वास्तविक धारा प्रवाह ऋण आवेशित निकाय से धन आवेशित निकाय की ओर होता जो कि इलेक्ट्रान के प्रवाह की दिशा होती है।
रगड़ने के कारण उत्पन्न आवेश प्रकृति में स्थिर होते हैं क्योंकि वे स्वयं गति नहीं कर सकते हैं।
पृथ्वी का स्थलमंडल कई खंडों में विखण्डित होता है। प्रत्येक खंड प्लेट कहलाती है। जो टेक्टोनिक प्लेट के रूप में भी जानी जाती है। ये प्लेटे निरन्तर गति करती रहती है अर्थात, ये गर्म मैग्मा के ऊपर तैरने लगती है। जब प्लेट टक्कर के कारण एक दूसरे पर टकराती हैं तो पृथ्वी की भूपर्पटी में विक्षोभ उत्पन्न होता है। जो पृथ्वी की सतह पर भूकंप की अनुभूति कराता है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है।
एबोनाइट छड़ को बिल्ली की खाल के साथ रगड़ने पर
परमाणु के नाभिकीय मॉडल में
जब दो निकाय एक दूसरे के विरुद्ध रगड़े जाते हैं तो दोनों निकायों के बीच घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है और समान तथा विपरीत आवेश इनके द्वारा प्राप्त कर लिया जाता है। इस प्रकार, घर्षण द्वारा निकायों के आवेशित होने की विधि घर्षण द्वारा विद्युतीकरण के रूप में जानी जाती है।
1. एक साधारण काँच की छड़ का मतलब है कि इस पर कोई आवेश नहीं होता है। यदि इसे स्वतंत्रतापूर्वक लटकी हुई एबोनाइट छड़ के पास लाया जाता है जिस पर पहले से आवेश नहीं है तो वहाँ न तो आकर्षण और न ही प्रतिकर्षण होता है।
2. जब काँच की छड़ को स्वतंत्रतापूर्वक लटकी हुई आवेशित कांच की छड़ के पास लाया जाता है तो चालन द्वारा इस पर आवेश प्रकट होता है।
रगड़ने के कारण निकाय का आवेशन घर्षण द्वारा विद्युतीकरण कहलाता है।
घर्षण द्वारा विद्युतीकरण के दो उदाहरण हैं :
1. रेशम के कपड़े को काँच की छड़ से रगड़ने पर: कांच की छड़ धन आवेशित हो जाती है और रेशम का कपड़ा ऋणावेशित हो जाता है।
2. बिल्ली की खाल को एबोनाइट छड़ से रगड़ने पर: एबोनाइट छड़ ऋणावेशित हो जाती है तथा बिल्ली की खाल धनावेशित हो जाती है।
जब दो समान आवेशित निकाय जैसे ऋणावेशित एबोनाइट छड़ को अन्य ऋणावेशित एबोनाइट छड़ के पास लाया जाता है तो प्रतिकर्षण होता है।
जब हम दो असमान आवेशित निकाय जैसे ऋणावेशित एबोनाइट छड़ तथा धनावेशित काँच की छड़ को एक - दूसरे के पास लाते हैं तो आकर्षण होता है।
निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए :-
1. इमारतों, पेड़ों, विद्युत खंभो, सूचना पट्टों तथा अपने ऊपर विद्युत लाइनों से दूर जाकर कोई स्पष्ट स्थान खोजते हैं तथा ज़मीन पर गिर जाते हैं।
2. यदि घर के बाहर किसी स्थान पर लिफ्ट उपलब्ध है तो उनका प्रयोग नहीं करते हैं ।
3. यदि हम कार या बस में हैं, तो बाहर नहीं आते हैं तथा धीरे – धीरे चलते हुए किसी सुरक्षित स्थान पर आ जाते हैं। कपंन के रुकने तक कार के अन्दर ही रहते हैं।
(i) खाल - धनावेशित तथा प्लास्टिक छड़ - ऋणावेशित।
(ii) ऊन - धनावेशित तथा एबोनाइट छड़ - ऋणावेशित।
(iii) कांच की छड़ - धनावेशित तथा रेशम - ऋणावेशित।
|
चालक |
कुचालक |
|
1. वे पदार्थ जो अपने में से धारा प्रवाह होने देते हैं। |
1. वे पदार्थ जो अपने में से धारा प्रवाह नहीं होने देते हैं। |
|
2. इनमें अधिक मात्रा में मुक्त्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। |
|
|
3.उदाहरण : धातुएँ जैसे लोहा, कॉपर में लवणीय विलयन, पानी में क्षारों का विलयन। |
|
पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ दुर्बल प्लेटें बढ़ते दाब के कारण झटके से अलग हो जाती हैं, भूकंप उत्त्पति का बिंदु है| उसे भूकंप का फोकस या केंद्र कहते हैं ,और पृथ्वी की सतह पर केंद्र के लम्बवत बिंदु को अदिकेंद्र कहते हैं |
भूकंप के दौरान निम्न संकट होते हैं:
(i)ईमारतों में प्रदान किया गया भूसम्पर्कण हमारी विद्युत धारा से होने वाले रिसाव के कारण उत्पन्न विद्युत् आघातों से सुरक्षा करता है। भूसम्पर्कण, किसी आवेशित निकाय से पृथ्वी की ओर आवेशों के स्थानान्तरण की प्रक्रिया होती है, जो आवेश की कितनी भी मात्रा को ग्रहण कर सकती है।
(ii) तड़ित झंझा के समय, घर के अन्दर निम्न सावधानियाँ बर्ती जानी चहिए:
· बहते हुए पानी के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
· हमें तड़ितझंझा के समय नहाने से बचना चाहिए।
A. घूमती हैं ।
B. कंपन करती हैं ।
C. संचरित करती हैं ।
D. रैखिक चलती हैं।
जब कभी हम हवा में बाधा उत्पन्न करते हैं, वहां कंपन होता है जिससे ध्वनि उत्पादन होता है। जब किसी निकाय को इधर-उधर या आगे और पीछे ले जाते हैं, यह कंपन पैदा करता है।
प्रति सेकंड में दोलन की संख्या को दोलन की आवृत्ति कहा जाता है। आवृत्ति का
कंठ, गले का वह भाग है जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उत्पन्न ध्वनि उनके मुँह गुहिका, दॉंतों के आकार, जीभ के घूमाने के तऱीके, होठों की आकृति आदि पर निर्भरता के कारण रूपान्तरित हो जाती है। प्रत्येक व्यक्ति की ध्वनि व्यक्ति विशेष होती है।
वर्षा के दिनो में, एक स्टॉप वॉच लेते हैं और जैसे ही बिजली चमकती है इसे चालू करदेते हैं। बिजली के चमकने तथा गर्जन की ध्वनि के सूनने के बीच समय अन्तराल नोट कर लेते हैं। इसके अलावा हम जानते हैं कि वायु में ध्वनि का वेग
बादल की ऊँचाई = ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी
= वायु में ध्वनि का वेग
आवाज़ आवृत्ति के बढ़ते क्रम में :
वयस्क व्यक्ति की आवाज़, वयस्क औरत की आवाज़, बच्चे की आवाज़।
वह कारक जो निश्चित स्थान पर ध्वनि प्रदूषण को निर्धारित करते हैं :
वह अधिकतम दूरी जिसके माध्यम से कंपित निकाय अपनी मध्य स्थिति से विस्थापित हो जाता है, आयाम कहलाता है।
ध्वनि प्रसार के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।
सोनार का पूरा नाम साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग है।
ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल (dB) में मापते हैं। यह ध्वनि दाब स्तर को दर्शाती है।
कीड़े, जैसे मधुमक्खियाँ, मच्छर इत्यादि तेज़ी से अपने पंखों को फड़फड़ा कर ध्वनि की गूंज उत्पन्न करते हैं|
ध्वनि का वेग तरल की तुलना में ठोस में अधिक होता है। इसलिए ध्वनि लकड़ी में तेज़ी से गुज़रेगी।
सामान्य मनुष्य के कानों के लिये श्रव्यता परास
ध्वनि, कम्पितकणों की तरंगो द्वारा संचरित ऊर्जा के रूप में होती है, तथा हमारे कानों में सुनने की अनुभूति उत्पन्न करती है।
उत्पन्न ध्वनि की सीमा स्वर-तंत्री से जुड़ी मांसपेशियों से परिवर्तित कर सकते है। जब स्वर-तंत्री टाइट व पतला होता है तो उच्च आवृत्ति की ध्वनि उत्पन्न होती है और जब स्वर-तंत्री ढीला व मोटा होता है तो निम्न आवृत्ति की ध्वनि उत्पन्न होती है। उच्च आवृत्ति की ध्वनि का मतलब तीक्ष्ण ध्वनि जबकि निम्न आवृत्ति की ध्वनि का मतलब मंद ध्वनि से है।
ध्वनि का संचरण ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में होता है। एक निश्चित माध्यम में ध्वनि की चाल निश्चित होती है, परन्तु भिन्न-भिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल भिन्न होती है। ठोस में ध्वनि की चाल द्रव तथा गैस की अपेक्षा अधिक होती है। यही कारण है कि रवि को रुपाली से पहले ट्रेन की आवाज सुनाई दी क्योंकि रवि तक ट्रेन की ध्वनि पटरी(ठोस) के माध्यम से पहुंची जबकि रुपाली उसे वायु (गैस) के माध्यम से सुनने की कोशिश कर रही थी।
चमगादड़ ज्यादा आव्रत्ति की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। वें अपने मार्ग में आने वाले अवरोधकों से उत्पन्न प्रतिध्वनि को सुनते हैं तथा प्रतिध्वनि के वापस लौटने में लगे समय के आधार पर उनकी दूरी का अनुमान लगाते हैं। इस प्रकार वे अवरोधकों से बिना टकराये अन्धेरें में भी उड़ पाते हैं।
1.ध्वनितरंग में, क्रमागत सम्पीड़नों तथा क्रमागत विरलनों द्वारा तय की गई दूरी तरंग दैर्ध्य के बराबर होती है। इस प्रकार,ध्वनि तरंग की तरंग दैर्ध्य कोB अक्षर से निरूपित करते हैं।
2.माध्य स्थिति में कण का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है। इस प्रकार, ध्वनि तरंग के आयाम को A अक्षर से निरूपित करते हैं।
ध्वनि अवशोषित पदार्थ, ध्वनि के दुर्बल परावर्तक होते हैं। इस प्रकार, यहाँ ध्वनि तरंगों का परावर्तन नगण्य होता है और दर्शक केवल पर्दे या प्लेटफॉर्म से ही ध्वनि सुन सकते हैं।
दोलक द्वारा 5 सेकण्ड में पुरे किये गए दोलनों की संख्या =
इस प्रकार, दोलक द्वारा 1 सेकण्ड में पुरे किये गए दोलनों की संख्या =
इस प्रकार, दोलक की आवृति (
समय अंतराल = (1 /
(1) प्रति सेकण्ड एक से अधिक कंपन उत्पन्न होते हैं अर्थात आवृत्ति उच्च है इसलिए उच्च सीमा या तीक्ष्ण ध्वनि उत्पन्न होगी।
(2) आयाम कम है अर्थात तीव्रता कम है ।इसलिए मधुर ध्वनि उत्पन्न होगी।
(3) जब कम्पन अनियमित अन्तराल पर उत्पन्न होते हैं तो अप्रिय ध्वनि या शोर उत्पन्न होता है।
|
प्रबलता |
तीव्रता |
|
1. यह कम्पित निकाय के आयाम पर निर्भर करता है। |
1. यह कुछ विशेष आवृत्ति की ध्वनि द्वारा मस्तिष्क में उत्पन्न अनुभूति या प्रभाव होता है। |
|
2. यह आवृत्ति में परिवर्तन के साथ परिवर्तित नहीं होता है। |
2. यह आवृत्तिमें परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता है। निम्न आवृत्ति मंद ध्वनि उत्पन्न करेगी जबकि उच्च आवृत्ति तीक्ष्ण ध्वनि उत्पन्न करेगी। |
|
3. यह इकाई समय में कान द्वारा प्राप्त ध्वनि ऊर्जा की मात्रा द्वारा निर्धारित की जाती है। इसका मतलब है कि अधिक उर्जा प्राप्त होती है तो ध्वनि तीव्र होती है। |
3. यह कान द्वारा प्राप्त ऊर्जा की मात्रा पर निर्भर नहीं करती है। |
(i) पवन उपकरणों में ध्वनि नली के अन्दर वायु स्तम्भ के कंपन करनें से उत्पन्न होती है। उदाहरण: बाँसुरी।
(ii) तार उपकरणों मे ध्वनि तने हुए तारों को खींचने पर इधर उधर कंपन करने से उत्पन्न होती है। उदाहरण: सितार।
(iii) तालवाद्य उपकरण में ध्वनि इसकी सतह पर प्रहार करने से खोखली जगह में स्थितवायु के कंपन करने से उत्पन्न होती है। उदाहरण : तबला।
ध्वनि को समाप्त नहीं किया जा सकता है लेकिन हम निम्न उपायों का प्रयोग करके इन्हें सहनीय सीमा के स्तर तक लाया जा सकता है|
1. मशीनों को निम्न ध्वनी युक्त तकनीकों द्वारा तैयार किया जाना चाहिए ताकि ध्वनि प्रदूषण कम हो।
2. वाहनों, वायुयानों, आदि में बेहतर तथा संशोधित रवशामकों (साइलेंसर) का प्रयोग किया जाना चाहिए।
3. भारी वाहनों को आवाशीय क्षेत्रों में आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
4. इसके अलावा कारखानों को आवासीय क्षेत्रों में स्थित नहीं किया जाना चाहिए।
संगीत की ध्वनि तथा शोर के बीच अन्तर है:
|
संगीत की ध्वनि |
शोर |
|
1.यह कानों को मधुर प्रभाव प्रदान करती है। 2.यह नियमित कंपनों द्वारा उत्पन्न होती है। 3.वातावरण में इस ध्वनि की उपस्थिति स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएँ जैसे उच्च रक्तचाप, चिन्ता उत्पन्न होना, इत्यादि नहीं करती है। |
1.यह कानों को मधुर प्रभाव प्रदान नहीं करता है। 2.यह अनियमित कंपनों द्वारा उत्पन्न होता है। 3.वातावरण में शोर की उपस्थिति स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएँ जैसे उच्च रक्तचाप, चिन्ता आदि उत्पन्न करती है। |
(i)चूंकि, प्रकाश का वेग ध्वनी की तुलना में अधिक होता है, प्रकाश, ध्वनि की तुलना में तेज़ी से गुज़रता है। प्रकाश का वेग 3 x 108 मीटर प्रति सेकण्ड होता है जबकि ध्वनि का वेग 330 मीटर प्रति सेकण्ड होता है। इसलिए, प्रकाश ध्वनि की तुलना मे तेज़ी से दूरी तय करता है| इसलिए तूफ़ान के समय, हम गर्जना की गडग़ड़ाहट सुनने से पहले बिलजी की कड़कड़ाहट को देखते हैं।
(ii)पराध्वनिक विमान ध्वनि के वेग से भी अधिक वेग से उड़ते हैं। इसलिए, जब वे हमारे निकट आते हैं तो नहीं सुने जा सकते है। किन्तु उनके गुज़रने के बाद उनकी ध्वनि जो कि कम वेग से चलती है, हमारे कानों तक पहुँचती है| इसलिए विमान के दूर गुज़रने के बाद हमें इसकी गर्जन (बूम) सुनाई देती है।
ध्वनि, प्रकाश की तरह परावर्तन के नियमों का पालन करती है।
क्रियाकलाप
टेबल के सिरे के सापेक्ष लम्बवत स्थिति में समतल दर्पण रखते हैं। खोखली ट्यूब ‘P’ इस तरह से रखते हैं कि यह दर्पण के साथ कोण X बनाए। ‘P’ सिरे पर एक घड़ी रखते हैं। चित्र में दिखाए अनुसार, लम्बवत स्थिति में एक लकड़ी का बोर्ड लगाते हैं।

अन्य खोखली ट्यूब ‘Q’ लेते हैं और आपके कान को इस सिरे पर रखकर इसे लकड़ी के बोर्ड़ के दूसरे सिरे पर वामावर्त तथा दक्षिणावर्त दिशा में गति कराते हैं। एक निश्चित स्थान पर, हम घड़ी द्वारा उत्पन्न टिक - टिक कि ध्वनि को सुन सकते हैं। यह ध्वनि का परावर्तन प्रदर्शित करता है।
घड़ी द्वारा उत्पन्न ध्वनि तरंगें दर्पण से परावर्तित हो जाती हैं और हमारे कान तक पहुँचती हैं।
अब, ट्यूब Qतथा दर्पण के बीच कोण ‘Y’ है। कोण X तथा Y को मापने पर, हमें प्राप्त होता है कि X =Y। इस प्रकार, दोनों ट्यूब दर्पण से समान कोण पर झुकी रहती हैं। इसलिए, आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
यह प्रयोग सिद्ध करता है कि ध्वनि परावर्तन के नियमों का पालन करती है।
ध्वनि प्रदूषण : विभिन्न स्रोतों से अवांछनीय तथा अप्रिय ध्वनि द्वारा वातावरण में उत्पन्न विक्षोभ ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।
ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव है:
1. बहरापन, सुनने में कमीं।
2.सिरदर्द, चिड़चिड़ापन तथा तंत्रिका तनाव।
3. गुस्सा, तनाव तथा व्यक्तियों की सोने की पद्दति के साथ छेड़छाड़।
4. एकाग्रता तथा कार्य की क्षमता में कमीं।
हमारा कान तीन भागों से मिलकर बना है:
(1)बाह्य कर्ण, (2)मध्य कर्ण, (3)अंतः कर्ण।

कम्पन द्वारा उत्पन्न ध्वनि निकाय को वायु कंपित बनाती है। कर्ण पट्ट पर ये कंपन टकराकर इसे कंपित बनाता है। यह आगे हमारे मध्य कर्ण में कुछ छोटी नाज़ुक हड्डियाँ को स्रोत के समान आवृत्ति के साथ कंपित बनाता है।
छोटी हड्डियों से उत्पन्न कंपन हमारे अंतः कर्ण में उपस्थित तरल से होकर गुज़रता है। कई तंत्रिकाएं यहाँ उपस्थित हैं जो हमारे मस्तिष्क तक सन्देश पहुँचाती हैं। जब ये सन्देश हमारे मस्तिष्क तक पहुँचता है, तब हम ध्वनि को सुनने तथा पहचानने मेंं सक्षम होते हैं।
श्रवण तंत्रिका हमारे मस्तिष्क से अंतः कर्ण तक जुड़ीं रहती है तथा इस प्रकार हमारे मस्तिष्क तक कंपन पहुँचता है।
प्रकाश सात अलग अलग वर्णों से मिल कर बना है| जब प्रकाश काँच के प्रिज़्म में प्रवेश करता है तो यह सात विभिन्न वर्णों में विभक्त हो जाता है तथा परदे पर सात विभिन्न रंगों की पट्टी बन जाती है|
परावर्तन के नियमों के अनुसार एक नियामित पृष्ठ से टकराने के बाद, आपतन कोण तथा परावर्तन कोण बराबर होते हैं| इसलिए, सभी किरणें समान कोण पर परावर्तित होती हैं एवं परावर्तन के पश्चात भी समान्तर प्रकाश पुंज ही प्राप्त होता है|
एक अनियामित पृष्ठ से टकराने के बाद पृष्ठ की अनियमितता के कारण प्रकाश की किरणें अलग अलग कोनों पर परावर्तित हो जाती हैं| इस कारण, प्रकाश का पुंज असमांतर हो जाता है|
B. दो C. तीन D. चार किसी समतल दर्पण द्वारा बनाये गये प्रतिबिम्ब का रेखीय चित्रण यहाँ दर्शाया गया है|
इस चित्र से यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि समतल दर्पण द्वारा सामने राखी गयी वस्तु का केवल एक ही प्रतिबिम्ब बनता है|
एक समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब आभासी होता है जबकि किसी परदे पर केवल एक वास्तविक प्रतिबिम्ब ही उत्पन्न किया जा सकता है| इसलिए, अशोक का प्रयास विफल होगा|
स्वच्छ मंडल नेत्र का पारदर्शी अग्र भाग है जो की प्राकृतिक रूप से कठोर होता है| कठोर होने के कारण यह नेत्र के आंतरिक भागों का दुर्घटना से बचाव करता है|
B. 5 cm C. 10 cm D. 15 cm एक समतल दर्पण द्वारा बनाए गया प्रतिबिम्ब सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु की ऊंचाई के समान होता है| इसलिए, 5 cm ऊंचाई वाली वस्तु के प्रतिबिम्ब की ऊंचाई भी 5 cm ही होगी|
पाश्र्विक परिवर्तन की परिघटना के कारण एक दर्पण के द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब सदैव पाश्र्विक उल्टा होता है अर्थात बिम्ब का दायाँ भाग प्रतिबिम्ब का बायाँ तथा बिम्ब का बायाँ भाग प्रतिबिम्ब का दायाँ भाग नज़र आता है|
B. 7.3 cm C. 29.2 cm D. 10 cm प्रतिबिम्ब तथा बिम्ब के मध्य दूरी = दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी + दर्पण से बिम्ब की दूरी …(i)
तथा, दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी = दर्पण से बिम्ब की दूरी ….(ii) (b) चाक से ब्लेक बोर्ड पर लिखने के लिए हम घर्षण बल का उपयोग करते हैं और यह बल चाक के घिसने का कारण बनता है। भूमि की सतह खुरदरी होती है। जब गेंद इस तरह की सतह पर गति करती है तो घर्षण बल गेंद तथा भूमि की सतह के बीच कार्यरत होता है। घर्षण का बल भूमि पर गेंद की गति के विपरीत दिशा में लगता है। परिणामस्वरूप, गेंद की गति धीमी हो जाती है और अंततः गेंद रूक जाती है। यदि हम आरोपित बल को बढ़ाते हैं, तो घर्षण बल भी बढ़ता जाता हैं और वस्तु लगातार स्थिर बनी रहती है। जैसे हम आरोपित बल को बढ़ाते हैं, स्थैतिक घर्षण भी बढ़ता जाता है। यह एक अधिकतम मान प्राप्त कर लेता है जिसे सीमित घर्षण कहा जाता है। जब आरोपित बल, सीमित घर्षण से अधिक होता है तो वस्तु गति करना प्रारम्भ कर देता है। जब दो सतह एक - दूसरे पर फिसलती है तो वह बल जिसकी गति दूसरे निकाय के विपरीत होती है, घर्षण बल कहलाता है। घर्षण बल की हानियाँ हैं: (i) सम्पर्क में आने पर वस्तुएँ घिस जाती हैं । उदाहरण: वाहनों के टायर तथा जूतों के तलवे। (ii) ऊष्मा के रुप में ऊर्जा की हानि। उदाहरण: मशीनों के भाग गर्म हो जाते हैं और घिस जाते हैं । प्रारम्भ में दो सतहों के बीच घर्षण को कम करने के तीन तरीके है:- (i) खुरदुरी सतहों को पॉलिश करने में । घर्षण के बिना, हमारे दैनिक जीवन में 5. हमारी हथेलियों को एक दूसरे से रगड़ने पर गर्म महसूस करते हैं। घर्षण के तीन प्रकार है: (i) स्थैतिक घर्षण: सम्पर्क में रखी सतहों के बीच कार्यरत वह घर्षण जब कोई सापेक्षिक गति नहीं होती है, स्थैतिक घर्षण कहलाता है। (ii) सर्पी घर्षण: सम्पर्क में रखी सतहों के बीच वह घर्षण जब एक निकाय दूसरे निकाय की सतह पर फिसलता है, सर्पी घर्षण कहलाता है। (iii) लोटनिक घर्षण: सम्पर्क में रखी सतहों के बीच वह घर्षण जब एक निकाय दूसरे निकाय की सतह पर घूमता है, लोटनिक घर्षण कहलाता है। गति के दौरान सम्पर्क में कोई भी दो सतहों के लिए: लोटनिक घर्षण< सर्पी घर्षण < स्थैतिक घर्षण। (a) वर्षा के दिनों में, पानी सड़क तथा हमारे पैरों के बीच घर्षण को कम करने के लिए स्नेहक के रूप में कार्य करता है। इस प्रकार, हम गीली सड़क पर चलने के लिए पर्याप्त प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं कर पाते है और फिसल जाते है। (b) तीव्र गति से चलने वाले वाहन सरल आकार के बनाये जाते हैं। क्योंकि, इनका सरल आकार, वायु द्वारा प्रदान किए गए घर्षण बल को कम करता है। (a) रेत पर चलना कठिन होता है क्योंकि जब हम पीछे की दिशा में हमारे पैरों से रेत को दबाते हैं, तो रेत विस्थापित हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप रेत से प्रतिक्रिया बहुत कम होती है। इस प्रकार, रेत पर चलना कठिन होता है। बर्फ की स्थिति में, बर्फ तथा हमारे पैरों के बीच बहुत कम घर्षण बल होता है जो बहुत कम प्रतिक्रिया बल उत्पन्न करता है। (b) जब टायरों को पूरी तरह से भर दिया जाता है, तो वे कठोर हो जाते हैं और परिणामस्वरूप टायरों की विकृति कम हो जाती है। फलस्वरूप, घूर्णी घर्षण कम हो जाता है तथा वाहन ईंधन की समान मात्रा से अधिक दूरी तय करने के लिए सक्षम हो जायेगा। इस प्रकार, जब टायर पुर्णतया भरे रहते हैं तो वाहन बेहतर औसत देंगे और पेट्रोल बचा सकते हैं। (c) घर्षण के बल को बढ़ाने के लिए बर्फ से ढके पथ पर रेत फेंकते हैं, ताकि वाहनों के टायर बर्फ पर नही फिसल सकें। (d) चलने के लिए, हम धरातल को पीछे की दिशा में धकेलते है तथा धरातल तथा पैरों के बीच घर्षण का बल हमें आगे की दिशा में धकेलता है। इस प्रकार, हम घर्षण रहित सतह पर नहीं चल सकते हैं क्योंकि यहाँ, प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए कोई घर्षण बल नहीं है। B. प्लूटो C. नेपट्यून D. शनि अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा निश्चित मानदंडों पर प्लूटो खरा नहीं उतरता था इसलिए सर्वसम्मति से इसे सौर मण्डल से बाहर कर दिया और अब यह सौर परिवार का सदस्य नहीं है |
उस दिन को जब चन्द्रमा की पूर्ण चक्रिका दिखाई देती है, पूर्णिमा कहते हैं। इसके पश्चात् प्रत्येक रात्रि को चन्द्रमा का चमकीला भाग घटता चला जाता है। पंद्रहवें दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं पड़ता। इस दिन को अमावस्या कहते हैं। इसके पश्चात फिर प्रतिदिन चन्द्रमा बड़ा होता जाता है।पंद्रहवें दिन एक बार फिर से हमे चन्द्रमा दिखाई देता है | एक पूर्णिमा से दूसरी पूर्णिमा तक की अवधि 29 दिन से कुछ अधिक होती है।
B. दो घूर्णन पूरा करता है। C. तीन घूर्णन पूरा करता है। D. चार घूर्णन पूरा करता है। चंद्रमा की अपने अक्ष पर घूर्णन गति उसकी पृथ्वी की परिक्रमण गति के समान होती है इसलिए चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करने में अपने अक्ष पर एक घूर्णन पूरा करता है।
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती है इसलिए तारे पूर्व से पश्चिम की ओर गतिमान प्रतीत होते हैं|
B. पूर्णिमा के पश्चात तेरहवें दिन C. पूर्णिमा के पश्चात चौदहवें दिन D. पूर्णिमा के पश्चात पंद्रहवें दिन पूर्णिमा के पश्चात पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा का सूर्य द्वारा प्रदीप्त भाग प्रतिदिन आकार में घटता जाता है और पंद्रहवें दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता | जिस दिन आकाश मे चंद्रमा दिखाई नहीं देता, उसे अमावस्या कहते हैं |
B. चंद्रमा को देखकर C. ध्रुव तारे को देखकर D. ऐल्फा सेंचुरी को देखकर ध्रुव तारा ही एक ऐसा तारा है जो स्थिर है | यह पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर स्थित है इस कारण यह गति नहीं करता |
B. ग्रहों का C. आकाश गंगा का D. तारों और चंद्रमा का पहचाने जाने योग्य आकृतियों वाले तारों के समूह को तारामण्डल कहते हैं।
B. सूर्य और ग्रहों के बीच गुरुत्व प्रतिकर्षण के कारण C. सूर्य और ग्रहों के आवेशों का परस्पर आकर्षण D. सूर्य और ग्रहों के आवेशों का परस्पर प्रतिकर्षण सूर्य का द्रव्यमान अन्य सभी ग्रहों से बहुत अधिक है, इसलिए सूर्य अपने असीम द्रव्यमान के कारण अन्य ग्रहों को अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण सौर परिवार से बांधे रखता है, जिस कारण सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं|
B. असंख्य भवन हों C. कम संख्या में वृक्ष और भवन हों D. वृक्ष अधिक किन्तु भवन कम हों क्योंकि बुध सूर्य के अत्यधिक निकट है, अतः अधिकांश समय तक सूर्य की चकाचौंध में छिपा रहने के कारण इसका प्रेक्षण करना अत्यंत कठिन है। तथापि, सूर्योदय से तुरन्त पूर्व अथवा सूर्यास्त के तुरंत पश्चात इसे क्षितिज पर देखा जा सकता है। अतः यह वहीं दिखाई देता है जहाँ वृक्षों अथवा भवनों द्वारा क्षितिज को देखने में कोई बाधा नहीं आती।
B. असुरक्षित चालन। C. कठिन चालन। D. आसन चालन। घर्षण बल, विरोधी बल होता हैं जो दो संपर्क सतहों के बीच कार्यरत होता हैं। इसलिए, सड़क तथा टायरों की सतह के बीच बिना घर्षण के वाहन फिसल सकते हैं और परिणामस्वरूप, दुर्घटना हो सकती है।
स्थैतिक घर्षण तब कार्य करना आरम्भ करता है जब हम किसी वस्तु को उसकी विराम की स्थिति से गति में लाने का प्रयास करते हैं। यह मशीन का गोल आकार का भाग होता है जो घर्षण कम करने के काम आता है। गीली सतह का पानी स्नेहक के रूप में व्यवहार करता है। यह सतहों के छिद्रों को अच्छी तरह से भर देता है जो उन्हें चिकना बनाता है और इस प्रकार, यह घर्षण को कम करता है। घर्षण में इस कमी के कारण सतह और अधिक चिकनी हो जाती है। जब आप अपनी हथेली को रगड़ते हैं, तो आप गर्म अनुभव करते हैं क्योंकि, घर्षण ऊष्मा उत्पन्न करता है। जब वस्तु तरल या गैस के माध्यम से गति करती है तो वह वस्तु पर घर्षण बल लगाता है। तरलों द्वारा लगाया गया घर्षण बल, कर्षण के रूप में जाना जाता है। तरल घर्षण, तरल पदार्थ की मोटाई पर, वस्तु की गति पर तथा वस्तु के आकार पर निर्भर करती है। तरल (द्रव और गैस) द्वारा अपने में से होकर गति करने वाली वस्तुओं पर लगाया गया बल तरल घर्षण कहलाता है। जब एक निकाय दूसरे निकाय की सतह पर घूर्णन करता है तो वह घर्षण बल जो दो सतहों के बीच उत्पन्न होता है, लोटनिक घर्षण कहलाता है। कारक जिस पर घर्षण निर्भर करता है:- (i) संपर्क में सतह की प्रकृति पर। (ii) दो सतह एक साथ कितने बलपूर्वक दबाई जाती हैं। जब दो निकाय एक दूसरे पर फिसलते हैं तो सम्पर्क में दो सतहों पर अनिमिताएं मिल जाती हैं और इसकी गति के विपरीत घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है। जब कोई निकाय दूसरे निकाय की सतह पर फिसलता है तो उत्पन्न घर्षण, सर्पी घर्षण कहलाता है। जब ब्रेक को दबाते हैं तो ब्रेक पहिये की रिम की गति के विरुद्ध दाब लगाता है। यह घर्षण को बढ़ाता है और इस प्रकार, साईकिल रूक जाती है। घर्षण बल प्रतिरोधी बल होता है जबकि, गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण प्रकृति के होते हैं । घर्षण बल गति की विपरीत दिशा में कार्यरत होता है। कबड्डी खिलाडी घर्षण बढ़ाने के लिए मिट्टी से अपने हाथों को रगड़ते हैं, ताकि, पकड़ अच्छी हो सके। तरल घर्षण गतिशील वस्तु को उचित आकार देकर तथा चिकनी सतह बनाकर कम किया जाता है। वस्तु का आकार सुव्यवस्थित बनाया जाता है अर्थात वस्तु के सामने की सम्पर्क सतह कम की जाती है। उदाहरण: पानी में तैरने के लिए पहले हम हाथ डालते हैं और फिर सिर। घर्षण, ऊष्मा उत्पन्न कर सकता है। जब कोई मशीन संचालित होती है, तो घर्षण के कारण उत्पन्न ऊष्मा के कारण, ऊर्जा की बहुत अधिक मात्रा की हानि होती है। गीली सतह का पानी एक स्नेहक के रूप में कार्य करता है। यह सतहों के सूक्ष्म छिद्रों को भर देता है जो उनकों चिकना बनाता है और घर्षण कम करता है। घर्षण में इस कमी के कारण सतह पर बहुत फिसलन हो जाती है। दो सतहों के बीच घर्षण ऊष्मा उत्पन्न करता है। हानि:- मशीनों के भाग गर्म हो जाते है और घिस जाते हैं। B. मंगल C. बृहस्पति D. शनि कभी-कभी शुक्र पूर्वी आकाश में सूर्योदय से पूर्व दिखाई देता है। कभी-कभी सूर्यास्त के तुरन्त पश्चात यह पश्चिमी आकाश में दिखाई देता है। इसीलिए इसे प्रायः प्रभात तारा अथवा सांध्यतारा कहते हैं, यद्यपि यह तारा नहीं है।
कुछ उल्का आकार में इतनी बड़ी होती हैं कि पूर्णतः वाष्पित होने से पूर्व ही वे पृथ्वी पर पहुँच जाती हैं। वह पिंड जो पृथ्वी पर पहुँचता है उसे उल्का पिंड कहते हैं।
B. परिक्रमण की कक्षा C. घूर्णन की दिशा D. परिक्रमण की दिशा पृथ्वी का घूर्णन अक्ष इसकी कक्षा के तल के लम्बवत नहीं है | इसका अपने अक्ष पर झुकाव पृथ्वी पर ऋतु -परिवर्तन के लिए उत्तरदायी है।
B. शुक्र को C. बृहस्पति को D. मंगल को मंगल ग्रह पर बहुत अधिक लोहा तत्त्व है, और यह लोहा ऑक्सीजन से मिलकर एक रसायन बनाता है जिस वजह से यह हलका रक्ताभ प्रतीत होता है, इसीलिए इस ग्रह को लाल ग्रह भी कहते हैं।
B. सूर्य C. शनि D. बृहस्पति बृहस्पति सौर परिवार का सबसे बड़ा ग्रह है। यह ग्रह इतना बड़ा है कि लगभग 1300 पृथ्वियाँ इस विशाल ग्रह के भीतर रखी जा सकती हैं |
शनि ग्रह में तीन रमणीय वलय परिवृत्त है जो इस ग्रह को अद्वितीय सुंदरता प्रदान करता हैं | किसी अन्य ग्रह के इतने वलय नहीं है |
सौर परिवार के सभी ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करते हैं किन्तु यूरेनस और शुक्र दो ऐसे ग्रह हैं जो पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करते हैं |
A. परदे पर स्वेट पट्टी उत्पन्न होती हैSOLUTION
A. समान्तर ही रहता हैSOLUTION
A. समान्तर ही रहता हैSOLUTION
A. एकSOLUTION
SOLUTION
A. हमारे नेत्रों में प्रवेश होने वाले प्रकाश को नियंत्रित करता हैंSOLUTION
A. 2.5 cmSOLUTION
A. बाएं के सामने बायाँ तथा दाएं के सामने दायाँ हाथ उठाता हैSOLUTION
A. 14.6 cmSOLUTION
समीकरण (i) तथा (ii) से,
14.6 cm = 2 x दर्पण से बिम्ब की दूरी
दर्पण से बिम्ब की दूरी = 14.6 cm/2 = 7.3 cm
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
(iii) घर्षण को कम करने के लिए ऊर्जा कि हानि। उदाहरण: मशीनों में ईंधन की बर्बादी।SOLUTION
SOLUTION
(ii) ग्रीज और स्नेहकों का उपयोग।
(iii) मशीनों के गतिशील भागों के बीच बॉल बेयरिंग का उपयोग।SOLUTION
(a) चलना संभव नहीं होगा । पैरों को ज़मीन पर दबाने पर केवल पैर फिसलेंगे।
(b) कोई भी दो निकाय एक दूसरे के साथ नहीं चिपकेंगे।
(c) वाहनों के ब्रेक काम नहीं करेंगे।
(d) मशीनों को पकड़ने वाले भाग के लिए नट तथा बोल्ट काम नहीं करेंगे।
(e) ब्लेक बोर्ड या कागज़ पर लिखना संभव नहीं होगा।SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. यूरेनसSOLUTION
A. 9 दिन से कुछ अधिक होती हैSOLUTION
A. एक घूर्णन पूरा करता है।SOLUTION
Right Answer is: A
SOLUTION
A. पूर्णिमा के पश्चात बारहवें दिन SOLUTION
A. सूर्य को देखकरSOLUTION
A. तारों काSOLUTION
A. सूर्य और ग्रहों के बीच गुरुत्वाकर्षण के कारणSOLUTION
A. असंख्य वृक्ष होंSOLUTION
A. सुरक्षित चालन।SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
लाभ: - सर्दियों में हथेलियों को एक दुसरे के विरुद्ध रगड़ने पर ऊष्मा उत्पन्न होती हैं।
A. शुक्रSOLUTION
Right Answer is: A
SOLUTION
A. घूर्णन कक्षा का झुका होनाSOLUTION
A. बुध कोSOLUTION
A. पृथ्वीSOLUTION
A. अपने पीले रंग के कारण SOLUTION
Right Answer is: C
SOLUTION
PreviousNext