A.
B.
C.
D.
समकोण त्रिभुज APC में, हमें ज्ञात है
⇒ AC = 5 सेमी
समकोण त्रिभुज BAC में, हमें ज्ञात है
A.
15°
B.
30°
C.
45°
D.
60°
एक समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोण माप 60° का होता है। इसलिए, कोण का आधा = 30°
A.
B.
C.
D.
एक समकोण त्रिभुज ABC में, AC2 = AB2 + BC2 AC2 = 72 + 242 = 625 या AC = 25 सेमी
BC, तब
A.
2AB2 = 3AD2
B.
4AB2 = 3AD2
C.
3AB2 = 4AD2
D.
3AB2 = 2AD2
A.
B.

C.
D.

लम्ब /कर्ण = sin 60°
लम्ब /कर्ण =
3/2
लम्ब = (
3/2) कर्ण
(त्रिभुज 1 का क्षेत्रफल )/( त्रिभुज 2 का क्षेत्रफल)
= (भुजा 1)2/( भुजा 2)2
= (परिमाप 1)2/( परिमाप 2)2
= (a + b + c)/(d + e + f) = a/b = b/c = d/e
A.
OA2 + OB2
B.
OB2 + OC2
C.
OC2 + OD2
D.
AC2 + BD2
AB2
= OA2 + OB2
= [(1/2)AC]2 + [(1/2)BD]2 =
(1/4)[AC2 + BD2]
या
4AB2 = AC2 + BD2
इसी
प्रकार
4BC2 = AC2 + BD2
4CD2 = AC2 + BD2
4AD2 = AC2 + BD2
AC2 + BD2 = AB2 + BC2 +
CD2 + AD2
(2p) , c = (2p + 1) के साथ एक त्रिभुज है
A.
समबाहु त्रिभुज
B.
समकोण त्रिभुज
C.
समद्विबाहु त्रिभुज
D.
विषमबाहु त्रिभुज
a2 = (2p – 1)2
= 4p2 – 4p +1
b2
= [2
(2p)]2
= 8p
c2 = (2p + 1)2 = 4p2 + 4p +1
a2
+ b2 = 4p2 – 4p + 1 + 8p
= 4p2 + 4p + 1
=c2
इसलिए, त्रिभुज
एक
समकोण
त्रिभुज
है।
ABC एक अधिक कोण त्रिभुज है। तब AC2 =
A.
AB2 + BC2 – 2BC. BD
B.
AB2 + BC2
C.
AB2 + BC2 + 2BC. BD
D.
AD2 + BD2
AC2 = AD2 + DC2 = AD2 + (BC + BD)2 = (AD2 + BD2) + BC2 + 2BC. BD = AB2 + BC2 + 2BC. BD
ABC और
DEF समरूप हैं, जिसमें BC = 3.5 सेमी, EF = 2.5 सेमी और
ABC का क्षेत्रफल 7 वर्ग सेमी है। तब
DEF का क्षेत्रफल वर्ग सेमी में है
A.
B.
C.
D.
ar(
ABC)/ar(DEF) = (BC)2/(EF)2
7/ar(DEF) = (3.5)2/(2.5)2
ar(DEF)= 3.57 वर्ग सेमी
A.
5.25 सेमी
B.
3.5 सेमी
C.
2.56 सेमी
D. 2 सेमी
ar(
ABC)/ar(
DEF) =
(AL)2/(DM)2
64/49 = (6)2/X2
x = 5.25 सेमी
A.
(-ac)/(b + c)
B.
(ac)/(b - c)
C.
(ac)/(b + c)
D.
(ac)(b + c)
PNK
LMK
[(
LMK =
PNK (प्रत्येक 46º) और
K =
K (उभयनिष्ठ)]
संगत
भुजाएं
समानुपाती
होती
है।
PN/LM
= NK/MK
x/a
= c/(b +
c)
x(b
+ c) = ac
x = ac/(b + c)
त्रिभुज ABC और त्रिभुज ADE समरूप त्रिभुज हैं|
अतः,



![]()
क्योंकि x का मान ऋणात्मक नहीं हो सकता इसलिए, त्रिभुज की सबसे छोटी भुजा की माप 10 मी है|





चूंकि, AB||MN







त्रिभुज ABC में, D, BC का मध्य बिंदु है|








माना कि AB लैम्प-स्तम्भ को और CD लैम्प-स्तम्भ से दूर चल रही 4 सैकण्ड पश्चात् लडकी को निरूपित करता हैं। DE लडकी की छाया है। माना DE,X मीटर का हैं।


A. 45 वर्ग इकाई
B. 50 वर्ग इकाई
C. 55 वर्ग इकाई
D. 60 वर्ग इकाई
दिया गया है, x1 = -5, y1 = 7, x2 = 4, y2 = -5, x3 = 4 और y3 = 5
हम जानते हैं कि जिस त्रिभुज के शीर्ष = (x1, y1), (x2, y2) और (x3, y3) दिए हों, उसके केन्द्रक के निर्देशांक = [{(x1 + x2 + x3)/3}, {(y1 + y2 + y3)/3}]
इस प्रकार, ∆ABC के केन्द्रक के निर्देशांक, जिसके शीर्ष A(1, 4), B(-1, -1) और C(3, -2) हैं
= [{(1–1+3)/3}, {(4–1–2)/3}]
= [1 , (1/3)]
बिंदु (9, 2) Y -अक्ष से 9 इकाई की दूरी पर स्थित है|
स्थिति (i) 1 : 2 p = [{1(9) + 2(-3)}/(1 + 2) , {1(5) + 2(2)}/(1 + 2)] = (1, 3) स्थिति (ii) 2 : 1 q = [{(2( 9) +1 ( - 3)}/(2+1), {(2 (5) +1( 2)} /(2+1) ] = (5,4)
ABC में, AB > AC और AD
BC है, तब AB2 – AC2
A.
BD2 + AD2
B.
BD2 + CD2
C.
BD2 + AC2
D.
BD2 – CD2
AB2 = AD2 + BD2
AD2 = AB2 – BD2
AC2 = AD2 + DC2
AD2 = AC2 – DC2
AB2 – BD2 = AC2 – CD2
AB2 – AC2 = BD2 – CD2
A.
B.
C.
D.

माना कि AD त्रिभुज का शीर्षलम्ब है। इसलिए, दी गई आकृति से, हमें ज्ञात है
AD2 = AC2 - DC2
AD2 = (2a)2 - a2
= 3a2
या, AD = a√3 सेमी
A.
पहली भुजा
B.
दूसरी भुजा
C.
तीसरी भुजा
D. इनमें से कोई नहीं
मध्य बिन्दु की परिभाषा से,
खींची गयी रेखा त्रिभुज की तीसरी भुजा के समान्तर होगी।
ABC भुजा 12 सेमी के साथ एक समबाहु त्रिभुज है, तब इसके मध्य बिन्दुओं को मिलाने से निर्मित त्रिभुज का क्षेत्रफल है
A.
2
2 वर्ग सेमी
B.
9
3 वर्ग सेमी
C.
64 वर्ग सेमी
D.
68 वर्ग सेमी
चूंकि
ABC 
DEF
इसलिए , (
ABC/
DEF) का क्षेत्रफल = AB2/DE2
(
ABC /
DEF) का क्षेत्रफल = 144/36 = 4
Ar(
DEF)= (1/4) x Ar(
ABC)
= (1/4) x [{(
3)/4} x 12 x 12]
= 9
3 वर्ग सेमी
AB, CD = p, तब
(c/a) =
A.
B.
C.
D.
ar(
ABC) = (1/2)cp ...(1)
ar(
ABC) = (1/2)ab ...(2)
समीकरण (1) और (2) से, हमें प्राप्त होता है
(1/2)cp = (1/2)ab
cp = ab
(c/a) = (b/p)
समरूपता को दर्शाने का प्रतीक
है ।
यदि एक त्रिभुज के दो कोण एक अन्य त्रिभुज के संगत कोणों के बराबर हों
यदि एक रेखा किसी त्रिभुज की दो भुजाओं को एक ही अनुपात में विभाजित करे, तो वह तीसरी भुजा के समांतर होती हैं।
यदि दो त्रिभुजों के संगत कोण बराबर हों, तो वे समानकोणिक त्रिभुज कहलाते हैं।
भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि उनके संगत कोण बराबर हों तथा उनकी संगत भुजाएँ समानुपाती हों।
सभी वृत्त समरूप होते हैं।
सभी समबाहु त्रिभुज समरूप होते हैं।
सभी वर्ग समरूप होते हैं।
दो आकृतियाँ जिनके आकार समान हों, परन्तु आवश्यक रूप से आमाप समान न हों, समरूप आकृतियाँ कहलाती हैं।




त्रिभुज ABC में, हमें ज्ञात है
DE|| BC
इसलिए, BPT द्वारा

![]()
ADC से, हमारे पास
AC2 = AD2 + CD2 ...(1) (पाइथागोरस प्रमेय से)
ADB से, हमारे पास
AB2 = AD2 + BD2 ...(2) (पाइथागोरस प्रमेय से)
(2) से (1) को घटाने पर, हमारे पास
AB2 - AC2 = BD2 - CD2
AB2 + CD2 = BD2 + AC2


एक समान्तर श्रेढ़ी का
4वाँ
माना कि
तब
सार्व अन्तर (d) = tn - tn-1
= (3 + 4n) – [3 + 4(n – 1)]
= 3 + 4n – [-1 + 4n]
= 4
समान्तर माध्य = (a+b)/2
=
{8+(-18)}/2
=
-5
दिया गया है, a = 4 और d = -3
इस प्रकार , समान्तर श्रेढ़ी के चार पद
= a, a + d, a + 2d, a + 3d
=
4, 1, -2, -5
पहली 20 प्राकृत संख्याएँ 1, 2, 3, 4, ..., 20 हैं|

माना कि समान्तर श्रेणी की तीन संख्याएँ
इसलिए
3a=15
चूंकि पहली
a=1 और
Sn = n/2[2a+(n-1)d]
=n/2[2x1+(n-1)1]
=n/2[n+1]
=n(n+1)/2
हमें ज्ञात है
और आगे भी
यहाँ
दी गई श्रेढ़ी समान्तर श्रेढ़ी में है जहाँ पहला पद a = 3 और सार्व अन्तर, d = 3
an = 111
a + (n-1) d = an

हमें ज्ञात है
अंत से n वाँ पद = [l-(n-1)d]
यहाँ अंतिम पद
अंत से 10 वाँ पद = l-(n-1)d
= 209
समान्तर श्रेढ़ी में
हम जानते है कि
n - 1 = 24
इस प्रकार
समान्तर श्रेढ़ी 3,6,9,.... होगी।


समान्तर श्रेढ़ी 
माना कि यहाँ समान्तर श्रेढ़ी में
दिया गया है





समान्तर श्रेढ़ी में पदो की संख्या

श्रेढ़ी = 17, 15, 13 ....
श्रेढ़ी का योगफल = 81
माना n पदों का योगफल 81 है।
सूत्र
समान्तर श्रेढ़ी के n पदों का योगफल

दिया है :-
समान्तर श्रेढ़ी के प्रथम 12 पदों का योग (s) = 468
सार्वअन्तर (d) = 6
ज्ञात करना हैं:- 10 वाँ पद

an = a+(n-1)d
a10 = 6+(10-1) x 6
a10 = 6 + 9 x 6
a10 = 6 + 54
a10 = 60
अत: 10 वे पद का मान 60 है।


A.
B.
C.
D.
माना कि a और b समीकरण के मूल है।
समीकरण Ax2 + Bx + C = 0 के लिए
इसलिए, मूलों के व्युत्क्रमों का योग -p/q है।
x ≥ 1, तब 4x बराबर है
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A. 
B. 
C.
D.
A.
B.
C.
D.
यदि कमरे के आयाम a×b हैं तो प्रश्नानुसार:
अतः कमरे के आयाम 12मी × 5मी हैं |

अतः
द्विघात
बहुपद का
गुणनखण्डन
वास्तविक रैखिक
गुणनखण्डो
के गुणनफल के
रूप में किया
जा सकता है|
एक द्विघात समीकरण है या नही?






x2-12x+35=0
मूलों का योग

2x2-5x+3=0
मूलों का योग
x2 – 3x – 18 = 0
x2
– 6x + 3x – 18 = 0
x(x – 6)
+ 3(x – 6) = 0
(x –
6)(x + 3) = 0
x = 6 या x = –3
x2
- 9 = 0
(x -
3)(x + 3) = 0
x = 3 या
x
= -3
3x2
- 2x - 1 = 0
3x2
- 3x + x - 1 = 0
3x(x
- 1) + (x - 1) = 0
(x
- 1)(3x + 1) = 0
x
= 1 और x =
-1/3



PQR की भुजाओं के मध्य बिंदु हैं, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल है
A. 68 वर्ग इकाई
B. 24 वर्ग इकाई
C. 48 वर्ग इकाई
D. 96 वर्ग इकाई
ABC का क्षेत्रफल = 17 वर्ग इकाई
PQR का क्षेत्रफल = 4 ×
ABC
= 4 × 17
= 68 वर्ग इकाई
बिंदु P के निर्देशांक होंगे
.
दिया है, x1 = -5, y1 = -1, x2 = 3, y2 = -5, x3 = 5 और y3 = 2
ABC का क्षेत्रफल = (1/2)[x1(y2 - y3) + x2(y3 - y1) + x3(y1 - y2)]
= 32 वर्ग इकाई
हम जानते हैं कि दो बिन्दुओं के बीच की दूरी =
[ (x2 - x1)2 + (y2 - y1)2]
इसप्रकार, बिन्दुओं P(-1, 2) और Q(-4, -1) के बीच की दूरी = 3
2
A. (5/7)
B. (1/3)
C. (2/3)
D. (3/1)
6m – 2n = 4m + 4n
2m = 6n
(m/n) = 3 : 1 = (3/1)चूँकि बिंदु P, y-अक्ष पर स्थित है, इसलिए इसका भुज 0 होगा|
माना, दिए गए बिंदु की कोटि y है. इसलिए, बिंदु P के निर्देशांक (0, y) हैं|
दिया है, बिंदु P, y-अक्ष पर बिन्दुओं A(-5, -2) और B(3, 2) से समान दूरी पर स्थित है|
इसप्रकार, AP = BP या AP2 = BP2
या (0 + 5)2 + (y + 2)2 = (0 – 3)2 + (y – 2)2
या y = -2
इसप्रकार, बिंदु P के निर्देशांक (0, -2) हैं|