(1) व्यवसाय की प्रकृति- व्यवसाय की प्रकृति व्ययों को पूँजीगत तथा आयगत में भेद करने हेतू एक महत्वपूर्ण आधार है। फर्नीचर के व्यापारी के लिए फर्नीचर का क्रय आयगत व्यय है, जबकि कपड़े के व्यापारी के लिए फर्नीचर का क्रय पूँजीगत व्यय है।
(2) व्ययों का उद्देश्य- एक पुरानी मशीन की मरम्मत पर व्यय उसकी उत्पादकीय क्षमता में वृद्धि हेतु किया जाए तो वह पूँजीगत व्यय होगा। यदि मरम्मत व्यय उस मशीन के सामान्य अनुरक्षण के लिए किया जाए तो आयगत व्यय होगा।
(3) आय उपार्जन क्षमता पर प्रभाव – यदि कोई व्यय एक से अधिक लेखावधि तक आय का सृजन करने में सहायता प्रदान करे तो उसे पूँजीगत व्यय माना जाएगा। यदि वह व्यय एक लेखावधि के दौरान ही आय का सृजन करे तो उसे आयगत व्यय माना जाएगा।
(अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ऐसे व्यय भविष्य में संचालन लागत को कम करते हैं तथा इसलिए इनके लाभ दीर्घकाल के लिए प्राप्त होते हैं। इसलिए इस व्यय को पूँजीकृत किया जाना चाहिए।
(ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर खर्च किये गये 2,50,000 रु पूँजीगत व्यय है, क्योंकि यह एक बार किया गया ऐसा व्यय है जिसके लाभ कई वर्षों तक प्राप्त होते रहेंगे। 25,000 रु का चुकाया गया नवीकरण व्यय अगले वर्ष के लिए था। इसे चालू वर्ष में पूर्वदत्त व्यय के रूप में दिखाया जायेगा।
(स) इसे पूँजीगत व्यय के रूप में व्यवहारित किया जाना चाहिए, क्योंकि कारखाने पर पुताई पहली बार की गयी है। इसलिए, इसे कारखाना खाते में डेबिट किया जाना चाहिए।
(द) सम्पत्ति के क्रय पर किये गये व्यय सम्पत्ति खाते में डेबिट किये जाते हैं।
आयोजन से आशय उस राशि से होता है, जिसे सम्पत्तियों के ह्रास, नवीनीकरण या मूल्य में कमी तथा किसी भी ज्ञात दायित्व के लिये इसलिये रखा जाता है, क्योंकि इनकी वास्तविक राशि का पूर्ण शुद्धता के
साथ अनुमान नहीं लगाया जा सकता है ।
आयोजन के पाँच प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. अप्राप्त तथा संदिग्ध ऋणों के लिये आयोजन :
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों की रकम व समय का निश्चित ज्ञान नहीं होता है, इसलिए इनकी अनुमानित राशि के लिये आयोजन किया जाता है ।
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों के लिये प्रावधान को चिट्ठे में देनदारों से घटाकर दर्शाया जाता है। यदि आयोजन की राशि वास्तविक संदिग्ध ऋणों से अधिक हैं तो आधिक्य को संचय कहा जायेगा।
2. देनदारों पर देय कटौती के लिये आयोजन :
सामान्यतः देनदारों द्वारा जब भुगतान किया जाता है ,तो उनको छूट दी जा सकती है। इस दी जा सकने वाली छूट के लिये पहले से ही आयोजन कर लिया जाता है ।
चिट्ठे में इस आयोजन राशि को देनदारों में से घटाकर दर्शाया जाता है।
3. सम्पत्तियों के मूल्य ह्रास के लिये आयोजन :
स्थायी सम्पत्तियों पर लगाये जाने वाले भावी ह्रास के लिये पहले से ही सम्भावित राशि का प्रावधान कर लिया जाता है। इस प्रावधान की राशि को आर्थिक चिट्ठे में सम्बन्धित सम्पत्ति में से घटाकर दर्शाया जाता है।
4. मरम्मत व नवीनीकरण के लिये आयोजन :
सामान्यतः मरम्मत व नवीनीकरण ऐसे व्यय होते हैं, जिनकी राशि प्रतिवर्ष समान नही पायी जाती है।
लाभ-हानि खाते पर प्रतिवर्ष इन खर्चों के भार को समान रखने के लिये मरम्मत व नवीनीकरण के लिये प्रावधान किया जाता है ।
5. अदत्त व्ययों के लिये आयोजन :
कुछ ऐसे व्यय होते हैं, जिनका लाभ तो संस्था द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अन्तिम खाते बनाते समय तक इनका भुगतान नहीं किया गया है और नही इन व्ययों की राशि का शुद्ध अनुमान होता है । ऐसे व्ययों के लिये बनाये जाने वाले प्रावधान को अदत्त व्ययों के लिये प्रावधान कहा जाता है । जैसे- अंकेक्षण शुल्क, कमीशन व व्यापारिक यात्रियों का व्यय आदि ।
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययों में निम्नलिखित अंतर है-
|
अन्तर का आधार |
प्रत्यक्ष व्यय |
अप्रत्यक्ष व्यय |
|
सम्बन्ध |
ये व्यय माल के क्रय करने या क्रय किए गए माल को बिक्री योग्य बनाने या माल के उत्पादन (निर्माण) के सम्बन्ध में किए जाते हैं। |
ये व्यय माल के सम्बन्ध में किए जाते हैं। |
|
सम्मिलित करना |
ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित किए जाते हैं। |
ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित नहीं किए जाते हैं। |
|
खाता, जिसमें दिखाया जाता है |
ये व्यय व्यापार खाते में दिखाए जाते हैं। |
ये व्यय लाभ-हानि खाते में दिखाए जाते हैं। |
(अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ऐसे व्यय भविष्य में संचालन लागत को कम करते हैं तथा इसलिए इनके लाभ दीर्घकाल के लिए प्राप्त होते हैं। इसलिए इस व्यय को पूँजीकृत किया जाना चाहिए।
(ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर खर्च किये गये 2,50,000 रु पूँजीगत व्यय है, क्योंकि यह एक बार किया गया ऐसा व्यय है जिसके लाभ कई वर्षों तक प्राप्त होते रहेंगे। 25,000 रु का चुकाया गया नवीकरण व्यय अगले वर्ष के लिए था। इसे चालू वर्ष में पूर्वदत्त व्यय के रूप में दिखाया जायेगा।
(स) इसे पूँजीगत व्यय के रूप में व्यवहारित किया जाना चाहिए, क्योंकि कारखाने पर पुताई पहली बार की गयी है। इसलिए, इसे कारखाना खाते में डेबिट किया जाना चाहिए।
(द) सम्पत्ति के क्रय पर किये गये व्यय सम्पत्ति खाते में डेबिट किये जाते हैं।
आयोजन से आशय उस राशि से होता है, जिसे सम्पत्तियों के ह्रास, नवीनीकरण या मूल्य में कमी तथा किसी भी ज्ञात दायित्व के लिये इसलिये रखा जाता है, क्योंकि इनकी वास्तविक राशि का पूर्ण शुद्धता के
साथ अनुमान नहीं लगाया जा सकता है ।
आयोजन के पाँच प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. अप्राप्त तथा संदिग्ध ऋणों के लिये आयोजन :
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों की रकम व समय का निश्चित ज्ञान नहीं होता है, इसलिए इनकी अनुमानित राशि के लिये आयोजन किया जाता है ।
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों के लिये प्रावधान को चिट्ठे में देनदारों से घटाकर दर्शाया जाता है। यदि आयोजन की राशि वास्तविक संदिग्ध ऋणों से अधिक हैं तो आधिक्य को संचय कहा जायेगा।
2. देनदारों पर देय कटौती के लिये आयोजन :
सामान्यतः देनदारों द्वारा जब भुगतान किया जाता है ,तो उनको छूट दी जा सकती है। इस दी जा सकने वाली छूट के लिये पहले से ही आयोजन कर लिया जाता है ।
चिट्ठे में इस आयोजन राशि को देनदारों में से घटाकर दर्शाया जाता है।
3. सम्पत्तियों के मूल्य ह्रास के लिये आयोजन :
स्थायी सम्पत्तियों पर लगाये जाने वाले भावी ह्रास के लिये पहले से ही सम्भावित राशि का प्रावधान कर लिया जाता है। इस प्रावधान की राशि को आर्थिक चिट्ठे में सम्बन्धित सम्पत्ति में से घटाकर दर्शाया जाता है।
4. मरम्मत व नवीनीकरण के लिये आयोजन :
सामान्यतः मरम्मत व नवीनीकरण ऐसे व्यय होते हैं, जिनकी राशि प्रतिवर्ष समान नही पायी जाती है।
लाभ-हानि खाते पर प्रतिवर्ष इन खर्चों के भार को समान रखने के लिये मरम्मत व नवीनीकरण के लिये प्रावधान किया जाता है ।
5. अदत्त व्ययों के लिये आयोजन :
कुछ ऐसे व्यय होते हैं, जिनका लाभ तो संस्था द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अन्तिम खाते बनाते समय तक इनका भुगतान नहीं किया गया है और नही इन व्ययों की राशि का शुद्ध अनुमान होता है । ऐसे व्ययों के लिये बनाये जाने वाले प्रावधान को अदत्त व्ययों के लिये प्रावधान कहा जाता है । जैसे- अंकेक्षण शुल्क, कमीशन व व्यापारिक यात्रियों का व्यय आदि ।
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययों में निम्नलिखित अंतर है-
|
अन्तर का आधार |
प्रत्यक्ष व्यय |
अप्रत्यक्ष व्यय |
|
सम्बन्ध |
ये व्यय माल के क्रय करने या क्रय किए गए माल को बिक्री योग्य बनाने या माल के उत्पादन (निर्माण) के सम्बन्ध में किए जाते हैं। |
ये व्यय माल के सम्बन्ध में किए जाते हैं। |
|
सम्मिलित करना |
ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित किए जाते हैं। |
ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित नहीं किए जाते हैं। |
|
खाता, जिसमें दिखाया जाता है |
ये व्यय व्यापार खाते में दिखाए जाते हैं। |
ये व्यय लाभ-हानि खाते में दिखाए जाते हैं। |

व्यापारिक खाते का प्रारुप
|
ऋणी पक्ष (Dr. Side) |
|
धनी पक्ष (Cr. Side) |
|
|
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
|
|
` |
|
` |
|
प्रारम्भिक रहतिया का (To Opening Stock) |
........... |
विक्रय से (By Sales) ......
|
|
|
क्रय का (To Purchase) ...... घटाया- क्रय/बाह्य वापसी ...... Less : (Purchase Returns) निजी प्रयोग के लिए ...... (Drawings of Goods) दान में दिया गया माल ...... (Charity of Goods) नमूना का निःशुल्क वितरण ...... (Distribution of Free Samples) क्रय पर कटौती ...... (Discount on Purchases) _____ |
......
|
घटाया - विक्रय/आन्तरिक वापसी ...... Less : (Sales Returns) बिक्री/वापसी पर भेजा गया माल ...... (Goods supplied on Sale/ Returns bases) ______ |
......
|
|
आन्तरिक गाड़ी भाड़ा या क्रय पर भाड़े का (To Freight on Purchases) |
......
|
अन्तिम रहतिया से (By Closing Stock) |
......
|
|
मजदूरी का |
...... |
प्रेषण पर भेजा गया माल से (लागत मूल्य पर) (By Goods sent on Consignment) (at Cost) |
......
|
|
मजदूरी व वेतन का |
......
|
अग्नि आदि से नष्ट माल से (Loss of Goods by Fire) |
......
|
|
आगत वाहन व्यय/ आन्तरिक ढुलाई व्यय खाते का |
......
|
सकल हानि लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि) |
|
|
कोयला, गैस व पानी का |
......
|
|
|
|
कारखाने की बीजली या प्रकाश का |
......
|
|
|
|
ईंधन का |
......
|
|
|
|
प्रयोग किए गए स्टोर्स का |
......
|
|
|
|
निर्माण या उत्पादन व्यय का |
......
|
|
|
|
कोयला, गैस व ईँधन का |
......
|
|
|
|
ढुलाई एवं भाड़ा का |
......
|
|
|
|
कारखाना के अन्य विविध व्यय का |
......
|
|
|
|
आयातकर का |
......
|
|
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चुंगी का |
......
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|
अधिकार शुल्क का |
......
|
|
|
|
रेलगाड़ी भाड़ा का |
......
|
|
|
|
सकल लाभ लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि) |
......
|
|
|
|
|
...... |
|
...... |


लाभ-हानि खाते का प्रारुप
|
ऋणी पक्ष (Dr. Side) |
|
धनी पक्ष (Cr. Side) |
|
|
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
|
|
|
|
|
|
सकल हानि आगे लाए (यदि कोई हो) (To Gross Loss b/d) (if any) |
...... |
सकल लाभ आगे लाए (यदि कोई हो) (By Gross Profit b/d) (if any) |
...... |
|
स्टेशनरी का (To Stationary) |
...... |
ब्याज से (By Interest) |
...... |
|
ब्याज का (To Interest) |
...... |
कमीशन से (By Commission) |
...... |
|
कमीशन का (To Commission) |
...... |
किराया से (By Rent) |
...... |
|
यात्रा व्यय का (To Travelling) |
...... |
प्राप्त छूट से (By Discount received) |
...... |
|
कार्यालय बिजली व्यय का (To Office Lighting) |
...... |
विनियोगों पर ब्याज से (By Interest on Investment) |
...... |
|
कार्यालय किराया का (To Office Rent) |
...... |
सम्पत्तियों के विक्रय पर लाभ से (By Profit on Sale of Assets) |
...... |
|
छूट, कटौती या बट्टा का (To Discount) |
...... |
प्राप्य बिलों के नवीनीकरण पर ब्याज से (By Interest on renewal of B/R) |
...... |
|
मरम्मत का (To Repairs) |
...... |
लेनदारों पर छूट के लिए आयोजन से (By Provision for Discount on Creditors) |
...... |
|
कार्यालय व्यय का (To Office Expenses) |
...... |
अन्य स्त्रोत से आय से (By Income from other Sources) |
...... |
|
वेतन का (To Salaries) |
...... |
विविध प्राप्तियों से (By Miscellaneous Receipts) |
|
|
वेतन व मजदूरी का (To Salaries & Wages) |
...... |
|
|
|
निर्गत वाहन व्यय का (To Carriage Outward) |
...... |
|
|
|
किराया व कर का (To Rent & Taxes) |
...... |
|
|
|
छपाई व लेखन-सामग्री व्यय का (To Printing & Stationary) |
...... |
|
|
|
बीमा व्यय का (To Insurance) |
...... |
|
|
|
अप्राप्य ऋण का (To Bad Debts) |
...... |
|
|
|
बैंक व्यय का (To Bank Charges) |
...... |
|
|
|
व्यापारिक व्यय का (To Trade Expenses ) |
...... |
|
|
|
अंकेक्षण शुल्क का (To Audit Fees) |
...... |
|
|
|
विक्रय पर ढुलाई का (To Carriage on Sales) |
...... |
|
|
|
कानूनी व्यय का (To Legal Expenses ) |
...... |
|
|
|
दलाली व्यय का (To Brokerage) |
...... |
|
|
|
दान या चन्दा का (To Donation & Charity) |
...... |
|
|
|
सम्पत्तियों पर मूल्य-ह्रास का (To Depreciation on Assets) |
...... |
|
|
|
डाक व तार व्यय का (To Postage & Telegram) |
...... |
|
|
|
टेलीफोन व्यय का (To Telephone Charges) |
...... |
|
|
|
सामान्य व्यय का (To General Expenses) |
...... |
|
|
|
विज्ञापन व्यय का (To Advertisement) |
...... |
|
|
|
पैकिंग व्यय का (To Packing Charges) |
...... |
|
|
|
वितरण व्यय का (To Delivery Van Expenses) |
...... |
|
|
|
अस्तबल व्यय का (To Stable Expenses) |
...... |
|
|
|
सम्पत्तियों के विक्रय से हानि का (To Loss on Sale of Assets) |
...... |
|
|
|
शुद्ध लाभ पूँजी खाते में अन्तरित (To Net Profit transferred to Capital A/c) |
...... |
|
|
|
|
...... |
|
...... |

व्यापारिक खाते का प्रारुप
|
ऋणी पक्ष (Dr. Side) |
|
धनी पक्ष (Cr. Side) |
|
|
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
|
|
` |
|
` |
|
प्रारम्भिक रहतिया का (To Opening Stock) |
........... |
विक्रय से (By Sales) ......
|
|
|
क्रय का (To Purchase) ...... घटाया- क्रय/बाह्य वापसी ...... Less : (Purchase Returns) निजी प्रयोग के लिए ...... (Drawings of Goods) दान में दिया गया माल ...... (Charity of Goods) नमूना का निःशुल्क वितरण ...... (Distribution of Free Samples) क्रय पर कटौती ...... (Discount on Purchases) _____ |
......
|
घटाया - विक्रय/आन्तरिक वापसी ...... Less : (Sales Returns) बिक्री/वापसी पर भेजा गया माल ...... (Goods supplied on Sale/ Returns bases) ______ |
......
|
|
आन्तरिक गाड़ी भाड़ा या क्रय पर भाड़े का (To Freight on Purchases) |
......
|
अन्तिम रहतिया से (By Closing Stock) |
......
|
|
मजदूरी का |
...... |
प्रेषण पर भेजा गया माल से (लागत मूल्य पर) (By Goods sent on Consignment) (at Cost) |
......
|
|
मजदूरी व वेतन का |
......
|
अग्नि आदि से नष्ट माल से (Loss of Goods by Fire) |
......
|
|
आगत वाहन व्यय/ आन्तरिक ढुलाई व्यय खाते का |
......
|
सकल हानि लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि) |
|
|
कोयला, गैस व पानी का |
......
|
|
|
|
कारखाने की बीजली या प्रकाश का |
......
|
|
|
|
ईंधन का |
......
|
|
|
|
प्रयोग किए गए स्टोर्स का |
......
|
|
|
|
निर्माण या उत्पादन व्यय का |
......
|
|
|
|
कोयला, गैस व ईँधन का |
......
|
|
|
|
ढुलाई एवं भाड़ा का |
......
|
|
|
|
कारखाना के अन्य विविध व्यय का |
......
|
|
|
|
आयातकर का |
......
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|
|
|
चुंगी का |
......
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|
|
अधिकार शुल्क का |
......
|
|
|
|
रेलगाड़ी भाड़ा का |
......
|
|
|
|
सकल लाभ लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि) |
......
|
|
|
|
|
...... |
|
...... |


लाभ-हानि खाते का प्रारुप
|
ऋणी पक्ष (Dr. Side) |
|
धनी पक्ष (Cr. Side) |
|
|
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
विवरण (Particulars) |
धनराशि (Amount) |
|
|
` |
|
` |
|
सकल हानि आगे लाए (यदि कोई हो) (To Gross Loss b/d) (if any) |
...... |
सकल लाभ आगे लाए (यदि कोई हो) (By Gross Profit b/d) (if any) |
...... |
|
स्टेशनरी का (To Stationary) |
...... |
ब्याज से (By Interest) |
...... |
|
ब्याज का (To Interest) |
...... |
कमीशन से (By Commission) |
...... |
|
कमीशन का (To Commission) |
...... |
किराया से (By Rent) |
...... |
|
यात्रा व्यय का (To Travelling) |
...... |
प्राप्त छूट से (By Discount received) |
...... |
|
कार्यालय बिजली व्यय का (To Office Lighting) |
...... |
विनियोगों पर ब्याज से (By Interest on Investment) |
...... |
|
कार्यालय किराया का (To Office Rent) |
...... |
सम्पत्तियों के विक्रय पर लाभ से (By Profit on Sale of Assets) |
...... |
|
छूट, कटौती या बट्टा का (To Discount) |
...... |
प्राप्य बिलों के नवीनीकरण पर ब्याज से (By Interest on renewal of B/R) |
...... |
|
मरम्मत का (To Repairs) |
...... |
लेनदारों पर छूट के लिए आयोजन से (By Provision for Discount on Creditors) |
...... |
|
कार्यालय व्यय का (To Office Expenses) |
...... |
अन्य स्त्रोत से आय से (By Income from other Sources) |
...... |
|
वेतन का (To Salaries) |
...... |
विविध प्राप्तियों से (By Miscellaneous Receipts) |
|
|
वेतन व मजदूरी का (To Salaries & Wages) |
...... |
|
|
|
निर्गत वाहन व्यय का (To Carriage Outward) |
...... |
|
|
|
किराया व कर का (To Rent & Taxes) |
...... |
|
|
|
छपाई व लेखन-सामग्री व्यय का (To Printing & Stationary) |
...... |
|
|
|
बीमा व्यय का (To Insurance) |
...... |
|
|
|
अप्राप्य ऋण का (To Bad Debts) |
...... |
|
|
|
बैंक व्यय का (To Bank Charges) |
...... |
|
|
|
व्यापारिक व्यय का (To Trade Expenses ) |
...... |
|
|
|
अंकेक्षण शुल्क का (To Audit Fees) |
...... |
|
|
|
विक्रय पर ढुलाई का (To Carriage on Sales) |
...... |
|
|
|
कानूनी व्यय का (To Legal Expenses ) |
...... |
|
|
|
दलाली व्यय का (To Brokerage) |
...... |
|
|
|
दान या चन्दा का (To Donation & Charity) |
...... |
|
|
|
सम्पत्तियों पर मूल्य-ह्रास का (To Depreciation on Assets) |
...... |
|
|
|
डाक व तार व्यय का (To Postage & Telegram) |
...... |
|
|
|
टेलीफोन व्यय का (To Telephone Charges) |
...... |
|
|
|
सामान्य व्यय का (To General Expenses) |
...... |
|
|
|
विज्ञापन व्यय का (To Advertisement) |
...... |
|
|
|
पैकिंग व्यय का (To Packing Charges) |
...... |
|
|
|
वितरण व्यय का (To Delivery Van Expenses) |
...... |
|
|
|
अस्तबल व्यय का (To Stable Expenses) |
...... |
|
|
|
वाणिज्य कर का (To Commercial Tax) |
...... |
|
|
|
मनोरंजन व्यय का (To Entertainment Expenses) |
...... |
|
|
|
यात्रा व्यय का (To Conveyance Expenses) |
...... |
|
|
|
सम्पत्तियों के विक्रय से हानि का (To Loss on Sale of Assets) |
...... |
|
|
|
शुद्ध लाभ पूँजी खाते में अन्तरित (To Net Profit transferred to Capital A/c) |
...... |
|
|
|
|
...... |
|
...... |
क. क्रय:
भुगतान जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) अर्थात् माल अथवा अन्य मदों पर इनपुट जीएसटी को इनपुट सीजीएसटी खाते, इनपुट एसजीएसटी खाते, इनपुट आईजीएसटी खाते को डेबिट किया जाता जाता है । ।
ख. विक्रय:
संग्रह की गई जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) अर्थात् माल के विक्रय या अन्य मदों पर आउटपुट जीएसटी, आउटपुट सीजीएसटी खाते, आउटपुट एसजीएसटी खाते और आउटपुट आईजीएसटी खातों को क्रेडिट किया जाता जाता है ।
ग. स्वामी द्वारा लिए गए माल
व्यक्तिगत उपयोग के लिए स्वामी द्वारा लिए गए माल बिक्री नहीं आहरण होते हैं। इसलिए, उसका आहरण खाता कुल राशि अर्थात् क्रय लागत और इन वस्तुओं पर अदा की गई जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी या आईजीएसटी) से डेबिट किया जाता है। क्रय खाता और इनपुट जीएसटी खाता क्रेडिट किया जाता जाता है । रोजनामचा प्रविष्टि निम्न है:
|
आहरण खाता |
नाम |
|
क्रय खाते से |
[माल की लागत के साथ] |
|
इनपुट सीजीएसटी खाते से |
[लिए गए माल पर सीजीएसटी की राशि के साथ] |
|
इनपुट एसजीएसटी खाते से या |
[लिए गए माल पर एसजीएसटी की राशि के साथ] |
|
इनपुट आईजीएसटी खाते से |
[लिए गए माल पर आईजीएसटी की राशि के साथ] |
घ. दान के रूप में दिए गए माल
इसी तरह से, दान के रूप में दिया गया माल बिक्री नहीं चंदा होता है। इसलिए चंदा या दान खाता डेबिट किया जाता और क्रय खाता इनपुट जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी या आईजीएसटी) खाता क्रेडिट किया जाता जाता है ।
| Debit balance | Credit balance | ||
| Sundry debtors | 3,500 | Capital | 25,000 |
| Stock on 1st Jan | 5,000 | Sundry Creditor | 9,000 |
| Cash in hand | 5,600 | Sales | 17,000 |
| Wages | 3,000 | Output CGST | 20,000 |
| Bad debts | 500 | Output SGST | 20,000 |
| Furniture and fixtures | 1,500 | Output IGST | 26,000 |
| Depreciation | 1,500 | ||
| Salaries | 2,200 | ||
| Purchases | 12,500 | ||
| Plant and machinery | 15,700 | ||
| Input CGST | 24,000 | ||
| Input SGST | 24,000 | ||
| Input IGST | 18,000 |
31 दिसंबर 2016 के लिए व्यापारिक खाता और लाभ एवं हानि खाता
|
Particulars |
|
Particulars |
|
|
Opening stock |
5,000 |
Sales |
17,000 |
|
Purchases |
12,500 |
Closing stock |
10,000 |
|
Wages |
3,000 |
|
27,000 |
|
Gross profit |
6,500 |
|
|
|
|
27,000 |
|
|
|
Bad debts |
500 |
Gross profit |
6,500 |
|
Depreciation |
1,500 |
|
|
|
Salaries |
2,200 |
|
|
|
Net profit |
2,300 |
|
|
|
|
6,500 |
|
6,500 |
जीएसटी का समायोजन
|
Account title |
Input |
Output |
Balance |
|
IGST |
18,000 |
26,000 |
8,000 (Cr.) |
|
CGST |
24,000 |
20,000 |
4,000 (Dr.) |
|
SGST |
24,000 |
20,000 |
4,000 (Dr.) |
इनपुट जीएसटी (4,000) रुपए और आउटपुट जीएसटी (4,000) रुपए को आईजीएसटी (8,000) रुपए से समायोजित करते हैं।
अतः राशि शून्य हो जाती है।
A.
पूँजीगत व्यय।
B. आयगत व्यय।
C. अदत्त व्यय।
D. पूर्वदत्त व्यय।
देय परंतु अचुकता व्यय अदत्त व्यय होते हैं।
A.
रोकड़।
B. प्राप्य विपत्र।
C. पेटेंट।
D. स्टॉक।
पेटेंट तथा स्थायी सम्पत्तियाँ।
A.
पूर्वदत्त व्यय।
B. अग्रिम प्राप्त आय।
C. उपार्जित आय।
D. अदत्त व्यय।
पूर्वदत्त व्यय अर्थात ऐसे व्यय जो चालू लेखांकन वर्ष के दौरान चुकाये जाते हैं परंतु इनका लाभ आगामी वर्ष में प्राप्त होगा।
A.
चिट्ठे के दायित्व पक्ष में।
B. चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में।
C. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।
D. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।
A.
व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में।
B. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
C. व्यापारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में।
D. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।
जावक भाड़े को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है क्योंकि ये व्यय माल को कारखाने से बाज़ार में लाने के लिए किया जाता है, हालांकि आवक भाड़े को व्यापारिक खाते में डेबिट किया जाता है।
A.
क्रय वापसी।
B. विक्रय वापसी।
C. आवक भाड़ा।
D. जावक भाड़ा।
क्रय वापसी को जावक वापसी भी कहा जाता है।
A.
पूर्वदत्त व्यय।
B. नाममात्र के व्यय।
C. व्यय।
D. अदत्त व्यय।
अदत्त व्यय ऐसे व्यय होते हैं जो देय होते हैं तथा जिनका लाभ प्राप्त किया जा चुका है परंतु चुकाया नहीं गया।
A.
विनियोग आय।
B. अग्रिम में प्राप्त आय।
C. उपार्जित आय।
D. प्राप्त कमीशन।
उपार्जित आय ऐसी आय होती है जिसे चालू वर्ष के दौरान कमा लिया जाता है परंतु चालू वर्ष के अंत तक प्राप्त नहीं किया जाता है, जैसे - प्रतिभूतियों पर ब्याज, कमीशन, किराया आदि।
A.
अदत्त किराया खाते को डेबिट तथा किराया खाते को क्रेडिट।
B. किराया खाते को डेबिट तथा रोकड़ खाते को क्रेडिट।
C. रोकड़ खाते को डेबिट तथा किराया खाते को क्रेडिट।
D. किराया खाते को डेबिट तथा अदत्त किराया खाते को क्रेडिट।
किराया बकाया है अतः इसे डेबिट किया जाता है। यह एक दायित्व बन जाता है इसलिए, अदत्त किराया खाते को क्रेडिट किया जाता है।
A.
दीर्घकालीन ऋण के रूप में एक कम्पनी द्वारा धन प्राप्ति।
B. माल का विक्रय।
C. लाभों की हानि के लिए क्षतिपूर्ति।
D. सेवाओं के विक्रय से प्राप्त राशि।
एक कम्पनी द्वारा एक दीर्घकालीन ऋण के रूप में राशि प्राप्त करना कम्पनी का साधारण कार्य नहीं होता है इसलिए, इसे पूँजीगत प्राप्ति के रूप में व्यवहारित किया जाता है।
A.
अग्रिम में प्राप्त आय।
B. कमायी गई आय।
C. उपार्जित आय।
D. अदत्त आय।
आगामी वर्ष से सम्बंधित आय का हिस्से को अग्रिम प्राप्त आय तथा अग्रिम आय के रूप में जाना जाता है।
A.
आय।
B. व्यय।
C. सम्पत्तियाँ।
D. दायित्व।
ऐसी आय को लाभ एवं हानि खाते में सम्बंधित आय में जोड़ते हुए दिखाया जायेगा तथा उपार्जित आय के नयी खाते को चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाया जायेगा।
A.
केवल अंतिम खाता।
B. केवल व्यय।
C. केवल आय।
D. सभी मदें यदि इनका समायोजन आवश्यक हो।
वित्तीय विवरण तैयार करते समय सभी मदों को समायोजित किया जाता है।
A.
सम्पत्ति।
B. दायित्व।
C. खर्च।
D. व्यय।
पूर्वदत्त व्यय एक सम्पत्ति होती है क्योंकि इसका लाभ आगामी लेखांकन वर्ष में प्राप्त होगा।
A.
21,600 होगी।
B.
14,400 होगी।
C.
7,200 होगी।
D. शून्य होगी।
| चूँकि इनपुट जीएसटी, आउटपुट जीएसटी से अधिक है, सरकार को भुगतान किए जाने के लिए कोई कर-देयता नहीं है। इसे आगामी वर्ष में हस्तांतरित किया जाएगा और समायोजित किया जाएगा। |
|
इनपुट कर जमा =
इनपुट सीजीएसटी – आउटपुट आईजीएसटी = |
|
इनपुट एसजीएसटी – आउटपुट एसजीएसटी = |
|
|
| Particulars |
Dr. |
Cr. |
| Input CGST A/c | 5,000 | |
| Input SGST A/c | 5,000 | |
| Input IGST A/c | 7,500 | |
| Output CGST A/c | 4,000 | |
| Output SGST A/c | 4,000 | |
| Output IGST A/c | 6,000 | |
A.
17,500 होगी।
B.
16,000 होगी।
C.
3,500 होगी।
D.
1,500 होगी।
| 31 मार्च, 2018 को चिट्ठा | |||
| Liabilities |
|
Assets |
|
| Input CGST | 1,000 | ||
| Input SGST | 1,000 | ||
| Input IGST | 1,500 | ||
|
Input |
Output |
Balance |
|
| IGST | 7,500 | 6,000 | 1,500(Dr.) |
| CGST | 5,000 | 4,000 | 1,000(Dr.) |
| SGST | 5,000 | 4,000 | 1,000 (Dr.) |
| तलपट (केवल संबंधित भाग) | ||
|
Dr. ( |
Cr.( |
|
| Input CGST | 5,000 | |
| Input SGST | 5,000 | |
| Output IGST | 10,000 | |
A. शून्य होगी।
B.
5,000 होगी।
C.
10,000 होगी।
D.
15,000 होगी।
इनपुट सीजीएसटी (
5,000) और इनपुट एसजीएसटी (
5,000), आउटपुट आईजीएसटी (
10,000) से समायोजित किए जाते हैं। इसलिए चिट्ठे में दर्शायी जाने वाली जीएसटी की राशि शून्य होगी।
A.
1,770 से क्रेडिट किया जाएगा।
B.
1,770 से डेबिट किया जाएगा।
C.
1,365 से क्रेडिट किया जाएगा।
D.
1,365 से डेबिट किया जाएगा।
व्याख्या:
| Particulars | L.F. |
Dr. |
Cr. |
|
| Drawings A/c | Dr. | 1,770 | ||
| To Purchases A/c | 1,500 | |||
| To Input CGST A/c | 135 | |||
| To Input SGST A/c | 135 | |||
A.
सकल लाभ - क्रय + प्रत्यक्ष व्यय।
B. विक्रय - क्रय - प्रत्यक्ष व्यय।
C. सकल लाभ + अन्य आय - अप्रत्यक्ष व्यय।
D. सकल लाभ - सभी व्यय।
शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अन्य आय - अप्रत्यक्ष व्यय।
A.
1,000.
B.
100.
C.
2,000.
D.
200.
दो माह का वेतन अदत्त वेतन होगा, जो इस प्रकार ज्ञात किया जाता है: 10,000 x 2/10 =
2,000
A.
आग से
20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा
2,000 को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा।
B.
आग से
18,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा
2,000 को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा।
C.
आग से
20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा
18,000 को लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा।
D.
आग से
20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा
18,000 को लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा।
व्यापारिक खाते को स्टॉक की वास्तविक हानि की राशि से क्रेडिट किया जायेगा जबकि लाभ एवं हानि खाते को
2,000
(20,000 - 18,000) से डेबिट किया जायेगा।
A.
22,000
B.
18,000
C.
20,000
D.
23,000
A.
10,000
B.
1,000
C.
9,000
D.
11,000
देनदारों को चिट्ठे में आयोजन की राशि घटाने के पश्चात् दिखाया जायेगा।
A.
17,100
B.
20,000
C.
19,000
D.
17,000
देनदरों को
1,000 का नया डूबत तथा संदिग्ध ऋणों पर आयोजन तथा
1,900 का देनदारों पर बट्टा आयोजन घटाने के पश्चात दिखाया जायेगा।
A.
1,000
B.
900
C.
910
D.
2,000
देनदारों पर बट्टे के लिए आयोजन की राशि की गणना देनदारों पर नया आयोजन घटाने के पश्चात की जायेगी।
A.
पूँजीगत व्यय।
B. आयगत व्यय।
C. अदत्त व्यय।
D. पूर्वदत्त व्यय।
देय परंतु अचुकता व्यय अदत्त व्यय होते हैं।
A.
रोकड़।
B. प्राप्य विपत्र।
C. पेटेंट।
D. स्टॉक।
पेटेंट तथा स्थायी सम्पत्तियाँ।
A.
पूर्वदत्त व्यय।
B. अग्रिम प्राप्त आय।
C. उपार्जित आय।
D. अदत्त व्यय।
पूर्वदत्त व्यय अर्थात ऐसे व्यय जो चालू लेखांकन वर्ष के दौरान चुकाये जाते हैं परंतु इनका लाभ आगामी वर्ष में प्राप्त होगा।
A.
चिट्ठे के दायित्व पक्ष में।
B. चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में।
C. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।
D. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।
A.
व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में।
B. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।
C. व्यापारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में।
D. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।
जावक भाड़े को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है क्योंकि ये व्यय माल को कारखाने से बाज़ार में लाने के लिए किया जाता है, हालांकि आवक भाड़े को व्यापारिक खाते में डेबिट किया जाता है।
A.
क्रय वापसी।
B. विक्रय वापसी।
C. आवक भाड़ा।
D. जावक भाड़ा।
क्रय वापसी को जावक वापसी भी कहा जाता है।
A.
पूर्वदत्त व्यय।
B. नाममात्र के व्यय।
C. व्यय।
D. अदत्त व्यय।
अदत्त व्यय ऐसे व्यय होते हैं जो देय होते हैं तथा जिनका लाभ प्राप्त किया जा चुका है परंतु चुकाया नहीं गया।
Journal
|
Particulars |
L.F. |
Dr. Rs. |
Cr. Rs. |
|
Rent A/c Dr. |
|
3,000 |
|
|
To Outstanding Rent A/c |
|
|
3,000 |
|
(Outstanding rent provided) |
|
|
|
|
Dr. |
Profit and Loss Account |
Cr. |
||||
|
Particulars |
Rs. |
Particulars |
Rs. |
|||
|
To Rent |
12,000 |
|
|
|
||
|
Add: Outstanding |
3,000 |
15,000 |
|
|
||
|
|
|
|
|
|||
|
Balance Sheet |
|||
|
Liabilities |
Rs. |
Assets |
Rs. |
|
Outstanding Rent |
3,000 |
|
|
|
|
|
|
|
उपार्जित आय एवं अनुपार्जित आय में अन्तर निम्न है-
|
क्र0 स0 |
अन्तर का आधार |
उपार्जित आय |
अनुपार्जित आय |
|
1. |
आशय |
यह वह आय होती है जो व्यापारी द्वारा अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक कमाई जा चुकी होती है। |
यह वह आय होती है जो व्यापारी द्वारा अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक कमाई गई नहीं होती है। |
|
2. |
प्राप्ति |
यह चालू वर्ष में प्राप्त नहीं हुई होती है। |
यह चालु वर्ष में ही प्राप्त हो गई होती है। |
|
3. |
लाभ-हानि खाते में लिखने का ढंग |
इसे लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित आय में जोड़कर दिखाया जाता है। |
इसे लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित आय में से घटाकर दिखाया जाता है। |
|
4. |
आर्थिक चिट्ठे में लिखने का विधि |
इसे आर्थिक चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है। |
इसे आर्थिक चिट्ठे में दायित्व पक्ष की ओर दिखाया जाता है। |
अदत्त व्यय एवं पूर्वदत्त व्यय में अन्तर निम्न है-
|
क्र0 स0 |
अन्तर का आधार |
अदत्त व्यय |
पूर्वदत्त व्यय |
|
1. |
आशय |
ये वे व्यय होते हैं जिनका अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक भुगतान नहीं किया गया होता है। |
ये वे व्यय होते हैं जिनका अन्तिम खाते बनाने की तिथी तक भुगतान कर दिया गया होता है। |
|
2. |
वित्तीय वर्ष से सम्बन्ध |
ये चालू व्यापारिक वर्ष से सम्बन्धित होते हैं। |
ये आगामी वर्ष से सम्बन्धित होते हैं। |
|
3. |
लेखाविधि |
इनको व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित व्यय की मद में जोड़कर दिखाया जाता है। |
इनको व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित व्यय की मद में से घटाकर दिखाया जाता है। |
|
4. |
आर्थिक चिट्ठे में लिखने का ढंग |
इनको आर्थिक चिट्ठे में दायित्व पक्ष की ओर दिखाया जाता है। |
इनको आर्थिक चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है। |
समायोजनाओं के अन्तर्गत किए जाने वाले लेखे अन्तिम खाते तैयार किए जाने के समय तक या तो बिल्कुल नहीं लिखे जाते या कुछ का लेखा ही उस व्यापारिक काल में प्रयोग आने वाली बहियों में नही होता। अतः इनका दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार दो स्थानों पर लेखा किया जाता है- एक, व्यापार तथा लाभ-हानि खाते के एक पक्ष में दूसरा, आर्थिक चिट्ठे के विपरीत पक्ष मे, जबकि तलपट के अन्तर्गत जिन लेखों का समावेश हो गया होता है उनका लेखा अन्तिम खाते बनाते समय केवल एक ही खाते में होता है- व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में अथवा आर्थिक चिट्ठे में। जैसे यदि अन्तिम रहतिया एवं मूल्य ह्रास की राशि तलपट के अन्दर दी गई होती है तो इनको केवल चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष में लिखा जाता है। ह्रास को सम्पत्ति में से घटाकर दिखाया जाता है।


Journal
|
Particulars |
L.F. |
Dr. Rs. |
Cr. Rs. |
|
Rent A/c Dr. |
|
3,000 |
|
|
To Outstanding Rent A/c |
|
|
3,000 |
|
(Outstanding rent provided) |
|
|
|
|
Dr. |
Profit and Loss Account |
Cr. |
||||
|
Particulars |
Rs. |
Particulars |
Rs. |
|||
|
To Rent |
12,000 |
|
|
|
||
|
Add: Outstanding |
3,000 |
15,000 |
|
|
||
|
|
|
|
|
|||
|
Balance Sheet |
|||
|
Liabilities |
Rs. |
Assets |
Rs. |
|
Outstanding Rent |
3,000 |
|
|
|
|
|
|
|







1. देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना:
व्यापारी शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने देनदारों को यह सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे एस निश्चित समय के अन्दर धनराशि का पूर्ण भुगतान कर देंगे तो उन्हें एक निश्चित प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। इसलिए व्यापारी अगले वर्ष में छूट देने के लिए, चालू वर्ष में ही देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान कर लेता है।
नियम – जर्नल में लाभ-हानि खाता ऋणी तथा देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान खाता धनी किया जाता है। यदि देनदारों पर अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान एवं छूट के लिए प्रावधान दोनों ही राशि निकालती हों, तो पहले देनदारों में से अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान ज्ञात करके घटा दी जाएगी, फिर शेष बचे देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान की राशि ज्ञात की जाएगी। यदि वर्ष में देनदारों को कोई छूट दी जाती है तो उसे पुरानी छुट के लिए प्रावधान में से समायोजित किया जाएगा। इस प्रावधान की राशि को लाभ-हानि खाते के ऋणी पक्ष की ओर लिखते हैं तथा आर्थिक चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में देनदारों में से घटाकर दिखाया जाता है।
2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट हो जाना:
कभी-कभी व्यापारी के गोदाम या दुकान में असाधारण कारणों जैसे – अग्नि द्वारा या किसी अन्य दुर्घटना के कारण रखा हुआ माल या कोई सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। इस दशा में यदि माल का बीमा कराया गया होता है तो बीमा कम्पनी इसकी पूर्णतया या आंशिक रुप से क्षतिपूर्ति स्वीकार कर लेती है।
नियम – बीमा कराए जाने की दशा में जर्नल में बीमा दावा खाता ऋणी तथा व्यापार या सम्बन्धित सम्पत्ति खाता धनी किया जाता है। यदि दावे की राशि वास्तविक हानि से कम होती है तो अन्तर की राशि से लाभ-हानि खाता ऋणी किया जाता है तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।
यदि माल का बीमा नहीं कराया गया है, तब जर्नल में अग्नि द्वारा हानि खाता ऋणी तथा क्रय या व्यापार खाता धनी किया जाता है। बाद में यह व्यापार की वास्तविक हानि होने के कारण लाभ-हानि खाता ऋणी तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।
बीमा कम्पनी से दावे की धनराशि प्राप्त होने पर बैंक खाता ऋणी तथा बीमा कम्पनी का खाता धनी कियी जाता है।
बीमा के दावे की धनराशि को जिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।
|
समायोजन |
व्यापार खाता |
लाभ-हानि खाता |
स्थिति-विवरण (चिट्ठा) |
|
1. असाधारण हानियाँ |
|
|
|
|
(क) माल की हानि |
व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। (कुल हानि की राशि) |
लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दर्शाएँ- बीमा कम्पनी से प्राप्त न हुई राशि। |
बीमा कम्पनी द्वारा स्वीकृत दावे की राशि को देनदार के रुप में चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाइए। |
|
(ख) सम्पत्ति की हानि |
- |
लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाइए। |
सम्बन्धित सम्पत्ति में हानि की राशि घटाइए। |
|
2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना |
क्रय में से इस माल का मूल्य घटाइए। |
- |
इस माल का मूल्य आहरण मानते हुए पूँजी में से घटाइए। |
|
3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण |
इस माल का मूल्य क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। |
लाभ-हानि खाते में विज्ञापन व्यय के रुप में डेबिट पक्ष में दर्शाइए। |
- |







1. देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना:
व्यापारी शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने देनदारों को यह सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे एस निश्चित समय के अन्दर धनराशि का पूर्ण भुगतान कर देंगे तो उन्हें एक निश्चित प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। इसलिए व्यापारी अगले वर्ष में छूट देने के लिए, चालू वर्ष में ही देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान कर लेता है।
नियम – जर्नल में लाभ-हानि खाता ऋणी तथा देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान खाता धनी किया जाता है। यदि देनदारों पर अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान एवं छूट के लिए प्रावधान दोनों ही राशि निकालती हों, तो पहले देनदारों में से अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान ज्ञात करके घटा दी जाएगी, फिर शेष बचे देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान की राशि ज्ञात की जाएगी। यदि वर्ष में देनदारों को कोई छूट दी जाती है तो उसे पुरानी छुट के लिए प्रावधान में से समायोजित किया जाएगा। इस प्रावधान की राशि को लाभ-हानि खाते के ऋणी पक्ष की ओर लिखते हैं तथा आर्थिक चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में देनदारों में से घटाकर दिखाया जाता है।
2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट हो जाना:
कभी-कभी व्यापारी के गोदाम या दुकान में असाधारण कारणों जैसे – अग्नि द्वारा या किसी अन्य दुर्घटना के कारण रखा हुआ माल या कोई सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। इस दशा में यदि माल का बीमा कराया गया होता है तो बीमा कम्पनी इसकी पूर्णतया या आंशिक रुप से क्षतिपूर्ति स्वीकार कर लेती है।
नियम – बीमा कराए जाने की दशा में जर्नल में बीमा दावा खाता ऋणी तथा व्यापार या सम्बन्धित सम्पत्ति खाता धनी किया जाता है। यदि दावे की राशि वास्तविक हानि से कम होती है तो अन्तर की राशि से लाभ-हानि खाता ऋणी किया जाता है तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।
यदि माल का बीमा नहीं कराया गया है, तब जर्नल में अग्नि द्वारा हानि खाता ऋणी तथा क्रय या व्यापार खाता धनी किया जाता है। बाद में यह व्यापार की वास्तविक हानि होने के कारण लाभ-हानि खाता ऋणी तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।
बीमा कम्पनी से दावे की धनराशि प्राप्त होने पर बैंक खाता ऋणी तथा बीमा कम्पनी का खाता धनी कियी जाता है।
बीमा के दावे की धनराशि को जिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।
|
समायोजन |
व्यापार खाता |
लाभ-हानि खाता |
स्थिति-विवरण (चिट्ठा) |
|
1. असाधारण हानियाँ |
|
|
|
|
(क) माल की हानि |
व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। (कुल हानि की राशि) |
लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दर्शाएँ- बीमा कम्पनी से प्राप्त न हुई राशि। |
बीमा कम्पनी द्वारा स्वीकृत दावे की राशि को देनदार के रुप में चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाइए। |
|
(ख) सम्पत्ति की हानि |
- |
लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाइए। |
सम्बन्धित सम्पत्ति में हानि की राशि घटाइए। |
|
2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना |
क्रय में से इस माल का मूल्य घटाइए। |
- |
इस माल का मूल्य आहरण मानते हुए पूँजी में से घटाइए। |
|
3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण |
इस माल का मूल्य क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। |
लाभ-हानि खाते में विज्ञापन व्यय के रुप में डेबिट पक्ष में दर्शाइए। |
- |
Balance Sheet as on 31 March 2014
|
Liabilities |
Amt. |
Assets |
Amt. |
|
General Reserve Sundry Creditors Bills Payable 7% Debenture Share capital Profit and Loss |
1,10,000 60,000 10,500 1,50,000 3,00,000 53,150 |
Goodwill Machinery Building Stock Sundry Debtors 57,000 Less-Provision 2,850 Bills Receivable Furniture Motor Car Investment Cash |
1,50,000 1,08,000 1,50,000 97,500
54,150 16,500 18,000 27,000 35,000 27,500 |
|
|
6,83,650 |
|
6,83,650 |
Trading and P&L A/c
|
Particular |
Amt. |
Particular |
Amt. |
|
To Opening Stock |
3,850 |
By Sales A/c |
23,144 |
|
To Purchase A/c11,000 Less-P/R 110 |
10,890 |
By Closing Stock |
7,260 |
|
To wages A/c |
3,520 |
|
|
|
To Gas & Fuel A/c |
297 |
|
|
|
To Factory Lighting A/c |
286 |
|
|
|
To Freight A/c |
990 |
|
|
|
To Gross Profit |
10,571 |
|
|
|
Total |
30,404 |
Total |
30,404 |
|
To Salaries A/c |
1,320 |
By Gross Profit |
10,571 |
|
To Office Exp. A/c |
715 |
By Interest on loan A/c |
110 |
|
To Discount A/c |
132 |
|
|
|
To Depreciation A/c Loose Tools Plant & Machinery Office Furniture Freehold Property |
44 3,300 55 330 |
|
|
|
To Bed Debts A/c |
66 |
|
|
|
To Provision For Doubtful debts A/c |
58 |
|
|
|
To Net Profit |
4,661 |
|
|
|
|
|
|
|
|
Total |
10,681 |
|
10,681 |
Balance Sheet as on
31 March, 2014
|
Liabilities |
Amt. |
Assets |
Amt. |
|
Capital 22,880 Add-N/P 4,661 27,541 Less-Dra. 1,320 Bills Payable Sundry Creditors |
26221 550 4,400 |
Plant & Machinery Freehold Property Office Furniture Sundry Debtor 2,926 Less-Pro. 146 Loan to Krishna Cash at Bank Loose Tools Cash in Hand Stock |
6,600 6,270 495
2,780 4,400 2,926 176 264 7,260 |
|
Total |
31,171 |
|
31,171 |
|
Books of Mrs. Hema Trading and Profit & Loss Account For the year ending 31 March, 2018 |
||||||
|
Particulars |
Particulars |
|||||
|
To Opening Stock |
3,60,000 |
By Sales |
35,00,000 |
|||
|
To Purchases |
22,00,000 |
Less: Returns |
60,000 |
34,40,000 |
||
|
Less: Returns |
75,000 |
21,25,000 |
By Closing Stock |
5,00,000 |
||
|
To Carriage Inward |
44,000 |
|||||
|
To Fuel and Power |
1,55,000 |
|||||
|
To Wages and Salaries |
60,000 |
|||||
|
To Gross Profit c/d |
11,96,000 |
|||||
|
39,40,000 |
39,40,000 |
|||||
|
To Carriage Outward |
21,000 |
By Gross Profit b/d |
11,96,000 |
|||
|
To Wages and Salaries |
1,20,000 |
By Interest on Investments |
20,000 |
|||
|
To Repairs |
15,200 |
By Sundry Income |
1,200 |
|||
|
To General Expenses |
1,06,000 |
|||||
|
Less: Prepaid Insurance |
3,000 |
1,03,000 |
||||
|
To Bad Debts |
62,000 |
|||||
|
Add: Further Bad Debts |
20,000 |
|||||
|
Add: New |
||||||
|
Provision |
40,000 |
|||||
|
1,22,000 |
||||||
|
Less: Old |
||||||
|
Provision |
25,000 |
97,000 |
||||
|
To Outstanding Interest |
12,000 |
|||||
|
To Net Profit |
8,49,000 |
|||||
|
12,17,200 |
12,17,200 |
|||||
|
Balance Sheet as at 31 March, 2018 |
|||||
|
Liabilities |
Assets |
||||
|
Output IGST |
52,000 |
Cash in Hand |
20,000 |
||
|
Creditors |
3,00,000 |
Cash at Bank |
1,80,000 |
||
|
18% Loan |
1,00,000 |
Debtors |
8,20,000 |
||
|
Add: Outstanding |
Less: Bad Debts |
20,000 |
|||
|
Interest |
12,000 |
1,12,000 |
|||
|
Capital |
21,70,000 |
8,00,000 |
|||
|
Add: Net Profit |
8,49,000 |
Less: Provision |
|||
|
30,19,000 |
For Doubtful |
||||
|
Debts |
40,000 |
7,60,000 |
|||
|
Less: Drawings |
Stock |
5,00,000 |
|||
|
(stationery) |
20,000 |
29,99,000 |
Prepaid Insurance |
3,000 |
|
|
Investments |
2,00,000 |
||||
|
Premises |
18,00,000 |
||||
|
34,63,000 |
34,63,000 |
||||
| खातों के नाम | डेविट राशि (रुपया) | खातों के नाम | क्रेडिट राशि (रुपया) |
| स्टाक | 37,500 | विक्रय | 4,95,000 |
| क्रय | 2,90,000 | सामान्य संचय | 35,000 |
| सयंत्र | 1,25,000 | लेनदार | 30,000 |
| भवन | 2,00,000 | ब्याज | 1,000 |
| फर्नीचर | 10,000 | क्रय वापसी | 2,500 |
| मजदूरी | 25,000 | अंश पूंजी | 2,50,000 |
| ढुलाई | 2,500 | लाभ-हानि खाता | 27,000 |
| संचालक शुल्क | 10,000 | ||
| सामान्य व्यय | 7,500 | ||
| विक्रय वापसी | 3,500 | ||
| वेतन | 40,000 | ||
| मोटर | 15,000 | ||
| देनदार | 45,000 | ||
| विनियोग | 15,000 | ||
| अवशिष्ट याचना | 2,500 | ||
| किराया व कर | 4,000 | ||
| हस्तस्थ रोकड़ | 1,500 | ||
| बैंक में रोकड़ | 6,500 | ||
| 8,40,500 | 8,40,500 |
- Profit and loss a/c
|
Particulars |
Amt. |
Particulars |
Amt. |
|
To carriage a/c To Director’s fees To Gen. Exp. a/c To Salaries 40000 Add- o/s salary 5000 To Dep. on Building 10000 Plant 12500 Motor 3000 To Provision for doubtful debts To Rent & tax 4000 less – Prepaid 500 To Gen. Reserve. a/c To balance c/d (N.P.) |
2500 10000 7500 45000
25500
2250
3500 17500 48750 |
By G.P. Transferred from trading By Interest a/c |
161500 1000
|
|
Total |
162500 |
Total |
162500 |
A. नकद बिक्री का पता लगाने के लिए
B. उधार बिक्री का पता लगाने के लिए
C. नकद शेष का पता लगाने के लिए
D. उधार क्रय का पता लगाने के लिए
देनदार खाता उधार बिक्री का पता लगाने के लिए तैयार किया जाता है।
A. कुल लेनदार खाता
B. कुल देनदार खाता
C. रोकड़ खाता
D. आरंभिक अवस्था विवरण
कुल लेनदार खाते का उपयोग उधार क्रय की राशि जानने के लिए किया जाता है
A.
लाभ या लाई गयी पूंजी
B.
हानि या आरहण
C.
लाभ
D.
हानि
जब समापन पूंजी आरंभ पूंजी से कम है तो यह हानि या आरहण को प्रदर्शित करती है
A.
2,00,000 रु का आहरण है
B.
1,50,000 रु का लाभ है
C.
1,50,000 रु की हानि है
D.
वर्ष के दौरान रु 1,50,000 की लाई गई ताजी पूंजी है
अवधि के दौरान हुई हानि = आरंभ पूंजी – समापन पूंजी = 3,50,000 - 1,50,000
A.
व्यापार की सही वित्तीय स्थिति
B.
व्यापार की झूठी वित्तीय स्थिति
C.
व्यापार की वास्तविक वित्तीय स्थिति .
D.
व्यापार की अनुमानित वित्तीय स्थिति
अवस्था विवरण व्यापार की अनुमानित वित्तीय स्थिति को प्रदर्शित करता है क्योंकि यह लेनदेन के दोनों पहलुओं को अभिलेखित नहीं करता है तो इसके परिणामस्वरूप सही वित्तीय स्थिति को हासिल नहीं किया जा सकता है।
A.
रु 75,000
B.
रु 50,000
C.
रु 25,000
D.
रु 1,00,000
संपत्तियां=दायित्व +पूंजी पूंजी = परिसंपत्तियां-दायित्व
A.
सरल पद्धति
B.
कम महंगा
C.
छोटी व्यवसायों के लिए उचित
D.
कम वैज्ञानिक
एकल प्रविष्टि इस मायने में अवैज्ञानिक है
A.
तलपट को तैयार नहीं किया जा सकता है
B.
लाभ और हानि और व्यापार लेखे को तैयार नहीं किया जा सकता है
C.
स्थिति विवरण को तैयार नहीं किया जा सकता है
D.
उपरोक्त सभी
इस प्रणाली के अंतर्गत तलपट और अंतिम लेखों को तैयार नहीं किया जा सकता है
A.
रु 24,000
B.
रु 36,000
C.
रु 48,000
D.
रु 12,000
आरंभ पूंजी = समापन पूंजी – अतिरिक्त पूंजी – लाभ 30,000 - 12,000 - 6,000 = 12,000
A.
आहरण
B.
लाई गई पूंजी
C.
लाभ
D.
अतिरिक्त पूंजी
वर्ष के दौरान लाभ और हानि की गणना करने के लिए आरहण को समापन पूंजी में जोड़ा जाता है।
A.
सभी खातों और बिखरी सूचना में
B.
लेनदार खातों से
C.
आरंभ अवस्था विवरण से
D.
रोकण सारांश से
लाभ और हानि को सभी खातों और बिखरी सूचना से पाया जा सकता है
A.
रु 3,000
B.
रु 9,000
C.
रु 21,000
D.
रु 33,000
आरंभ पूंजी = समापन पूंजी –अतिरिक्त पूंजी + हानि 15,000 - 12,000 + 6,000 = 9,000
A.
वर्ष के दौरान लाभ
B.
वर्ष के दौरान आरहण या लाई गयी पूंजी
C.
वर्ष के दौरान हानि
D.
वर्ष के दौरान खरीदी गई नियत परिसंपत्तियां
समायोजन में वर्ष के दौरान लाभ और हानि, लाई गयी पूंजी या आरहण सम्मिलित होता है।
A.
दोहरी प्रविष्टि
B.
अपूर्ण अभिलेख
C.
उपार्जन आधार
D.
रूढ़िवादी परम्परा
केवल नकद और व्यक्तिगत लेखों का रखरखाव अपूर्ण अभिलेखों में किया जाता है। इस प्रणाली मे लेखे पूर्ण न होने का कारण तलपट नहीं बनाया जा सकता है।
A.
खरीद
B.
आरहण
C.
बिक्री
D.
पूंजी
आरंभ में अवस्था विवरण फर्म की आरंभ पूंजी को बतलाता है। चूंकि आरंभ पूंजी के लिए कोई उचित रिकोर्ड नहीं होते हैं तो लेखा इसकी गणना अवधि के आरंभ में अवस्था विवरण को तैयार करने के द्वारा करता है।
A.
आरंभ पूंजी और समापन पूंजी की तुलना
B.
एक लाभ और हानि खाता तैयार करना
C.
स्थिति विवरण तैयार करना
D.
व्यापार खाता तैयार करना
लाभ संचित करने के लिए, एकल लेखा प्रणाली के अनुसार, अवस्था विवरण को वर्ष के अंत में और वर्ष के आरंभ में तैयार करना आवश्यक है।
A.
रु 2,000
B.
रु 38,000
C.
रु 40,000
D.
रु 1,42,000
लाभ निर्धारण करने के लिए समीकरण है अंत में पूंजी +आरहण – अतिरिक्त लाई गयी पूंजी– आरंभ में पूंजी लाभ = 90,000 + 18,000 - 70,000 = 38,000
A.
रु 600
B.
रु 800
C.
रु 3900
D.
रु 4700
लाभ = समापन पूंजी + आरहण – अतिरिक्त पूंजी – आरंभ पूंजी. ताजा पूंजी = समापन पूंजी + आरहण – आरंभ पूंजी – लाभ 4,000 + 700 - 2,400 - 1500 = 800.
A.
आरहण
B.
लाई गयी पूंजी
C.
बिक्री
D.
खरीद
लाभ = अंत में पूंजी + आरहण – लाई गयी अतिरिक्त पूंजी- आरंभ में पूंजी।
A.
सार्वजनिक लिमिटेड कम्पनी
B.
निजी लिमिटेड कम्पनी
C.
पंजीकृत सहकारी समितियां
D.
एकल स्वामित्व
अपूर्ण रिकोर्ड अधिकतर एकल स्वामित्व वाले या छोटे फर्म के द्वारा रखे जाते हैं। लिमिटेड कम्पनी कानूनी प्रतिबंधों के कारण लेखे की एकल प्रविष्टि प्रणाली का पालन नहीं कर सकती हैं।
कंप्यूटर
के साथ कार्य
करने वाले
लोगों को कंप्यूटर
प्रणाली का
लाईव-वेयर भी
कहा जाता है। इसमें
कंप्यूटर
प्रणाली का
सबसे
महत्वपूर्ण
भाग शामिल
होता है:
-प्रणाली
विश्लेषक: वे
लोग जो डाटा
प्रोसेसिंग
प्रणाली को
डिजाइन करते
हैं।
-प्रोग्रामस:
ये डाटा
प्रोसेसिंग
सिस्टम डिजाइन
के
क्रियान्वयन
के लिए
कार्यक्रमों
को लिखने
वाले लोग
होते हैं।
-ऑपरेटर:
ये कंप्यूटर
संचालन में
भाग लेने वाले
लोग होते
हैं।
वे
लोग जो कंप्यूटर
प्रोग्रामर
को
क्रियान्वित
करने के लिए स्थापित
प्रक्रियाओं
का जवाब देते
हैं वे भी लाइव-वेयर
का एक हिस्सा
होते हैं।
प्रत्येक
लेखा
रिपोर्ट के
द्वारा कवर
किये जाने
वाले आवश्यक
मापदंड:
क)
प्रासंगिकता
ख)
शाश्वत्ता
ग)
शुद्धता
घ)
संपूर्णता
ई) सारांशिकरण
यह ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जो निर्णय लेने के लिए और प्रभावी ढंग से एक संगठन का प्रबंधन करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। एमआईएस संस्था के दीर्घकालिक सामरिक लक्ष्यों और उद्देश्यों का समर्थन करती है। एमआईएस को प्रबंधन द्वारा कई स्तरों पर देखा और प्रयोग किया जाता है।
लेनदेन प्रसंस्करण प्रणाली बड़े व्यापार उद्यम की आवश्यकताओं के लिए प्रस्तुत की गयी सबसे पहली कंप्यूटरीकृत प्रणाली में से होती है। ठेठ टीपीएस के उद्देश्य, अभिलेखन, वैध तथा लेनदेनों को संरक्षित करना जो पुनः प्राप्ति और उपयोग के लिए व्यापार के विभिन्न कार्यात्मक क्षेत्रों से होते हैं। (एक लेनदेन प्रसंस्करण प्रणाली (टीपीएस) सूचना प्रणाली का एक प्रकार होती है। टीपीएस एक संगठन के लेनदेनों संग्रहित, संरक्षित, संशोधित और पुनः प्रदान करती है। एक लेनदेन एक घटना होती है जो ऐसे संग्रहीत डेटा को संशोधित या उत्पन्न करती है जिसे एक सूचना प्रणाली में संरक्षित किया गया है।)
एक कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली में, भंडारण और डेटा की प्रोसेसिंग के ढांचे को ऑपरेटिंग पर्यावरण कहा जाता है जिसमें हार्डवेयर के साथ ही वह साॅफ्टवेयर भी शामिल होता है जिसमें लेखा प्रणाली काम करती है।
कम्प्यूटरीकृत
लेखा
प्रणाली की
विशेषताएं:
1) ऑनलाइन
इनपुट और
भंडारण।
2) खरीद
और बिक्री
चालान के
प्रिंटआउट।
3) खातों
और लेनदेन के
संहिताकरण
के लिए
तर्कसंगत योजना।
प्रत्येक
खाते और
लेनदेन के
पास एक
अद्वितीय कोड
होता है।
4) प्रारंभ
से ही खातों
का समूहिकरण
किया जाता है।
5) प्रबंधन
के लिए तुरंत
रिपोर्ट।
कंप्यूटर
प्रणाली की
सीमाएं हैं:
1) सामान्य
ज्ञान का
अभाव: -
कम्प्यूटर
प्रणाली के
पास किसी
प्रकार का
सामान्य
ज्ञान नहीं
होता है
क्योंकि
सामान्य
ज्ञान के
प्रोग्राम
के लिए पूरी
एल्गोरिथ्म
डिजाइन की
जाती है।
2 ) शून्य
बुद्धि: -
कंप्यूटर
शून्य
होशियारी के
साथ मौन
उपकरण होता
है। जब तक एक
विशेष
स्थिति से
निपटने के
लिए
प्रोग्राम
तैयार नहीं
किया जाता तब
तक वे एक
विशेष
स्थिति के
तहत वास्तव
क्या होना
चाहिए के
बारे में सोच
और कल्पना
नहीं सकते
हैं।
3) निर्णय
लेने के अभाव: -
निर्णयन
सूचना, ज्ञान, बुद्धि
और न्याय
करने की
क्षमता से
जुड़ी एक जटिल
प्रक्रिया
होती है।
कंप्यूटर
अपने दम पर निर्णय
नहीं ले सकता
है क्योंकि
उसके पास निर्णय
लेने के सभी
तत्व नहीं
होते हैं।