सरपंच या गांव का प्रधान ग्राम आपदा प्रबंधन समिति का मुखिया होता है|
राष्ट्रीय केडिट कोर का गठन 1958 में किया गया था|
सभी अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रियाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय (ओसीएचए) कार्यालय उत्तरदायी होता है|
महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नोडल मंत्रालय होता है|
सभी सरकारी योजनाओं और गतिविधियों का केंद्र बिंदु जिला है|
भारत में सूखा प्रबंधन कृषि मंत्रालय द्वारा समन्वित किया जाता है|
खंड स्तर पर आपदा प्रबंधन गतिविधियों के लिए खंड विकास अधिकारी नोडल अधिकारी होता है| समिति के अन्य अधिकारियों में समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, पुलिस, फायर सर्विसेज, युवा संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, प्रख्यात नागरिकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों केप्रतिनिधिशामिल हैं|
| क्र० सं० | आपदा | नोडल मंत्रालय |
| 1 | प्राकृतिक आपदा | |
| 2 | सूखा | |
| 3 | वायु दुर्घटनाएं | |
| 4 | रेल दुर्घटनाएं | |
| 5 | जैविक आपदा | |
| 6 | महामारी | |
| 7 | परमाणु | |
| 8 | रासायनिक आपदा |
|
क्र० सं० |
आपदा |
नोडल मंत्रालय |
|
1 |
प्राकृतिक आपदा |
गृह मंत्रालय |
|
2 |
सूखा |
कृषि मंत्रालय |
|
3 |
वायु दुर्घटनाएं |
नागरिक उड्डयन मंत्रालय |
|
4 |
रेल दुर्घटनाएं |
रेल मंत्रालय |
|
5 |
जैविक आपदा |
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
|
6 |
महामारी |
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
|
7 |
परमाणु |
गृह मंत्रालय |
|
8 |
रासायनिक आपदा |
गृह मंत्रालय |
नेहरु युवा केन्द्रों के मुख्य उद्देश्य गैर-छात्र ग्रामीण युवाओं की जरूरतों को पूरा करना तथा उनके स्वयं के व्यक्तित्व व कौशल के विकास के अवसर प्रदान करना है|
नागरिक सुरक्षा से अभिप्राय जीवन की रक्षा करना,शत्रुतापूर्ण हमले की घटना में सम्पत्ति के नुकसानको कम-से-कम करना और औद्योगिक उत्पादन को बनाए रखनाहै|राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय की स्थापना केन्द्रीय आपात राहत प्रशिक्षण संस्था के रूप में 29 अप्रैल,1957 को की गयी थी|
सरपंच/गांव के मुखिया के नेतृत्व में ग्राम आपदा प्रबंध समिति ग्राम आपदा प्रबंध योजनाएं बनाती है तथा आपदा प्रबंधन टीमों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करती है|
राष्ट्रीयसेवायोजना का प्रतीक उड़ीसा के कोणार्क सूर्य मंदिर के ‘रथ के पहिए’ पर आधारित है| यह युवाओं के गतिशील और प्रगतिशील दृष्टिकोण का प्रतीक है|
एक राष्ट्रीयसेवायोजना स्वयंसेवक को दो वर्ष की लगातार अवधि में कम-से-कम 240 घंटे उपयोगी समाज-कार्य करना चाहिए। उन्हें अपने कार्यों की एक डायरी तैयार करनी होती है| एक कॉलेज कीप्रत्येकराष्ट्रीयसेवायोजना यूनिट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह निकट के किसी गांव/स्लम कोअपनाए तथा उसके सम्पूर्ण विकास के लिए कार्य करे।
भारत में चक्रवात तमिलनाडू, अंडमान और निकोबार, आन्ध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और कृष्णा-गोदावरी डेल्टा में मध्य तटीय क्षेत्र में अधिक आते हैं ।
चक्रवाती तूफान के साथ हर बार मूसलाधर वर्षा होती है और ऊंची लहरें; तटीय क्षेत्रों में उठने लगती हैं। इनके कारण, निचले इलाकों में पानी भर जाता है। जैसे-जैसे ये तूफानी लहरें तट की ओर बढ़ती हैं उनका प्रभाव कम होता जाता है। ये लहरें तट पर 10 से 15 किलोमीटर दूर तक पहुंच सकती हैं।
छत पर हवा की शक्ति को कम करने के लिए त्रिअंकी छत (गैबल रूफ) की अपेक्षा काठी या पिरामिड प्रकार की छत को तरजीह दी जानी चाहिए।
बाढ़ के ज्ञात उच्च स्तर से ऊपर के ‘प्लिन्थ लेवल’ पर इमारत का निर्माण करना चाहिये|
बांग्लादेश में सन 1974 की गर्मियों में बाढ़ से लगभग आध देश जलमग्न हो गया। इस बाढ़ से 1200 लोग मारे गए और बाद में फैली बीमारी एवं भूख से 27,500 लोगों की मौत हुई। लगभग 4,25,000 मकान नष्ट या बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए।
ढलानों को स्थिर बनाइए के लिए:
क. ढलानों पर घासपात उगाकर और वृक्षारोपण करके ढलानों को मजबूत बनाएं ताकि भूमि कटाव न हो।
ख. कम से कम एक इंच की गहराई तक घासपात, लकड़ी की छीजन, या पेड़ों की छाल का इस्तेमाल करना कम ढलानों वाले स्थानों पर प्रभावकारी होती है।
चक्रवात से असुरक्षित इमारतें वे होती हैं जो हल्के वजन की होती हैं और जिनके फ्रेम लकड़ी के बने होते हैं। इनमें विशेषकर ऐसी
पुरानी इमारतें भी होती हैं जिनकी लकड़ी खराब और कमजोर हो गयी हो। घटिया कंक्रीट के ढांचों से बने मकान भी असुरक्षित होते हैं।
भूस्खलन के प्राकृतिक कारक निम्न हैं:
क. वर्षा की तीव्रता
ख. भूकम्पीय गतिविधियाँ
ग. खड़ी ढ़लानें
घ. ढलानों का कड़ापन
ङ. बहुत अधिक कटी-फटी चट्टानों की परतें
च. गुरूत्वाकर्षण के अंतर्गत बनी मिट्टी की परतें
छ. खराब जल-निकासी
किसी इमारत में निम्नलिखित में किसी एक या अधिक बैंडों की जरूरत होती है। इन बैंडों
में प्लिन्थ बैंड, लिन्टल बैंड, रूफ बैंड तथा गेबल बैंड शामिल हैं और इमारत के जिस हिस्से में इन बैंडों का प्रयोग किया जाता है उसी के आधर पर इनका नाम रखा गया है।
चक्र्वातीय क्षेत्र में घर की दीवारों में दरवाजों और खिड़कियों के लिए बने खुले स्थान छोटे तथा बीचों-बीच स्थित होने चाहिए। बहुत ज्यादा तथा बड़े-बड़े खुले स्थान होने से भूकंप के दौरान दीवार के गिरने की संभावना होती है। खुले स्थान दीवार के किनारों के ज्यादा नजदीक नहीं होने चाहिए।
बाढ़ क्षेत्र में सर्वाधिक असुरक्षित मकान:
क. मिट्टी से बनी सामग्री या कीचड़ गारा के साथ ईंट-पत्थर का इस्तेमाल करके बनाई गयी इमारते भारी वर्षा या बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
ख. बांस, पत्तों, छप्पर या धातु की चादरों जैसी बायोमास सामग्री के इस्तेमाल से बनी झोंपड़ियां बाढ़ में नष्ट हो जाती हैं और पानी में बह जाती हैं।
ग. नदियों के मार्ग में आने वाले बाढ़ग्रस्त मैदानी इलाकों में रहने वालों के लिए खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर जिन इलाकों में घनी आबादी होती है|
इमारत की आकृति
क. इमारत का नक्शा साधरण तथा आयताकार होना चाहिए।
ख. लंबी दीवारों को सहारा देने के लिए ईंट-पत्थर या कंक्रीट के कालम होने चाहिए|
ग. जहां तक हो सके T, L, U और X आकार के नक्शों वाली बड़ी इमारतों को उपयुक्त स्थानों पर अलग-अलग खंडों में बांट कर आयताकार खण्ड बना लेने चाहिए।
भूकंप के आने पर जमीन की सतह पर बनी इमारतें हिलने लगती हैं। इस हलचल के कारण हर इमारत पर उसकी बनावट के अनुसार प्रभाव पड़ता है। जैसे ही लहरें उठती हैं, उसी के अनुसार जमीन हिलने-डुलने लगती है। जमीन के स्तर से लगा इमारत का निचला भाग जमीन के साथ-साथ हिलने लगता है। लेकिन आरंभ में इमारत का ऊपरी भाग स्थिर रहता है इस प्रकार इमारत में खिंचाव आने से उसका आकार बिगड़ जाता है। धीरे-धीरे ऊपर का भाग नीचे के भाग के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश करता है। लेकिन, जैसे ही ऐसा हो रहा होता है, जमीन दूसरी दिशा में खिसक जाती है और इमारतें क्षतिग्रस्त हो जाती है।
पहाड़ी क्षेत्र में निम्न संकेतों को देखकर भूस्खलन होने की संभावना का पता लगा सकते हैः
क. खिड़कियां या दरवाजे पहली बार अटकने या जकड़ने लगे हों,
ख. पलस्तर, टाइल, ईंट अथवा नींव में नई दरार दिखने लगी हो,
ग. बाहरी दीवारें, सीढियां या रास्ते इमारत से उखड़ने लगे हों,
घ. उपयोगिता वाली भूमिगत लाइनें टूट रही हों,
ङ. बाढ़, दीवारें, उपयोगिता खम्भे या पेड़ झुकने या अपने स्थान से हटने लगे हों|
च. ढ़लान के तल पर पानी या जमीन उभरती दिखाई देने लगी हो।
भूकंप के कारण जमीन में हलचल होने से कई क्षतिकारक प्रभाव हो सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रभाव नीचे बताए गए हैं:
क. जमीन का हिलना, अर्थात् जमीन के अन्दर से गुजर रही कम्पायमान तरंगों से जमीन का आगे-पीछे डुलना।
ख. मिट्टी का क्षय, अर्थात् जमीन के कांपने से मिट्टी का तरल होना और भूस्खलन होना।
ग. सतह में दरारें आना जैसे किसी क्षेत्र का दरकना, खिसकना और बैठ जाना।
घ. ज्वारीय तरंग; सूनामी अर्थात् पानी की सतह पर विशाल लहरें उठना जिनसे तटवर्ती क्षेत्रों में काफी नुकसान हो सकता है।
जलप्लावन रोकने के सबसे कारगर उपाय हैं:
क. नदी किनारों, नदी की ओर ढलानों पर तथा संकरी घाटियों में रिहायश न करना।
ख. समुद्र तट/नदी तट से कम-से-कम 250 मीटर दूर मकान बनाना।
ग. बाढ़ की संभावना वाले सभी क्षेत्रों में जल-निकासी की उपयुक्त व्यवस्था करना।
घ. बाढ़ के ज्ञात उच्च स्तर से ऊपर के ‘प्लिन्थ लेवल’ पर इमारत का निर्माण करना|
ङ. खम्भों या कालमों पर इमारतें बनाना
A.
राष्ट्रीय-राज्य-ब्लॉक-जिला-गांव
B.
राष्ट्रीय-राज्य-गांव-जिला-ब्लॉक
C.
राष्ट्रीय-ब्लॉक-जिला-राज्य-गांव
D.
राष्ट्रीय-राज्य-जिला-ब्लॉक-गांव
प्रशासनिक पदानुक्रम का शीर्ष केन्द्र सरकार होती है। इसके बाद राज्य स्तर पदानुक्रम आता है। राज्य सरकार के बाद जिला स्तर आता है, उसके बाद ब्लॉक और अंत में गांव स्तर आता है।
A.
शिक्षा मंत्रालय
B.
खेल एवं युवा मामलों का मंत्रालय
C.
शिशु एवं महिला सशक्तिकरण मंत्रालय
D.
गृह मंत्रालय
राष्ट्रीय सेवा शुरू करने की सिफारिश प्रथम शिक्षा आयोग (1950) ने की थी। शिक्षा मंत्रालय ने 1969 - 70 के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना को लागू किया।
A.
संयुक्त राष्ट्र आपदा न्यूनीकरण दल
B.
संयुक्त राष्ट्र आपदा दल
C.
संयुक्त राष्ट्र आपदा प्रबंधन दल
D.
संयुक्त राष्ट्र आपदा स्तरीकरण दल
यूएनडीएमटी का प्रमुख उद्देश्य यूएन प्रणाली द्वारा आपदा संबंधी देशव्यापी त्वरित, प्रभावी और एकजुट तैयारी सुनिश्चित करना और उचित समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
A.
जिला मजिस्ट्रेट
B.
जिला कलेक्टर
C.
मुख्यमंत्री
D.
प्रधानमंत्री
राज्य के मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति होती है जो राज्य में राहत कार्यों की देखभाल करती है।
A.
कानपुर
B.
रामपुर
C.
शोलापुर
D.
नागपुर
राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय प्रथम आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान है। इसे पूर्व में केंद्रीय आपात राहत प्रशिक्षण संस्था के रूप में जाना जाता था। यह अप्रैल 1957 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थापित किया गया था।
A.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
B.
जिला मजिस्ट्रेट
C.
जिला प्रशासक
D.
जिला प्रशासनिक अधिकारी
जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला स्तर पर एक आपदा प्रबंधन समिति होती है जो आपदा प्रबंधन की गतिविधियों की निगरानी और उनमें समन्वय स्थापित करती है।
A.
राज्य
B.
ब्लॉक
C.
गाँव
D.
केंद्र
भौतिक एवं वित्तीय संसाधनों के संदर्भ में आपदा प्रबंधन के लिए सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
A.
गृह मंत्रालय
B.
पर्यावरण मंत्रालय
C.
नगर विमानन मंत्रालय
D.
कृषि मंत्रालय
कृषि मंत्रालय सूखे के लिए आपदा प्रबंधन की गतिविधियों का समन्वय करता है, जबकि अन्य सभी आपदाओं का प्रबंधन गृह मंत्रालय के अधीन आता है।
A.
72वाँ एवं 73वाँ संशोधन
B.
71वाँ एवं 73वाँ संशोधन
C.
73वाँ एवं 74वाँ संशोधन
D.
74वाँ एवं 75वाँ संशोधन
73वें एवं 74वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को स्वायत्तशासी संस्था के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।
A.
कृषि मंत्रालय
B.
गृह मंत्रालय
C.
पर्यावरण मंत्रालय
D.
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
सूखा प्रबंधन का नोडल मंत्रालय कृषि मंत्रालय है। मंत्रालय पूरे देश में सूखा प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों के लिए समन्वय स्थापित करता है ।
A.
दिसम्बर , 1947
B. दिसम्बर , 1946
C. दिसम्बर , 1943
D. दिसम्बर , 1950
होमगार्ड एक भारतीय अर्धसैनिक बल है। यह एक स्वैच्छिक बल है जो भारतीय पुलिस के एक सहायक बल के रूप में कार्य करते हैं।
A.
240
B. 230
C. 280
D. 300
एनएसएस स्वयंसेवक के रूप में नामांकित छात्र को दो वर्ष की लगातार अवधि में कम-से-कम 240 घंटे का उपयोगी समाज-कार्य करना होता है। अपने कार्यों का रिकॉर्ड रखने के लिए उन्हें एक डायरी बनानी होती है, जिसका प्रयोग उनके कार्यों के मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
A.
राष्ट्रीय कैडेट कोर
B.
राष्ट्रीय सेवा योजना
C.
भारतीय सशस्त्र बल
D.
होमगार्ड
सशस्त्र बल सरकार की ओर से जवाबी कार्रवाई करने वाला एक महत्वपूर्ण अंग हैं। प्रतिकूल जमीनी परिस्थितियों में कार्रवाई कर सकने, प्रचालनात्मक अनुक्रिया की गति और उपलब्ध संसाधनों एवं क्षमताओं के कारण सशस्त्र बल आपदा के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
A.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान
B.
राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण संस्थान
C.
नोडल आपदा न्यूनीकरण संस्थान
D.
राष्ट्रीय नुकसान प्रबंधन संस्थान
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) विभिन्न विभागों में विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहे सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर देश में मानव संसाधनों की कार्य कुशलता को उन्नत बनाते हैं।
A.
1973
B. 1974
C. 1972
D. 1971
नेहरू युवा केन्द्रों की शुरूआत भारत की स्वतंत्रता की रजत जयंती समारोह के अंग के रूप में वर्ष 1972 में की गई थी। यह युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
A.
एनएसएस
B.
एनसीसी
C.
नागरिक सुरक्षा
D.
नेहरू युवा केन्द्र
"नॉट मी बट यू" वाक्य राष्ट्रीय सेवा योजना से सम्बंधित है। यह व्यक्ति विशेष के कल्याण पर जोर देता है, जो अंततः सम्पूर्ण समाज के कल्याण पर निर्भर करता है।
A.
1949
B. 1947
C. 1950
D. 1948
संगठित, प्रशिक्षित एवं सक्रिय युवाओं की एक मानव शक्ति तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 1948 में राष्ट्रीय केडेट कोर की स्थापना की गई थी।
A.
यूएनएफपीए
B.
एफएओ
C.
यूएनडीएमटी
D.
यूएन ओसीएचए
संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्य समन्वय कार्यालय (यूएन ओसीएचए) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के जनादेश द्वारा सभी अंतर्राष्ट्रीय आपदाओं के समय कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
A.
गृह मंत्रालय
B.
कृषि मंत्रालय
C.
पर्यावरण मंत्रालय
D.
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
जैविक आपदाओं के लिए आपदा प्रबंधन के समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय गृह मंत्रालय है।
A.
ब्लॉक आपदा प्रबंधन समिति द्वारा
B.
राज्य आपदा प्रबंधन समिति द्वारा
C.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति द्वारा
D.
जिला आपदा प्रबंधन समिति द्वारा
नकली अभ्यास (मॉक ड्रिल) करने के साथ-साथ ब्लॉक आपदा प्रबंधन समिति ब्लॉक स्तर पर आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने में ब्लॉक प्रशासन की सहायता करती है। यह आपदा प्रबंधन दलों के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण के समन्वय के लिए भी उत्तरदायी है।
राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय का मुख्य लक्ष्य राहत सेवाओं के लिए नेताओं को उन्नत और विशेष प्रशिक्षण देना है, जो प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए आवश्यक होता है|
नेहरु युवा केन्द्रों का प्रारंभ वर्ष 1972 में भारत की स्वतंत्रता के रजत जयंरती समरोह के हिस्से के रूप में किया गया था|
A.
लिंटेल लेवल
B.
प्लिन्थ लेवल
C.
रूफ लेवल
D.
गैबल लेवल
A.
ढलान का स्थिरीकरण
B.
अवरोधक का निर्माण
C.
अपवाह
D.
बहते पानी का जमाव
A.
पिरामिड छत
B.
सपाट छत
C.
धनुषाकार छत
D.
त्रिकोणीय छत
चक्रवात की आशंका वाले क्षेत्र में छत पर हवा की शक्ति को कम करने के लिए त्रिअंकी छत की अपेक्षा पिरामिड प्रकार की छत को वरीयता दी जाती है।
A.
200 मीटर
B. 150 मीटर
C. 250 मीटर
D. 180 मीटर
A.
तटबंध
B.
अवरोधक
C.
पत्थर का फ़र्श
D.
अपवाह खाईं
A.
वनस्पति
आवरण में
वृद्धि
B. अवरोधकों का निर्माण
C. बहते पानी का जमाव
D. निर्वनीकरण
A.
भूस्खलन का
B.
भूकंप का
C.
ज्वालामुखी का
D.
बाढ़ का
यदि खिड़कियाँ या दरवाजे पहली बार अटकने या जकड़ने लगे हों तो यह संभावित भूस्खलन का एक संकेत हो सकता है।
A.
भूकंप
B.
बाढ़
C.
चक्रवात
D.
भूस्खलन
ढलानों का कड़ापन एक महत्वपूर्ण कारक है जिससे भूस्खलन की तीव्रता प्रभावित हो सकती है। अधिक कठोर ढलानें, कम कठोर ढलानों की तुलना में भूस्खलन के लिए कम असुरक्षित होती हैं।
A.
बड़ा
B.
छोटा
C.
संकरा
D.
चौड़ा
दीवारों में दरवाजों और खिड़कियों के लिए बने खुले स्थान छोटे तथा बीचों-बीच स्थित होने चाहिए।
A.
आयताकार खंड
B.
त्रिकोणीय खंड
C.
रेखीय खंड
D.
वर्ग खंड
T, L, U और X आकार के नक्शों वाली इमारतों को उपयुक्त स्थानों पर अलग-अलग खंडों में बांट कर आयताकार खण्ड बना लेने से इमारत को मज़बूती मिलती है।
A.
सैन जोस
B.
सैन सैल्वाडोर
C.
तेगुसिगल्पा
D.
मानागुआ
मानागुआ, निकारागुआ की राजधानी है। यह जनसंख्या और भौगोलिक आकार के संदर्भ में निकारागुआ का सबसे बड़ा शहर है।
A.
मृदा की संरचना
B.
मृदा की स्थिति
C.
मौसमी कारक
D.
शैल संरचना
A.
भूस्खलन के साथ
B.
चक्रवात के साथ
C.
भूकंप के साथ
D.
बाढ़ के साथ
A.
ऊंची
B.
नीची
C.
विस्तृत
D.
संकरी
A.
वर्ग योजना
B.
रेखीय योजना
C.
परिपत्र योजना
D.
आयताकार योजना
A.
तरलीकरण
B.
उर्ध्वपातक
C.
द्रवीकरण
D.
रूपांतर
A.
ढलान का ऊपरी भाग
B.
ढलान का तल
C.
ढलान के बीच का क्षेत्र
D.
ढलान के कोने का क्षेत्र
A.
ज्वार उठते हैं।
B.
समुद्री धाराएँ उठती हैं।
C.
सुनामी आती है।
D.
छोटी लहरें उठती हैं।
भूस्खलन (landslide) एक भूवैज्ञानिक घटना है। धरातली हलचलों जैसे पत्थर खिसकना या गिरना, पथरीली मिटटी का बहाव, इत्यादि इसके अंतर्गत आते है।
चक्रवाती तूफानी हवाओं से सामान्तया तूफानी लहरें उठती हैं जिससे तटीय क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। समुद्र तट के निकट चक्रवात से जलमग्न होने से संभावित स्तर से ऊंचे किसी स्थान को चुनना चाहिए। कोई ऊंची जमीन न मिलने पर निर्माण कार्य खंभों पर किया जाना चाहिए।
क. ईमानदार, दिलो-दिमाग से चुस्त-दुरस्त, पेशे की दृष्टि से दृढ़ संकल्पी पुरुष एवं महिला स्वयं-सेवकों जिनका शारीरिक डील-डौल अच्छा हो।
ख. पुरुष एवं महिला स्वयंसेवकों की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए|
ग. टीम के सदस्य, स्थानीय भाषा पढ़ना-लिखना जानते हों।
घ. भूतपूर्व सैनिकों अथवा सेना कार्मिकों और ग्रामीण दस्तकारों अथवा स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए।
खोज एवं बचाव दल के निम्न उद्देश्य हैं:
क. क्षतिग्रस्त इमारतों अथवा चक्रवाती तूफानी हवाओं के कारण टूटी इमारतों के मलबे में फंसे जीवित लोगों को बचाना।
ख. फंसे हुए जीवित व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार करना,
ग. खतरनाक ध्वस्त इमारतो या ढांचों को अस्थायी रूप से सहारा देने एवं उनका बचाव करने के लिए तुरन्त आवश्यक कार्रवाई करना।
घ. मृतकों के शवों की सुपुर्दगी, बरामदगी एवं निपटान का काम करना।
ङ. स्थानीय समुदाय के लोगों को अपने बचाव के लिए सामग्रियों का प्रयोग करने का प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जानकारी देना।
किसी इमारत में प्रवेश करने से पूर्व निम्न बातों का ध्यान रखे:
क. इमारत के निर्माण की स्थिति और ढह गए हिस्से को ध्यान से देखें।
ख. यह देख लें कि क्या दीवारों को किसी सहारे की जरूरत है।
ग. कमजोर इमारतो से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों से सावधन रहें।
क. इन्फ़्रारेड कैमरों की सहायता से पीड़ित व्यक्ति के शरीर की ऊष्मा का पता लगाकर मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाया जाता है।
ख. ध्वनि श्रवण उपकरणों की सहयता से मलबे से सुनाई देने वाली मन्द आवाजों का पता लगाया जा सकता है।
ग. बायो राडार ऐसे उपकरण हैं जिनका उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में असहाय पीड़ितों का पता लगाने के लिए किया जाता है।
घायल व्यक्ति की हालत, उसे लगी चोट की गंभीरता और घायल व्यक्ति को किस हालत में पाया गया है, इन सब बातों के आधार पर बचाव कार्य का तरीका तय किया जाता है।
प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को बचाने के लिए रस्सियों, सीढ़ियों, बांस अथवा छड़ों, स्टेचरों, नौकाओं आदि का होना जरूरी है। कभी-कभी यह सामान संकट स्थल पर बचाव दल को उपलब्ध नहीं होता। अतः बचाव दल बैरलों, टिन के डिब्बों, ट्यूबों आदि जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाध का उपयोग करते हैं।
कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार का उद्देश्य है- रैबीज की रोकथाम करना ताकि संक्रमण का खतरा न रहे और यथाशीघ्र चिकित्सा सहायता मिल सके।
क. साफ सुथरे कपड़े या रूमाल से घाव पर लगी लार को पोंछ दें।
ख. पोंछी गई लार के सम्पर्क में न आएं।
ग. पर्याप्त साबुन और पानी से घाव को अच्छी तरह धे लें।
घ. यथाशीघ्र चिकित्सा सहायता प्राप्त करें अथवा रोगी को अस्पताल भेजें।
अपना प्राथमिक उपचार में निम्न जरुरी हैं:
क. रुई
ख. चिपकाने वाली टेप
ग. क्रेप बेंडेज
घ. कीटाणु रहित मरहम पट्टी
ङ. तिकोणीय बैंडेज
च. थर्मामीटर
छ. कैंची
ज. दस्ताने
झ. साबुन
ञ. पीड़ा नाशक दवा
ट. ओ. आर. एस. पैकेट
A.
पब्लिक
स्विच्ड
टेलीफोन
नेटवर्क
B. टेलीफोन नेटवर्क स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क
C. पब्लिक टेलीफोन नेटवर्क
D. टेलीफोन नेटवर्क टेलीफोन नेटवर्क
पी एस टी एन का अर्थ होता है- पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क| यह भारत में संचार का एक प्रमुख साधन है|
A.
पब्लिक
वायर्ड
टेलीफोन
B. सेटेलाइट फोन
C. वॉकी-टॉकी
D. हैम
आपदा के समय पब्लिक वायर्ड टेलीफोन और मोबाइल फोन काम करना बंद कर देते हैं|
A.
टेलीफोन
नेटवर्क
B. पी०एस०टी०एन०
C. बेतार नेटवर्क
D. बी०एस०एन०एल०
संचार का सबसे लोकप्रिय साधन पब्लिक वायर्ड टेलीफोन हैं, जो पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (पी०एस०टी०एन०) के नाम से जाना जाता है|
A.
उत्तर
प्रदेश
B. गुजरात
C. बिहार
D. पंजाब
वर्ष 2004 में बिहार में आई बाढ़ दशक की सबसे भयावह बाढ़ थी| यह भारी तबाही का कारण बनी| बिहार के बीस जिले बुरी तरह से प्रभावित हो गए थे| लगभग 885 लोगों और 3,272 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी| लगभग 21.29 मिलियन लोग इससे प्रभावित हुए थे|
A.
पब्लिक
वायर्ड
टेलीफोन
B. रेडियो
C. हैम रेडियो
D. उपग्रह संचार
उपग्रह आधारित संचार सबसे विश्वसनीय साधन हैं| ये अंतरिक्ष में स्थापित होते हैं| इसलिए पृथ्वी पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का इनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|
A.
इनसैट
B. गगन
C. आई०आर०एस०
D. एस०बी०ए०एस०
आई०आर०एस० या भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रह पृथ्वी पर नजर बनाये रखने का एक तंत्र है| इनका निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ने किया| इसका मुख्य उपयोग संसाधनों की निगरानी और प्रबंधन के लिए किया जाता है|
A.
इंटरनेट
चलाने के लिए
B. क्षमता जानने के लिए
C. चैट करने के लिए
D. प्रभावित आबादी की सहायता के लिए
आपदा के समय प्रभावित आबादी की सहायता के लिए आपदा से प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है|
A.
वॉकी-टॉकी
B. मोबाइल
C. पब्लिक वायर्ड टेलीफोन
D. पेजर
प्राकृतिक आपदा के समय स्थानीय संचार के लिए हाथ में पकड़ने वाला बेतार यंत्र अत्यधिक उपयुक्त माना जाता है| इसे कहीं भी ले जाना आसान होता है|
A.
बी
एस एन एल
B. वी एस एन एल
C. सी-डॉट
D. एम टी एन एल
बी एस एन एल एक भारत सरकार की दूरसंचार कंपनी है, जो 1 अक्टूबर, 2000 में निगम बना दी गयी थी| यह भारत सरकार का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है| यह 45 लाख लाइनों तथा 5000 कस्बों के साथ 35 लाख टेलीफोन संयोजनों का एक नेटवर्क है|
A.
सी-डॉट
B. फ्लैग्स
C. एन आई सी
D. एम टी एन एल
एन आई सी या राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र भारत का एक प्रमुख संचार नेटवर्क है| यह एक प्रीमियर विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन है| यह निकनेट की भांति कार्य करता है|
A.
रेडियो
B. हैम
C. एफ एम
D. कॉमसेट
हैम रेडियो किसी विशिष्ट प्रकार के रेडियो से संबंधित नहीं है| यह विशिष्ट आवृत्तियों पर लागू होने वाले नियम हैं|
A.
आई
पी यू
B. यू एन ओ
C. ई टी यू
D. बी वी डब्ल्यू एन
अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा हैम रेडियो के नियमों का निर्धारण किया जाता है| इसका विनियमन भारत के संचार मंत्रालय के अंतर्गत बेतार योजना और समन्वय संघ द्वारा किया जाता है|
अंतरराष्ट्रीय दूरसंचारसंघ (आईटीयू) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की शीर्ष संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है। यह संचार और दूरसंचार के अंतरराष्ट्रीय मानकों का नियमन करती है| यह उन नियमों को परिभाषित करता है, जो एमेच्योर रेडियो के लिए निश्चित फ्रीक्वेंसी पर कार्य करते हैं|
भारत की वर्तमान परिचालन अंतरिक्ष प्रणालियों में भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह और भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह शामिल हैं|
दूरसंचार उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित रेडियो रिले स्टेशन होते हैं|
BSNL भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का दूरसंचार उपक्रम है| इसका 450 लाखसेभीअधिकलाइनोंकानेटवर्कहै, जो 5000 कस्बोंमेंव्याप्तहैऔरइसके 350 लाखटेलीफोनकनेक्शनहैं|
एक रेडियो तरंग विद्युत चुम्बकीय तरंग होती है, जिसे एक एंटीना द्वारा प्रसारित किया जाता है| इन तरंगों की भिन्न-भिन्न फ्रीक्वेंसीज होती हैं तथा आप एक रेडियो को किसी विशिष्ट तरंग पर रखकर विशिष्ट संकेत्र प्राप्त कर सकते हैं| कोई भी वायरलेस संचार लिंक या तो रेडियो तरंगों पर आधारित होता है या फिर उपग्रह प्रणालियों पर आधारित होता है|
एक PSNT में, केवल 5 प्रतिशत फोन सम्बद्ध हैं| ये एक समय में बात करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं| यह प्रणाली आपात के दौरान असफल हो जाती है, क्योंकि संचार यातायात अपनी क्षमता से बाहर चला जाता है|
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र भारत का मुख्य संचार नेटवर्क है| यह एक प्रीमियर विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन है, जो इस क्षेत्र में कार्यरत है| यह राष्ट्रव्यापी सूचनाओं और संचार प्रौद्योगिकी नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है, इसे निकनेट (NICNAT) भी कहा जाता है|