CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 170301 पूँजीगत तथा आयगत व्ययों के निर्धारण के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(1) व्यवसाय की प्रकृति- व्यवसाय की प्रकृति व्ययों को पूँजीगत तथा आयगत में भेद करने हेतू एक महत्वपूर्ण आधार है। फर्नीचर के व्यापारी के लिए फर्नीचर का क्रय आयगत व्यय है, जबकि कपड़े के व्यापारी के लिए फर्नीचर का क्रय पूँजीगत व्यय है।

(2) व्ययों का उद्देश्य- एक पुरानी मशीन की मरम्मत पर व्यय उसकी उत्पादकीय क्षमता में वृद्धि हेतु किया जाए तो वह पूँजीगत व्यय होगा। यदि मरम्मत व्यय उस मशीन के सामान्य अनुरक्षण के लिए किया जाए तो आयगत व्यय होगा।

(3) आय उपार्जन क्षमता पर प्रभाव – यदि कोई व्यय एक से अधिक लेखावधि तक आय का सृजन करने में सहायता प्रदान करे तो उसे पूँजीगत व्यय माना जाएगा। यदि वह व्यय एक लेखावधि के दौरान ही आय का सृजन करे तो उसे आयगत व्यय माना जाएगा।


Q. 170302 व्यय की निम्नलिखित मदों को आप कैसे वर्गीकृत करेंगे कारण के साथ स्पष्ट कीजिए: अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर 2,50,000 रु खर्च किये गये। अगले वर्ष के लिए 25,000 रु का नवीकरण व्यय भी चुकाया गया। स) नये कारखाने की पुताई तथा रंगाई पर 35,000 रु खर्च किये गये। द) भूमि के क्रय पर वैधानिक व्यय चुकाये गये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ऐसे व्यय भविष्य में संचालन लागत को कम करते हैं तथा इसलिए इनके लाभ दीर्घकाल के लिए प्राप्त होते हैं। इसलिए इस व्यय को पूँजीकृत किया जाना चाहिए।

(ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर खर्च किये गये 2,50,000 रु पूँजीगत व्यय है, क्योंकि यह एक बार किया गया ऐसा व्यय है जिसके लाभ कई वर्षों तक प्राप्त होते रहेंगे। 25,000 रु का चुकाया गया नवीकरण व्यय अगले वर्ष के लिए था। इसे चालू वर्ष में पूर्वदत्त व्यय के रूप में दिखाया जायेगा।

(स) इसे पूँजीगत व्यय के रूप में व्यवहारित किया जाना चाहिए, क्योंकि कारखाने पर पुताई पहली बार की गयी है। इसलिए, इसे कारखाना खाते में डेबिट किया जाना चाहिए।

(द) सम्पत्ति के क्रय पर किये गये व्यय सम्पत्ति खाते में डेबिट किये जाते हैं।


Q. 170303 आयोजन(प्रावधान) को समझाइये तथा आयोजन के कोई भी पाँच उदाहरण बताइये ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

आयोजन से आशय उस राशि से होता हैजिसे सम्पत्तियों के ह्रासनवीनीकरण या मूल्य में कमी  तथा किसी भी ज्ञात दायित्व के लिये इसलिये रखा जाता है, क्योंकि इनकी वास्तविक राशि का पूर्ण शुद्धता के 

साथ अनुमान नहीं लगाया जा सकता है ।
आयोजन के पाँच प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. अप्राप्त तथा संदिग्ध ऋणों के लिये आयोजन  :
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों की रकम समय  का निश्चित ज्ञान नहीं होता है, इसलिए इनकी अनुमानित राशि के लिये आयोजन किया जाता है

अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों के लिये प्रावधान को चिट्ठे में देनदारों से घटाकर दर्शाया जाता है। यदि आयोजन की राशि वास्तविक संदिग्ध ऋणों से अधिक हैं तो आधिक्य को संचय कहा जायेगा।  

2.
देनदारों पर देय कटौती के लिये आयोजन  :
सामान्यतः देनदारों द्वारा जब भुगतान किया जाता है ,तो उनको छूट दी जा सकती है। इस दी जा सकने वाली छूट के लिये पहले से ही आयोजन कर लिया जाता है
चिट्ठे में इस आयोजन राशि को देनदारों में से घटाकर दर्शाया जाता है।   

3.
सम्पत्तियों के मूल्य ह्रास के लिये आयोजन :
स्थायी सम्पत्तियों पर लगाये जाने वाले भावी ह्रास के लिये पहले से ही सम्भावित राशि का प्रावधान कर लिया जाता है। इस प्रावधान की राशि को आर्थिक चिट्ठे में सम्बन्धित सम्पत्ति में से घटाकर दर्शाया जाता है। 

4.
मरम्मत नवीनीकरण के लिये आयोजन :        
सामान्यतः मरम्मत नवीनीकरण ऐसे व्यय होते हैं, जिनकी राशि प्रतिवर्ष समान नही पायी जाती है।
लाभ-हानि खाते पर प्रतिवर्ष इन खर्चों के भार को समान रखने के लिये मरम्मत नवीनीकरण के लिये प्रावधान किया जाता है

5.
अदत्त व्ययों के लिये आयोजन :
कुछ ऐसे व्यय होते हैं, जिनका लाभ तो संस्था द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अन्तिम खाते बनाते समय तक इनका भुगतान नहीं किया गया है और नही इन व्ययों की राशि का शुद्ध अनुमान होता है ऐसे व्ययों के लिये बनाये जाने वाले प्रावधान को अदत्त व्ययों के लिये प्रावधान कहा जाता है जैसे- अंकेक्षण शुल्क, कमीशन व्यापारिक यात्रियों का व्यय आदि


Q. 170304 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययो में क्या अंतर है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययों में निम्नलिखित अंतर है-

अन्तर का आधार

प्रत्यक्ष व्यय

अप्रत्यक्ष व्यय

सम्बन्ध

ये व्यय माल के क्रय करने या क्रय किए गए माल को बिक्री योग्य बनाने या माल के उत्पादन  (निर्माण) के सम्बन्ध में किए जाते हैं।

ये व्यय माल के सम्बन्ध में किए जाते हैं।

सम्मिलित करना

ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित किए जाते हैं।

ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित नहीं किए जाते हैं।

खाता, जिसमें दिखाया जाता है

ये व्यय व्यापार खाते में दिखाए जाते हैं।

ये व्यय लाभ-हानि खाते में दिखाए जाते हैं।


Q. 170305 व्यय की निम्नलिखित मदों को आप कैसे वर्गीकृत करेंगे कारण के साथ स्पष्ट कीजिए: अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर 2,50,000 रु खर्च किये गये। अगले वर्ष के लिए 25,000 रु का नवीकरण व्यय भी चुकाया गया। स) नये कारखाने की पुताई तथा रंगाई पर 35,000 रु खर्च किये गये। द) भूमि के क्रय पर वैधानिक व्यय चुकाये गये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(अ) अधिक अच्छी इंधन क्षमता प्राप्त करने के लिए एक मोटर कार के इंजन पर 25,000 रु खर्च किये गये। ऐसे व्यय भविष्य में संचालन लागत को कम करते हैं तथा इसलिए इनके लाभ दीर्घकाल के लिए प्राप्त होते हैं। इसलिए इस व्यय को पूँजीकृत किया जाना चाहिए।

(ब) एक सिनेमा चलाने के लिए अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करने पर खर्च किये गये 2,50,000 रु पूँजीगत व्यय है, क्योंकि यह एक बार किया गया ऐसा व्यय है जिसके लाभ कई वर्षों तक प्राप्त होते रहेंगे। 25,000 रु का चुकाया गया नवीकरण व्यय अगले वर्ष के लिए था। इसे चालू वर्ष में पूर्वदत्त व्यय के रूप में दिखाया जायेगा।

(स) इसे पूँजीगत व्यय के रूप में व्यवहारित किया जाना चाहिए, क्योंकि कारखाने पर पुताई पहली बार की गयी है। इसलिए, इसे कारखाना खाते में डेबिट किया जाना चाहिए।

(द) सम्पत्ति के क्रय पर किये गये व्यय सम्पत्ति खाते में डेबिट किये जाते हैं।


Q. 170306 आयोजन(प्रावधान) को समझाइये तथा आयोजन के कोई भी पाँच उदाहरण बताइये ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

आयोजन से आशय उस राशि से होता हैजिसे सम्पत्तियों के ह्रासनवीनीकरण या मूल्य में कमी  तथा किसी भी ज्ञात दायित्व के लिये इसलिये रखा जाता है, क्योंकि इनकी वास्तविक राशि का पूर्ण शुद्धता के 

साथ अनुमान नहीं लगाया जा सकता है ।
आयोजन के पाँच प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. अप्राप्त तथा संदिग्ध ऋणों के लिये आयोजन  :
अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों की रकम समय  का निश्चित ज्ञान नहीं होता है, इसलिए इनकी अनुमानित राशि के लिये आयोजन किया जाता है

अप्राप्त एवं संदिग्ध ऋणों के लिये प्रावधान को चिट्ठे में देनदारों से घटाकर दर्शाया जाता है। यदि आयोजन की राशि वास्तविक संदिग्ध ऋणों से अधिक हैं तो आधिक्य को संचय कहा जायेगा।  

2.
देनदारों पर देय कटौती के लिये आयोजन  :
सामान्यतः देनदारों द्वारा जब भुगतान किया जाता है ,तो उनको छूट दी जा सकती है। इस दी जा सकने वाली छूट के लिये पहले से ही आयोजन कर लिया जाता है
चिट्ठे में इस आयोजन राशि को देनदारों में से घटाकर दर्शाया जाता है।   

3.
सम्पत्तियों के मूल्य ह्रास के लिये आयोजन :
स्थायी सम्पत्तियों पर लगाये जाने वाले भावी ह्रास के लिये पहले से ही सम्भावित राशि का प्रावधान कर लिया जाता है। इस प्रावधान की राशि को आर्थिक चिट्ठे में सम्बन्धित सम्पत्ति में से घटाकर दर्शाया जाता है। 

4.
मरम्मत नवीनीकरण के लिये आयोजन :        
सामान्यतः मरम्मत नवीनीकरण ऐसे व्यय होते हैं, जिनकी राशि प्रतिवर्ष समान नही पायी जाती है।
लाभ-हानि खाते पर प्रतिवर्ष इन खर्चों के भार को समान रखने के लिये मरम्मत नवीनीकरण के लिये प्रावधान किया जाता है

5.
अदत्त व्ययों के लिये आयोजन :
कुछ ऐसे व्यय होते हैं, जिनका लाभ तो संस्था द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अन्तिम खाते बनाते समय तक इनका भुगतान नहीं किया गया है और नही इन व्ययों की राशि का शुद्ध अनुमान होता है ऐसे व्ययों के लिये बनाये जाने वाले प्रावधान को अदत्त व्ययों के लिये प्रावधान कहा जाता है जैसे- अंकेक्षण शुल्क, कमीशन व्यापारिक यात्रियों का व्यय आदि


Q. 170307 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययो में क्या अंतर है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष व्ययों में निम्नलिखित अंतर है-

अन्तर का आधार

प्रत्यक्ष व्यय

अप्रत्यक्ष व्यय

सम्बन्ध

ये व्यय माल के क्रय करने या क्रय किए गए माल को बिक्री योग्य बनाने या माल के उत्पादन  (निर्माण) के सम्बन्ध में किए जाते हैं।

ये व्यय माल के सम्बन्ध में किए जाते हैं।

सम्मिलित करना

ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित किए जाते हैं।

ये व्यय तैयार माल की लागत में सम्मिलित नहीं किए जाते हैं।

खाता, जिसमें दिखाया जाता है

ये व्यय व्यापार खाते में दिखाए जाते हैं।

ये व्यय लाभ-हानि खाते में दिखाए जाते हैं।


Q. 170308 चिट्ठे तथा तलपट में क्या अंतर हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170309 व्यापारिक खाते का प्रारुप दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यापारिक खाते का प्रारुप

ऋणी पक्ष (Dr. Side)

 

धनी पक्ष (Cr. Side)

 

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

 

`

 

`

प्रारम्भिक रहतिया का

(To Opening Stock)

...........

विक्रय से (By Sales) ......

 

 

क्रय का (To Purchase) ......

घटाया- क्रय/बाह्य वापसी ......

Less : (Purchase Returns)

निजी प्रयोग के लिए ......

(Drawings of Goods)

दान में दिया गया माल ......

(Charity of Goods)

नमूना का निःशुल्क वितरण ......

(Distribution of Free Samples)

क्रय पर कटौती ......

(Discount on Purchases) _____

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

......

 

 

घटाया - विक्रय/आन्तरिक वापसी ......

Less : (Sales Returns)

बिक्री/वापसी पर भेजा गया माल ......

(Goods supplied on Sale/

Returns bases)

______

 

 

 

......

 

आन्तरिक गाड़ी भाड़ा या क्रय पर भाड़े का

(To Freight on Purchases)

......

 

अन्तिम रहतिया से

(By Closing Stock)

......

 

मजदूरी का

......

प्रेषण पर भेजा गया माल से

(लागत मूल्य पर)

(By Goods sent on Consignment)

(at Cost)

......

 

मजदूरी व वेतन का

......

 

अग्नि आदि से नष्ट माल से

(Loss of Goods by Fire)

......

 

आगत वाहन व्यय/

आन्तरिक ढुलाई व्यय खाते का

......

 

सकल हानि लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि)

 

कोयला, गैस व पानी का

......

 

 

 

कारखाने की बीजली या प्रकाश का

......

 

 

 

ईंधन का

......

 

 

 

प्रयोग किए गए स्टोर्स का

......

 

 

 

निर्माण या उत्पादन व्यय का

......

 

 

 

कोयला, गैस व ईँधन का

......

 

 

 

ढुलाई एवं भाड़ा का

......

 

 

 

कारखाना के अन्य विविध व्यय का

......

 

 

 

आयातकर का

......

 

 

 

चुंगी का

......

 

 

 

अधिकार शुल्क का

......

 

 

 

रेलगाड़ी भाड़ा का

......

 

 

 

सकल लाभ लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि)

......

 

 

 

 

......

 

......

 


Q. 170310
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170311
वित्तीय विवरणों के उपयोगकर्ता कौन होते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वित्तीय विवरणों के उपयोगकर्ता हैं:
1. विनियोगकर्ता: - व्यापार के अंशधारक या स्वामी वित्तीय स्थिति, लाभ क्षमता और व्यापार के विकास की संभावनाओं को जानने में रूचि रखते हैं।
2. संभावित विनियोगकर्ता: - ये भी वित्तीय स्थिति, लाभ क्षमता और व्यापार के विकास के लिए इसकी संभावनाओं को जानने में रुचि रखते हैं। वे यह भी जानने में रुचि रखते है कि उनके निवेश कैसे सुरक्षित होंगे।
3. ऋणदाताओं: - ऋणपपत्रधारक, आपूर्तिकर्ता के ऋण की और पट्टाकार के जैसे व्यवसाय इकाई की दीर्घकालिक शोधन क्षमता स्थिति के साथ ही अल्पकालिक क्षमता को जानने में रुचि रखते हैं।
4. आपूर्तिकर्ता तथा व्यापार लेनदार: - यह व्यवसायों की शोधन क्षमता अर्थात ऋणों के देय होने पर उन्हें चुकाने की क्षमता जानने में रूची रखते हैं।
5. सरकार तथा उनकी ऐजेंसियाँ: - सरकार और उसकी एजेंसियां को उद्यम की गतिविधियों को विनियमित, कराधान नीति निर्धारण, राष्ट्रीय आय के आँकड़ों की जटिलता का निर्धारण करने आदि के लिए वित्तीय सूचनाओं की आवश्यकता होती है।
6. जनता: - उद्यम तरीकों से जनता को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, एक उद्यम की गतिविधियाँ काफी हद तक स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इसलिए, बड़े पैमाने पर जनता एक उद्यम की प्रगति जानने में दिलचस्पी रखती है जिसे वे वित्तीय विवरणों से समझ सकते हैं।
7. कर अधिकारी: - विशेषतौर पर, आयकर अधिकारी व्यवसाय के लाभों को जानने में रूचि रखते हैं जिससे वे उस पर आयकर दायित्व सौंप सके।
8. स्टाॅक बाजार: - यह एक ऐसा संस्थान होता है जो कम्पनियों के अंशों तथा ऋणपत्रों के क्रय तथा विक्रय की सुविधा प्रदान करता है। यह उन सदस्यों कोे कम्पनी के बारे में सूचना प्रदान करता है जो वित्तीय विवरणों में रूचि लेते हैं क्योंकि वे कम्पनियों के बारे में उपयोगी वित्तीय सूचना प्रदान करते हैं।
9. कर्मचारी तथा व्यापार संघ: - ये लाभांश के अधिकारी होते हैं जो लाभ पर निर्भर करता है: इसलिए ये व्यवसाय द्वारा कमाये गये लाभ या उठायी गयी हानि के बारे में जानने के इच्छुक होते हैं।


Q. 170312
व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष की मदों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष की मदें:
1. प्रारंभिक रहतिया: यह लेखांकन वर्ष के प्रारंभ में माल का हस्तगत रहतिया होता है। यह माल का वह रहतिया होता है जिसे पिछले वर्ष से लिया जाता है तथा यह वर्ष के दौरान अपरिवर्तित रहता है तथा इसे तलपट में दिखाया जाता है।
2. शुद्ध क्रय: ऐसा माल जिसे पुनर्विक्रय के लिए खरीदा जाता है उसे व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। इसमें रोकड़ के साथ उधार क्रय को भी शामिल किया जाता है। जो माल विक्रेता को वापस किया जाता है उसे क्रय वापसी कहा जाता है तथा इसे कुल क्रय से घटा दिया जाता है।
3. मजदूरी: यह ऐसे श्रमिकों को चुकता पारिश्रमिक को संदर्भित करता है जो सीधे लोडिंग, उतराई और वस्तुओं के उत्पादन के लिए कारखाने में लगे हुए होते हैं इसे व्यापार खाते में डेबिट किया जाता है।
4. आवक भाड़ा: यह व्यय परिवहन व्ययों की मद है जो खरीदे गये माल को व्यवसाय स्थल तक लाने में किये जाते हैं।
5. ईंधन/पानी/बिजली/गैस: इन मदों को उत्पादन की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह व्ययों का एक हिस्सा होते हैं।
6. सामग्री को पैक करना और पैकिंग प्रभार: उत्पाद में इस्तेमाल पैकेजिंग सामग्री की लागत प्रत्यक्ष खर्च होते हैं क्योंकि यह ऐसे छोटे कंटेनरों को संदर्भित करता है जो बेची गई वस्तुओं का हिस्सा होते हैं। हालांकि, पैकेजिंग ऐसे कंटेनर को दर्शाता है जो माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं इसलिए इसे एक अप्रत्यक्ष व्यय के रूप में लाभ और हानि खाते में डेबिट किया जाता है।
7. वेतन: इसमें कारोबार चलाने के लिए प्रशासन, अधिनस्थों तथा गोदाम कर्मचारियों को
उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए चुकता वेतन को शामिल किया जाता है।
8. चुकता किराया: इसमें कार्यालय और गोदाम किराये, नगरपालिका दरों और करों, कारखाने किराये और करों को शामिल किया जाता है।
9. चुकता ब्याज: ऋण, बैंक ओवरड्राफ्ट, विनिमय के बिलों के नवीकरण, आदि पर ब्याज का भुगतान एक व्यय होता है।
10. चुकता कमीशन: कमीशन एजेंटों के माध्यम से किए गए व्यापार लेनदेन पर देय या चुकाया जाता है, यह व्यय की एक मद होती है तथा इसे आइटम है और इसे लाभ एवं हानि खाते में डेबिट किया जाता है।
11. मरम्मत: संयंत्र और मशीनरी, फर्नीचर, फिक्स्चर, फिटिंग आदि को चालू रखने के लिए उनसे संबंधित मरम्मत और छोटे नवीकरण/प्रतिस्थापन को इस शीर्षक के तहत शामिल किया जाता है।
12. विविध व्यय: बहुत से व्ययों को विभिन्न शीर्षकों के तहत वर्गीकृत किया जाता है परंतु कुछ छोटी राशि के व्ययों को एक साथ लिखा जाता है जिसे विविध व्यय कहा जाता है।


Q. 170313 लाभ-हानि खाते का प्रारुप दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

लाभ-हानि खाते का प्रारुप

ऋणी पक्ष (Dr. Side)

 

धनी पक्ष (Cr. Side)

 

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

 

INR

 

INR

सकल हानि आगे लाए (यदि कोई हो)

(To Gross Loss b/d) (if any)

......

सकल लाभ आगे लाए (यदि कोई हो)

(By Gross Profit b/d) (if any)

......

स्टेशनरी का (To Stationary)

......

ब्याज से (By Interest)

......

ब्याज का (To Interest)

......

कमीशन से (By Commission)

......

कमीशन का (To Commission)

......

किराया से (By Rent)

......

यात्रा व्यय का (To Travelling)

......

प्राप्त छूट से (By Discount received)

......

कार्यालय बिजली व्यय का (To Office Lighting)

......

विनियोगों पर ब्याज से (By Interest on Investment)

......

कार्यालय किराया का (To Office Rent)

......

सम्पत्तियों के विक्रय पर लाभ से

(By Profit on Sale of Assets)

......

छूट, कटौती या बट्टा का (To Discount)

......

प्राप्य बिलों के नवीनीकरण पर ब्याज से (By Interest on renewal of B/R)

......

मरम्मत का (To Repairs)

......

लेनदारों पर छूट के लिए आयोजन से

(By Provision for Discount on Creditors)

......

कार्यालय व्यय का (To Office Expenses)

......

अन्य स्त्रोत से आय से

(By Income from other Sources)

......

वेतन का (To Salaries)

......

विविध प्राप्तियों से (By Miscellaneous Receipts)

 

वेतन व मजदूरी का (To Salaries & Wages)

......

 

 

निर्गत वाहन व्यय का (To Carriage Outward)

......

 

 

किराया व कर का (To Rent & Taxes)

......

 

 

छपाई व लेखन-सामग्री व्यय का

(To Printing & Stationary)

......

 

 

बीमा व्यय का (To Insurance)

......

 

 

अप्राप्य ऋण का (To Bad Debts)

......

 

 

बैंक व्यय का (To Bank Charges)

......

 

 

व्यापारिक व्यय का (To Trade Expenses )

......

 

 

अंकेक्षण शुल्क का (To Audit Fees)

......

 

 

विक्रय पर ढुलाई का

(To Carriage on Sales)

......

 

 

कानूनी व्यय का

(To Legal Expenses )

......

 

 

दलाली व्यय का (To Brokerage)

......

 

 

दान या चन्दा का

(To Donation & Charity)

......

 

 

सम्पत्तियों पर मूल्य-ह्रास का

(To Depreciation on Assets)

......

 

 

डाक व तार व्यय का

(To Postage & Telegram)

......

 

 

टेलीफोन व्यय का

(To Telephone Charges)

......

 

 

सामान्य व्यय का

(To General Expenses)

......

 

 

विज्ञापन व्यय का (To Advertisement)

......

 

 

पैकिंग व्यय का (To Packing Charges)

......

 

 

वितरण व्यय का

(To Delivery Van Expenses)

......

 

 

अस्तबल व्यय का

(To Stable Expenses)

......

 

 

सम्पत्तियों के विक्रय से हानि का

(To Loss on Sale of Assets)

......

 

 

शुद्ध लाभ पूँजी खाते में अन्तरित

(To Net Profit transferred to Capital A/c)

......

 

 

 

......

 

......


Q. 170314 चिट्ठे तथा तलपट में क्या अंतर हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170315 व्यापारिक खाते का प्रारुप दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यापारिक खाते का प्रारुप

ऋणी पक्ष (Dr. Side)

 

धनी पक्ष (Cr. Side)

 

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

 

`

 

`

प्रारम्भिक रहतिया का

(To Opening Stock)

...........

विक्रय से (By Sales) ......

 

 

क्रय का (To Purchase) ......

घटाया- क्रय/बाह्य वापसी ......

Less : (Purchase Returns)

निजी प्रयोग के लिए ......

(Drawings of Goods)

दान में दिया गया माल ......

(Charity of Goods)

नमूना का निःशुल्क वितरण ......

(Distribution of Free Samples)

क्रय पर कटौती ......

(Discount on Purchases) _____

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

......

 

 

घटाया - विक्रय/आन्तरिक वापसी ......

Less : (Sales Returns)

बिक्री/वापसी पर भेजा गया माल ......

(Goods supplied on Sale/

Returns bases)

______

 

 

 

......

 

आन्तरिक गाड़ी भाड़ा या क्रय पर भाड़े का

(To Freight on Purchases)

......

 

अन्तिम रहतिया से

(By Closing Stock)

......

 

मजदूरी का

......

प्रेषण पर भेजा गया माल से

(लागत मूल्य पर)

(By Goods sent on Consignment)

(at Cost)

......

 

मजदूरी व वेतन का

......

 

अग्नि आदि से नष्ट माल से

(Loss of Goods by Fire)

......

 

आगत वाहन व्यय/

आन्तरिक ढुलाई व्यय खाते का

......

 

सकल हानि लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि)

 

कोयला, गैस व पानी का

......

 

 

 

कारखाने की बीजली या प्रकाश का

......

 

 

 

ईंधन का

......

 

 

 

प्रयोग किए गए स्टोर्स का

......

 

 

 

निर्माण या उत्पादन व्यय का

......

 

 

 

कोयला, गैस व ईँधन का

......

 

 

 

ढुलाई एवं भाड़ा का

......

 

 

 

कारखाना के अन्य विविध व्यय का

......

 

 

 

आयातकर का

......

 

 

 

चुंगी का

......

 

 

 

अधिकार शुल्क का

......

 

 

 

रेलगाड़ी भाड़ा का

......

 

 

 

सकल लाभ लाभ-हानि खाते में अन्तरित (अन्तर की राशि)

......

 

 

 

 

......

 

......

 


Q. 170316
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170317
वित्तीय विवरणों के उपयोगकर्ता कौन होते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वित्तीय विवरणों के उपयोगकर्ता हैं:
1. विनियोगकर्ता: - व्यापार के अंशधारक या स्वामी वित्तीय स्थिति, लाभ क्षमता और व्यापार के विकास की संभावनाओं को जानने में रूचि रखते हैं।
2. संभावित विनियोगकर्ता: - ये भी वित्तीय स्थिति, लाभ क्षमता और व्यापार के विकास के लिए इसकी संभावनाओं को जानने में रुचि रखते हैं। वे यह भी जानने में रुचि रखते है कि उनके निवेश कैसे सुरक्षित होंगे।
3. ऋणदाताओं: - ऋणपपत्रधारक, आपूर्तिकर्ता के ऋण की और पट्टाकार के जैसे व्यवसाय इकाई की दीर्घकालिक शोधन क्षमता स्थिति के साथ ही अल्पकालिक क्षमता को जानने में रुचि रखते हैं।
4. आपूर्तिकर्ता तथा व्यापार लेनदार: - यह व्यवसायों की शोधन क्षमता अर्थात ऋणों के देय होने पर उन्हें चुकाने की क्षमता जानने में रूची रखते हैं।
5. सरकार तथा उनकी ऐजेंसियाँ: - सरकार और उसकी एजेंसियां को उद्यम की गतिविधियों को विनियमित, कराधान नीति निर्धारण, राष्ट्रीय आय के आँकड़ों की जटिलता का निर्धारण करने आदि के लिए वित्तीय सूचनाओं की आवश्यकता होती है।
6. जनता: - उद्यम तरीकों से जनता को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, एक उद्यम की गतिविधियाँ काफी हद तक स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इसलिए, बड़े पैमाने पर जनता एक उद्यम की प्रगति जानने में दिलचस्पी रखती है जिसे वे वित्तीय विवरणों से समझ सकते हैं।
7. कर अधिकारी: - विशेषतौर पर, आयकर अधिकारी व्यवसाय के लाभों को जानने में रूचि रखते हैं जिससे वे उस पर आयकर दायित्व सौंप सके।
8. स्टाॅक बाजार: - यह एक ऐसा संस्थान होता है जो कम्पनियों के अंशों तथा ऋणपत्रों के क्रय तथा विक्रय की सुविधा प्रदान करता है। यह उन सदस्यों कोे कम्पनी के बारे में सूचना प्रदान करता है जो वित्तीय विवरणों में रूचि लेते हैं क्योंकि वे कम्पनियों के बारे में उपयोगी वित्तीय सूचना प्रदान करते हैं।
9. कर्मचारी तथा व्यापार संघ: - ये लाभांश के अधिकारी होते हैं जो लाभ पर निर्भर करता है: इसलिए ये व्यवसाय द्वारा कमाये गये लाभ या उठायी गयी हानि के बारे में जानने के इच्छुक होते हैं।


Q. 170318
व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष की मदों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष की मदें:
1. प्रारंभिक रहतिया: यह लेखांकन वर्ष के प्रारंभ में माल का हस्तगत रहतिया होता है। यह माल का वह रहतिया होता है जिसे पिछले वर्ष से लिया जाता है तथा यह वर्ष के दौरान अपरिवर्तित रहता है तथा इसे तलपट में दिखाया जाता है।
2. शुद्ध क्रय: ऐसा माल जिसे पुनर्विक्रय के लिए खरीदा जाता है उसे व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। इसमें रोकड़ के साथ उधार क्रय को भी शामिल किया जाता है। जो माल विक्रेता को वापस किया जाता है उसे क्रय वापसी कहा जाता है तथा इसे कुल क्रय से घटा दिया जाता है।
3. मजदूरी: यह ऐसे श्रमिकों को चुकता पारिश्रमिक को संदर्भित करता है जो सीधे लोडिंग, उतराई और वस्तुओं के उत्पादन के लिए कारखाने में लगे हुए होते हैं इसे व्यापार खाते में डेबिट किया जाता है।
4. आवक भाड़ा: यह व्यय परिवहन व्ययों की मद है जो खरीदे गये माल को व्यवसाय स्थल तक लाने में किये जाते हैं।
5. ईंधन/पानी/बिजली/गैस: इन मदों को उत्पादन की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह व्ययों का एक हिस्सा होते हैं।
6. सामग्री को पैक करना और पैकिंग प्रभार: उत्पाद में इस्तेमाल पैकेजिंग सामग्री की लागत प्रत्यक्ष खर्च होते हैं क्योंकि यह ऐसे छोटे कंटेनरों को संदर्भित करता है जो बेची गई वस्तुओं का हिस्सा होते हैं। हालांकि, पैकेजिंग ऐसे कंटेनर को दर्शाता है जो माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं इसलिए इसे एक अप्रत्यक्ष व्यय के रूप में लाभ और हानि खाते में डेबिट किया जाता है।
7. वेतन: इसमें कारोबार चलाने के लिए प्रशासन, अधिनस्थों तथा गोदाम कर्मचारियों को
उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए चुकता वेतन को शामिल किया जाता है।
8. चुकता किराया: इसमें कार्यालय और गोदाम किराये, नगरपालिका दरों और करों, कारखाने किराये और करों को शामिल किया जाता है।
9. चुकता ब्याज: ऋण, बैंक ओवरड्राफ्ट, विनिमय के बिलों के नवीकरण, आदि पर ब्याज का भुगतान एक व्यय होता है।
10. चुकता कमीशन: कमीशन एजेंटों के माध्यम से किए गए व्यापार लेनदेन पर देय या चुकाया जाता है, यह व्यय की एक मद होती है तथा इसे आइटम है और इसे लाभ एवं हानि खाते में डेबिट किया जाता है।
11. मरम्मत: संयंत्र और मशीनरी, फर्नीचर, फिक्स्चर, फिटिंग आदि को चालू रखने के लिए उनसे संबंधित मरम्मत और छोटे नवीकरण/प्रतिस्थापन को इस शीर्षक के तहत शामिल किया जाता है।
12. विविध व्यय: बहुत से व्ययों को विभिन्न शीर्षकों के तहत वर्गीकृत किया जाता है परंतु कुछ छोटी राशि के व्ययों को एक साथ लिखा जाता है जिसे विविध व्यय कहा जाता है।


Q. 170319 लाभ-हानि खाते का प्रारुप दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

लाभ-हानि खाते का प्रारुप

ऋणी पक्ष (Dr. Side)

 

धनी पक्ष (Cr. Side)

 

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

विवरण

(Particulars)

धनराशि

(Amount)

 

`

 

`

सकल हानि आगे लाए (यदि कोई हो)

(To Gross Loss b/d) (if any)

......

सकल लाभ आगे लाए (यदि कोई हो)

(By Gross Profit b/d) (if any)

......

स्टेशनरी का (To Stationary)

......

ब्याज से (By Interest)

......

ब्याज का (To Interest)

......

कमीशन से (By Commission)

......

कमीशन का (To Commission)

......

किराया से (By Rent)

......

यात्रा व्यय का (To Travelling)

......

प्राप्त छूट से (By Discount received)

......

कार्यालय बिजली व्यय का (To Office Lighting)

......

विनियोगों पर ब्याज से (By Interest on Investment)

......

कार्यालय किराया का (To Office Rent)

......

सम्पत्तियों के विक्रय पर लाभ से

(By Profit on Sale of Assets)

......

छूट, कटौती या बट्टा का (To Discount)

......

प्राप्य बिलों के नवीनीकरण पर ब्याज से (By Interest on renewal of B/R)

......

मरम्मत का (To Repairs)

......

लेनदारों पर छूट के लिए आयोजन से

(By Provision for Discount on Creditors)

......

कार्यालय व्यय का (To Office Expenses)

......

अन्य स्त्रोत से आय से

(By Income from other Sources)

......

वेतन का (To Salaries)

......

विविध प्राप्तियों से (By Miscellaneous Receipts)

 

वेतन व मजदूरी का (To Salaries & Wages)

......

 

 

निर्गत वाहन व्यय का (To Carriage Outward)

......

 

 

किराया व कर का (To Rent & Taxes)

......

 

 

छपाई व लेखन-सामग्री व्यय का

(To Printing & Stationary)

......

 

 

बीमा व्यय का (To Insurance)

......

 

 

अप्राप्य ऋण का (To Bad Debts)

......

 

 

बैंक व्यय का (To Bank Charges)

......

 

 

व्यापारिक व्यय का (To Trade Expenses )

......

 

 

अंकेक्षण शुल्क का (To Audit Fees)

......

 

 

विक्रय पर ढुलाई का

(To Carriage on Sales)

......

 

 

कानूनी व्यय का

(To Legal Expenses )

......

 

 

दलाली व्यय का (To Brokerage)

......

 

 

दान या चन्दा का

(To Donation & Charity)

......

 

 

सम्पत्तियों पर मूल्य-ह्रास का

(To Depreciation on Assets)

......

 

 

डाक व तार व्यय का

(To Postage & Telegram)

......

 

 

टेलीफोन व्यय का

(To Telephone Charges)

......

 

 

सामान्य व्यय का

(To General Expenses)

......

 

 

विज्ञापन व्यय का (To Advertisement)

......

 

 

पैकिंग व्यय का (To Packing Charges)

......

 

 

वितरण व्यय का

(To Delivery Van Expenses)

......

 

 

अस्तबल व्यय का

(To Stable Expenses)

......

 

 

वाणिज्य कर का

(To Commercial Tax)

......

 

 

मनोरंजन व्यय का

(To Entertainment Expenses)

......

 

 

यात्रा व्यय का

(To Conveyance Expenses)

......

 

 

सम्पत्तियों के विक्रय से हानि का

(To Loss on Sale of Assets)

......

 

 

शुद्ध लाभ पूँजी खाते में अन्तरित

(To Net Profit transferred to Capital A/c)

......

 

 

 

......

 

......


Q. 170320 आप निम्नलिखित के समय जीएसटी की प्रविष्टियाँ किस प्रकार करेंगे? क. क्रय, ख. विक्रय, ग. स्वामी द्वारा लिए गए माल और घ. दान के रूप में दिए गए माल
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

क. क्रय:

भुगतान जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) अर्थात् माल अथवा अन्य मदों पर इनपुट जीएसटी को इनपुट सीजीएसटी खाते, इनपुट एसजीएसटी खाते, इनपुट आईजीएसटी खाते को डेबिट किया जाता जाता है

ख. विक्रय:

संग्रह की गई जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी अथवा आईजीएसटी) अर्थात् माल के विक्रय या अन्य मदों पर आउटपुट जीएसटी, आउटपुट सीजीएसटी खाते, आउटपुट एसजीएसटी खाते और आउटपुट आईजीएसटी खातों को क्रेडिट किया जाता जाता है

ग. स्वामी द्वारा लिए गए माल

व्यक्तिगत उपयोग के लिए स्वामी द्वारा लिए गए माल बिक्री नहीं आहरण होते हैंइसलिए, उसका आहरण खाता कुल राशि अर्थात् क्रय लागत और इन वस्तुओं पर अदा की गई जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी या आईजीएसटी) से डेबिट किया जाता है क्रय खाता और इनपुट जीएसटी खाता क्रेडिट किया जाता जाता है रोजनामचा प्रविष्टि निम्न है:

आहरण खाता

नाम

क्रय खाते से

[माल की लागत के साथ]

इनपुट सीजीएसटी खाते से

[लिए गए माल पर सीजीएसटी की राशि के साथ]

इनपुट एसजीएसटी खाते से या

[लिए गए माल पर एसजीएसटी की राशि के साथ]

इनपुट आईजीएसटी खाते से

[लिए गए माल पर आईजीएसटी की राशि के साथ]

 

घ. दान के रूप में दिए गए माल

इसी तरह से, दान के रूप में दिया गया माल बिक्री नहीं चंदा होता है। इसलिए चंदा या दान खाता डेबिट किया जाता और क्रय खाता इनपुट जीएसटी (सीजीएसटी और एसजीएसटी या आईजीएसटी) खाता क्रेडिट किया जाता जाता है


Q. 170321 निम्नलिखित तलपट से 31 दिसंबर, 2016 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाता तथा इसी तिथि को चिट्ठा भी तैयार कीजिए।
Debit balance Credit balance
Sundry debtors 3,500 Capital 25,000
Stock on 1st Jan 5,000 Sundry Creditor 9,000
Cash in hand 5,600 Sales 17,000
Wages 3,000 Output CGST 20,000
Bad debts 500 Output SGST 20,000
Furniture and fixtures 1,500 Output IGST 26,000
Depreciation 1,500
Salaries 2,200
Purchases 12,500
Plant and machinery 15,700
Input CGST 24,000
Input SGST 24,000
Input IGST 18,000
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

31 दिसंबर 2016 के लिए व्यापारिक खाता और लाभ एवं हानि खाता

 

Particulars

INR

Particulars

INR

 

Opening stock

5,000

Sales

17,000

Purchases

12,500

Closing stock

10,000

Wages

3,000

 

27,000

Gross profit

6,500

 

 

 

27,000

 

 

Bad debts

500

Gross profit

6,500

Depreciation

1,500

 

 

Salaries

2,200

 

 

Net profit

2,300

 

 

 

6,500

 

6,500

 

जीएसटी का समायोजन

Account title

Input INR

Output INR

Balance INR

IGST

18,000

26,000

8,000 (Cr.)

CGST

24,000

20,000

4,000 (Dr.)

SGST

24,000

20,000

4,000 (Dr.)

 

इनपुट जीएसटी (4,000) रुपए और आउटपुट जीएसटी (4,000) रुपए को आईजीएसटी (8,000) रुपए से समायोजित करते हैं

अतः राशि शून्य हो जाती है।


Q. 170322 एक लेखांकन वर्ष के व्यय जो लेखांकन वर्ष के अंत में अचुकता रह जाते हैं, कहलाते हैं।


A. पूँजीगत व्यय।

B. आयगत व्यय।

C. अदत्त व्यय।

D. पूर्वदत्त व्यय।

Right Answer is: C

SOLUTION

देय परंतु अचुकता व्यय अदत्त व्यय होते हैं।


Q. 170323 यह एक गैर-चालू सम्पत्ति है:


A. रोकड़।

B. प्राप्य विपत्र।

C. पेटेंट।

D. स्टॉक।

Right Answer is: C

SOLUTION

पेटेंट तथा स्थायी सम्पत्तियाँ।


Q. 170324 अप्राप्त माल तथा सेवा के लिए एक व्यक्ति को चुकता राशि होती है:


A. पूर्वदत्त व्यय।

B. अग्रिम प्राप्त आय।

C. उपार्जित आय।

D. अदत्त व्यय।

Right Answer is: A

SOLUTION

पूर्वदत्त व्यय अर्थात ऐसे व्यय जो चालू लेखांकन वर्ष के दौरान चुकाये जाते हैं परंतु इनका लाभ आगामी वर्ष में प्राप्त होगा।


Q. 170325 स्थायी सम्पत्तियों के विक्रय पर हानि को दिखाया जाता है:


A. चिट्ठे के दायित्व पक्ष में।

B. चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में।

C. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।

D. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।

Right Answer is: D

SOLUTION

हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।


Q. 170326 जावक भाड़े को दिखाया जाता है:


A. व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में।

B. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।

C. व्यापारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में।

D. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।

Right Answer is: B

SOLUTION

जावक भाड़े को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है क्योंकि ये व्यय माल को कारखाने से बाज़ार में लाने के लिए किया जाता है, हालांकि आवक भाड़े को व्यापारिक खाते में डेबिट किया जाता है।


Q. 170327 जावक वापसी अर्थात


A. क्रय वापसी।

B. विक्रय वापसी।

C. आवक भाड़ा।

D. जावक भाड़ा।

Right Answer is: A

SOLUTION

क्रय वापसी को जावक वापसी भी कहा जाता है।


Q. 170328 ऐसे व्यय जो भुगतान के लिए देय हो, परंतु अभी तक चुकाये नहीं गये हो। कहलाते हैं।


A. पूर्वदत्त व्यय।

B. नाममात्र के व्यय।

C. व्यय।

D. अदत्त व्यय।

Right Answer is: D

SOLUTION

अदत्त व्यय ऐसे व्यय होते हैं जो देय होते हैं तथा जिनका लाभ प्राप्त किया जा चुका है परंतु चुकाया नहीं गया।


Q. 170329 ऐसी आय जो लेखांकन वर्ष के दौरान देय हो गई परंतु व्यवसाय द्वारा प्राप्त नहीं की गई।


A. विनियोग आय।

B. अग्रिम में प्राप्त आय।

C. उपार्जित आय।

D. प्राप्त कमीशन।

Right Answer is: C

SOLUTION

उपार्जित आय ऐसी आय होती है जिसे चालू वर्ष के दौरान कमा लिया जाता है परंतु चालू वर्ष के अंत तक प्राप्त नहीं किया जाता है, जैसे - प्रतिभूतियों पर ब्याज, कमीशन, किराया आदि।


Q. 170330 एक माह का किराया अभी चुकाया जाना है, समायोजन प्रविष्टि की जायेगी।


A. अदत्त किराया खाते को डेबिट तथा किराया खाते को क्रेडिट।

B. किराया खाते को डेबिट तथा रोकड़ खाते को क्रेडिट।

C. रोकड़ खाते को डेबिट तथा किराया खाते को क्रेडिट।

D. किराया खाते को डेबिट तथा अदत्त किराया खाते को क्रेडिट।

Right Answer is: D

SOLUTION

किराया बकाया है अतः इसे डेबिट किया जाता है। यह एक दायित्व बन जाता है इसलिए, अदत्त किराया खाते को क्रेडिट किया जाता है।


Q. 170331 पूँजीगत प्राप्तियों को पहचानिये।


A. दीर्घकालीन ऋण के रूप में एक कम्पनी द्वारा धन प्राप्ति।

B. माल का विक्रय।

C. लाभों की हानि के लिए क्षतिपूर्ति।

D. सेवाओं के विक्रय से प्राप्त राशि।

Right Answer is: A

SOLUTION

एक कम्पनी द्वारा एक दीर्घकालीन ऋण के रूप में राशि प्राप्त करना कम्पनी का साधारण कार्य नहीं होता है इसलिए, इसे पूँजीगत प्राप्ति के रूप में व्यवहारित किया जाता है।


Q. 170332 आय का ऐसा हिस्सा जो आगामी लेखांकन वर्ष से सम्बंधित होता है कहा जाता है।


A. अग्रिम में प्राप्त आय।

B. कमायी गई आय।

C. उपार्जित आय।

D. अदत्त आय।

Right Answer is: A

SOLUTION

आगामी वर्ष से सम्बंधित आय का हिस्से को अग्रिम प्राप्त आय तथा अग्रिम आय के रूप में जाना जाता है।


Q. 170333 उपार्जित आय की राशि को उससे सम्बंधित ----- में जोड़ा जायेगा।


A. आय।

B. व्यय।

C. सम्पत्तियाँ।

D. दायित्व।

Right Answer is: A

SOLUTION

ऐसी आय को लाभ एवं हानि खाते में सम्बंधित आय में जोड़ते हुए दिखाया जायेगा तथा उपार्जित आय के नयी खाते को चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाया जायेगा।


Q. 170334 व्यापारिक तथा लाभ एवं हानि खाते को तैयार करते समय ऐसी मदें जिनका आमतौर पर समायोजन आवश्यक होता है।


A. केवल अंतिम खाता।

B. केवल व्यय।

C. केवल आय।

D. सभी मदें यदि इनका समायोजन आवश्यक हो।

Right Answer is: D

SOLUTION

वित्तीय विवरण तैयार करते समय सभी मदों को समायोजित किया जाता है।


Q. 170335 पूर्वदत्त किराया होता है।


A. सम्पत्ति।

B. दायित्व।

C. खर्च।

D. व्यय।

Right Answer is: A

SOLUTION

पूर्वदत्त व्यय एक सम्पत्ति होती है क्योंकि इसका लाभ आगामी लेखांकन वर्ष में प्राप्त होगा।


Q. 170336 कुल इनपुट सीजीएसटी INR 84,600
कुल इनपुट एसजीएसटी INR 84,600
कुल आउटपुट सीजीएसटी INR 77,400
कुल आउटपुट एसजीएसटी INR77,400 इनपुट कर जमा की राशि:


A. INR 21,600 होगी

B. INR 14,400 होगी

C. INR 7,200 होगी

D. शून्य होगी

Right Answer is: D

SOLUTION

चूँकि इनपुट जीएसटी, आउटपुट जीएसटी से अधिक है, सरकार को भुगतान किए जाने के लिए कोई कर-देयता नहीं है। इसे आगामी वर्ष में हस्तांतरित किया जाएगा और समायोजित किया जाएगा।
इनपुट कर जमा = इनपुट सीजीएसटी – आउटपुट आईजीएसटी = INR 84,600 - INR 77,400 = INR 7,200
इनपुट एसजीएसटी – आउटपुट एसजीएसटी =INR 84,600-INR 77,400 = INR 7,200
INR7,200 + INR7,200 = INR14,400 का इनपुट कर जमा आगामी वर्ष में हस्तांतरित और समायोजित किया जाएगा।


Q. 170337 निम्नलिखित तलपट 31 मार्च, 2018 का है:
Particulars Dr. INR Cr. INR
Input CGST A/c 5,000
Input SGST A/c 5,000
Input IGST A/c 7,500
Output CGST A/c 4,000
Output SGST A/c 4,000
Output IGST A/c 6,000

चिट्ठे पर दर्शायी गई राशि :


A. INR17,500 होगी

B. INR16,000 होगी

C. INR3,500 होगी

D. INR1,500 होगी

Right Answer is: C

SOLUTION

31 मार्च, 2018 को चिट्ठा
Liabilities INR Assets INR
    Input CGST 1,000
    Input SGST 1,000
    Input IGST 1,500
       
  टिप्पणी: जीएसटी का समायोजन
  Input INR Output INR Balance INR (Carried Forward)
IGST 7,500 6,000 1,500(Dr.)
CGST 5,000 4,000 1,000(Dr.)
SGST 5,000 4,000 1,000 (Dr.)
 


Q. 170338
तलपट (केवल संबंधित भाग)
Dr. (INR) Cr.(INR)
Input CGST 5,000
Input SGST 5,000
Output IGST 10,000
चिट्ठे में दर्शायी जाने वाली जीएसटी राशि:


A. शून्य होगी।

B. INR5,000 होगी

C. INR10,000 होगी

D. INR15,000 होगी

Right Answer is: A

SOLUTION

इनपुट सीजीएसटी (INR5,000) और इनपुट एसजीएसटी (INR5,000), आउटपुट आईजीएसटी (INR10,000) से समायोजित किए जाते हैं। इसलिए चिट्ठे में दर्शायी जाने वाली जीएसटी की राशि शून्य होगी।


Q. 170339 INR 1,500 की कीमत के माल का उपयोग स्वामी द्वारा व्यक्तिगत उपयोग के लिए किया गया। ये माल 9% सीजीएसटी और 9% एसजीएसटी का भुगतान करके खरीदे गए थे। इनपुट सीजीएसटी खाता INR135 से क्रेडिट किया गया। आहरण खाता


A. INR 1,770 से क्रेडिट किया जाएगा

B. INR 1,770 से डेबिट किया जाएगा

C. INR 1,365 से क्रेडिट किया जाएगा

D. INR 1,365 से डेबिट किया जाएगा

Right Answer is: B

SOLUTION

व्याख्या:

Particulars   L.F. Dr. INR Cr. INR
Drawings A/c Dr.   1,770  
To Purchases A/c     1,500
To Input CGST A/c     135
To Input SGST A/c     135


Q. 170340 शुद्ध लाभ =


A. सकल लाभ - क्रय + प्रत्यक्ष व्यय।

B. विक्रय - क्रय - प्रत्यक्ष व्यय।

C. सकल लाभ + अन्य आय - अप्रत्यक्ष व्यय।

D. सकल लाभ - सभी व्यय।

Right Answer is: C

SOLUTION

शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अन्य आय - अप्रत्यक्ष व्यय।


Q. 170341 वर्ष के दौरान 10 माह के लिए चुकता वेतन INR10,000 है। वर्ष के अंत में, अदत्त वेतन होगा।


A. 1,000.

B. 100.

C. 2,000.

D. 200.

Right Answer is: C

SOLUTION

दो माह का वेतन अदत्त वेतन होगा, जो इस प्रकार ज्ञात किया जाता है: 10,000 x 2/10 = INR 2,000


Q. 170342 आग से INR20,000 के स्टाॅक की हानि हुई। बिमा कम्पनी से INR18,000 का दावा प्राप्त हुआ। इसे वित्तीय विवरणों में निम्न प्रकार व्यवहारित किया जायेगा।


A. आग से INR20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा INR2,000 को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा।

B. आग से INR18,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा INR2,000 को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा।

C. आग से INR20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा INR18,000 को लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा।

D. आग से INR20,000 की हुई हानि को व्यपारिक खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जायेगा तथा INR18,000 को लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाया जायेगा।

Right Answer is: A

SOLUTION

व्यापारिक खाते को स्टॉक की वास्तविक हानि की राशि से क्रेडिट किया जायेगा जबकि लाभ एवं हानि खाते को INR2,000 INR(20,000 - 18,000) से डेबिट किया जायेगा।


Q. 170343 पुस्तकों में मशीनरी खाता INR20,000 का शेष तथा मूल्यहृास के लिए आया्रेजन खाता INR5,000 का शेष प्रदर्शित करता है। चालू वर्ष का मूल्यहृास INR2,000 हैं चिट्ठे में दिखायी जाने वाली मशीनरी की राशि होगी।


A. INR22,000

B. INR18,000

C. INR20,000

D. INR23,000

Right Answer is: C

SOLUTION

उपरोक्त प्रश्न में मूल्यहृास के लिए आयोजन खाते को अलग से बनाया गया है। इस स्थिति में, मशीनरी खाते को वास्तविक लागत से ही दिखाया जायेगा। मूल्यहृास के लिए आयोजन खाते को चिट्ठे के दायित्व पक्ष में अलग से दिखाया जाता है। मूल्यहृास के लिए आयोजन को सम्पत्ति से घटा के दिखाया जा सकता है इस स्थिति में, मशीनरी को चिट्ठे पर INR15,000 से दिखाया जाएगा।


Q. 170344 देनदारों का शेष INR10,000 हैं। संदिग्ध ऋणों के लिए 10% आयोजन बनाया गया। चिट्ठे में दिखायी जाने वाली राशि क्या होगी?


A. INR10,000

B. INR1,000

C. INR9,000

D. INR11,000

Right Answer is: C

SOLUTION

देनदारों को चिट्ठे में आयोजन की राशि घटाने के पश्चात् दिखाया जायेगा।


Q. 170345 देनदारों का शेष INR20,000 हैं। पुस्तकों में पुराना आयोजन INR1,500 का है। प्रबंधन ने डूबत एवं संदिग्ध ऋणों पर आयोजन 5% तथा देनदारों पर बट्टे के लिए 10% आयोजन रखने का निश्चय किया। पुस्तकों में दिखायी जाने वाली देनदारों की राशि होगी।


A. INR17,100

B. INR20,000

C. INR19,000

D. INR17,000

Right Answer is: A

SOLUTION

देनदरों को INR1,000 का नया डूबत तथा संदिग्ध ऋणों पर आयोजन तथा INR1,900 का देनदारों पर बट्टा आयोजन घटाने के पश्चात दिखाया जायेगा।


Q. 170346 देनदारों का शेष INR20,000 हैं। पुस्तकों में पुराना आयोजन INR1,800 का है। प्रबंधन ने डूबत एवं संदिग्ध ऋणों पर आयोजन 10% तथा देनदारों पर बट्टे के लिए 5% आयोजन रखने का निश्चय किया। पुस्तकों में दिखायी जाने वाली देनदारों पर बट्टे के लिए आयोजन की राशि होगी।


A. INR1,000

B. INR900

C. INR910

D. INR2,000

Right Answer is: B

SOLUTION

देनदारों पर बट्टे के लिए आयोजन की राशि की गणना देनदारों पर नया आयोजन घटाने के पश्चात की जायेगी।


Q. 170347 एक लेखांकन वर्ष के व्यय जो लेखांकन वर्ष के अंत में अचुकता रह जाते हैं, कहलाते हैं।


A. पूँजीगत व्यय।

B. आयगत व्यय।

C. अदत्त व्यय।

D. पूर्वदत्त व्यय।

Right Answer is: C

SOLUTION

देय परंतु अचुकता व्यय अदत्त व्यय होते हैं।


Q. 170348 यह एक गैर-चालू सम्पत्ति है:


A. रोकड़।

B. प्राप्य विपत्र।

C. पेटेंट।

D. स्टॉक।

Right Answer is: C

SOLUTION

पेटेंट तथा स्थायी सम्पत्तियाँ।


Q. 170349 अप्राप्त माल तथा सेवा के लिए एक व्यक्ति को चुकता राशि होती है:


A. पूर्वदत्त व्यय।

B. अग्रिम प्राप्त आय।

C. उपार्जित आय।

D. अदत्त व्यय।

Right Answer is: A

SOLUTION

पूर्वदत्त व्यय अर्थात ऐसे व्यय जो चालू लेखांकन वर्ष के दौरान चुकाये जाते हैं परंतु इनका लाभ आगामी वर्ष में प्राप्त होगा।


Q. 170350 स्थायी सम्पत्तियों के विक्रय पर हानि को दिखाया जाता है:


A. चिट्ठे के दायित्व पक्ष में।

B. चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में।

C. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।

D. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।

Right Answer is: D

SOLUTION

हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है। हानियों तथा व्ययों को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।


Q. 170351 जावक भाड़े को दिखाया जाता है:


A. व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में।

B. लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में।

C. व्यापारिक खाते के क्रेडिट पक्ष में।

D. लाभ एवं हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में।

Right Answer is: B

SOLUTION

जावक भाड़े को लाभ एवं हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है क्योंकि ये व्यय माल को कारखाने से बाज़ार में लाने के लिए किया जाता है, हालांकि आवक भाड़े को व्यापारिक खाते में डेबिट किया जाता है।


Q. 170352 जावक वापसी अर्थात


A. क्रय वापसी।

B. विक्रय वापसी।

C. आवक भाड़ा।

D. जावक भाड़ा।

Right Answer is: A

SOLUTION

क्रय वापसी को जावक वापसी भी कहा जाता है।


Q. 170353 ऐसे व्यय जो भुगतान के लिए देय हो, परंतु अभी तक चुकाये नहीं गये हो। कहलाते हैं।


A. पूर्वदत्त व्यय।

B. नाममात्र के व्यय।

C. व्यय।

D. अदत्त व्यय।

Right Answer is: D

SOLUTION

अदत्त व्यय ऐसे व्यय होते हैं जो देय होते हैं तथा जिनका लाभ प्राप्त किया जा चुका है परंतु चुकाया नहीं गया।


Q. 170354 वर्ष के लिए चुकता किराया 12,000 रु (तलपट में दिया गया) है। वर्ष के अंत में समायोजनों में 3,000 का अदत्त किराया दिखाया गया है। पुस्तकों में समायोजन प्रविष्टियाँ दीजिए तथा अंतिम खातों में इसके उपचार को दर्शाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Journal

Particulars

L.F.

Dr. Rs.

Cr. Rs.

Rent A/c                       Dr.

 

3,000

 

   To Outstanding Rent A/c

 

 

3,000

(Outstanding rent provided)

 

 

 

 

Dr.

Profit and Loss Account

Cr.

Particulars

Rs.

Particulars

Rs.

To Rent

12,000

 

 

 

Add: Outstanding

3,000

15,000

 

 

 

 

 

 

             

 

Balance Sheet

Liabilities

Rs.

Assets

Rs.

Outstanding Rent

3,000

 

 

 

 

 

 


Q. 170355 उपार्जित आय एवं अनुपार्जित आय में अन्तर बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

उपार्जित आय एवं अनुपार्जित आय में अन्तर निम्न है-

क्र0 स0

अन्तर का आधार

उपार्जित आय

अनुपार्जित आय

1.

आशय

यह वह आय होती है जो व्यापारी द्वारा अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक कमाई जा चुकी होती है।

यह वह आय होती है जो व्यापारी द्वारा अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक कमाई गई नहीं होती है।

2.

प्राप्ति

यह चालू वर्ष में प्राप्त नहीं हुई होती है।

यह चालु वर्ष में ही प्राप्त हो गई होती है।

3.

लाभ-हानि खाते में लिखने का ढंग

इसे लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित आय में जोड़कर दिखाया जाता है।

इसे लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित आय में से घटाकर दिखाया जाता है।

4.

आर्थिक चिट्ठे में लिखने का विधि

इसे आर्थिक चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।

इसे आर्थिक चिट्ठे में दायित्व पक्ष की ओर दिखाया जाता है।


Q. 170356 अदत्त व्यय एवं पूर्वदत्त व्यय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अदत्त व्यय एवं पूर्वदत्त व्यय में अन्तर निम्न है-

क्र0 स0

अन्तर का आधार

अदत्त व्यय

पूर्वदत्त व्यय

1.

आशय

ये वे व्यय होते हैं जिनका अन्तिम खाते बनाने की तिथि तक भुगतान नहीं किया गया होता है।

ये वे व्यय होते हैं जिनका अन्तिम खाते बनाने की तिथी तक भुगतान कर दिया गया होता है।

2.

वित्तीय वर्ष से सम्बन्ध

ये चालू व्यापारिक वर्ष से सम्बन्धित होते हैं।

ये आगामी वर्ष से सम्बन्धित होते हैं।

3.

लेखाविधि

इनको व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित व्यय की मद में जोड़कर दिखाया जाता है।

इनको व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में सम्बन्धित व्यय की मद में से घटाकर दिखाया जाता है।

4.

आर्थिक चिट्ठे में लिखने का ढंग

इनको आर्थिक चिट्ठे में दायित्व पक्ष की ओर  दिखाया जाता है।

इनको आर्थिक चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।

 

 


Q. 170357 अन्तिम खातों में समायोजनाओं के सम्बन्ध में दो खातों में लेखे किए जाने के क्या कारण हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समायोजनाओं के अन्तर्गत किए जाने वाले लेखे अन्तिम खाते तैयार किए जाने के समय तक या तो बिल्कुल नहीं लिखे जाते या कुछ का लेखा ही उस व्यापारिक काल में प्रयोग आने वाली बहियों में नही होता। अतः इनका दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार दो स्थानों पर लेखा किया जाता है- एक, व्यापार तथा लाभ-हानि खाते के एक पक्ष में दूसरा, आर्थिक चिट्ठे के विपरीत पक्ष मे, जबकि तलपट के अन्तर्गत जिन लेखों का समावेश हो गया होता है उनका लेखा अन्तिम खाते बनाते समय केवल एक ही खाते में होता है- व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में अथवा आर्थिक चिट्ठे में। जैसे यदि अन्तिम रहतिया एवं मूल्य ह्रास की राशि तलपट के अन्दर दी गई होती है तो इनको केवल चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष में लिखा जाता है। ह्रास को सम्पत्ति में से घटाकर दिखाया जाता है।


Q. 170358
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170359 वर्ष के लिए चुकता किराया 12,000 रु (तलपट में दिया गया) है। वर्ष के अंत में समायोजनों में 3,000 का अदत्त किराया दिखाया गया है। पुस्तकों में समायोजन प्रविष्टियाँ दीजिए तथा अंतिम खातों में इसके उपचार को दर्शाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Journal

Particulars

L.F.

Dr. Rs.

Cr. Rs.

Rent A/c                       Dr.

 

3,000

 

   To Outstanding Rent A/c

 

 

3,000

(Outstanding rent provided)

 

 

 

 

Dr.

Profit and Loss Account

Cr.

Particulars

Rs.

Particulars

Rs.

To Rent

12,000

 

 

 

Add: Outstanding

3,000

15,000

 

 

 

 

 

 

             

 

Balance Sheet

Liabilities

Rs.

Assets

Rs.

Outstanding Rent

3,000

 

 

 

 

 

 


Q. 170360
कारखाना प्रबंधक को महाप्रबंधक का कमीशन चार्ज करने के पश्चात् प्राप्त शुद्ध लाभ पर 5% कमीशन चुकाया गया तथा महाप्रबंधक को कारखाना प्रबंधक का कमीशन चार्ज करने के पश्चात् प्राप्त शुद्ध लाभ पर 10% कमीशन चुकाया गया। यदि ये दो कमीशन चार्ज करने से पूर्व लाभ 8,000 रु थे, तो कारखाना प्रबंधक तथा महा प्रबंधक को देय कमीशन की राशि की गणना कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170361
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION



Q. 170362
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION



Q. 170363 1. देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना, से क्या तात्पर्य है 2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट से क्या तात्पर्य है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1.   देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना:

व्यापारी शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने देनदारों को यह सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे एस निश्चित समय के अन्दर धनराशि का पूर्ण भुगतान कर देंगे तो उन्हें एक निश्चित प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। इसलिए व्यापारी अगले वर्ष में छूट देने के लिए, चालू वर्ष में ही देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान कर लेता है।

नियम – जर्नल में लाभ-हानि खाता ऋणी तथा देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान खाता धनी किया जाता है। यदि देनदारों पर अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान एवं छूट के लिए प्रावधान दोनों ही राशि निकालती हों, तो पहले देनदारों में से अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान ज्ञात करके घटा दी जाएगी, फिर शेष बचे देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान की राशि ज्ञात की जाएगी। यदि वर्ष में देनदारों को कोई छूट दी जाती है तो उसे पुरानी छुट के लिए प्रावधान में से समायोजित किया जाएगा। इस प्रावधान की राशि को लाभ-हानि खाते के ऋणी पक्ष की ओर लिखते हैं तथा आर्थिक चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में देनदारों में से घटाकर दिखाया जाता है।

2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट हो जाना: 

कभी-कभी व्यापारी के गोदाम या दुकान में असाधारण कारणों जैसे – अग्नि द्वारा या किसी अन्य दुर्घटना के कारण रखा हुआ माल या कोई सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। इस दशा में यदि माल का बीमा कराया गया होता है तो बीमा कम्पनी इसकी पूर्णतया या आंशिक रुप से क्षतिपूर्ति स्वीकार कर लेती है।

नियम – बीमा कराए जाने की दशा में जर्नल में बीमा दावा खाता ऋणी तथा व्यापार या सम्बन्धित सम्पत्ति खाता धनी किया जाता है। यदि दावे की राशि वास्तविक हानि से कम होती है तो अन्तर की राशि से लाभ-हानि खाता ऋणी किया जाता है तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।

यदि माल का बीमा नहीं कराया गया है, तब जर्नल में अग्नि द्वारा हानि खाता ऋणी तथा क्रय या व्यापार खाता धनी किया जाता है। बाद में यह व्यापार की वास्तविक हानि होने के कारण लाभ-हानि खाता ऋणी तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।

बीमा कम्पनी से दावे की धनराशि प्राप्त होने पर बैंक खाता ऋणी तथा बीमा कम्पनी का खाता धनी कियी जाता है।

बीमा के दावे की धनराशि को जिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।


Q. 170364 वित्तीय विवरण के तीन समायोजनों का उल्लेख करें। 1. असाधारण हानियाँ 2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना 3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समायोजन

व्यापार खाता

लाभ-हानि खाता

स्थिति-विवरण (चिट्ठा)

1. असाधारण हानियाँ

 

 

 

 (क) माल की हानि

व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। (कुल हानि की राशि)

लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दर्शाएँ- बीमा कम्पनी से प्राप्त न हुई राशि।

बीमा कम्पनी द्वारा स्वीकृत दावे की राशि को देनदार के रुप में चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाइए।

(ख) सम्पत्ति की हानि

-

लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाइए।

सम्बन्धित सम्पत्ति में हानि की राशि घटाइए।

2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना

क्रय में से इस माल का मूल्य घटाइए।

-

इस माल का मूल्य आहरण मानते हुए पूँजी में से घटाइए।

3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण

इस माल का मूल्य क्रेडिट पक्ष में दिखाइए।

लाभ-हानि खाते में विज्ञापन व्यय के रुप में डेबिट पक्ष में दर्शाइए।

-


Q. 170365
कारखाना प्रबंधक को महाप्रबंधक का कमीशन चार्ज करने के पश्चात् प्राप्त शुद्ध लाभ पर 5% कमीशन चुकाया गया तथा महाप्रबंधक को कारखाना प्रबंधक का कमीशन चार्ज करने के पश्चात् प्राप्त शुद्ध लाभ पर 10% कमीशन चुकाया गया। यदि ये दो कमीशन चार्ज करने से पूर्व लाभ 8,000 रु थे, तो कारखाना प्रबंधक तथा महा प्रबंधक को देय कमीशन की राशि की गणना कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 170366
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION



Q. 170367
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION



Q. 170368 1. देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना, से क्या तात्पर्य है 2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट से क्या तात्पर्य है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1.   देनदारों पर छूट या बट्टा के लिए प्रावधान या आयोजन करना:

व्यापारी शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने देनदारों को यह सुविधा प्रदान करता है कि यदि वे एस निश्चित समय के अन्दर धनराशि का पूर्ण भुगतान कर देंगे तो उन्हें एक निश्चित प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। इसलिए व्यापारी अगले वर्ष में छूट देने के लिए, चालू वर्ष में ही देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान कर लेता है।

नियम – जर्नल में लाभ-हानि खाता ऋणी तथा देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान खाता धनी किया जाता है। यदि देनदारों पर अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान एवं छूट के लिए प्रावधान दोनों ही राशि निकालती हों, तो पहले देनदारों में से अशोध्य ऋणों के लिए प्रावधान ज्ञात करके घटा दी जाएगी, फिर शेष बचे देनदारों पर छूट के लिए प्रावधान की राशि ज्ञात की जाएगी। यदि वर्ष में देनदारों को कोई छूट दी जाती है तो उसे पुरानी छुट के लिए प्रावधान में से समायोजित किया जाएगा। इस प्रावधान की राशि को लाभ-हानि खाते के ऋणी पक्ष की ओर लिखते हैं तथा आर्थिक चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में देनदारों में से घटाकर दिखाया जाता है।

2. समायोजनाओं में माल, रहतिया या किसी सम्पत्ति का अग्नि या दुर्घटना द्वारा नष्ट हो जाना: 

कभी-कभी व्यापारी के गोदाम या दुकान में असाधारण कारणों जैसे – अग्नि द्वारा या किसी अन्य दुर्घटना के कारण रखा हुआ माल या कोई सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। इस दशा में यदि माल का बीमा कराया गया होता है तो बीमा कम्पनी इसकी पूर्णतया या आंशिक रुप से क्षतिपूर्ति स्वीकार कर लेती है।

नियम – बीमा कराए जाने की दशा में जर्नल में बीमा दावा खाता ऋणी तथा व्यापार या सम्बन्धित सम्पत्ति खाता धनी किया जाता है। यदि दावे की राशि वास्तविक हानि से कम होती है तो अन्तर की राशि से लाभ-हानि खाता ऋणी किया जाता है तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।

यदि माल का बीमा नहीं कराया गया है, तब जर्नल में अग्नि द्वारा हानि खाता ऋणी तथा क्रय या व्यापार खाता धनी किया जाता है। बाद में यह व्यापार की वास्तविक हानि होने के कारण लाभ-हानि खाता ऋणी तथा अग्नि द्वारा हानि खाता धनी किया जाता है।

बीमा कम्पनी से दावे की धनराशि प्राप्त होने पर बैंक खाता ऋणी तथा बीमा कम्पनी का खाता धनी कियी जाता है।

बीमा के दावे की धनराशि को जिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष की ओर दिखाया जाता है।


Q. 170369 वित्तीय विवरण के तीन समायोजनों का उल्लेख करें। 1. असाधारण हानियाँ 2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना 3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समायोजन

व्यापार खाता

लाभ-हानि खाता

स्थिति-विवरण (चिट्ठा)

1. असाधारण हानियाँ

 

 

 

 (क) माल की हानि

व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में दिखाइए। (कुल हानि की राशि)

लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दर्शाएँ- बीमा कम्पनी से प्राप्त न हुई राशि।

बीमा कम्पनी द्वारा स्वीकृत दावे की राशि को देनदार के रुप में चिट्ठे के सम्पत्ति पक्ष में दिखाइए।

(ख) सम्पत्ति की हानि

-

लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाइए।

सम्बन्धित सम्पत्ति में हानि की राशि घटाइए।

2. स्वामी द्वारा निजी प्रयोग के लिए माल निकालना

क्रय में से इस माल का मूल्य घटाइए।

-

इस माल का मूल्य आहरण मानते हुए पूँजी में से घटाइए।

3. माल का मुफ्त नमूने के रुप में वितरण

इस माल का मूल्य क्रेडिट पक्ष में दिखाइए।

लाभ-हानि खाते में विज्ञापन व्यय के रुप में डेबिट पक्ष में दर्शाइए।

-


Q. 170370 निम्नांकित सूचनाओं एवं समायोजनाओं के आधार पर 31 मार्च, 2014 को कम्पनी का आर्थिक चिट्ठा तैयार कीजिए: ख्याति रू 1,50,000, यंत्र रू 1,20,000, भवन रू 1,50,000, 31 मार्च, 2014 को रहतिया रू 97,500, सामान्य संचय रू 97,500, विविध लेनदार रू 60,000, देय विपत्र रू 10,500, विविध देनदार रू 57,000, प्राप्य विपत्र रू 16,500, 7% ऋण-पत्र रू 1,50,000, फर्नीचर रू 20,000, मोटर कार रू 30,000, विनियोग रू 35,000, रोकड़ रू 27,500, अंश पूँजी रू 3,00,000 शुद्ध लाभ रू 65,650. समायोजनाएँ: i) शुद्ध लाभ की गणना यंत्र, मोटर कार एवं फर्नीचर पर 10% हृास काटने तथा देनदारों पर 5% की दर से अशोध्य एवं संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान करने के पश्चात् की गयी है। ii) सामान्य संचय में रू 12,500 हस्तान्तरित कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Balance Sheet as on 31 March 2014

Liabilities

Amt.

Assets

Amt.

General Reserve

Sundry Creditors

Bills Payable

7% Debenture

Share capital

Profit and Loss

1,10,000

60,000

10,500

1,50,000

3,00,000

53,150

Goodwill

Machinery

Building

Stock

Sundry Debtors  57,000

Less-Provision     2,850

Bills Receivable

Furniture

Motor Car

Investment

Cash

1,50,000

1,08,000

1,50,000

97,500

 

54,150

16,500

18,000

27,000

35,000

27,500

 

6,83,650

 

6,83,650


Q. 170371 मोहन ब्रदर्स की पुस्तकों से निम्नलिखित आँकड़े दिए गये हैं। आप 31 मार्च 2014 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा इसी तिथि पर चिट्ठा तैयार कीजिए: [2+2+2]
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Trading and P&L A/c

Particular

Amt.

Particular

Amt.

To Opening Stock

3,850

By Sales A/c

23,144

To Purchase A/c11,000

Less-P/R                110

10,890

By Closing Stock

7,260

To wages A/c

3,520

 

 

To Gas & Fuel A/c

297

 

 

To Factory Lighting A/c

286

 

 

To Freight A/c

990

 

 

To Gross Profit

10,571

 

 

Total

30,404

Total

30,404

To Salaries A/c

1,320

By Gross Profit

10,571

To Office Exp. A/c

715

By Interest on loan A/c

110

To Discount A/c

132

 

 

To Depreciation A/c

   Loose Tools

   Plant & Machinery

  Office Furniture

  Freehold Property

 

44

3,300

55

330

 

 

To Bed Debts A/c

66

 

 

To Provision For Doubtful debts A/c

58

 

 

To Net Profit

4,661

 

 

 

 

 

 

Total

10,681

 

10,681

 

Balance Sheet as on

31 March, 2014

      Liabilities

Amt.

Assets

Amt.

Capital      22,880

Add-N/P      4,661

                  27,541

Less-Dra.    1,320

Bills Payable

Sundry Creditors

 

 

 

26221

550

4,400

Plant & Machinery

Freehold Property

Office Furniture

Sundry Debtor 2,926

Less-Pro.           146

Loan to Krishna

Cash at Bank

Loose Tools

Cash in Hand

Stock

6,600

6,270

495

 

2,780

4,400

2,926

176

264

7,260

Total

31,171

 

31,171

 

 


Q. 170372
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Books of Mrs. Hema

Trading and Profit & Loss Account

For the year ending 31 March, 2018

Particulars

INR

Particulars

INR

To Opening Stock

3,60,000

By Sales

35,00,000

 

To Purchases

22,00,000

 

Less: Returns

60,000

34,40,000

Less: Returns

75,000

21,25,000

By Closing Stock

5,00,000

To Carriage Inward

44,000

   

To Fuel and Power

1,55,000

   

To Wages and Salaries

60,000

   

To Gross Profit c/d

11,96,000

   
 

39,40,000

 

39,40,000

To Carriage Outward

21,000

By Gross Profit b/d

11,96,000

To Wages and Salaries

1,20,000

By Interest on Investments

20,000

To Repairs

15,200

By Sundry Income

1,200

To General Expenses

1,06,000

     

Less: Prepaid Insurance

3,000

1,03,000

   
         

To Bad Debts

62,000

     

Add: Further Bad Debts

20,000

     

Add: New

       

Provision

40,000

     
 

1,22,000

     

Less: Old

       

Provision

25,000

97,000

   

To Outstanding Interest

12,000

   

To Net Profit

8,49,000

   
 

12,17,200

 

12,17,200

             

 

 

Balance Sheet as at 31 March, 2018

Liabilities

INR

Assets

INR

Output IGST

52,000

Cash in Hand

20,000

Creditors

3,00,000

Cash at Bank

1,80,000

18% Loan

1,00,000

 

Debtors

8,20,000

 

Add: Outstanding

   

Less: Bad Debts

20,000

 

Interest

12,000

1,12,000

     

Capital

21,70,000

   

8,00,000

 

Add: Net Profit

8,49,000

 

Less: Provision

   
 

30,19,000

 

For Doubtful

   
     

Debts

40,000

7,60,000

Less: Drawings

   

Stock

5,00,000

(stationery)

20,000

29,99,000

Prepaid Insurance

3,000

   

Investments

2,00,000

   

Premises

18,00,000

 

34,63,000

 

34,63,000

 


Q. 170373 निम्न तलपट से कंपनी का दिसम्बर, 2013 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए लाभ-हानि खाता बनाइये: [2+3+1]
खातों के नाम डेविट राशि (रुपया) खातों के नाम क्रेडिट राशि (रुपया)
स्टाक 37,500 विक्रय 4,95,000
क्रय 2,90,000 सामान्य संचय 35,000
सयंत्र 1,25,000 लेनदार 30,000
भवन 2,00,000 ब्याज 1,000
फर्नीचर 10,000 क्रय वापसी 2,500
मजदूरी 25,000 अंश पूंजी 2,50,000
ढुलाई 2,500 लाभ-हानि खाता 27,000
संचालक शुल्क 10,000
सामान्य व्यय 7,500
विक्रय वापसी 3,500
वेतन 40,000
मोटर 15,000
देनदार 45,000
विनियोग 15,000
अवशिष्ट याचना 2,500
किराया व कर 4,000
हस्तस्थ रोकड़ 1,500
बैंक में रोकड़ 6,500
8,40,500 8,40,500
समायोजनाएँ: i) देनदारों पर 5% संदिग्ध ऋणार्थ प्रावधान कीजिए। ii) वेतन रु0 5,000 एवं मजदूरी रु0 4,000 अदत्त हैं। iii) किराया व कर रु0 500 पूर्वदत्त है। iv) भवन पर 5%, सयंत्र एवं फर्नीचर पर 10% और मीटर पर 20% ह्वास काटिये। v) रु0 17,500 सामान्य संचय में हस्तांतरित कीजिए। vi) 31 दिसम्बर, 2013 को रहतिया रु0 24,000 का था।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

- Profit and loss a/c

 

Particulars

Amt.

Particulars

Amt.

To carriage a/c

To Director’s fees

To Gen. Exp. a/c

To Salaries 40000

Add- o/s salary 5000

To Dep. on

Building 10000

Plant 12500

Motor 3000

To Provision for doubtful debts

To Rent & tax 4000

less – Prepaid 500

To Gen. Reserve. a/c

To balance c/d (N.P.)

2500

10000

7500

45000

 

 

 

 

25500

 

2250

 

3500

17500

48750

By G.P. Transferred from trading

By Interest a/c

 

161500

1000

 

Total

162500

Total

162500

 


Q. 170374 देनदार खाता तैयार किया जाता है:


A. नकद बिक्री का पता लगाने के लिए

B. उधार बिक्री का पता लगाने के लिए

C. नकद शेष का पता लगाने के लिए

D. उधार क्रय का पता लगाने के लिए

Right Answer is: B

SOLUTION

देनदार खाता उधार बिक्री का पता लगाने के लिए तैयार किया जाता है।


Q. 170375 वर्ष के दौरान उधार क्रय की गणना __________ बना कर की जाती है।


A. कुल लेनदार खाता

B. कुल देनदार खाता

C. रोकड़ खाता

D. आरंभिक अवस्था विवरण

Right Answer is: A

SOLUTION

कुल लेनदार खाते का उपयोग उधार क्रय की राशि जानने के लिए किया जाता है


Q. 170376 जब समापन पूंजी आरंभ पूंजी से कम है तो इसका अर्थ है:


A.

लाभ या लाई गयी पूंजी

B.

हानि या आरहण

C.

लाभ

D.

हानि

Right Answer is: B

SOLUTION

जब समापन पूंजी आरंभ पूंजी से कम है तो यह हानि या आरहण को प्रदर्शित करती है


Q. 170377 समापन पूंजी है रु 2,00,000; जबकि आरंभ पूंजी है रु 3,50,000. यह इंगित करता है कि:


A.

2,00,000 रु का आहरण है

B.

1,50,000 रु का लाभ है

C.

1,50,000 रु की हानि है

D.

वर्ष के दौरान रु 1,50,000 की लाई गई ताजी पूंजी है

Right Answer is: C

SOLUTION

अवधि के दौरान हुई हानि = आरंभ पूंजी – समापन पूंजी = 3,50,000 - 1,50,000


Q. 170378 अवस्था का विवरण क्या प्रदर्शित करता है:


A.

व्यापार की सही वित्तीय स्थिति

B.

व्यापार की झूठी वित्तीय स्थिति

C.

व्यापार की वास्तविक वित्तीय स्थिति .

D.

व्यापार की अनुमानित वित्तीय स्थिति

Right Answer is: D

SOLUTION

अवस्था विवरण व्यापार की अनुमानित वित्तीय स्थिति को प्रदर्शित करता है क्योंकि यह लेनदेन के दोनों पहलुओं को अभिलेखित नहीं करता है तो इसके परिणामस्वरूप सही वित्तीय स्थिति को हासिल नहीं किया जा सकता है।


Q. 170379 संपत्तियां हैं रु 50,000 और लेनदार का बकाया है रु 25,000. पूंजी की राशि होगी:


A.

रु 75,000

B.

रु 50,000

C.

रु 25,000

D.

रु 1,00,000

Right Answer is: C

SOLUTION

संपत्तियां=दायित्व +पूंजी पूंजी = परिसंपत्तियां-दायित्व


Q. 170380 एकल प्रविष्टि प्रणाली के नुकसान हैं:


A.

सरल पद्धति

B.

कम महंगा

C.

छोटी व्यवसायों के लिए उचित

D.

कम वैज्ञानिक

Right Answer is: D

SOLUTION

एकल प्रविष्टि इस मायने में अवैज्ञानिक है


Q. 170381 एकल प्रविष्टि प्रणाली त्रुटिपूर्ण हैं क्योंकि इस प्रणाली के अंतर्गत:


A.

तलपट को तैयार नहीं किया जा सकता है

B.

लाभ और हानि और व्यापार लेखे को तैयार नहीं किया जा सकता है

C.

स्थिति विवरण को तैयार नहीं किया जा सकता है

D.

उपरोक्त सभी

Right Answer is: D

SOLUTION

इस प्रणाली के अंतर्गत तलपट और अंतिम लेखों को तैयार नहीं किया जा सकता है


Q. 170382 यदि अंत में पूंजी है रु 30,000; अवधि के दौरान लाई गयी पूंजी है रु 12,000 और अवधि के दौरान लाभ है रु 6,000. आरंभ पूंजी होगी:


A.

रु 24,000

B.

रु 36,000

C.

रु 48,000

D.

रु 12,000

Right Answer is: D

SOLUTION

आरंभ पूंजी = समापन पूंजी – अतिरिक्त पूंजी – लाभ 30,000 - 12,000 - 6,000 = 12,000


Q. 170383 लाभ की गणना करने के लिए, समापन पूंजी में क्या जोड़कर समायोजन करना चाहिए।


A.

आहरण

B.

लाई गई पूंजी

C.

लाभ

D.

अतिरिक्त पूंजी

Right Answer is: A

SOLUTION

वर्ष के दौरान लाभ और हानि की गणना करने के लिए आरहण को समापन पूंजी में जोड़ा जाता है।


Q. 170384 एकल प्रविष्टि प्रणाली के अंतर्गत लाभ और हानि पाए जाते हैं:


A.

सभी खातों और बिखरी सूचना में

B.

लेनदार खातों से

C.

आरंभ अवस्था विवरण से

D.

रोकण सारांश से

Right Answer is: A

SOLUTION

लाभ और हानि को सभी खातों और बिखरी सूचना से पाया जा सकता है


Q. 170385 यदि अंत में पूंजी है रु 15,000; अवधि के दौरान लाई गई पूंजी है 12,000 रु और इस अवधि के दौरान हुआ नुकसान है रु 6,000. आरंभ पूंजी होगी:


A.

रु 3,000

B.

रु 9,000

C.

रु 21,000

D.

रु 33,000

Right Answer is: B

SOLUTION

आरंभ पूंजी = समापन पूंजी –अतिरिक्त पूंजी + हानि 15,000 - 12,000 + 6,000 = 9,000


Q. 170386 समापन पूंजी और आरंभ पूंजी के बीच अंतर में समायोजन सम्मिलित हो सकता है केवल इसके अतिरिक्त:


A.

वर्ष के दौरान लाभ

B.

वर्ष के दौरान आरहण या लाई गयी पूंजी

C.

वर्ष के दौरान हानि

D.

वर्ष के दौरान खरीदी गई नियत परिसंपत्तियां

Right Answer is: D

SOLUTION

समायोजन में वर्ष के दौरान लाभ और हानि, लाई गयी पूंजी या आरहण सम्मिलित होता है।


Q. 170387 केवल नकद और व्यक्तिगत लेखों का रखरखाव कहाँ किया जाता है?


A.

दोहरी प्रविष्टि

B.

अपूर्ण अभिलेख

C.

उपार्जन आधार

D.

रूढ़िवादी परम्परा

Right Answer is: B

SOLUTION

केवल नकद और व्यक्तिगत लेखों का रखरखाव अपूर्ण अभिलेखों में किया जाता है। इस प्रणाली मे लेखे पूर्ण न होने का कारण तलपट नहीं बनाया जा सकता है।


Q. 170388 आरंभ में अवस्था विवरण की स्थिति क्या बतलाती है:


A.

खरीद

B.

आरहण

C.

बिक्री

D.

पूंजी

Right Answer is: D

SOLUTION

आरंभ में अवस्था विवरण फर्म की आरंभ पूंजी को बतलाता है। चूंकि आरंभ पूंजी के लिए कोई उचित रिकोर्ड नहीं होते हैं तो लेखा इसकी गणना अवधि के आरंभ में अवस्था विवरण को तैयार करने के द्वारा करता है।


Q. 170389 एकल प्रविष्टि की शुद्ध संपत्ति पद्धति के, मामले में लाभ किस के द्वारा संचित किया जाता है:


A.

आरंभ पूंजी और समापन पूंजी की तुलना

B.

एक लाभ और हानि खाता तैयार करना

C.

स्थिति विवरण तैयार करना

D.

व्यापार खाता तैयार करना

Right Answer is: A

SOLUTION

लाभ संचित करने के लिए, एकल लेखा प्रणाली के अनुसार, अवस्था विवरण को वर्ष के अंत में और वर्ष के आरंभ में तैयार करना आवश्यक है।


Q. 170390 आरंभ पूंजी है रु 70,000, समापन पूंजी रु. 90,000, आहरण 18,000, लाभ होगा:


A.

रु 2,000

B.

रु 38,000

C.

रु 40,000

D.

रु 1,42,000

Right Answer is: B

SOLUTION

लाभ निर्धारण करने के लिए  समीकरण है अंत में पूंजी +आरहण – अतिरिक्त लाई गयी पूंजी– आरंभ में पूंजी लाभ = 90,000 + 18,000 - 70,000 = 38,000


Q. 170391 आरंभ पूंजी रु 2400, क्लोजिंग पूंजी रु 4000, आहरण रु 700, लाभ रु 1500. ताजा पूंजी =


A.

रु 600

B.

रु 800

C.

रु 3900

D.

रु 4700

Right Answer is: B

SOLUTION

लाभ = समापन पूंजी + आरहण – अतिरिक्त पूंजी – आरंभ पूंजी. ताजा पूंजी = समापन पूंजी + आरहण – आरंभ पूंजी – लाभ 4,000 + 700 - 2,400 - 1500 = 800.


Q. 170392 लाभ हासिल करने के लिए, अंतिम पूंजी का समायोजन किसे जोड़कर हो सकता है:


A.

आरहण

B.

लाई गयी पूंजी

C.

बिक्री

D.

खरीद

Right Answer is: A

SOLUTION

लाभ = अंत में पूंजी + आरहण – लाई गयी अतिरिक्त पूंजी- आरंभ में पूंजी।


Q. 170393 अपूर्ण अभिलेखों को आम तौर पर किसके द्वारा प्रयोग किया जाता है?


A.

सार्वजनिक लिमिटेड कम्पनी

B.

निजी लिमिटेड कम्पनी

C.

पंजीकृत सहकारी समितियां

D.

एकल स्वामित्व

Right Answer is: D

SOLUTION

अपूर्ण रिकोर्ड अधिकतर एकल स्वामित्व वाले या छोटे फर्म के द्वारा रखे जाते हैं। लिमिटेड कम्पनी कानूनी प्रतिबंधों के कारण लेखे की एकल प्रविष्टि प्रणाली का पालन नहीं कर सकती हैं।


Q. 170394 कंप्यूटर के एक तत्व के रूप में लोगों की क्या भूमिका होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कंप्यूटर के साथ कार्य करने वाले लोगों को कंप्यूटर प्रणाली का लाईव-वेयर भी कहा जाता है। इसमें कंप्यूटर प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण भाग शामिल होता है:
-प्रणाली विश्लेषक: वे लोग जो डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली को डिजाइन करते हैं।
-प्रोग्रामस: ये डाटा प्रोसेसिंग सिस्टम डिजाइन के क्रियान्वयन के लिए कार्यक्रमों को लिखने वाले लोग होते हैं।
-ऑपरेटर: ये कंप्यूटर संचालन में भाग लेने वाले लोग होते हैं।
वे लोग जो कंप्यूटर प्रोग्रामर को क्रियान्वित करने के लिए स्थापित प्रक्रियाओं का जवाब देते हैं वे भी लाइव-वेयर का एक हिस्सा होते हैं।


Q. 170395 कौनसे आवश्यक मापदंडों को प्रत्येक लेखा रिपोर्ट में द्वारा कवर किया जाना चाहिए?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रत्येक लेखा रिपोर्ट के द्वारा कवर किये जाने वाले आवश्यक मापदंड:
क) प्रासंगिकता
ख) शाश्वत्ता
ग) शुद्धता
घ) संपूर्णता
ई) सारांशिकरण


Q. 170396 प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) क्या होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जो निर्णय लेने के लिए और प्रभावी ढंग से एक संगठन का प्रबंधन करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। एमआईएस संस्था के दीर्घकालिक सामरिक लक्ष्यों और उद्देश्यों का समर्थन करती है। एमआईएस को प्रबंधन द्वारा कई स्तरों पर देखा और प्रयोग किया जाता है।


Q. 170397 लेनदेन प्रसंस्करण प्रणाली क्या होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

लेनदेन प्रसंस्करण प्रणाली बड़े व्यापार उद्यम की आवश्यकताओं के लिए प्रस्तुत की गयी सबसे पहली कंप्यूटरीकृत प्रणाली में से होती है। ठेठ टीपीएस के उद्देश्य, अभिलेखन, वैध तथा लेनदेनों को संरक्षित करना जो पुनः प्राप्ति और उपयोग के लिए व्यापार के विभिन्न कार्यात्मक क्षेत्रों से होते हैं। (एक लेनदेन प्रसंस्करण प्रणाली (टीपीएस) सूचना प्रणाली का एक प्रकार होती है। टीपीएस एक संगठन के लेनदेनों संग्रहित, संरक्षित, संशोधित और पुनः प्रदान करती है। एक लेनदेन एक घटना होती है जो ऐसे संग्रहीत डेटा को संशोधित या उत्पन्न करती है जिसे एक सूचना प्रणाली में संरक्षित किया गया है।)


Q. 170398 ऑपरेटिंग पर्यावरण क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली में, भंडारण और डेटा की प्रोसेसिंग के ढांचे को ऑपरेटिंग पर्यावरण कहा जाता है जिसमें हार्डवेयर के साथ ही वह साॅफ्टवेयर भी शामिल होता है जिसमें लेखा प्रणाली काम करती है।


Q. 170399 कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की विशेषताएं क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की विशेषताएं:
1) ऑनलाइन इनपुट और भंडारण।
2) खरीद और बिक्री चालान के प्रिंटआउट।
3) खातों और लेनदेन के संहिताकरण के लिए तर्कसंगत योजना।
प्रत्येक खाते और लेनदेन के पास एक अद्वितीय कोड होता है।
4) प्रारंभ से ही खातों का समूहिकरण किया जाता है।
5) प्रबंधन के लिए तुरंत रिपोर्ट।


Q. 170400 कंप्यूटर प्रणाली की सीमाएं क्या होती हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कंप्यूटर प्रणाली की सीमाएं हैं:
1) सामान्य ज्ञान का अभाव: - कम्प्यूटर प्रणाली के पास किसी प्रकार का सामान्य ज्ञान नहीं होता है क्योंकि सामान्य ज्ञान के प्रोग्राम के लिए पूरी एल्गोरिथ्म डिजाइन की जाती है।
2 ) शून्य बुद्धि: - कंप्यूटर शून्य होशियारी के साथ मौन उपकरण होता है। जब तक एक विशेष स्थिति से निपटने के लिए प्रोग्राम तैयार नहीं किया जाता तब तक वे एक विशेष स्थिति के तहत वास्तव क्या होना चाहिए के बारे में सोच और कल्पना नहीं सकते हैं।
3) निर्णय लेने के अभाव: - निर्णयन सूचना, ज्ञान, बुद्धि और न्याय करने की क्षमता से जुड़ी एक जटिल प्रक्रिया होती है। कंप्यूटर अपने दम पर निर्णय नहीं ले सकता है क्योंकि उसके पास निर्णय लेने के सभी तत्व नहीं होते हैं।


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