
एक दी हुई लम्बाई का एक रेखाखंड, माना AB हैं।

यूक्लिड की अभिधारणा (3) की सहायता से, बिंदु A को केंद्र और AB त्रिज्या लेकर एक वृत खिचिये। इसी प्रकार, B को केंद्र मानकर और BA त्रिज्या लेकर एक अन्य वृत खीचा जा सकता हैं।
ये दोनों वृत्त मान लीजिए बिंदु C पर मिलते हैं।
अब रेखाखंडों AC और BC खींच कर ΔABC बनाइए।
अब, AB = AC हैं ( क्योंकि ये एक वृत्त की त्रिज्याएँ हैं।) (1)
इसी प्रकार, AB = BC ( एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ ) (2)
उपरोक्त दोनों तथ्यों और यूक्लिड के पहले अभिगृहीत द्वारा (वे वस्तुएँ जो एक ही वस्तु के बराबर होती हैं एक दूसरे के बराबर होती हैं) से निष्कर्ष निकलता हैं कि AB = BC = AC है।
अतः, Δ ABC एक समबाहु त्रिभुज हैं।
(i) सत्य, यदि आप एक वृत द्वारा घिरे हुए क्षेत्र को दूसरे पर अध्यारोपित करते हो तो वे संपाती हो जाते है। इसलिए, उनके केन्द्र और परिसीमाऐं संपाती हो जाते है। इसलिए उनकी त्रिज्याऐं संपाती होंगी।
इसलिए


![]()


निम्न आकृति में
माना AB एक सांत रेखा है। यह देखा जा सकता है कि इसे दोनों तरफ अनिष्चित रुप से दोनों तरफ बढ़ाया जा सकता है।
यूक्लिड के पाँच अभिधारणा के अनुसार जब



रेखाः- एक रेखा चौड़ाई रहित लम्बाई होती हैं।
माना

AD = (1/2)AB … (i)
यह दिया गया है कि
AC = (1/2)AB … (ii)
समीकरण
यह तभी सम्भव है जब
इसलिए





त्रिभुज
के बहिष्कोण
गुणधर्म से
हम जानते हैं
कि
बहिष्कोण = सम्मुख दो
अन्तः कोणों
का योग
50
+ x = 120![]()
या x = 70![]()
अब
त्रिभुज के
कोणों का योग = 180![]()
50
+ y + 70
= 180![]()
y = 60![]()

माना कि
POR=2x और
ROQ=3x
क्योंकि POQ एक सरल रेखा है, इसलिए
POR+
ROQ=180°
2x+3x=180°
5x=180°
x=180°/5
x=36°
POR=2(36°)
=72°
ROQ=3(36°)
=108°



आकृति
-1 आकृति
-2
आकृति
-3
a) आकृति
-2
b) आकृति -1
c) आकृति
-3




OP को आगे बढाया गया है जो कि RQ को बिन्दु T पर प्रतिच्छेद करता है।

अब, OT || RS और तिर्यक रेखा RT इन्हे क्रमशः T और R पर प्रतिच्छेद करती है।

चूंकि, OP किरण OT पर स्थित है।

CA , CA के
E
पर
मिलती
है।
तब, (AB2 +
BC2
+ CA2)
के
बराबर
हैः
A.
2 BE2
B.
3 BE2
C.
4 BE2
D.
6 BE2
माना
AB = a. तब, AE = a/2
BE2
= a2
- (a2/4)
= 3a2/4
या, 3a2 =
4 BE2
या, (AB2 +
BC2
+ CA2)
= 4 BE2
A,
B,
C है
A.
80°, 65°, 35°
B.
65°, 80°, 35°
C.
35°, 80°, 65°
D.
97.66°, 62.77°, 19.66°
35°
+ B
+ B
+ B
– 43° = 180°
3B
= 180° – 35° + 43°
B =
62.66°
A =
97.66°,
C =
19.66°
ADC के बराबर है
A.
B.
C.
D.
हमें यह दिया गया है कि
AB = AC
BD = DC
AD = AD
SSS गुणधर्म से
ABD
ADC
हमें ज्ञात है
ADB +
ADC = 180°
ADB =
ADC = 90° (
ABD
ADC)
z का माप है
A.
B.
C.
D.
हमें ज्ञात है AD = AB
x =
ADC =
ABE =110°
ADC में,
110o + 50o + z = 180°
z = 180° – 110o – 50o
z = 20°
A.
सबसे छोटी भुजा
B.
सबसे बडी भुजा
C.
लम्बवत भुजा का आधा
D.
आधार का दुगुना
चूंकि, एक त्रिभुज में सबसे बडे कोण की विपरीत भुजा सबसे बडी होती है। चूंकि त्रिभुज में कर्ण समकोण की विपरीत भुजा है। इसलिए यह त्रिभुज की सबसे बडी भुजा है।
ACD
का
अन्तः
सम्मुख
कोण
है
A.
B और
C
B.
A और
C
C.
A और
B
D.
B और
अन्तः
C.
ACD =
A +
B (अन्तः
सम्मुख
कोणों
का
योग)
ABC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें
A = 90° और AB = AC .
B और
C ज्ञात कीजिए
A.
30°, 60°
B.
40°, 50°
C.
45°, 45°
D.
60°, 30°
ABC
में,
A
= 90° और AB = AC
तब
B
=
C
कोण
योग
गुणधर्म
के
अनुसार
A
+
B
+
C
= 180°
90°
+
B
+
C
= 180°
90° + 2
B
= 180°
2
B
= 180° - 90°
= 90°
B
=
C
= 45°
A.
a – b > c
B.
c > a + b
C.
c = a + b
D.
b < c + a
b < c + a
किन्ही
दो
भुजाओं
का
योग
तीसरी
भुजा
से
अधिक
होता
है।
A.
23 सेमी
B.
19 सेमी
C.
18 सेमी
D.
15 सेमी
किन्ही दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होता है। 7 + 10 > 15 17 > 15
A.
B.
C.
D.
चूंकि सभी बहिष्कोणो का कुल माप= 3600 प्रत्येक बहिष्कोण की माप दी गई है= 1200 इसलिए, बहिष्कोणो की संख्या= 3600/1200 = 3 अतः, बहुभुज तीन भुजाओं का है।
AFE
=
DBC दिया
गया
है।
तब
AFE और
CBD की
सर्वांगसमता
है
A.
AAA सर्वांगसम कसौटी।
B.
SSS सर्वांगसम कसौटी।
C.
ASA सर्वांगसम कसौटी।
D.
SAS सर्वांगसम कसौटी।
हमें
ज्ञात
है,
AB = CF
AB
+ BF
= BF
+ CF
AF
= BC
EF
= BD
AFE =
DBC
AFE
CBD (SAS नियम)
A.
70°, 90°, 20°
B.
65°, 75°, 40°
C.
65°, 85°, 30°
D.
45°, 45°, 80°
45°
+ 45° + 80° = 170°
180°,
इसलिए, यह
त्रिभुज
के
रूप
में
नही
है।
ABC में
,
यदि
A :
B :
C = 1 : 2
: 3, तब
A,
B और
C है
A.
30°, 60°, 90°
B.
60°, 30°, 90°
C.
30°, 90°, 60°
D.
45°, 90°, 45°
हमें
यह
दिया
गया
है
कि,
A :
B :
C = 1 : 2
: 3
माना
A = x, तब
B = 2x और
C = 3x
A +
B +
C = x + 2x + 3x = 180° (त्रिभुज
के
कोण
योग
गुणधर्म
से)
6x
= 180°
x
= 30°
A = 30°,
B = 2x = 60°,
C = 3x = 90°
दिये गये चित्र में,
AD = BC
AC = AC
DAC =
ACB (
AD || BC)
SAS सर्वांगसमता की कसौटी से
ABC
CDA
इसलिए, AB = DC
A.
संपूरक
B.
पूरक
C.
बराबर
D.
असमान
एक समद्विबाहु त्रिभुज में समान भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते है।
A.
एक विषमबाहु त्रिभुज
B.
एक समद्विबाहु त्रिभुज
C.
एक समबाहु त्रिभुज
D.
एक समकोण त्रिभुज
एक त्रिभुज जिसमें दो भुजाए समान है, वह समद्विबाहु त्रिभुज कहलाता है।
ABC में
,
B =
C और
AD,
BC पर
लम्ववत
है।
तब
ADB और
ADC की
सर्वांगसमता
है
A.
SAS गुणधर्म
B.
SSS गुणधर्म
C.
RHS गुणधर्म
D.
ASA गुणधर्म
RHS
गुणधर्म
से,
ADB
ADC
ABC में, AD
BC,
B =
C और
AB = AC. तब
ADB और
ADC की
सर्वांगसमता
है
A.
SAS गुणधर्म
B.
SSS गुणधर्म
C.
RHS गुणधर्म
D.
ASA गुणधर्म

RHS गुणधर्म
से,
ADB
ADC.
A.
2500
B.
1250
C.
1100
D.
550
आकृति
से, हमें
ज्ञात
है
एक
त्रिभुज
के
सभी
बहिष्कोणों
का
योग= 3600
1250 + 1250 + x = 3600
x
= 3600 – 2500
x = 1100
A.
450, 450
B.
400, 500
C.
350, 550
D.
300, 600
माना
एक
समद्विबाहु
त्रिभुज
के
आधार
का
प्रत्येक
कोण
x
है।
इसलिए, हमें
ज्ञात
है
900
+ x + x = 1800
2x = 1800 – 900
x
= 450
इसलिए, एक
समद्विबाहु
त्रिभुज
के
आधार
के
कोण
का
माप
45°
और
45°
होगा।
ASA सर्वांगसमता नियम के अनुसार दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा दूसरे त्रिभुज के दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा के बराबर हों।
SAS सर्वांगसमता नियम के अनुसार दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज
की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।


ASA सर्वांगसमता नियम से हम देख सकते हैं कि त्रिभुज ADB और त्रिभुज ADC सर्वांगसम हैं। अतः AB = AC
इसलिए AB:AC = 1:1
समकोण त्रिभुज में त्रिभुज की सबसे बडी भुजा कर्ण होती हैं।
त्रिभुजों की सर्वांगसमता के अनुसार सर्वांगसम त्रिभुजों में संगत भुजाएँ बराबर होती हैं।
इसलिए, AB =PQ
दो रेखाएँ सम दूरस्थ कही जाती है यदि वे एक दूसरे से समदूरस्थ हैं और उनका कोई प्रतिच्छेद बिन्दु नही है। इसे आसानी से समझने के लिए, चलो कोई एक रेखा l और एक बिन्दु P जो l पर स्थित नही है, लेते है, प्लेफेयर के अभिग्रहीत (पाचवी अभिधारणा के समतुल्य) के अनुसार P से होकर जाने वाली एक अद्वितीय रेखा m है जो कि l के समान्तर है।

एक बिन्दु की एक रेखा से दूरी उस बिन्दु से रेखा पर लम्ब की लम्बाई होती है। माना l से m पर किसी बिन्दु की दूरी CD है। यह देखा जा सकता है कि AB=CD इस प्रकार l से m पर किसी बिन्दु की दूरी और m से l पर किसी किसी बिन्दु की दूरी समान होगी। इसलिए ये दो रेखाएँ एक दूसरे से हर जगह समदूरस्थ है।


अभिग्रहीत
स्थिति
माना
स्पष्टतः
इसलिए
स्थिति
आइए भारत देश पर विचार करते है। फिर गोवा राज्य को लेते हैं जो भारत से सम्बन्ध रखता है। गोवा
यह विश्व के किसी भी वस्तु के लिए सत्य है। और इस प्रकार सार्वत्रिक सत्य है।

A.
बाह्य सम्मुख कोण
B.
बाह्य कोण
C.
अन्तः सम्मुख कोण
D.
अन्तः कोण
यदि त्रिभुज की एक भुजा को बढाया जाये, तो इस प्रकार निर्मित कोण दो अन्तः सम्मुख कोणों के योग के बराबर होगा।
A.
पूरक
B.
संपूरक
C.
समान
D.
असमान
यदि एक तिर्यक रेखा समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तब संगत कोणों का प्रत्येक युग्म समान होगा ।
A.
योग 180° है।
B.
अंतर 180° है।
C.
योग 90° है।
D.
अंतर 90° है।
पूरक कोणों के युग्म का योग हमेशा 90° होता है।
A.
असंरेख बिन्दु
B.
संरेख बिन्दु
C.
प्रतिच्छेदन बिन्दु
D.
अप्रतिच्छेदन बिन्दु
ABC के
बाह्य कोणों के
कोण समद्विभाजक
है। तब
BOC है
A.
90°
- (1/2)
A
B.
90° +
(1/2)
A
C.
180°
- (1/2)
A
D.
90° +
A
A +
B =
BCQ
A +
C =
CBP
A +
B +
A +
C =
BCQ +
CBP
A + 180°
=
1 +
2 +
3 +
4
2
1 + 2
4 = A +
180°
1 +
4 =
(A/2) + 90°
180° -
BOC =
(A/2) + 90°
BOC = 90°
- (1/2)
A
A.
MNP और
PNO
B.
PNO और
MNO
C.
MNP और
MNO
D.
MPN और
PON
इन दो कोणों का योग 180° है और दोनो कोण आसन्न है।
A.
B.
C.
D.
माना कि दो कोण x, y है।
चूंकि x, y पूरक कोण है।
इसलिए, x+ y = 90°
दिया गया है कि इनका अंतर है-
x – y = 40°
x + y = 90° ... (1)
x – y = 40° ... (2)
2x = 130°
x = 65°, y = 25°
A.
306 वर्ग सेमी
B.
144 वर्ग सेमी
C.
64 वर्ग सेमी
D.
24 वर्ग सेमी
AB = AC – BC
= 17 – 9
AB = 8
AB2 = 64 वर्ग सेमी
A.
180°
B.
120°
C.
106°
D.
60
ACB = 180o– 35o– 25o = 120o (त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म से)
ECD=180o– 120o = 60° (कोणों के रैखिक युग्म)
ECD +
CDE =
AED (एक त्रिभुज का बाह्य कोण)
60o + 60o =
AED

AED = 120°
A.
180°
B.
90
C.
अधिक कोण
D.
न्यून कोण
कोणों के रैखिक युग्म का योग हमेशा 180° के बराबर होता है।
A.
> 0°, < 90°
B.
> 90º < 180°
C.
> 0°, < 270°
D.
> 0°, < 180°
अधिक कोण 90° से अधिक और 180° से कम होता है।
ABC
में कोण
A
का समद्विभाजक AD है, तब
A.
AB > BD
B.
AC < AB
C.
BC = AD
D.
AC < CD
ABC
में कोण
A
का समद्विभाजक AD है,
BAD =
CAD

1 =
2
ADC में
4 >
2
1 =
2 
4 >
1
AB
> BD.
A.
B.
C.
D.
पूरक कोणों का योग 90o होता है।
CD ,
1 :
2 = 3 : 2 , तब
6 है
A.
35º
B.
45º
C.
72º
D.
190º
माना
1 = 3x° ,
2 = 2x°
3x° + 2x° = 180°
x = 36°
AB
CD,
2 =
6 (संगत कोण)
2 = 2 x 36° = 72°

6 = 72°
A.
संपूरक
B.
पूरक
C.
समकोण
D.
आसन्न कोण
सभी रैखिक युग्म संपूरक होते है।

भुजाओं की
दृष्टि
से
त्रिभुज
तीन
प्रकार
के
होते
हैं:
1.
समबाहु
त्रिभुज
2. समद्विबाहु त्रिभुज
3. विषमबाहु
त्रिभुज
जब दो आकृतियाँ एक दूसरे को पूर्णतः ढक लेती है, तो वे सर्वांगसम होती हैं। या आकृतियाँ जो आकार और माप में समान होती है, सर्वांगसम होती हैं।
अधिक कोंण त्रिभुज का लम्ब केन्द्र त्रिभुज के समकोण पर स्थित होता है।
त्रिभुज की भुजाओं के लम्बार्धकों का प्रतिच्छेद बिंदु त्रिभुज का परिकेन्द्र कहलाता है।
त्रिभुज की माध्यिका त्रिभुज के शीर्ष को उसकी सम्मुख भुजा के मध्य बिंदु से जोड़ती है।
नहीं त्रिभुज
संभव नहीं है क्योंकि
5+6 < 12.
त्रिभुज की
किन्ही दो भुजाओ
का योग तीसरी भुजा
से बड़ा होना चाहिए
।




समांतर चतुर्भुज ABCD में ,
BA = CD
वर्ग BEFC में ,
EB = FC.
चूंकि EB, FC के समांतर है और BA, CD के समांतर है तब,


1. समबाहु त्रिभुज :वह त्रिभुज जिसमें सभी भुजाएँ बराबर होती हैं समबाहु त्रिभुज कहलाता है ।
2.समद्विबाहु त्रिभुज :वह त्रिभुज जिसमें दो भुजाएँ बराबर होती हैं समद्विबाहु त्रिभुज कहलाता है ।
3.विषमबाहु त्रिभुज: वह त्रिभुज जिसमें सभी भुजाएँ असमान होती हैं विषमबाहुत्रिभुज कहलाता है ।
BOC और
AOD में
BOC =
AOD (शीर्षाभिमुख सम्मुख कोण
CBO =
DAO (प्रत्येक
BC = AD (दिया है
BOC
AOD (AAS सर्वांगसमता नियम से)
BO = AO (CPCT से
![]()
(i)
ABE
और
ACF
में,
AEB
and
AFC
(प्रत्येक
90°)
A
=
A
(उभयनिष्ठ
कोण )
BE = CF (दिया
गया है)
ABE
ACF
(कोण-कोण
भुजा सर्वागसमता
के नियम)
(ii) AB = AC (CPCT से)






![]()
![]()
A का समद्विभाजक है।
BAD =
CAD
ADC =
ADB = 90°
AD = AD (उभयनिष्ठ भुजा)
इसलिए
ABD ![]()
ACD ( ASA सर्वांगसमता के नियम से
![]()
ABD और
ACE में,
AB = AC (दिया
गया है)
..(1)
B =
C
(समान भुजाओं
के सम्मुख कोण)
..(2)
साथ ही, BE = CD
इसलिए , BE – DE = CD – DE
BD =
CE
...(3)
इसलिए,
ABD ![]()
ACE
( (1), (2), (3) और SAS नियम
से )
AD =
AE
(CPCT)
ABC की भुजा BC का मध्य बिन्दु D इस प्रकार है कि
AD = AC
दर्शाइये कि AB > AD


AD = AC (दिया है
इसलिए

अब

इसलिए

या

या

इसलिए
या





A. समचतुर्भुज
B. आयत
C. समलम्ब चतुर्भुज
D. पतंग
एक समान्तर चतुर्भुज में, विपरीत भुजाएं समान और समान्तर होती है। इसलिए, यदि आसन्न भुजांए असमान है, तब समान्तर चतुर्भुज एक आयत होना चाहिए।

A. 68°
B. 69°
C. 70°
D. 71°