नर और मादाओं में यौवनावस्था में स्त्रावित हॉरमोन क्रमशः टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन है ।
एक वृद्धि पर आधारित, दूसरी वृद्धि पर आधारित नहीं होती (जैसे उद्दीपन, पानी की मात्रा में परिवर्तन के प्रति अनुक्रिया)
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय दो प्रकार से होता है -
1. तंत्रिका तंत्र
2. अन्तः स्त्रावी तंत्र
इंसुलिन अग्नाश्य द्वारा स्त्रावित हॉरमोन है ।
अग्र मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है। यह वह स्थान है जो संवेदी आवेगों को विभिन्न ग्राहियों से प्राप्त करता है । अग्र मस्तिष्क का पृथक भाग सुनने, गंध और देखने के लिए विशेषीकृत होता है ।
क्योंकि ये अपने हॉर्मोन्स को भेजने के लिए नलिकाएं नहीं रखती हैं ।
करोटि का अस्थिल भाग जिसमें मस्तिष्क परिबद्ध रहता है, कपाल कहता है ।
तंत्रिका कोशिका
'A' केंद्रक और 'B' एक्सॉन हैं।
पादप हॉर्मोन/फाइटोहोर्मोन
स्पंज
प्रांकुर और मूलांकुर
मेड्यूला ओब्लोंगेटा
|
क्रमांक |
प्रकाशिक अभिक्रिया |
अप्रकाशिक अभिक्रिया |
|
1. |
इसके लिए प्रकाश की उपस्थिति अनिवार्य है। |
यह प्रकाश ऊर्जा से मुक्त होती है। |
|
2. |
हरित लवक के ग्रैना में संपन्न होती है। |
हरित लवक के स्ट्रोमा में संपन्न होता है। |
|
3. |
O2, ATP और H+ बनते हैं। |
ग्लूकोज के निर्माण के लिए CO2 स्थिर हो जाती है। |
a. यकृत कोशिकाएं
b. प्रकाश संश्लेषण में उपउत्पाद के रूप में निष्कासित गैस ऑक्सीज़न है।
c. हीमोग्लोबिन स्तनधारियों की RBC में पाया जाने वाला एक क्रोमोप्रोटीन है जो श्वसनीय वर्णक की तरह कार्य करता है।
a. गलत, क्लोरोफिल'a' के अणु प्रकाश की लाल तरंग दैर्ध्य के द्वारा मुख्य रूप से उत्तेजित हो जाते हैं।
b. गलत, रक्षक कोशिकाएँ रंघ्रीय प्रस्वेदन को नियमित करती है।
c. सही
d. सही
f. गलत, क्लोरोफिल अणु द्वारा मुक्त इलेक्ट्रान प्रकाश अभिक्रिया के जल अणुओं के इलेक्ट्रॉन्स से प्रतिस्थापित हो जाता है।
a. एंटीजन
b. पाचन
c. प्लाज्मा
d. सीमाकारी कारक नियम
e. एब्सिसिक अम्ल
वृक्क की क्रिया-विधिः- वृक्कों का प्रमुख कार्य शरीर से उत्सर्जी पदार्थों जैसे-यूरिया, यूरिक अम्ल आदि को रूधिर से अलग कर मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकालना है। इसके अतिरिक्त वृक्क रूधिर में उपस्थित अतिरिक्त जल व लवणों को भी शरीर से निकालकर जल और लवण सन्तुलन को बनाये रखते हैं। वृक्कनलिका की मैलपीघी कोष में उपस्थित केशिकाओं का जाल, केशिकागुच्छ या ग्लोमेरूलस में एक अपेक्षाकृत चौडी रूधिरवाहिनी से रूधिर में प्रवेश करता है। ग्लोमेरूलस के ठीक बाद रूधिर को केशिका गुच्छ से बाहर लाने वाली रूधिरवाहिनी अपेक्षाकृत संकरी होती है। अतः केशिकागुच्छ में जितना रूधिर प्रवेश करता है, उतना बाहर नहीं निकलता, जिसके फलस्वरूप यहाँ रूधिर का दाब बढ़ जाता है। इस अधिक दाब पर रूधिर कोशिकाओं व प्रोटीन को छोड़कर रूधिर का अधिकांश जल तथा अन्य घुलनशील पदार्थ जैसे- यूरिया, यूरिकअम्ल, ग्लूकोज, अनेक लवण आदि होते हैं। छनने की इस क्रिया को अतिसूक्ष्मनिस्यन्दन कहते हैं। जब यह छना हुआ द्रव वृक्कनलिका के कुण्डलित भाग में आगे बढ़ता है, तो उस भाग की रूधिर केशिकायें इसमें उपस्थित लाभप्रद, पदार्थों जैसे-ग्लूकोज, कुछ लवण, जल आदि को अवशोषित करके पुनः रूधिर में पहुँचा देती हैं। धीरे-धीरे वृक्क में यूरिया, यूरिक अम्ल, कुछ जल व अन्य हानिकारक लवण रह जाते हैं यह मूत्र कहलाता है। मूत्र वृक्कनलिका से संग्राहक नलिकाओं में होता हुआ मूत्रवाहिनी में पहुँचजाता है। मूत्रवाहिनी द्वारा मूत्र, मूत्राशय में पहुँच जाता है और समय-समय पर मूत्रमार्ग से बाहर निकाल दिया जाता है।
A.
समान बहिः स्त्रावी ग्रंथि को
B.
दूसरीबहिः स्त्रावी ग्रंथिको
C.
समान अन्तः स्त्रावी ग्रंथि को
D.
दूसरी अन्तः स्त्रावी ग्रंथिको
ट्रोफिक हॉर्मोन वह हॉर्मोन है जो दूसरी अन्तः स्त्रावी ग्रंथिकोउत्प्रेरित करता है जैसे थायरोइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन के स्त्रवण को प्रेरित करता है ।
A.
मेड्यूला ओब्लोंगेटा
B.
अनुमस्तिष्क
C.
प्रमस्तिष्क
D.
मेरुरज्जु
प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है जो बाएँ और दायें गोलार्धों का बना होता है ।
A.
कैरोटीनोइड
B.
एंथोसाएनिन
C.
पर्णहरित
D.
जैन्थोफिल
पर्णहरित अधिकांश पादपों, शैवालों और सायनोबैक्टीरिया में पाया जाने वाला हरे रंग का वर्णक है। पर्णहरित अधिकतर नीले और लाल क्षेत्र से प्रकाश अवशोषित करता है । लेकिन हरे क्षेत्र से बहुत कम दृश्य प्रकाश अवशोषित करता है । इसकारण पर्णहरित युक्त ऊतक जैसे पौधों की पत्तियाँ हरे रंग की होती हैं ।
A.
ऑक्सिनिक अम्ल
B.
एब्सट्रेक्ट अम्ल
C.
एब्सिसिक अम्ल
D.
एब्सिसिक ऑक्सिन
एब्सिसिक अम्ल एक पादप हॉरमोन है जो एक वृद्धि अवरोधक है ।
A.
ग्लूकोज
B.
कॉर्टिसोल
C.
स्टेरोइड
D.
केरोटिनोइड
कोर्टिसोल एड्रीनल वल्कुट द्वारा उत्पन्न कोर्टिकोस्टेरोइड या ग्लूकोकॉर्टिकोइड हॉरमोन है, यह एड्रीनल ग्रंथि का एक भाग (एड्रीनल वल्कुट में जोना फेसिकुलेटा और जोना रेटीकुलेरिस) है ।
A.
तरलीकरण
B.
बसंतीकरण
C.
पृष्ठ पोषण
D.
दीप्तकालीता
बसंतीकरण एक प्रक्रम है जिसके द्वारा कुछ पादपों में पुष्पीय प्रेरण के लिए पादपों को निश्चित अवधि के लिए शीत उपचारित किया जाता है।
A.
आयोडीन की
B.
केल्शियम की
C.
फोस्फोरस की
D.
मेग्नीशियम की
घेंघा, गर्दन का सामने और दोनों ओर फैल जाना है जो थायरॉइड ग्रंथि में सूजन के कारण होता है ।
A.
प्रमस्तिष्क
B.
कोक्लिया
C.
कर्णपटह
D.
मेक्युला
कर्णपटह, एक पतली झिल्ली है जो बाह्य कर्ण को मध्य कर्ण से अलग करता है। इसका कार्य आवाज को वायु से मध्य कर्ण में कर्ण अस्थिकाओं को संचारित करना है।
A.
उत्सर्जी तंत्र
B.
पाचन तंत्र
C.
तंत्रिका तंत्र
D.
श्वसन तंत्र
न्यूरोन तंत्रिका तंत्र कि क्रियात्मक ईकाई है, जो विद्युतीय आवेगों द्वारा उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करता है।
A.
प्रकाश के प्रति
B.
आवाज के प्रति
C.
गैस के प्रति
D.
जल के प्रति
प्रकाश के प्रतिएक पौधे कि अनुक्रिया प्रकाशानुवर्तनकहलाती है । पौधे का मूल तंत्र ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन दर्शाता है जबकि प्ररोह तंत्र धनात्मक प्रकाशानुवर्तन दर्शाता है ।
A.
फ्रन्टल पिंड
B.
ओक्सीपिटल पिंड
C.
टेम्पोरल पिंड
D.
पेराइटल पिंड
टेम्पोरल पिंड प्रमस्तिष्क का भाग हैं, जो कि आवाज, स्मृति और सुनने से संबन्धित है । ये मस्तिष्क के एक ओर, पार्श्व या सिलवियन विदर के नीचे स्थित होते हैं ।
A.
स्क्लेरा
B.
आइरिस
C.
पोंस
D.
स्टेपीज़
स्टेपीज़ या रकाब यह मध्य कर्ण में स्थित कर्ण अस्थिकाएं या रकाब के आकार कि छोटी अस्थियां हैं। यह शरीर कि सबसे छोटी अस्थि है ।
A.
एडिनोकार्टिकोट्रोपिक हॉर्मोन
B.
एड्रीनोकॉर्टिकोट्रोफिक हॉर्मोन
C.
एड्रीनोकोर्टोसोल्ट्रोफिक हॉर्मोन
D.
एड्रीनोकेरोटिनोइड्स हॉर्मोन
एड्रीनोकॉर्टिकोट्रोफिकहॉर्मोनया A.C.T.H एड्रीनल वल्कुट कि गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं । यह मुख्यतः एड्रीनल वल्कुट को कोर्टिकोस्टेरोइड स्त्रावित करने को प्रेरित करते हैं, जो तनाव में मानव शरीर को सुरक्षा देता है ।
A.
कशेरुक दंड
B.
मेंडिबल
C.
मेरुरज्जु
D.
कपाल
करोटि का भाग जिसमें हमारा मस्तिष्क स्थित होता है, कपाल कहलाता है कपाल के अंदर तीन सुरक्षात्मक झिल्लियाँ होती हैं जो मस्तिष्कावरण कहलाती हैं ।
A.
ये बहुत ही कम मात्र में स्त्रावित होते हैं
B.
विशिष्ट अंगों और ऊतकों पर कार्य करते हैं
C.
जहां ये बने हैं उस स्थान से भिन्न किसी स्थान पर पहुँचकर प्रभाव डालते हैं
D.
सीधे रक्त में मिल जाते हैं
हॉर्मोन्स वे रसायन हैं जो शरीर के दूसरे भागों की कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं । कोशिका उपापचय को ठीक करने के लिए होर्मोन्स की केवल एक छोटी मात्रा की ही आवश्यकता होती है । ये एक रासायनिक संदेश को एक कोशिका से दूसरी में परिवहन के लिए आवश्यक है ।
A.
द्विविखंडन
B.
खंडन
C.
पुनरुदभवन
D.
मुकुलन
मुकुलन जनक जीवों से निकले उभारों से नए जीव का निर्माण है, यह पादपों, कवकों और एककोशिकीय जीवों जैसे हाइड्रा में सामान्य है ।
A.
जीव
B.
अंग तंत्र
C.
कोशिका
D.
अंग
एक विशिष्ट कार्य या अनेक कार्यों के समूह को करने के लिए व्यवस्थित ऊतकों का समूह अंग का निर्माण करता है।
A.
परिपक्व अंडाशय
B.
परिपक्व बीजांड
C.
परिपक्व भ्रूण
D.
पका हुआ फल
निषेचन के बाद युग्मनज बीजांड में भ्रूण बनाने के लिए अनेक बार विभाजित होता है । बीजांड एक कठोर आवरण बनाता है और धीरे धीरे बीज में परिवर्धित हो जाता है । अंडाशय वृद्धि कर फल बनाता है।
A.
निषेचन
B.
परिपक्वन
C.
अंकुरण
D.
जनन
बीज में भविष्य का पादप या भ्रूण होता है जो अनुकूल वातावरणीय परिस्थितियों में पादपकों में परिवर्धित हो जाता है । यह प्रक्रम अंकुरण कहलाता है।
A.
DNA की प्रतिलिपि
B.
कोशिका विभाजन
C.
केन्द्रकीय पृथक्करण
D.
कोशिका मुकुलन
DNA की प्रतिलिपि में नियमितता शारीरिक गठन को बनाए रखने में सहायता करती है। DNA की प्रतिलिपि, DNA प्रतिकृतिकरण के प्रक्रम द्वारा होती है।
A.
गुणसूत्र
B.
रिक्तिका
C.
अंतःप्रद्रव्यी जालिका
D.
माइटोकोंड्रिया
गुणसूत्र डीएनए का एकल दीर्घाणु है, और आनुवांशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाने के लिए एक कोशिका में स्थित होता है।
A.
गुणसूत्रों का निर्माण
B.
DNA की प्रतियाँ बनाना
C.
कोशिकाओं का निर्माण
D.
कोशिकाओं का विभाजन
कोशिका विभाजन के दौरान इंटरफेज की S-प्रावस्था में DNA का पुनर्निर्माण होता है जो दोनों पुत्री कोशिका में समान रूप से वितरित हो जाता है ।
A.
परागण
B.
मुकुलन
C.
युग्मकजनन
D.
निषेचन
परागण बीजीय पादपों में जनन का एक महत्वपूर्ण प्रक्रम है जिसमें परागकणों (नर युग्मकों ) का जायांग, (जो बीजांड या मादा युग्मक धारण करने की संरचना है) में स्थानांतरण होता है । जायांग का ग्राही भाग आवृतबीजियों के पुष्पों में वर्तिकाग्र कहलाता है।
A.
नर युग्मकों का निर्माण
B.
मादा युग्मकों का निर्माण
C.
विपरीत लिंगों का युग्मन
D.
समान लिंगों का युग्मन
सहवास विपरीत लिंगों या उभयलिंगी आंतरिक निषेचन या मैथुन है और सामाजिक प्राणियों में उनकी संततियों को भी उत्पन्न करता है ।
A.
हाइड्रा
B.
राइजोपस
C.
गन्ना
D.
अमीबा
कायिक प्रवर्धन पादपों में पाया जाने वाला अलैंगिक जनन का एक प्रकार है। इस प्रक्रम के द्वारा बीज के निर्माण के बिना एक नया पौधा परिवर्धित किया जा सकता है ।
A.
जिम्यूल
B.
मुकुल
C.
अंत:बीजाणु
D.
युग्मक
मुकुल जनक हाइड्रा के शरीर पर छोटी बाह्य अतिवृद्धि है। यह अलैंगिक जनन के लिए उत्तरदायी हैं ।
A.
जनन क्षम
B.
बंध्य
C.
चल
D.
अचल
चल बीजाणु जो गति के लिए कशाभ या पक्ष्माभ का उपयोग करते हैं ।
A.
DNA का एक भाग
B.
आनुवांशिक रूप से समान जीव
C.
आनुवांशिक रूप से असमान जीव
D.
आकारिकी रूप से भिन्न जीव
क्लोन्स, अलैंगिक रूप से परिवर्धित आकारिकी और आनुवंशिकी रूप से समान संतति है ।
A.
जनन
B.
विखंडन
C.
पुनरुदभवन
D.
खंडन
शरीर के भागों या खंडों से सम्पूर्ण जीव का निर्माण विखंडन कहलाता है, जैसे - स्पाइरोगायरा
A.
अलैंगिक जनन का
B.
लैंगिक जनन का
C.
युग्मक जनन का
D.
बीजाणुजनन का
कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन का एक प्रकार है, जिसमें एक पौधे का कायिक भाग समरूप संततियों का निर्माण करते हैं ।
हाइड्रा
अनचाहे गर्भधारण को रोकने के लिए
प्लेनेरिया
डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल
वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय
A.
एक आबादी में जीव का भविष्य निर्धारित करता है
B.
प्रथम संतति पीढ़ी में प्रकट करते हैं
C.
दूसरी संतति पीढ़ी में � के अनुपात में प्रकट होते हैं
D.
एक जीव को प्राथमिक उपभोक्ता के रूप में भाग लेता है
प्रभावी लक्षण उन एलिल्स का प्रगटन है जो की F1 संतति में 100% प्रकट होते हैं।
A.
व्यवहारात्मक चलन
B.
लक्षण और विशेषताएँ
C.
आबादी का आकार
D.
वातावरणीय दशा
जनन का प्रक्रम समान प्रकार की संतति उत्पन्न करता है। इसप्रकार आनुवंशिकता के नियम उस प्रक्रम का निर्धारण करते हैं जिसके द्वारा लक्षणों की वंशागति विश्वसनीय रूप से निर्धारित होती है।
A.
जैवविकासीय प्रक्रम का आधार बनती हैं
B.
जनन का आधार बनती हैं
C.
लक्षणों की वंशागति बनती हैं
D.
लिंग निर्धारण का आधार बनती हैं
वातावरणीय कारकों जैसे तापमान के कारण विविधताएँ जैवविकासीय प्रक्रम का आधार बनती हैं।
A.
रूपान्तरण
B.
उत्परिवर्तन
C.
लक्षणों का स्वतंत्र अपव्यूहन
D.
सहलग्नता
मेंडेल का द्विसंकर संकरण दर्शाता हैं की पादपों का निर्माण नए जीनप्ररूप के साथ ही साथ पैतृक जीनप्ररूप भी रखता है। यह केवल प्रत्येक लक्षण की एक दूसरे से अलग स्वतंत्र अपव्यूहन के कारण ही होता है।
A.
नर और मादा जनकों में से प्रत्येक से एक
B.
दोनों नर जनक से
C.
दोनों मादा जनक से
D.
दोनों उनके जनकों से भिन्न होते हैं
एक जीन दो पृथक स्वतंत्र गुणसूत्र बनाते हैं। प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्रों की दो कॉपियाँ होती हैं जो दोनों नर और मादा जनकों में से प्रत्येक से आते हैं।
a. अप्रभावी जीन
b. विविधताएँ
c. हीमोफीलिया
d. सहलग्नता
e. वर्णांधता
विज्ञान की वह शाखा जो जीवों की व्यापक विविधता और जीवन की शुरुआत से उन में होने वाले क्रमिक परिवर्तन के साथ संबंधित करती है जीवाश्म विज्ञान कहलाती है।
जीव अपने को वातावरण के अनुकूल बनाकर जीवित रहते हैं। लेकिन जो जीव अपने आपको वातावरण के अनुकूल नहीं बना पाते, वे मर जाते हैं । इस प्रकार, प्रकृति में स्वयं छँटनी करती है । डार्विन के इस सिद्धांत को प्राकृतिक वरणवाद कहते हैं ।
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में विशेषताओं और लक्षणों का स्थानांतरण वंशागति कहलाता है।
मटर के पौधों में उभयलिंगी फूल जो इसमें स्व-परागण को सुनिश्चित करता है ।
समजात अंग - ऐसे अंग जो उत्पति तथा आंतरिक संरचना की दृष्टि से समान हैं ,लेकिन कार्य समान नहीं हैं समजात अंग कहलाते हैं । जैसे - घोडे के अग्रपाद, मनुष्य के हाथ, व्हेल के फ्लीपर आदि ।
उदाहरण -घोड़े के अग्रपाद दौड़ने व मनुष्य के हाथ-पकड़ने को अनुकूलित हैं।
हीमोफीलिया
फ्लीपर
अंग जो संरचना और मूल में समान है लेकिन कार्य अलग-अलग हैं।
जननस्तरीय उत्परिवर्तन
गंजापन(एक Y संलग्न रोग)
लैमार्कवाद अंगों की उपयोगिता और अनुपयोगिता पर आधारित था जबकि डार्विनवाद प्राकृतिक चयन पर आधारित था।
फूलों की स्थिति के संदर्भ में दो परस्पर विपर्यासी लक्षण शीर्षस्थ / अक्षीय हैं।
एकसंकर संकरण का लक्षणप्ररूपी अनुपात 3 :1 है। द्विसंकर संकरण का लक्षण प्ररूपी अनुपात 1:1 होता है।
क्लोन लक्षणप्ररूपी और जीनप्ररूपी रूप अपने जनक के समान होते हैं ।
A.
शहर
B.
गाँव
C.
कस्बा
D.
वन
वन्य जीवन वनों पर आधारित होता है । वन जंतुओं और पादपों के आवास हैं ये सभी जंतुओं के लिये खाद्य संसाधन के रूप में भी कार्य करते हैं ।
A.
2100 किलोमीटर
B.
2500 किलोमीटर
C.
2900 किलोमीटर
D.
3000 किलोमीटर
गंगा का हिमालय में गंगोत्री से गंगा सागर, बंगाल की खाड़ी तक बहाव क्षेत्र लगभग 2500 km है ।
A.
सौर ऊर्जा
B.
तापीय ऊर्जा
C.
जल ऊर्जा
D.
खाद्य ऊर्जा
सौर ऊर्जा वह ऊर्जा है जो हम सूर्य से प्राप्त करते हैं, यह एक प्रकृतिक और अनंत ऊर्जा स्त्रोत है ।
A.
जल की pH
B.
जल का तापमान
C.
जलकी MPN
D.
जल का रंग
pH एक विलयन की अम्लता या क्षारकता ज्ञात करने की माप है । शुद्ध जल की 25 �C पर pH 7 के समीप होती है। 7 से कम pH का विलयन अम्लीय और 7 से अधिक pH का विलयन क्षारीय कहलाता है ।
A.
संरक्षक
B.
रक्षक
C.
स्टेकहोल्डर/दावेदार
D.
वन रक्षक
लोग या लोगों का समूह जो एक विशिष्ट प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा का उत्तरदायित्व लेता है स्टेक होल्डर या दावेदार कहलाते हैं ये वन विभाग के लोग पर्यावरणविद या प्रकृति प्रेमी हो सकते हैं ।
कीटनाशक
1. सतपुड़ा राष्ट्रीय पार्क
2. सुंदरबन राष्ट्रीय पार्क
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र पादपों, जंतुओं और क्षेत्र में रहने वाली जनजातियों के पारम्परिक क्षेत्र सहित वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक बड़ा आरक्षित क्षेत्र है।
उदाहरण- पचमढ़ी जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
एक विशेष क्षेत्र या स्थान में स्थित फ़्लोरा और फ़ोना की प्रजातियाँ, स्थानिक प्रजातियाँ हैं।
एक विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले पौधे और जानवरों की प्रजातियों को क्रमशः फ़्लोरा और फोना के रूप में जाना जाता है।
स्वस्थाने संरक्षण और बहिः स्थाने संरक्षण जैवविविधता के संरक्षण के लिए अपनायी गई दोयुक्तियाँ हैं।
स्वयं के उपयोग के लिए मनुष्य द्वारा देश जवन और वन भूमि का पूरी तरह से विनाश करना वनोन्मूलन कहलाताहै।
फैक्ट्रियों से निकला रसायनिक अपशिष्ट ईफ्लुएंट्स कहलाता है।
F.A.O. फूड एंड अग्रीकल्चर ओर्गेनाइजेशन
कृषिविज्ञान जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पशुपालन के साथ साथ फसल रोपण का भी अध्ययन करते हैं।
प्रक्रम जिसके द्वार वर्षा जल का संरक्षण करते हैं जल संरक्षण कहलाता है।
किसी एक विशेष क्षेत्र की पादप और जन्तुओं को बायोटा कहते हैं।
N.G.O गैर सरकारी संगठन हैं जो सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों में सक्रिय भाग लेते हैं।
वनीकरण कटे हुए स्थानों पर वृक्ष लगने का प्रक्रम वनीकरण कहलाता है।
पर्यावरण की भौतिक, रसायनिक और जैविक दशाओं में अवांछित परिवर्तन प्रदूषण कहलाता है।

a. एण्डोमेट्रियम
b. एस्ट्रोजन
c. शुक्रजनक नलिकाएँ
a) सहायक ग्रंथियाँ
b) शुक्राणु
c) पालिका
d) शुक्रजनन
e) स्खलन
a) गलत, लैंगिक जनन के दौरान अर्धसूत्री विभाजन कुछ विभिन्नताएँ उत्पन्न कर देता है।
b) सही
c) गलत, महिलाओं में रजोनिवृत्ति की आयु लगभग 40 वर्ष है।
d) गलत, एस्ट्रोजन का स्तर सिर्फ अण्डोत्सर्ग से पहले बढता है।
e) सही
परागण:- परागकोष से परागकण निकलकर पुष्प के वर्तिकाग्र पर जाने की क्रिया को परागण कहते हैं।
परागण दो प्रकार का होता है-
(1) स्व परागण- परागकणों का अपने ही पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुंचना स्वपरागण कहलाता है।
(2) परपरागण- परागकणों का विभिन्न माध्यमों द्वारा अपनी ही जाति के दूसरे पुष्प पर पहुँचना परपरागण कहलाता है।
परागण की विभिन्न विधियाँ इस प्रकार हैं-
a) वायु परागणः. अनेक पुष्पों के परागकण वायु द्वारा, धूल के कणों के समान दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं ऐसे परागकण छोटे , हल्के या पंखयुक्त होते हैं। वायु परागित फसलें. गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा।
b) कीट परागणः. कीट एक पुष्प से दूसरे पुष्प पर मकरंद की खोज में जाते हैं। परागकण कीट के शरीर पर चिपककर दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते हैं।
c) जल परागणः. जलीय पौधों में जिनके पुष्प जल की सतह या जल में खिलते हैं। जल में तैरकर परागकण अपनी ही जाति के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते हैं। जैसे. वैलिस्नेरिया, हाइड्रिला।
d) मनुष्य व पक्षी परागणः. मनुष्य शीघ्र व वांछित फसल के लिये पुष्पों में स्वयं परपरागण करा देती है। हमिंग बर्ड, बिग्नोनिया में परागण में सहायता करती है।
A.
भूकंप
B.
प्राकृतिक चयन
C.
अंगों का अधिक उपयोग
D.
पुंज प्रवाह
प्राकृतिक चयन एक प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपने पर्यावरण के प्रति उत्तरजीविता अधिक अनुकूल हो जाता है । यह प्रक्रम योग्यताम की उत्तरजीविता कहलाता है ।
A.
जीनों का अध्ययन
B.
गुणसूत्रों का एक पूरा सैट
C.
जाति की समष्टि में उपस्थित जीन
D.
एक जीव का आंतरिक आनुवांशिक संगठन