A.
B.
C.
D.
वृत्त पर खींची गई स्पर्शरेखा से वृत्त के केन्द्र को मिलाने वाला रेखाखंड स्पर्शरेखा के लम्बवत होता है।
यदि त्रिभुज की एक भुजा के समान्तर खींची गई एक रेखा दूसरी भुजा को प्रतिच्छेद करती है, तब यह दो भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करती है।
A.
600
B.
45°
C.
30°
D.
150
संगत कोण
A.
B.
C.
D.
AP x BP = CP x DP ------------ (i)
AP = 6 सेमी, CD = 2.8 सेमी, DP = 4.2 सेमी
CP = CD + DP = 2.8+4.2 = 7 सेमी -------------- (ii)
(i) और (ii) से,
6 x BP = 7 x 4.2
BP = (7 X 4.2)/6 = 7 x 0.7
BP = 4.9 सेमी
A.
(i)
B.
(ii)
C.
(iii)
D.
(i) और(iii) दोनो
(A3B4), यह रेखाखंड AB को अनुपात 3:4 में विभाजित करता है।


![]()

दी गयी आकृति में बिंदु O रेखाखंड AB को अनुपात 3:4 में विभाजित करता है|


B = 45°,
A = 105°और फिर एक अन्य त्रिभुज इस प्रकार बनाइये कि उसकी भुजाएँ
ABC की संगत भुजाओं की 4/3 गुनी हों।


है, तो x का मान है
A. 16.64%
B. 12.36%
C. 6%
D. 3.6%
A.
d2
B. d/22
C. (
d2)/4
D. d2
त्रिज्या = (d/2)
क्षेत्रफल =
(d/2)2= (
d2)/4
त्रिज्यखंड के चाप की लम्बाई = 2
r x (
/360)
= (2
x 42 x 60)/360
= 14 x (22/7) = 44 सेमी०
A. 3.5 मी०
B. 7 मी०
C. 14 मी०
D. 21 मी०
माना, वृत्त की त्रिज्या = r मी०
तब,
वृत्त की परिधि = (तय दूरी) / (चक्करों की संख्या)
= 440/20
= 22
(22/7) व्यास = 22
व्यास = 7 मी०
हम जानते हैं कि
,
छायांकित भाग का क्षेत्रफल =
(r22 - r12)
=
(142 - 72)
=
(196 - 49)
= 147
सेमी०2
A. 80°
B. 70°
C. 60°
D. 300
माना, वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
तब, त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = (1/6) x
x r2
हम जानते हैं,
(
r2
)/360 = (1/6) x
x r2
= (360/6)
= 60°
A. 3.27 सेमी०2
B. 6 सेमी०2
C. 6.8 सेमी०2
D. 7.0 सेमी०2
वृत्तखंड AYB का क्षेत्रफल = त्रिज्यखंड OAYB का क्षेत्रफल –
OAB का क्षेत्रफल

वृत्तखंड OAYB का क्षेत्रफल =
x (62) x (60 /360) = 6
अब,
OAB का क्षेत्रफल = (
3/4) x a2 [चूँकि OA = OB]
= (
3/4) x 6 x 6 = 9
3
= 9 x 1.73
= 15.57 सेमी०2
वृत्तखंड AYB का क्षेत्रफल = 6 X (22/7) - 15.57
= 18.84 - 15.57
= 3.27 सेमी०2
मिनट वाली सुई के द्वारा तय की गयी त्रिज्या = सुई की लम्बाई = 28 सेमी०
वृत्त का क्षेत्रफल = (22/7) x 28 x 28 = 88× 28 सेमी०2
15 मिनट में तय क्षेत्र का क्षेत्रफल = (1/4) x 88 x 28 = 616 सेमी०2
A. (
r2
)/360
B. (2
r2
)/180
C. (
r2
2)/360
D.
r2
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल = (
r2
)/360
2640 है
वृत्त की परिधि = (2640/12) = 220 मी०
अब, 2
r = 220
r = (220 / 2) x( 7/22)
= 35 मी०
अतः, वृत्त का क्षेत्रफल = (22 / 7) x 35 x 35
= 110 × 35 = 3850 मी०2
वृत्त का क्षेत्रफल =
r2 = 102
= 100
मी०2= घोड़े द्वारा चरा गया क्षेत्र
= 3.14 लेने पर]
A. 57 सेमी०2
B. 114 सेमी०2
C. 171 cm2
D. 228 सेमी०2
दी गयी आकृति की जीवा AB है|
DB = 10
2 सेमी० [वर्ग का विकर्ण = भुजा
2]
वृत्त की त्रिज्या = (10
2 )/2 = = 5
2
वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
= 25 × 2 x 
= 50
= 50 × 3.14
= 157 सेमी०2
वर्ग का क्षेत्रफल = 102 = 100 सेमी०2
अतः,
छायांकित भाग का क्षेत्रफल = 157 – 100
= 57 सेमी०2
छाते का क्षेत्रफल =
r2 =
x 42 × 42
= (22/7) x 42 x 42
अतः, दो क्रमागत तानों के मध्य क्षेत्रफल
= (1/8) x 132 x 42 = 693 सेमी०2
वर्ग का क्षेत्रफल = 28 × 28
784 सेमी०2
प्रत्येक वृत्त का व्यास = (28/2)
= 14 सेमी०
प्रत्येक वृत्त की त्रिज्या = (14/2) = 7 cm
प्रत्येक वृत्त का क्षेत्रफल =
r2
= 49 x (22/7)
= 154 सेमी०2
चारों वृत्तों का क्षेत्रफल = 4 × 154
= 616 सेमी०2
छायांकित भाग का क्षेत्रफल = 784 – 616
= 168 सेमी०2
2 मिनट में मिनट की सूई द्वारा बनाया गया कोण=360°
2/60=12°
मिनट की सूई द्वारा बनाये गए वृत्तखंड का क्षेत्रफल = (12°/360°)
(22/7)
21
21
= 46.2 cm2


चूँकि, मिनट वाली सुई 60 सेकंड में कोण बनाती है =360°
इसलिए, मिनट वाली सुई 1 मिनट में कोण बनाएगी =360°/60°
मिनट वाली सुई 2 मिनट में कोण बनाएगी =12°







माना, O वृत्त का केंद्र है और AB बड़े वृत्त की जीवा है जो छोटे वृत्त को स्पर्श करती है|
समकोण त्रिभुज ODA में










माना, O वृत्त का केंद्र है और AB बड़े वृत्त की जीवा है जो छोटे वृत्त को स्पर्श करती है|
समकोण त्रिभुज ODA में

































बाल्टी की क्षमता = शंक्वाकार छिन्नक का आयतन
शंक्वाकार छिन्नक का आयतन



माना r1 और r2 क्रमशः शंकु और बेलन की त्रिज्याएँ हैं, तब
r1 = r2 = 8 सेमी
माना h1 औरh2 क्रमशः शंकु तथा बेलन की ऊँचाइयाँ हैं,तब
h1 = 36 सेमी और h2 = 240 सेमी
लोहे के स्तम्भ का कुल आयतन
= शंकु का आयतन + बेलन का आयतन 


A.
B.
C.
D.
नया माध्य = 7 + (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7) का माध्य
= 7 + (7 + 1)/2
= 11
A.
18
B.
17
C.
16
D.
15
माध्य = (5 + 3 + 0.5 + 4.5 + b + 8.5 + 9.5)/7
= (31 + b)/7
7 = (31 + b)/7
b = 18
A.
[(n + 1)/2]
B.
[(n/2) + 1]
C.
(n/2)
D.
(1/2)(n - 1)
समान्तर माध्य = [(प्रेक्षणों का योग / प्रेक्षणों की संख्या)
A.
31
B.
43
C.
52
D.
63
9 प्रेक्षणों का योग = 9 × 36 = 324 पहले 5 प्रेक्षणों का योग = 5 × 32 =160 अंतिम 5 प्रेक्षणों का योग = 5 × 39 = 195 पाचवाँ प्रेक्षण = 160 + 195 – 324 =31
A.
B.
C.
D.
34 छात्रों का औसत भार
34
46.5 =1581
माना कि एक शिक्षक का भार = x किग्रा
हमारे पास , (1581 + x ) / 35 = 46.5 + 0.5 = 47
x = (47
35) – 1581
x = 64 किग्रा
A.
13
B.
16
C.
17
D.
30
20 संख्याओं का योग = 20
15 = 300
20 संख्याओं के नये समूह का योग = 300 + 10
2 = 320
माध्य = 320/20 = 16
A.
23.66
B.
24.66
C.
25.66
D.
26.66
यह
दिया
गया
है
कि
A + B = 50
B + C = 56
C + A = 42
इन
तीनो
समीकरणों
का
जोडने
पर, हमें
प्राप्त
होता
है
2(A + B + C) = 148
A + B + C = 148/2 =
74
A, B और
C
का
औसत= 74/3 =
24.66
A.
85
B.
85 और 425 के बीच
C.
425
D.
425 से अधिक
परिभाषा
से
A.
2/7
B.
1/7
C.
2/365
D.
1/365
एक 365 दिन
के
गैर
अधिवर्ष
में 52 सप्ताह
और 1 दिन
होता
है।
S = {रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र ,शनि }
E = { शनि }
n (E) =
1
इसलिए, P(E) =
n(E)/n(S) = 1/7
A.
5/6
B.
2/3
C.
1/3
D.
1/2
E
= {3, 4, 5, 6}
n(E) = 4
S =
{1, 2, 3, 4, 5, 6}
n(S) = 6
उदाहरण हैः
वह घटना, जिसका घटित होना निश्चित है, की प्रायिकता 1 होती है। ऐसी घटना को एक निश्चित या निर्धारित घटना कहते है।
वह घटना, जिसका घटित होना असंभव हैं, की प्रायिकता 0 होती है। ऐसी घटना को एक असंभव घटना कहते है।
दिया है :-
एक प्रश्न को छात्र द्वारा हल करने की प्रायिकता
=

माना या P(E) =
एक प्रश्न के छात्र द्वारा हल नही करने की प्रायिकता
