
(1): एक 8 सेमी त्रिज्या का एक रेखाखंड AB खींचिए। Aऔर Bको केन्द्र के रूप में लेकर 4 सेमी और 3 सेमी त्रिज्या के दो वृत्तो को खींचिए।
(2) रेखा AB को समद्विभाजित कीजिए। माना कि AB का मध्य बिन्दु C है। C को केन्द्र के रूप में लेकर AC त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए जो वृत्तो को P, Q, R और S बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करता है। BP, BQ, AS और AR को मिलाइए। यह अभीष्ट स्पर्श रेखाएं है।
1. एक समतल पर एक बिन्दु O लीजिए और किसी भी त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए।
2. एक व्यास POQ खींचिए।
3.
OPT =OQR = 90° का निर्माण कीजिए।
4. अभीष्ट स्पर्ष रेखा प्राप्त करने के लिए TP और QR को आगे बढाइये।
5.
OPT +OQR = 180°,लेकिन यह तिर्यक रेखा की समान भुजाओं पर अन्तःकोणो के युग्मो के रूप में है। इसलिए, दो स्पर्श रेखांए समान्तर है।
1. केन्द्र O के साथ दो संकेन्द्रीय वृत्तो को खींचिए।
2. छोटे वृत्त पर कोई बिन्दु P लीजिए।
3. OP को मिलाइए ।
4. OPT = 90° का निर्माण कीजिए।
5. छोटे वृत्त की अभीष्ट स्पर्शरेखा एवं बडे वृत्त की जीवा के रूप में TPT' को प्राप्त करने के लिए TP को आगे T' तक बढाइये।


3 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए।
वृत्त के बाहर कोई बिन्दु P लेकर एक छेदक रेखा PAB खींचिए।
AP को C तक इस प्रकार बढाया कि AP=CP
CB को व्यास के रूप में लेकर एक अर्धवृत खींचिए।
बिन्दु P पर एक अभिलम्ब खींचिए जो कि बिन्दु D पर अर्धवृत्त को प्रतिच्छेद करता हैं।
केन्द्र के रूप में P और त्रिज्या के रूप में PD के साथ ,एक चाप खींचिए जो दिये गये वृत्त को T और T' बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करता हैं।
PT और PT' अभीष्ट स्पर्श रेखाएँ हैं।


रचना के चरण:
चरण
चरण
चरण
माप के द्वारा
गुनी हो।

रचना के चरणः
चरण1: एक रेखाखंड AB = 8 सेमी खींचिए।
चरण 2: AB का लम्ब समद्विभाजक खींचिए। यह AB को O पर प्रतिच्छेद करता है, O को केन्द्र के रूप में लीजिए और OC = 4 सेमी काटिये।
चरण 3: A को C से और B को C से मिलाइए। इस प्रकार ABC अभीष्ट समद्विबाहु त्रिभुज है।
चरण 4: Aसे न्यून कोण बनाती हुए एक किरणAX खींचिए और A1,A2,A3 इस प्रकार अंकित कीजिए कि AA1= A1A2 = A2A3
चरण5: A2 को B से मिलाइए।
चरण 6: A3 से होकर जाने वाली A2B के समान्तर एक रेखा A3B’, बढाने पर रेखाखंड AB को B' पर प्रतिच्छेद करती हुई खींचिए ।
चरण 7: B' से होकर जाने वाली BC के समान्तर एक रेखा B'C', बढाने पर रेखाखंड BC को C' पर प्रतिच्छेद करती हुई खींचिए।
तब
A B’ C’ अभीष्ट समद्विबाहु त्रिभुज है जिसकी भुजा दिये गये त्रिभुज ABC की 3/2 गुनी है।
रचना के चरणः
चरण 1: 8.1 सेमी का एक रेखाखंड AB खींचिए।
चरण 2: एक न्यूनकोण BAX खींचिएऔर BY || AX खींचिए।
चरण 3: AX पर बिन्दु A1, A2, A3, A4 और BX पर बिन्दु B1, B2, B3, B4, B5 इस प्रकार अंकित कीजिए कि A1A2 = A2A3 = A3A4 = B1B2 = B2B3 = B3B4 = B4B5.
चरण 4: बिन्दु 4:5 को ज्ञात करने के लिए A4 को B5 से मिलाइए। माना यह AB को बिन्दु O पर प्रतिच्छेद करता है।
AO की लम्बाई = 3.6 सेमी
BO की लम्बाई = 4.5 सेमी
O वह बिन्दु है जो AO को अनुपात 4:5 में विभाजित करता है।


(1) AB = 8 सेमी का एक रेखाखंड खींचिए।
(2) बिन्दु A को केन्द्र के रूप में लेकर 4 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त का निर्माण कीजिए।
(3) AB का लम्बसमद्विभाजक करके मध्य बिन्दु P ज्ञात कीजिए।
(4) मध्य बिन्दु P को केन्द्र के रूप में लेकर AP त्रिज्या से एक वृत्त बनाइये जो पहले वाले वृत्त केा Q तथा R पर काटता है।
(5) B केा Q तथा R से मिलाया।
इस प्रकार BQ तथा BR अभीष्ट स्पर्श रेखाएं है।



दिया है - O केन्द्र का 4.5 सेमी त्रिज्या का वृत्त दिया है।
OP=7.5 सेमी है।
रचना करनी है - बिन्दु P से वृत्त पर स्पर्श रेखाएँ खींचनी हैं।

रचना के चरण:
चरण 1. OP=7.5 खींचिए ।
चरण 2. बिन्दु O से 4.5 सेमी त्रिज्या का वृत्त खींचिए ।
चरण 3. OP का लम्ब अर्द्धक ज्ञात कीजिए जो OP को Q पर काटता है।
चरण 4. Q को केन्द्र लेकर OQ=QP त्रिज्या का वृत्त खींचिएजो दिये वृत्त को S तथा R पर काटता है।
चरण 5. SP तथा RP को मिलाया।
अतः SP तथा RP दिए वृत्त की अभीष्ट स्पर्श रेखाएँ हैं।
नापने पर वृत्त की स्पर्श रेखाओं की लम्बाई प्रत्येक 5.8 सेमी है।




ज्ञात हैः दो वृत्तो की त्रिज्याएं 1.5 सेमी तथा 2.5 सेमी है जिनके केन्द्रो के बीच की दूरी 5.0 सेमी है।



रचना:- (1) सर्वप्रथम वृत्तों के केन्दों के बीच की दूरी 7.0 सेमी लम्बाई का रेखाखण्ड OO' खींचा।
(2) बिन्दु O को केन्द्र मानकर 2 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचा।
(3) बिन्दु O' को केन्द्र मानकर 4 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचा।
(4) OO' को व्यास मानकर एक वृत्त खींचा।
(5) छोटे वृत्त के केन्द्र O को केन्द्र मानकर तथा दोनो वृत्तों की त्रिज्याओ के योग (2+4=6 सेमी) के बराबर त्रिज्या लेकर एक वृत्त खींचा, जो OO' व्यास वाले वृत्त को A और B बिन्दुओं पर काटता है।
(6) OA और OB को मिलाया जो छोटे वृत्त को क्रमशः P और P' बिन्दुओं पर काटती हैं।
(7) बड़े वृत्त के केन्द्र O' से OA और OB के समानान्तर रेखाएँ O'Q और O'Q' खींची।
(8) PQ और P'Q' को मिलाया तो PQ और P'Q' अभीष्ट उभयनिष्ठ तिर्यक स्पर्श रेखाएँ है।

A. 16.64%
B. 12.36%
C. 6%
D. 3.6%
A.
d2
B. d/22
C. (
d2)/4
D. d2
त्रिज्या = (d/2)
क्षेत्रफल =
(d/2)2= (
d2)/4
त्रिज्यखंड के चाप की लम्बाई = 2
r x (
/360)
= (2
x 42 x 60)/360
= 14 x (22/7) = 44 सेमी०
A. 3.5 मी०
B. 7 मी०
C. 14 मी०
D. 21 मी०
माना, वृत्त की त्रिज्या = r मी०
तब,
वृत्त की परिधि = (तय दूरी) / (चक्करों की संख्या)
= 440/20
= 22
(22/7) व्यास = 22
व्यास = 7 मी०
हम जानते हैं कि
,
छायांकित भाग का क्षेत्रफल =
(r22 - r12)
=
(142 - 72)
=
(196 - 49)
= 147
सेमी०2
A. 80°
B. 70°
C. 60°
D. 300
माना, वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
तब, त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = (1/6) x
x r2
हम जानते हैं,
(
r2
)/360 = (1/6) x
x r2
= (360/6)
= 60°
A. 3.27 सेमी०2
B. 6 सेमी०2
C. 6.8 सेमी०2
D. 7.0 सेमी०2
वृत्तखंड AYB का क्षेत्रफल = त्रिज्यखंड OAYB का क्षेत्रफल –
OAB का क्षेत्रफल

वृत्तखंड OAYB का क्षेत्रफल =
x (62) x (60 /360) = 6
अब,
OAB का क्षेत्रफल = (
3/4) x a2 [चूँकि OA = OB]
= (
3/4) x 6 x 6 = 9
3
= 9 x 1.73
= 15.57 सेमी०2
वृत्तखंड AYB का क्षेत्रफल = 6 X (22/7) - 15.57
= 18.84 - 15.57
= 3.27 सेमी०2
मिनट वाली सुई के द्वारा तय की गयी त्रिज्या = सुई की लम्बाई = 28 सेमी०
वृत्त का क्षेत्रफल = (22/7) x 28 x 28 = 88× 28 सेमी०2
15 मिनट में तय क्षेत्र का क्षेत्रफल = (1/4) x 88 x 28 = 616 सेमी०2
A. (
r2
)/360
B. (2
r2
)/180
C. (
r2
2)/360
D.
r2
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = (
r2
)/360
2640 है
वृत्त की परिधि = (2640/12) = 220 मी०
अब, 2
r = 220
r = (220 / 2) x( 7/22)
= 35 मी०
अतः, वृत्त का क्षेत्रफल = (22 / 7) x 35 x 35
= 110 × 35 = 3850 मी०2
वृत्त का क्षेत्रफल =
r2 = 102
= 100
मी०2= घोड़े द्वारा चरा गया क्षेत्र
= 3.14 लेने पर]
A. 57 सेमी०2
B. 114 सेमी०2
C. 171 cm2
D. 228 सेमी०2
दी गयी आकृति की जीवा AB है|
DB = 10
2 सेमी० [वर्ग का विकर्ण = भुजा
2]
वृत्त की त्रिज्या = (10
2 )/2 = = 5
2
वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
= 25 × 2 x 
= 50
= 50 × 3.14
= 157 सेमी०2
वर्ग का क्षेत्रफल = 102 = 100 सेमी०2
अतः,
छायांकित भाग का क्षेत्रफल = 157 – 100
= 57 सेमी०2
छाते का क्षेत्रफल =
r2 =
x 42 × 42
= (22/7) x 42 x 42
अतः, दो क्रमागत तानों के मध्य क्षेत्रफल
= (1/8) x 132 x 42 = 693 सेमी०2
वर्ग का क्षेत्रफल = 28 × 28
784 सेमी०2
प्रत्येक वृत्त का व्यास = (28/2)
= 14 सेमी०
प्रत्येक वृत्त की त्रिज्या = (14/2) = 7 cm
प्रत्येक वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
= 49 x (22/7)
= 154 सेमी०2
चारों वृत्तों का क्षेत्रफल = 4 × 154
= 616 सेमी०2
छायांकित भाग का क्षेत्रफल = 784 – 616
= 168 सेमी०2
है, तो x का मान है






2 मिनट में मिनट की सूई द्वारा बनाया गया कोण=360°
2/60=12°
मिनट की सूई द्वारा बनाये गए वृत्तखंड का क्षेत्रफल = (12°/360°)
(22/7)
21
21
= 46.2 cm2


चूँकि, मिनट वाली सुई 60 सेकंड में कोण बनाती है =360°
इसलिए, मिनट वाली सुई 1 मिनट में कोण बनाएगी =360°/60°
मिनट वाली सुई 2 मिनट में कोण बनाएगी =12°











त्रिभुज AOP और DOQ में,

दिया
गया
है
कि, ![]()
चूंकि, ST एक व्यास है और अर्धवृत्त में बना कोण समकोण है।
इसलिए, ![]()
अब,


x + y - z = 0




हम
जानते
है
कि
एक
वृत्त
के
बाह्य
बिन्दु
से
खींची
गई
स्पर्श
रेखाएं
समान
होती
है।
इसलिए
AD = AF (A से
स्पर्श
रेखा)
BD = BE (B से
स्पर्श
रेखा)
CE = CF (C से
स्पर्श
रेखा)
अब, AB =
AC दिया
है
AB - AD = AC - AD [दोनो
पक्षो
से
AD
को
घटाने
पर]
AB
- AD = AC - AF [AD=AF]
BD
= CF
BE
= CE


समकोण त्रिभुज
अतः वृत्त की त्रिज्या
ABC का परिमाप )

AQ = AR (A से स्पर्श रेखा)
BP = BQ (B से स्पर्श रेखा)
CP = CR (C से स्पर्श रेखा)
अब,
AQ = AR
AB + BQ = AC + CR
AB + BP = AC + CP
त्रिभुज ABC का परिमाप = AB + BC + AC
= AB + (BP + PC) + AC
= (AB + BP) + (PC + AC)
= 2(AB + BP)
= 2(AB + BQ)
= 2AQ
इसलिए, AQ =
(त्रिभुज ABC का परिमाप)
P तथा
Q के अर्द्वक एक दूसरे को बिंदु R पर काटते हैं। सिद्व कीजिए की
PRQ =900

सिद्ध करना है

माना 



चक्रीय चतुर्भुज का बहिष्कोंण सम्मुख अन्तः कोंणो के बराबर होता है।


अब
अर्थात 


पुनः
अर्थात 


समीकरण
अब




शेष 

परन्तु 



अतः 







या

OB = OC (त्रिभुज के सामान कोणों की सम्मुख भुजाएँ
इसी प्रकार
OB + OD = OC + OA
या


31°
(वृत्त में किसी चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण, उसी चाप द्वारा शेष परिधि के किसी बिंदु पर बने कोण


(त्रिज्या और स्पर्श रेखा परस्पर लम्ब होती हैं






(त्रिज्या और स्पर्श रेखा परस्पर लम्ब होती हैं

= 31°
A.
4 सेमी
B.
8 सेमी
C.
11.31 सेमी
D.
12.32 सेमी
OP के बीच की दूरी = वृत्त की त्रिज्या = 8 सेमी
A.
B.
C.
D.
समकोण त्रिभुज OTP में, पाइथागोरस प्रमेय के उपयोग से, हम प्राप्त करते है
OT2 + PT2 = OP2
OT2 = OP2 - PT2
OT2 = (10 सेमी)2 – (8 सेमी)2
OT = 6 सेमी
अतः , त्रिज्या OT = 6 सेमी
A.
1 : 5
B.
2 : 5
C.
2 : 3
D.
1 : 3
माना
कि
AA1=A1A2=A2A3=A3A4=A4A5=x
इसलिए,AA2=
2x और A2A5
= 3x
अतः
,
AA2:A2A5 = 2x : 3x
= 2:3
A.
B.
C.
D.
PA2 = OP2 - OA2
PA2 = 102 - 62
= 100 - 36
PA2 = 64
PA = 8 सेमी
A.
B.
C.
D.
समकोण त्रिभुज OTP में, पाइथागोरस प्रमेय के उपयोग से, हम प्राप्त करते है
OT2 + PT2 = OP2
OT2 = (13)2 – (12)2
OT2 = 169 –144 =25
OT = 5
अतः , त्रिज्या OT = 5 सेमी
ΔABC की भुजाओं का ΔAB1C1 की संगत भुजाओं से अनुपात = AB : AB1 = 3 : 2
A.
B.
C.
D.
चूंकि, त्रिज्या स्पर्श बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा के लम्बवत होती है।
A.
PTQ
= 2
OPQ
B.
PTQ =
OPQ
C.
2
PTQ =
OPQ
D.
PTQ =
TQP
1 +
2 = 90°
(चूंकि
वृत्त
पर
खींची
गई
स्पर्श
रेखा
केन्द्र
को
मिलाने
वाली
रेखा
के
लम्बवत
होती
है। )
2 +
3 +
4 =
180°
2 =
4
(चूंकि
TP
= TQ सम्मुख
भुजाओं
के
सम्मुख
कोण
समान
होते
है
और
बाह्य
बिन्दु
से
खीची
गई
दो
स्पर्श
रेखाएं
समान
होती
है।)
1 = 90°
-
2
2 +
3 +
2 =
180°
3 = 180°
- 2
2
3 = 180°
- 2(90° -
1)
3 = 2
1
A.
B.
C.
D.
समकोण त्रिभुज OPQ में
OQ2 = OP2 + PQ2
= 72 + 242 = 625
OQ = 25 सेमी
A.
साधारण
B.
एक दूसरे के समान्तर
C.
एक दूसरे के समान
D.
एक दूसरे के प्रतिच्छेद
निम्नलिखित
आकृति
से
यह
स्पष्ट
है
कि
व्यास
के
अंतिम
छोर
की
स्पर्श
रेखा
समान्तर
होती
है।
वृत्त को दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करने वाली रेखा को छेदक रेखा कहते है।
दीर्घ चाप

चूंकि हम जानते है कि वृत्त के केन्द्र पर बना कोण वृत्त की परिधि पर बने कोण का दुगुना होता है।
चूंकि
इसलिए
![]()

चूंकि वृत्त के तीनो कोणों का योग 180° होता हैं
इसलिए,


![]()

दिया है :-
TA = TC (प्रमेय से)
ATC = 700
अत: चक्रीय चतुर्भुज प्रमेय से (चक्रीय चतुर्भुज के विपरीत कोणो का योग 1800 होता हैं।)
T +
O
=1800
700
+
O =1800
O =1800- 700
O =1100
या
AOC =1100

वृत्त के केन्द्र से होकर जाने वाली जीवा को वृत्त का व्यास कहा जाता है।
किसी त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लम्ब समद्विभाजक जिस बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते है, उसे परिकेन्द्र कहते है। परिकेन्द्र को केन्द्र मानकर तीनों शीर्षो से होकर जाने वाले वृत्त को परिवृत्त कहते है।



केवल एक स्पर्श रेखा खींची जा सकती है।

गलत(संगत जीवाएँ समान होती हैं)


हम जानते है कि बाह्य बिन्दु से वृत्त पर खींची गई स्पर्श रेखाओं की लम्बाई बराबर होती है।

यही सिद्व करना था।





त्रिज्या और स्पर्श रेखा परस्पर लम्ब होती हैं

चतुर्भुज के चारों कोणों का जोड़ 360° होता है
![]()




![]()






जीवाओं के बीच की दूरी = OM + ON = 4 + 3 = 7सेमी
A.
B.
C.
D.
PAR और MBN दो समान्तर स्पर्श रेखाएं (दिया है) है।
अभीष्ट दूरी = AB = OA + OB
= 3 + 3 = 6 सेमी
A.
18 सेमी
B.
17 सेमी
C.
16 सेमी
D.
15 सेमी
OB2
= OA2 + AB2 (पाइथागोरस
प्रमेय
के
उपयोग
से)
OB2 = (8) 2 + (15) 2
OB2 = 64 + 225
OB2 = 289
OB = 17 सेमी
A.
20 सेमी
B.
10 सेमी
C.
8 सेमी
D.
5 सेमी
PA
= PB = 10 सेमी...(1)
CA = CQ = 2 सेमी
PC = PA - CA
= 8 सेमी
ΔAB'C' की भुजाओं का ΔABC की संगत भुजाओं से अनुपात= AB'/AB = 2/3

A.
(i)
B. (ii)
C. (iii)
D. (ii) और(iii) दोनो
केवल आकृति (i) अनुपात 2:3 को दिखा रही है। आकृति (ii) अनुपात 3:2 को दिखा रही है। आकृति (iii) अनुपात 4:1 को दिखा रही है ।
A.
2.5 सेमी
B.
3.7 सेमी
C.
4.47 सेमी
D.
5.6 सेमी
त्रिभुज
BPQ
में,
OB
= 6 सेमी
OP
= 4 सेमी
OB2
= OP2 + BP2
BP
=
(OB2 -
OP2) =
(36 -
16)
BP
=
20 सेमी = 4.47 सेमी
इसी
प्रकार,BQ
= 4.47 सेमी
A.
3 सेमी
B.
7 सेमी
C.
10 सेमी
D.
12 सेमी