बिन्दु
बिन्दु
(5x+1)(x+3)-8=5(x+1)(x+2)
5x2+16x+3-8 = 5x2+15x+10
x=15.
(i) समीकरण 2x + 3y = 4.37 को 2x + 3y - 4.37 =0 के रूप में लिखा जा सकता है।
यहाँ, a=2, b=3 और c= -4.37
(ii) समीकरण x-4 = 3y को x- 3y-4=0 के रूप में लिखा जा सकता है। यहाँ, a=1, b=-3 और c= -4.
(iii)
समीकरण 4= 5x-3y को 5x-3y-4=0 के
रूप में लिखा
जा सकता है।
यहाँ, a=5, b=-3 और c= -4.
बिन्दु (-2, -4) से गुजरने वाली दो रेखाओं के समीकरण x + y = -6 और y = x-2 है, अर्थात, x – y = 2
चूंकि (-2,-4)एक बिन्दु को निरूपित करता है इसलिए इस बिन्दु से अनेक रेखाएं गुजर सकती है।
बिन्दु (2,14) से गुजरने वाली दो रेखाओं के समीकरण हैः
x + y = 16 और y – x = 12
चूंकि (2,14) एक बिन्दु है, इसलिए, इस बिन्दु से होकर अनेक रेखा गुजर सकती है।.
इस समीकरण द्वारा गणितीय गणना और बुद्वित्तपरता के महत्व को दर्शाया गया है।
(i)
x=-5 को 1.x +0.y+5=0
के रूप में
लिखा जा सकता
है।
(ii) y=2 को 0.x+1.y-2=0 के रूप में
लिखा जा सकता
है।
(iii) 2x=3 को 2x+0.y -3=0 के रूप में लिखा जा सकता है।
(iv) 5y=2 को 0.x+5y-2=0 के रूप में लिखा जा सकता है।


इस प्रकार,
x = 3.
x = 0 रखने पर, हम y = 4 प्राप्त करते है।
और y = 0 रखने पर, हमने x = 2 प्राप्त करते है।
पहला हल : (0,4)
दूसरा हल : (2,0)
A.
त्रिभुज
B.
वर्ग
C.
आयत
D.
कोई भी बहुभुज
एक पिरामिड़ का पाश्र्व फलक त्रिभुज के शीर्ष पर एक बिन्दु पर मिलता है।
A.
एक- विमा आकृति।
B.
द्वि-विमा आकृति।
C.
त्रि-विमा आकृति।
D.
चार-विमा आकृति।
हम जानते है कि पिरामिडएक ठोस आकृति होती है, इसलिए यह एक त्रि-विमा आकृति होती है।
A.
संरेख बिन्दु।
B.
असंरेख बिन्दु।
C.
या तो संरेख बिन्दु या असंरेख बिन्दु।
D.
समवर्ती बिन्दु।
यदि बिन्दु A, B, C और D एक ही सरल रेखा पर स्थित है, तब वे संरेख बिन्दु कहलाते है।
A.
B.
C.
D.
प्रश्नानुसार, हमारे पास
AC+BC = AB
BC+BC= AB (दिया है AC= BC)
BC= AB/2
A.
PQ > MN
B.
PQ < MN
C.
PQ + MN = RS - MN
D.
PQ = MN
प्रथम यूक्लिड अभिगृहीतों के अनुसार, वे वस्तुएँ जो एक ही वस्तु के बराबर हों एक दूसरे के बराबर होती हैं। इसलिए, PQ = MN.
A.
x = 4y.
B.
y = 5y.
C.
y = 15x+9.
D.
y = 3x.
y = mx + c वह रेखा है जो मूल बिन्दु से होकर नही गुजरती है । अतः y = 15x+9 अभीष्ट समीकरण है।
A.
B.
C.
D.
मूल बिन्दु से होकर गुजरती है।
रेखा y-2 = 0 x-अक्ष के समांतर है।
A.
x= 3 और y = 2.
B.
x= 2 और y = 3.
C.
x= 2 और y = 2.
D.
x = 10 और y = -10
समीकरण 2x + 3y = 10 के बांये पक्ष में x = 2 और y = 2 प्रतिस्थापित करने पर, हमे ज्ञात हुआ 4 + 6 = 10 = दायां पक्ष
3y-4=0 में b
का मान है
A.
-
3.
B.
3.
C.
1.
D.
− 4.
ax+by+c=0 और x-
3y-4=0 की
तुलना करने
पर,
हमें
ज्ञात होता
है
a = 1, b = -
3 और c = − 4.
किस आलेख
द्वारा
समीकरण x +y
= 7 को
निरूपित
किया जाता है:
A.
I.
B.
II.
C.
III.
D.
IV.
(7,0), (0,7) समीकरण x + y = 7 के हल है। आकृति (iv) में दिया गया आलेख x + y = 7 को निरूपित करता है।
असत्य। यह एक रेखा को निरूपित करता है।
(a2
+ b2) } x + {
(a2 -
b2)} y =
(a2
b2) में x का
गुणांक
ज्ञात
कीजिए।
दिये
गये समीकरण
में x
का गुणांक
है =
(a2 + b2)
यह x-अक्ष को निरूपित करती है।
दिये गये समीकरण का अभीष्ट रूप
दो चर वाले समीकरण का मानक रूप ax+by+c = 0 है। इसलिए दिये गये समीकरण को 2x - 3y - 5 = 0 के रूप में लिखा जा सकता है।
y- अक्ष के समांतर एक रेखा x = b है, जहाँ b, y- अक्ष से रेखा की लम्बवत दूरी है।
x- अक्ष के समांतर एक रेखा y = a है, जहाँ a, x-अक्ष से रेखा की लम्बवत दूरी है।
यह अक्ष को निरूपित करता है।
असत्य। दो चरों वाले एक रैखिक समीकरण के अनंत हल होते है।
सत्य। (यह मूल बिन्दु से गुजरता है। x = 0 रखने पर, हम y = 0 प्राप्त करते है।)
सत्य।
असत्य।
डिब्बे की कीमत
डिब्बों की संख्या
25 डिब्बों की कीमत =25x
लेकिन यह दिया गया है कि 25 डिब्बों की कीमत
इसलिए
आलेखिय निरूपण:
|
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|
|
|
|
|
|
|
|
|

यहाँ

माना कि एक नोटबुक की कीमत ₹ x और एक कलम की कीमत ₹ y है।
इसलिए, x = 2y
या x-2y
= 0.
A.
{(m – n)3 + 4m} {(m – n)3 – 2m2}
B.
{(m – n)3 – (2m)3} {(m – a)3 + (m3)}
C.
{(m – n)2 – 2m} {(m – n)4 + (m – n) 2 2m + 4m2}
D.
((m - n)2 - 2m)((m - n)2 + 2m)
(m
- n)6 - 8m3
{(m - n)2}3
- (2m)3
{(m - n)2
- 2m}{(m - n)2 + 2m}
A.
10
B.
9
C.
7
D.
6
6.5 ×
6.5 - 45.5 + 3.5 × 3.5 = (6.5)2 - 2 × 6.5 × 3.5 + (3.5)2
माना
a
= 6.5 और
b
= 3.5.
हम जानते
है कि a2 - 2ab + b2 = (a
- b)2
इसलिए, (6.5)2 -
2 × 6.5 × 3.5 + (3.5)2 = (6.5 - 3.5)2 = 9
A.
8
B.
27
C.
64
D.
216
हम
जानते है कि x3
+ y3 + z3 – 3xyz
= (x + y + z)(x2 + y2 + z2 – xy – yz – zx).
अतः, a3 + b3 + c3
- 3abc
= (a + b + c)(a2 + b2 + c2 - ab - bc - ca)
= 9(a2 + b2 + c2 - 26).
अब, हम
जानते है कि (x +
y + z)2
= x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx.
अतः,
a2 + b2 + c2 = (a + b + c)2 -
2(ab + bc + ca)
= (9)2 - 2(26)
= 81 - 52
= 29
अतः,
a3 + b3 + c3 - 3abc = 9(a2 + b2
+ c2 - 26)
= 9(29 - 26)
= 9(3)
= 27
A.
10
B.
2
C.
-2
D.
-10
p(2) = 0
⇒ 2(2)3 - 5(2)2 + 14 - k = 0
⇒ 16 - 20 + 14 - k = 0
⇒ k = 10
A.
x2 - 4x + 1 = 0
B.
x2 - 4x - 1 = 0
C.
x2 + 4x +1 = 0
D.
x2 + 4x - 1 = 0
एक द्विघात समीकरण x2 - (शून्यको का योग)x + शून्यको का गुणन = 0 x2 - (-4)x + (- 1) = 0 x2 + 4x - 1 = 0 द्वारा दिया जाता है।
माना दिये गये बहुपद के शून्यक α और β है।
दिया गया है, f(x) = x2 - 4x + 3
f(x) = x2 - 3x - x + 3 = x(x - 3) - 1(x - 3) = (x - 1)(x - 3)
f(x) के शून्यकों को f(x) = 0 के द्वारा दिया जाता है।
∴ (x
- 1)(x - 3) = 0 ⇒ x = 1 or x = 3
इस प्रकार,
f(x) = x2 - 4x + 3 के
शून्यक α = 1 और β = 3 है।
समीकरण
6(1)3 - 5(1)2 + 2(1) - 9
= 6 - 5 + 2 - 9 = -6
शेषफल = -6
चूंकि हम जानते है कि, (x+y)3 = x3 + y3 + 3(x + y), इसलिए

चर की अधिकतम घात 1 है, इसलिए बहुपद की कोटी 1 है।
चर की अधिकतम घात 5 है, इसलिए बहुपद की कोटी 5 है।
चूंकि पहले पद में x की घात 1/3 है, जो कि एक पूर्ण संख्या नही है।
![]()
यह एक चर का एक बहुपद है।
x = 1 रखने पर
3(1)3
- 4(1)2 + 8(1) - 7
= 3 - 4 + 8 - 7 = 0
x =
1 बहुपद
का एक शून्यक
है।
के
गुणनखंडन
कीजिए।

दिये गये बहुपद में, x = 1 रखने पर, हमने प्राप्त किया
9(1)3
- 5(1) + 20 = 24
0
इसलिए, 1 बहुपद 9x3 - 5x + 20 का शून्यक नहीं हैं।
दिया है, f(x) = x2 + 7x + 10
= x2 + 5x + 2x + 10
= (x + 2) (x + 5)
f(x) = 0

(x + 2) = 0 या (x + 5) = 0
X = -2 या x = -5
इस प्रकार, x2 + 7x + 10 के शून्यक -2 और -5 है।
चूंकि आलेख x-अक्ष को तीन बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करता है। इसलिए, शून्यक की संख्या 3 है।

माना f(x) =
x2 – 4x +3 = x2 – 3x - x +3
= x(x - 3) - (x - 3)
= (x - 1)(x - 3)
f(x) के
शून्यको को f(x)
= 0 द्वारा
दिया जाता
है।
इसलिए,x -1 = 0 या x – 3 = 0, अर्थात x = 1 या x = 3
इसलिए, बहुपद x2 – 4x +3 के शून्यक 1 और 3 है।
(1) 7
(2) 0
(3)

(4) 0
बिन्दु Q के निर्देशांक (2, -3) होगें |
तृतीय चतुर्थांश में स्थित बिंदु के x निर्देशांक का चिन्ह ऋणात्मक होता है |
y- अक्ष पर स्थित बिंदु का x निर्देशांक 0 होता है।
निर्देशांक अक्ष समतल को चार भागों में विभाजित करते हैं जिन्हें चतुर्थांश कहते हैं |
मूल बिन्दु
चतुर्थ चतुर्थांश में

एक बिन्दु
निर्देशांक
अक्षों
को
ग्राफ़
पेपर
पर
अंकित
कीजिए
और
उपुक्त
पैमाना
लीजिए
।
मूलबिंदु
से
प्रारम्भ
कीजिये
और 3 इकाई
दाहिनी
ओर
चलिए
।
इस
बिन्दु
से 4 इकाई
नीचे
की
ओर
चलिए
और
उस
स्थान
पर
बिन्दु
अंकित
कीजिए
।
यही
हमारा
अभीष्ट
बिन्दु
है।

नहीं, क्योंकि कार्तीय तल में (x, y) की स्थिति बिन्दु (y, x) की स्थिति से भिन्न है। यदि हम कार्तीय तल में दिये गये बिन्दुओं को अंकित करें, तब दोनो भिन्न भिन्न स्थितियों पर प्राप्त होते हैं।

बिंदु A के
लिए कोटि (3) का
धनात्मक मान
= 3
बिंदु
D
के
लिए कोटि (-2) का
धनात्मक मान
= 2
आयत
ABCD
की
भुजा AD की
लम्बाई
=
बिंदु A के
लिए कोटि का
धनात्मक मान
+
बिंदु D के
लिए कोटि का
धनात्मक मान
= 3 + 2 =
5 मात्रक
इस प्रकार ,
आयत
की भुजा AD
की
लम्बाई = 5
मात्रक
बिंदु (-5,
0) का
भुज = -5
कोटि
= 0
अतः
बिंदु (-5, 0) x
- अक्ष पर
ऋणात्मक
दिशा में 5 मात्रक
की दूरी पर
स्थित है I
इस
प्रकार
बिंदु (-5, 0) का
आलेखन
कार्तीय तल
में संभव है I
2y-3=7
2y=10
y=5

इसलिए, आलेख
से
कार्तीय
निर्देशांक
(4,5)
है।
इसलिए
(i) B और C के निर्देशांक।
(ii) निर्देशांक (-3, -5) द्वारा पहचाना गया बिन्दु।
(iii) बिन्दु D का भुज तथा
H के निर्देशांक।
(i) B के निर्देशांक (-5,2) है।
और C के निर्देशांक (5,-5) है।
(ii) निर्देशांक (-3, -5) द्वारा पहचाना गया बिन्दु E है।
(iii) बिन्दु D का भुज, x = 6
तथा H के निर्देशांक (-5,-3) है।
यद्यपि
बिंदु प्रथम
चतुर्थांश
में स्थित है,
अतः
बिंदु के लिए
भुज तथा कोटि
दोनों के ही
मान धनात्मक
होंगे |
बिंदु की x
- अक्ष से दूरी =
कोटि = 8 मात्रक
बिंदु की y
- अक्ष से दूरी =
भुज = 9 मात्रक
अतः बिंदु के
निर्देशांक (9,
8)
होंगे |
1) निर्देशांक (1, 2) और (-1, -2) द्वारा बिन्दुओं की पहचान कीजिये।
2) A, B, C और D के निर्देशांकों को लिखिये।
3) बिन्दु C का भुज लिखिये।
चूंकि कार्तीय निर्देशांक युग्म क्रमित युग्म में है।
इसलिए
या
इसलिए
(i)
3
(ii) 3
(iii) 1
(iv) 0

माना कि f(x) = 2x3 - 3x2 + 7x - 6
तब f(1) = 2(1)3 - 3(1)2 + 7(1) – 6
= 2 - 3 + 7 - 6
= 0
अतः x = 1 बहुपद f(x) का एक शून्यक है।
= 4y2 + 1 - 4y
= (2y)2 + (1)2 - 2(2y)(1)
= (2y - 1)2 [(a - b)2 = a2 + b2 - 2ab]
= (2y - 1)(2y - 1)
2x2
- 8 = 0
2x2
= 8
x2
= 4
x = 2
and -2
इसलिए,बहुपद
के शून्यक 2 और -2 हैं।
X + y + z = 6 दिया गया है।
दोनो पक्षो का वर्ग करने पर, हमें ज्ञात हुआ



लंबे भाग से हमें यह प्राप्त होता हैः

लंबे भाग से हमें यह प्राप्त होता हैः
यहाँ
h(x) = 0 ⇒ 2x = 0 ⇒ x = 0
इस प्रकार, h(x) = 2x का एक शून्यक x = 0 है।
p(x) = 0
⇒ cx + d = 0
⇒ cx = -d
⇒ x = -d/c
इस प्रकार, p(x) का एक शून्यक x = - d/c है।
p(x) = 0 ⇒ ax = 0 ⇒ x = 0
इस प्रकार, p(x) का एक शून्यक x = 0 है।



(2) यह एक बहुपद है क्योंकि चर की घाते पूर्ण संख्याएँ है।
(3) यह एक बहुपद नही है क्योंकि चर की घाते एक पूर्ण संख्या नही है।

(i)
f(2) = 2(2)3 - 13(2)2 + 17(2) + 12
= 16 - 52 + 34 + 12
= 10
(ii) f(-3) = 2(-3)3 - 13(-3)2 + 17(-3) + 12
= -54 - 117 - 51 + 12
= -210
A.
(0, 0), (0, 1), (2, 2) और (2, 0)
B.
(0, 0), (1, 1), (2, 2) और (2, 0)
C.
(0, 0), (1, 0), (2, 2) और (2, 0)
D.
(0, 0), (0, 2), (2, 2) और (2, 0)

आलेख
के
माध्यम
द्वारा, हम
देखते
हैं
कि
दिये
गये
बहुभुज
के
शीर्षो
के
निर्देशांक
(0,
0), (2, 0), (2, 2) और (0, 2) है।
A.
(4, 6), (11, 10), (10, 6) और (3, 2)
B.
(6, 4), (11, 10), (10, 6) और (3, 2)
C.
(4, 6), (10, 10), (10, 6) और (3, 2)
D.
(4, 6), (11, 10), (6, 10) और (3, 2)

आलेख
के
माध्यम
द्वारा, हम
देखते
हैं
कि
दिये
गये
चतुर्भुज
के
शीर्षो
के
निर्देशांक
(4,
6), (11, 10), (10, 6) और (3, 2) है।
A.
वर्ग।
B.
आयत।
C.
रेखा।
D.
त्रिभुज।

आलेख
के
माध्यम
द्वारा, हम
देखते
हैं
कि
बिन्दुओं
A(2,
3), B(5, 3), C(5, 5), और
D(2,5)
को
जोड़ने
के
पश्चात
हमें
एक
आयत
प्राप्त
होता
है।
A.
चतुर्थ चतुर्थांश।
B.
प्रथम चतुर्थांश।
C.
द्वितीय चतुर्थांश।
D.
तृतीय चतुर्थांश।
सभी बिन्दु (-, +) के रूप में हैं, इसलिए ये द्वितीय चतुर्थाशं में स्थित है।
A.
25.
B.
20.
C.
10.
D.
5.

x-अक्ष
और
y-अक्ष
के
माध्यम
द्वारा, हम
देखते
है
कि
जब
x
= 5, तब
y
का
मान
25
है।
बिन्दु।
असत्य
दो
भिन्न
रेखाओं
में
एक
से
अधिक
बिन्दु
उभयनिष्ठ
नही
हो
सकता
हैं।
एक सीधी रेखा ऐसी रेखा हैं जो स्वयं पर बिन्दुओं के साथ सपाट रूप से स्थित होती हैं।
वैदिक काल में घरेलू अनूष्ठानों के लिए प्रयुक्त वेदियों के आकार के नाम वर्ग और वृत्तीय वेदियां है।
एक यूनानी गणितज्ञ, थेल्स को कथन की सत्यता की पहली जानकारी के लिए श्रेय दिया जाता है, अर्थात, एक वृत्त को इसके व्यास द्वारा समद्विभाजित किया जाता है।
चूंकि ठोसों के भिन्न भिन्न प्रकार होते हैं, इसलिए वें आकार और आकृति में भिन्न होते हैं। पृष्ठों की सीमाएं रेखाएं या वक्र कहलाती हैं। इसलिए, भिन्न भिन्न ठोसों में वक्रो और रेखाएं की संख्या भी अलग होती हैं।