गंगा कार्य परियोजना
लेड और आर्सेनिक
संगमरमर कैंसर वह परिघटना है जिसमें सफेद संगमरमर अम्ल वर्षा के कारण पीला पड़ जाता है ।
धुआँ और NO2, SO2 आदि गैसें वायु प्रदूषकों के उदाहरण हैं ।
हैजा
क्लोरीन गैस
ईंधन के अपूर्ण दहन के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का उत्पादन होता है ।
पौधा-घर प्रभाव
सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
(i) पीने के लिए उपयुक्त जल को पेय जल भी कहते हैं |
(ii) जल का शुद्धिकरण उबालकर, निस्यंदन और क्लोरीनीकरण द्वारा किया जा सकता है |
वह जल जो शुद्ध और पीने के योग्य हो पेय जल कहलाता है । उबालना और क्लोरीनीकरण जल के शुद्धिकरण की दो विधियाँ हैं ।
हमें पीने से पूर्व अशुद्धियों जैसे मिट्टी और जीवाणुओं आदि को पृथक करने के लिए पानी छानना चाहिए । हैजा और टाइफाइड दो जल जनित रोग हैं ।
जल का हानिकारक और अवांछित पदार्थो द्वारा संदूषण जल प्रदूषण कहलाता है ।
वाहित मल और विषैले रसायन जल प्रदूषक के उदाहरण हैं ।
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड
पौधा-घर गैसें पृथ्वी की सतह
वायु का अवांछित और हानिकारक पदार्थों से संदूषण वायु प्रदूषण कहलाता है । अस्थमा और छींक आना वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियाँ हैं ।
ओज़ोन वायुमण्डल के ऊपरी भाग में समतापमण्डल में उपस्थित होती है । ओज़ोन परत पृथ्वी की सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा करती है ।
रेफ्रीजरेटरों, एयरकण्डीशनरों तथा ऐरोसॉल फुहारों में उपयोग किया जाने वाला क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) ओज़ोन परत के अवक्षय के लिए उत्तरदायी है और जिसने एक छिद्र बना दिया है यह ओज़ोन छिद्र कहलाता है ।
वह वर्षा जो सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल की उपस्थिति के कारण अम्लीय प्रकृति की होती है, अम्ल वर्षा कहलाती है । वायु में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जल वाष्प के साथ अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल का निर्माण कर लेते हैं । जब ये अम्ल वर्षा जल के साथ नीचे गिरते हैं तो यह अम्ल वर्षा कहलाती है ।
हम '3 R सिद्धान्त'- कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनः चक्रण का उपयोग कर जल का संरक्षण कर सकते हैं । कई बार हम जल का पुनः उपयोग कर सकते हैं जैसे सब्जी को धोने में काम में लिया गया जल बाग के पौधों को पानी देने में काम में लिया जा सकता है । जल शोधन संयंत्र का उपयोग करके काम में लिए गए जल से पुनः शुद्ध जल प्राप्त किया जा सकता है । हमें वर्षा जल का संरक्षण करना चाहिए ।
जब जल स्रोत का जल पोषक तत्वों से समृद्ध हो जाता है तब शैवाल जैसे पौधे अत्यधिक वृद्धि कर लेते हैं । जब ये शैवाल मर जाते हैं ये अपघटकों (जैसे जीवाणु) के लिए भोजन बन जाते हैं । ये अपघटक जल में उपस्थित बहुत अधिक ऑक्सीजन का उपभोग कर लेते हैं । जिसके परिणाम स्वरूप अन्य जलीय जंतुओं को श्वसन के लिए ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और अंततः वे मर जाते हैं । यह प्रक्रम यूट्रोफिकेशन कहलाता है ।
गंगा एक्शन प्लान गंगा नदी को साफ करने की एक महत्वाकांक्षी योजना थी । यह योजना 1985 मे भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी थी ।
जनसंख्या वृद्धि के कारण और उद्योग धंधो के विकास के कारण यह नदी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में असफल रहा ।
इसकी असफलता के कारण :
मानवीय क्रियाकलाप जैसे नहाने, कपड़े धोने, कूड़ा फेंकने, फूल, देवी और देवताओं आदि की मूर्तियों का विसर्जन इसके प्रदूषण का प्रमुख कारण है । ऐसी औद्योगिक इकाइयों का विकास जो नदी में सीधे विषैले रसायन छोडती हैं गंगा नदी के प्रदूषण का अन्य कारण है ।
प्रदूषित जल के तीन हानिकारक प्रभाव निम्न हैं :
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निम्न कदम उठाये जा सकते हैं-
ii) जीवाश्मीय ईंधनों के स्थान पर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और पनविद्युत जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग वायुप्रदूषण को कम कर सकता है ।
iii)
iv)
v) पत्तियों को जलाने के स्थान पर
जल प्रदूषण के विभिन्न स्रोत निम्न हैं
ताजमहल के संगमरमर का सफेद रंग वायु प्रदूषण के कारण पीला हो गया है । आगरा के पास स्थित रबर परिष्क्रमण
जब यह अम्ल वर्षा जल के साथ नीचे गिरता है तब यह वर्षा अम्ल वर्षा कहलाती है । अम्ल वर्षा ऐतिहासिक स्मारकों को संक्षारित करता है और यह प्रक्रिया ताजमहल का संक्षारण कहलाती है । वह परिघटना जिसमे अम्ल वर्षा के कारण सफ़ेद संगमरमर संक्षारित होकर पीला
A.

B.

C.
![]()
D.

A.

B.

C.

D.
-3, -4, -5 और -6
A.

B.

C.
0
D.
1
किसी
संख्या के योज्य
प्रतिलोम का अर्थ
उस संख्या का विपरीत
होता है।
A.
19/10, 18/10,17/10
B.
18/10, 17/10, 16/10
C.
-18/10, 17/10, 16/10
D.
-19/10, -18/10, -17/10
-2 को -20/10 के रूप में और 0 को 0/10 के रूप में लिखा जा सकता है। इस प्रकार हमें -2 और 0 के बीच -19/10, -18/10, -17/10, -15/10, ..........,- 1/10 संख्याएँ ज्ञात होती हैं। हम इस सूची में से किन्हीं भी तीन संख्याओं को ले सकते हैं।
A.
B.
C.
D.
0 ऐसी परिमेय संख्या है जिसका कोई व्युत्क्रम नही होता है।
A.
B.
C.
D.
1, - 1 अपने स्वयं का ही व्युत्क्रम है।
A.
B.
C.
D.
0 का ऋणात्मक 0 होता है।
का मान है
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
a/b
1 = 1
a/b = a/b, जहाँ a/b कोई परिमेय संख्या है।
उदाहरण के लिए, 3/8
1 = 1
3/8 = 3/8
इसलिए, 1 गुणात्मक तत्समक है।
दी हुई संख्याएं हैः
और
0

अतः, दो परिमेय
संख्याएँ
और
हैं।
आरोही क्रम में संख्याएं हैः






![]()

और
के
बीच का माध्य
ज्ञात
कीजिए।

का
मान ज्ञात
कीजिए।

-7/4
को संख्या
रेखा पर
निम्नवत
तरीके से
निरूपित किया
जा सकता है ।





का
योग ज्ञात
कीजिए।

7,11,21 और 22 का ल.स. 462 है।

माना
कि
को
प्राप्त
करने के लिए
में
से x
को घटाया
गया है, तब





दी गई परिमेय संख्याओं को समान हरों के साथ परिमेय संख्याओं में परिवर्तित कीजिए।


दी
गयी परिमेय
संख्याओं को
धनात्मक हर
के रूप में
व्यक्त करने
पर
और
प्राप्त
होता है।
7, 6, 12 और 24 का ल०स० 168 है,
अब दी गयी परिमेय संख्याओं को हर वाली परिमेय संख्याओं के रूप में लिखने पर




इस प्रकार प्राप्त संख्याओं के अंशों 96, -140, 42, -77 को घटते क्रम में रखने पर
96 > 42> -77 > -140
अतः इनका अवरोही क्रम
96 > 42> -77 > -140
इस प्रकार

इसलिए





यहाँ,

3(5x
- 5) - 2(9x - 8) = 4(8x - 13) - 17
15x
- 15 - 18x + 16 = 32x - 52 - 17
15x
- 18x - 32x = -52 - 17 + 15 - 16
-35x
= -70
x
= 2

माना कि चौड़ाई x सेमी है।
तब लम्बाई(l) = (x + 15) सेमी
परिमाप = 2 (l + b)
या 150 = 2 [(x + 15) + x]
या 150 = (4x + 30)
या 4x = 150 – 30
या x = 30 सेमी
अतः, चौड़ाई = 30 सेमी
लम्बाई = (30 + 15) = 45 सेमी
माना कि त्रिभुज का परिमाप x सेमी है। भुजा को बढाने के बाद नया परिमाप = (x + 30) सेमी

x = 120 सेमी
इसलिए, दिये गये त्रिभुज का परिमाप= 120 सेमी
माना एक भाग x तथा दूसरा भाग 184 – x

पहला भाग = 72
दूसरा भाग = 184 – 72 = 112
माना कि त्रिभुज की तीसरी भुजा x सेमी है।
त्रिभुज की पहली भुजा = (x – 5) सेमी
त्रिभुज की दूसरी भुजा = (x – 5 – 7) = (x – 12) सेमी
परिमाप = 49 सेमी

x = 22 सेमी
त्रिभुज की तीसरी भुजा = 22 सेमी
त्रिभुज की पहली भुजा = (22 – 5) = 17 सेमी
त्रिभुज की दूसरी भुजा = (22 – 12) = 10 सेमी
इस प्रकार त्रिभुज की भुजाएं 17 सेमी, 10 सेमी और 22 सेमी है।
मान लीजिये कि पहली संख्या
यह दिया गया हैं कि इन तीन क्रमागत संख्याओं के गुणकों का योग
x + (x + 8) + (x + 16) = 792





अतः
x, (x+8), (x+16)
या
या
माना रीता को कम्पनी से मिली धनराशि x रूपये है |
पुत्री को मिली धनराशि
पुत्र को मिली धनराशि
प्रश्नानुसार,

अत: रीता को अपनी कम्पनी से ₹ 24,000 की धनराशि मिलती है |
माना सीमा और सरद की वर्तमान आयु 5x और 6x है
बारह वर्ष बाद सीमा की आयु = 5x+12
बारह वर्ष बाद सरद की आयु = 6x+12
बारह वर्ष बाद दोनों की आयु का अनुपात = 9:10

सीमा की वर्तमान आयु = 5(3) = 15 वर्ष
सीमा की वर्तमान आयु = 6(3) = 18 वर्ष
1,
2 और
3 कोणों के माप क्रमशः हैं
A.
44°,
45° और 91°
B. 91°, 45° और 44°
C. 44°, 91° और 45°
D. 45°, 45° और 91°
3 =
180°- (44° + 45°)
(एक
त्रिभुज
के
कोणों
का
योग
होता
है। 180°)
=
91°
अब,
1 +
2 + 91°
=180°

1 +
2 = 89°
--------- (1)
पुनः,
1 + 45°
=
2 + 44°
(समान्तर
चतुर्भुज
के
सम्मुख
कोण)

2 -
1 = 1°
--------- (2)
अब, (1) और
(2)
से, हमें
ज्ञात
होता
है
2
2 = 90°

2 = 45°

1 = 44°
A.
12 और 8
B.
8 और 12
C.
9 और 11
D.
11 और 9
2x
= 16 (समान्तर
चतुर्भुज
में
सम्मुख
भुजाएं
बराबर
होती
है)
x = 8
पुनः, 3y =
36
y = 12
A.
540°
B.
360°
C.
270°
D.
180°
x° + 60° + z° + 40° + 80° + y°= 180° x 3 (तीन रैखिक कोणो का योग) x° + y° + z °= 540° - 180° x° + y° + z °= 360°
A. 6 और 3
B. 3 और 6
C. 2 और 7
D. 7 और 2
2x – 4 = 8
x = 6 (समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं)
इसीलिए, 2y = 6
y = 3
A.
2
B.
3
C.
4
D.
5
2x + 4 = 3x -1 (दी गई आकृति में)
x = 5
A.
45° प्रत्येक
B. 45° और 46°
C. 46° प्रत्येक
D. 46° और 45°
(समचतुर्भुज में भुजाएं बराबर होती है और PR दोनो त्रिभुज में उभयनिष्ठ है।)
इसलिए,
x° =
y°
अब,
y° = (180° - 88°) / 2
= 46°
इसलिए,
x° और
y° = 46°
A.
45°
B.
90°
C.
135°
D.
360°

एक सम अष्टभुज के केन्द्रीय कोण का माप = 360° / 8= 45°
A.
117°, 63° और 63°
B.
63°, 63° और 117°
C.
63°, 117° और 63°
D.
63°,126° और 54°
B =
D (समान्तर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते है)
x = 63°
y = 63° (कोण x के संगत)
z = 117°
A.
12 सेमी
B.
13 सेमी
C.
15 सेमी
D.
17 सेमी

BF || AE खींचिए
इस
प्रकार
ABEF
एक
आयत
है।
तब
EF = 15 सेमी
इसलिए,
DE = (25 – 15)/2 = 5 सेमी
अब,
पाइथागोरस
प्रमेय
से
AE2 = AD2 – DE2
AE2
= 132 – 52
AE = 12 सेमी


A. दो कोण
B. दूसरी दो भुजाएँ
C. विकर्ण
D. तीन कोण
एक चतुर्भुज की रचना में संलग्न भुजाओं और तीन कोणों की आवश्यकता होती है |
A. 5
B. 7
C. 8
D. 9
दी गयी आकृति में, चतुर्भुज ABCD, APOR, OQBR, PDSO, OSCQ, ADSR, RSCB, APQB, PDCQ हैं |
A. 10
B. 9
C. 8
D. 7
दी गयी आकृति में, चतुर्भुज ABEJ, ECDJ, ECIJ, JEFD, EGHJ, EFIJ, FGHI, ABCD हैं |
पहले त्रिभुज PLN की रचना में, हमें रेखाखंड PL की लम्बाई ज्ञात होनी चाहिए, जो नहीं दी गयी है| इसप्रकार, हम पहले बिंदु A को दर्शाएंगे और फिर बाद में त्रिभुज PLN की रचना करेंगें|
B. 90° C. 105° D. 120° एक चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360° होता है| B. वर्ग C. सामानांतर चतुर्भुज D. समलम्ब चतुर्भुज
B. AB + AD > AC C. AB + CD < AC D. AD + CD < AC यह संभव नहीं है क्योंकि एक त्रिभुज ACD में, AD + CD < AC होता है|
B. 270° C. 360° D. 720° चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360° होता है|
एक त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से कम होना चाहिए| इसलिए, चतुर्भुज ABCD के त्रिकोणीय भाग ABD की रचना नहीं की जा सकती है|
एक समचतुर्भुज वर्ग का रूप ले लेता है जब इसका प्रत्येक कोण 90° का होता है|
वर्ग की सभी भुजाएँ समान होती हैं और प्रत्येक कोण 90° अंश का होता है| इसके विकर्ण भी समान होते हैं|
B. 3 C. 4 D. 5 एक चतुर्भुज की रचना करने में, 5 भागों की आवश्यकता होती है|
एक रफ आकृति से हमारे दिमाग में वास्तविक आकृति की कल्पना बन जाती है| यह आकृति को रूप देने में सहायक होती है और दिए गए आंकड़े इसें दर्शाए जा सकते हैं|
B. AE < EC C. AE > EC D. 2AE = 3EC दिया गया चतुर्भुज एक सामानांतर चतुर्भुज है और इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं|
इसीलिए हम कह सकतें हैं AE = EC
B. 90° C. 70° D. 40° यहाँ, हम देखते हैं कि विकर्ण AC रेखीय युग्मित कोण बनाता है|
इसलिए, B. 6.3 सेमी० C. 5.46 सेमी० D. 3.15 सेमी०
एक आयत के विकर्ण समान लम्बाई के होते हैं| इसलिए, AC = BD = 6.3सेमी० (ABCD एक आयत है)| B. 14.5 सेमी० C. 20.6 सेमी० D. 28 सेमी० हम जानते हैं कि एक त्रिभुज में, किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होना चाहिए| B. 12.5 सेमी० C. 11.6 सेमी० D. 10 सेमी० हम जानते हैं कि एक त्रिभुज में, किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होता है| इसलिए, B. 12.5 सेमी० C. 11.6 सेमी० D. 5.2 सेमी०
हम जानते हैं कि एक त्रिभुज में, किन्हीं दो भुजाओं की लम्बाई का अंतर तीसरी भुजा से कम होना चाहिए| इसलिए, B. दूसरी दो भुजाएँ C. विकर्ण D. तीन कोण एक चतुर्भुज की रचना में संलग्न भुजाओं और तीन कोणों की आवश्यकता होती है |
B. 7 C. 8 D. 9 दी गयी आकृति में, चतुर्भुज ABCD, APOR, OQBR, PDSO, OSCQ, ADSR, RSCB, APQB, PDCQ हैं |
B. 9 C. 8 D. 7 दी गयी आकृति में, चतुर्भुज ABEJ, ECDJ, ECIJ, JEFD, EGHJ, EFIJ, FGHI, ABCD हैं |
पहले त्रिभुज PLN की रचना में, हमें रेखाखंड PL की लम्बाई ज्ञात होनी चाहिए, जो नहीं दी गयी है| इसप्रकार, हम पहले बिंदु A को दर्शाएंगे और फिर बाद में त्रिभुज PLN की रचना करेंगें|
B. 90° C. 105° D. 120°
A. PL की लम्बाई नहीं दी गई हैSOLUTION
SOLUTION
त्रिभुज ACD में, पाईथागोरस प्रमेय के द्वारा-
AC =
(AD2 + CD2) = 4
2 सेमी०
P= 60°,
Q = 75°, और
R = 120°, तो
S है
A. 60°SOLUTION
इसलिए,
S=360° - (60°+75°+120°)=105°
A. आयतSOLUTION
जब हम सामानांतर चतुर्भुज के कोणों का समद्विभाजक करते हैं, तो हमें एक आयत प्राप्त होता है|
A. AB + BC > ACSOLUTION
A. 180°SOLUTION
A. आंकड़े पर्याप्त नहीं हैंSOLUTION
Right Answer is: B
SOLUTION
SOLUTION
A. 2SOLUTION
A. वास्तविक बनाया नहीं जा सकताSOLUTION
A. AE = ECSOLUTION
AOX होगा
A. 130°SOLUTION
AOD +
DOC = 180°
AOD = 130° (दिया है,
DOC = 50°).
A. 7.04 सेमी० SOLUTION
UV, AC और BD का समद्विभाजक है|
इसप्रकार, OB = OD = 1/2 (6.3) = 3.15 सेमी०
ABC की रचना करते हैं,जिसमें BC = 20.6 सेमी०,
B = 45° है तथा AB + BC बराबर है
A. 12.8 सेमी०SOLUTION
इसलिए,
ABC की रचना करने पर, BC = 20.6 सेमी०,
B = 45° हैं तथा AB + BC= 28 सेमी० होना चाहिए|
ABC की रचना करते हैं, जिसमें BC = 12.6 सेमी०,
B = 60° है तथा AB + BC बराबर होने चाहिए
A. 12.8 सेमी०SOLUTION
ABC की रचना करने में, BC = 12.6 सेमी०,
B = 60° है तथा AB + BC =12.8 सेमी० होना चाहिए|
ABC की रचना करते हैं, जिसमें BC = 5.8 सेमी०,
B = 60° हैं तथा AB - BC बराबर है
A. 5.8 सेमी० SOLUTION
ABC की रचना करने पर, BC = 5.8 सेमी०,
B = 60° और AB - BC = 5.2 सेमी० होना चाहिए|
A. दो कोण SOLUTION
A. 5SOLUTION
A. 10SOLUTION
PLN की रचना संभव नहीं है और बाद में बिंदु A दर्शाना है क्योंकि
A. PL की लम्बाई नहीं दी गई हैSOLUTION
SOLUTION
त्रिभुज ACD में, पाईथागोरस प्रमेय के द्वारा-
AC =
(AD2 + CD2) = 4
2 सेमी०
P= 60°,
Q = 75°, और
R = 120°, तो
S है
A. 60°