोस्टन ने 5000 रु का भुगतान किया और 5% ब्याज पर शेष राशि के लिए दो महीने का एक नया बिल स्वीकार किया। 1. नए बिल की राशि की गणना कीजिए। 2. बैंक द्वारा चार्ज की गयी बट्टे की राशि क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170111 अनुग्रह विपत्र किन दशाओं में लिखे जाते हैं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

ऐसे बिल धन की कमीं की दशा में एक पक्ष द्वारा किसी दूसरे पक्ष की सहायता के लिए लिखे जाते हैं।


Q. 170112 विनिमय-विपत्र की स्वीकृति का क्या अर्थ है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जब विनिमय-विपत्र लिखा जाता है तो लिखने के बाद उसे स्वीकृति हेतु विपत्र के देनदार या लेख पात्र के पास भेजा जाता है। देनदार विपत्र के मुख पर स्वीकृति शब्द लिखकर अपने हस्ताक्षर करके उसे वापस कर देता है। यह क्रिया विपत्र की स्वीकृति कहलाती है। स्वीकृति से पूर्व विपत्र केवल ड्राफ्ट ही माना जाता है। ध्यान रहे, स्वीकृति हेतु केवल दर्शनी एवं मुद्दति विपत्र ही भेजा जाता है, मॉग पर देय विपत्र नहीं भेजा जाता है। इसका कारण यह है कि मॉग विपत्र का भुगतान तो उसके प्रस्तुत करने पर ही हो जाता है। स्वीकृति सामान्यतया विपत्र के उपर ही दी जाती है, किसी पृथक कागज पर स्वीकृति शब्द लिख देने से विपत्र की स्वीकृति नहीं मानी जाती।


Q. 170113 13 जूलाई 2009 को प्रकाश ने दीपक को 9,000 रु का माल बेचा तथा इस राशि के लए 60 दिनों का एक बिल लिखा। दीपक ने इस बिल को स्वीकार किया तथा लौटा दिया। 13 जूलाई 2009 को प्रकाश ने अपने बैंकर से इस बिल को 6% वार्षिक ब्याज दर पर भुना लिया। देय तिथि को प्रकाश द्वारा बिल का भुगतान कर दिया गया। प्रकाश तथा दीपक की पुस्तकों में लेनदेनों की जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170114 एक मशीन को प्रतिवर्ष INR2,000 से ह्रासित किया गया। ह्रास की गणना में किस विधि का प्रयोग किया है-


A.

ह्रासित मूल्य पद्घति,

B.

सरल रेखा पद्घति

C.

वर्ष गणना पद्घति

D.

शोधन कोष पद्घति

Right Answer is: B

SOLUTION

इस विधि में सम्पत्ति के कुल मूल्य में से उसका अवशिष्ट मूल्य घटाकर बचने वाली राशि को उस सम्पत्ति के सम्पूर्ण उपयोगी जीवनकाल में बराबर-बराबर बाँट देते हैं।


Q. 170115 ह्रास का प्रावधान किया जाता है-


A.

चिट्ठे का सही एवं उचित चित्र प्रस्तुत करने के लिए,

B.

विनियोजकों को सन्तुष्ट करने के लिए,

C.

प्रबन्धकों को सन्तुष्ट करने के लिए,

D.

कर्मचारियों को सन्तुष्ट करने के लिए

Right Answer is: A

SOLUTION

यदि सम्पत्ति पर ह्रास का आयोजन नहीं किया जाता है तो वह चिट्ठे में अपने वास्तविक मूल्य से अधिक पर दिखलाई जाएगी।


Q. 170116 किस पद्धति में सम्पत्ति खाते का शेष कभी भी शून्य नहीं होता -


A.

स्थायी किस्त पद्धति में,

B.

क्रमागत शेष पद्धति में,

C.

वार्षिक वृत्ति पद्धति में

D.

ह्रास कोष पद्धति में।

Right Answer is: B

SOLUTION

इस विधि के अन्तर्गत ह्रास की गणना एक निश्चित दर से वर्ष के प्रारम्भ में सम्पत्ति के अपलिखित किए गए मूल्य पर की जाती है।


Q. 170117 मूल्य-ह्रास लगाने का मुख्य उद्देश्य नहीं है-


A.

कर-भार को कम करना

B.

सही-लाभ की गणना करना,

C.

सही आर्थिक स्थिति का ज्ञान होना,

 

D.

स्थायी सम्पत्तियों के प्रतिस्थापन के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था करना।

Right Answer is: A

SOLUTION

ह्रास लाभ को घटाकर स्थायी सम्पत्ति के मूल्य तथा स्वामी की पूँजी को कम करता है।


Q. 170118 1 अप्रैल, 2013 को एक मशीन INR96,000 में क्रय की, जिस पर गाड़ी भाड़ा INR4,000 व्यय किया। 10 प्रतिशत वार्षिक दर से 2014-15 में क्रमागत शेष पद्धति से ह्रास की राशि ज्ञात कीजिए।


A. INR10,000

B. INR9,600

C. INR9,000

D. उपर्युक्त में से कोई नहीं।

Right Answer is: C

SOLUTION

इस विधि के अन्तर्गत ह्रास की गणना एक निश्चित दर से वर्ष के प्रारम्भ में सम्पत्ति के अपलिखित किए गए मूल्य पर की जाती है। सम्पत्ति के मूल्य में से ह्रास घटाकर जो मूल्य शेष बचता है, वह अपलिखित मूल्य कहलाता है।


Q. 170119 एक मशीन INR28,000 में खरीदी गयी तथा इसको लगवाने के INR2,000 खर्च हुये 10 वर्ष पश्चात मशीन का अवशिष्ट मूल्य INR1,000 था l आप स्थायी किश्त पद्धति से 10 % वार्षिक की दर से दसवें वर्ष की ह्रास राशि बताइये l


A. INR2,800

B. INR2,900

C. INR3,000

D. INR3,100

Right Answer is: B

SOLUTION

28,000 + 2,000 − 1000 = INR29,000
ह्रास की राशि = 29,000 / 10 = INR2,900


Q. 170120 एक मशीन INR36,000 में खरीद कर उसे लगवाने में INR4,000 व्यय किया। इसका अवशिष्ट मूल्य INR2,000 है। स्थायी किस्त विधि से 10 प्रतिशत वार्षिक की दर से दसवें वर्ष की ह्रास की राशि क्या होगी।


A. INR4,200

B. INR4,000

C. INR3,800

D. उपर्युक्त में से कोई नहीं।

Right Answer is: C

SOLUTION

इस विधि में प्रति वर्ष चार्ज की जाने वाली ह्रास की राशि सम्पत्ति के सम्पूर्ण जीवनकाल में एक समान रहती है। इस पद्धति में सम्पत्ति की मूल लागत (स्थापना व्यय सहित) में से उसका अवशिष्ट मूल्य घटाकर बचने वाली राशि को सम्पत्ति के सम्पूर्ष उपयोगों जीवनकाल पर बराबर-बराबर फैला देते हैं।


Q. 170121 क्रमागत ह्रास पद्धति में ह्रास की रकम-


A. प्रतिवर्ष समान रहती है l 

B. प्रतिवर्ष घटती-बढ़ती रहती है

C. प्रतिवर्ष बढ़ती जाती है l

D. प्रतिवर्ष घटती जाती है l

 

Right Answer is: D

SOLUTION

क्योंकि ह्रास प्रतिवर्ष सम्पत्ति के अपलिखित मूल्य पर लगाया जाता है, इसलिये प्रत्येक आगे के वर्ष के लिये ह्रास कम होता जाता है l


Q. 170122 जब ह्रास चार्ज किया जाता है, सम्पत्ति खाता........... किया जाता है तथा ह्रास खाता.................... किया जाता है।


A. डेबिट, क्रेडिट

B. क्रेडिट, डेबिट

C. अधिक, कम

D. उपर्युक्त में से कोई नहीं।

Right Answer is: B

SOLUTION

ह्रास एक व्यय खाता है। इसका सदैव डेबिट शेष होता है तथा यह एक अस्थायी खाता है। यह खाता तब खोला जाता है जब सम्पत्ति को क्रमागत ह्रास मूल्य पर दिखाना है। इस खाते को सम्पत्ति से चार्ज किया जाता है।


Q. 170123 अवशिष्ट मूल्य से आप क्या समझते हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

किसी भी सम्पत्ति के जीवन काल समाप्त होने के बाद उस सम्पत्ति को बेचने पर जो भी कीमत मिलती है, उसको सम्पत्ति का अवशिष्ट मूल्य कहा जाता है l


Q. 170124 ह्रास कोष पद्धति से आप क्या समझते हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

ह्रास लेखांकन की इस पद्धति में ह्रास की राशि को प्रतिवर्ष प्रतिभूतियों में विनियोजित किया जाता है इस कुल विनियोजित राशि का प्रयोग सम्पत्ति के प्रतिस्थापन के लिये किया जाता है l


Q. 170125 घटती शेष पद्धति से क्या आशय है ?
Right Answer is:

SOLUTION

यह एक ह्रास लेखांकन की विधि है l ह्रास लेखांकन की इस विधि में ह्रास की गणना प्रतिवर्ष सम्पत्ति के घटते शेष पर की जाती है l


Q. 170126 स्थायी किश्त पद्धति से आप क्या समझते हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

ह्रास की इस पद्धति में सम्पत्ति पर ह्रास की राशि प्रत्येक वर्ष समान रहती है l ह्रास की गणना प्रत्येक वर्ष सम्पत्ति की मूल लागत पर ही की जाती है l


Q. 170127 ह्रास की प्रतिस्थापन लागत पद्धति को समझाइये l
Right Answer is:

SOLUTION

इस पद्धति में सम्पत्ति पर ह्रास के साथ-साथ सम्पत्ति के प्रतिस्थापन के लिये भी धनराशि की व्यवस्था की जाती है l


Q. 170128 अप्रचलन से क्या आशय है ?
Right Answer is:

SOLUTION

नये-नये आविष्कारों के कारण पुरानी सम्पत्तियों के बेकार होने को अप्रचलन कहा जाता है l इसके कारण सम्पत्ति के मूल्य में तुरन्त कमी आती हैजिसे पूँजीगत हानि कहा जाता है l


Q. 170129 प्रावधान एवं संचय में अन्तर बताइये।
Right Answer is:

SOLUTION

आयोजन ज्ञात हानि की पूर्ति के लिए बनाए जाते हैं तथा संचय अज्ञात हानि की पूर्ति के लिए बनाए जाते हैं। आयोजन बनाना कानूनी रूप से आवश्यक होते हैं वहीं संचय बनाना ऐच्छिक होता है।


Q. 170130 गुप्त संचय क्या है?
Right Answer is:

SOLUTION

गुप्त संचय एक ऐसा संचय है जो स्थिति विवरण द्वारा प्रकट नहीं होता है। इन संचयों का निर्माण लाभों को वास्तविक राशि से कम दिखाकर तथा सम्पत्तियों को कम मूल्यों पर एवं दायित्वों को अधिक मूल्यों पर दिखाकर किया जाता है।


Q. 170131 अपलेखित मूल्य विधि के कोई दो लाभ दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

अपलेखित मूल्य विधि के दो लाभ:
1. यह बाद के वर्षों में होने वाली मरम्मत तथा रखरखाव की लागत को ध्यान में रखती है।
2. यह आयकर अधिनियम के द्वारा स्वीकृत होती है।


Q. 170132 मूल्यह्रास लगाने के कोई चार कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास लगाने के कारण:
1. टूट-फूट
2. समय की समाप्ति
3. अप्रचलन
4. दुर्घटना


Q. 170133 उन सभी विभिन्न खातों को स्पष्ट कीजिए जिन्हें मूल्यह्रास लेखांकन में तैयार किया जा सकता है।
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास लेखांकन में निम्नलिखित सभी खातों को तैयार किया जा सकता है:
1.
सम्पत्ति खाता।
2.
मूल्यह्रास खाता।
3.
मूल्यह्रास के लिए आयोजन खाता।
4.
सम्पत्ति निपटान खाता।


Q. 170134 क्रमागत शेष पद्धति की विशेषतायें बताइये l
Right Answer is:

SOLUTION

क्रमागत शेष पद्धति की निम्न विशेषतायें हैं -
i. ह्रास प्रतिवर्ष सम्पत्ति के घटते शेष पर लगाया जाता है l
ii. प्रतिवर्ष ह्रास की राशि कम होती जाती है l
iii. ह्रास की दर प्रतिवर्ष समान रहती है l
iv. लाभ-हानि खाते पर प्रतिवर्ष उचित भार पड़ता है l


Q. 170135 मूल्य-ह्रास की विशेषताएँ या लक्षण क्या हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्य-ह्रास की विशेषताएँ अथवा लक्षण निम्नलिखित हैः-

(1) मूल्य-ह्रास का सम्बन्ध स्थायी एवं मूर्त सम्पत्तियों से होता है, अमूर्त सम्पत्तियों से नहीं।

(2) मूल्य-ह्रास का आशय किसी स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में कमी से होता है,चल सम्पत्ति पर नहीं।

(3) मूल्य से आशय उस सम्पत्ति के पुस्तक मूल्य से होता है, बाजार मूल्य से नहीं।

(4) मूल्य में यह कमी निरन्तर एवं स्थायी रुप से सम्पत्ति के प्रयोग के कारण, समय बीतने या अन्य किसी कारण से होता है।


Q. 170136 1 अप्रैल, 2017 को सिंह लिमिटेड की पुस्तक में निम्न शेष थे: मशीन खाता = INR16, 00,000; ह्रास खाता के लिए प्रावधान = INR6 20,000. एक मशीन जो 1 अप्रैल, 2014 को INR2,40,000 में खरीदी गई थी, जिसे 1 जुलाई, 2017 को INR 1,00,000 और 6% की दर से सीजीएसटी और 6% की दर से एसजीएसटी जोड़कर बेचा गया और उसी दिन एक दूसरी मशीन को INR64,000 में खरीदा गया जिस पर 6% की दर से सीजीएसटी और 6% की दर से एसजीएसटी का भुगतान किया गया। फर्म ने मूल लागत विधि पर प्रति वर्ष 15% की दर से ह्रास लगाया और प्रति वर्ष इसकी पुस्तकें 31 मार्च को बंद हो जाती हैं। वर्ष 2017-18 के लिए मशीन खाता और ह्रास खाते के लिए प्रावधान बनाइए और मशीन के विक्रय के लिए रोजनामचा प्रविष्टि भी बनाइए।
Right Answer is:

SOLUTION

 

Journal Entry for Sale of Machinery

 

Date

Particulars

 

L.F.

Dr.(INR)

Cr.(INR)

 

Bank A/c

Dr.

 

1,12.000

 

 

Provision for Depreciation A/c

Dr.

 

1,17,000

 

 

Loss on Sale of Machinery A/c (Profit and loss A/c)

 

 

23,000

 

 

To Machinery A/c

 

 

 

2,40,000

 

To Output CGST A/c

 

 

 

6,000

 

To Output SGST A/c

 

 

 

6,000

 

(Being the machinery sold and loss on sale of machinery is transferred to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कार्यकारी टिप्पणी:

1. मशीन के विक्रय के लिए लाभ एवं हानि की गणना कीजिए

Particulars

(INR)

Cost of Machine (1st April, 2014)

2,40,000

Less: Provision for Depreciation up to 1st July, 2017

(INR36,000 + INR36,000 + INR36,000 + INR9,000)

1,17,000

Book Value on 1st July, 2017

1,23,000

Less: Sale Proceeds

1,00,000

Loss on Sale of Machinery

23,000

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2.

Depreciation to be charged on 31st March, 2018:

INR

 

On Balance Machinery: INR13,60,000

(i.e., INR16,00,000 – INR2,40,000) @ 15%

2,04,000

 

On New Machinery: INR64,000 @ 15% for 9 months.

7,200

 

 

2,11,200


Q. 170137 ह्रास प्रदान करने वाले कारकों का निर्धारण कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

ह्रास प्रदान करने के कारक या आधार

ह्रास की गणना में शामिल कारक हैं:

(i) परिसंपत्ति की मूल लागत: लागत में उपयोग के योग्य बनाने के लिए किए गए सभी व्ययों जैसे कि भाड़ा एवं स्थापना खर्च शामिल हैं

मूल लागत = क्रय मूल्य + भाड़ा एवं अन्य लागत + स्थापन लागत

परिसंपत्ति के क्रय पर भुगतान जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) परिसंपत्ति की लागत नहीं होती है क्योंकि भुगतान जीएसटी, एकत्रित जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) से समायोजन है। इस प्रकार भुगतान जीएसटी को बिना लिए परिसंपत्ति खाता डेबिट किया जाता है। वास्तव में, ह्रास परिसंपत्ति खाते में डेबिट की गई राशि पर लगाया जाता है।


Q. 170138 संचयों के कुछ उदाहरण दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

संचयों के उदाहरण:
1. सामान्य संचय
2. कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष
3. विनियोग विचलन कोष
4. पूँजी संचय
5. लाभांश समानीकरण संचय
6. ऋणपत्रों के शोधन के लिए संचय


Q. 170139 प्रावधानों के कुछ उदाहरण दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

प्रावधानों के उदाहरण:
1. मूल्यह्रास के लिए प्रावधान
2. संदिग्ध एवं डूबत ऋणों के लिए प्रावधान
3. कराधान के लिए प्रावधान
4. देनदारों पर बट्टे के लिए प्रावधान
5. मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए प्रावधान


Q. 170140 समीर ने 1 मार्च, 2018 को 10,00,000 रुपये में एक मशीन खरीदा जिस पर 6% की दर से सीजीएसटी एवं 6% की दर से एसजीएसटी का भुगतान किया। उन्होंने कारखाने में मशीन को लाने के लिए लदाई/उतराई एवं भाड़ा के लिए 40,000 रुपये का भुगतान किया। उन्होंने मशीन को स्थापित करने के लिए 50,000 रुपये खर्च किए। विचार कीजिए : (क) समीर ने विक्रेता को मशीन के लिए कितनी राशि का भुगतान किया? (ख) मशीन खाते में कितनी राशि डेबिट की जाएगी? (ग) लेनदेन को प्रस्तुत करने वाली रोजनामचा प्रविष्टियों को प्रस्तुत कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

(a)

Amount Paid to Vendor of Machine:

INR

 

Value (Cost) of Machine

10,00,000

 

Add: CGST @ 6%

60,000

 

SGST @ 6%

60,000

 

 

11,20,000

(b)

Amount to be Debited to Machinery Account:

INR

 

Cost (without CGST and SGST)

10,00,000

 

Loading/unloading and Carriage Expenses

40,000

 

Installation Charges

50,000

 

 

10,90,000

 

 

(c)

 

JOURNAL ENTRIES

 

Date

 

Particulars

 

L.F.

Dr.(INR)

Cr.(INR)

2018 Mar.

1

Machinery A/c

Dr.

 

10,00,000

 

 

 

Input CGST A/c

Dr.

 

60,000

 

 

 

Input SGST A/c

Dr.

 

60,000

 

 

 

To Cash/Bank A/c

 

 

 

 

11,20,000

 

 

(being the machinery purchased)

 

 

 

 

 

 

Machinery A/c

Dr.

 

90,000

 

 

 

To Cash/Bank A/c

 

 

 

90,000

 

 

(Being loading/unloading, carriage and installation charges paid)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Q. 170141 मूल्यह्रास की आवश्यकता का वर्णन कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास की आवश्यकता:
1) लागत और आय का मिलान: - व्यापार के संचालन में अचल संपत्तियों के अधिग्रहण का औचित्य यह होता है कि इनका उपयोग आय कमाने में किया जाता है। एक बार सम्पत्तियों को व्यवसाय में उपयोग करने पर इसमें कुछ टूट-फूट होती है जिससे इसके मूल्य में कमीं होती है। इसलिए, मूल्यह्रास को व्यापार के सामान्य कार्यों में किए गए किसी भी अन्य व्ययों की तरह लागत के रूप में लिया जाता है।
2) कर के लिए - मूल्यह्रास कर उद्देश्य के लिए कटौतीयोग्य लागत होती है।
3) सच और उचित वित्तीय स्थिति: - यदि संपत्ति पर मूल्यह्रास नहीं लगाया जाता है तो सम्पत्ति को अधिक मूल्य पर दिखाया जायेगा तथा चिट्ठा व्यवसाय की सही वित्तीय स्थिति को चित्रित नहीं करेगा।
4) कानून की अनुपालना: - परोक्ष रूप से अचल संपत्तियों पर मूल्यह्रास लगाने के लिए कंपनी उद्यमों की तरह व्यापार संगठनों के लिए कुछ विशिष्ट कानून मौजूद हैं।


Q. 170142 मूल्यह्रास के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास के कारण:
1) उपयोग या समय बीतने के कारण टूट-फूट: - टूट-फूट अर्थात आय कमाने के लिए व्यापार के संचालन में इसके उपयोग से उत्पन्न होने वाली एक संपत्ति मूल्य में कमी तथा गिरावट। यह संपत्ति की की तकनीकी क्षमता की सेवा को कम करता है जिसके लिए इसे स्थापित किया गया है। टूट-फूट का एक अन्य पहलू भौतिक गिरावट भी होती है।
2) कानूनी अधिकारों की समाप्ति: - संपत्ति की कुछ श्रेणियों का मूल्य पूर्व निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद या सरकार द्वारा व्यावसायिक समझौते की समाप्ति के बाद समाप्त हो जाता है।
3) अप्रचलन: - स्थायी संपत्तियों के मूल्यह्रास का एक और प्रमुख कारक होता है। अप्रचलन अर्थात 'समय समाप्ति'। अप्रचलन संपत्तियों के बेहतर प्रकारों की उपलब्धता के कारण मौजूदा परिसंपत्तियों की समाप्ति को संदर्भित करता है।
4) असामान्य कारक: - संपत्ति की उपयोगिता में गिरावट दुर्घटनाओं आग, भूकंप, बाढ़, आदि के रूप में असामान्य कारकों के कारण भी हो सकता है। आकस्मिक हानि स्थायी होती है लेकिन सतत् या क्रमिक नहीं होती है।


Q. 170143 डेल्को लिमिटेड ने 1 जनवरी 2009 को INR2,000 की एक मशीनरी क्रय की। इस मशीनरी को वास्तविक मूल्य पर 10% वार्षिक हृासित किया जाता है। 30 जून 2011, को मशीनरी को INR1,800 में बेच दिया गया।
यह मानते हुए कि प्रतिवर्ष 31 दिसम्बर को पुस्तकें बंद की जाती हैं एक मशीनरी खाता तैयार कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

Dr.

Machinery Account

Cr.

Date

Particulars

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/mathimage/2013/06/28/183.gif

Date

Particulars

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/mathimage/2013/06/28/183.gif

2009

 

 

2009

 

 

Jan. 01

To Cash A/c

2,000

Dec.31

By Depreciation

200

 

 

 

Dec.31

By Balance c/d

1,800

 

 

2,000

 

 

2,000

2010

 

 

2010

 

 

Jan. 01

To Balance b/d

1,800

Dec.31

By Depreciation

200

 

 

 

Dec.31

By Balance c/d

1,600

 

 

1,800

 

 

1,800

2011

 

 

2011

 

 

Jan. 01

To Balance b/d

1,600

June 30

By Depreciation

100

June 30

To Profit and Loss

 

June 30

By Bank A/c

1,800

 

(Profit on sale)

300

 

 

 

 

 

1,900

 

 

1,900

               


Q. 170144 आयोजन तथा संचय में अंतरों को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/16/201410167244500014134316911.jpg
Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/16/201410167244500014134316912.jpg


Q. 170145 टिप्पणी करें: 1. सम्पत्तियों में की गई वृद्दि पर ह्रास की प्रक्रिया 2. बेची गई सम्पत्ति पर ह्रास की विधि
Right Answer is:

SOLUTION

1. सम्पत्तियों में की गई वृद्दि पर ह्रास की प्रक्रिया

यदि ह्रास की दर प्रतिवर्ष या वार्षिक दी गई है तथा सम्पत्ति के क्रय की तिथि भी दी गई है तो जिस वर्ष सम्पत्ति क्रय की जाती है, उस वर्ष सम्पत्ति क्रय की तिथि से लेखावधि के अन्त तक का ह्रास लगाया जाएगा। इसके विपरीत, यदि ह्रास की दर प्रतिवर्ष नहीं है तो ह्रास, क्रय के वर्ष में पूरे वर्ष का ह्रास चार्ज किया जाएगा।

यदि प्रश्न में यह संकेत दिया गया है कि क्रय के वर्ष में पूरे वर्ष का ह्रास चार्ज किया जाए तो उस दशा में ह्रास सम्पूर्ण वर्ष का चार्ज किया जाएगा।

 

2. बेची गई सम्पत्ति पर ह्रास की विधि

यदि वर्ष के दौरान सम्पत्ति का विक्रय किया जाता है तो विक्रय के वर्ष के प्रारम्भ से विक्रय तिथि तक ह्रास की गणना की जाएगी तथा ह्रास लगाया जाएगा।

यदि प्रश्न में यह कहा गया हो कि विक्रय के वर्ष में सम्पत्ति पर पूर्ण ह्रास लगाया जाएगा तो सम्पूर्ण वर्ष का ह्रास लगाया जाएगा। इसके विपरीत, यदि यह कहा गया हो कि विक्रय वर्ष में ह्रास चार्ज नहीं किया जाएगा तो विक्रय वर्ष में ह्रास चार्ज नहीं किया जाएगा।


Q. 170146 मूल्यह्रास लगाने की विधियों को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास की राशि की गणना विभिन्न विधियों द्वारा की जाती है। मूल्यह्रास के लिए प्रयुक्त सामान्य विधियाँ हैं:
1. सीधी रेखा या स्थायी प्रतिशत या मूल लागत विधि
2. क्रमागत ह्रास या अपलेखित मूल्य विधि
3. वार्षिक वृत्ति विधि
4. ह्रास कोष विधि
5. बीमा पॉलिसी विधि
6. पुनर्मूल्यांकन विधि
7. रिक्त इकाई विधि
8. मशीन घंटा दर विधि
9. वर्षों की योग विधि
हालांकि, मूल्यह्रास की गणना के लिए आमतौर पर दो मुख्य विधियों का उपयोग किया जाता है:
1. सीधी रेखा विधि: इस विधि के तहत एक स्थायी सम्पत्ति से मूल्यह्रास के रूप में एक समान राशि चार्ज की जाती है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मूल्यह्रास की गणना प्रत्येक वर्ष मूल लागत पर एक स्थायी दर से की जाती है। यह विधि बहुत साधारण होती है। इसे मूल लागत विधि तथा समान किस्त विधि भी कहा जाता है।
2. अपलेखित मूल्य विधि: इस विधि के तहत एक स्थायी सम्पत्ति से वर्ष दर वर्ष मूल्यह्रास के रूप में घटता हुआ मूल्य चार्ज किया जाता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मूल्यह्रास की गणना प्रत्येक वर्ष घटते हुए मूल्य पर एक स्थायी दर से की जाती है। यह विधि अधिक न्यायोचित होती है तथा इसे आय कर विभाग द्वारा अनुमोदित किया गया है। इसे क्रमागत ह्रास विधि एवं घटती किस्त विधि भी कहा जाता है।


Q. 170147 मूल्यह्रास अभिलेखन के लिए प्रयुक्त महत्वपूर्ण विधियाँ क्या हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

मूल्यह्रास दो अलग-अलग विधियों का उपयोग कर लेखा पुस्तकों में रिकॉर्ड किया जा सकता है:
1. सम्पत्ति खाते से चार्ज करके:
इस विधि में मूल्यह्रा सीधे समत्ति से चार्ज किया जाता है। अतः सम्पत्ति खाते को पुस्तकों में अपलेखित मूल्य पर दिखाया जाता है। सम्पत्ति के इस मूल्य को पुस्तक मूल्य कहा जाता है। मूल्यह्राके लिए प्रावधान खाता नहीं रखा जाता है।
इस स्थिति में निम्नलिखित प्रविष्टियाँ की जाती हैं:

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/15/201410157231600014133480881.jpg

2. मूल्यह्रा के लिए प्रावधान खाते का निर्माण करके:
इस विधि के तहत मूल्यह्रा को मूल्यह्रा के लिए प्रावधान खाते में क्रेडिट किया जाता है तथा सम्पत्ति खाते को पुस्तकों में हमेशा वास्तविक मूल्य पर दिखाया जाता है। मूल्यह्रा के लिए प्रावधान खाते का शेष उस तिथि तक संचित मूल्यह्रास की कुल राशि को प्रदर्शित करता है।
इस स्थिति में निम्नलिखित प्रविष्टियाँ की जाती हैं:

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/15/201410157231600014133480882.jpg


Q. 170148 1 अप्रेल 2002 को, एक फर्म ने INR50,000 का फर्नीचर क्रय किया तथा 1 अप्रेल 2003 को, INR20,000 का अन्य फर्नीचर क्रय किया।
1 अप्रेल 2005 को, फर्म ने 1 अप्रेल 2002 को INR20,000 की लागत पर खरीदे गये फर्नीचर के एक भाग का INR8,000 में विक्रय किया।
30 सितम्बर 2006 को, फर्म ने INR28,600 की लागत का एक नया फर्नीचर क्रय किया।
मूल्यह्रास 10% वार्षिक की दर पर क्रमागत शेष विधि द्वारा लगाया जाता है तथा खाते प्रतिवर्ष 31 मार्च को बंद किये जाते हैं।
पांच वर्षों के लिए फर्नीचर खाता तैयार कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

Dr. Furniture Account Cr.

Date

Particulars

INR

Date

Particulars

INR

2002

 

 

2003

 

 

1Apr.

To Bank A/c (I)

50,000

31Mar.

By Dep. A/c (I)

5,000

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d

45,000

 

 

50,000

 

 

50,000

2003

 

 

2004

 

 

1Apr.

To Bal. b/d

45,000

31Mar.

By Dep. A/c (I)

4,500

1Apr.

To Bank A/c (II)

20,000

31Mar.

By Dep. A/c(II)

2,000

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

40,500

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

18,000

 

 

65,000

 

 

65,000

2004

 

 

2005

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

40,500

31Mar.

By Dep. A/c (I)

4,050

1Apr.

To Bal. b/d (II)

18,000

31Mar.

By Dep. A/c(II)

1,800

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

36,450

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

16,200

 

 

58,500

 

 

58,500

2005

 

 

2005

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

36,450

1Apr.

By Bank A/c

 

1Apr.

To Bal. b/d (II)

16,200

 

(Sale)

8,000

 

 

 

1Apr.

By P&L A/c

 

 

 

 

 

(Loss on Sale)

6,580

 

 

 

2006

 

 

 

 

 

31Mar.

By Dep. A/c (I)

2,187

 

 

 

31Mar.

By Dep. A/c(II)

1,620

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

19,683

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

14,580

 

 

52,650

 

 

52,650

2006

 

 

2007

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

19,683

31Mar.

By Dep. A/c(I)

1,968

1Apr.

To Bal. b/d (II)

14,580

31Mar.

By Dep. A/c(II)

1,458

30Sep.

To Bank A/c (III)

28,600

31Mar.

By Dep. A/c (III)

1,430

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

17,715

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

13,122

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (III)

27,170

 

 

62,863

 

 

62,863

 

 


Q. 170149 1 जनवरी 2005 को रीमा लिमिटेड ने एक INR70,000 की लागत का एक फर्नीचर क्रय किया। इसने 1 अक्टूबर 2006 को INR17,500 की लागत का एक अन्य फर्नीचर खरीदा। यदि मूल्यह्रास इसकी वास्तविक लागत पर 10% वार्षिक चार्ज किया जाता है तथा यदि मूल्यह्रास के लिए आयोजन खाता रखा जाता है तो तीन वर्षों के लिए आवश्यक खाते तैयार कीजिए। कम्पनी प्रतिवर्ष अपने खाते 31 दिसम्बर को बंद करती है।
Right Answer is:

SOLUTION

Dr. Furniture Account Cr.

 

Date

Particulars

INR

Date

Particulars

INR

2005

 

 

2005

 

 

Jan.1

To Bank A/c

70,000

Dec.31

By Bal. c/d

70,000

 

 

70,000

 

 

70,000

2006

 

 

2006

 

 

Jan.1

To Bal. b/d

70,000

Dec.31

By Bal. c/d

87,500

Oct.1

To Bank A/c

17,500

 

 

 

 

 

87,500

 

 

87,500

2007

 

 

2007

 

 

Jan.1

To Bal. b/d

87,500

Dec.31

By Bal. c/d

87,500

 

 

87,500

 

 

87,500

 

Dr. Provision for Depreciation Account Cr.

 

Date

Particulars

INR

Date

Particulars

INR

2005

 

 

2005

 

 

Dec.31

To Bal. c/d

7,000

Dec.31

By Dep. A/c

7,000

 

 

7,000

 

 

7,000

2006

 

 

2006

 

 

Dec.31

To Bal. c/d

14,000

Jan. 1

By Bal. b/d

7,000

 

(Fur.- I)

 

Dec.31

By Dep. A/c

7,000

Dec.31

To Bal. c/d

438

 

(Fur.- I)

 

 

(Fur.- II)

 

Dec.31

By Dep. A/c

438

 

 

 

 

(Fur.- II)

 

 

 

14,438

 

 

14,438

2007

 

 

2007

 

 

Dec.31

To Bal. c/d

21,000

Jan. 1

By Bal. b/d

14,000

 

(Fur.- I)

 

 

(Fur.- I)

 

 

To Bal. c/d

2,188

Jan. 1

By Bal. b/d

438

 

(Fur.- II)

 

 

(Fur.- II)

 

 

 

 

Dec.31

By Dep. A/c

7,000

 

 

 

 

(Fur.- I)

 

 

 

 

Dec.31

By Dep. A/c

1,750

 

 

 

 

(Fur.- II)

 

 

 

23,188

 

 

23,188

 

 

 

 

 

 

 

Dr. Depreciation Account Cr.

Date

Particulars

INR

Date

Particulars

INR

2005

 

 

2005

 

 

Dec.31

To Pro. for

 

Dec.31

By P&L A/c

7,000

 

Dep. A/c

7,000

 

 

 

 

 

7,000

 

 

7,000

2006

 

 

2006

 

 

Dec.31

To Prov. for

 

Dec.31

By P&L A/c

7,438

 

Dep. A/c (I)

7,000

 

 

 

 

To Prov. for

438

 

 

 

 

Dep. A/c (II)

 

 

 

 

 

 

7,438

 

 

7,438

2007

 

 

2007

 

 

Dec.31

To Prov. for

 

Dec.31

By. P&L A/c

8,750

 

Dep. A/c (I)

7,000

 

 

 

 

To Prov. for

 

 

 

 

 

Dep. A/c (II)

1,750

 

 

 

 

 

8,750

 

 

8,750

 


Q. 170150 एक संस्था ने 1 अप्रैल 2002 को INR50,000 का एक फर्नीचर खरीदा, 1 अप्रैल 2003 को एक अतिरिक्त फर्नीचर INR20,000 में ख़रीदा तथा 30 सितम्बर 2006 को INR28,100 का फर्नीचर ख़रीदा l 1 अप्रैल 2005 को उस फर्नीचर का एक भाग INR8,000 में बेचा गया, जो 1 अप्रैल 2002 को INR20,000 में खरीदा गया था l आप पाँच वर्षों के लिये फर्नीचर खाता बनाइये l ह्रास 10% वार्षिक की दर से, क्रमागत शेष पद्धति से लगाया जाता है l खाते प्रतिवर्ष 31 मार्च को बन्द किये जाते हैं l
Right Answer is:

SOLUTION

Dr. Furniture Account Cr.

Date

Particulars

INR

Date

Particulars

INR

2002

 

 

2003

 

 

1Apr.

To Bank A/c (I)

50,000

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (I)

5,000

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d

45,000

 

 

50,000

 

 

50,000

2003

 

 

2004

 

 

1Apr.

To Bal. b/d

45,000

31Mar.

By Depreciation

 

1Apr.

To Bank A/c (II)

20,000

 

A/c (I)

4,500

 

 

 

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (II)

2,000

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

40,500

 

 

 

31Mar.

By bal. c/d (II)

18,000

 

 

65,000

 

 

65,000

2004

 

 

 

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

40,500

2005

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (II)

18,000

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (I)

4,050

 

 

 

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (II)

1,800

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

36,450

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

16,200

 

 

58,500

 

 

58,500

2005

 

 

2005

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

36,450

1Apr.

By Bank A/c

 

1Apr.

To Bal. b/d (II)

16,200

 

(Sale)

8,000

 

 

 

1Apr.

By P/L A/c

 

 

 

 

 

(Loss on Sale)

6,580

 

 

 

2006

 

 

 

 

 

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (I)

2,187

 

 

 

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (II)

1,620

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (I)

19,683

 

 

 

31Mar.

By Bal. c/d (II)

14,580

 

 

52,650

 

 

52,650

2006

 

 

2006

 

 

1Apr.

To Bal. b/d (I)

19,683

31Mar.

By Depreciation

 

1Apr.

To Bal. b/d (II)

14,580

 

A/c (I)

1,968

30Sep.

To Bank A/c (III)

28,100

31Mar.

By Depreciation

 

 

 

 

 

A/c (II)

1,458

 

 

 

31Mar.

By Depreciation

 

 

<
Q. 170151 एक व्यवसायी ने 1 अप्रैल 2000 को INR30,000 में एक मशीन खरीदी l 1 अक्टूवर 2000 को INR20,000 की तथा 1 जुलाई 2001 को INR10,000 की और मशीन खरीदी गयीं l 1 जनवरी 2002 को उस मशीन का 1/3 भाग INR3,000 में बेचा गया, जो 1 अप्रैल 2000 को खरीदी गयी थी l आप तीन वर्षों के लिये मशीन खाता बनाइयेl खाते प्रतिवर्ष 31 दिसम्बर को बन्द किये जाते हैं l ह्रास 10 % वार्षिक की दर से स्थायी किश्त पद्धति के आधार पर लगाया जाता है l
Right Answer is:

SOLUTION

Dr. Machine Account Cr.
Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2011/10/31/201110317071020013200399481.jpg


Q. 170152 राय ने 1 अक्टूबर, 2015 को एक मशीन INR 2,00,000 और 12% आइजीएसटी में खरीदा, जिसका भुगतान चेक से किया। दूसरी मशीन 1 अप्रैल, 2017 को INR1,20,000 और 12% आइजीएसटी में खरीदा, जिसका भुगतान चेक से किया। सीधी रेखा विधि से 10% प्रति वर्ष की दर से ह्रास लगाया जाता है। खाते प्रतिवर्ष 31 मार्च को बंद किए जाते हैं। वर्ष समाप्ति 31मार्च, 2016, 2017 और 2018 के लिए आवश्यक रोजनामचा प्रविष्टियों को बनाइये और चिट्ठे में मशीन खाता एवं मशीनरी दर्शाइए: (i) जब ह्रास खाते के लिए प्रावधान नहीं बनाये रखा जाता है। (ii) जब ह्रास खाते के लिए प्रावधान बनाये रखा जाता है।
Right Answer is:

SOLUTION

(i) जब ह्रास खाते के लिए प्रावधान नहीं बनाये रखा जाता है

 

 

In the Books of Roy

JOURNAL

 

Date

 

Particulars

 

L.F.

Dr.(INR)

Cr.(INR)

2015 Oct.

1

Machinery A/c

Dr.

 

2,00,000

 

 

 

Input IGST A/c

Dr.

 

24,000

 

 

 

To Bank A/c

 

 

 

2,24,000

 

 

(Being the inter-state purchase of machinery, paid IGST @ 12%) (Note)

 

 

 

 

2016

March

31

Depreciation A/c (INR2,00,000 x 10/100 x 6/12)

Dr.

 

10,000

 

 

 

To Machinery A/c

 

 

 

10,000

 

 

(Being the depreciation charged on machinery for six months)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss a/c

Dr.

 

10,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

10,000

 

 

(Being the depreciation transferred to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

2017

March

31

Depreciation A/c

Dr.

 

20,000

 

 

 

To Machinery A/c

 

 

 

20,000

 

 

(Being the depreciation charged to machinery for one year)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss A/c

Dr.

 

20,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

20,000

 

 

(Being the depreciation transferred to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

April

1

Machinery A/c

Dr.

 

1,20,000

 

 

 

Input IGST A/c

Dr.

 

14,400

 

 

 

To Bank A/c

 

 

 

1,34,400

 

 

(Being the inter-state purchase of machinery, paid IGST @ 12%) (Note)

 

 

 

 

2018

March

31

Depreciation A/c (INR20,000 + INR12,000)

Dr.

 

32,000

 

 

 

To Machinery A/c

Dr.

 

 

32,000

 

 

(Being the depreciation charged on machinery)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss A/c

Dr.

 

32,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

32,000

 

 

(Being the transfer of depreciation to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(ii) जब ह्रास खाते के लिए प्रावधान बनाये रखा जाता है

 

 

JOURNAL

 

Date

 

Particulars

 

L.F.

Dr.(INR)

Cr.(INR)

2015 Oct.

1

Machinery A/c

Dr.

 

2,00,000

 

 

 

Input IGST A/c

Dr.

 

24,000

 

 

 

To Bank A/c

 

 

 

2,24,000

 

 

(Being the inter-state purchase of machinery, paid IGST @ 12%)

 

 

 

 

2016

March

31

Depreciation A/c

Dr.

 

10,000

 

 

 

To Provision for Depreciation A/c

 

 

 

10,000

 

 

(Being the depreciation charged on machinery for six months)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss a/c

Dr.

 

10,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

10,000

 

 

(Being the depreciation transferred to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

2017

March

31

Depreciation A/c

Dr.

 

20,000

 

 

 

To Provision for Depreciation A/c

 

 

 

20,000

 

 

(Being the depreciation charged on machinery.)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss A/c

Dr.

 

20,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

20,000

 

 

(Being the depreciation transferred to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

April

1

Machinery A/c

Dr.

 

1,20,000

 

 

 

Input IGST A/c

Dr.

 

14,400

 

 

 

To Bank A/c

 

 

 

1,34,400

 

 

(Being the inter-state purchase of machinery, paid IGST @ 12%)

 

 

 

 

2018

March

31

Depreciation A/c (INR20,000 + INR12,000)

Dr.

 

32,000

 

 

 

To Provision for Depreciation A/c

Dr.

 

 

32,000

 

 

(Being the depreciation charged on machinery)

 

 

 

 

March

31

Profit and Loss A/c

Dr.

 

32,000

 

 

 

To Depreciation A/c

 

 

 

32,000

 

 

(Being the transfer of depreciation to Profit and Loss Account)

 

 

 

 

 

 


Q. 170153 आयोजन की विभिन्न विशेषताएँ लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

आयोजन की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. एक आयोजन को निम्नलिखित का भुगतान करने के लिए बनाया जाता है:
(अ) एक प्रत्याशित हानि जो हुई है परंतु जिसकी राशि का निर्धारण नहीं किया जाता है।
(ब) सम्पत्ति के मूल्य में एक ज्ञात कमीं या,
(स) एक दायित्व जिसका प्रकट होना ज्ञात हो।
2. इसमें एक राशि होती है जिसे आय या लाभों से अलग रखा जाता है। यह एक प्रतिधारण लाभ होता है जिसे अस्थायी रूप से एक विशेष उद्देश्य के लिए रखा जाता है।
3. प्रत्याशित हानि या सम्पत्तियों के मूल्यों में कमीं या दायित्वों की राशि शद्धता के साथ सटीक निर्धारण नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यह हमेशा निश्चित होता है कि कुछ डूबत ऋण अशोधनीय होते हैं परंतु डूबत ऋणों की राशि का शुद्धता के साथ पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है।
4. आयोजन लाभ एवं हानि खाते के लिए एक प्रभार होता है।


Q. 170154 आयगत संचय तथा पूँजीगत संचय को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

अ) आयगत संचय: इन्हें ऐसे आयगत लाभों में से बनाया जाता है जो व्यवसाय की सामान्य गतिविधियों से प्राप्त होते हैं तथा जो लाभांश के रूप में वितरण के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होते हैं आयगत संचयों के उदाहरण हैं:
-सामान्य संचय
-कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष
-विनियोग समानीकरण संचय
-ऋणपत्र शोधन संचय
ख) पूँजीगत संचय: इन्हें ऐसे लाभों में से बनाया जाता है जो व्यवसाय की सामान्य गतिविधियों से प्राप्त नहीं होते हैं। ऐसे संचय लाभांश के रूप में वितरण के लिए नहीं होते हैं। ऐसे संचयों का उपयोग पूँजीगत हानियों को चार्ज करने के लिए तथा कम्पनी की स्थिति में बोनस अंश जारी करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे पूँजीगत लाभों के उदाहरण जिनमें से पूँजीगत संचयों का निर्माण किया जाता है:
-अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर प्रीमियम
-स्थायी सम्पत्तियों के विक्रय पर लाभ
-स्थायी सम्पत्तियों एवं दायित्वों के शोधन पर लाभ
-समामेलन से पूर्व के लाभ
-जब्त अंशों के पुनर्निर्गमन पर लाभ


Q. 170155 विशेष संचय को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

विशेष संचय वे संचय होते हैं जिन्हें एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाया जाता है तथा इन्हें उसी उद्देश्य के लिए उपयोग में लिया जाता है। विशेष संचयों के उदारहण हैं:
1. लाभांश समानीकरण संचय: इस संचय को लाभांश दर को बनाये रखने या स्थापित करने के लिए बनाया जाता है। उच्च लाभ के वर्ष में, राशि को लाभांश समानीकरण संचय में हस्तांतरित कर दिया जाता है। कम लाभ वाले वर्ष में, लाभांश दर को बनाये रखने के लिए इसका उपयोग कर लिया जाता है।
2. कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष: इसे दुर्घटना आदि के कारण कर्मचारियों के दावों के भुगतान के लिए बनाया जाता है।
3. विनियोग विचलन कोष: इसे बाजार विचलन से विनियोगों के मूल्यों में कमीं के लिए बनाया जाता है।
4. ऋणपत्र शोधन संचय: इसे ऋणपत्रों के शोधन के लिए धन प्रदान करने के लिए बनाया जाता है।


Q. 170156 स्थायी किस्त पद्धति एवं क्रमागत शेष पद्धति में क्या अंतर है ?
Right Answer is:

SOLUTION

स्थायी किस्त पद्धति एवं क्रमागत शेष पद्धति में अंतर  इस प्रकार हैः-

क्र0सं0

अन्तर का आधार

स्थायी किस्त पद्धति

क्रमागत शेष पद्धति

1.

ह्रास की राशि

इसमें ह्रास की राशि प्रतिवर्ष समान रहती है।

इसमें ह्रास की राशि प्रतिवर्ष घटती रहती है।

2.

ह्रास की दर

इसमें ह्रास की दर प्रायः कम या नीची होती है।

इसमें ह्रास की दर प्रायः ऊँची होती है।

3.

सरल या कठिन

यह पद्धति ह्रास गणना करने की दृष्टि से सरल है।

यह पद्धति ह्रास की गणना करने की दृष्टि से अपेक्षाकृत कठिन है।

4.

ह्रास की गणना

इसमें प्रथम वर्ष के बाद भी ह्रास की दर मूल लागत पर निश्चित रहती है।

इसमें प्रथम वर्ष के बाद ह्रास की दर मूल लागत के स्थान पर घटते हुए शेष पर निश्चित रहती है।

 


Q. 170157 सीधी रेखा विधि तथा इसके लाभों को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

यह विधि सम्पत्ति के सम्पूर्ण जीवनकाल में इसके समान उपयोगो की अवधारणा पर आधारित होती है। इसे सीधी रेखा एक कारण से कहा जाता है कि यदि मूल्यह्रा की राशि तथा संबंधित समयावधि को एक ग्राफ पर रखा जाये तो इसका परिणाम एक सीधी रेखा होता है।
इसे स्थायी किस्त विधि भी कहा जाता है क्योंकि सम्पत्ति के उपयोगी जीवनकाल में वर्ष दर वर्ष मूल्यह्रा की राशि समान रहती है। इस विधि के तहत, एक सम्पत्ति के जीवनकाल के दौरान प्रत्येक लेखा अवधि में एक स्थायी तथा समान राशि मूल्यह्रा के रूप में चार्ज की जाती है तथा यह राशि इसके अवशिष्ट मूल्य के लिए सम्पत्ति की मूल लागत को कम करती है।

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/15/201410155655920014133485101.jpg

सीधी रेखा विधि के लाभ:
-यह समझने तथा लागू करने के लिए बहुत साधारण होती है।
-इसमें सम्पत्तियों को शुद्ध अवशिष्ट मूल्य या शुन्य मूल्य तक ह्रासित किया जाता है।
-प्रत्येक वर्ष लाभ एवं हानि खाते में मूल्यह्रा के रूप में समान राशि चार्ज की जाती है। यह विभिन्न वर्षों के लिए लाभों की तुलना को आसान बनाते हैं।


Q. 170158 एक फर्म ने 1 जनवरी, 2011 को एक संयंत्र INR96,000 का क्रय किया और इसे कारखाना में स्थापित करने में INR4,000 खर्च किया। 1 जुलाई 2012 को दूसरा संयंत्र INR75,000 में क्रय किया। 1 जुलाई 2013 को 1 जनवरी 2011 को क्रय किया गया संयंत्र INR70,000 में बेच दिया गया और एक नया संयंत्र INR80,000 में क्रय किया गया। फर्म द्वारा प्रत्येक वर्ष अपलिखित मूल्य पर 10% प्रतिवर्ष की दर से ह्रास की व्यवस्था की जाती है। वर्ष 2011 से 2014 तक चार वर्षों का संयंत्र खाता बनाइए।
Right Answer is:

SOLUTION

Plant Account

Date

Particular

INR

Date

Particular

INR

2011

Jan.1

To Bank A/c

(96,000+4,000)

1,00,000

2011

Dec.31

By Depreciation

By Balance c/d

10,000

90,000

 

 

1,00,000

 

 

1,00,000

2012

Jan.1

July 1

To Balance b/d

 

To Bank A/c

90,000

 

75,000

2012

Dec.31

By Depreciation

(9,000+3,750)

By Balance c/d

12,750

 

1,52,250

 

 

1,65,000

 

 

1,65,000

2013

Jan.1

 

To Balance b/d

(81,000+71250)

To Bank A/c

1,52,250

 

80,000

2013

July1

 

Dec.31

By Depreciation

By Bank A/c

By P&L A/c

By Depreciation

(7,125+8,000)

By Balance c/d

4,050

70,000

6,950

 

15,125

1,36,125

 

 

2,32,250

 

 

2,32,250

2014

Jan.1

To Balance b/d

(64,125+72,000)

1,36,125

2014

Dec.31

By Depreciation

(6,412.5+7,200)

By Balance c/d

(57,712.5+64,800)

 

13,612.5

 

1,22,512.5

 

 

1.36.125

 

 

1,36,125


Q. 170159 हुण्डी कितने प्रकार की होती है


A.

तीन

B.

दो

C.

चार

D.

इनमें से कोई नहीं

Right Answer is: B

SOLUTION

हुण्डी दो प्रकार की होती है (1) दर्शनी हुण्डी एवं (2) मुद्दती हुण्डी


Q. 170160 बिल के बेचान का अर्थ है


A.

आहर्ती से बिल के अधिकार को लेनदार को स्थानान्तरित करना

B.

लेनदार से बिल के अधिकार को आहर्यी को स्थानान्तरित करना

C.

आहर्ता से बिल के अधिकार को लेनदार को स्थानान्तरित करना

D.

लेनदार द्वारा बिल के अधिकार को आहर्ता को स्थानान्तरित करना

Right Answer is: C

SOLUTION

जब बिल का लेखक बिल को अपने किसी ऋणदाता (लेनदार) के पक्ष में बेचान करता है, ऋणदाता बिल को प्राप्त करता है इसलिए इसकी रकम ऋणदाता के डेबिट में लिखी जाएगी और बिल हमारे पास से जाता है इसलिए इसकी रकम प्राप्य बिल खाते के क्रेडिट में लिखी जाएगी।


Q. 170161 विनिमय-विपत्र के धारक के पास देय तिथि तक बिल को अपने पास रोके रखने के अतिरिक्त क्या विकल्प होते हैं


A.

बैंक में संग्रह हेतु बिल भेजना

B.

बैंक से बिल को भुनाना

C.

लेनदार को बिल का बेचान करना

D.

उपर्युक्त सभी

Right Answer is: D

SOLUTION

जो व्यक्ति विनिमय-बिल या प्रतिज्ञा-पत्र प्राप्त करता है उसके पास चार विकल्प हैं – (1) वह उसको परिपक्वता तिथि अर्थात भुगतान तिथि तक अपने पास रख सकता है, (2) वह इसकी रकम बैंक को कटौती देकर इसकी परिपक्वता तिथि से पहले प्राप्त कर सकता है, (3) वह इसको अपने ऋणदाताओं अर्थात तीसरे पक्षकार को बेचान कर सकता है, तथा (4) वह इसको बैंक के पास इसकी परिपक्वता तिथि से पहले बेंक को संग्रह के लिए भेज सकता है।


Q. 170162 विपत्र का अवधि पूर्व भुगतान से क्या आशय है


A.

विपत्र को भुनाना

B.

विपत्र का अनादरण

C.

विपत्र का नवीनीकरण

D.

विपत्र का परिपक्वता से पूर्व भुगतान

Right Answer is: D

SOLUTION

यदि बिल का स्वीकर्ता बिल का देय तिथि से पहले भुगतान करना चाहता है तो वह बिल का भुगतान कर सकता है। ऐसी अवस्था में बिल का लेखक कुछ छूट दे देता है। इस प्रकार बिल के भुगतान को विपत्र का परिपक्वता से पूर्व भुगतान कहते हैं।


Q. 170163 यदि एक फर्म बहुत सारे विनिमय-प्रतिज्ञा पत्र प्राप्त कर रही हो तो यह अच्छा होगा कि इसे एक भिन्न पुस्तक में लिखा जाए, जिसे कहते हैं-


A.

प्राप्य विपत्र बही

B.

जर्नल

C.

क्रय बही

D.

विक्रय बही

Right Answer is: A

SOLUTION

अधिक मात्रा में विनिमय-प्रतिज्ञा पत्र प्राप्त करने की दशा में उसे प्राप्य विपत्र बही में दर्ज किया जाता है।


Q. 170164 भारतीय मुद्रा एक---------- होती है


A.

विनिमय-पत्र

B.

चैक

C.

प्रतिज्ञा-पत्र

D.

बैंक ड्रॉफ्ट

Right Answer is: C

SOLUTION

भारतीय मुद्रा प्रतिज्ञा-पत्र के रुप में एक ऐसा महत्वपूर्ण साख-पत्र है, जिसका प्रयोग सामान्तया लेन-देन में किया जाता  है।


Q. 170165 विनिमय-विपत्र का स्वीकारकर्ता कौन होता है-


A.

देनदार

B.

लेनदार

C.

विक्रेता

D.

इनमें से कोई नहीं

Right Answer is: A

SOLUTION

यह वह व्यक्ति होता है, जिस पर विनिमय-विपत्र लिखा जाता है तथा जो विनिमय-विपत्र पर अपनी स्वीकृति देता है। यह व्यक्ति माल उधार खरीदता है, अतः ऋणी होता है और निश्चित अवधि के पश्चात धन का भुगतान करता है।


Q. 170166 यदि बिल स्वीकार किया जाता है और रकम नियत तिथि पर (परिपक्वता तिथि) से पूर्व दी जाती है तब बिल कहा जाता है


A.

कैंसिल (रद्द)

B.

स्वीकृत

C.

रिटायर्ड

D.

अनादृत

Right Answer is: C

SOLUTION

यदि बिल का स्वीकर्ता बिल का देय तिथि से पहले भुगतान करना चाहता है तो वह बिल का भुगतान कर सकता है। ऐसी अवस्था में बिल का लेखक कुछ छूट दे देता है। इस प्रकार बिल के भुगतान को बिल का अवधि से पूर्व भुगतान कहते हैं।


Q. 170167 दर्शनी विपत्र का अर्थ है कि विपत्र का भुगतान ...... पर देय होगा।


A.

भुगतान का कोई समय नहीं होता

B.

भुगतान मॉंग होने पर किया जाता है

C.

भुगतान किसी भी समय हो सकता है

D.

उपर्युक्त (1) एवं (2) दोनों

Right Answer is: D

SOLUTION

यह ऐसा विनिमय-बिल है जिसका भुगतान स्वीकर्ता को प्रस्तुत करने पर करना होता है। ऐसे विनिमय-बिलों पर अनुग्रह दिवस नहीं दिए जाते।


Q. 170168 एक विनिमय-विपत्र स्वीकर्ता द्वारा भुगतान करने से मना करने पर बिल कहलाता है-


A.

बिल का नोटिंग

B.

बिल का अनादरण

C.

बिल का नवीनीकरण

D.

बिल का बट्टा

Right Answer is: B

SOLUTION

जब किसी विपत्र का स्वीकर्ता बिल पर स्वीकृति देने में या बिल की भुगतान तिथि पर विपत्र का भुगतान करने में असमर्थता प्रकट करता है तो उसे विपत्र की अप्रतिष्ठा, अनादरण या तिरस्कृत होना कहते हैं।


Q. 170169 बिल को बट्टे पर भुनाने का दायित्व होता है


A.

लघु अवधि दायित्व

B.

दीर्घकाल दायित्व

C.

चालू दायित्व

D.

संदिग्ध दायित्व

Right Answer is: D

SOLUTION

बिल का प्राप्तकर्ता (धारक) देय तिथि से पूर्व बैंक से बिल को बट्टे पर भुना सकता है। बट्टे पर बिल भुनाने का तात्पर्य बिल को वर्तमान मूल्य पर नकद में परिवर्तित करना है। इसके लिए बिल बैंक को बेच दिया जाता है। 


Q. 170170 A ने रु 12,000 के 4 माह के विनिमय-पत्र को बैंक से 10%: वार्षिक दर पर बट्टा कराया। देय तिथि पर बिल अनादृत हो गया तथा रु. 50 नोटिंग व्यय बैंक द्वारा भुगतान किए गए। बैंक द्वार A के खाते में डेबिट की जाने वाली राशि होगी-


A.

रु 13,050

B.

रु 11,050

C.

रु 12,050

D.

रु 12,250

Right Answer is: C

SOLUTION

बिल का अनादरण होने पर स्वीकर्ता को देय बिल वापस मिल जाता है तथा लेखक पुनः स्वीकर्ता का लेनदार बन जाता है।


Q. 170171 प्राप्य बिल एक खाता है


A.

अवास्तविक खाता

B.

व्यक्तिगत खाता

C.

वास्तविक खाता

D.

इनमें से कोई नहीं

Right Answer is: B

SOLUTION

वह व्यक्ति, जो विनिमय-विपत्र को लिखता है और निश्चित तिथि पर भुगतान प्राप्त करने का अधिकारी होता है, देनदार की स्वीकृति के पश्चात विनिमय-विपत्र को प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार के विनिमय-विपत्र को प्राप्य विनिमय-विपत्र कहते हैं।


Q. 170172 बिल के नवीनीकरण पर लेखा होगा-


A.

कोई लेखा नहीं किया जाएगा

B.

पुराने बिल को रद्द करने का लेखा और नए बिल बनाने का लेखा

C.

केवल बिल के नवीनीकरण का लेखा

D.

इनमें से कोई नहीं

Right Answer is: B

SOLUTION

यदि बिल का लेखक बिल के स्वीकर्ता के अनुरोध पर वर्तमान बिल को रद्द करके आगे की तिथि का एक नया बिल लिख दे तो इसे बिल का नवीनीकरण कहते हैं।


Q. 170173 अनुग्रह बिल का उद्देश्य क्या होता है-


A.

माल के वास्तविक क्रय या विक्रय की वित्त व्यवस्था

B.

व्यापारिक सम्प्रेषण को सुचारु बनाना

C.

जब दोनों पक्षकारों को धन की आवश्यकता है,

D.

उपर्युक्त में से कोई नहीं

Right Answer is: C

SOLUTION

अनुग्रह बिल बिना किसी प्रतिफल के एक दूसरे की सहायतार्थ लिखे एवं स्वीकृत किए जाते हैं। व्यावसायिक क्षेत्रों में कभी-कभी व्यापारी एक-दूसरे की सहायता से उद्देश्य से आपस में किसी प्रतिफल के बिना ही बिल लिखते हैं तथा स्वीकार करते हैं।


Q. 170174 5 अक्टूबर 2009 को रोहित ने अखिल पर 15,000 रु का 4 माह पश्चात् देय एक विपत्र लिखा। रोहित ने 5 नवम्बर 2009 को इस बिल को अपने बैंकर के पास भुना लिया बैंक ने बट्टा प्रभार के रूप में 375 रू की कटौती की।परिपक्वता तिथि पर बिल का अनादरण हो गया तथा बैंक को 200 रु निकराई प्रभार के रूप में चुकाये गये। रोहित तथा अखिल की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170175 4 जनवरी 2008 को एक्स ने वाई को 40,000 रु का माल बेचा तथा इस तिथि को उसने वाई पर पूर्ण भुगतान में 39,500 रु का 2 माह के लिए एक बिल लिखा।
बिल को विधिवत् स्वीकार कर लिया गया तथा यह परिपक्वता तिथि को अनादरित हो गया। वाई को 850 रु निकराई व्यय के चुकाने पडे़। एक्स तथा वाई की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/13/201410139927850014131723881.jpg
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Q. 170176 संक्षेप में अनुग्रह विपत्र की विशेषताएं बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अनुग्रह विपत्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

1. यह बिना किसी प्रतिफल के लिखे जाते हैं।

2. यह आर्थिक सहायतार्थ लिखे एवं स्वीकार किये जाते हैं।

3. इनको बट्टे पर भुनाने की दशा में बट्टे की राशि को भी बिल की राशि के उपयोग के अनुपात में वहन किया जाता है।


Q. 170177 विनिमय-विपत्र के नवीनीकरण से क्या अर्थ है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जब विपत्र के स्वीकर्ता को यह पूर्ण विश्वास हो जाता है कि वह विपत्र की भुगतान की तिथि पर  विपत्र का भुगतान नहीं कर सकेगा। तो वह विपत्र के लेखक अपने लेनदार से एक नया विपत्र लिखने की प्रार्थना करता है जिसे प्रायः लेनदार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है। ऐसी दशा में स्वीकर्ता  अपने लेदनार को बढाई हुई अवधि का ब्याज तथा समस्त व्यय चुकाता है जो उसके लेनदार ने पहले विपत्र के सम्बन्ध में किए हों। ब्याज की राशि या तो नकद दे दी जाती है या विपत्र की राशि में जोड दी जाती है। इस प्रकार पुराने विनिमय-विपत्र के स्थान पर नए विनिमय-विपत्र का स्वीकार करना विनिमय-विपत्र का नवीनीकरण कहलाता है।


Q. 170178 विनिमय-विपत्र एवं चैक में क्या अंतर है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अंतर का आधार

विनिमय-विपत्र

चैक

पक्ष जिस पर लिखते हैं

यह ऋणदाता पर लिखा जाता है।

यह बैंक पर लिखा जाता है।

स्वीकृति

इस पर स्वीकृति की आवश्यकता होती है।

इस पर स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है।

रेखांकन

इसका रेखांकन नहीं किया जा सकता है।

इसका रेखांकन किया जा सकता है।

टिकट

इस पर मूल्यांकन टिकट लगाए जाते हैं।

इस पर टिकट नहीं लगाए जाते हैं।

प्रकार

यह देशी और विदेशी दोनों प्रकार का होता है।

इसका प्रयोग केवल देश की सीमाओं के अंदर ही होता है।


Q. 170179 जीएसटी शामिल होने पर ड्रावर एवं ड्रावी की पुस्तकों में कौन सी रोजनामचा प्रविष्टियाँ दर्ज की जाती हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

ड्रावर की पुस्तकों में प्रविष्टियाँ :

ड्रावर की पुस्तकों में दर्ज रोजनामचा प्रविष्टियाँ हैं:

  1. For sale of goods on credit:

Customer/ Debtor

Dr.

To Output CGST A/c

To Output SGST A/c

To Output IGST A/c

To Sales A/c

  1. On drawing, accepting and receipt of the bill

Bills Receivable A/c

Dr.

To Customer/ Debtor

 

ड्रावी की पुस्तकों में प्रविष्टियाँ:

जब किसी लेनदार को बिल की स्वीकृति भेजी जाती है, तो ऐसा माना जाता है कि उसका ऋण सुलझा लिया गया है; इसकी जगह एक नया देयता अर्थात् देय बिल अस्तित्व में आता है इसलिए लेनदार के अनुरोध पर बिपत्र स्वीकार किए जाने पर और उसे भेजे जाने पर उसका खाता डेबिट कर दिया जाता है और नई देयता का खाता और विपत्र देय खाता क्रेडिट कर दिया जाता हैड्रावी अथवा लेनदार/देनदार (माल के क्रय) की पुस्तकों में निम्नलिखित रोजनामचा प्रविष्टियाँ बनाई जाती हैं:

  1. For Purchase of goods on credit:

Purchase A/c

Dr.

Input CGST A/c

Input SGST A/c

Input IGST A/c

To Supplier/ Creditor A/c

  1. When acceptance on bill is given

Supplier/ Creditor A/c

Dr.

To Bills Payable A/c

 


Q. 170180 डिस्काउटिंग चार्जेज तथा नोटिंग चार्जेज में क्या अंतर है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

डिस्काउंटिंग चार्जेज

नोटिंग चार्जेज

1. इसका भुगतान देय तिथि से पूर्व बिल की राशि प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

विल के अनादरण को प्रभावित कराने के लिए बिल के धारक को नोटिंग चार्जेज का भुगतान किया जाता  है।

2. यह बेंक को दिया जाता है।

यह नोटरी को दिया जाता है।

3. इसे स्वीकर्ता से वसूल नहीं किया जा सकता।

इसे स्वीकर्ता से वसूल किया जा सकता है।

4. यह विल की देय तिथि से पूर्व चुकाया जाता है।

यह बिल की देय तिथि के बाद चुकाया जाता है।

5. यह ब्याज की दर तथा असमाप्त अवधि पर आधारित है।

यह नोटरी की फीस  पर आधारित है।

6. स्वीकर्ता की पुस्तकों में इसका लेखा नहीं किया जाता।

स्वीकर्ता की पुस्तकों में इसका लेखा किया जाता है।


Q. 170181 विनिमय-विपत्र के लेखक के पास विपत्र का प्रयोग करने के लिए कौन-से विकल्प होते हैं
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विनिमय-विपत्र के लेखक के पास देय तिथि के पूर्व अपने विपत्र का प्रयोग करने के निम्नलिखित चार विकल्प होते हैं-

1. विनिमय-विपत्र को देय तिथि तक अपने पास रखना और देय तिथि पर स्वीकर्ता से स्वंय या बैंक के माध्यम से भुगतान प्राप्त करना

2. विनिमय-विपत्र को देय तिथि से पूर्व बैंक से बट्टे पर भुनाना

3. विपत्र का अपने किसी लेनदार को भुगतान के बदले बेचान करना एवं

4. विपत्र को बैंक से संग्रह के लिए भेजना

उपर्युक्य सभी दशाओं में निम्न प्रकार से लेखे किए जाते हैं। यहॉं ध्यान देने योग्य बात यह है कि विपत्र के लेखक के लिए विपत्र प्राप्य विनिमय-विपत्र होता है तथा देनदार या विपत्र के स्वीकर्ता  के लिए यह देय विनिमय-विपत्र होता है। इस प्राप्य विनिमय-विपत्र या देय विनिमय-विपत्र से सम्बन्धित लेन-देनों का लेखा ही सम्बन्धित पक्षकारों की पुस्तकों में किया जाता है।


Q. 170182 व्यापारिक विनिमय-विपत्र तथा अनुग्रह विनिमय-विपत्र में अंतर बताइए
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अंतर का आधार

व्यापारिक विनिमय-विपत्र

सहायतार्थ या अनुग्रह विनिमय-विपत्र

कारण

यह विनिमय-विपत्र किसी व्यापारिक लेन-देन या उचित प्रतिफल के बदले लिखे जाते हैं।

यह विनिमय-विपत्र थोडे समय के लिए आथि्र्ाक सहायता हेतु तथा बिना किसी प्रतिफल के बदले लिखे जाते हैं।

उद्देश्य

इनका उद्देश्य स्वीकर्ता से अपने ऋण की वसूली करना होता है।

यह विनिमय-विपत्र एक अथवा दोनों पक्षों की पारस्परिक  आर्थिक सहायतार्थ लिखे एवं स्वीकार किये जाते हैं। 

पक्षकारों में सम्बन्ध

इसमें दोनों पक्षकारों में लेनदार व देनदार का सम्बन्ध होता है।

इसमें दोनों पक्षों में मित्रता या सहयोगी का सम्बन्ध होता है।

प्रयोग

इसे भुगतान की तिथि तक अपने पास रखा जा सकता है अथवा लेनदार के पक्ष में बेचान किया जा सकता है। अथवा बैंक से बट्टे पर भुनाया जा सकता है।

इसे स्वीकृति के बाद तुरन्त बैंक से बट्टे पर भुनाकर आवश्यकता पूर्ति कर ली जाती है।

दायित्व

इसमें स्वीकर्ता का दायित्व लेखक के प्रति तब तक बना रहता है जब तक कि वह विपत्र के धारक को उसका भुगतान न कर दे।

इसमें लेखक एवं स्वीकर्ता दोनों एक-दूसरे के प्रति वैधानिक रूप से उत्तरदायी नहीं होते हैं।


Q. 170183 विनिमय-विपत्र के कितने पक्षकार होते हैं-
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विनिमय-विपत्र के निम्नलिखित तीन पक्ष होते हैंः-

1. लेखक या आहर्ता - यह वह व्यक्ति होता है जो विनिमय-विपत्र  को लिखता जै। यह व्यक्ति उधार माल बेचता हैख् बिल पर अपने हस्ताक्षर करता है तथा विनिमय-विपत्र की धनराशि प्राप्त करता है।

2. स्वीकर्ता, भुगतान करने वाला या आहार्यी- यह वह व्यक्ति होतय है, जिस पर विनिमय-विपत्र लिखा जाता है तथा जो विनिमय-विपत्र क पर अपनी स्वीकृति देता है। यह छवयक्ति माल उधार खरीदता है, अतः ऋणी होता है और निश्चित अवधि के पश्चात धन का भुगतान करता है।

3. भुगतान पाने वाला या प्राप्तकर्ता या आदाता - यह वह व्यक्ति होता है, जो एक निश्चित अवधि के पश्चात स्वीकारक से विनिमय-विपत्र की धनराशि प्राप्त करता है। यह विनिमय-विपत्र बैंक से भुना लिया जाए तो बैंक प्राप्तकर्ता होता है।


Q. 170184 1 अक्टूबर, 2017 को A, B को INR 50,000 का माल बेचता है और उस पर 18% आईजीएसटी जोड़ता है तथा उस पर दो विनिमय विपत्र बनाता है: 2 महीनों के लिए INR 30,000 के लिए पहला और दूसरा शेष के लिए 3 महीनों के लिए। B स्वीकार करके इन विपत्रों को A को भेज देता है। दोनों बिल संग्रह के लिए बैंक को भेजे जाते हैं। उचित समय पर A बैंक से सूचना प्राप्त करता है कि INR 30,000 का विपत्र प्राप्त कर लिया गया है दूसरा विपत्र अस्वीकृत कर दिया गया है। दूसरे बिल की अस्वीकृति पर भुगतान किया गया नोटिंग शुल्क INR 1,000 है।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Date

Particulars

L.F.

Dr. INR

Cr. INR

2017

B

Dr.

 

59,000

 

Oct

To Sales A/c

 

 

50,000

1

To Output IGST A/c

 

 

9,000

 

(Being the inter-state sale of goods to B, charged IGST @ 18%)

 

 

 

Oct

Bills Receivable (No. 1) A/c

Dr.

 

30,000

 

1

Bills Receivable (No. 2) A/c

Dr.

 

29,000

 

 

To B

 

 

59,000

 

(Being the two bills’ acceptances –one for INR 30,000 and other for INR 29,000 received)

 

 

 

Oct

Bills sent for collection A/c

Dr.

 

59,000

 

1

To Bills Receivable (No. 1) A/c

 

 

30,000

 

To Bills Receivable (No. 2) A/c

 

 

29,000

 

(Being the bills sent to bank for collection)

 

 

 

Dec

Bank A/c

Dr.

 

30,000

 

4

To Bills Sent for Collection A/c

 

 

30,000

 

(Being the amount duly collected by bank on first bill)

 

 

 

2018

B

Dr.

 

30,000

 

Jan

To Bills Sent for Collection A/c

 

 

29,000

4

To Bank A/c

 

 

1,000

 

(Being the second bill dishonoured and bank paid INR 1,000 as noting charges)

 

 

 


Q. 170185 1 जनवरी 2011 को, ललित ने रूचि को 5,000 रु का माल बेचा तथा 2 माह का एक बिल लिखा। बिल को पत्र द्वारा स्वीकार किया गया तथा लेखक को लौटा दिया गया।
देय तिथि को बिल का भुगतान कर दिया गया। दोनों पक्षों की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170186 17 जनवरी 2007 को संदीप ने उत्तम से 60,000 रु उधार लिये। उसी तिथि को उत्तम ने उसी राशि के लिए संदीप पर 2 माह का एक बिल लिखा। संदीप ने इस बिल को स्वीकार किया तथा उत्तम को लौटा दिया।
उत्तम ने इस बिल को बैंक से 15% वार्षिक दर पर भुना लिया।
परिपक्वता की तिथि पूर्व संदीप ने उत्तम को कहा कि वह सम्पूर्ण भुगतान करने में असमर्थ है तथा उसने उत्तम से 20,000 रु तुरंत नकद स्वीकार करने तथा शेष राशि का 18% वार्षिक ब्याज के साथ 53 दिन का बिल लिखने के लिए प्रार्थना की, जिसे उत्तम ने स्वीकार किया।
उत्तम तथा संदीप की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170187 विनिमय-विपत्र एंव प्रतिज्ञा पत्र में अंतर स्पष्ट करें
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अंतर का आधार

विनिमय-विपत्र

प्रतिज्ञा-पत्र

लेखक

यह लेनदार द्वारा लिखा जाता है।

यह देनदार द्वारा लिखा जाता है।

पक्षकार

इसमें तीन पक्ष होते हैं।

इसमें दो पक्ष होते हैं।

स्वीकृति

इसमें विनिमय-विपत्र की स्वीकृति आवश्यक होती है।

इसमें स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है।

आज्ञा या प्रतिज्ञा

इसमें रूपया देने की आज्ञा दी जाती है।

इसमें रूपया देने की प्रतिज्ञा की जाती है।

लेखक का प्राप्तकर्ता  होना

इसमें लेखक स्वंय प्राप्तकर्ता भी हो सकता है।

इसमें लेखक स्वंय प्राप्तकर्ता कभी नहीं हो सकता।


Q. 170188 विनिमय बिल तथा प्रतिज्ञा पत्र के एक नमूने का निर्माण कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170189 विनिमय विपत्र के लाभों का वर्णन कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विनिमय विपत्र के लाभ
1. संबंध के लिए आधार: एक विनियम विपत्र एक ऐसे साधन को प्रदर्शित करता है, जो विक्रेता/लेनदार तथा क्रेता/देनदार के बीच एक सहमती के आधार पर उधार लेनदेनों के
आधार प्रदान करता है।
2. निश्चित नियम एवं शर्तें: इसमें लेनदार को उस समय का पता होता है जब उसे पैसा प्राप्त होगा तथा इसी प्रकार देनदार को भी उस तिथि का पुरा ज्ञान होता है जब उसे राशि का भुगतान करना पड़ता है।
3. साख का सुविधाजनक साधन: एक विनिमय विपत्र क्रेता को उधार पर माल का क्रय करने तथा कुछ समय पश्चात् भुगतान करने में सक्षम बनाता है।
4. वैधानिक प्रमाण: विनियम विपत्र एक ऐसा वैधानिक प्रमाण होता है जिसमें यह स्पष्ट होता है कि क्रेता ने विक्रेता से उधार पर माल का क्रय किया है तथा एक निश्चित साख अवधि के पश्चात् उसे विक्रेता को भुगतान करना है।
5. आसान हस्तांतरणीयता: एक ऋण को बेचान तथा सुपुर्दगी के माध्यम से एक विनिमय विपत्र के हस्तांतरण द्वारा चुकाया जा सकता है।
6. अल्पकालीन वित्त का स्त्रोत: विनिमय विपत्र को इसकी देय तिथि के पूर्व बैंक से भुनाया जा सकता है। इस प्रकार यह अल्पकालीन वित्त का एक अच्छा स्त्रोत होता है।


Q. 170190 निम्नलिखित मदों को स्पष्ट कीजिए:
1. बिल की अवधि
2. अनुग्रह दिवस
3. देय तिथि
4. परिवक्वता तिथि
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170191 1 जनवरी 2006 को सैबा ने विशाल को 10,000 रु का माल बेचा तथा उस पर 2 माह का एक बिल लिखा। विशाल ने बिल को स्वीकार किया तथा शैबा को वापस कर दिया। परिपक्वता तिथि पर विशाल द्वारा बिल को अनादरित कर दिया गया। शैबा तथा विशाल की पुस्तकों में नीचे सूचीबद्ध सभी स्थितियों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
1. जब इस बिल को परिपक्वता तक शैबा द्वारा रखा जाये।
2. जब इस बिल को शैबा द्वारा 200 रु के लिए भुना लिया जाये।
3. जब इस बिल को शैबा द्वारा लाल चंद को बेच दिया जाये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2014/10/13/201410134071450014131746971.jpg


Q. 170192 रोहन और रोहित दोनों को अस्थायी अनुग्रह की आवश्यकता थी। 1 मार्च 2005 को, रोहन ने रोहित का 3 महीने के लिए 5000 रु का एक ड्राफ्ट स्वीकार किया और रोहित ने रोहन का 3 महीने के लिए 4000 रु का एक ड्राफ्ट स्वीकार किया। दोनों बिलों को 4800 रु और 3850 रु के लिए बैंकों से भुना लिया गया। बिल की परिपक्वता से पहले रोहित ने रोहन को अनुग्रह बिल में अंतर के लिए 1,000 रु भेजे। रोहन और रोहित दोनों की स्वीकृतियों का नियत तिथि पर भुगतान हो गया। रोहन तथा रोहित की पुस्तकों में जर्नल में लेनदेनों को रिकॉर्ड कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Description: Description: Description: /stryde/uploadfiles/Image/2013/06/28/200709084792660011892356181.gif


Q. 170193 निम्न को समझाये- 6 (1) विनिमय-विपत्र को देय तिथि से पूर्व वैंक से बट्टे पर भुनाना (2) विपत्र का अपने किसी लेनदार को भुगतान के बदले बेचान करना (3) विपत्र को बैंक में संग्रह के लिए भेजना
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(1) विनिमय-विपत्र को देय तिथि से पूर्व वैंक से बट्टे पर भुनाना- यदि विनिमय-विपत्र के लेखक को धन की तुरन्त आवश्यकता हो तो वह देय तिथि से पूर्व ही विनिमय-विपत्र को बैंक से बट्टे पर भुनाकर धनराशि प्राप्त कर सकता है। ऐसी दशा में बैंक विनिमय-विपत्र के भुनाने की तिथि से लेकर विनिमय-विपत्र की देय तिथि तक का एक निश्चित दर से ब्याज काटकर, शेष राशि का भुगतान विनिमय-विपत्र के लेखक को कर देता है। यह ब्याज की राशि छूट  या कटौती कहलाती है तथा इसे र्जनल में ऋणी  किया जाता है। इस ब्याज का लेखा विपत्र को बैंक से बट्टे पर भुनाने के लेखे के साथ ही किया जाता है, पृथक से इसका कोई लेखा नहीं किया जाता है।

(2) विपत्र का अपने किसी लेनदार को भुगतान के बदले बेचान करना - यदि विपत्र का लेखक चाहे तो स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात अपने किसी लेनदार को भुगतान देने के बदले में विपत्र को उसके नाम बेचान कर सकता है। ऐसी दशा में केवल विपत्र के लेखक एवं बेचान प्राप्तकर्ता की पुस्तकों में लेखा किया जाता है, विपत्र के स्वीकर्ता की पुस्तकों में कोई लेखा नहीं किया जाता है।

(3) विपत्र को बैंक में संग्रह के लिए भेजना - रूपया वसूल करने की कठिनाई से बचने के लिए कभी-कभी विपत्र का लेखक स्वीकृत विपत्र को बैंक से वसूली से लिए भेज देता है। वसूली हो जाने पर बैंक उस व्यक्ति के खाते में रकम जमा कर देता है। इस सम्बन्ध में विपत्र के लेखक की पुस्तकों में लेखा किया जाता है, स्वीकर्ता की पुस्तकों में इसका कोई लेखा नहीं किया जाता है।


Q. 170194 कुल इनपुट सीजीएसटी INR 9,360 कुल इनपुट एसजीएसटी INR 9,360 कुल आउटपुट सीजीएसटी INR 12,000 कुल आउटपुट एसजीएसटी INR 12,000 शुद्ध सीजीएसटी देय


A. INR6,720 होगा

B. INR5,280 होगा

C. INR2,640 होगा

D. INR1,440 होगा

Right Answer is: C

SOLUTION

देय शुद्ध सीजीएसटी =INR12,000-INR9,360=INR2,640 देय शुद्ध एसजीएसटी =INR12,000-INR9,360=INR2,640


Q. 170195 INR14,000 की कीमत के माल को 18% आईजीएसटी जोड़कर खरीदा और स्टॉक में शामिल किया लेकिन खरीद रिकार्ड के लिए कोई प्रविष्टि पारित नहीं किया। लेनदार खाता


A. INR14,000 से क्रेडिट किया जाएगा

B. INR11,480 से डेबिट किया जाएगा

C. INR16,520 से क्रेडिट किया जाएगा

D. INR16,520 से डेबिट किया जाएगा

Right Answer is: C

SOLUTION

Particulars L.F. Dr. INR Cr. INR
Purchases A/c Dr.   14,000  
Input IGST A/c Dr.   2,520  
To Creditors A/c     16,520


Q. 170196 लाभ एवं हानि खाते का शेष हस्तांतरित किया जाता है:


A. व्यापारिक खाते में।

B. आय विवरण में।

C. तलपट में

D. पूँजी खाते में।

Right Answer is: D

SOLUTION

लाभ एवं हानि खाते के शेष को चिट्ठे में स्वामी के खाते में हस्तांतरित किया जाता है। इसे पूँजी खाते में जोड़ दिया जाता है। शुद्ध लाभ को पूँजी में जोड़ दिया जाता है जबकि शुद्ध हानि को पूँजी से घटाया जाता है।


Q. 170197 मूल्यह्रास _________ का एक उदाहरण होता है।


A. पूँजीगत व्यय

B. पूँजीगत प्राप्ति

C. आयगत व्यय

D. आयगत प्राप्ति

Right Answer is: C

SOLUTION

आयगत व्यय व्यवसाय के संचालन में किया जाने वाला व्यय होता है। एक सम्पत्ति का मूल्यह्रास या समाप्ति मूल्य आयगत व्यय का उदाहरण होता है।


Q. 170198 तलपट में प्रदर्शित आवक वापसी को घटाया जाता है:


A. क्रय।

B. विक्रय।

C. क्रय वापसी।

D. जावक वापसी।

Right Answer is: B

SOLUTION

तलपट प्रदर्शित आवक वापसी को विक्रय से घटाया जाता है। विक्रय खाते का हमेशा वर्ष के दौरान की गयी कुल विक्रय को शामिल करते हुए क्रेडिट शेष रहता है। विक्रय वापसी खाते का ग्राहकों द्वारा वापस किये गये माल की कुल राशि को शामिल करते हुए हमेशा डेबिट शेष रहता है। दो राशि के शुद्ध रूप को ‘शुद्ध विक्रय’ कहा जाता है तथा इसे व्यापारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में रिकॉर्ड किया जाता है।


Q. 170199 ख्याति होती है:


A. काल्पनिक सम्पत्ति।

B. मूर्त सम्पत्ति।

C. अमूर्त सम्पत्ति।

D. चालू सम्पत्ति।

Right Answer is: C

SOLUTION

अमूर्त सम्पत्तियाँ वे सम्पत्तियाँ होती है जिनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है। उदाहरण के लिए - ख्याति, पेटेंट, ट्रेडमार्क आदि।


Q. 170200 भूमि एवं भवन तथा प्लांट एवं मशीनरी उदाहरण होती है:


A. अमूर्त सम्पत्ति का।

B. चालू दायित्व का

C. चालू सम्पत्ति का

D. मूर्त सम्पत्ति का

Right Answer is: D

SOLUTION

मूर्त सम्पत्तियाँ वे सम्पत्तियाँ होती है जिनका कोई भौतिक अस्तित्व होता है। उदाहरण के लिए - भूमि एवं भवन, प्लांट तथा मशीनरी आदि।


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