एक दोलन पूर्ण करने में तरंग द्वारा आवश्यक समय इसका आवर्तकाल कहलाता है। यह
जब ध्वनि तरंग वायु के माध्यम से संचरित होती है तो दाब तथा आयतन में परिवर्तन होता है जो कि रूद्धोष्म है
ध्वनि तरंग का ठोस सतह से टकराने के बाद वापस लौट जाना ध्वनि का परावर्तन कहलाता है।
दूरी = 3060 m
सोनार से दूसरी पनडुब्बी तक जाने के लिए ध्वनि द्वारा लिया गया समय, t = (4 / 2)s
= 2s
माध्यम में ध्वनि की चाल = दूरी / (लिया गया समय)
= 3060 m / 2s
= 1530 m/s
प्रतिध्वनि
संकेत द्वारा लिया गया कुल समय =
व्हेल तक पहुँचने के लिए संकेत द्वारा लिया गया समय =
व्हेल की दूरी = संकेत की चाल
दिया गया है, आवृत्ति =
समय अन्तराल (
इस प्रकार, 26 दोलन पूरा करने में लिया गया समय = T x 26
माना छड़ की लम्बाई = l
एल्युमिनियम छड़ में l दूरी तय करने के लिए छड़ द्वारा लिया गया समय, t1 = दूरी / (छड़ में ध्वनि की चाल )
=l / val
वायु में l दूरी तय करने के लिए ध्वनि द्वारा लिया गया समय –
t2 = दूरी / (वायु में ध्वनि की चाल )
= l / va

निकाय द्वारा एक सेकण्ड में पूरे किए गए दोलनों की संख्या दोलित निकाय की आवृत्ति कहलाती है।
स्त्रोत की आवृत्ति 80 Hz है। इसका तात्पर्य है कि यह 1 सेकण्ड में 80 दोलन पूरा करता है।
इस प्रकार, एक मिनट (60 सेकण्ड) में, दोलनों की संख्या होगी = 80 x 60
= 4800
|
क्रम संख्या |
प्रकाश तरंग |
ध्वनि तरंग |
|
1. |
ये तरंगे उत्तेजित अवस्था में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों से उत्पन्न होती हैं। |
ये तरंगे पदार्थिक माध्यम में विभिन्न वस्तुओं के कम्पनों के कारण उत्पन्न होती हैं। |
|
2. |
ये तरंगे निर्वात के माध्यम से संचरित हो सकती हैं। |
ये तरंगे पदार्थिक माध्यम (ठोस, द्रव तथा गैस) के माध्यम से संचरित हो सकती हैं तथा निर्वात के माध्यम से संचरण नहीं कर सकती हैं। |
|
3. |
ये वायु में 3 x 108 m/s की चाल से गति करती हैं। |
ये 20 oC पर 332 m/s की चाल से गति करती हैं। |
|
4. |
तापमान, आर्द्रता आदि में परिवर्तन से इनका वेग परिवर्तित नहीं होता है। |
तापमान, आर्द्रता आदि में परिवर्तन से इनका वेग परिवर्तित होता है। |
|
5. |
ये तरंगे दृश्य की अनुभूति कराती हैं। |
ये तरंगे सुनने की अनुभूति कराती हैं। |
सोनार शब्द (Sound navigation and ranging) से बना है। यह एक युक्ति है जिसमें पराध्वनि तरंगे पानी के नीचे वस्तुओं की दिशा, दूरी तथा चाल को मापने के लिए उपयोग की जाती हैं।

सोनार की क्रियाविधि :
सोनार, प्रेषित्र तथा अभिग्राही (संसूचक) से मिलकर बना होता है। प्रेषित्र पराध्वनि तरंगे उत्पन्न करता है जो पानी के माध्यम से गुज़रती हैं। जब पराध्वनि तरंगे किसी अवरोध से टकराती हैं तो वे परावर्तित हो जाती हैं और अभिग्राही द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं। यह परावर्तित पराध्वनि तरंगे अभिग्राही (संसूचक) द्वारा विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाती है। जिन्हें रिकॉर्ड कर लिया जाता है।
माना पराध्वनि तरंग के प्रेषण तथा अभिग्रहण के बीच समय अंतराल ‘t’ है।
समुद्री जल में ध्वनि की चाल ‘v’ है।
प्रेषित्र से अवरोध तक पराध्वनि तरंग द्वारा तय की गई दूरी = ‘d’
तो, पराध्वनि तरंग द्वारा तय की गई कुल दूरी = 2d
इस प्रकार, तय की गई दूरी = चाल X लिया गया समय
![]()
या, 
यह विधि उन वस्तुओं की दूरी का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती है जो प्रतिध्वनि सीमा में होती हैं।
सोनार के अनुप्रयोग : सोनार तकनीक बहुत उपयोगी होती है :
1. प्रतिध्वनि गहराई सीमा : फैथोमीटर समुद्र की गहराई का निर्धारण करने के लिए उपयोग की जाती है।
2. पनडुब्बी में दिशा निर्देश तथा समुद्री निगरानी में।
3. पानी के अंदर पहाड़ी, घाटियों, हिमशैल आदि का पता लगाने में।
4. पनडुब्बियों तथा अन्य जहाजों की स्थितिओं का पता लगाने में।
5. पराध्वनि तरंगों का विशेष लाभ एक जहाज से दूसरे जहाज तक सम्प्रेषण में है क्योंकि, ये तरंगे विशेष प्रकार के उपकरणों के बिना नहीं सुनी जा सकती हैं।
6. वैज्ञानिक अनुपयोग जैसे कि जैव - द्रव्यमान, पानी के वेग का निर्धारण आदि करने में।

यह व्यक्ति चट्टान A तथा B के बीच खड़ा हुआ है। उसकी A से तथा B से दूरियाँ क्रमशः x तथा y है।
प्रथम प्रतिध्वनि के लिए,
t1 = 2x / V
2 = 2x / V
इस प्रकार, V = x ……(1)
द्वितीय प्रतिध्वनि के लिए,
t2 = 2y / V
4 = 2y / V
इस प्रकार, V = 2y ….(2)
समीकरण (1) तथा (2) से, हमें प्राप्त होता है,
x = 2y
तृतीय प्रतिध्वनि के लिए, A तथा B की ओर से शुरू ध्वनि A तथा B के बीच दो बार जानी चाहिए।
इसलिए, तृतीय प्रतिध्वनि के लिए लिया गया समय = t1 + t2
= (2 + 4)s
= 6s
A. F = k m a
B. p = m v
C. F t = m v – m u
D. F / t = m (v – u)
बल, द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल के समानुपाती होता है और त्वरण, वेग में परिवर्तन की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
A. विस्थापन।
B. त्वरण।
C. बल।
D. आवेग।
बल, वह भौतिक राशि है जो संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होती है।
(i) जब एक तेज़ गेंदबाज गेंद फेंकना चाहता है तो वह गेंद फेंकने से पूर्व कुछ दूरी के लिए दौड़ता है। दौड़ने पर गेंदबाज के साथ - साथ गेंद गति का जड़त्व प्राप्त कर लेती है और इस गति के जड़त्व के कारण यह गेंद तेज़ चाल से गति करती है।
(ii) वाहनों के टायरों की सतह खुरदरी बनाई जाती है ताकि सड़क तथा टायरों के बीच बेहतर पकड़ प्राप्त हो। टायर तथा सड़क के बीच घर्षण के मान में वृद्धि टायरों को फिसलने से रोकती है। इसके अलावा भूमि भी आवश्यक प्रतिक्रिया प्रदान करती है जिससे पहिया आगे की दिशा में गति करता है।
माना m द्रव्यमान के निकाय पर F बल कार्यरत होता है तो इसका वेग u से v परिवर्तित हो जाता है
निकाय का प्रारंभिक संवेग =mu
निकाय का अंतिम संवेग =mv
t सेकंड में निकाय के संवेग में परिवर्तन कि दर = mv-mu
=m(v-u)
संवेग में परिवर्तन की दर
= संवेग में परिवर्तन / लिया गया समय
= m(v - u) /t
v= u + at [गति के प्रथम समीकरण से ]

उपरोक्त मान समीकरण (1) में रखने पर , हमें प्राप्त होता है
रैखिक संवेग में परिवर्तन की दर = ma
न्यूटन की गति के द्वित्य नियम से,
आरोपित बल α संवेग में परिवर्तन की दर
F α ma
या ,F=kma
[SI में प्रणाली में k=1]
दिया हुआ है, F = 10 N = 10kg-m/s2
प्रथम स्थिति : a1 = 8 ms-2
न्यूटन की गति के द्वितीय नियम से,
m1 = F / a1 = (10 kg-m/s2) / 8 ms-2
= 1.25 kg ………….. (1)
द्वितीय स्थिति : a2 = 20 ms-2
न्यूटन की गति के द्वितीय नियम से,
m2 = F / a2 = (10 kg-m/s2) / 20 ms-2
= 0.5 kg …………….. (2)
तृतीय स्थिति :
कुल द्रव्यमान, m = m1 + m2 = 1.25 kg + 0.5 kg = 1.75 kg
न्यूटन की गति के द्वितीय नियम से,
a = F/m = (10 kg-m/s2) / 1.75 kg
= 5.71 m/s2
पहले से गतिशील तेल का टैंकर जब अचानक रुक जाता है, तो टैंकर में तेल गति के जड़त्व के कारण गतिशील हो जाता है। इसके कारण यह आगे की दिशा में छिपछिपाते हुए जाता है। अब, जब स्थिर टैंकर अचानक गतिशील होता है, तो टैंकर में तेल पीछे की ओर छिपछिपाते हुए जाता है। यदि तेल के टैंकर की ऊपरी सतह पर कोई स्थान नहीं छोड़ते हैं तो तेल का अधिप्रवाह हो जायेगा। इस प्रकार, वाहन के अचानक रुकने या चलने के कारण तेल के अधिप्रवाह को रोकने के लिए टैंकर में तेल भरते समय उसकी ऊपरी सतह पर कुछ स्थान छोड़ते हैं।
द्रव्यमान, m = 1500 kg
निकाय पर कार्यरत बल,
वाहन का त्वरण, a = -1.7 ms-2
उपरोक्त मान सूत्र में प्रतिस्थापित करने पर,
बल =
ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि यह बल वाहन की गति के विपरीत दिशा में कार्यरत होता है।
• रॉकेट न्यूटन की गति के तृतीय नियम का पालन करता है।
क्रियाविधि :
• रॉकेट में, गर्म वायु उत्पन्न करने के लिए इंजन में विभिन्न प्रकार के ईंधन जलाये जाते हैं।

• जैसे ही गैस के अणु इंजन की दीवारों से टकराते हैं, यह दीवार इन पर बल लगाती है जो उन्हें इंजन के तल के बाहर धकेलता है।
• नीचे की ओर बल क्रिया बल तथा गैस के अणुओं द्वारा रॉकेट इंजन पर ऊपर की ओर लगाया गया बल प्रतिक्रिया बल है।
• ये क्रिया तथा प्रतिक्रिया बल रॉकेट को ऊपर की ओर धकेलते हैं।
न्यूटन ने गतिशील निकायों की गति के बारे में विस्तार से अध्ययन किया तथा गति के तीन मुख्य नियम दिए :
(i) न्यूटन की गति का प्रथम नियम - इस नियम के अनुसार, प्रत्येक वस्तु अपने विराम की अवस्था या एक समान वेग से गति की अवस्था को तब तक बनाये रखने का प्रयास करती है जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल आरोपित नहीं किया जाता है। न्यूटन की गति के प्रथम नियम को गैलीलियो का जड़त्व का नियम भी कहते हैं। यह बल की गुणात्मक परिभाषा देता है।
(ii) न्यूटन की गति का द्वितीय नियम - किसी निकाय पर कार्यरत बल, उस निकाय के द्रव्यमान तथा निकाय में बल द्वारा उत्पन्न त्वरण के गुणन के समानुपाती होता है। यह बल की मात्रात्मक (गणितीय) परिभाषा देता है।
(iii) न्यूटन की गति का तृतीय नियम - प्रत्येक क्रिया के बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। क्रिया तथा प्रतिक्रिया एक समय में दो विभिन्न निकायों पर कार्यरत होती हैं।
न्यूटन की गति के प्रथम नियम से जड़त्व की परिभाषा : न्यूटन की गति के प्रथम नियम के अनुसार, प्रत्येक निकाय स्वयं अपनी अवस्था परिवर्तित नहीं कर सकता है।

टेबल की सतह पर निकाय विरामवस्था में ही रहता है जब तक उस पर कोई बाह्य बल आरोपित नहीं किया जाये।
इस प्रकार, किसी निकाय का वह गुण जिसके कारण वह निकाय अपनी विराम की अथवा एकसमान वेग से गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है जड़त्व कहलाता है।
न्यूटन की गति के प्रथम नियम से बल की परिभाषा : न्यूटन की गति के प्रथम नियम के अनुसार, बल को बाह्य कारण के रूप में परिभाषित करते हैं जो स्थिर निकाय को स्थानान्तरित कर सकता है या गतिशील निकाय को रोक सकता है।

टेबल पर रखी किताब अपने आप गति नहीं कर सकती जब तक बाह्य बल नहीं लगाया जाता है।
इस प्रकार, यह बल बाह्य कारण है जो गति की अवस्था या विरामवस्था परिवर्तित करने की कोशिश करता है।
A.
रेशमी वस्त्र
B.
सूती वस्त्र
C.
चमड़े के वस्त्र
D.
रेयॉन वस्त्र
कपास जल का एक अच्छा अवशोषक है जो पसीने को सोखने लेता है और इसे वायुमण्डल में आसानी से वाष्पित होने देता है |
A.
वायु
B.
जल
C.
ऑक्सीजन
D.
कॉपर
कॉपर (ठोस अवस्था में पाया जाता है) के कणों के मध्य प्रबलतम आकर्षण बल पाया जाता है क्योंकि ये बहुत पास-पास उपस्थित होते हैं |
A.
शुद्ध बर्फ के बराबर
B.
शुद्ध लवण के बराबर
C.
शुद्ध बर्फ से अधिक
D.
शुद्ध बर्फ से कम
बर्फ और नमक का मिश्रण हिमकारी मिश्रण भी कहलाता है और इसका गलनांक -15 oC होता है जो कि शुद्ध बर्फ (0 oC) की तुलना में बहुत कम होता है|
A.
वाष्पदाब < वायुमंडलीय दाब
B.
वाष्पदाब = वायुमंडलीय दाब
C.
वाष्पदाब > वायुमंडलीय दाब
D.
वाष्पदाब = 2 वायुमंडलीय दाब
वह ताप जिस पर एक द्रव वायुमंडलीय पर उबलना प्रारम्भ कर देता है क्वथनांक कहलाता है |
A.
1 kg दूध
B.
1kg आयरन
C.
1 kg नाइट्रोजन
D.
1 kg जल
ठोस निश्चित आकार और निश्चित आयतन रखते हैं | इसलिए 1 Kg आयरन का आकार और आयतन निश्चित होगा |
A.
50
B.
100
C.
100
D.
100
क्वथनांक वह ताप है जिस पर वाष्पदाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है | पर्वतों पर वायुमंडलीय दाब कम होता है इसलिए पर्वतों पर पानी 100°C से नीचे उबलने लगता है |
A.
96.8
B.
97.4
C.
32.8
D.
46.4
हम जानते हैं कि 
A.
आकार
निश्चित
होता है
द्रवों
का आकार
निश्चित
नहीं होता है
लेकिन ये निश्चित
आयतन रखते
हैं | ये उसी
पात्र का
आकार ले लेते
हैं जिसमे
इन्हें रखा
जाता है |
परिवेश को
ठंडा कर देता
है
एक
खुले पात्र
से वाष्पित
होने वाले कण
परिवेश से
ऊर्जा का
अवशोषण करते
हैं | यह परिवेश
को ठंडा कर
देता है |
25 cm व्यास
के एक खुले
पात्र से B.
30 cm व्यास के
एक खुले
पात्र से C.
27.5 cm व्यास के
खुले पात्र
से D.
26 cm व्यास के
खुले पात्र
से
वाष्पीकरण
एक सतही
परिकल्पना
है | यदि सतही
क्षेत्रफल
बढ़ता है तो
वाष्पीकरण
की दर बढ़ती है | इसलिए
एक 30 cm
व्यास
(विकल्पों
में दिया गया
सबसे अधिक
सतही
क्षेत्रफल)
के खुले
पात्र में
वाष्पीकरण
की दर अधिकतम
होगी |
1 वायुमंडलीय B. 1.01 x 10 पास्कल C. 1 बार D. 1 टॉर समुद्री सतह पर वायुमंडलीय दाब 1atm होता है और इसे सामान्य वायुमंडलीय दाब के रूप में लिया जाता है |
एक ठोस का गलनांक जितना अधिक होता है उसके कणों के मध्य आकर्षण बल उतना ही प्रबल होता है | इसलिए ठोस D (गलनांक 1238°C) के कणों के मध्य आकर्षण बल अधिकतम होता है |
नाइट्रोजन
B.
ऑक्सीजन
C.
कार्बन
डाइऑक्साइड D.
आर्गन
विलायक
विलयन में वह
घटक होता है
जो अधिक
मात्रा में उपस्थित
होता है । वायु
गैसों का एक
मिश्रण होता
है जिसमें नाइट्रोजन
की
प्रतिशतता (78%) सबसे
अधिक होती है ।
अतः हम कह
सकते हैं की नाइट्रोजन
वायु में
विलायक है और अन्य
गैसें विलेय
के रूप में
पायी जाती है ।
क्लोरीन
B.
ब्रोमीन
C.
आयोडीन
D.
फ्लोरीन
सामान्यतः
अधातुएँ
कमरे के ताप
पर गैसीय होती
है केवल
ब्रोमीन एक
अपवाद है जो
की कमरे के
ताप पर द्रव
होती है ।
10-10m
से
कम B.
10-8m
से
कम C.
10-7m से कम
D.
10-9m से कम
एक
वास्तविक
विलयन के
कणों का आकार बहुत
कम होता है लगभग
1 नैनोमीटर या 10-9 मीटर और इन्हें
नग्न आँखों
से नही देखा
जा सकता है ।
समांगी मिश्रण B. विषमांगी मिश्रण C. निलंबन D. सॉल एक समांगी मिश्रण के सम्पूर्ण भाग में विलेय कणों की संख्या समान रहती है जबकि एक विषमांगी मिश्रण में ऐसा नहीं होता है ।
अवस्था
एक रूप से
दूसरे रूप
में
परिवर्तित होती
है । B.
ताप
में परिवर्तन
आवश्यक होता
है । C.
पदार्थ
का रासायनिक
संघटन अपरिवर्तित
रहता है । D.
वे
समान भौतिक
गुणधर्म रखते
हैं ।
पदार्थ
की एक अवस्था
से दूसरी
अवस्था में
अवस्था
परिवर्तन के
दौरान पदार्थ
एक अवस्था से
दूसरी
अवस्था में परिवर्तित
होता है । यह
एक भौतिक
परिवर्तन है क्योंकि
परिवर्तन के
दौरान इसका
रासायनिक
संघटन समान
रहता है ।
निश्चित संघटन रखता है B. निश्चित गलनांक नहीं रखता है C. निश्चित गलनांक रखता है D. एक शुद्ध पदार्थ है एक मिश्रण दो या अधिक घटकों का संयोजन होता है जो रासायनिक रूप से आपस में संयोजित नहीं होते हैं । इसके परिणामस्वरुप प्रत्येक घटक अपने रासायनिक और भौतिक गुणधर्म दर्शाता है । अतः एक मिश्रण का गलनांक निश्चित नहीं होता है ।
गर्म करने पर चीनी जल जाती है । B. चीनी के कण वाष्पित हो जायेंगे । C. चीनी के कण अपघटित हो जायेंगे । D. चीनी के कण पिघल जायेंगे । वाष्पीकरण के दौरान चीनी के कण जल सकते हैं । अतः क्रिस्टलीकरण उन पदार्थों जिनको गर्म करने पर वे अपघटित या जल सकते हैं, के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए बेहतर विकल्प है ।
उर्ध्वपातन द्वारा B. वाष्पीकरण द्वारा C. आसवन द्वारा D. इन्हें पृथक नहीं किया जा सकता जब नमक और आयोडीन के एक मिश्रण को एक प्याली में गर्म किया जाता है तो आयोडीन ऊर्ध्वपातित हो जाती है और नमक प्याली में रह जाएगा।
विलयन को
गर्म करेंगे ।
B.
विलयन
को ठंडा
करेंगे । C.
विलयन
में और जल
डालेंगे । D.
विलयन
में और लवण
डालेंगे ।
एक
विलयन
संतृप्त है
या असंतृप्त इसकी
जांच इसमे और
विलेय डालकर
की जा सकती है ।
एक निश्चित
ताप पर संतृप्त
विलयन में विलेय
की और अधिक
मात्रा नहीं
घोली जा सकती
है जबकि एक
असंतृप्त
विलयन में
उसी ताप पर विलेय
की और मात्रा
घोली जा सकती
है
।
चॉक
पाउडर जल में
निलंबित
रहता है । B.
ये एक
मिश्रणीय
विलयन बनाते
हैं । C.
मिश्रण
को फिल्टर
पत्र से
आसानी से
प्रवाहित किया
जा सकता है । D.
जल एक
अच्छे
विलायक की
तरह कार्य
करता है ।
निस्यंदन
एक विलयन में
से निलंबित
कणों को पृथक
करने की एक
विधि है । चॉक
पाउडर जल में
निलंबित
रहता है और
फिल्टर पत्र
से आसानी से
अलग किया जा
सकता है । चॉक
पाउडर
फिल्टर पत्र
पर एकत्रित
हो जाता है और
स्वच्छ
विलयन
फिल्टरेट के
रूप में
एकत्रित हो
जाता है ।
फिटकरी के जलीय विलयन में B. रक्त में C. ठंडे पेयों में D. आयनिक विलयनों में कोलॉइडी कणों में ब्राउनी गति देखी जा सकती है । वे कण जिनका आकार 10-9 m − 10-7m के मध्य होता है यादृच्छिक गति करते हैं । कोलॉइडी कणों और सूक्ष्म निलम्बनों की यह यादृच्छिक गति ब्राउनी गति कहलाती है ।
जलीय
सोडियम
क्लोराइड B.
दही । C.
जल में
पोटैशियम
परमैगनेट D.
जल में
चॉक पाउडर
चॉक
पाउडर जल में
नहीं घुलता
है । चॉक
पाउडर के कण
गुरुत्वाकर्षण
के कारण नीचे बैठ
जाते हैं और
यह परिघटना
निलंबन
कहलाती है ।
जब विलेय के
कणों का आकार 10-7m होता है तो
इन्हें नग्न
आँखों से
देखा जा सकता
है ।
B. विषमांगी C. पारभासी D. अस्थायी विलयन सदैव विलायक और विलेय का समांगी मिश्रण होता है । इसके कणों का आकार 10-9m होता है ।
निस्यंदन द्वारा B. अपकेंद्रीकरण द्वारा C. वाष्पोत्सर्जन द्वारा D. उबालकर दूध से क्रीम पृथक करने के लिए अपकेंद्रीकरण मशीन का उपयोग किया जाता है । यह इस सिद्धांत पर कार्य करती है की तेजी से घुमाने पर भारी कण केंद्र में बैठ जाते हैं जबकि हल्के कण बाहर की और धकेल दिए जाते हैं ।
कार्बन डाइसल्फाइड के विलयन द्वारा B. हस्तचयन द्वारा C. चुम्बक द्वारा D. आसवन द्वारा लोहे के बुरादे और सल्फर पाउडर के मिश्रण को चुम्बक का उपयोग करके पृथक किया जा सकता है क्योंकि लोहे के कण चुम्बक से चिपक जाते हैं जबकि सल्फर के कण इसकी और आकर्षित नहीं होते हैं ।
मिट्टी का तेल B. चीनी C. कार्बन टेट्रा क्लोराइड D. रेत चीनी (C12H22O11) के अणु जल के अणुओं के मध्य स्थित रिक्त स्थानों में चले जाते हैं । अतः ये स्थानों को भरते हैं और घुल जाते हैं ।
कोलॉइड B. द्विक लवण C. शर्करा D. चट्टान फिटकरी पोटैशियम सल्फेट और ऐलुमिनियम सल्फेट का एक द्विक लवण हैं और इसका सूत्र KAl(SO4)2.12H2O है ।
कोलॉइडी विलयन B. सोडियम क्लोराइड का विलयन C. वास्तविक विलयन D. शुद्ध जल कोलॉइडी कणों के छोटे आकार के कारण हम उन्हें नग्न आँखों से नहीं देख सकते हैं । लेकिन ये कण दृश्य प्रकाश की एक किरण को आसानी से प्रकिर्णित कर देते हैं । प्रकाश की एक किरण का यह प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव कहलाता है । इसका नाम इसकी खोज करने वाले वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है ।
निस्यंदन और आसवन दो विधियाँ हैं जिनके द्वारा ठोस-द्रव मिश्रण को पृथक किया जा सकता है । ये अजलीय विलायक हैं । अम्लगम एक द्रव-ठोस मिश्रण है । दूध और कोहरा । टिंडल प्रभाव निलंबन और कोलॉइड दोनों द्वारा दर्शाया जाता है । निलंबन विषमांगी मिश्रण होते हैं, जबकि विलयन समांगी मिश्रण होते हैं। क्रोमेटोग्राफी पृथक्करण कीप वे मिश्रण जिनके घटक समान रूप से पूरे मिश्रण में वितरित हो समांगी मिश्रण कहलाते हैं । उदाहरण : नमक का विलयन, चीनी का घोल आदि । कोलॉइडी कणों की टेढ़ी-मेढ़ी गति ब्राउनी गति कहलाती है |
पीतल (कॉपर
तथा जिंक का
मिश्रण) ठोस विलयन है।
दो
या दो से अधिक पदार्थों का
ऐसा समांगी
मिश्रण
जिसका कोई निश्चित
संगठन नहीं
होता,
विलयन कहलाता
हैं।
विलयन
को मिश्रण
इसलिए माना जाता
है क्योंकि विलयन में
उपस्थित
पदार्थों का कोई
निश्चित
संगठन नहीं
होता जबकि
यौगिक में
उपस्थित
पदार्थों का
संगठन
निश्चित
होता है। वास्तविक विलयन के कणों का आकार
कोलॉइडी
कणों का आकार 10-9 मीटर से 10-6
मीटर होता
है। वास्तविक विलयन समांगी होता है। वास्तविक विलयन को फ़िल्टर पेपर से छानकर विलायक तथा विलेय को अलग नहीं किया जा सकता है। जैसे जल तथा नमक का विलयन है। जो पदार्थ विलयन में कम मात्रा में होता है, विलेय कहलाता है। यदि एक विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्तता से कम है तो इसे असंतृप्त विलयन कहते हैं | यदि 1000 मिली जल में 100 ग्राम चीनी मिलायें तो चीनी की पूर्ण मात्रा जल में घुल जायेगी और इस प्रकार निर्मित विलयन असंतृप्त विलयन होता है। जो अवयव विलयन में अधिक मात्रा में होता है, विलायक कहलाता है। उदाहरण- जल एवं चीनी के विलयन में जल विलायक है। यदि विलायक में उपस्थित कणों का आकार कोलॉइडी कणों की अपेक्षा बड़ा है तो ऐसे मिश्रण को निलंबन कहते हैं। जैसे जल में बालू का विलयन । एक निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं | यदि 40 मिली जल में 100 ग्राम चीनी मिलायें तो चीनी की पूर्ण मात्रा जल में नहीं घुलेगी और इस प्रकार निर्मित विलयन संतृप्त विलयन होता है। अपकेंद्रीकरण विधि के तीन उपयोग निम्न हैं- a) यह चिकित्सीय प्रयोगशालाओ में रक्त और मूत्र परीक्षण में इस्तेमाल की जाती है । b) इसका उपयोग घर और डेयरी में दूध से क्रीम निकालने के लिए किया जाता है । c) इसका उपयोग वाशिंग मशीन मे गीले कपड़ो को निचोड़ कर पानी निकालने मे किया जाता है । एक प्रतीक गुणात्मक के साथ-साथ मात्रात्मक महत्व भी रखता है । (i) यह हमें तत्व का नाम बताता है । किसी यौगिक का रासायनिक सूत्र प्रतीकों का वह समूह है जिसकी सहायता से उस यौगिक के एक अणु के संघटन को निरूपित किया जाता है। जैसे, जल के अणु को रासायनिक सूत्र के प्रकार: रासायनिक सूत्र निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं- नाभिक
B.
प्रोटॉन
C.
संयोजकता
कोश D.
कोश
प्रोटॉन
और
न्यूट्रॉन
एक परमाणु के
नाभिक में
उपस्थित
होते हैं । एक न्यूट्रॉन
का द्रव्यमान
1.6 X
10-24 g होता है
और एक प्रोटॉन
का द्रव्यमान
9 X 10-28 g होता
है इनका योग
परमाणु
द्रव्यमान
होता है ।
इलेक्ट्रॉन
का
द्रव्यमान लगभग
नगण्य होता
है ।
1/1650
amu
B.
9.1 x
10-31
kg
C.
1.6 x 10-27
kg
D.
10-10
kg
एक
इलेक्ट्रॉन
का
द्रव्यमान लगभग
1/1840 amu होता है । अतः
एक इलेक्ट्रॉन
का
द्रव्यमान 9.1 x 10-31 kg
होता है ।
1.67
X 10-24 g B.
1.67
X 10-25g C.
1.67
X 10-22g D.
1.67
X 10-27g
प्रोटॉन
एक धनावेशित कण
है जो सभी
तत्वों के
परमाणुओं
में पाया
जाता है । प्रोटॉन
एक परमाणु के
नाभिक में उपस्थित
होते हैं । प्रोटॉन
का द्रव्यमान
1.67
X 10-24g होता
है
।
परमाणु
संख्या B.
द्रव्यमान
संख्या C.
प्रोटॉनों
की संख्या D.
इलेक्ट्रॉनों संख्या
सुपरस्क्रिप्ट
एक तत्त्व की द्रव्यमान
संख्या को
दर्शाती है । उदाहरण
के लिए 20Ca40 ।
जहाँ 40 सुपरस्क्रिप्ट
है जो
द्रव्यमान
संख्या को प्रदर्शित
करता है । द्रव्यमान
संख्या प्रोटॉनों
की संख्या +
न्यूट्रॉनों
की संख्या होती
है ।
18
B.
16
C.
12
D.
8
तीसरे
कोश में
उपस्थित इलेक्ट्रॉनों
की संख्या
=
2n2
= 2 X 32
= 2 X 9
=18
परमाणु
के संयोजकता
कोश में B.
परमाणु
के नाभिक में C.
परमाणु
के बाह्यतम
कोश में D.
परमाणु
के कोश में
न्यूट्रॉन
की खोज सन् 1932
में जेम्स चेडविक
ने की थी । ये
परमाणु के
नाभिक में
उपस्थित उदासीन
कण होते हैं और
इसके
द्रव्यमान का
एक भाग बनाते
हैं ।
एल्फा
कण एक सीधी रेखा
में गति करते
हैं । B.
एल्फा
कण आवेशित
नहीं होते
हैं । C.
परमाणु
में अधिकाँश स्थान
रिक्त होता
है और नाभिक
का आकार बहुत
छोटा होता है । D.
परमाणु
का आकार बहुत बड़ा
होता है ।
सोने
की पन्नी से अधिकाँश
कणों का सीधा
निकल जाना यह दर्शाता
है की नाभिक
का आकार बहुत
छोटा होता है और
यह परमाणु के
मध्य में
स्थित होता
है । नाभिक के
चारों ओर का
अधिकांश भाग खाली
होता है जो
कणों को
इसमें से
पारगमित
होने देता है ।
प्रोटॉनों
का
द्रव्यमान B.
न्यूट्रॉन
और प्रोटॉन
का द्रव्यमान
C.
न्यूट्रॉन
का द्रव्यमान
D.
नगण्य
एक
परमाणु का द्रव्यमान
न्यूट्रॉन
और प्रोटॉन
के द्रव्यमान
के कारण होता
है । इलेक्ट्रॉन
द्रव्यमान नगण्य
होता है ।
क्रमशः
8,
0 B.
क्रमशः
0,8
C.
क्रमशः
8,8
D.
क्रमशः
0,0
केवल
एक अपवाद
हीलियम,
जिसमें केवल 2
संयोजकता
इलेक्ट्रॉन
होते हैं, के
अतिरिक्त एक
अक्रिय गैस
में संयोजकता
इलेक्ट्रॉनों
की संख्या 8
होती है । इन
गैसो की
संयोजकता 0 है
इसलिए ये
किसी रासायनिक
अभिक्रिया
में भाग नहीं
लेती है और अक्रिय
प्रकृति की
होती है ।
प्रोटॉन
B.
इलेक्ट्रॉन
C.
न्यूट्रॉन
D.
न्यूक्लियॉन
समभारिकों
के नाभिक में प्रोटॉनों
और न्यूट्रॉनों
का योग समान
होता है ।
उदाहरण के लिए
20Ca40
और 18Ar40 । Ca में
प्रोटॉन की
संख्या
=
20 और
न्यूट्रॉन
की संख्या
= 20,
प्रोटॉन
और
न्यूट्रॉन
की संख्या का
योग =
40
जबकि
आर्गन में
प्रोटॉन की
संख्या
=
18 न्यूट्रॉन
की संख्या
= 22
न्यूट्रॉन
और प्रोटॉन
की संख्या का
योग =
40
B. एक रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं । C. आयनित हो सकते हैं । D. नाभिक में उपस्थित होते हैं । एक परमाणु की संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की वह संख्या होती है जिनका एक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ग्रहण या त्याग या साझा होता है । हाइड्रोजन की संयोजकता 1 होती है क्योंकि इसके संयोजकता में केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है ।
आयोडीन B. यूरेनियम C. कोबाल्ट D. कार्बन कोबाल्ट के समस्थानिक Co-60 का उपयोग कैंसर के उपचार में किया जाता है । यह कोबाल्ट का एक रेडियो सक्रिय समस्थानिक है । इसकी अल्प अर्द्धआयु के कारण यह प्रकृति में उपस्थित नहीं होता है ।
8
B.
18
C.
32
D.
36
एक
कोश में इलेक्ट्रॉनों
की अधिकतम संख्या
सूत्र 2 x n x n द्वारा
ज्ञात की जाती
है जहाँ n कोश
की संख्या है ।
अतः M कोश के
लिए यह 2 x 3 x 3 = 18
है ।
-1 B.
शून्य
C.
+1 D.
अनंत
एक
प्रोटॉन पर +1,
इलेक्ट्रान
पर -1 और न्यूट्रॉन
पर शून्य
आवेश होता है ।
हाइड्रोजन
B.
ड्यूटीरियम
C.
ट्रिटियम
D.
प्रोटियम
समस्थानिक
एक ही
रासायनिक
तत्त्व के भिन्न
प्रकार के
परमाणु होते
हैं जो भिन्न
परमाणु
द्रव्यमान लेकिन
समान परमाणु
संख्या रखते
हैं ।
2,
2, 8 B.
2,
8, 2 C.
8,
2, 2 D.
2,
8
इसके
K कोश में 2
इलेक्ट्रॉन, L
कोश में 8
इलेक्ट्रॉन
और M कोश में 2
इलेक्ट्रॉन होते
हैं ।
उच्च
ऊर्जा स्तर
से निम्न
ऊर्जा स्तर
में । B.
निम्न
ऊर्जा स्तर
से उच्च
ऊर्जा स्तर
में । C.
अंतिम
से प्रथम ऊर्जा
स्तर में । D.
प्रथम
से अंतिम
ऊर्जा स्तर
में ।
जब
एक
इलेक्ट्रॉन ऊर्जा
अवशोषित करता
है यह निम्न ऊर्जा
स्तर से उच्च
ऊर्जा स्तर में
चला जाता है । जब
यह ऊर्जा
उत्सर्जित
करता है यह उच्च
ऊर्जा स्तर
से निम्न
ऊर्जा स्तर
में चला जाता
है ।
प्रोटोन
B.
न्यूट्रॉन
C.
इलेक्ट्रॉन
D.
न्यूक्लियॉन
नाभिक
पर धनावेश प्रोटॉन
की उपस्थिति
के करण होता
है क्योंकि न्यूट्रॉन
उदासीन कण
होता है । इलेक्ट्रॉन
नाभिक में उपस्थित
नहीं होते
हैं ।
हीलियम परमाणु B. हीलियम गैस C. धनावेशित हीलियम आयन D. हीलियम इलेक्ट्रॉन एल्फा कण धनात्मक आवेशित हीलियम आयन होते हैं और ये साधारणतः हीलियम नाभिक होते हैं ।
परमाणु
संख्या B.
द्रव्यमान
संख्या C.
प्रोटोनों
की संख्या D.
इलेक्ट्रॉनों
की संख्या
सबस्क्रिप्ट
एक तत्त्व की
परमाणु संख्या
को दर्शाता
है
। उदाहरण
के लिए
न्यूट्रॉन
विद्युत्
उदासीन कण है
अर्थात इस पर
विद्युत्
आवेश शून्य
होता है।
इलेक्ट्रॉन
की खोज जे.जे.
थॉमसन ने सन् 1896
में की थी।
नाभिक
में उपस्थित
सभी मूल कणों
को न्यूक्लियॉन कहते
हैं।
नाभिक
के चारों ओर घूमने
वाला
इलेक्ट्रॉन
केवल कुछ
विशेष कक्षाओं
में ही
घूर्णन कर
सकता है,
इन कक्षाओं
को स्थायी कक्षाएँ
कहते हैं।SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
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A.
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A. समांगी SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
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A. SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
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SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
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SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
उदाहरण- जल एवं चीनी के विलयन में चीनी विलेय है।SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
(ii) यह तत्व के एक परमाणु को दर्शाता है ।
(iii) यह तत्व का परमाणु भार बताता है ।
(iv) यह तत्व के 6.022 x 1023 परमाणुओ को दर्शाता है ।
उदाहरण के लिए: H हाइड्रोजन के एक परमाणु को बताता है। हाइड्रोजन के 6.022 x 1023 परमाणुओ को दर्शाता है । H का परमाणु भार 1.008 होता है ।SOLUTION
इस प्रकार विदित है कि जिस प्रकार तत्वों के परमाणुओं को प्रतीक
(1) मूलानुपाती सूत्र
(2) अणु सूत्र
(3) संरचनात्मक सूत्र
(1) मूलानुपाती सूत्र- किसी यौगिक का वह रासायनिक सूत्र जो उसके एक अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या के सरलतम अनुपात को दर्शाता है। जैसे, ग्लूकोस का मूलानुपाती सूत्र CH2O है।
(2) अणु सूत्र- किसी यौगिक का वह रासायनिक सूत्र जो उसके एक अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है। जैसे, ग्लूकोस का अणुसूत्र
(3) संरचना सूत्र- किसी यौगिक का वह रासायनिक सूत्र जो उसके एक अणु में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं की आपस में बंधित होने की व्यवस्था को दर्शाता है। जैसे, कार्बन डाई ऑक्साइड के अणु में दो ऑक्सीजन परमाणु एक कार्बन परमाणु से द्वि-बंधों के द्वारा बंधित होते हैं तथा ये बंध आपस में 180° का कोण बनाते हैं।
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
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A.
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A.
SOLUTION
A. आतंरिक कोश में उपस्थित होते हैं ।SOLUTION
A. SOLUTION
A.
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A.
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A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
यहाँ
सबस्क्रिप्ट
20 है जो कि कैल्सियम
की परमाणु
संख्या
अर्थात प्रोटॉन
की संख्या है
।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
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B.
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