विद्युत तारों
नाइलॉन मजबूत, प्रत्यास्थ और हल्का होता है । अतः इसका उपयोग गलीचे, ब्रश के रेशे और टायर बनाने में किया जाता है ।
बैकेलाइट का उपयोग बिजली के स्विच बनाने में किया जाता है क्योंकि यह विद्युत का कुचालक है ।
नाइलॉन के रेशे मजबूत, लचीले और हल्के होते हैं । ये चमकदार और धोने में आसान होते हैं । इसलिए इनका उपयोग कपड़े बनाने में किया जाता है ।
रेयॉन रेशम का सस्ता विकल्प है ।
ऐक्रिलिक ऊन की तरह दिखने वाला रेशा है ।
संश्लेषित रेशों
नायलॉन सर्वप्रथम निर्मित संश्लेषित रेशा है ।
वे रेशे जो या तो पौधों से या जन्तुओं से प्राप्त होते हैं , प्राकृतिक रेशे कहलाते हैं ।
ऐक्रिलिक एक प्रकार का, ऊन जैसा, संश्लेषित रेशा है । यह विभिन्न प्रकार के रंगों में उपलब्ध है और इसका उपयोग स्वैटर, शॉल और कम्बल बनाने में किया जाता है । ऐक्रिलिक से बने कपड़े तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं ।
विभिन्न बर्तनों जैसे फ्राई पेन के हत्थे प्लास्टिक के बने होते हैं क्योंकि प्लास्टिक ऊष्मा का कुचालक है । इस कारण खाना पकाते समय इसके हत्थे गर्म नहीं होते ।
भोजन को समान्यतः प्लास्टिक के पात्रों में संग्रहित किया जाता है क्योंकि ये हल्के, सस्ते, मजबूत और उपयोग में आसान होते हैं ।
मेलामाइन अग्निरोधी होता है और यह अन्य प्लास्टिक की तुलना में आसानी से ऊष्मा को सहन कर सकता है । इसलिए इसका उपयोग अग्निरोधी बर्तनों और कपड़ों के निर्माण में किया जाता है ।
A.
ऐलुमिनियम ।
B.
सिल्वर ।
C.
गोल्ड ।
D.
कॉपर ।
ऐलुमिनियम का उपयोग खाद्य सामग्री को लपेटने के लिए किया जाता है क्योंकि यह एक सस्ती और हल्की धातु है जो की चांदी जैसा सफेद होता है । यह रासायनिक रूप से भी कम अभिक्रियाशील होता है।
A.
वियोजन अभिक्रिया ।
B.
संयोजन अभिक्रिया ।
C.
विस्थापन अभिक्रिया ।
D.
प्रतिस्थापन अभिक्रिया ।
अधिक अभिक्रियाशील धातु (ज़िंक) कम अभिक्रियाशील धातु (कॉपर) को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है ।
A.
लोहा ।
B.
जस्ता ।
C.
सोना ।
D.
तांबा ।
सोना एक चमकदार धातु है । इसका उपयोग मूल्यवान आभूषण बनाने में किया जाता है । यह तन्य, आघातवर्धनीय और चमकीली होती है ।
A.
नाइट्रोजन ।
B.
ऑक्सीजन ।
C.
सल्फर ।
D.
क्लोरीन ।
क्लोरीन जल से संदूषकों को हटाने वाले एक महत्वपूर्ण रसायन के रूप में जानी जाती है ।
A.
ये तारों में खींची जा सकती हैं ।
B.
ये शीट/प्लेट में बदली जा सकती हैं ।
C.
ये चमकदार होती हैं ।
D.
ये विद्युत की सुचालक होती हैं ।
धातुएँ तन्य होती हैं जिसका अर्थ है ये तारों में खींची जा सकती हैं । धातुओं का वह गुण जिसके कारण इन्हें पतली शीटों में पीटा जा सकता है आघातवर्धनीयता कहलाता हैं । चूंकि धातुएँ निनाद की ध्वनि उत्पन्न करती है इसलिए ये ध्वानिक कहलाती हैं ।
A.
वे ध्वानिक होती हैं ।
B.
ये शीट/प्लेट में बदली जा सकती हैं ।
C.
ये तारों में खींची जा सकती हैं ।
D.
ये ऊष्मा की सुचालक होती हैं ।
धातुएँ आघातवर्धनीय होती हैं जिसका अर्थ है ये शीट में बदले जा सकने का गुण रखती हैं । धातु का वह गुण जिसके कारण यह तारों में खींची जा सकती है, तन्यता कहलाता है । चूंकि धातुएँ निनाद की ध्वनि उत्पन्न करती है इसलिए ये ध्वानिक कहलाती हैं ।
A.
आयरन ।
B.
ऐलुमिनियम ।
C.
सोडियम ।
D.
ज़िंक।
सोडियम एक क्षार धातु है जो नरम और अत्यधिक अभिक्रियाशील होती है ।
A.
एक धातु ।
B.
एक अधातु ।
C.
एक उपधातु ।
D.
एक गैस ।
अधिकांश धातुएँ विद्युत की एक सुचालक होती हैं । इनका गलनांक उच्च होता है और प्रतिरोधकता कम होती है ।
A.
सल्फर।
B.
कार्बन।
C.
ब्रोमीन।
D.
तांबा ।
धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं । तांबा एक धातु है ।
A.
सोडियम ।
B.
ऑक्सीजन ।
C.
फ्लोरीन ।
D.
फॉस्फोरस ।
सोडियम एक धातु है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन त्यागता है । ऑक्सीजन, फ्लोरीन तथा फॉस्फोरस अधातु है ।
A.
कॉपर ।
B.
ज़िंक।
C.
आयरन ।
D.
क्लोरीन ।
क्लोरीन एक चमक, आघातवर्ध्यता और तन्यता रहित पदार्थ है । यह स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है ।
वे तत्व जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाते हैं अधातु कहलाते हैं।
पेन्सिल की लीड में ग्रेफाइट अधातु का उपयोग किया जाता है।
पारा कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाने वाली धातु है।
ऐलुमिनियम
जब एक अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के जलीय विलयन से विस्थापित कर देती है तो इस अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
कॉपर ।
हाइड्रोजन ।
सोडियम ।
आघातवर्धनीयता ।
उपयोग : इसका उपयोग बोतल
संश्लेषित रेशों में विशिष्ट गुण होते हैं । ये जल्दी सूखते हैं । ये अधिक चलाऊ, सस्ते, आसानी से उपलब्ध और रख-रखाव में आसान होते हैं । अतः इन्हें कपड़ों के निर्माण के लिए अधिक महत्व दिया जाता है ।
i) संश्लेषित रेशे जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं।
ii) संश्लेषित रेशे पसीना (जल) नहीं सोखते हैं । अतः ये आर्द्र दिनों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।
iii) संश्लेषित रेशे गर्म करने पर पिघल जाते हैं । इसलिए इनके बने हुए वस्त्र रसोईघर अथवा प्रयोगशाला में पहनने के उपयुक्त नहीं होते चूँकि वस्त्रों में आग लग जाने पर ये पहनने वाले व्यक्ति के शरीर से चिपक जाते हैं । अतः यह बहुत आपदाजनक हो सकता है ।
प्लास्टिक के गुण निम्न हैं :
1. अनभिक्रियाशील
2. हल्का, मजबूत और चलाऊ
3. ऊष्मा और विद्युत का कुचालक
संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा अधिक लोकप्रिय निम्न कारणों से हैं-
(i) संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा अधिक मजबूत होते हैं ।
(ii) ये प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा रख-रखाव में अधिक सुविधाजनक होते हैं ।
(iii) ये प्राकृतिक रेशों से सस्ते होते हैं ।

i ) (d)
ii ) (e)
iii ) (a)
iv ) (b)
v ) (c)
संश्लेषित रेशों के गुणधर्म :
i) ये सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं ।
ii) इन पर सलवटें नहीं पड़ती हैं । इसलिए इन पर इस्त्री करने की आवश्यकता नहीं होती है । इनका प्राकृतिक रेशों की तरह रख-रखाव भी नहीं करना पड़ता है ।
iii) ये जल्दी सूखते हैं ।
iv) ये प्राकृतिक रेशों की तुलना में अत्यधिक प्रत्यास्थ होते हैं ।
v) ये प्राकृतिक रेशों की तुलना में अधिक चलाऊ होते हैं और सिकुड़ते नहीं हैं ।
i. बहुलकीकरण
ii. सेलुलोज़
iii. रेयॉन
iv. ऐक्रिलिक
v. थर्मोसेटिंग प्लास्टिक
A.
यौगिक ।
B.
अणु ।
C.
परमाणु ।
D.
आयन ।
एक तत्व की सूक्ष्मतम इकाई परमाणु कहलाती है । एक परमाणु पदार्थ की मूल इकाई है जिसमे एक नाभिक और एक इलेक्ट्रॉन अभ्र होता है ।
A.
हरा ।
B.
लाल ।
C.
पीला ।
D.
नीला ।
5 अणु क्रिस्टलीय जल की उपस्थिती के कारण इसका रंग नीला होता है ।
A.
अम्ल में ।
B.
क्षार में ।
C.
जल में ।
D.
कैरोसीन में ।
यह जल और ऑक्सीजन के साथ तीव्र अभिक्रियाशील है ।
A.
आयरन ।
B.
ज़िंक ।
C.
कॉपर ।
D.
फॉस्फोरस ।
फॉस्फोरस को जलने से बचाने के लिए इसे जल में संग्रहीत किया जाता है क्योंकि वायु के संपर्क में आने पर यह जलने लगता है ।
A.
हाइड्रोजन ।
B.
लीथियम ।
C.
सोडियम ।
D.
ऐलुमिनयम ।
लीथियम नरम, सफेद और सबसे हल्की धातु है यह आवर्त सारणी के क्षारीय धातु वर्ग से संबन्धित है ।
A.
अम्लीय ।
B.
क्षारीय ।
C.
रेडियोधर्मी ।
D.
उदासीन ।
धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं ।
A.
हाइड्रोजन ।
B.
ऑक्सीजन ।
C.
नाइट्रोजन ।
D.
जल ।
धातुएँ सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं । अधातुओं की क्षार से अभिक्रियाएँ जटिल होती हैं ।
A.
सल्फर
।
B. फॉस्फोरस ।
C. सोडियम ।
D. सिलिकॉन ।
फॉस्फोरस एक अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु है । यह वायु में खुला छोड़ने पर आग पकड़ लेती है । फॉस्फोरस को वायुमंडलीय ऑक्सीजन के संपर्क में आने से रोकने के लिए इसे जल में संग्रहीत किया जाता है ।
A.
ऑक्सीजन ।
B.
हाइड्रोजन ।
C.
नाइट्रोजन ।
D.
कार्बन डाईऑक्साइड ।
अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ सल्फ्यूरिक अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं । ये अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं जो एक 'पॉप' की ध्वनि के साथ जलती है ।
हाइड्रोजन गैस ।
केवल ब्रोमीन एक ऐसी अधातु है जो द्रव अवस्था में पायी जाती है ।
क्लोरीन गैस का उपयोग जल के शुद्धिकरण में किया जाता है ।
फॉस्फोरस
सल्फर डाइऑक्साइड का निर्माण होता है ।

अधातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय अथवा उदासीन प्रकृति के होते हैं ।
कॉपर, ज़िंक से कम अभिक्रियाशील है। इसलिए कॉपर, ज़िंक सल्फेट विलयन से ज़िंक को विस्थापित नहीं कर पाता है।
आयोडीन, फॉस्फोरस, ऑक्सीजन, ब्रोमीन ।
चाकू से काटी जाने वाली दो धातुओं के नाम हैं: (
ऐलुमिनियम, नींबू में उपस्थित सिट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है। इसलिए नींबू के आचार को ऐलुमिनियम के पात्रों में नहीं रखना चाहिए।
सजीवों में पाये जाने वाले प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, एन्जाइम, विटामिन आदि अधात्विक यौगिक हैं । ये सभी कार्बनिक यौगिक हैं । ये सजीवों के वृद्धि एंव विकास के लिए आवश्यक हैं ।
पैकेट बन्द खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने के लिए उसमें नाइट्रोजन गैस भरी जाती है ।
(a) आघातवर्धनीयता − पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसे शीटों में पीटा जा सकता है आघातवर्धनीयता कहलाता है।
(b) तन्यता- पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसे पतले तार में खींचे जा सकता है तन्यता कहलाता है।
(c) ध्वानिक − धातुओं को कठोर सतह से टकराने पर इनके द्वारा एक विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न करने के गुण को ध्वानिक कहा जाता है ।
(a) सोडियम एक अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है । यह आसानी से वायु और जल के साथ अभिक्रिया करके बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करती है । इसलिए इसे मिट्टी के तेल में रखा जाता है ।
(b) फॉस्फोरस
जब तांबे के पात्र को लंबे समय तक नम वायु में खुला छोड़ दिया जाता है तो इस पर हल्के हरे रंग की परत जमा हो जाती है। हरा पदार्थ, कॉपर हाइड्रॉक्साइड एवं कॉपर कार्बोनेट का मिश्रण होता है।
रासायनिक अभिक्रिया:

आभूषण निर्माण में सोने का उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह:
(i) चमकदार होता है ।
(ii) उच्च आघातवर्धनीय होता है ।
(iii)
तन्य
होता है।
विद्युत अपघटन विधि द्वारा किसी धातु पर किसी अन्य धातु का लेप चढ़ाना विद्युत लेपन कहलाता है।
उदाहरण: (
(
|
धातु |
यौगिक |
|
लोहा |
आयरन ऑक्साइड |
|
ताँबा |
कॉपर कार्बोनेट |
|
चाँदी |
सिल्वर सल्फाइड |
अधातुओं के भौतिक गुण निम्नलिखित
विभिन्न सामग्रियों को सूक्ष्म जीवों से बचाया जा सकता है:
i. सूक्ष्म जीवों से बचाव हेतु कपड़ों, सूखी वस्तुओं को उचित रख रखाव तथा संरक्षण से जीवाणुओं द्वारा हानि पहुँचाने से रोक सकते हैं । ऊष्ण तथा नम वातावरण से सूक्ष्मजीव इन वस्तुओं पर उग आते हैं और उन्हें ख़राब कर देते हैं अतः नमी से दूर रखकर इन्हें बचा सकते हैं ।
ii. फैब्रिक तथा चमड़े के सामानों को: फैब्रिक तथा चमड़े के सामान का क्षरण सूक्ष्म जीवों द्वारा न हो इसके लिए चमड़े को टैनिंग करके सुरक्षित रखा जा सकता है । सूर्य के प्रकाश में चमड़े पर लगे सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते है ।
iii. टिम्बर को सूक्ष्म जीवों से बचाव हेतु पेन्ट किया जाता है ।
iv. भोजन को रेफ्रिजरेटर में व स्टरलाइजेशन विधि के द्वारा सूक्ष्म जीवों से मुक्त किया जाता है । इससे खाद्य पदार्थ एक निश्चित समय तक खराब नहीं होते । फ्रिज एक उपकरण है जिसके द्वारा सामान्य से कम ताप उत्पन्न कर सूक्ष्म जीवों की उपापचयी क्रियाएं तथा वृद्धि को नियंत्रित किया जाता है ।
v. भोज्य पदार्थों को उबालकर: डिब्बों में भरने से पहले खाद्य पदार्थों को 15 पौण्ड दाब तथा 120�C से 126�C तापमान पर लगभग 12 से 19 मिनट गर्म करते हैं जिससे जीवाणु और उनके अन्तः बीजाणु पूर्णतया मृत हो जाते हैं ।
A.
मजबूत और प्रत्यास्थ होते हैं।
B.
कमजोर और आसानी से तोड़े जा सकते हैं ।
C.
भारी होते हैं ।
D.
प्राकृतिक रेशे होते हैं ।
नाइलॉन रेशे संश्लेषित रेशे होते हैं । ये मजबूत, प्रत्यास्थ और वजन में हल्के होते हैं । इनका उपयोग रस्सियाँ, मोजे, टेंट, पैराशूट आदि बनाने में किया जाता है ।
A.
मेलामाइन के ।
B.
C.
बैकेलाइट के ।
D.
बिजली के स्विच बैकेलाइट के बने होते हैं क्योंकि यह विद्युत का कुचालक होता है ।
A.
थर्मोसेटिंग प्लास्टिक ।
B.
थर्मोप्लास्टिक ।
C.
प्राकृतिक रेशे ।
D.
संश्लेषित रेशे ।
PVC (पॉली विनाइल क्लोराइड) और पॉलीथीन थर्मोप्लास्टिक के उदाहरण हैं । इन्हें गर्म करके पुनः वांछित आकार में ढाला का सकता है ।
A.
PET का ।
B.
टेफ्लॉन का ।
C.
ऐक्रिलिक का ।
D.
मेलामाइन का ।
टेफ्लॉन एक विशेष प्लास्टिक है जिस पर तेल और जल नही चिपकता है । इसका उपयोग भोजन पकाने के बर्तनों पर न चिपकने वाली परत लगाने में किया जाता है ।
A.
B.
मेलामाइन ।
C.
पॉलीथीन ।
D.
कुछ प्लास्टिक ऐसे होते हैं जिन्हें ऊष्मा देकर नर्म नहीं किया जा सकता है । ये थर्मोसेटिंग प्लास्टिक कहलाते हैं । बैकेलाइट और मेलामाइन इसके उदाहरण हैं ।
A.
थर्मोप्लास्टिक ।
B.
थर्मोसेटिंग प्लास्टिक ।
C.
इलास्टोमर ।
D.
एकलक ।
ऐसा प्लास्टिक जो गर्म करने पर आसानी से विकृत हो जाता है और सरलतापूर्वक मुड़ जाता है थर्मोप्लास्टिक कहलाता है । पॉलीथीन और PVC थर्मोप्लास्टिक के कुछ उदाहरण हैं ।
A.
अभिक्रियाशील होता है ।
B.
अनभिक्रियाशील होता है ।
C.
महंगा होता है ।
D.
वजन में भारी होता है ।
प्लास्टिक अनभिक्रियाशील, चलाऊ, सस्ता और वजन में हल्का होता है । यह संक्षारण प्रतिरोधी होता है ।
A.
B.
टेफ्लॉन ।
C.
रेयॉन ।
D.
नाइलॉन ।
PET पॉलिएस्टर का एक रूप है । सामान्यतः इसका उपयोग बोतलें और बर्तनों के निर्माण में किया जाता है । पॉलिएस्टर एक रसायन जो एस्टर कहलाता है, की इकाइयों की पुनरावर्ती से बनता है ।
A.
रेशम ।
B.
पेट्रोलियम ।
C.
कपास ।
D.
जूट ।
एक्रिलिक एक संश्लेषित रेशा है और सभी संश्लेषित रेशे पेट्रोलियम मूल के कच्चे माल जो पेट्रोरसायन कहलाते हैं, से विविध प्रक्रमों द्वारा तैयार किये जाते हैं ।
A.
प्राकृतिक पदार्थ ।
B.
जैव निम्नीकरणीय ।
C.
जैव अनिम्नीकरणीय ।
D.
अत्यधिक अभिक्रियाशील ।
प्लास्टिक जैव अनिम्नीकरणीय होते हैं ।
A.
महंगे होते हैं ।
B.
जल्दी सूख जाते हैं ।
C.
टिकाऊ नहीं होते ।
D.
रख-रखाव में मुश्किल होते हैं ।
संश्लेषित रेशे अधिक चलाऊ और कम महंगे होते हैं । ये शीघ्र सूख जाते हैं और रख-रखाव में भी सुविधाजनक होते हैं ।
A.
ईथर ।
B.
एस्टर ।
C.
अम्ल ।
D.
एल्कोहॉल ।
पॉलिएस्टर एक बहुलक है जो एस्टर की इकाइयों की पुनरावर्ती से बनता है ।
A.
फ्रक्टोज़ इकाइयों द्वारा ।
B.
ग्लूकोज़ इकाइयों द्वारा ।
C.
माल्टोज़ इकाइयों द्वारा।
D.
सुक्रोज़ इकाइयों द्वारा ।
कपास एक बहुलक है जो सेलुलोज़ कहलाता है । सेलुलोज़ बड़ी संख्या में ग्लूकोज़ इकाइयों द्वारा निर्मित होता है ।
A.
कागज ।
B.
लकड़ी ।
C.
टिन का डिब्बा ।
D.
ऊनी वस्त्र ।
पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से विघटित नहीं होता, जैव अनिम्नीकरणीय कहलाता है । टिन का डिब्बा जैव अनिम्नीकरणीय है ।
A.
रेयॉन ।
B.
पॉलीएस्टर ।
C.
एक्रिलिक ।
D.
नाइलॉन ।
पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने की रस्सी के निर्माण के लिए नाइलॉन का उपयोग किया जाता है । नाइलॉन का एक रेशा इस्पात के तार से अधिक प्रबल होता है ।
A.
रेयॉन ।
B.
एक्रिलिक ।
C.
नाइलॉन ।
D.
वैज्ञानिकों को रेशम के समान गुणों वाले रेशे प्राप्त करने में सफलता प्राप्त हुई । इस प्रकार का रेशा काष्ठ लुगदी के रासायनिक उपचार से प्राप्त किया गया । यह रेशा रेयॉन या कृत्रिम रेशम कहलाया ।
A.
रेयॉन ।
B.
टेरीलीन ।
C.
नाइलॉन ।
D.
एक्रिलिक ।
टेरीलीन एक संश्लेषित रेशा है । इसका निर्माण एक रसायन टरफ्थैलिक अम्ल से किया जाता है । इसका उपयोग वस्त्र, रस्सियाँ, पाल आदि बनाने में किया जाता है ।
A.
नाइलॉन ।
B.
पॉलिएस्टर ।
C.
रेयॉन ।
D.
कपास ।
कपास एक प्राकृतिक रेशा है और यह कपास के पौधों से प्राप्त किया जाता है । नाइलॉन, पॉलीएस्टर और रेयॉन मानव निर्मित या संश्लेषित रेशे हैं ।
A.
कागज ।
B.
काष्ठ लुगदी ।
C.
फलों के गूदे ।
D.
कपड़े ।
उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम छोर पर वैज्ञानिकों को रेशम के समान गुणों वाले रेशे प्राप्त करने में सफलता प्राप्त हुई । इस प्रकार का रेशा काष्ठ लुगदी के रासायनिक उपचार से प्राप्त किया गया । यह रेशा रेयॉन या कृत्रिम रेशम कहलाया ।
A.
एलेक्जेंडर फ्लेमिंग
B.
एडवर्ड जेनर
C.
लुई पाश्चर
D.
रॉबर्ट कोच
1857 में लुईस पाश्चर ने किण्वन की खोज की थी
A.
केक बनाना
B.
दही बनाना
C.
ब्रेड निर्माण
D.
पेस्ट्री निर्माण
लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया दही के निर्माण के लिए उत्तरदायी हैं। यह जीवाणु दूध में वृद्धि करता है और इसे दही में परिवर्तित कर देता है।
A.
बैक्टीरिया
B.
अमीबा
C.
पैरामीशियम
D.
युग्लीना
ये सभी रोगजनक (अर्थात् रोग के कारण) सूक्ष्म जीव हैं। जीवाणु जैसे टीबी, हैजा, टाइफाइड, आदि रोग उत्पन्न करते हैं और पोलियो, चिकन- पॉक्स, आदि वायरस जनित रोग हैं। कवक मुख्य रूप से त्वचा और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है।
A.
वायरस
B.
प्रोटोजोअन
C.
यीस्ट
D.
बैक्टीरिया
यीस्ट फल और फलों के रस जिनमें शर्करा होती है पर काम करते हैं। किण्वन की प्रक्रिया द्वारा वे एथिल एल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड की बड़ी मात्रा उत्पन्न करते हैं, इस प्रकार फल और फलों का रस खराब करते हैं।
A.
किण्वन
B.
एंटीबायोटिक पेनिसिलिन
C.
टिटेनस रोग
D.
कॉर्क कोशिकाएं
1929 में, अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने एक कवक पेनिसिलियम नोटेटम से एक एंटीबायोटिक पेनिसिलिन को प्राप्त किया।
A.
श्वसन के लिए
B.
पाचन के लिए
C.
जनन के लिए
D.
गमन के लिए
कूटपाद कोशिकाद्रव्यी अतिवृद्धियाँ हैं जो खींची या फैलाई जा सकती हैं जो जीव को चलने और भोजन के कणों को निगलने में सक्षम बनाते हैं।
A.
बैक्टीरिया
B.
शैवाल
C.
वायरस
D.
कवक