यूरेनस, पूर्व से पश्चिम दिशा में घूर्णन करता है। इसकी विलक्षण विशेषता इसका अत्यधिक झुका घूर्णन अक्ष है| इसी परिणामस्वरूप, यह कक्षीय गति करते समय अपने पृष्ठ पर लुढ़कता सा प्रतीत होता है |
B. आंतरिक ग्रह C. श्रेष्ठ ग्रह D. हीन ग्रह सौर परिवार के प्रथम चार ग्रह - बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल अन्य चार ग्रहों की तुलना में सूर्य के अत्यन्त निकट हैं। इन्हें आन्तरिक ग्रह कहते हैं। आन्तरिक ग्रहों के बहुत कम चन्द्रमा होते हैं।
B. आंतरिक ग्रह C. श्रेष्ठ ग्रह D. हीन ग्रह वे ग्रह जो मंगल की कक्षा से बाहर हैं, जैसे बृहस्पति,शनि, यूरेनस तथा नेप्ट्यून, आन्तरिक ग्रहों की तुलना में कहीं अधिक दूर हैं। इन्हें बाह्य ग्रह कहते हैं। इनके चारों ओर वलय-निकाय हैं।
जैसे-जैसे कोई धूमकेतु सूर्य के समीप आता जाता है इसकी पूँछ आकार में बढ़ती जाती है। किसी धूमकेतु की पूँछ सदैव ही सूर्य से परे होती है |
धूमकेतु चट्टानों तथा धूल कणों का बना, बड़ा मलिन बर्फ का गोला होता है। जब यह सूर्य के पास आता है तो इसकी बर्फ पिघल जाती है और गैस तथा धूल कण पूंछ के रूप में बह जाते हैं। इस प्रकार, यह केवल सूर्य के पास आने पर ही दिखाई देता है। जब अंतरिक्ष में किसी आकाशीय पिण्ड की छाया अन्य पिण्ड पर गिरती है तो खगोलीय पिण्ड का अँधेरा ग्रहण कहलाता है। ग्रह तारों जैसे दिखाई देते हैं लेकिन इनका स्वयं का प्रकाश नहीं होता हैं। ग्रह, प्रकाश का परावर्तन करते हैं| ग्रह तारों जैसे नहीं टिमटिमाते हैं और ग्रह तारों के सापेक्ष अपनी स्थिति परिवर्तित करते हैं। तारे दिन के समय में भी मौजूद होते हैं लेकिन वे दिन के समय में दिखाई नहीं देते हैं क्योंकि सूर्य का प्रकाश उनसे अधिक चमकीला होता है। वह पथ जिसके अनुदिश उपग्रह किसी गृह के चारों ओर गति करते हैं, कक्षा कहलाती हैं | चन्द्रमा अप्रदीप्त निकाय है अर्थात यह स्वयं प्रकाश का उत्सर्जन नहीं करता है। तथापि यह सूर्य से आ रहे प्रकाश को परावर्तित करता है। यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है और हमें चन्द्रमा दिखाई देता है। पृथ्वी अपने अक्ष के परित पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती है। इसलिए सूर्य जिस आकाश गंगा में स्थित है उसका नाम मिल्की वे है। तथा एंड्रोमेडा आकाश गंगा हमारी आकाश गंगा के पास स्थित है। सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है। लम्बे समय तक, सबसे छोटा ग्रह प्लूटो को माना जाता था। लेकिन अब प्लूटो कोई ग्रह नहीं है इसलिए सबसे छोटा ग्रह बुध है। (a) अर्सा मेजर में प्रमुख तारे। अर्सा मेजर सबसे महत्वपूर्ण तारामंडल में से एक है। इसे सप्तर्षि के रूप में भी जाना जाता है। यह सात चमकीले तारों का बना होता है। इसको ग्रेट बीयर भी कहते हैं क्योंकि इसके तारे इस तरह से व्यवस्थित होते हैं ताकि वे ग्रेट बीयर की रुपरेखा के आकार में प्रकट हो। ग्रेट बियर का शरीर तारे 1, 2, 3 तथा 4 के रूप में चिन्हित किया जाता है जबकि इसकी पूंछ तारे 5, 6 तथा 7 के रूप में चिन्हित करके बनाई जाती है। यह तारामंडल पूरे वर्ष में दिखाई देता है तथा अप्रैल के महीने में सबसे अच्छा देखा जा सकता है। ओरॉयन एक अन्य विख्यात तारामण्डल है जिसे हम सर्दियों में मध्यरात्रि में देख सकते हैं। यह आकाश में सर्वाधिक भव्य तारामण्डलों में गिना जाता है। इसमें भी सात अथवा आठ चमकीले तारे हैं | ओरॉयन को शिकारी भी कहते हैं। इसके तीन मध्य के तारे शिकारी की बेल्ट (पेटी) को निरूपित करते हैं। चार चमकीले तारे चतुर्भुज के रूप में व्यवस्थित दिखाई देते हैं | B. गिटार द्वारा उत्पन्न ध्वनि में। C. शोर की स्थिति में। D. वीणा द्वारा उत्पन्न ध्वनि में। सुस्वर ध्वनि जैसे संगीत वस्तु में नियमित कम्पन्न से उत्पन्न होती है| दूसरी ओर, वस्तु में अनियमित कम्पन्न के कारण शोर की स्थिति उत्पन्न होती है| इसलिए, शोर की स्थिति में ध्वनि की प्रबलता एकाएक बदलती रहती है|
B. कंपन का आयाम। C. समय सीमा। D. प्रबलता। कर्कशता या तारत्व कंपन से उत्पादित ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है। कंपन की आवृत्ति अधिक है, तो ध्वनि का उत्पादन तीखी और उच्च तारत्व का होता है, और अगर कंपन की आवृत्ति कम होती है,तो ध्वनि का उत्पादन सुस्त और कम तारत्व का होता है।
B. डेसिबेल मीटर से । C. मीटर पैमाने से । D. पेंच गेज से । ध्वनि की प्रबलता को डेसीबल में मापा जाता है। डेसिबेल मीटर को 'ध्वनि स्तर मीटर' या 'डीबी मीटर' के रूप में भी जाना जाता है। डेसिबेल मीटर एक निर्धारित तरीके का साधन है, जो डेसीबल मात्रक में शोर और ध्वनि के स्तर को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
B. ज़ोर से संगीत बजाना चाहिए। C. ज़ोर से ढोल बजाना चाहिए। D. पेड़ लगाने चाहिए। हमें अत्यधिक मात्रा में पेड़ पौधे लगाने चाहिए जिस से कि ध्वनि आवासों तक ना पहुँच पाए| इस्से ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव कम हो सकते हैं।
कर्ण पटह एक तानित रबड़ की शीट वे फसमान होता है। ध्वनि के कंपन कर्ण पटह को कंपित करते हैं| कर्ण पटह कंपनों को आंतरकर्ण तक भेज देता है जहाँ से संकेतों को मस्तिष्क तक भेज दिया जाता है तथा हम ध्वनि सुन पाते हैं|
B. घूर्नन गति। C. लहरदार गति। D. अनियमित गति। जो खुद को समय के नियमित अंतराल पर दोहराती है वह आवधिक गति कहलाती है। उदाहरण के लिए: एक दोलक की गति।
B. उल्टी दिशा की ओर कार्यवाही करती है । C. ऊपर की दिशा की ओर कार्यवाही करती है। D. सभी दिशाओं में कार्यवाही करती है। जब हम किसी निकाय पर आघात करते हैं, तब यह चारों ओर हवा की परतों के संपीड़न (दबाव के साथ हवा की परतों को संपीड़ित) और विरल करता है जिसकी वजह से कंपन होता है। यह सभी दिशाओं में लंबी दूरी तय करता है और इस प्रकार, हम ध्वनि सुन पाते हैं।
B. तरल पदार्थ। C. गैस। D. निर्वात। ध्वनि को अपने प्रसारण के लिए एक सामग्री अर्थात माध्यम की ज़रूरत होती है। इसलिए यह ठोस, तरल पदार्थ और गैसों के माध्यम से यात्रा कर सकती हैं, लेकिन यह निर्वात के माध्यम से यात्रा नहीं कर सकती हैं।
B. मनुष्य द्वारा । C. बिल्लियों द्वारा । D. डॉलफिन द्वारा । क) मनुष्य की सुनने की क्षमता 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज होती है (ख) कुत्तों की सुनने की क्षमता 40,000 हर्ट्ज तक होती है (ग) बिल्लियों की सुनने की क्षमता 100 हर्ट्ज से 60,000 हर्ट्ज तक होती है (घ) डॉल्फिन की सुनने की क्षमता 1,50,000 हर्ट्ज तक होती है ।
B. 5 Hz C. 8 Hz D. 10 Hz 1 सेकंड में दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं। यहाँ 2 सेकंड में 10 दोलन कि संख्या दी गई है| इसलिए 1 सेकंड में वस्तु द्वारा किए गए दोलनों की संख्या = 10/2 = 5 अर्थात, इसकी आवृत्ति = 5 हर्ट्ज है।
B. स्वर रज्जु से । C. कंठनली से । D. गले से । मनुष्यों में,ध्वनि स्वर रज्जु द्वारा निर्मित होती है। फेफड़ों में भट्ठा के माध्यम से हवा प्रवाह होती है , जिस से स्वर रज्जू में कंपन होता है और यह ध्वनि पैदा करता है।
B. संगीत के नोट्स। C. ध्वनि प्रदूषण। D. प्रतिध्वनि। कोई भी ध्वनि जो अप्रिय है और हमारे कानों को परेशान करती है, हम उसे शोर कहते हैं। इसलिए, वातावरण में अत्यधिक या अवांछित शोर जो हमें परेशान करता है, उसे ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है।
B. औरत का होता है । C. बच्ची तथा औरत दोनों का होता है । D. बच्चे का होता है । आवृत्ति किसी प्राणी कि तारत्व या ध्वनि की कर्कशता पर निर्धारित होती है। महिलाओं और बच्चों (लड़की या लड़का) की तुलना में पुरुषों का स्वर रज्जु अधिक होता है। यही कारण हैं कि महिलाओं और बच्चों द्वारा उत्पादित ध्वनि की आवृत्ति पुरुषों द्वारा उत्पादित ध्वनि की आवृत्ति की तुलना में अधिक होती है। इस प्रकार, पुरुषों की तारत्व महिलाओं और बच्चों की तुलना में कम होती है।
B. अल्ट्रासोनिक। C. सोनिक। D. इन्फ्रासोनिक । 20,000 हर्ट्ज की आवृत्ति से अधिक लहरें अल्ट्रासोनिक तरंगों के रूप में जाना जाता है। कुत्तों की क्षमता 20,000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनि को सुनने के लिए होता है ।
B. तनी हुई तार । C. हवा के स्तंभ। D. पानी के स्तंभ। बांसुरी एक हवा से बजने वाला साधन है। बांसुरी की ट्यूब के अंदर हवा होती है। जब हम बांसुरी को बजातें हैं, अलग अलग छेद को बंद करके, हवा के स्तंभ में बाधा पहुंचाते हैं और संगीतमय ध्वनि पैदा होती है।
B. तनी हुई तार । C. हवा के स्तंभ। D. पानी के स्तंभ। सितार एक तार से बजने वाला साधन है। तार या धातु के तारों में कंपन के कारण ध्वनि उत्पादन होती है। कंपन के कारण तार हिलता है, इस तार की लंबाई को तबदील करके उत्पादित ध्वनि की आवृत्ति बदल सकते हैं ।
B. मीटर में। C. सेकंड में। D. सेंटीमीटर में। प्रति सेकंड में दोलन की संख्या को दोलन की आवृत्ति कहा जाता है। आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज है।
B. तनी हुई तार । C. हवा के स्तंभ। D. पानी के स्तंभ। तबले में झिल्ली होती है, जिसको पीटने से कंपन होता है और यह ध्वनि पैदा करता है।
B. 20 Hz से 20 kHz तक । C. 20 kHz से अधिक । D. 30 kHz से अधिक । मानव कान प्रति सेकंड 20 कंपन के नीचे और 20,000 कंपन के ऊपर ध्वनि नहीं सुन सकता। इस प्रकार, मानव कान के श्रव्य रेंज 20 हर्ट्ज से लेकर 20 किलोहर्ट्ज़ तक है।
आर्यभट्ट प्रथम भारतीय उपग्रह था। खगोलीय निकाय जैसे सूर्य, चन्द्रमा, तारे, ग्रह, धूमकेतु, उल्काएँ, क्षुद्रग्रह तथा आकाश में अन्य पिंडो का विशाल संग्रह ब्रह्माण्ड कहलाता है।1 एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी प्रकाश वर्ष के रूप में परिभाषित की जाती है। किलोमीटर के साथ इसका सम्बन्ध व्यक्त किया जाता है | 1 प्रकाश वर्ष = 9.46 x1012 अंतरिक्ष में तारे ध्रुव तारा पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के निकट स्थित होता है और इसलिए पृथ्वी के सापेक्ष इसकी स्थिति समान रहती है। हैली धूमकेतु हर 76 वर्ष के अन्तराल के बाद दिखाई देता है। आंतरिक ग्रह - बुध, शुक्र, पृथ्वी, तथा मंगल। बाह्य ग्रह - बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपट्यून क्षुद्र ग्रह आंतरिक तथा बाह्य ग्रहों के बीच निहित होते हैं| क्षुद्र ग्रह कई सैकड़ों किलोमीटर तक गोल या अनियमित आकार से युक्त छोटी चट्टानी निकाय होते हैं । ये हमारे सौर मण्डल का भाग है। ये ग्रहों से छोटा लेकिन उल्कापिण्ड की तुलना में बड़ा होता है। क्षुद्र ग्रह, बुध और बृहस्पति की कक्षा के बीच स्थित होता है। ध्वनि तरंगों को गुज़रने के लिए पदार्थिक माध्यम की आवश्यकता होती है। चन्द्रमा की सतह पर कोई माध्यम (वायुमण्डल) नहीं होता है। इस प्रकार, यहाँ कोई कण उपस्थित नहीं होते हैं जो ध्वनि तरंग को आगे प्रसारित कर सके, इसलिए, चन्द्रमा पर ध्वनि नहीं गुज़र सकती है। मिल्की वे आकाश गंगा की आकृति सर्पिलाकार होती है। इसका केन्द्रीय भाग चमकीला तथा सर्पिलाकार भुजाओं के रूप में चकरी जैसा दिखाई देता है। तारों की स्थिति समय के साथ परिवर्तित होती है। तथापि वह तारा जिसकी स्थिति आकाश में स्थिर रहती है ध्रुव तारा कहलाता है। सप्तर्षि सात तारों से मिलकर बना होता है। यह ध्रुव तारा सप्तर्षि के अंतिम तारों को मिलाने के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। आकाश तारों का एक बड़ा समूह हैं | ब्रह्माण्ड में लगभग 100 अरब ऐसे समूह हैं | तारो के यह समूह विभिन्न आकृति तथा आकार के होते हैं | हमारी आकाश गंगा भी तारों का एक समूह हैं | जिसको मिल्की वे कहते हैं। पृथ्वी की सतह पर भूमि तथा पानी से प्रकाश के परावर्तन के कारण, पृथ्वी अंतरिक्ष से देखने पर नीली और हरी दिखाई देती है। युरेनस हरा दिखाई देता है क्योंकि युरेनस का वातावरण मुख्य रूप से हीलियम, अमोनिया तथा मीथेन के अवशेषों के साथ हाइड्रोजन से मिलकर बना होता है। इसके अलावा यह ठंडा ग्रह भी है क्योंकि यह पृथ्वी की तुलना में 370 गुना कम प्रकाश ऊर्जा प्राप्त करता है। मानव के प्रयासों से तैयार पिण्ड जो ग्रह के चारों ओर घूमता है, कृत्रिम उपग्रह कहलाता है। रूस 4 अक्टूबर, 1957 को अंतरिक्ष में पहले उपग्रह स्पुतनिक-I का प्रमोचन करने वाला विश्व का पहला देश है। सूर्य विशाल, गर्म आकाशीय निकाय है जिसका स्वयं का प्रकाश होता है। यह ऊष्मा तथा प्रकाश का उत्सर्जन एक तारे की तरह करता है इसलिए हम इसे एक तारे के रूप में वर्गीकृत करते हैं। हमारे सौर मण्डल में सूर्य ही केवल ऐसा पिंड है जो ऊष्मा तथा प्रकाश ऊर्जाओं का उत्सर्जन करता है। जीवन को बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्रकार की ऊर्जा प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से सूर्य से ही प्राप्त होती है। ग्रह, वह आकाशीय पिंड होते हैं जो सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में परिक्रमा करते हैं । सौर मंडल में आठ ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेपच्यून होते हैं । तारामंडल कई तारों का समूह होता है जो पशु या प्राणियों से मिलते जुलते पहचानने योग्य आकृतियों से बना होता है। आकाश में आठ ज्ञात तारामंडल हैं। सप्तऋषि वह तारामंडल है जिसमें ध्रुव तारा निहित होता है। उल्काएँ : उल्काएँ सूर्य के चारों ओर गतिशील छोटे पिंड होते हैं। कई बार उल्काएँ बहुत उच्च वेग पर पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर जाती हैं पर वायु के घर्षण के कारण जल जाती हैं । यह उल्का जलना शुरू हो जाती है और कुछ समय में वाष्पीकृत हो जाती है। उल्का का यह पथ रात्रि के आकाश में प्रकाश की एक लकीर के रूप में दिखाई देता है। इस प्रकार उल्काएँ टूटे तारे के रूप में जानी जाती हैं | उल्कापिंड : कई बार बड़े आकर की उल्काएँ जो वाष्पीकृत होने से पहले ही पृथ्वी की सतह पर पहुँचजाती हैं तो ये उल्का पिंड कहलाती हैं । ग्रह:- ग्रह, सूर्य के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं। यह गुरुत्वाकर्षण के करण सूरज के चारों तरफ प्रकिमा करते हैं | उपग्रह:- उपग्रह किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। कुछ ग्रहों के प्राकृतिक उपग्रह है तथा इसके अलावा मानव निर्मित उपग्रह भी हैं। सूर्य – तुल्यकालिक कक्षा : जब किसी उपग्रह का कक्षीय तल तथा सूर्य का अभीविन्यास हमेशा एक समान रहता है तो उसे सूर्य तुल्यकालिक कक्षा कहते हैं | अर्थात यह पृथ्वी के चारों ओर इस दर से घूमते हैं, जिस दर से पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है| अनुप्रयोग : यह बहुत निम्न कक्षा होती है। सुदूर संवेदन उपग्रह सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में परिक्रमा करते हैं। तथा सुदूर संवेदन कैमरे पृथ्वी के विशेष क्षेत्र की फोटोग्राफ लेने में सक्षम हैं। नहीं, चन्द्रमा पर कोई जीवन सम्भव नहीं है। इसके समर्थन में कारण है : 1. चन्द्रमा पर कोई पानी नहीं है जो हमारे जीवन के अस्तित्व के लिए पहली और सबसे बड़ी आवश्यकता है। 2. ऑक्सीजन, मनुष्य के स्वांस लेने के लिए आवश्यक है लेकिन चन्द्रमा पर ऑक्सीजन की मात्रा जीवन के अस्तित्व के लिए पर्याप्त नहीं है। 3. चन्द्रमा का तापमान भी जीवन को बनायें रखने के लिए उपयुक्त नहीं है। दिन के समय में, चन्द्रमा का तापमान उच्च चला जाता है और रात में तेजी से नीचे गिर जाता है। B. C. D. आपतित किरण तथा परावर्तित किरण के मध्य कोण =
तथा,
रेटिना पर बने प्रतिबिंब का प्रभाव, वस्तु को हटा लेने पर, तुरन्त ही समाप्त नहीं होता। यह लगभग 1/16 सेकंड तक बना रहता है। इसलिए, यदि नेत्र पर प्रति सेकंड 16 या इससे अधिक दर पर किसी गतिशील वस्तु के स्थिर प्रतिबिंब बनें, तो नेत्र को वह वस्तु चलचित्र की भाँति चलती-फिरती अनुभव होगी।
परितारिका नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश को नियंत्रित करती है। जब प्रकाश की मात्रा अधिक होती है तो यह सिकुड़ जाती है, जिसके कारण नेत्र में केवल अपेक्षित प्रकाश ही प्रवेश करता है|
मानव नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस एक उत्तल लेंस होता है तथा एक उत्तल लेंस वस्तु का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब बनाता है|
साधारण नेत्र का निकट बिंदु वह बिंदु है जिससे निकट दूरी पर रखी वस्तु धुंधली दिखाई देने लगती है| मानव नेत्र के लिए यह निकटतम दूरी 25 cm है, तथापि, 25 cm से निकट रखने पर पुस्तक के वर्ण धुंधले नज़र आने लगते हैं|
B. स्वच्छ मंडल C. दृष्टिपटल D. पुतली स्वच्छ मंडल, नेत्र गोलक के अग्र पृष्ठ पर उपस्थित होता है , इसलिए, मानव नेत्र में प्रवेश करने वाला प्रकाश सर्वप्रथम स्वच्छ मंडल से हो कर ही गुज़रता है|
B. क्रिस्टलीय लेंस पर C. दृष्टिपटल पर D. पुतली पर दृष्टिपटल मानव नेत्र का वह भाग है जो एक परदे की तरह कार्य करता है| इसलिए मानव नेत्र द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब उसके दृष्टिपटल पर ही अंकित होता है|
B. 45o C. 67.5o D. 90o परावर्तन के प्रथम नियम के अनुसार, परावर्तन कोण सदैव आपतन कोण के बराबर होता है|
B. सूर्य का लाल रंग C. आकाश का नीला रंग D. आकाश का सफ़ेद रंग किसी पारदर्शी माध्यम से गुज़रने पर श्वेत प्रकाश के सात वर्णों में विभाजित होने की परिघटना को प्रकाश का विक्षेपण कहते हैं । वर्षा के तुरंत बाद वायुमंडल में छोटी जल बूंदें सूक्ष्म प्रिज्मों के रूप में कार्य करती हैं और अपने पर गिरने वाली प्रकाश किरणों को प्रकीर्णित कर देती हैं। यह इन्द्रधनुष के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
मोतियाबिंद से पीड़ित व्यक्ति का क्रिस्टलीय लेंस दूधिया तथा धुंधला हो जाता है| इस कारण यह अपारदर्शी होने लगता है तथा मोतियाबिंद से पीड़ित व्यक्ति वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाता|
प्रकाश, सदैव सीधी रेखा में गति करता है| प्रकाश के इस गुण को प्रकाश का सरल रेखीय संचरण कहते हैं| इस कारण मुड़े हुए पाइप द्वारा मोमबत्ती से आता हुआ प्रकाश प्रेक्षक तक नहीं पहुँच पाता तथा मोमबत्ती दिखाई नहीं देती|
प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत : सूर्य | श्वेत प्रकाश का किसी प्रिज़्म से गुज़रने पर अपने सात रंगों में विभाजित होने की परिघटना को प्रकाश का विक्षेपण कहते हैं। समतल दर्पण में आभासी प्रतिबिंब बनता है| दर्पण से दर्पण के पीछे बने प्रतिबिम्ब की दूरी दर्पण के सामने रखे बिम्ब की दूरी के समान होती है| बहु परावर्तन पर आधारित दो उपकरण--- परिदर्शी और बहुमुर्तिदर्शी| दूर-दृष्टि दोष एक नेत्र दोष होता है जिसमें व्यक्ति दूर की वस्तुएँ तो स्पष्ट रूप से देख सकता है किन्तु निकट (25 सेमी) दूरी पर रखी वस्तुएँ स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है| प्रकाश के एक सरल रेखीय पथ को प्रकाश किरण कहते हैं| समतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर दर्पण के सामने बिंब रखा होता है। अतः प्रतिबिंब, दर्पण से परावर्तन, अपवर्तन और विक्षेपण तीन प्रकाशिक परिघटनायें हैं| निकट-दृष्टि एक प्रकार का नेत्र दोष है जिसमें व्यक्ति पास की वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से देख सकता है लेकिन दूर की वस्तुएं स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम नहीं होता है।
पोला
करना या
जुताई
मिट्टी को
ढीला करना और
मिट्टी में
हवा के संचरण
में सुधार
करता है। यह
नमी को बनाए
रखने में भी
सहायता करता
है। जुताई खेतों
में अवांछनीय
रूप से बढ़ते
पौधों को
हटाने की प्रक्रिया
है। यह
मिट्टी को
ऊपर की ओर
पलटकर इसकी
जलधारण
क्षमता भी
बढ़ाती है।
खरपतवार
को हटाना
खरपतवार
उन्मूलन
कहलाता है।
यह आवश्यक
हैं क्योंकि
खरपतवार
फ़सली पौधों
के साथ
बराबरी करते
हैं और उनकी
वृद्धि को प्रभावित
करते हैं।
कृषि
अभ्यास की
विभिन्न
गतिविधियाँ
हैं:
i. मिट्टी
की तैयारी
ii.
बुवाई
iii. खाद
और उर्वरकों
को मिलाना iv. सिंचाई
v. खरपतवार
से बचाव vi. कटाई
vii. भंडारण
यदि
बीजों को
अधिक गहराई
में बोया
जाता है, तो
वे सभी उगने
में सक्षम
नहीं होंगे
और यदि कम
गहराई पर
उगाए जाते है,
तो
पक्षियों
तथा जानवरों
द्वारा खा
लिए जाएँगे।
अत्यधिक
घनेपन को
रोकने के लिए
उपयुक्त दूरी
महत्वपूर्ण
होती है ताकि,
बीजों को
पर्याप्त
सूर्य का
प्रकाश, पोषक
तत्व एवं जल
प्राप्त हो।
लंबे
समय तक अनाज
के संग्रह के
लिए विभिन्न
सुरक्षा
उपाय हैं:
i)
जुताई
का महत्व :-
जुताई, पादप की
मूलों को
मिट्टी में
गहराई तक
पहुंचाने
तथा दृढ़ता से
बाँधने में
सहायक होती
है। यह मूलों
(जड़ों) को उचित
वायु का
आवागमन करती
है तथा
मिट्टी की नमी
के अवरोधन
में भी मदद
करती है। ii) समतलीकरण
का महत्व :-
जुताई करने
के बाद बने मिट्टी
के ढेले को
तोड़ने तथा
समतल करने के
लिए समतलीकरण
किया जाता
है। यह
सिंचाई के
समय पानी के
एकसमान
वितरण में
मदद करता है। iii) खाद देने का
महत्व :-
मिट्टी के
पोषक स्तर को
बनाए रखने के
लिए खाद दी
जाती है।
क्योंकि, लगातार एक
ही फसलों के
उगने से
मिट्टी की
गुणवत्ता
में कमी आ
जाती है। जो
बाद की फसल
में अच्छी
पैदावार को
बनाए रखने के
लिए आवश्यक
होता है।
मिट्टी
को तैयार
करना कृषि के
क्षेत्र में
प्रथम चरण
तथा
महत्वपूर्ण
कार्य है।
मिट्टी को उलट
− पुलट किया
जाता है
जिससे पोषक
समृद्ध
मिट्टी के
ऊपर आने में
तथा मिट्टी
में गहराई
में मूलों
(जड़ों) के
प्रवेश करने
में मदद
मिलती है।
पोली मिट्टी,
मिट्टी
में रहने
वाले केंचुओं
और
सूक्ष्मजीवों
की वृद्धि
करने में सहायता
करती है। यह
जीव किसानों
के मित्र होते
है क्योंकि
यह मिट्टी को
और पलटकर
पोला करते है
तथा ह्यूमस
बनाते है।
पारंपरिक
विधि
आधुनिक
विधि सस्ती
तथा प्रयोग
में आसान
होती है। अपेक्षाकृत
महंगी है तथा
रखरखाव की
आवश्यक होती
है। इसमें
पानी का
अपव्यय होता है। इसमें
पानी का बचाव
होता है। उदाहरण
− नहर, घिरनी,
रहट आदि। उदाहरण
- छिड़काव
तंत्र, ड्रिप
सिंचाई
तंत्र आदि।
फसल
की उपज में
वृद्धि करने
के लिए
विभिन्न उपाय
हैं: नई
तकनीक के
बारे में
जागरूकता भी
बेहतर फसल की
उपज के लिए
महत्वपूर्ण
है।
i)
कल्टीवेटर, ट्रैक्टर
द्वारा
संचालित
कृषि उपकरण
होता है जो
जुताई के लिए
उपयोग किया
जाता है। ii) रासायनिक
उर्वरक, आवश्यक
स्थूल पोषक
तत्व तथा
सूक्ष्म
पोषक तत्वों
से मिलकर बना
संश्लेषित
कार्बनिक
यौगिक होता
है जो कृषि
क्षेत्रों
में मिट्टी
की उर्वरकता
बढ़ाने के लिए
उपयोग किया
जाता है। iii) जैविक
कर्मक जो
खरपतवार को
नष्ट करने के
लिए उपयोग
किए जाते है, जैविक
खरपतवारनाशी
के रूप में
जाने जाते
है। उदाहरण, कवक, जीवाणु
तथा
कोचिनियल
कीट। iv) संकरित
किस्में
फसलों की वह
किस्में है
जो अभीष्ट
गुण जैसे
अधिक उपज, रोग
- प्रतिरोध
आदि को
विकसित करने
के लिए उत्कृष्ट
क़िस्मों के
निम्न किस्म
की फसल के साथ
प्रजनन द्वारा
प्राप्त
होती है। v)
कटाई
(हार्वेस्टिंग)
परिपक्व
फसलों की
कटाई तथा
संग्रहण की
प्रक्रिया
होती है।
i. समूह
चयन
ii.
ओराइजा
सेटाइवा iii. खरपतवार iv. फ़सली
पौधे
v. संकर
पौधे मलेरिया
B.
टीबी
C.
हैजा
D.
डिप्थीरिया
मलेरिया
एनोफिलीज मच्छर
द्वारा होता है, जो प्लाज्मोडियम
का वहन करता है
जो मलेरिया परजीवी
है।
वायरस
B.
बैक्टीरिया
C.
यीस्ट
D.
प्रोटोजोआ
पेचिश
और मलेरिया प्रोटोजोआ
के कारण होता है।
एण्टअमीबा हिस्टोलाईटिका
के कारण, पेचिश
होता है जबकि मलेरिया
प्लाज्मोडियम
के कारण होता है।
केवल
एककोशिकीय
हैं B.
केवल
बहुकोशिकीय
हैं C.
केवल
बहुकोशिकीय D.
एककोशिकीय
और
बहुकोशिकीय
दोनों
सूक्ष्मजीव
बहुकोशिकीय या
एककोशिकीय हो
सकते हैं। बैक्टीरिया, एक कोशिकीय
हैं जबकि कवक बहुकोशिकीय
हैं।
84%.
B.
91%.
C.
68%.
D.
78%.
हमारे
वातावरण में 78% नाइट्रोजन
गैस है। 21%
ऑक्सीजन
है और बाकी कार्बन
डाइऑक्साइड, पानी वाष्प, आर्गन आदि
होती हैं।
पाश्चुरीकरक
B.
परिरक्षक
C.
सफाईकर्मी
D.
उदासीनिकारक
परिरक्षक
वे रसायन हैं, जो आमतौर
पर सूक्ष्मजीवों
के विकास की जांच
करने में प्रयुक्त
होते हैं। जैसे
नमक, खाद्य
तेल, आदि।
बहुत
छोटे B.
बहुत
बड़े C.
नग्न
आँखों
द्वारा देखे
जा सकते हैं D.
मध्यम
आकार के
सूक्ष्मजीव
बहुत छोटे होते
कि नग्न
आंखों से दिखाई
नहीं देते हैं।
वायरस
B.
बैक्टीरिया C.
यीस्ट D.
प्रोटोजोआ
यीस्ट
फल और फलों के रस, में स्थित
शर्करा पर कार्य
करते हैं। किण्वन
की प्रक्रिया
द्वारा ये एथिल
एल्कोहल और कार्बन-डाईऑक्साइड
का बड़ी मात्रा
में उत्पादन करते
हैं।
डेंगू
वायरस B.
मलेरिया
परजीवी C.
चिकन
पॉक्स
वायरस D.
पोलियो
वायरस
मादा
एडिस मच्छर डेंगू
के वायरस का वहन
करती है। इसे अपने
अंडों के विकास
के लिए रक्त में
उपस्थित प्रोटीन
की आवश्यकता होती
है इसलिए यह काटता है।
काटने का समय मुख्यतः
सुबह और शाम है।
जल
और वायु
द्वारा B.
वायु
और भोजन
द्वारा C.
भोजन
द्वारा D.
जल, वायु और
भोजन द्वारा
रोगज़नक़
हमारे शरीर में
वायु के माध्यम
से सांस लेने के
द्वारा प्रवेश
कर सकते हैं, पानी जो हम
पीते हैं या भोजन
जो हम खाते हैं
या एक संक्रमित
व्यक्ति से सीधे
संपर्क से हस्तांतरित
हो सकते हैं।
पॉलिएस्टर । B. ऐक्रिलिक । C. रेयॉन । D. नाइलॉन । नाइलॉन एक मानव निर्मित रेशा है । इसे 1931 में बिना किसी प्राकृतिक कच्चे माल (पौधे या जन्तु से प्राप्त) का उपयोग किये बनाया गया था । इसका निर्माण कोयले, जल और वायु से किया गया था । यह प्रथम पूर्ण रूप से संश्लेषित रेशा था ।
दो भिन्न प्रकार के प्लास्टिक हैं वे रेशे जो मानव द्वारा निर्मित होते हैं , संश्लेषित रेशे कहलाते हैं ।
कपास
और जूट पौधो
से प्राप्त
होने वाले
प्राकृतिक
रेशे हैं ।
ऊन और रेशम जंतुओं से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक रेशे हैं । रेयॉन काष्ठ लुगदी से निर्मित संश्लेषित रेशा है ।
A. उसका आकार तथा परिमाण SOLUTION
A. बाह्य ग्रहSOLUTION
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Right Answer is: C
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(b) ओरॉयन।
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(b) ओरॉयन में प्रमुख तारे
A. मधुर संगीत की स्थिति में ।SOLUTION
A. कंपन की आवृत्ति।SOLUTION
A. वर्नियर पैमाने से ।SOLUTION
A. गाड़ी के हार्न को ज़ोर से बजाना चाहिए ।SOLUTION
A. आंतर कर्ण कहते हैंSOLUTION
A. आवधिक गति ।SOLUTION
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A. 1 HzSOLUTION
A. हवा की नली से ।SOLUTION
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A. तनी हुई झिल्ली।SOLUTION
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A. क्रिस्टलीय लेंसSOLUTION
A. परितारिका परSOLUTION
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प्रकाश के कृत्रिम स्रोत: बल्ब , ट्यूब लाईट|SOLUTION
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