A.
कार्बन नाइट्रोजन का उपयोग खाद्य सामग्री के संरक्षण के लिए किया जाता है क्योंकि यह अक्रिय प्रकृति का होता है | यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन के साथ आसानी से संयुक्त नहीं होती है | इस प्रकार यह भोजन को विकृतगंधिता से बचाती है |
अधिक
अभिक्रियाशील
धातुओं जैसे
सोडियम और पोटैशियम
के ऑक्साइड
क्षारीय
प्रकृति के
होते हैं
क्योंकि
इन्हें जब जल
में घोला
जाता है ये
क्षार का
निर्माण
करते हैं |
हाइड्रोक्लोरिक
अम्ल
पृथ्वी
से निकाले
जाने वाले
अयस्क
सामान्यतः
अत्यधिक
मात्रा में
मिट्टी, रेत
आदि अशुद्धियों
से संदूषित
होते हैं ये
अशुद्धियाँ
गैंग या
आधात्री
कहलाती है |
धातु के
निष्कर्षण से
पूर्व इन
अशुद्धियों
को दूर किया
जाता है |
अयस्क से
गैंग को अलग
करने की
प्रक्रिया
गैंग और
अयस्क के
भौतिक या रासायनिक
गुणों पर
आधारित होती
है |
सल्फर ग्रेफाइट जो की कार्बन का एक अपररूप है, के अतिरिक्त अधातुएँ विद्युत का चालन नहीं करती है | यह मुक्त इलेक्ट्रॉन रखता है | अतः यह विद्युत का चालन कर सकता है |
CuO बनता है जब कॉपर को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो यह ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर कॉपर (II) ऑक्साइड का निर्माण करता है | यह काले रंग का होता है |
निस्तापन
से
कार्बोनेट
अयस्कों को
एक बंद नली
में वायु की सीमित
आपूर्ति में
गर्म करके
ऑक्साइड
अयस्कों में
परिवर्तित
करने की
प्रक्रिया
निस्तापन
कहलाती है |
क्षारीय प्रकृति के B. अम्लीय प्रकृति के C. उदासीन प्रकृति के D. उपरोक्त में से कोई नहीं सामान्यतः धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं जबकि अधातु ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं |
उनका प्राकृतिक रंग परिवर्तित हो जाता है ये वायुमंडलीय घटकों के साथ अभिक्रिया करके संगत ऑक्साइड, हाइड्रॉक्साइड और कार्बोनेट बनाते हैं |
हीरा
और क्लोरीन
विद्युत का
चालन नहीं
करते हैं |
सिल्वर
विद्युत का
सुचालक है
लेकिन एक अधातु
नहीं है |
ग्रेफाइट
(कार्बन का एक
अपररूप) एक
अधातु है, जो
विद्युत का
चालन करती है |
एनोड
शुद्ध धातु
का बना होता
है
धातुओं
के विद्युत
अपघटनी शोधन
में एनोड अशुद्ध
धातु का और
कैथोड शुद्ध
धातु का बना
होता है तथा
विद्युत
अपघट्य के
रूप में धातु
के लवण के
विलयन का
उपयोग किया
जाता है |
आयरन
के विद्युत
लेपन में
ज़िंक धातु का
प्रयोग किया
जाता है । आयरन धातु का संक्षारण ज़ंग लगना कहलाता है ।
पारा (मर्करी)
ऐसी धातु है जो साधारण ताप पर द्रव
अवस्था में पायी जाती
है। उदासीनीकरण अभिक्रिया एक आयनिक एथिल ऐल्कोहॉल का रासायनिक सूत्र ऐसीटिक अम्ल का IUPAC नाम एथेनाॅइक अम्ल है। IUPAC का पूरा नाम इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री (International Union of Pure and Applied Chemistry) है। प्रोपेनोन का सामान्य नाम एसीटोन है। -CHO या ऐल्डिहाइड -OH या ऐल्कोहॉल प्रोपेनोन (a) जब मेथेन को वायु की सीमित मात्रा में जलाया जाता है तो कार्बन मोनोऑक्साइड और जल वाष्प बनते हैं । 2CH4 + 3O2 (b) जब मेथेन को वायु की असीमित आपूर्ति में जलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड और जल वाष्प बनते हैं । a) प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ वे अभिक्रियाएँ होती है जिनमें एक यौगिक के किसी परमाणु या समूह को अन्य परमाणु या समूह द्वारा शेष अणु में बिना कोई परिवर्तन किये विस्थापित कर दिया जाता है । b) ऐल्केन की कम अभिक्रियाशीलता के कारण ये पैराफिन कहलाते हैं । c) CH4 तेल या वसा पर क्षार की अभिक्रिया से साबुन बनने की क्रिया को साबुनीकरण कहते हैं। एथेन की इलेक्ट्राॅन बिंदु संरचना एथीन की इलेक्ट्राॅन बिंदु संरचना एथिलीन क्लोरीन से क्रिया करके विनाइल क्लोराइड बनाती है जो एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। ऐसीटिक अम्ल का उपयोग किया जाता है : किसी कार्बनिक यौगिक का वह भाग जिस पर यौगिक के रासायनिक गुण निर्भर करते हैं, क्रियात्मक समूह कहलाता है । प्रमुख क्रियात्मक समूह है: हाइड्रॉक्सिल (-OH) एमिनो (-NH2) सायनो (-CN) नाइट्रो (-NO2) कार्बोनिल (>CO) कार्बोक्सिल (-COOH) ईथर (-C-O-C-) आदि। क्रियात्मक समूहों के प्रमुख लक्षण: � एक समान क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों को एक सजातीय श्रेणी में रखा जाता है। एथेन : कुल उपस्थित बन्धों की संख्या = 7 अतः उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या = 7 x 2 =14 एथाइन : कुल उपस्थित बन्धों की संख्या = 5 अतः उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या = 5 x 2 =10 एथीन : कुल उपस्थित बन्धों की संख्या = 6 अतः उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या = 6 x 2 =12 (i) जब ऐसीटिक अम्ल को एथिल ऐल्कोहॉल और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म किया जाता है तो एथिल ऐसीटेट के निर्माण के कारण एक मधुर फलों जैसी गंध आती है । (ii) ऐसीटिक अम्ल में कार्बोनेट और बाईकार्बोनेट डालने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है । २.अपमार्जक का उपयोग अम्लीय विलयन में भी किया जा सकता है क्योंकि अम्लीय माध्यम में भी यह अपने अवयवों में अपघटित नहीं होते। ३. अपमार्जक बर्फीले जल में भी झाग बना देते हैं जबकि साबुन ऐसा नहीं कर पाते। (a) एक प्रबल अपचायक जैसे लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH4) ऐसीटिक अम्ल को एथेनॉल में अपचयित कर सकता है । (b) फास्फोरस पेंटाऑक्साइड के साथ गर्म करने पर ऐसीटिक अम्ल जल का अणु त्याग देता है और ऐसीटिक एनहाइड्राइड बनाता है ।
कार्बन
तथा ऑक्सीजन
अधातु तत्व
हैं।
पीतल
तथा कांसा
मिश्र
धातुएं है। लैड हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील और कॉपर हाइड्रोजन से कम अभिक्रियाशील है।
सोडियम
ऑक्साइड (Na2O)
और
ऐल्यूमिनयम
ऑक्साइड (Al2O3)
मर्करी
हाइड्रोजन
के अधातु
होते हुए भी
इसे सक्रियता
श्रेणी में
सम्मिलित
किया गया है
क्योंकि धातुओं
की तरह
हाइड्रोजन
भी
इलेक्ट्रॉन
त्यागकर
धनायन बनाता
है ।
सोना
तथा चाँदी
धातुएं हैं।
ब्रोमीन एक
ऐसी अधातु है जो
साधारण ताप
पर द्रव
अवस्था में पाया जाती
है ।
आर्सेनिक
तथा
एन्टीमनी
उपधातुएं
हैं। मैग्नीशियम ऑक्साइड (
सल्फर सिलिकॉन
सोडियम
का टुकड़ा
ठन्डे जल में
डालने पर जल
से
हाइड्रोजन
को
विस्थापित
कर देता है
एवं जल के OH- आयन
से मिलकर हाइड्रॉक्साइड बनाता है
परन्तु लोहा, जल से
हाइड्रोजन
विस्थापित
नहीं करता है
अर्थात
सोडियम जल से
क्रिया करने
में आयरन आदि
की अपेक्षा
अधिक सक्रिय
है।
रासायनिक
अभिक्रियाओं
के आधार पर
धातुओं की
रासायनिक सक्रियता
की तुलना की
जा सकती है। ऐसे तुलनात्मक अध्ययन के
आधार पर
धात्वीय तत्वों को एक सक्रियता
क्रम में
व्यवस्थित किया गया
है जिसे विद्युत्
रासायनिक
श्रेणी कहते
हैं। यह श्रेणी
धातुओं की
सक्रियता के
अवरोही क्रम
में है। इसका
अर्थ है कि इस
श्रेणी की
कोई धातु
अपने से पहले
आने वाली
धातु से
विस्थापित
हो जाती है
तथा अपने से
बाद में आने
वाली धातु को
विस्थापित
करती है। विद्युत रासायनिक श्रेणी- धातुओं को उनके बढ़ते अपचयन विभवों (इलैक्ट्रोड विभवों) अथवा घटते हुए आक्सीकरण विभवों में क्रम में रखने पर प्राप्त धातुकम को धातुओं की विद्युत रासायनिक श्रेणी कहते है। अनुप्रयोग- सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में कॉपर का तार डालने पर कॉपर अपने से कम सक्रिय धातु को उसके लवणों के विलयन से विस्थापित कर देता है और कॉपर नाइट्राइट का निर्माण करता है इस कारण विलयन का रंग नीला हो जाता है। अम्ल लोहे पर ज़ंग लगने से रोकने की तीन विधियाँ है :
धातुओं
के तीन
रासायनिक
गुण रासायनिक
गुण धातु अम्लों
से क्रिया अम्लों की क्रिया
से कुछ
धातुएं हाइड्रोजन उत्पन्न
करती हैं । लवण
बनाना अम्ल के
साथ लवण
बनाते हैं । विद्युत्
प्रवृति यह धन
विद्युती होने के
कारण विद्युत्
अपघटन करने
पर कैथोड पर
एकत्रित होती है। i. जैव शक्ति सिद्धांत: बर्जीलियस नामक वैज्ञानिक ने जैव शक्ति सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस सिद्धांत के अनुसार- कार्बनिक पदार्थों की रचना के नियम अकार्बनिक पदार्थों की रचना के नियमों से भिन्न हैं तथा इस कारण कार्बनिक पदार्थों को प्रयोगशाला में नहीं बनाया जा सकता है। बर्जीलियस की इस धारणा का अन्य वैज्ञानिकों ने समर्थन किया। यह सिद्धांत अधिक समय तक मान्य नहीं रहा। ii. साबुन: उच्च अणुभार वाले मोनोकार्बोक्सीलिक अम्लों के सोडियम तथा पोटैशियम लवण साबुन कहलाते हैं। ये वसा या तेलों के तनु KOH या तनु NaOH द्वारा जल अपघटन से प्राप्त होते हैं। साबुन बनाने की अभिक्रिया- iii. सजातीय श्रेणी: सभी कार्बनिक यौगिकों को कुछ ऐसे वर्गों में विभाजित किया जा सकता है जिनके सदस्यों के गुणों तथा संरचनाओं में एक दूसरे से अधिक समानताएँ होती हैं। प्रत्येक वर्ग के किसी एक सदस्य के बनाने की विधियों तथा गुणों का ज्ञान होने पर उस वर्ग के सभी सदस्यों के बनाने की विधियों तथा गुणों का पर्याप्त सीमा तक स्वयं ही ज्ञान हो जाता है। इन वर्गों को सजातीय श्रेणियाँ कहते हैं। इस प्रकार कई लाख यौगिकों का अध्ययन कुछ सजातीय श्रेणियों के अध्ययन तक सीमित हो गया है। शाखित ऐल्केन का नामकरण: सबसे लम्बी श्रृंखला से जुड़े कार्बन परमाणुओं को उनकी संख्या के अनुसार ऐल्किल समूह की भांति नाम दिया जाता है। कार्बन परमाणुओं की सबसे लम्बी श्रृंखला को इस प्रकार क्रमांक दिए जाते हैं कि ऐल्किल समूह कम से कम क्रमांक वाले कार्बन से जुड़े। यदि किसी यौगिक में कार्बन परमाणुओं की सबसे लम्बी श्रृंखला से एक से अधिक ऐल्किल समूह जुड़े हैं तो श्रृंखला को इस प्रकार क्रमांक दिए जाते हैं कि सभी ऐल्किल समूहों वाले कार्बन परमाणुओं के क्रमांकों का योग निम्नतम रहे। शाखित हाइड्रोकार्बनों के नाम में सर्वप्रथम ऐल्किल समूहों की स्थिति (क्रमांक) तथा अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार ऐल्किल समूहों के नाम लिखे जाते हैं, इसके पश्चात कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला का नाम लिखा जाता है। कम होते हैं धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं जबकि अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं | आधुनिक आवर्त सारणी में धातुएँ बायीं तरफ और अधातुएँ दायीं तरफ उपस्थित होती हैं | अतः आवर्त सारणी में बायें से दायें जाने पर ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति में कमी और अम्लीय प्रकृति में वृद्धि होती है |
एका-सिलिकॉन B. एका-बोरॉन C. एका-ऐलुमिनियम D. एका-जर्मेनियम बाद में खोजे गए स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम के गुण क्रमशः एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम और एका-सिलिकॉन के समान थे |
जब हम एक समूह में नीचे की ओर जाते हैं तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ कोशों की संख्या बढ़ती है |
परमाणु द्रव्यमान के B. परमाणु संख्या के C. संरचना के D. न्युक्लियोन्स के मेन्डेलीफ ने तत्वों के परमाणु द्रव्यमान एवं उनके भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों के बीच संबंधों का अध्ययन किया | उसके आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्त फलन होते हैं |
डॉबेराइनर के अनुसार जब तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो मध्य वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों के औसत के लगभग बराबर होता है |
बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से B. इसके परमाणु में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या से C. एक परमाणु में कोशों की संख्या से D. इलेक्ट्रॉनों और प्रोटोनों की कुल संख्या से एक तत्व की संयोजकता उसके इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने, देने या साझा करने की क्षमता होती है | बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या एक तत्व की संयोजकता का निर्धारण करती है |
लीथियम B. नाइट्रोजन C. ऑक्सीजन D. कार्बन लीथियम द्वितीय आवर्त में सबसे बड़े परमाण्वीय आकार वाला तत्व है क्योंकि एक आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु का आकार घटता है और लीथियम द्वितीय आवर्त का पहला तत्व है |
संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है समान आवर्त में उपस्थित तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में कोशों की संख्या समान होती है | समान समूह में उपस्थित तत्व समान संख्या में संयोजकता इलेक्ट्रॉन रखते हैं |
एक परमाणु की त्रिज्या B. एक परमाणु का आयतन C. एक परमाणु का पृष्ठीय क्षेत्रफल D. एक परमाणु का घनत्व एक परमाणु की परमाण्वीय त्रिज्या उस परमाणु के परमाण्वीय आकार की माप होती है, जो सामान्यतः नाभिक से उसे घेरे हुए इलेक्ट्रॉन अभ्र की सीमा की दूरी होती है |
क्लोरीन
B.
फ्लोरीन
C.
आर्गन
D.
नाइट्रोजन
आर्गन
पूर्ण अष्टक
युक्त एक
उत्कृष्ट
गैस है |
उत्कृष्ट
गैसों की खोज
बहुत बाद में
हुई क्योंकि
ये अक्रिय
होती हैं और
इनकी
सांद्रता भी
बहुत कम होती
है |
60 B. 63 C. 67 D. 72 जब मेन्डेलीफ ने काम करना प्रारम्भ किया था , उस समय तक केवल 63 तत्व ज्ञात थे | उन्होंने तत्वों के परमाणु द्रव्यमान एवं उनके भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों के बीच संबंधों का अध्ययन किया |
Li, Na, K B. Cu, Ag, Au C. He, Ne, Ar D. F, Cl, Br हीलियम, नियॉन और आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसों का बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा होता है | इन गैसों की अनभिक्रियाशीलता पूर्ण भरे बाह्यतम कोश के कारण होती है |
विभिन्न कोशों में इलेक्ट्रॉन कैसे भरे गए हैं । B. सूत्र 2n पर C. हमारी अपनी सुविधा पर D. औसत परमाणु द्रव्यमान पर एक निश्चित आवर्त में तत्वों की अधिकतम संख्या इस पर निर्भर करती है कि विभिन्न कोशों में इलेक्ट्रॉन कैसे भरे गए हैं | एक कोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या सूत्र 2n2 पर निर्भर करती है जहाँ n नाभिक से नियत कोश की संख्या को बताता है | इसलिए K कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसमे दो तत्व हैं | M कोश में 8 इलेक्ट्रॉन और 8 तत्व हैं |
7 B. 8 C. 18 D. 16 आधुनिक आवर्त सारणी में 18 ऊर्ध्व स्तम्भ होते हैं जिन्हें 'समूह' कहा जाता है और 7 क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें 'आवर्त' कहा जाता है |
परमाणु
के घनत्व पर B.
परमाणु
आयतन पर C.
परमाणु
संख्या पर D.
परमाणु
द्रव्यमान
पर
मेन्डेलीफ
की आवर्त
सारणी में
परिवर्तन
किया गया तथा
परमाणु
संख्या को
आधुनिक
आवर्त सारणी
के आधार के
रूप में
स्वीकार
किया गया |
आधुनिक
आवर्त नियम
के अनुसार
'तत्वों के
गुणधर्म उनकी
परमाणु-संख्या
का आवर्त फलन
होते हैं|'
गैलियम B. जर्मेनियम C. स्कैंडियम D. सिलिकॉन मेन्डेलीफ ने कुछ तत्वों के अस्तित्व का अनुमान लगाया जो उस समय तक ज्ञात नहीं थे | मेन्डेलीफ ने इनका नामकरण उसी समूह में इनसे पहले आने वाले तत्व के नाम के आगे संस्कृत उपसर्ग एका लगाकर किया | मेन्डेलीफ ने स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम को क्रमशः एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम और एका-सिलिकॉन नाम दिया |
सातवें तत्व के B. तीसरे तत्व के C. आठवें तत्व के D. सौवें तत्व के न्यूलैंड्स ने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व के गुणधर्म पहले तत्व के गुणधर्म के समान हैं | उन्होंने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की | इसलिए उन्होंने इसे 'अष्टक का नियम' कहा | न्यूलैंड्स के अष्टक में लीथियम और सोडियम के गुणधर्म समान थे | सोडियम, लीथियम के बाद आठवाँ तत्व है | इसी तरह बेरिलियम एवं मैग्नीशियम में अधिक समानता है |
कार्बन से एक विशेष क्रम में जुड़ा एक परमाणु या परमाणुओं का समूह है प्रकार्यात्मक समूह एक कार्बनिक यौगिक में एक परमाणु या परमाणुओं का समूह जो आपस में एक विशिष्ट क्रम में जुड़ा होता है |
जिसमें
एक कार्बन
श्रंखला में
समान
प्रकार्यात्मक
समूह
हाइड्रोजन
को
प्रतिस्थापित
करता है
समजातीय
श्रेणी
यौगिकों की
ऐसी श्रंखला
जिसमें
कार्बन
श्रंखला में
स्थित
हाइड्रोजन
को एक ही
प्रकार का
प्रकार्यात्मक
समूह प्रतिस्थापित
करता है |
क्रमागत
यौगिकों का
सूत्र एक −CH2 इकाई
द्वारा
भिन्न होता
है | श्रंखला
के प्रत्येक
सदस्य को एक
सामान्य
सूत्र
द्वारा
प्रदर्शित
किया जाता है |
उदाहरण:
एल्कीन के
लिए CnH2n |
सहसंयोजी आबंध वाले अणुओं में भीतर तो प्रबल आबंध होता है, लेकिन इनका अन्तराअणुक बल कम होता है | इसके कारण इन यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं | चूँकि परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है और कोई आवेशित कण नहीं बनते हैं; सामान्यतः ऐसे सहसंयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं |
B. C. क्रियात्मक समूह से D. यौगिकों की ऐसी श्रंखला जिसमें कार्बन श्रंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह प्रतिस्थापित करता है, उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं | एक समजातीय श्रेणी के दो क्रमागत सदस्यों के अणुभार में CH2 (कार्बन का परमाणु भार 12 u और हाइड्रोजन का परमाणु भार 1 u होता है ) या 14 u का अंतर होता है |
एक अप्रिय गंध देते हैं कार्बन अपने सभी अपररूपी रूपों में ऊष्मा और प्रकाश के उत्सर्जन के साथ कार्बन डाइऑक्साइड देते हैं | अधिकांश कार्बनिक यौगिक जलाने पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं |
एल्किल
समूह से −OH समूह
जुड़ा होता है
एल्कोहॉल
में −OH
क्रियात्मक
समूह
उपस्थित
होता है | सभी
एल्कोहॉल का
नामकरण मूल
कार्बन
श्रंखला में -e
को −ol से
प्रतिस्थापित
करके किया
जाता है |
अभिकारकों
को मिलाने पर
शीघ्र
अभिक्रिया
होती है
असंतृप्त
हाइड्रोकार्बनों
में उत्प्रेरक
की उपस्थिति
में
हाइड्रोजन
संयोजित
होता है |
संतृप्त हाइड्रोकार्बन किसी अकार्बनिक यौगिक में से धनायन को प्रतिस्थापित कर देते हैं प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ वे अभिक्रियाएँ होती है जिनमें एक प्रकार के परमाणु या परमाणुओं का समूह दूसरे प्रकार के परमाणु या परमाणुओं के समूह का स्थान ले लेते हैं |
सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में एक एल्कोहॉल की कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ अभिक्रिया B. एक नए पदार्थ का निर्माण C. एक प्रकार की संयोजन अभिक्रिया D. एक प्रकार की पुनर्विन्यास अभिक्रिया एथेनॉइक अम्ल किसी अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में परिशुद्ध एथनॉल से अभिक्रिया कर एस्टर बनाते हैं जो मृदु गंध रखता है |
क्षारीय
KMnO4
द्वारा
एथनैल में B.
क्षारीय
KMnO4
द्वारा एथेनॉइक
अम्ल में C.
क्यूप्रिक
ऑक्साइड की
उपस्थित में
एथनैल में D.
प्लेटिनम
उत्प्रेरक
की उपस्थिति
में एथेनॉइक
अम्ल में
एथनॉल
अम्लीय या
क्षारीय KMnO4 से
अभिक्रिया
कर एथेनॉइक
अम्ल में
ऑक्सीकृत हो
जाता है |
एस्टर
का
निर्जलीकरण B.
एस्टर
का जलअपघटन C.
एस्टर
का जलयोजन D.
एस्टर
का निर्माण
एस्टर
एक अम्ल या
क्षार की
उपस्थिति
में अभिक्रिया
करके
एल्कोहॉल और
कार्बोक्सिलिक
अम्ल देते
हैं |
साबुन धूल कणों के साथ क्रिया करती है साबुन के अणु लम्बी श्रंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं | साबुन का आयनिक सिरा जल में घुल जाता है जबकि कार्बन श्रंखला तेल में घुल जाती है | साबुन के अणु मिसेल का निर्माण करते हैं जिसमें अणु का एक सिरा तेल की बूंद की ओर होता है जबकि आयनिक सिरा बाहर की ओर होता है |
इससे पानी में इमल्शन बनता है | साबुन के मिसेल मैल को जल में घोलने में सहायता करते हैं |
डेकेन B. हीरा C. फुलेरीन D. ग्रेफाइट फुलेरीन कार्बन के अपररूपों का अन्य वर्ग बनाते हैं | सबसे पहला खोजा गया फुलेरीन C-60 था, जिसमें कार्बन परमाणु एक फुटबॉल की आकृति में व्यवस्थित होते हैं | चूँकि यह अमेरिकी आर्किटेक्ट बकमिन्सटर फुलर द्वारा डिज़ाइन किए गए जियोडेसिक गुम्बद के समान लगते हैं, इसलिए इस अणु को फुलेरीन नाम दिया गया |
एथिलीन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) को एथेन (संतृप्त हाइड्रोकार्बन) में संकलन अभिक्रिया द्वारा परिवर्तित कर सकते हैं । पैलेडियम अथवा निकैल जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन देते हैं। जब सोडियम कार्बोनेट में एथेनॉइक अम्ल डाला जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है । इस गैस की उपस्थिति को इसे चूने के पानी में प्रवाहित करके ज्ञात किया जा सकता है । इससे चूने का पानी दूधिया हो जाता है । ऐसे कार्बनिक यौगिक जो केवल कार्बन एवं हाइड्रोजन से मिलकर बनते हैं यह एक कृत्रिम फुलेरीन (कार्बन अपररूप का अन्य वर्ग) है जो बकमिन्सटर फुलेरीन के नाम से जाना जाता है । फुलेरीन कार्बन अपररूप का अन्य वर्ग है । ये अमेरिकी आर्किटेक्ट बकमिन्सटर फुलर द्वारा डिज़ाइन किए गए जियोडेसिक गुंबद के समान लगते हैं । CH3OH का सामान्य नाम मेथिल ऐल्कोहॉल एवं IUPAC नाम मेथेनॉल है। असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कच्चे फलों को पकाने के लिए एथिलीन गैस का उपयोग किया जाता है । पाचन B.
उत्सर्जन C.
गमन D.
श्वसन
प्रकाश
संश्लेषण के
प्रक्रम के
दौरान कार्बन
डाई ऑक्साइड (CO2)
का अवशोषण
होता है और
कार्बोहाइड्रेट
का निर्माण
होता है ।
संरचनाओं
की मरम्मत
करने और उनको
बनाए रखने के
लिए B.
पोषण C.
श्वसन D.
मरम्मत
जीवन
के लिए संरचनाओं
की मरम्मत
करने और उनको
बनाए रखने के
लिए आण्विक
गतियों की
आवश्यकता
होती है । जब
एक कटी हुई
अंगुली से
खून निकलता
है ये आण्विक
गतियाँ न
केवल खून के
बहने को
रोकती हैं
बल्कि घाव को
भरने मे भी
सहायता करती
हैं ।
डायालाइसिस/अपोहन B.
परासरण
C.
विसरण D.
जीवद्रव्य
कुंचन
चिकित्सकीय
रूप से अपोहन
वृक्कीय
विस्थापन का
सिद्धान्त
है जो वृक्क
के अपक्रिय
हो जाने की
अवस्था में
वृक्कों के
कार्य को
करने के लिए
कृत्रिम रूप
से विस्थापन
है ।
एडिनोसिन
टेट्रा
फॉस्फेट B.
एडिनोसिन
ट्राई
फॉस्फेट C.
एडिनाइलेटट्राई
फॉस्फेट D.
एडिनाइलेटटेट्रा
फॉस्फेट
ATP का
पूरा नाम, एडिनोसिन
ट्राई
फॉस्फेट है
जो एक उच्च
ऊर्जा अणु है
।
लसिका
B.
विटामिन्स C.
हॉर्मोन्स
D.
एंजाइम्स
लसिका
तंत्र लसिका
अंगों,
लसिका
गांठों,
लसिका
वाहिनियों, लसिका
ऊतकों,
लसिका
केशिकाओं और
लसिका
वाहिकाओं का
एक जटिल जाल
है जो लसिका
तरल को
उत्पन्न
करता है और ऊतकों
से परिसंचरण
तंत्र में
परिवहन भी
करता है ।
जर्मेनियम B.
नाइट्रोजन C.
गोल्ड D.
निकल
नाइट्रोजन
पौधों में
प्रोटीन और
दूसरे यौगिकों
के संश्लेषण
के लिए
आवश्यक है ।
प्रोटीन
पाचन में B.
पेप्सिन
के सक्रियण
में C.
अमीनो
अम्लों के
पाचन में D.
आमाशय की
भित्ति की
सुरक्षाSOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
![]()
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B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
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(a) वायु की सीमित आपूर्ति में ।
(b) वायु की असीमित आपूर्ति में ।
उपरोक्त अभिक्रियाओं के लिए रासायनिक समीकरण भी लिखिए ।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
2CO + 4H2O
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION


B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
� समान क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों के रासायनिक गुण भी समान होते हैं।
� अलग-अलग क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों के भौतिक एवं रासायनिक गुण भी अलग-अलग होते हैं।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION


B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
१. साबुन का उपयोग केवल मृदु जल में किया जा सकता है जबकि अपमार्जक का उपयोग मृदु तथा कठोर दोनों प्रकार के जल में किया जा सकता है ।
(a) एक अपचायक जो ऐसीटिक अम्ल को ऐथेनॉल में परिवर्तित करने में इस्तेमाल किया जाता है ।
(b) ऐसीटिक अम्ल को ऐसीटिक एनहाइड्राइड में परिवर्तित करने में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ ।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

Ba, K, Li, Ca, Na, Zn, Mg, Al, K
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
Li > K > Ba > Ca > Na > Mg > Al > Zn
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(ब) उप-धातुओं के दो उदाहरण दीजिए।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
a) एस्टर
b) ऐल्डिहाइड
c) कार्बोक्सिलिक अम्ल
d) कीटोन
e) ईथर
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
उदाहरण : CH3COOCH3, CH3COOC2H5, आदि ।
b) ऐल्डिहाइड: ये वे यौगिक होते हैं जो ऐल्डिहाइड (−CHO) समूह रखते हैं । इनका सामान्य सूत्र R−CHO होता है । उदाहरण : CH3CHO, C2H5CHO, आदि ।
c) कार्बोक्सिलिक अम्ल: वे यौगिक जो कार्बोक्सिलिक (−COOH) समूह रखते हैं , कार्बोक्सिलिक अम्ल कहलाते हैं । इनका सामान्य सूत्र R−COOH होता है ।
उदाहरण : CH3COOH, C2H5COOH, आदि ।
d) कीटोन: वे यौगिक जो कीटोनिक (>C=O) समूह रखते हैं , कीटोन कहलाते हैं । इनका सामान्य सूत्र R−CO−R होता है ।
उदाहरण : CH3COCH3, C2H5COCH3, आदि ।
e) ईथर: वे यौगिक जो जल के दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं के समान या विभिन्न एल्किल समूहों द्वारा प्रतिस्थापन के फलस्वरूप बनते हैं ईथर कहलाते हैं । इनका सामान्य सूत्र R−O−R होता है ।
उदाहरण : CH3−O−CH3, C2H5−O−CH3, आदि ।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

iv समूह या मूलक: किसी यौगिक की संरचना में उपस्थित वे परमाणु या परमाणुओं के वे समूह जिनके अपने विशेष गुण होते हैं, समूह या मूलक कहलाते हैं।
उदाहरण: एथिल ऐल्कोहल के एक अणु में एक एथिल तथा एक ऐल्कोहल समूह उपस्थित होते हैं।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
• शाखित हाइड्रोकार्बनों में सर्वप्रथम कार्बन परमाणुओं की सबसे लम्बी सीधी श्रृंखला का चुनाव किया जाता है तथा उसे ऐल्केन की भांति नाम दिया जाता है।




यदि किसी यौगिक में एक जैसे एक से अधिक ऐल्किल समूह हों तो ऐल्किल समूह के नाम से पहले डाई, ट्राई आदि लगाया जाता है तथा उनकी अलग-अलग स्थिति भी लिखी जाती है।

A. SOLUTION
A. SOLUTION
Right Answer is: A
SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
Right Answer is: A
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.