कैथोड किरणे
ऐनोड किरणों की खोज ई. गोल्डस्टीन ने की थी ।
तत्व जो अपने संयोजकता कोश मे 4 या अधिक इलेक्ट्रॉन रखते हैं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृति रखते हैं ।
जे. जे. थॉमसन पहले वैज्ञानिक थे जिन्होने परमाणु की संरचना के लिए मॉडल प्रस्तुत किया था ।
परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं ।
सल्फर के अणु अष्ट परमाणुक होते हैं। अतः सल्फर की परमाणुकता आठ होती है।
परमाणु तीन प्रकार के मूल कणों इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन से मिलकर बना है।
किसी अणु में उपस्थित
आधुनिक सिद्धांत के अनुसार वैज्ञानिक आवोगाद्रो ने यौगिक के परमाणु को अणु का नाम दिया।
परमाणु में उपस्थित समस्त धन आवेश तथा द्रव्यमान एक अति सूक्ष्म आयतन में केन्द्रित रहता है जिसे नाभिक कहते हैं।
रदरफोर्ड के अनुसार नाभिक तथा उसके चारों ओर कक्षाओं में भ्रमण कर रहे इलेक्ट्रॉनों के बीच परस्पर स्थिर विद्युत् आकर्षण होने के बावजूद भी इलेक्ट्रॉन तीव्र गति से भ्रमण करते रहते हैं और नाभिक में नहीं गिरते, क्योंकि इन इलेक्ट्रॉनों के परिक्रमण से उत्पन्न अपकेन्द्रण बल नाभिक के स्थिर विद्युत् आकर्षण बल को संतुलित कर देता है।
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में प्रमुख कमियाँ यह हैं कि
(i) परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं की गयी है।
(
प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
एक परमाणु मे प्रोटॉनों (धनात्मक आवेशित) की संख्या इलेक्ट्रॉनों (ऋणात्मक आवेशित) की संख्या के बराबर होती है और न्यूट्रॉन अनावेशित होता है इसलिए परमाणु विद्युत उदासीन होता है ।
(a) सिल्वर - Ag
(b) पोटैशियम - K
तत्वों के लम्बे नामों के स्थान पर प्रयुक्त किये जाने वाले संक्षिप्त चिन्हों को प्रतीक कहते हैं। जैसे, हाइड्रोजन का प्रतीक H है।
किसी तत्त्व की संयोजन शक्ति (क्षमता) उस तत्व की संयोजकता कहलाती है।
वे मूलक जो केवल एक परमाणु से बने होते हैं, उन्हें सरल मूलक कहते हैं जैसे, सोडियम, क्लोराइड आदि।
कैल्शियम(Ca2+), फैरस(Fe2+)
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार
अभिकारकों का द्रव्यमान = उत्पादों का द्रव्यमान
Fe का द्रव्यमान + S का द्रव्यमान = FeS का द्रव्यमान
56 + 32 = FeS का द्रव्यमान
FeS का द्रव्यमान = 88
किसी यौगिक का अणु सूत्र लिखने के लिए सर्वप्रथम उस यौगिक का गुणात्मक संघटन तथा मात्रात्मक संघटन ज्ञात किया जाता है।
1. गुणात्मक संघटन से किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों की जानकारी मिलती है।
2. मात्रात्मक संघटन से किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या की जानकारी मिलती है।
कुछ तत्व एक से अधिक संयोजकताएँ दर्शाते है ।
|
तत्व |
‘ous’ रूप मे संयोजकता |
‘ic’ रूप मे संयोजकता |
|
कॉपर (Cu) |
क्यूप्रस 1 |
क्यूप्रिक 2 |
|
मर्करी (Hg) |
मरक्यूरस 1 |
मरक्यूरीक 2 |
|
आयरन (Fe) |
फ़ैरस 2 |
फैरिक 3 |
|
टिन (Sn) |
स्टेनस 2 |
स्टेनिक 4 |
a. सोडियम - Na
b. कैल्शियम - Ca
c. गोल्ड - Au
d. आयरन - Fe
(a) ओज़ोन = 3 (त्रिपरमाणुक )
(b) नाइट्रोजन = 2 (द्विपरमाणुक)
(c) नियॉन =1 (एकपरमाणुक)
(d) सल्फर = 8 (अष्ट-परमाणुक)
|
प्रतीक |
तत्व का नाम |
लैटिन नाम |
|
Na |
सोडियम |
नेट्रीयम |
|
Au |
गोल्ड |
औरम |
|
Ag |
सिल्वर |
अर्जेंटम |
|
Fe |
आयरन |
फ़ैरम |
(i) बेरियम क्लोराइट
(ii) पोटैशियम सल्फाइट
(iii) सोडियम फैरोसायनाइड
(iv) कॉपर (I) सल्फाइड या क्यूप्रस सल्फाइड
(v) पोटैशियम डाइक्रोमेट
(vi) मैग्निशियम नाइट्राइड
MCO3
M1 (CO3)1
CO3 की संयोजकता 2 होती है ।
अतः दोनों घातो को 2 से गुणा करते है ।
M1x2 (CO3)1x2
M की संयोजकता = 2
अतः MCO3 मे M की संयोजकता 2 है ।
ब्रोमाइड की संयोजकता 1 है ।
M के ब्रोमाइड का सूत्र = MBr2
फास्फेट की संयोजकता 3 होती है।
M के फास्फेट का सूत्र = M2(PO4)3
(i) हम जानते है
1 मोल परमाणु = 6.022 x 1023 परमाणु = परमाणु भार (g)
∵1 परमाणु का द्रव्यमान = 5.30 x 10-23 g
∴6.022 x 1023 परमाणुओं का द्रव्यमान = 5.30 x 10-23 x 6.022 x 1023 g
= 31.92 = 32 u
अतः तत्व (Y) का परमाणु द्रव्यमान 32u है ।
(ii) इस तत्व का नाम सल्फर है ।
(i) Na- सोडियम
(ii) B – बोरॉन
(iii) Fe – आयरन
(iv) Cu – कॉपर
(v) Cl – क्लोरीन
(vi) K – पोटैशियम
जे.जे. बर्जीलियस ने तत्वों के प्रतीकों की आधुनिक प्रणाली प्रस्तुत की। इस प्रणाली में तत्वों के प्रतीक निम्न तीन नियमों के आधार पर निश्चित किये जाते हैं:
(1) तत्वों के प्रचलित नामों के प्रथम अक्षर को उसके प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता है।
(2) जब दो या अधिक तत्वों के नाम एक ही अक्षर से प्रारंभ होते हैं तो अक्षर के प्रतीक में प्रथम अक्षर के साथ एक अन्य छोटा अक्षर भी जोड़ दिया जाता है।
(3) कुछ तत्वों के प्रतीक उनके प्रचलित नामों के स्थान पर उनके लैटिन नामों के आधार पर रखे जाते हैं।
(i)
PCl3 − फॉस्फोरस
ट्राई
क्लोराइड
(ii)
NaClO - सोडियम
हाइपोक्लोराइट
(iii) Na2O − सोडियम ऑक्साइड
a.

b.

c.

A. Al2O
B. AlO
C. Al2O3
D. AlO3
एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) एक उभयधर्मी ऑक्साइड है | यह सामान्यतः एलुमिना कहलाता है | इसका निर्माण बेयर प्रक्रम में बॉक्साइट से किया जाता है |
एक परमाणु ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन और धनावेशित प्रोटॉन रखता है लेकिन एक परमाणु विद्युत उदासीन होता है क्योंकि धनावेशों और ऋणावेशों की संख्या बराबर होती है | जब कभी परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागता या ग्रहण करता है विद्युत उदासीनता भंग हो जाती है और एक आयन बनता है |
A. C6H6
B. Al2O3
C. NH4+
D. H+
NH4+ एक आयनिक यौगिक नहीं है बल्कि यह एक आयन (धनायन) है | C6H6 बेंजीन है और यह इलेक्ट्रॉनों के साझे से बना एक सहसंयोजक यौगिक है इसमें इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण या आयनों का निर्माण नहीं होता है | Al2O3 एक आयनिक यौगिक है जो एल्युमिनियम से ऑक्सीजन को इलेक्ट्रॉन के स्थानान्तरण से बनता है | H+ एक धनायन है |
A. उस पदार्थ के 2 मोल
B. 6.022X1023 अणु
C. उस पदार्थ के 3 मोल
D. उस पदार्थ के 4 मोल
एक पदार्थ का ग्राम अणु भार इसका ग्राम में अणुभार होता है | यह 6.022X1023 अणु रखता है जबकि एक पदार्थ का मोलर द्रव्यमान उस पदार्थ के 1 मोल के द्रव्यमान के बराबर होता है | इसकी इकाई ग्राम प्रति मोल होती है |
A. 1 मोल
B. 0.2 मोल
C. 0.5 मोल
D. 11.4 L
CO2 का अणुभार
= 12 + 16 x 2
= 12 + 32
= 44 g
इसका अर्थ है कि CO2 के 44g = CO2 का 1 मोल
इसलिए CO2 का 22 g = 0.5 मोल
A. 16u
B. 32u
C. 34u
D. 33u
ऑक्सीजन के एक परमाणु का परमाणु भार = 16u. ऑक्सीजन अणु O2 का अणु भार = 2 x 16 = 32u.
A. गुणित अनुपात का नियम
B. द्रव्यमान संरक्षण का नियम
C. स्थिर अनुपात का नियम
D. व्युत्क्रम अनुपात का नियम
एक रासायनिक अभिक्रिया में बनने वाले उत्पादों का कुल द्रव्यमान अभिकारकों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है |
A. 1
B. -2
C. -1
D. 2
सल्फेट आयन पर -2 आवेश होता है | चूँकि MgSO4 विद्युत उदासीन है इसलिए मैग्नीशियम सल्फेट में Mg की संयोजकता +2 या 2 होगी |
यहाँ पर X और Y की संयोजकताओं का विनिमय होता है | हम कह सकते हैं कि X केवल एक इलेक्ट्रॉन ले सकता है जबकि Y तीन इलेक्ट्रॉन ले सकता है | इसलिए सूत्र X3Y1 होगा |
A. 5:3
B. 1:1
C. 3:8
D. 2:3
सल्फर का परमाणु भार 32 होता है और ऑक्सीजन का परमाणु भार 16 होता है | इसका अणुसूत्र SO2 है | अतः 32: (2 X 16) = 1:1
वे मूलक जो एक से अधिक तत्वों के परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं, उन्हें यौगिक मूलक कहते हैं। जैसे, कार्बोनेट, सल्फेट आदि।
क्लोराइड(Cl-), नाइट्रेट(NO3-)
(i) रासायनिक समीकरण ।
(ii) शब्द समीकरण |
असत्य
व्याख्या : वूलफ्राम टंगस्टन का जर्मन नाम है ।
तत्वो के प्रतीक अँग्रेजी, लैटिन और जर्मन नाम से लिए जाते हैं ।
जल
मा. ता. दा. पर प्रत्येक गैस का 22.4 लीटर = गैस का आण्विक द्रव्यमान
टंगस्टन । टंगस्टन का प्रतीक W इसके जर्मन नाम वूलफार्म से लिया गया है ।
तत्व प्रतीक
लैड Pb
आयरन Fe
किसी तत्व के एक मोल का भार (ग्राम मे) इसका अणु भार कहलाता है।
Mg का द्रव्यमान = 24
Mg का परमाणु क्रमांक = 12
12Mg24 Mg मे उपस्थित न्यूट्रॉन की सख्या = 24 − 12 = 12
परमाणु भार = प्रोटोनों की संख्या + न्यूट्रॉन की संख्या
न्यूट्रॉन की संख्या = परमाणु भार − प्रोटोन की संख्या
= 4 − 2 = 2
(i) कैथोड किरणों का निर्माण ।
(ii) ऐनोड किरणों का निर्माण ।
न्यूट्रॉन
के तीन मुख्य गुण
है:
i. न्यूट्रॉन
विद्युत
उदासीन कण है
अर्थात इस पर
विद्युत
आवेश शून्य
होता है।
ii. न्यूट्रॉन
का
द्रव्यमान
1.6725 x
10-24 g होता
है।
iii. नाभिकीय
अभिक्रियाओं
से ज्ञात
होता है कि सभी
तत्वों के
परमाणुओं
में
(हाइड्रोजन
को छोड़कर )
न्यूट्रॉन
होते हैं।
|
अणु |
परमाणु |
|
अणु किसी पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण है जो स्वतन्त्र अवस्था में रह सकता है। |
परमाणु किसी पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण है जो स्वतन्त्र अवस्था में नहीं रह सकता है। |
|
यह एक या एक से अधिक परमाणुओं के संयोग से बनता है। |
यह प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन के संयोग से बनता है। |
|
यह रासायनिक अभिक्रिया में प्रायः परमाणुओं में विभाजित हो जाता है। |
यह रासायनिक अभिक्रिया में विभाजित नहीं होता है। |
|
यह रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं। |
यह रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले तत्व का सूक्ष्मतम कण है। |
समस्थानिक किसी तत्व के वह परमाणु हैं जिनके परमाणु द्रव्यमान भिन्न होते हैं लेकिन परमाणु क्रमांक समान होते हैं । अतः इनमें 17B35, 17D37 समस्थानिक हैं।
समभारिक वे तत्व हैं जिनके परमाणु द्रव्यमान समान होते हैं तथा परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं। अतः इनमें 18A40, 20C40 समभारिक हैं।
+1x1 :- यह कण प्रोटॉन (+1p1) है ।
घात (1) यह दर्शाता है की इसका द्रव्यमान 1 amu है ।
अधोलिखित (+1) दर्शाता है की इस पर +1 आवेश उपस्थित है ।
0x1 :- यह कण न्यूट्रॉन (0n1) है ।
घात (1) यह दर्शाता है की इसका द्रव्यमान 1 amu है ।
अधोलिखित (0) दर्शाता है की इस पर 0 आवेश उपस्थित है अर्थात यह आवेश विहीन है ।
-1x0 :- यह कण इलेक्ट्रॉन (-1e0) है ।
घात (0) यह दर्शाता है की इसका द्रव्यमान 0 है अर्थात इसका कोई द्रव्यमान नहीं होता है ।
अधोलिखित (-1) दर्शाता है कि इस पर -1 आवेश उपस्थित है ।
परमाणु क्रमांक = 20
तत्व
तत्व का नाम = कैल्शियम
परमाणु क्रमांक
तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
तत्व
परमाणु क्रमांक = 19
तत्व
तत्व का नाम = पोटैशियम (
भिन्न प्रकार के दो या अधिक परमाणुओं से बने अणु को विषम परमाणुक अणु कहते हैं। यौगिकों के अणु विषम परमाणुक होते हैं। जैसे जल का एक अणु हाइड्रोजन के दो परमाणुओं तथा ऑक्सीजन के एक परमाणु से बना होता है। कार्बन डाइ ऑक्साइड का अणु दो प्रकार के परमाणुओं कार्बन परमाणु तथा ऑक्सीजन परमाणु से बना होता है परन्तु इसके एक अणु में कार्बन का एक परमाणु और ऑक्सीजन के दो परमाणु होते हैं ।इसलिए कार्बन डाइ ऑक्साइड का अणु त्रि परमाणुक है।
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की परिकल्पनाएं-
ii. परमाणु किसी तत्व का सूक्ष्मतम कण है जिसे विभाजित नहीं किया जा सकता है तथा जो रासायनिक अभिक्रिया में अपरिवर्तित बना रहता है।
iii. परमाणु को ना तो उत्पन्न किया जा सकता और ना नष्ट किया जा सकता है।
iv. परमाणु अनेक प्रकार के होते हैं। जितने प्रकार के तत्व हैं उतने प्रकार के परमाणु हैं।
v. एक ही तत्व के सभी परमाणु आकार, द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणों में एक दूसरे के समान होते हैं और इनका द्रव्यमान निश्चित होता है।
vi. विभिन्न तत्वों के परमाणु आकार, द्रव्यमान तथा अन्य सभी गुणों में एक दूसरे से भिन्न होते हैं।
vii. रासायनिक परिवर्तनों में परमाणु अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं। इनमें उनका केवल संयोजन, पृथक्करण अथवा पुनर्व्यवस्थापन होता है। दो या दो से अधिक तत्वों के परमाणु सरल गुणित अनुपात (1:1,1:2,2:1,2:3 आदि) में संयुक्त होकर यौगिक परमाणु बनाते हैं।
viii. एक ही यौगिक के सभी परमाणु समान होते हैं।
ix. किसी यौगिक में तत्वों के परमाणुओं की संख्या एवं प्रकार निश्चित होते हैं ।
x. अतः डाल्टन के परमाणु वाद के आधार पर परमाणु तत्व का सूक्ष्मतम अविभाज्य कण है जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है।
कैथोड किरणों के गुण है :
रदरफोर्ड ने परमाणु मॉडल के आधारभूत निम्नलिखित सिद्धांत प्रस्तुत किये।
i. परमाणु का सम्पूर्ण धनावेश और लगभग सम्पूर्ण द्रव्यमान उसके केंद्र में स्थित होता है, जिसे नाभिक कहते हैं।
ii. नाभिक के चारों ओर रिक्त स्थान होता है, जिसमें आपेक्षिक रूप से इससे बहुत अधिक दूरी पर इलेक्ट्रॉन वितरित रहते हैं।
iii. परमाणु के नाभिक में स्थित धनावेशित कणों की संख्या ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, अतः परमाणु विद्युत् उदासीन होता है।
iv. नाभिक तथा उसके चारों ओर कक्षाओं में भ्रमण कर रहे इलेक्ट्रॉनों के बीच परस्पर स्थिर विद्युत आकर्षण होने के बावजूद भी इलेक्ट्रॉन तीव्र गति से भ्रमण करते रहते हैं और नाभिक में नहीं गिरते, क्योंकि इन इलेक्ट्रॉनों के परिक्रमण से उत्पन्न अपकेन्द्रण बल नाभिक के स्थिर विद्युत आकर्षण बल को संतुलित कर देता है।
v. परमाणु के ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इसके धनावेशित नाभिक के चारों ओर अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर रिक्त स्थान पर चक्कर लगाते रहते हैं।
A.
जल
B.
कोशिका रस
C.
कोशिका द्रव्य
D.
न्यूक्लिओप्लाज्म
कोशिका रस पतला तरल पदार्थ है जो पादप कोशिकाओं की बड़ी केंद्रीय रिक्तिका में पाया जाता है। इसमें जल, अमीनो अम्ल, ग्लूकोज़ और लवण होते हैं।
A.
रिक्तिका
B.
माइटोकोनड्रिया
C.
राइबोसोम
D.
गोल्जी काय
रिक्तिका कुछ युकेरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित झिल्ली बाध्य कक्ष हैं जो स्रवण, उत्सर्जन और संग्रह कार्यों जैसे विभिन्न कार्य करती है।
A.
पर्णहरित
B.
फाइकोइरेथ्रिन
C.
ज़ैन्थोफिल
D.
फुकोजैन्थिन
पर्णहरित अधिकतम पादपों, शैवाल और साइनोबैक्टीरिया में पाया जाने वाला हरे रंग का वर्णक है। पर्णहरित प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है जो पादपों की प्रकाश से ऊर्जा के उत्पादन में सहायता करता है। पर्णहरित अणु विशेष रूप से व्यवस्थित प्रोटीन जटिल हैं जिन्हें प्रकाश तंत्र कहते हैं जो हरितलवक की थायलेकोइड झिल्ली में अंतःस्थापित होते हैं।
A.
माइटोकोनड्रिया, रिक्तिका
B.
लवक, गोल्जी काय
C.
माइटोकोनड्रिया, लवक
D.
राइबोसोम, केंद्रिका
कई कोशिकाओं के अलावा कोशिका के केंद्रक में DNA पाया जाता है, और माइटोकोनड्रिया में स्वयं के स्वतंत्र जीनोम होते हैं। माइटोकोनड्रिया में राइबोसोम और DNA होते हैं और केवल अन्य माइटोकोनड्रिया के विभाजन से निर्मित होते हैं इसलिए इन्हें अर्द्ध स्वायत्त कोशिकांग भी कहते हैं।
A.
माइटोकोनड्रिया
B.
अन्तःप्रद्रव्यी जालिका
C.
राइबोसोम
D.
लवक
लवक मुख्य कोशिकांग हैं जो पादप और शैवाल में पाये जाते हैं। लवक प्रकाश संश्लेषण, उत्पादों के संग्रह जैसे स्टार्च और अणुओं के कई वर्गों के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी है।
A.
ADP
B.
ATP
C.
NADP
D.
FADP
एडिनोसिन 5'- ट्राईफॉस्फेट (ATP) बहु कार्यात्मक न्यूक्लियोटाइड है जो अंतःकोशिकीय ऊर्जा के स्थानांतरण के लिए एक "आणविक मुद्रा" के रूप में सबसे महत्वपूर्ण है।
A.
माइटोकोनड्रिया
B.
लवक
C.
गोल्जी काय
D.
राइबोसोम
माइटोकोनड्रिया को कोशिकीय पॉवर हाउस के रूप में वर्णित किया है क्योंकि ये कोशिका की अधिकतम ऊर्जा ATP का निर्माण करता है जिसे रासायनिक ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग में लिया जाता है।
A.
लवक
B.
माइटोकोनड्रिया
C.
लाइसोसोम
D.
राइबोसोम
लाइसोसोम वह कोशिकांग है जिसमें पाचक एंजाइम पाये जाते हैं और अतिरिक्त खाद्य पदार्थ को पचा लेते हैं तथा वायरस और बैक्टीरिया को निगल लेते हैं। इन्हें स्वलयन में इनकी भूमिका के कारण जीव वैज्ञानिकों द्वारा आत्मघाती थैलियाँ या आत्मघाती सैक कहा गया है।
(a) विलयन दो या दो से अधिक रासायनिक रूप से अनभिक्रियाशील प्रजातियों का समांगी मिश्रण होता है ।
(b) (i) अम्लगम : इसमें विलेय द्रव और विलायक ठोस होता है ।
(ii) वातयुक्त पेय : विलेय गैस और विलायक द्रव होता है ।
(i)
|
गुण |
वास्तविक विलयन |
निलंबन |
कोलॉइड |
|
कणों का आकार |
10-10 m से कम |
लगभग 10-7m |
10-9 m और 10-6 m के मध्य |
|
दृश्यता |
इसके कण अदृश्य होते हैं |
इसके कण नग्न आँखों से देखे जा सकते हैं |
इसके कण केवल सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे जा सकते हैं |
(ii) विलयन निलंबन या कोलॉइडी प्रकृति का है । यह प्रभाव टिंडल प्रभाव कहलाता है । प्रकाश का कोलॉइडी या निलंबन कणों के द्वारा प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव कहलाता है ।
(i) दही से मक्खन मथने की प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है | इस प्रक्रिया में द्रव में निलंबित हल्के ठोस कण पृथक हो जाते हैं |
(ii) इस मिश्रण को कार्बन डाइसल्फाइड मे घोलते है जिसमे केवल सल्फर घुल जाता है और छानने पर अविलेय कार्बन फिल्टर पत्र पर रह जाता है । निस्यंद का वाष्पीकरण करके सल्फर के क्रिस्टल प्राप्त कर लिए जाते है ।
(iii) समुद्री जल से अघुलनशील अशुद्धियों को पृथक करने के लिए इसे छाना जाता है । समुद्री जल मे घुले हुए लवणों को आसवन द्वारा पृथक कर लिया जाता है । इस प्रकार आसव के रूप मे शुद्ध जल प्राप्त कर लिया जाता है ।
|
विलेय |
विलायक |
विलयन |
|
गैस |
गैस |
वायु |
|
गैस |
द्रव |
सोडा वाटर |
|
द्रव |
गैस |
कोहरा |
|
द्रव |
द्रव |
जल में ऐल्कोहॉल |
|
ठोस |
गैस |
वायु में धूल के कण |
|
ठोस |
द्रव |
जल तथा नमक का विलयन |
a) दूध एक शुद्ध पदार्थ नहीं है क्योंकि यह जल, वसा और प्रोटीन का एक मिश्रण है और इन घटको का अनुपात निश्चित नहीं होता है ।
b) 24 कैरेट सोना शुद्ध पदार्थ है क्योंकि यह केवल एक प्रकार के परमाणुओं (सोने के पामाणु) से मिलकर बना होता है ।
c) जर्मेनियम और सिलिकॉन ।
d) कार्बन डाइऑक्साइड एक यौगिक है क्योंकि इसके घटक (कार्बन और ऑक्सीजन) द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात मे उपस्थित होते हैं ।
e) समांगी मिश्रण : जल मे घुली हुई चीनी
विषमांगी मिश्रण : जल मे घुली हुई मिट्टी
|
विलयन |
विलयन का प्रकार |
|
जल मे स्टार्च का विलयन |
कोलॉइडी विलयन |
|
जल मे बालू का विलयन |
निलंबन |
|
जल मे चीनी का विलयन |
वास्तविक विलयन |
|
जल मे नमक का विलयन |
वास्तविक विलयन |
|
दूध |
कोलॉइडी विलयन |
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार अभिकारकों का द्रव्यमान = उत्पादों का द्रव्यमान Fe का द्रव्यमान + S का द्रव्यमान = FeS का द्रव्यमान 56 + 32 = FeS का द्रव्यमान FeS का द्रव्यमान = 88
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार एक रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है| अतः अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान 100 = 56 + 44 100 = 100
A. 6.022 X 1023
B. 6.021 X 1021
C. 6.023 X 1024
D. 6.023 X 1022
संख्या 6.022 x 1023 आवोगाद्रो संख्या या आवोगाद्रो स्थिरांक कहलाती है | 6.022 x 1023 परमाणु/अणु/आयन 1 मोल कहलाते हैं |
A. थोरियम
B. हाइड्रोनियम
C. लीथियम
D. ड्यूटीरियम
प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्रिटियम हाइड्रोजन के समस्थानिक है | ड्यूटीरियम ऑक्साइड (D2O) भारी जल कहलाता है |
A. फॉस्फोरस
B. नाइट्रोजन
C. हीलियम
D. ऐल्युमिनियम
एक अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या इसकी परमाणुकता कहलाती है | फॉस्फोरस एक चतुष्परमाणुक अधातु है | हीलियम एक एकपरमाणुक अधातु है | एल्युमिनियम एक एकपरमाणुक धातु है |
A. संयोजकता
B. मोल
C. परमाणुकता
D. आयन
परमाणु निश्चित संख्या में संयोजित होकर एक अणु का निर्माण करते हैं |
A. रदरफोर्ड
B. प्राउस्ट
C. बर्जिलियस
D. डाल्टन
डाल्टन ने उस समय तक ज्ञात तत्वों को चित्रों के रूप में विशिष्ट प्रतीक दिए | वास्तव में उसके द्वारा प्रदर्शित किये गए प्रतीक तत्व के परिमाण अर्थात तत्व के एक परमाणु को प्रदर्शित करते थे |
धातुओं की अधातुओं से अभिक्रिया से बहुत से यौगिकों का निर्माण होता है | इन यौगिकों में धातु और अधातु परमाणु उदासीन परमाणुओं के रूप में उपस्थित नहीं होते हैं बल्कि ये आवेशों के रूप में उपस्थित होते हैं | जब आयनिक यौगिकों का नाम लिखा जाता है धनायन का नाम पहले लिखा जाता है और ऋणायन का नाम बाद में लिखा जाता है |
B. KCl C. NaCl D. CsCl पोटैशियम की संयोजकता +1 होती है और क्लोरीन की संयोजकता होती है | इसलिए पोटैशियम क्लोराइड का सूत्र KCl होता है |
B. ग्राम C. मोल D. ग्राम प्रति मोल एक पदार्थ का मोलर द्रव्यमान उस पदार्थ के 1 मोल का द्रव्यमान होता है | अतः इसकी इकाई ग्राम प्रति मोल होती है |
B. धनायन C. ऋणायन D. संयोजकता एक ऋणायन एक परमाणु के एक या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से बनता है | एक ऋणायन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या हमेशा प्रोटॉनों की संख्या से अधिक अधिक होती है | इसकारण यह ऋणावेश रखती है |
B. नियॉन (Ne) C. हाइड्रोजन (H) D. नाइट्रोजन (N) उत्कृष्ट गैसें परमाण्वीय रूप में रह सकती हैं क्योंकि इनका अष्टक पूर्ण होता है | नियॉन (Ne) एक उत्कृष्ट गैस है अतः यह Ne परमाणुओं के रूप में पायी जाती है |
लाइसोसोम B.
रिक्तिका C.
लवक D.
माइटोकोनड्रिया
गोल्जी
काय कोशिका
स्रवण या
कोशिका में
उपभोग,
लाइसोसोम के
निर्माण के
लिए और इन
पदार्थों के
रूपान्तरण, पृथक्करण
और पैकेजिंग
के लिए
समाकलित है।
लवक B.
रिक्तिका C.
सिस्टर्नी D.
राइबोसोम
एक
सिस्टर्नी
में चपटी
झिल्लीनुमा
डिस्क होती
है जिससे
गोल्जी
उपकरण का
निर्माण
होता है।
लिपिड संश्लेषण B. झिल्ली जीवोत्पत्ति C. झिल्ली जीवजनन D. प्रोटीन संश्लेषण चिकनी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका लिपिड संश्लेषण, कार्बोहाइड्रेट की चयापचय और कैल्शियम सांद्रता, ड्रग विषहरण और कोशिका झिल्ली के प्रोटीन पर जुड़े हुए रिसेप्टर के साथ कई चयापचय की प्रक्रिया में कार्य करती हैं।
राइबोसोम B. लाइसोसोम C. गोल्जी काय D. प्रोटीन्स खुरदरी अन्तःप्रद्रव्यी जालिका की सतह पर प्रोटीन बनाने वाले राइबोसोम बिखरे होते हैं, जो इसे खुरदरा दर्शाता है। राइबोसोम प्रोटीन का संश्लेषण आरंभ करने पर केवल अन्तः प्रद्रव्यी जालिका से ही जुड़े होते है।
वायरस B.
बैक्टीरिया C.
प्रोटोजोआ D.
कवक
वायरस
एक अति
सूक्ष्म जीव
है जिसमें
आनुवांशिक
पदार्थ
युक्त DNA या RNA होता है और
बाहर की ओर प्रोटीन
आवरण होता
है। इसमें ना
तो झिल्ली है ना
ही कोई
कोशिकांग
हैं।
न्यूक्लिओप्लाज्म B.
कोशिका
द्रव्य C.
जीवद्रव्य D.
जल
जीवद्रव्य
एक पतला, अर्द्ध
पारदर्शी
तरल पदार्थ
है जो सभी
कोशिकाओं को
भरता है।
चयापचय B.
स्राव C.
लिपिड
संश्लेषण D.
प्रोटीन
संश्लेषण
A. ऋणायन का नाम पहले और धनायन का नाम बाद में लिखा जाता है SOLUTION
A. PCl SOLUTION
A. ग्राम प्रति अणु SOLUTION
A. स्थायी परमाणु SOLUTION
A. ऑक्सीजन (O)SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.