जब वियोजन की अभिक्रिया ऊष्मा की सहायता से करायी जाती है, तो उसे ऊष्मीय वियोजन कहते हैं।
यदि किसी अभिक्रिया मे एक गैस निकलती है तो इसे ऊपर की ओर तीर
पदार्थ के अणुसूत्र वाला असंतुलित रासायनिक समीकरण कंकाली समीकरण कहलाता है ।
उत्पाद की तरफ + Q लिखने का अर्थ है की अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है ।
एक रासायनिक अभिक्रिया का प्रतीकात्मक निरूपण रासायनिक समीकरण द्वारा किया जा सकता है।

(अ) संक्षारण: जब कोई धातु अम्ल, आद्र्रता आदि के संपर्क में आती है, तो यह संक्षारित हो जाती है, इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।संक्षारण के कारण वस्तुओं की चमक समाप्त हो जाती है | उदाहरण के लिए लोहे के संक्षारण के कारण उस पर लाल-भूरे रंग की परत चढ़ जाती है इसे लोहे पर जंग लगना कहते हैं | संक्षारण के कारण चांदी पर काली और तांबे पर हरे रंग की परत चढ़ जाती है | संक्षारण के कारण कार के ढाँचे, पुल, लोहे की रेलिंग, जहाज तथा लोहे से बनी वस्तुओं को बहुत क्षति होती है |
(ब) विकृतगंधिता: वसा या तेलयुक्त खाद्य पदार्थों को लम्बे समय तक रखने पर वे उपचयन के कारण विकृतगंधी हो जाती हैं जिससे उनके स्वाद व गंध बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया को विकृतगंधिता कहते हैं। अतः, वसा तथा तेलयुक्त खाद्य पदार्थों के उपचयन को रोकने के लिए प्रतिऑक्सीकारक मिलाये जाते हैं तथा वायुरोधी बर्तन में रखने पर भी खाद्य सामग्री का ऑक्सीकरण कम हो जाता है |
रासायनिक अभिक्रियाएँ वे प्रक्रम है जिनमें अलग गुणों वाले नए पदार्थ का निर्माण होता है । उदाहरण के लिए, वायु की उपस्थिती मे मैग्निशियम के जलने से मैग्निशियम ऑक्साइड का निर्माण होता है । यहाँ अभिकारकों, मैग्निशियम और ऑक्सीजन के गुण उत्पाद मैग्निशियम ऑक्साइड के गुणो से भिन्न होते हैं।
(अ) ऐसी अभिक्रिया जिसमें कोई एक तत्व दूसरे तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

(i) Zn + CuSO4 →ZnSO4 + Cu
ऐसी अभिक्रियाएँ, जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है तथा नये यौगिक बनते हैं, द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
Na2SO4 (aq) + BaCl2 (aq)
BaSO4 (s) + 2NaCl (aq)
संयोजन अभिक्रिया − वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं | उदाहरण:

विस्थापन अभिक्रिया − वह अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक के एक परमाणु या परमाणुओं के समूह को दूसरे परमाणु या परमाणुओं के समूह द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाता है विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है |
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(b) 2NaCl + H2O→
A.
जल की स्थायी कठोरता को दूर करने में
B.
जल की अस्थायी कठोरता दूर करने में
C.
अमोनिया गैस के निर्माण में
D.
लवण जल के निर्माण में
धावन सोडा बहुत सस्ता और आसानी से उपलब्ध होता है, अतः इसका उपयोग काँच, साबुन, कागज़, बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिक के निर्माण में कच्चे माल के रूप में और जल की स्थायी कठोरता को दूर करने में भी किया जाता है |
A.
एक प्रतिअम्ल के रूप में
B.
कपड़े धोने के पाउडर के रूप में
C.
सेलों में
D.
एक अपमिश्रक के रूप में
बेकिंग सोडा एक दुर्बल क्षारक है और आसानी से अम्लों के साथ संयुक्त होकर CO2 + H2O बनाता है इसलिए इसका उपयोग एक प्रतिअम्ल के रूप में, भोजन में और अग्निशामक में किया जाता है |
A.
स्वयं धातु
B.
क्षार
C.
लवण आर जल
D.
अम्ल
धातुओं के ऑक्साइड अम्लों से, क्षारों की अम्लों के साथ क्रिया के समान अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं | अतः धात्विक ऑक्साइड क्षारीय ऑक्साइड कहलाते हैं |
A.
ऐल्कोहॉल में घुलनशील होता है क्षार एक क्षारक होता है जो जल में घुलनशील होता है | ये स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने, स्वाद में कड़वे और संक्षारक प्रकृति के होते हैं | इन्हें कभी चखना और छूना नहीं चाहिए क्योंकि ये हानि पहुँचा सकते हैं |
नीले
लिटमस को लाल B.
मेथिल
ओरेंज को
गुलाबी C.
फिनॉल्फथैलिनको
गुलाबी D.
लाल
लिटमस को
नीला
लिटमस
एक
प्राकृतिक
सूचक है | अम्ल
स्वाद में खट्टे
होते हैं और
नीले लिटमस
पत्र को लाल
कर देते हैं
जबकि क्षार
कड़वे होते
हैं और लाल
लिटमस को
नीला कर देते
हैं |
अम्ल
में
हाइड्रोजन
परमाणु होते
हैं
अम्ल जल
में H+
आयन देते हैं
जो अस्थायी
होते हैं अतः
ये जल अणुओं
के साथ
संयुक्त
होकर
हाइड्रोनियम
आयन (H3O+)
देते हैं |
ऐसीटिक
अम्ल B.
ऑक्सेलिक
अम्ल C.
सिट्रिक
अम्ल D.
टार्टरिक
अम्ल
स्याही
के धब्बो को
हटाने के लिए
ऑक्सेलिक अम्ल
का उपयोग
किया जाता है |
इसके अन्य
उपयोग लकड़ी
को साफ़ करने
में किया
जाता है
इसमें लकड़ी की
शुष्क परत
अम्ल में घुल
जाती है और
निचली साफ़
परत बाहर आ
जाती है इसके
अतिरिक्त
इसका उपयोग
वाहनों के
पहिये साफ़
करने में
किया जाता है |
अम्लीय लवण बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) है। एसीटिक अम्ल (CH3COOH)। साधारण लवण किसी अम्ल के क्षारक के साथ पूर्णतः उदासीनीकरण से बनते हैं। हाइड्रोनियम आयन का आयनिक सूत्र कार्बनिक अम्ल हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सार्वत्रिक सूचक कई सूचकों का मिश्रण होता है। हाइड्रोजन आयन की अलग-अलग सान्द्रताओं पर इसका रंग अलग-अलग होता है। तीन सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) हमारे मुँह की लार की pH का मान 6-7 के मध्य होता है। लवण के एक सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं। सोडियम क्लोराइड एक सामान्य लवण किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है जिसे pH एवं हाइड्रोजन आयन सांद्रता में सम्बन्ध- अम्ल धातु कार्बोनेटों व बाइकार्बोनेटों के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस, जल तथा संगत लवण का निर्माण करते हैं। प्रबल क्षारक जल में पूर्णतया आयनित होते हैं तथा अधिक संख्या में OH- आयन उत्पन्न करते हैं जबकि दुर्बल क्षारक जल में आंशिक रूप से आयनित होते हैं तथा कम संख्या में OH- आयन उत्पन्न करते हैं। प्रबल क्षारक का उदाहरण NaOH तथा दुर्बल क्षारक का उदाहरण NH4OH है। जो क्षारक जल में घुलनशील होते हैं, वे क्षार कहलाते हैं। क्षारकों का स्वाद कड़वा होता है। I. हाँ, जिप्सम का अणु आद्र होता है | इसका रासायनिक सूत्र CaSO4 .2H2O होता है| (i) (iii) कैल्शियम ठंडे जल के साथ अभिक्रिया कर कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन का निर्माण करता है |
हाइड्रोजन
इस
अभिक्रिया
में हमेशा
हाइड्रोजन
गैस निकलती
है इसके
अतिरिक्त
अन्य उत्पाद
ऑक्साइड और
हाइड्रोक्साइड
हो सकते हैं |
अधिकाँश
अधातुएँ ठोस
और गैस होती
हैं केवल ब्रोमीन
एक ज्ञात
धातु है जो
कमरे के ताप
पर द्रव है |
7 B. 18 C. 8 D. 32 आधुनिक आवर्त सारणी में 7 क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जो आवर्त कहलाती हैं |
समान संख्या में संयोजकता इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं समान समूह में उपस्थित तत्वों में समान संख्या में संयोजकता इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं | एक परमाणु के बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहलाती है |
कार्बन B. सिलिकॉन C. हीलियम D. सोडियम कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4 है |
न्यूलैंड्स के अनुसार प्रकृति में केवल 56 तत्व मौजूद थे। एका-बोरॉन (स्केंडियम) और एका-सिलिकॉन (जर्मेनियम) मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी बनाते समय परमाणु भार को मानदंड के रूप में लिया था । डोबेराइनर का वर्गीकरण सभी ज्ञात तत्वों को समान रासायनिक गुणों के आधार पर त्रिक में व्यवस्थित करने में असफल रहा । समूह I के तत्वों के बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है जबकि समूह II के तत्वों के बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं । सोडियम में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है । अष्टक सिद्धान्त केवल कैल्सियम तक ही लागू होता है । तत्वों को उनके गुणों में समानता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है । मेन्डेलीफ के समय तक 63 तत्व ज्ञात थे । आवर्त सारणी में प्रत्येक आवर्त कोशों की संख्या को बताता है । एक आवर्त सारणी के दीर्घ रूप में उपस्थित ऊर्ध्वाधर स्तम्भ समूह कहलाते हैं ।
Ca
का
इलेक्ट्रॉनिक
विन्यास 2,8,8,2
है
। उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में इसलिए रखा गया है क्योंकि इन सभी के पास पूर्ण भरे हुए बाहरी कोश होते हैं । अतः ये अक्रियाशील होती हैं । समान समूह के तत्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है | अतः वे रासायनिक व्यवहार में समानता दर्शाते हैं । Li, Be, Na , Mg, Al, K, Ca, Sc, Ti, V 2n2 (जहाँ 'n' नाभिक से नियत कोश की संख्या है) तत्वों के रासायनिक गुण संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं
(a) पोटैशियम और सोडियम (b) कॉपर नाइट्रेट (c) जिंक ऑक्साइड आयनिक यौगिकों के तीन गुणधर्म निम्नलिखित हैः अ) अधातु वे तत्व है जो इलेक्ट्राॅन ग्रहण कर ऋणात्मक आयन देते हैं जब धातुओं जैसे पोटैशियम और सोडियम (सक्रियता श्रेणी के शीर्ष पर स्थित) के नाइट्रेटो को गर्म किया जाता है तो ये अपने धातु नाइट्राइट और ऑक्सीज़न का निर्माण करते हैं । (c) हम मिश्रधातुओं का निर्माण एक धातु के गुणो मे सुधार करने के लिए करते है । ऐसिटिक अम्ल की गंध सिरके जैसी होती है और अम्ल होने के कारण यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है|
ऐसिटिक अम्ल आसुत जल में पूर्णतः घुलनशील होता है अतः एक रंगहीन विलयन का निर्माण होता है|
साबुनीकरण अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है और साबुन का विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है अतः यह लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है| जब इसमें नीला लिटमस पत्र डुबोया जाता है तो इसका रंग परिवर्तित नहीं होता है|
कठोर जल में Ca2+ और Mg2+ आयन होते हैं| अतः कैल्सियम सल्फेट, कैल्सियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड वे लवण हैं जो जल में घोलने पर जल कठोर बन जाएगा|
ऐसीटिक अम्ल सोडियम बाईकार्बोनेट से अभिक्रिया करके तीव्र बुदबुदाहट के साथ रंगहीन और गंधहीन कार्बन डाइऑक्साइड गैस देता है|
B. लाल लिटमस को नीला कर देता है C. नीले लिटमस को लाल कर देता है D. लाल लिटमस को रंगहीन कर देता है एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) की प्रकृति अम्लीय होती है अतः यह नीले लिटमस को लाल कर देता है|
ब्यूटेनॉल B. ब्यूटेनॉन C. ब्यूटेनॉइक अम्ल D. ब्यूटेनैल यह यौगिक चार कार्बन परमाणु रखता है अतः यह ब्यूटेन का एक व्युत्पन्न है | यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह (-COOH समूह) रखता है | इस यौगिक का नाम ब्यूटेन के अंतिम 'e' के स्थान पर 'ओइक अम्ल' लगाकर (ब्यूटेन + ओइक अम्ल = ब्यूटेनॉइक अम्ल ) प्राप्त किया जा सकता है |
असंतृप्त B. संतृप्त C. बेन्जेनॉइड D. नॉन- बेन्जेनॉइड संतृप्त हाइड्रोकार्बनों में कार्बन परमाणुओं की सभी संयोजकतायें एकल बन्ध द्वारा संतुष्ट की जाती हैं अर्थात प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य परमाणुओं से जुड़ा होता है |
एस्टरीकरण B. किण्वन C. विकृतीकरण D. साबुनीकरण यह एक अवायवीय श्वसन है | इस प्रक्रिया में उच्च अणुभार वाले कार्बनिक यौगिकों को यीस्ट द्वारा कुछ लाभदायक उत्पाद प्राप्त करने के लिए कम अणुभार वाले यौगिकों में तोड़ा जाता है |
श्रंखलन B. अपररूपता C. समावयवता D. समस्थानिक कार्बन परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ बन्ध बना सकने की विशेष क्षमता श्रंखलन कहलाती है |
एकल बन्ध से आपस में जुड़े कार्बन परमाणु रखते हैं संतृप्त कार्बनिक यौगिकों में एकल बन्ध से जुड़े कार्बन पाए जाते हैं | ऐसे कार्बन नाभिक साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को मजबूती से पकड़े रहते हैं | ये यौगिक अत्यधिक स्थायी होते हैं और सामान्यतः अधिक अभिक्रियाशील नहीं होते हैं |
श्रंखलन B.
अपररूपता C.
समावयवता D.
समस्थानिक
एक
अणु जो चार या
अधिक कार्बन
परमाणु रखता
है, में बंधों
का भिन्न
विन्यास हो
सकता है | समान अणुसूत्र
लेकिन भिन्न
संरचना रखने
वाले यौगिक
समावयवी
कहलाते हैं
और यह
गुणधर्म
समावयवता
कहलाता है |
प्रकार्यात्मक
समूह पर B.
घटक
तत्वों पर C.
हाइड्रोजन
परमाणुओं पर D.
कार्बन
परमाणुओं की
संख्या
एक
कार्बनिक
यौगिक के
रासायनिक
गुणधर्म प्रकार्यात्मक
समूह
(विषमपरमाणु)
पर निर्भर
करते हैं |
ऐलुमिनियम आयरन भू-पर्पटी का लगभग 4% भाग बनाता है जो ऐलुमिनियम (7%) के बाद दूसरा स्थान रखता है |
बिना टूटे पतली परतों में प्रसारित किया जाना सामान्यतः अधातुएँ भंगुर प्रकृति की होती है और इसमें आघातवर्धनीयता और तन्यता नहीं पायी जाती है |
क्रोमियम
टंगस्टन
विद्युत
चालकता से
बहुत अधिक
प्रतिरोधकता
रखता है |
इसलिए इसका
उपयोग बल्ब
का तंतु
बनाने में
किया जाता है |
Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2↑
Al>Fe>Zn>Mg B.
Zn>
Al> Fe >Mg C.
Fe>Zn>Al>Mg D.
Mg>Al>Zn>Fe
अधिक
अभिक्रियाशील
धातु कम
अभिक्रियाशील
धातु को इसके
लवण से
प्रतिस्थापित
कर देती है |
3
: 1 B.
1
: 3 C.
2
: 1 D.
1
: 2
एक्वारेजिया
HCl और HNO3 का 3:1 के
अनुपात में
मिश्रण होता
है | यह गोल्ड
और प्लेटिनम
जैसी
उत्कृष्ट
धातुओं को भी
घोल सकता है |
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(ब) 250C ताप पर शुद्ध जल की
(स) अम्लीय
iii.बेकिंग पाउडर के दो उपयोग लिखें।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
II. बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा एवं टार्टरिक अम्ल का मिश्रण है |
III. बेकिंग पाउडर का उपयोग केक बनाने में एवं अग्निशामक में किया जाता है|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(i) बेकिंग सोडा
(ii) विरंजक चूर्ण
(iii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(ii)

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

Right Answer is: C
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

(a) दो धातुएँ जो ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया करती हैं ।
(b) जब कॉपर की कुंडली को कुछ समय तक सिल्वर नाइट्रेट विलयन में रखा जाता है तो वह यौगिक जो सिल्वर नाइट्रेट के विलयन को नीला रंग प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होता है ।
(c) सक्रियता श्रेणी में उपस्थित धातु जिसके ऑक्साइड का अपचयन केवल कोक से होता है ।
SOLUTION
SOLUTION
2. आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होता है।
3. आयनिक यौगिक, जलीय विलयन या गलित अवस्था में विद्युत का संचालन करते हैं।
ब) द्रव अधातु का नाम बताएँ।
स) क्या पेंसिल की लीड अधातु है?
SOLUTION
स) हाँ, पेंसिल की लीड कार्बन की बनी होती है, जो एक अधातु है। SOLUTION

सक्रियता श्रेणी में कैल्शियम से कॉपर तक के नाइट्रेटो को गर्म करने पर ये अपघटित होकर धातु ऑक्साइड

धातुओं की सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित मर्करी, सिल्वर आदि जैसी धातुओं के नाइट्राइट गर्म करने पर धातु, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ऑक्सीज़न का निर्माण करते हैं ।
(b) धातुएँ जैसे कॉपर, जिंक, टिन, निकिल,सिल्वर, गोल्ड आदि का शोधन विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है । उन पदार्थो का नाम लिखिए जिनका उपयोग इस विधि मे एनोड और कैथोड के निर्माण के लिए किया जाता है ।
(c) हम मिश्रधातुएँ क्यों बनाते है?
(d) विद्युत परिपथो के लिए, हम कॉपर का इस्तेमाल करते है और पीतल (कॉपर और जिंक की एक मिश्र धातु) का नहीं । क्यों?
(e) उस धातु का नाम लिखिए जो सोल्डर का घटक है ।
SOLUTION
(e) सोल्डर लैड (Pb) और टिन (Sn) की एक मिश्रधातु है ।SOLUTION
(ii) पीतल − 60%-80% कॉपर (Cu), 20%-40% ज़िंक (Zn)
(iii) ड्यूरालुमिन − 95% एलुमिनियम (Al), 4% कॉपर (Cu), 0.5% मैग्निशियम (Mg), 0.5% मैग्निज (Mn).
(iv) सोल्डर − 50% लैड (Pb), 50% टिन (Sn)
(v) स्टैनलेस स्टील − 74% आयरन (Fe), 18% क्रोमियम (Cr), 8% निकल (Ni), C कार्बन (0.5-1%)
A. इसकी गंध सिरके जैसी है और यह लाल लिटमस को नीला कर देता हैSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. परखनली में कोई अभिक्रिया नहीं होतीSOLUTION
A. नीले लिटमस को रंगहीन कर देता हैSOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION