बफर स्टॉक को खाद्यान्नों के स्टॉक के रूप में जाना जाता है जिसे भारत सरकार भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से भविष्य में मांग की किसी भी कमी की पूर्ति के लक्ष्य के लिए एकत्र करती है।
बफर
स्टॉक
(मुख्यत चावल
और गेंहू) को
सरकार के
द्वारा
निम्न उद्देश्यों
के लिए बनाया
जाता है:
1. कमी वाले
क्षेत्रों
में वितरित
करने के लिए
2.
कम कीमतों पर
गरीबों में
वितरित करने
के लिए
3. प्राकृतिक
आपदाओं के
समय खाद्य
असुरक्षा की समस्या
को हल करना
गेहूं और चावल के न्यूनतम समर्थन मूल्य लगातार ही साल दर साल गेहूं और चावल उत्पादक राज्यों द्वारा उत्पन्न दबाव के कारण बढ़ रहे हैं।
न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं:
(I) गेहूं के और चावल के उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण किसान और मोटे अनाज की तुलना में चावल और गेंहू का उत्पादन अधिक करने लगे हैं
(Ii) चावल की खेती में अत्यधिक पानी के उपयोग से भूमि के जल स्तर में गिरावट आई है।
(Iii) उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण इन उत्पादों के बाजार में कीमतों में सामान्य वृद्धि हुई है।
वर्तमान में भारत में लगातार विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है अर्थात एक तरफ तो यहाँ पर खाद्यान्नों के भंडार हैं तो दूसरी तरफ भूख का लगातार बढ़ता हुआ आंकडा है। भारतीय खाद्य निगम में खाद्यान्नों का भडार अपने उच्चतम स्तर पर है, जो खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बीस मिलियन टन की सालाना आवश्यकता की तुलना में 62 मिलियन टन पर अब तक के अपने सबसे उच्चतम शिखर पर है। फिर भी लगभग 200 मिलियन लोगों को कम भोजन मिल रहा है और 50 मिलियन लोग भुखमरी की कगार पर हैं और मर रहे हैं। यह विरोधाभास वर्तमान नीति में कमियोंऔर क्रियान्वयन की अडचनों को बताता है।
खाद्य सुरक्षा से अभिप्राय है, सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की खाद्य उपलब्धता, पहुँच और उसे प्राप्त करने का सामर्थ्य | जीवित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक भोजन है।
भारत में अभी भी जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग खाद्य असुरक्षा से पीड़ित है।
· ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन लोग, छोटे रोजगार करने वाले, भिखारी, खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं।
· शहरी क्षेत्रों में अनियमित मजदूर, मौसमी गतिविधियों में काम करने वाले लोग और कम भुगतान देने वाले व्यवसायों में कार्यरत श्रमिक बुरी तरह से खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं।
सरकार ने देश में खाद्यान्नों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रणाली को बहुत ही सावधानी से बनाया है। इस प्रणाली में दो घटक हैं क- बफर स्टॉक ख- सार्वजनिक वितरण प्रणाली।
सरकार ने लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। उनमें से दो निम्न हैं:
1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरुस्त करना: इस प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1992 में देश के 1799 प्रखंडों में की गयी थी। इसका लक्ष्य था सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों को सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों में प्रदान करना। इस योजना के अंतर्गत गेंहू 2.80 रु. और चावल 3.77 रु. प्रति किलो पर प्रदान किया गया।
2. अन्त्योदय अन्न योजना: इस योजना को वर्ष 2000 में दिसंबर में आरम्भ किया गया था। यह गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों में से भी अत्यंत गरीब परिवारों के लिए थी। इस योजना के अंतर्गत 35 किलो अनाज बहुत ही कम मूल्यों पर उपलब्ध कराया गया गेंहू 2 रु. प्रति किलो तो चावल 3 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जाता है।
अन्त्योदय अन्न योजना को वर्ष 2000 में दिसंबर में आरम्भ किया गया था। इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे से रहने वाले एक करोड़ से अधिक अत्यधिक गरीब लोगों को लक्षित लाभार्थियों के रूप में चुना गया। गरीब परिवारों को संबंधित राज्य ग्रामीण विकास विभागों के द्वारा गरीबी रेखा के नीचे के सर्वे के द्वारा पहचाना गया। हर चुने गए परिवार को पच्चीस किलो अनाज बहुत ही कम मूल्यों पर उपलब्ध कराया गया | गेंहू 2 रु. प्रति किलो तो चावल 3 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया गया। अप्रैल 2002 से इसकी मात्रा को 25 किलो से बढ़ाकर 35 किलो कर दिया गया। इस योजना में जून 2003 और अगस्त 2004 में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले 50-50 लाख अतिरिक्त परिवारों को भी सम्मिलित किया और इस वृद्धि के बाद अन्त्योदय अन्न योजना में दो करोड़ से अधिक परिवार सम्मिलित हो गए हैं |
खाद्य सुरक्षा में खाद्यान्न प्रबंधन की भूमिका को समझते हुए भारतीय खाद्य निगम निम्न विषयों पर प्रयास कर रहा है:
· खाद्य सब्सिडी पर बोझ को कम करने के लिए विभिन्न को संसाधनों एक साथ लाना
· बेहतर वित्तीय और कोष प्रबंधन करना
· बेहतर शेयर और सूची प्रबंधन करना
· लाभ केन्द्रों का निर्माण करना
· कृषि विश्वविद्यालयों और प्रबंधन संस्थानों के साथ काम कर तकनीक को अद्यतन करना
· भंडारण और परिवहन में नुकसानों को कम करना
· कंटेनर के माध्यम से बहुआयामी परिवहन प्रणाली का प्रयोग करना
· सप्ताह में एक बार समर्पित गतिविधि योजनाओं के माध्यम से सूक्ष्म स्तर सूची प्रबंधन
· छवि की धारणा में सुधार के लिए प्रभावी कॉर्पोरेट तकनीकों को अपनाना
A.
किसानों को कानूनी सहायता
B.
किसानों को वित्तीय सहायता
C.
किसानों को न्यायिक सहायता
D.
किसानों के लिए संभावित सहायता
इसका उद्देश्य सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक अनियमितता के कारण फसल के ख़राब होने की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
A.
एक आधुनिक मिट्टी संरक्षण विधि
B.
एक ऐतिहासिक जल संरक्षण संरचना
C.
एक पारंपरिक जल संचयन संरचना
D.
एक पारंपरिक मिट्टी संरक्षण विधि
पारंपरिक जल संचयन संरचना नहर, टैंक, आदि के रूप में पानी के संरक्षण के लिए एक पारंपरिक पद्धति है। गुजरात में इसे 'झालरा ' कहा जाता है। इसका निर्माण सामुदायिक उपयोग और धार्मिक संस्कारों के लिए होता है। ये भूतल जल राशियाँ हैं, जो आस-पास के क्षेत्रों में पानी की आसान और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाए जाते हैं, जो आकार में आयताकार होते हैं और जिनकी टंकी के तीन तरफ सीढियाँ बनी होती हैं।
A.
दक्षिण-पूर्व मानसून मौसम
B.
उत्तर-पूर्व मानसून मौसम
C.
उत्तर-पश्चिम मानसून मौसम
D.
दक्षिण-पश्चिम मानसून मौसम
भारत असंख्य बड़ी और छोटी नदियों का देश है, जिनमें मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में बाढ़ आते हैं। यह मौसम देश में प्रमुख वर्षा काल होता है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी कुछ नदियों के शिखर अवतारण बहुत ऊँचे होते हैं। देश हर साल कम से कम एक क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ का सामना करता है, जिसके कारण जीवन और संपत्ति का भारी नुकसान होता है।
A.
चक्रवात
B.
भूस्खलन
C.
बाढ़
D.
आग
बड़ा विस्तार और निम्न वायुमंडलीय दाब के शांत केंद्र के चारों ओर चक्कर काटती तेज पवनें चक्रवात कहलाती हैं। एक कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ता रहता है। इसकी गति प्रायः 50 कि.मी. प्रति घंटा होती है। उदाहरण के लिए, ओड़िशा में 1993 में आए परम चक्रवात की हवा की गति 260-300 किमी/घंटा थी।
A.
सुनामी
B.
चक्रवाती तूफ़ान
C.
भूकंप
D.
संकट
अपनी प्रकृति से, संकट में कुछ ऐसा शामिल होता है जो संभवत: किसी व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य, संपत्ति और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। यह भूकंप, चक्रवात, आग, भूस्खलन, आदि के रूप में हो सकता है।
A.
यांत्रिक संरचनाएँ
B.
इंजीनियरी संरचनाएँ
C.
भूमि उपयोग नियंत्रण
D.
सुरक्षित एवं संभावित संरचनाएँ
चक्रवात के मामले में इंजीनियरी संरचनाएँ एक महत्त्वपूर्ण मंदन उपकरण हैं। इमारतों का निर्माण पृथ्वी के ऊंचे हिस्से पर किया जाना चाहिए। बाढ़ एवं हवा से बचने के लिए मकानों को मजबूत किया जा सकता है।
भारत में निर्धनता पिछले कुछ वर्षों में काफी कम हो गयी है। गरीबी को हटाना/ निर्धनता उन्मूलन सरकार के मुख्य उद्देश्यों में से एक रहा है। भारत में निर्धनता-निरोधी रणनीति मोटे तौर पर दो कारकों पर निर्भर करती है:
(1) आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन
(2) लक्षित निर्धनता-निरोधी कार्यक्रम।
कुछ मुख्य लक्षित निर्धनता निरोधी कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
· प्रधानमंत्री रोज़गार योजना: इसे वर्ष 1993 में शिक्षित नौकरीपेशा युवाओं के लिए स्व- रोज़गार अवसरों का निर्माण करने के लिए बनाया गया था।
· प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना: इसे वर्ष 2000 में स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का निर्माण करने के लिए आरम्भ किया गया था।
· काम के बदले अनाज योजना: इसे वर्ष 2004 में ऐसे ग्रामीण लोगों के लिए आरंभ किया गया था जो अकुशल हाथ से करने वाlले काम और मजदूरी के बदले काम तलाश रहे थे।
· राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम: इसे वर्ष 2006 में आरंभ किया गया था और इसमें हर ग्रामीण परिवार के लिए कम से कम वर्ष में 100 दिनों का सुनिश्चित रोज़गार का प्रावध था, इसमें लगभग 200 जिले सम्मिलित थे।
भारत में निर्धनता कई अन्य आर्थिक समस्याओं का भी मुख्य कारण हैं। निधानता के मुख्य प्रभाव हैं:
1. निम्न साक्षरता स्तर:गरीब/निर्धन लोगों के पास अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने के लिए अधिक धन नहीं होता है। वे अपने बच्चों को पढने के लिए स्कूल नहीं भेजते हैं और अर्थव्यवस्था का साक्षरता स्तर कम होता है।
2. उच्च जनसँख्या वृद्धि दर: निर्धन लोगों का यह सोचना होता है कि जितने अधिक बच्चे होंगे उतना ही काम करने वाले हाथ होंगे, जिससे जनसंख्या में वृद्धि होती है।
3. खराब स्वास्थ्य: निर्धन लोग स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक खर्च नहीं कर पाते हैं, निर्धनता से कुपोषण की समस्या भी उत्पन्न होती है।
4. कम उत्पादकता: गरीब लोगों के पास कार्य करने के लिए उचित कौशल और पोषण का अभाव होता है, तो जो लोग स्वस्थ और कुशल नहीं होंगे वे कुशलता से कार्य भी नहीं कर सकेंगे।
निम्नलिखित कारणों के कारण भारत में निर्धनता उन्मूलन एक सबसे बाध्यकारी चुनौती बनी हुई है:
जब कोई व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे रोटी, कपडा और मकान को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पाता है और उसकी आय एक नियत स्तर से कम होती है तो उसे निर्धन माना जाता है।
भारत में निर्धनता के मुख्य कारण हैं:
1. निम्न आर्थिक संवृद्धि: इससे लोगों की आय कम रहती है और उनके पास नौकरी के कम अवसर होते हैं।
2. जनसंख्या की उच्च दर: जनसंख्या की उच्च दर से दुर्लभ प्राकृतिक स्रोतों पर बोझ बढ़ता है, जिससे निर्धनता बढ़ती है।
3. नौकरी के अवसरों का अभाव: लोगों को नौकरी के उचित अवसर नहीं मिल पाते हैं और वे बेरोजगार रहते हैं जिससे निर्धनता की समस्या में वृद्धि होती है।
4. आय में असामनता: धन के वितरण में असमानता से अमीरों और गरीबों के बीच अंतर बढ़ता है। जिससे समाज के निर्धन लोग और निर्धन हो जाते हैं।
5. निरक्षरता: यह भारत में निर्धनता के मुख्य कारणों में से एक है।
A.
कृषि क्रान्ति
B.
श्वेत क्रांति
C.
स्वर्ण क्रान्ति
D.
हरित क्रांति
बीजों की उच्च फसल प्रजातियों के आने से, उर्वरकों के बढे हुए प्रयोग से और उचित सिंचाई सुविधाओं ने भारत में और ख़ास तौर पर गेंहू और चावल जैसे अनाजों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है ।
A.
अरुणाचल प्रदेश
B.
महाराष्ट्र
C.
बिहार
D.
आन्ध्र प्रदेश
अन्य खाद्यान्न उत्पादन करने वाले प्रदेश हैं पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और कुछ हद तक पश्चिम बंगाल |
A.
स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए
B.
कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों के लिए
C.
शहरी श्रमिकों के लिए
D.
ग्रामीण महिलाओं के लिए
भोजन और पोषण की स्थिति को बेहतर करने के लिए भारत सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना का आरंभ कक्षा 1 से 5 तक स्कूल जाने वाले सभी बच्चों के लिए लागू की है ।
A.
नेस्ले इंडिया
B.
मदर डेरी
C.
गोपाल डेरी
D.
अमूल डेरी
अमूल डेरी या गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ राज्य आधारित दुग्ध सहकारिता की एक इकाई है। इसका प्रमुख लक्ष्य है किसानों को लाभ पहुंचाना है ।
A.
गुजरात
B.
महाराष्ट्र
C.
आन्ध्र प्रदेश
D.
उत्तर प्रदेश
महाराष्ट्र में एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस गैर सरकारी संगठनों को अनाज बैंक स्थापित करने में सहायता करती है। यह गैर सरकारी संगठनों के लिए खाद्य सुरक्षा पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम और प्रशिक्षण का आयोजन करती है।
A.
1 किग्रा
B.
2 किग्रा
C.
3 किग्रा
D.
5 किग्रा
भारत में अखिल भारतीय स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के द्वारा वितरित अनाज का औसत उपभोग वर्ष 2013 के अनुसार 1 किग्रा है। कुछ राज्यों में जैसे बिहार, ओडिशा, और उत्तर प्रदेश में यह राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है।
A.
अकाल
B.
भुखमरी
C.
दीर्घकालिक भुखमरी
D.
खाद्य सुरक्षा
आम तौर पर निर्धन नागरिक ही इस प्रकार की भुखमरी से पीड़ित होते हैं क्योंकि उन्हें अपनी दैनिक खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त आय प्राप्त नहीं होती है।
A.
दुकानदार
B.
निर्माण श्रमिक
C.
भिखारी
D.
बस चालक
शहरी क्षेत्रों में, निर्माण श्रमिक सबसे अधिक मौसमी भुखमरी से प्रभावित होते हैं, क्योंकि बारिश के आने से निर्माण श्रमिक बेरोजगार हो जाते हैं।
A.
धान और गन्ना
B.
गेंहू और चावल
C.
ज्वार और बाजरा
D.
तिल और बाजरा
स्वतंत्रता के बाद भारत ने खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कई कदम उठाए। हरित क्रांति मुख्यत: दो फसलों गेंहू और चावल के उत्पादन से सम्बन्धित थी।
A.
साख
B.
सहायिकी
C.
निवेश
D.
कीमत
सहायिकी वह भुगतान है जो एक सरकार किसी वस्तु के बाज़ार मूल्य की अनुपूर्ति करने के लिए उत्पादकों को दी जाती है।
A.
बंगाल
B.
महाराष्ट्र
C.
ओडिशा
D.
बिहार
भारत में अब तक का सबसे भयानक अकाल बंगाल में वर्ष 1943 में पड़ा था। इस अकाल से बंगाल के क्षेत्र में लगभग तीस लाख लोगों की मृत्यु हो गयी थी।
A.
जिला प्रशासक
B.
जिलाधिकारी
C.
राज्यपाल
D.
मुख्यमंत्री
जिलाधिकारी जिला स्तर पर मुख्य अधिकारी होता है और उसके पास ही काम के बदले खाद्यान्न कार्यक्रम के लिए योजना बनाने, क्रियान्वयन और निरीक्षण के समस्त उत्तरदायित्व होते हैं।
A.
खाद्यान्नों के वितरण की
B.
बफरस्टॉक को बिक्री करने की
C.
सरकार की खाद्यान्नों की वसूली अनुरक्षण
D.
कृषि उत्पादन की
परिवहन लागतों का बढ़ना न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढने में एक और कारक है। इस प्रकार भारतीय खाद्य प्राधिकरण से खाद्यान्न खरीदने की लागत में वृद्धि हुई है।
लंबे समय तक मात्रा या / और गुणवत्ता के आधार पर अपर्याप्त आहार ग्रहण करने के कारण भूख की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसे दीर्घकालिक भूखमरी कहते है |
A.
कम आय वाले
लोग भोजन
खरीदने में
अक्षम होते
हैं
ग्रामीण क्षेत्रों
में मौसमी भुखमरी
कृषि की
मौसमी
गतिविधियों
के कारण पाई
जाती हैं।
मौसमी
भुखमरी कृषि
उत्पादन के चक्रों
से और खेती से
सम्बन्धित
होती है।
सार्वजनिक
वितरण
प्रणाली B.
एकीकृत बाल
विकास
सेवायें C.
काम के
बदले अनाज
कार्यक्रम D.
आधार
योजना
आधार योजना
पहचान पत्र
से सम्बंधित
योजना है |
सूखा
B.
बाढ़
C.
आग
D.
इमारत
का ढहना
बार-बार
सूखे की
समस्या को
नहरों की
खुदाई करके,
मेड़ बनाकर,
वृक्षारोपण
आदि से दूर
किया जाता है। उदाहरण
के लिए, महाराष्ट्र
का रालेगांव
सिद्धी
गाँव, समुदाय
द्वारा
किए गए एक अविश्वसनीय
प्रयास
को
दिखाता है।
आत्मनिर्भरता
और
आत्मविश्वास
B.
जागरूकता
एवं तैयारी C.
तकनीकी
ज्ञान D.
सामाजिक-आर्थिक
स्थिति
सामुदायिक
प्रयास और
सहयोग संकट
की गंभीरता को
कम कर सकते
हैं। उदाहरण
के लिए, यदि लोग
वनस्पति के
महत्व के
बारे में
जानेंगे, तो वे
उसे नष्ट
नहीं करेंगे
और इससे
सुरक्षित भारत
बनाने में
मदद मिलेगी। बड़े
वनस्पति
क्षेत्र
पर्यावरणीय
खतरों के प्रभाव
का सामना कर
सकते हैं।
भारत
का
केन्द्रीय
जल आयोग B.
राष्ट्रीय
ग्रामीण
विकास
एजेंसी C.
भारतीय
मौसम विभाग D.
भारतीय
प्रौद्योगिकी
संस्थान
भारतीय
मौसम विभाग
सम्पूर्ण
भारत के लिए
मौसम
रिपोर्ट,
मौसम चार्ट,
उपग्रह
चित्र, वर्षा
मानचित्र की
चेतावनी
प्रदान करता
है। संभावित
खतरनाक
स्थितियों
से अवगत होना
बहुत आवश्यक
है।
कंक्रीट
आधारित B.
हल्की C.
भारी
D.
तकनीक
आधारित
उन
इमारतों को
कमजोर माना
जाता है जो
तेज हवाओं के
बल का सामना
नहीं कर सकती
हैं। आमतौर
पर लकड़ी की
फ्रेम वाली हल्की
संरचनाएँ
सबसे
असुरक्षित
होती हैं, विशेषकर
उन मामलों
में जहाँ
पुरानी
इमारतों में
लकड़ी ख़राब हो
गई है। गैर-सुदृढ़
और बेकार
तरीके
से तैयार
किए गए कंक्रीट
के खण्डों
से जो भवन बनाए जाते हैं, वे भी असुरक्षित
होते
हैं।
पर्वतीय
एवं पहाड़ी
क्षेत्र B.
मैदान
C.
पठार
D.
द्वीप
भूस्खलन,
पहाड़ी
इलाकों जैसे
उत्तर-पूर्वी
क्षेत्र, पश्चिमी
घाट और
हिमालय जैसे
क्षेत्रों
की प्रमुख
प्राकृतिक
आपदाएँ हैं। ये
जीवन एवं
संपत्ति को
भारी नुकसान
पहुंचाते
हैं।
भूमि
उपयोग की
योजना B.
भूमि
उपयोग
मानचित्रण C.
पारंपरिक
जल संरक्षण
योजना D.
सूखा
जागरूकता
कार्यक्रम
उचित
भूमि उपयोग
की योजना
इसकी क्षमता
पर आधारित
होती है, जो
भूमि और जल के सर्वोत्तम
उपयोग में
मदद करती है
और दुरुपयोग
एवं
कुप्रबंधन
के कारण
अनुचित मांग
को रोक सकती
है।
आकस्मिक
बाढ़ B.
बाढ़
C.
बाढ़ D.
जंगल
आग
बाढ़
धीरे-धीरे आ
सकती है या
अचानक आ सकती
है। आकस्मिक
बाढ़ के मामले
में, आमतौर पर
कोई चेतावनी
अवधि नहीं
होती है। बाढ़
के बारे में
जानकारी
प्रसारित
करने के लिए
केन्द्रीय
जल आयोग और
कुछ अन्य
सरकारी विभाग
उत्तरदायी
हैं।
वनीकरण
B.
मृदा
संरक्षण C.
बाँध
निर्माण D.
जल
नियंत्रण
संरचनाओं का
अतिक्रमण
भूस्खलन,
बाँध टूटने,
तटबंधों और
नहरों की अनुपयुक्त
इंजीनियरिंग
डिजाइन
द्वारा नदी
मार्ग में
अवरोध पैदा
होने से बाढ़
आती है।
दूरदर्शन B.
रेडियो
चैनल C.
सरकारी
संस्थाएँ D.
प्रभावित
लोग
वायु
सेना, नौसेना
और सेना जैसी
सरकारी
एजेंसियां
प्राकृतिक
खतरों जैसे-
बाढ़, चक्रवात,
भूकंप,
आदि के दौरान
महत्वपूर्ण
भूमिका
निभाते हैं। वर्ष
2002 में असम और बिहार
में राहत कार्य
भारतीय
वायु
सेना
द्वारा
किए गए थे। इन्होंने
भोजन,
कपड़े,
दवाइयों,
आदि के रूप
में गांवों
को राहत
सहायता
प्रदान की
थी।
बाढ़
के मैदान B.
जंगली
क्षेत्र C.
बाढ़
जल D.
जलाशय
बाढ़
के मैदानों
का
मानचित्रण, बाढ़
के जोखिम को
कम करने में
पहला चरण है। यह
एक
महत्वपूर्ण
मंदन उपकरण
है। मानचित्रण
का मुख्य
उद्देश्य
बाढ़ के
मैदानों और
अन्य अति
संवेदनशील
क्षेत्रों
की पहचान
करना और आपदा
के प्रभाव की
सीमा का आकलन
करना है।
संकट
तैयारी B.
संकट
जागरूकता C.
आपदा
जागरूकता D.
आपदा
तैयारी
यह
एक ऐसा
क्रियाकलाप
है, जो आपदा के
प्रभाव को कम
कर देता है,
क्योंकि
इसमें किसी
आने वाली आपदा
से पहले
सावधानी
बरती जाती है। उदाहरण
के लिए सूखे
की स्थिति को
स्थानीय समुदाय
द्वारा
संभाला जा
सकता है। वे
पर्यावरण-
अनुकूल
तरीके जैसे-
वृक्षारोपण, वनस्पति
संरक्षण, आदि
अपना सकते
हैं।
संरचनात्मक
मंदन B.
गैर-संरचनात्मक
मंदन C.
बाढ़
नियंत्रण
उपाय D.
जल-संभर
प्रबंधन
प्रणाली
यह
बाढ़ के जोखिम
को कम करने का
प्रथम चरण है। बाढ़
का
पूर्वानुमान,
चेतावनी और
भूमि उपयोग नियंत्रण
भी
गैर-संरचनात्मक
मंदन के
हिस्से हैं।
चक्रवात
क्षेत्र
मानचित्रण B.
संकट
मानचित्रण C.
चक्रवात
आपदा विधि D.
चक्रवात
मानचित्रण
विधि
संकट
मानचित्रण
में किसी भी
साल में आए
चक्रवातों से
असुरक्षित
क्षेत्रों
को दिखाया जा
सकता है। यह
मंदन
का
एक
प्रभावशाली
साधन है।
14 नवम्बर, 2007 को, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चक्रवात की चेतावनी जारी की गयी थी। यह चेतावनी इसलिए जारी की गई क्योंकि इन हिस्सों में ‘सिद्र’ नाम के चक्रवात के पहुँचने की संभावना थी।
मंदन
एक ऐसे कार्य से
सम्बंधित है जिससे
आपदाओं के कारण
लोगों और संपत्ति
के नुकसान की तीव्रता
कम हो जाती है।
बाढ़ के लिए
दो मुख्य मंदन
कार्यनीतियाँ
हैं:
तैयारी
उपाय के दो घटक
हैं: 2. समुदाय/स्कूल/व्यक्ति
के लिए आपदा प्रबंधन
की योजना तैयार
करना।
यह
सुनिश्चित करने
का उपाय है कि समुदाय
और सेवाएँ आपदा
के प्रभाव से मुकाबला
करने में सक्षम
हैं।
भूस्खलन, बाढ़, सूखा और आग
सामाजिक-प्राकृतिक
संकट हैं।
संकट
प्राकृतिक या
मानवनिर्मित
एक खतरनाक स्थिति
या घटना है, जिससे
जीवन, संपत्ति, आजीविका
या पर्यावरण का
नुकसान हो सकता
है।
B.
सरपंच
C.
पंचायत
के सचिव D.
डॉक्टर
गाँव
में आपदा
प्रबंधन
समिति में
स्थानीय लोगों
को शामिल
किया जाता है,
क्योंकि वे
अपने क्षेत्र
से जुड़ी
समस्याओं के
बारे में
अधिक जागरूक
होते हैं। इसकी
अध्यक्षता
गाँव के सरपंच
द्वारा की
जाती है।
समुद्र
का किनारा B.
आड़
की जगह का
किनारा C.
कूप-स्थल
D.
तालाब-स्थल
समुद्री
तट को सुखपार
का सबसे अधिक
महत्वपूर्ण
प्राकृतिक
लक्षण माना
गया। इसके
आधार पर, गाँव
की सीमा और
गाँव के
महत्वपूर्ण
स्थान चिह्नित
किए गए थे।
उत्साह B.
दिखावट C.
विकास
D.
संसाधन
सुखपार
गाँव पूरी
तरह से बदल
गया क्योंकि
लोग अधिक
आत्मविश्वास
समुदाय वाले
बन गए।
आधुनिक
विधि B.
तकनीकी
विधि C.
वैज्ञानिक
विधि D.
पारंपरिक
विधि
एक
पारंपरिक
सामना तंत्र
के बारे में
पहले से ही
लोगों को पता
होता है। लोग अपने संचित
ज्ञान,
कौशल
और समुदाय के
संसाधनों के
आधार पर
पारंपरिक
तरीकों से
आपदाओं से
निपट सकते
हैं।
रंगोली
B.
मानचित्र
C.
राजनीतिक
मानचित्र D.
सामाजिक
मानचित्र
सुखपार गाँव
के मानचित्र
में गाँव और
कुटुंब के
असुरक्षित
खण्डों को दर्शाया
गया, जिनमें
बीमार तथा
अस्वस्थ,
छोटे बच्चे,
बूढ़े, आदि लोग
रहते हैं।
पुलिस
B.
स्वयंसेवक
C.
बच्चे
D.
बूढ़े
लोग
युवा
स्वयंसेवक
अपनी
कार्रवाई
में अधिक उर्जावान
और फुर्तीले
होते हैं। उन्हें
शामिल करना
हमेशा
उपयोगी होता
है, क्योंकि
वे अधिकतम
सहायता के
स्रोत होते हैं।
B.
खंड
(ब्लॉक) विकास
अधिकारी C.
खंड
(ब्लॉक) विभाग
अधिकारी D.
मूल
विकास
अधिकारी
ब्लॉक
भारत में एक
प्रशासनिक
प्रभाग है। खंड
(ब्लॉक) विकास
अधिकारी
ब्लॉक का
अधिकारी
होता है। खंड
(ब्लॉक) विकास
अधिकारी
खंडों की
योजना और विकास
से संबंधित
सभी
कार्यक्रमों
के कार्यान्वयन
की निगरानी
करते हैं।
तट B.
पर्वत
C.
नदियाँ
D.
पठार
सुनामी
समुद्र की
नीचे आने
वाला एक
भूकंप है, इसलिए
इसका सबसे
पहले प्रभाव
तट पर पड़ता है।
B.
एनजीओ
की क्षमता
में वृद्धि C.
स्थानीय
समुदाय की
क्षमता में
वृद्धि D.
कार्य
करने वालों
की क्षमता
में वृद्धि
संयुक्त
राष्ट्र
विकास
कार्यक्रम
(यूएनडीपी) के
समर्थन से
तमिलनाडु
सरकार ने
आपदा जोखिम प्रबंधन
कार्यक्रम
शुरू किया
था। कार्यक्रम
का मुख्य
उद्देश्य
स्थानीय
समुदाय
की क्षमता
में वृद्धि
के लिए उन्हें खोज
एवं बचाव,
प्रारंभिक
चेतावनी, आदि
पर
प्रशिक्षण
प्रदान करना
था।
आपदा
प्रबंधन
समिति (डीएमसी)
की बैठक में, शीला
ने लोगों के
प्रशिक्षण
के बारे में
पूछा, जिससे
समिति की
सदस्यों को
अधिक
आत्मविश्वास
मिल सके। गाँव
के लोगों के
प्रशिक्षण
में खोज और
बचाव, अग्निशमन,
आदि शामिल
हों जिससे वे
बेहतर तरीके
तैयार हो
सकें।
B.
पूर्वी
तट C.
उत्तरी
भाग D.
पश्चिमी
भाग
26
दिसंबर, 2004 को 00:58:53 बजे
आई सुनामी का
केंद्र सुमात्रा
और
इंडोनेशिया
का पश्चिमी
तट था। भूकंप के
बाद लगभग दो
घंटे बाद
सुनामी
भारतीय मुख्य
भूमि से
टकराई। लहरों
ने पूरी तरह से गाँवों
को समतल बना दिया और दक्षिणी
तट पर तबाह हुए शहरों
में 9,000 से
अधिक मौतें
हुईं।
व्यापारी
B.
मछुआरा C.
राजनीतिज्ञ
D.
सामाजिक
कार्यकर्ता
26
दिसंबर, 2004 को
भारत के
दक्षिणी तट
पर विशाल
सुनामी तरंगें
टकराई थी। सबसे
गरीब
जो मुख्य
रूप से मछली पकड़ने
वाले
समुदाय
के लोग थे, को इस आघात का सामना
करना
पड़ा।
प्रथम
जवाबी
कार्यवाही B.
विलंबित
जवाबी
कार्यवाही C.
द्वितीयक
जवाबी
कार्यवाही D.
अंतिम
जवाबी
कार्यवाही
आपदा
के तुरंत बाद
और तत्काल, पड़ोसी
या समुदाय के
लोग सबसे
पहले जवाबी
कार्यवाही करते
हैं। प्रभावित
लोगों
के लिए स्थानीय
प्राधिकारियों
या गैर-सरकारी
संगठनों
(एनजीओ)
की कार्यवाही
में देर लग सकती है।
व्यक्तियों
की क्षमता
में वृद्धि B.
असुरक्षा
में वृद्धि C.
क्षमता
निर्माण को
कम करना D.
क्षतिग्रस्त
इमारतों का
पुनर्निर्माण
क्षमता
निर्माण को
जोखिम से
निपटने के
लिए किए गए
कार्यों के
सेट के रूप
में
परिभाषित
किया जाता
है। सामाजिक,
सांस्कृतिक,
आर्थिक
और भौतिक
कारकों की
सीमा से
निपटने के लिए
लोगों की
क्षमता में
वृद्धि करके
आपदा-प्रवण
क्षेत्रों
में जोखिम कम
किया जा सकता
है।
26 दिसंबर, 2007 B. 26 दिसंबर, 2006 C. 26 दिसंबर, 2005 D. 26 दिसंबर, 2004 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सूनामी लहर ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में भारी तबाही मचाई थी| भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित कुछ और देशों में लाखों लोग मारे गए. लहरों ने थाइलैंड, मेडागास्कर, मालदीव, मलेशिया, म्यांमार, सेशेल्स, सोमालिया, तंजानिया, केन्या, बांग्लादेश तक भी असर डाला|
आपदा
खतरे को कम करने
के लिए, समुदायों द्वारा
योजना बनाने की
प्रक्रिया में
मार्गदर्शन और
उसे सुगम बनाने
में छात्र और शिक्षक
महत्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं।
संकटों
के प्रभावी मंदन
के लिए समुदाय
को मिलकर कार्य
करने और सरकार
के साथ पहल करने
की आवश्यकता होती
है।
आपदा
आने के प्रथम कुछ
घंटे और बाद के
कुछ घंटे जीवन
को बचाने और चोटों
को और अधिक न बढ़ने
देने के लिए बहुत
नाजुक और बहुमूल्य
होते हैं।
खंड
विकास अधिकारी
(बीडीओ) उप जिला
स्तर पर प्रशासनिक
इकाई का प्रमुख
होता है।
एनजीओ या स्वयं
सेवी संस्था, एक
ऐसा सामाजिक स्वैच्छिक
संगठन होता है
जिसके बैनर तले
सामाजिक कार्यकर्ता, व्यक्तियों
का समूह, समुदाय, नागरिक, वोलंटीयर्स
आदि जन सेवक समाज
के कल्याण और विकास
के लिए कार्य करते
हैं आवेशों के संरक्षण के नियम के अनुसार B. मशीनों के घिसने में। C. किसी निकाय की गति को मंद करने में। D. स्नेहक उत्पन्न करने में। स्नेहक, घर्षण को कम करने के लिए एक विधि है। क्योंकि, इसका चिकनापन संपर्क में निकायों की सतहों और घर्षण को कम कर देता है। घर्षण, एक निकाय की दूसरे निकाय पर गति का विरोध करता है। यह विरोध निकाय की गति को मंद कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप, ऊष्मा उत्पन्न होती है। जिससे, मशीनों के भाग घिस जाते हैं।
B. सर्पी घर्षण। C. तरल घर्षण। D. घूर्णी घर्षण। जब कोई समतल सतह का निकाय, ठोस समतल सतह पर गति करता है, तो वह घर्षण बल जो कार्यरत होता है, सर्पी घर्षण कहलाता है।
B. सतह की नमी। C. सतह के खुरदुरे पर को बढ़ाकर। D. निकायों के बीच दूरी को कम कर। घर्षण, स्नेहकों जैसे:- जल, तेल, आदि के उपयोग से कम किया जा सकता है। क्योंकि, दो सतहों के बीच संपर्क क्षेत्रफल पर स्नेहक के कारण इनके बीच घर्षण कम हो जाता है।
B. सर्पी घर्षण। C. तरल घर्षण। D. घूर्णी घर्षण। जब कोई निकाय किसी तरल पदार्थ के माध्यम से गुजरता है, तो यह तरल पदार्थ (अर्थात्, गैस तथा द्रव) के कारण विरोधी बल अनुभव करता है। जो तरल घर्षण कहलाता है।
B. निकाय के आकार। C. तरल की प्रकृति। D. तरल के रंग। तरल घर्षण केवल निर्भर करता है:- (i) तरल के सापेक्ष निकाय की चाल पर (ii) निकाय के आकार पर(iii) तरल की प्रकृति पर।
B. चुम्बकीय बल। C. घर्षण बल। D. गुरुत्वाकर्षण बल। वायुमंडल में उल्का के जलने का कारण घर्षण बल है, क्योंकि घर्षण, ऊष्मा उत्पन्न करता है।
B. टायर तथा सड़क के बीच घर्षण में कमी। C. टायर तथा सड़क के बीच घर्षण को प्रभावित नहीं करती है। D. टायरों को अच्छा बनाती है। टायरों में धारियाँ, धरातल के साथ अच्छी पकड़ प्रदान करती है। अर्थात्, सम्पर्क क्षेत्रफल में वृद्धि के परिणामस्वरूप घर्षण में वृद्धि होती है।
B. आसान है। C. एक सामान है। D. बहुत आसान है। टाइल की चिकनी सतह की तुलना में दरी की खुरदरी सतह अधिक से अधिक घर्षण बल प्रदान करती है।
घर्षण बल का बड़ा परिमाण, एक भारी बॉक्स को खींचने या धक्का मारने के लिए कठिन बना देता है।
B. चिकनाई द्वारा। C. बॉल बेयरिंग के उपयोग द्वारा। D. यदि सम्पर्क क्षेत्रफल कम है। चिकनाई द्वारा, पॉलिश द्वारा तथा बॉल बेयरिंग के उपयोग से दो निकायों के बीच घर्षण को कम किया जा सकता है।
B. असम्पर्क बल। C. पेशीय बल। D. पृथ्वी द्वारा आरोपित बल। घर्षण बल एक प्रकार का संपर्क बल है जिसमें निकाय बल अनुभव करते हैं जब वे एक - दुसरे के साथ भौतिक संपर्क में होते हैं ।
B. कम हो जाता है। C. समान रहता है। D. शून्य हो जाता है। पानी, सतह को चिकना बनाता है इस प्रकार, यहाँ घर्षण बिना पानी की सड़क की तुलना में कम हो जाता है। पानी सतह को चिकना बनाता है और इसलिए, कार फिसल जाती है।
B. नीचे की ओर। C. दाईं ओर। D. बाईं ओर। घर्षण बल हमेशा आरोपित बल की दिशा के विपरीत कार्यरत होता है। इसलिए, जब बल नीचे की दिशा में कार्यरत होता है, तो ऊपरी दिशा में कार्यरत होता है।
B. धीरे से दबाया जाता है। C. बिना स्पर्श किए छोड़ दिया जाता है। D. सिर्फ स्पर्श किया जाता है। यदि दो सतहों को अधिक बल लगाकर दबाया जाता है, तो घर्षण बल में वृद्धि हो जाएगी। क्योंकि, अनियमितताओं का अन्तः बंधन हो जाता है। यह चटाई को दो परिस्थितियों में खींचकर अनुभव किया जा सकता है। जब इस पर कोई भी नहीं बैठा हुआ है और जब इस पर कोई व्यक्ति बैठा हुआ है।
B. सर्पी घर्षण। C. घूर्णी घर्षण। D. तरल घर्षण। साईकिल के हब तथा एक्सल के बीच बॉल बेयरिंग का उपयोग घूर्णी घर्षण का एक उदाहरण है, क्योंकि, घूर्णी घर्षण, सर्पी घर्षण की तुलना में कम होता है। इसलिए, अधिकतर मशीनों में सर्पण, बॉल बेयरिंग के घूर्णन द्वारा परिवर्तित कर दिया जाता है।
B. घर्षण। C. चुम्बकीय बल। D. सतहों के चिकनेपन के कारण। जब दो निकाय एक - दुसरे के सापेक्ष गति करते है, तो घर्षण उत्पन्न होता है। यह दो सतहों की सापेक्षिक गति का विरोध करता है। इसलिए, एक गतिशील निकाय बाह्य बल की उपस्थिति में, घर्षण बल के कारण कुछ समय बाद रुक जाएगा।
B. रेत तथा बजरी। C. ग्रीज़। D. सुगन्धित पाउडर। जब रेत तथा बजरी किसी दलदल धरातल पर छिड़की जाती है, तो सतह खुरदुरी हो जाती है। घर्षण बल खुरदुरी सतह पर अधिक होता है।
B. आकर्षण। C. संकुचन। D. गुरुत्वाकर्षण। एक बल जो हमेशा आरोपित बल के विपरीत होता है, घर्षण बल कहलाता है। इसलिए, यह गतिशील निकाय को रोक या मंद कर सकता है।
B. गर्म। C. कमजोर। D. भयभीत। जब आप अपनी हथेली को रगड़ते है, तो आप गर्म अनुभव करते हैं क्योंकि, घर्षण, ऊष्मा उत्पन्न करता है।
B. पैसा। C. ऊर्जा। D. पदार्थ। घर्षण, ऊष्मा उत्पन्न कर सकता है। जब कोई मशीन संचालित होती है, तो घर्षण के कारण उत्पन्न ऊष्मा के कारण, ऊर्जा की बहुत अधिक मात्रा में हानि होती है। इस प्रकार, हमें घर्षण को कम करना आवश्यक है।
रेल दुर्घटनाओं मुख्य कारण निम्न हैं: 1. रखरखाव की कमी के कारण पटरी से उतरना। 2. मानव त्रुटि या तोड़-फोड़ 3. ईंधन तेल जैसे खतरनाक माल का परिवहन
अग्नि संकट
आकलन के लिए तीन
महत्वपूर्ण लक्षण
निम्नलिखित हैं: 1.
क्षति
के व्यक्तिगत
दावों का प्रक्रमण
करना| 2.
मानव
जीवन के लिए नुकसान, हानि और चोट| 3.
आग
के प्रति बीमा
कार्य|
(i) समुदाय
को खतरनाक प्रतिष्ठानों
तथा दुर्घटना
के समय बचाव के
तरीकों की जानकारी
होनी चाहिए।
खतरे
को कम करने के कुछ
संभावित उपाय
नीचे दिए गए हैं:
खतरनाक
सामग्री या पदार्थ
निम्नलिखित स्रोतों
से मुक्त होते
हैं:
जैविक
आयुधों को “गरीबों का
नाभिकीय बम” कहा जाता
है, क्योंकि: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
1. बाढ़
के मैदानों का
मानचित्रण
2. भूमि
उपयोग नियंत्रणSOLUTION
1. समुदाय
जागरूकता और शिक्षाSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A.
नागरिक
सेवक SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
खंड
(ब्लॉक) आपदा
अधिकारीSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
सरकारी
एजेंसियों
की क्षमता
में वृद्धि SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: DSOLUTION
A.
दक्षिणी
समुद्री तट SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. ऊष्मा उत्पन्न करने में।SOLUTION
A. स्थैतिक घर्षण।SOLUTION
A. निकाय के द्रव्यमान को बढ़ाकर।SOLUTION
A. स्थैतिक घर्षण।SOLUTION
A. निकाय की चाल।SOLUTION
A. स्थिरवैद्युत बल।SOLUTION
A. टायर तथा सड़क के बीच घर्षण में वृद्धि।SOLUTION
A. कठिन है।SOLUTION
A. पॉलिश द्वारा।SOLUTION
A. सम्पर्क बल।SOLUTION
A. बढ़ जाता है।SOLUTION
A. ऊपर की ओर।SOLUTION
A. अधिक बल से दबाया जाता है।SOLUTION
A. स्थैतिक घर्षण।SOLUTION
A. वेग।SOLUTION
A. तेल।SOLUTION
A. घर्षण।SOLUTION
A. ठंडा।SOLUTION
A. समय।SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
(ii) स्थानीय
समुदाय को दुर्घटना
के बाद की जवाबी
कार्यवाही के
विषय में जानकारी
प्रदान की जानी
चाहिए।
(iii) बचाव
के लिए नकली अभ्यास
कराया जाना चाहिए।SOLUTION
(i) आग
से बचाव की क्षमता
और चेतावनी प्रणाली
में सुधार करना।
(ii) कर्मचारियों
एवं अन्य के लिए
आपातकालीन राहत
तथा स्थान छोड़ने
का नियोजन प्रदान
करना।
(iii) उद्योग
के कर्मचारियों
को उचित प्रशिक्षण
प्रदान किया जाना
चाहिए।SOLUTION
(i) परिवहन
दुर्घटनाएँ जैसे
कार दुर्घटनाएँ
(ii) रासायनिक
संयंत्र या विनिर्माण
इकाई में रासायनिक
दुर्घटनाएँ
(iii) रिसाव:
उचित भंडारण की
कमी के कारण, इन खतरनाक
पदार्थों का रिसाव
होने लगता है। SOLUTION
(i) इन्हें
आसानी से बनाया
जा सकता है।
(ii) इन्हें
बिना किसी परिष्कृत
प्रणाली से लक्ष्य
पर भेजना संभव
हो सकता है। उदाहरणार्थ-
छोटा सा इत्र छिड़कने
वाला यंत्र।
(iii) इनमें
सैकड़ों हजारों
लोगों को मारने
या चोट पहुँचाने
की क्षमता होती
है।