घटना के प्रतिकूल संयोगानुपात = 3:5
अतः घटना के अनुकूल संयोगानुपात = 5:3
घटना के घटित होने की प्रायिकता = 5/(5 + 3) = 5/8
एक
लाल गेंद
निकाले जाने
के अनुकूल
प्रकार 3 और
प्रतिकूल
प्रकार 5 है|
अत: अभीष्ट
प्रायिकता = 3/3+5
= 3/8
छह
प्रकार के छह अंको
में से दो अंक 5
तथा 6 है जो 4 से
बड़े है ,
अर्थात केवल
दो प्रकार अनुकूल
है
अत: अभीष्ट
प्रायिकता =2/6
=1/3
दो घन पासो को एक साथ फेंकने के कुल संभव प्रकार = 6 x 6 = 36
6 निम्न प्रकार से प्राप्त हो सकता है: पहले पासे पर अंक 1 तथा दूसरे पर 5 , पहले पासे पर 2 तथा दूसरे पर 4,पहले पासे पर 3 तथा दूसरे पर 3 , पहले पासे पर 4 तथा दूसरे पर 2 और पहले पासे पर 5 तथा दूसरे पर 1 का अंक आये |
चूंकि कुल विधियाँ = 5
अतः अभीष्ट प्रायिकता =5/36
किसी भी अधिवर्ष में दिनों की संख्या 366 अर्थात 52 पूर्ण सप्ताह और
दो दिन होता है । इन दो दिनों का निम्नानुसार संचय बना सकते है -
1. सोमवार तथा मंगलवार
2. मंगलवर तथा बुधवार
3. बुधवार तथा वृहस्पतिवार
4. वृहस्पतिवार तथा शुक्रवार
5. शुक्रवार तथा शनिवार
6. शनिवार तथा रविवार
7. रविवार तथा सोमवार
अतः अभीष्ट प्रायिकता = 2/7
कोई क्रिया या संक्रिया जिसका परिणाम एक सुपरिभाषित परिणाम के रूप में होता है, प्रयोग कहलाता है।
जब सभी परिणामों की प्रायिकता समान होती है,तब इसे समसम्भाव्य परिणाम कहते हैं।
हो तो निम्नलिखित स्थितियों में प्रायिकताएं क्या होंगी -




माना की पहली उछाल में चित आता है तो इसके बाद पट और फिर इसके बाद चित आना चाहिए |
इस क्रम की प्रायिकता = 1/2 x 1/2 x 1/2 = 1/8
पुनः माना की पहली उछाल में पट आता है तो इसके बाद चित और फिर इसके बाद पट आना चाहिए |
इस क्रम की प्रायिकता = 1/2 x 1/2 x 1/2 = 1/8
अतः इन घटनाओ में से किसी भी घटना के घटित होने की प्रायिकता
= 1/8 + 1/8 = 1/4
3
के अपवर्त्य 3,
6, 9, 12, 15 और 18 है जिनकी
कुल संख्या 6
है |
अतः 3 के
अपवर्त्य
होने की
प्रायिकता = 6/20 =
3/10
इसी प्रकार 7
के 7 और 14 है
जिनकी
संख्या 2 है |
7 के अपवर्त्य
होने की
प्रायिकता =
2/10=1/5
चुकी ये
दोनों
घटनाये
परस्पर
अपवर्जी है |
अतः अभीष्ट
प्रायिकता = 3/10 + 1/10
= 4/10 = 2/5




A.

B.

C.

D.

A.
88 मी 2
B.
176 मी 2
C.
1232 मी 2
D.
2464 मी 2
A.
B.
C.
D.
शंकुओं की संख्या = (ठोस बेलन का आयतन)/( एक शंकु का आयतन)
= (
x 3 x 3 x 5)/[(1/3) x
x (1/10) x (1/10) x 1]
= 13500
A.
B.
C.
D.
बाल्टी की क्षमता = शंकु के छिन्नक का आयतन
सेमी3
A.
B.
C.
D.
एक शंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल = वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल + शंकु के आधार का क्षेत्रफल
=
rl +
r2 =
r(l + r)
= 103.71 फीट 2
A.
B.
C.
D.
तिर्यक ऊँचाई (l) =
(32 + 42) = 5 सेमी
शंकु का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल
=
rl = 3.14
4
5 = 62.8 सेमी 2
A.
724 वर्ग मीटर
B.
714 वर्ग मीटर
C.
704 वर्ग मीटर
D.
700 वर्ग मीटर
पाश्र्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2
rh
=
2
(22/7)
8
14
= 2
22
8
2
= 704 वर्ग मीटर
A.
(1/8) सेमी 2
B.
(1/4) सेमी 2
C.
(3/4) सेमी 2
D.
(3/2) सेमी 2
एक 0.5 सेमी भुजा के घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6 x (0.5)2 = 6 x 0.25 = 1.50 = (3/2) सेमी 2
A.
1 इकाई
B.
2 इकाई
C.
3 इकाई
D.
4 इकाई
माना कि गोले की त्रिज्या r है।
गोले का आयतन = पृष्ठीय क्षेत्रफल
4/3(
r3) = 4
r2
r/3 = 1
r = 3 इकाई
A.
4.
B.
8.
C.
16.
D.
64.
गेंदो की अभीष्ट संख्या (n) = (बडी गेंद का आयतन)/( छोटी गेंद का आयतन)
=
[(4/3) x
x 83]/[(4/3)
x
x 23]
= 64 गेंदे
A.
B.
C.
D.
r1 = 14 सेमी, r2 = 6 सेमी और h = 6 सेमी
माना कि शंकु के छिन्नक की तिर्यक ऊँचाई l है।
सेमी
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल=
(r12 + r22 + (r1+ r2)l)
A.
1400 सेमी3
B.
1500 सेमी3
C.
1554 सेमी3
D.
1600 सेमी3
माना r1और r2
शंकु के छिन्नक के वृत्ताकर सिरो की त्रिज्याएं है और h इसकी ऊँचाई है।
2
r1 = 48, 2
r2 =
36 और h = 11 सेमी
r 1 = (24/
), r2 = (18/
) और h =
11 सेमी
शंकु के छिन्नक का आयतन V = (1/3)
x
x (r12
+ r22 + r1r2)h
V =
(1/3) x
x
[(24/
)2
+ (18/
)2
+ (24/
)(18/
)] x
11
V =
(1/3) x
x
11 [(576 + 324 + 432)/
2)] सेमी3
V =
(11/3) x (1332/
) सेमी3 = (11/3) x
(1332/22) x 7 सेमी3
= 1554 सेमी3
A.
R : r.
B.
H : h.
C.
R2 : r2.
D.
R3 : r3.
माना कि R एक बेलन की त्रिज्या है और r दूसरे बेलन की त्रिज्या है।
तब,
पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 2
Rh : 2
rh = R : r
A.
2981 सेमी 2
B.
2861 सेमी 2
C.
2816 सेमी 2
D.
2714 सेमी 2
प्रश्नानुसार, हमें ज्ञात है
r2 =
616
r = 14
l =
(h2 + r2)
= 50
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल =
r(r + l)
= 2816 सेमी 2
A.
दुगुना हो जाता है
B.
4 गुना हो जाता है।
C.
6 गुना हो जाता है।
D.
8 गुना हो जाता है।
माना कि एक घन का कोर a है।
तब इसका आयतन = a3
यदि इसकी कोर को दुगुना कर दिया जाये, अर्थात,
कोर = 2a
आयतन = (2a)3
= 8a3
इसलिए, आयतन 8 गुना हो जाता है।
A.
5 सेमी
B.
6 सेमी
C.
7 सेमी
D.
10 सेमी
माना कि घनाभ की तीसरी भुजा x सेमी है। तब,
11 x 6 x y = (1/3) x (22/7) x 72 x 9
y = 462/66
= 7 सेमी
A.
(5280/7) मी2
B.
(5180/7) मी2
C.
(4180/7) मी2
D.
(3480/7) मी2
शंक्वाकार टेन्ट का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल
तिर्यक ऊँचाई =
(122 + 162)
=
400
= 20 मी
अभीष्ट केनवास = शंक्वाकार टेन्ट का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल
=
rl
= (22/7) x 12 x 20
= (5280/7) मी2
A.
H2 : h2.
B.
2H : h.
C.
H : 2h.
D.
H : h.
अभीष्ट अनुपात 2
RH : 2
Rh
है।
[
त्रिज्याएं समान है]
H : h
A.
803 सेमी3
B.
380 सेमी3
C.
308 सेमी3
D.
830 सेमी3
आधार का क्षेत्रफल =
38.5 सेमी2
r2 =
38.5
r = 3.5 सेमी
पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल =
2
rh = 176
h = 8 सेमी
V =
r2h =
308 सेमी3
A.
240 सेमी2
B.
404 सेमी2
C.
440 सेमी2
D.
480 सेमी2
पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2
rh
= 2 x (22/7) x 7 x 10
= 440 cm2

35,200 वर्ग सेमी
प्रश्नानुसार, हमें ज्ञात है
r2 =
616
r = 14
l =
(h2 + r2)
= 50
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल =
r(r + l)
=
2816 सेमी2

अतः, गोले की त्रिज्या आधी हो जाने पर, नये गोले का आयतन पहले वाले आयतन का
वाँ भाग होगा।
माना कि R एक बेलन की त्रिज्या है और r दूसरे बेलन की त्रिज्या है।
तब, पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफलो का अनुपात= 2
Rh : 2
rh = R : r
हम जानते है कि
घनाभ
का सम्पूर्ण पृष्ठ
= 2(lb + bh + hl) सेमी2
= 2(10 x 8+ 8 x 5 + 10 x 5)
= 340 सेमी2
हम
जानते है कि
घन के
सम्पूर्ण
पृष्ठ का
क्षेत्रफल = 6a2
वर्ग
सेमी
= 6 x
10 x 10 वर्ग सेमी
= 600
वर्ग सेमी
बेलन का आयतन = ![]()

= 97.02 सेमी3
शंकु का आयतन = 

= 13.86 सेमी3


परिणामी ठोस का आयतन= बेलन का आयतन – शंकु का आयतन
अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = ![]()

= 41.58 सेमी2









5 संख्याओं का समान्तर माध्य = 27
5 संख्याओं का कुल योग = 5 x 27 = 135
4 संख्याओं का समान्तर माध्य = 25
4 संख्याओं का योग = 25 x 4 = 100
छूटी हुई संख्या = 135 - 100 = 35

दिये गये तोरण के माध्यम से
|
वर्ग |
10-15 |
15-20 |
20-25 |
25-30 |
30-35 |
|
बारम्बारता |
1 |
3 |
5 |
3 |
5 |

| वर्ग अंतराल | 0-6 | 6-12 | 12-18 | 18-24 | 24-30 |
| बारम्बारता | 5 | 9 | 10 | 12 | 4 |
|
वर्ग अंतराल |
मध्यमान |
बारम्बारता |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|

सर्वप्रथम, हम इसे सतत् बारम्बारता आँकड़े में परिवर्तित करेंगें।
|
वर्ग |
बारम्बारता |
|
4.5-9.5 |
3 |
|
9.5-14.5 |
5 |
|
14.5-19.5 |
8 |
|
19.5-24.5 |
7 |
|
24.5-29.5 |
5 |
|
29.5-34.5 |
2 |


| वर्ग अन्तराल | 35.40 | 40.45 | 45.50 | 50.55 | 55.60 |
| बारम्बारता | 7 | 6 | 9 | 5 | 3 |



| वर्ग अन्तराल | 20-25 | 25-30 | 30-35 | 35-40 | 40-45 | 45-50 | 50-55 |
| बारम्बारता | 12 | 10 | 8 | 9 | 6 | 5 | 2 |
|
वर्ग अन्तराल |
बारम्बारता |
मध्यमान |
|
|
|
|
|
|
|
|
|


| x | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| f | 46 | f1 | f2 | 25 | 10 | 5 |
माना कि अज्ञात बारम्बारताएं f1और f2 हैं।
|
x |
f |
x.f |
|
0 |
46 |
0 |
|
1 |
f1 |
f1 |
|
2 |
f2 |
2f2 |
|
3 |
25 |
75 |
|
4 |
10 |
40 |
|
5 |
5 |
25 |
|
|
N = 86 + f1+ f2 |
|

| प्राप्तांक | 0-10 | 10-20 | 20-30 | 30-40 | 40-50 | 50-60 | 60-70 |
| विद्यार्थियों की संख्या | 2 | 10 | 12 | 15 | 13 | 8 | 4 |
|
वर्ग अन्तराल |
बारम्बारता f. |
C.f. |
|
0-10 |
2 |
2 |
|
10-20 |
10 |
12 |
|
20-30 |
12 |
24 |
|
30-40 |
15 |
39 |
|
40-50 |
13 |
52 |
|
50-60 |
8 |
60 |
|
60-70 |
4 |
64 |

| वर्ग | बारम्बारता |
| 0-10 | 3 |
| 10-20 | 8 |
| 20-30 | 10 |
| 30-40 | 15 |
| 40-50 | 7 |
| 50-60 | 4 |
| 60-70 | 3 |








A.
B.
C.
D.
A.
7
B.
7.25
C.
7.5
D.
7.75
24
के
सभी
गुणक1, 2, 3,
4, 6, 8, 12, 24 है
माध्य =

A.
3a
B.
a – 2
C.
a + 2
D.
a
माध्य =
A.
26
B.
28
C.
29
D.
35
15 संख्याओं का योग = 435 15 संख्याओं का माध्य = 435/15 = 29
A.
B.
C.
D.
माध्य =
A.
129
B.
139
C.
149
D.
159
A.
6.8
B.
5.6
C.
4.6
D.
3.2
पहली
छह
अभाज्य
संख्याएं
2,
3, 5, 7, 11, और
13
है।
माध्य
A.
x + y = 13
B.
x – y =13
C.
2x + y = 13
D.
x2 + y2 = 15
परिभाषा
से

| पद | 25 | 35 | 45 | 55 | 65 |
| बारम्बारता | 14 | 16 | 24 | 20 | 6 |
A.
B.
C.
D.
45 की बारम्बारता सबसे अधिक बार (24) है। इसलिए बहुलक 45 है।
A.
18
B.
16
C.
15
D.
14
5
के
पहले
5
गुणको
5, 10, 15, 20 और
25
है
।
गुणको
का
योग
=
5 + 10 + 15 + 20 + 25
=
75
अतः
माध्य
=
75/5
= 15
A.
B.
C.
D.
बुध + गुरू + शुक्र
= 47
3 = 141 …(1)
मंगल +बुध + गुरू = 42
3 = 126 …(2)
समीकरण (1) में से (2) को घटाने पर, हमें प्राप्त होता है
शुक्र - मंगल = 15
शुक्र = 15° + मंगल = 15° + 43° = 58°C
शुक्रवार का तापमान था = 58°C
A.
83
B.
53
C.
12
D.
10
छह संख्याओं का योग = 43
6 = 258
माना कि हटाई गई संख्या = x
तब
(258 - x)/5 = 41
258 – x = 205
x = 258 – 205 = 53




| वर्ग अन्तराल | बारम्बारता |
| 1-10 | 5 |
| 11-20 | 3 |
| 21-30 | 4 |
| 31-40 | 7 |

|
वर्ग अन्तराल |
बारम्बारता |
|
0.5-10.5 |
5 |
|
10.5-20.5 |
3 |
|
20.5-30.5 |
4 |
|
30.5-40.5 |
7 |




9 प्रेक्षणों का योग = 9 × 36 = 324
पहले 5 प्रेक्षणों का योग= 5 × 32 =160
5th प्रेक्षण = 160 + 195 – 324 =31
| जीवनकाल (घंटों में ) | लैपों की संख्या |
| 1500 - 2000 2000 - 2500 2500 - 3000 3000 - 3500 3500 - 4000 4000 - 4500 4500 - 5000 | 14 56 60 86 74 62 48 |

| वर्ग अंतराल | 0-20 | 20-40 | 40-60 | 60-80 | 80-100 | 100-120 |
| बारंबारता | 10 | 35 | 52 | 61 | 38 | 20 |
|
वर्ग अंतराल |
बारम्बारता |
|
0-20 |
10 |
|
20-40 |
35 |
|
40-60 |
52 |
|
60-80 |
61 |
|
80-100 |
38 |
|
100-120 |
20 |

A.
5/8
B.
5/15
C.
3/8
D.
3/15
n(E) = 5
n(S) = 3 + 5 =
8
A.
1/6
B.
1/3
C.
1/2
D.
2/3
E =
{2, 3, 5}
n(E) = 3
S
= {1, 2, 3, 4, 5, 6}
n(S) = 6
A.
0
B.
1/4
C.
2/3
D.
1
चूंकि परिणामों की कुल संख्या= 6+ 3 + 3 = 12 केले के प्राप्त होने के परिणामों की संख्या 4 है , अतः अभीष्ट प्रायिकता= 3/12 = 1/4
A.
B.
C.
D.
E = {2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16, 18, 20, 22, 24}
n(E) = 12
S = {1, 2, 3, 4, ..., 25}
n(S) = 25
A.
1/36
B.
1/6
C.
1/3
D.
1/2