रुमेन में भोजन का आंशिक रूप से पाचन होता है, जिसे जुगाल कहते हैं।
अवशोषण के पश्चात ये पदार्थ कोशिकाओं के जीवद्रव्य में विलय हो जाते हैं, यह प्रक्रिया स्वांगीकरण कहलाती है।
आमाशय में उपस्थित अम्ल का एक कार्य है-
एक प्रोटीन पाचक एन्जाइम को सक्रिय करता है, जो पेप्सिन कहलाता है।
जंतु पोषण में पोषक तत्वों की आवश्यकता, भोजन को लेने की विधि और शरीर में उसके उपभोग को शामिल करते हैं।
भोजन के जटिल घटकों का सरल पदार्थों में टूटना पाचन कहलाता है।
ग्लूकोज, वसा अम्ल और अमीनो अम्ल पाचन प्रक्रिया के अंतिम उत्पाद हैं।
यकृत ।
हमारी जीभ पर स्वाद कलिकाएँ होती हैं।
लार ग्रंथि ।
अर्न्तग्रहण ।
पाचन नली और सहायक ग्रंथियाँ ।
शिकार को निगलना ।
आहार नाल और सहायक स्त्रावी ग्रंथियाँ एकसाथ मिलकर पाचन तंत्र बनाती हैं।
जब हम एक समतल दर्पण के सामने एक मोमबत्ती रखते हैं तो ध्यान से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक मोमबत्ती दर्पण के पीछे भी रखी हो| यह दर्पण द्वारा बनाया गया मोमबत्ती का प्रतिबिम्ब होता है| जबकि मोमबत्ती एक वस्तु अर्थात बिम्ब का उदाहरण है|
निम्न क्रियाकलाप द्वारा हम समझा सकते हैं कि सूर्य का श्वेत प्रकाश इन्द्रधनुष के विभिन्न रंगों से मिलकर बना है|
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(i) गोलीय पृष्ठ से बने दर्पण को गोलीय दर्पण कहते हैं। यह कांच के खोखले गोले से काटे गए भाग के समान होता है। परावर्तक पृष्ठ के आधार पर गोलीय दर्पण अवतल या उत्तल दर्पण हो सकता है।
(ii) ध्रुव:गोलीय दर्पण के मध्य बिंदु को दर्पण का ध्रुव कहते हैं।

वक्रता केंद्र: गोलीय दर्पण जिस गोले का एक भाग होता है, उस गोले के केंद्र को दर्पण का वक्रता केंद्र कहते हैं।

मुख्य अक्ष: ध्रुव तथा वक्रता केंद्र को मिलाने वाली रेखा मुख्य अक्ष कहलाती है|

क्रियाकलाप
एक चार्ट पेपर लीजिये तथा उसमें (4 x 4) के 16 वर्ग बनाईए|
एक समतल दर्पण लीजिये और उसे चार्ट पेपर के किनारे पर रखिए|
अब एक वस्तु लिजिये तथा उसे दर्पण के सामने दूसरे वर्ग पर रखिए|

आप देखेंगे की दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब भी उसी वर्ग में बनता है जिस वर्ग में वस्तु रखी जाती है|
इससे यह ज्ञात होता है कि किसी समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब दर्पण से उसके पीछे उतनी ही दूरी पर होता है, जितनी की दर्पण से बिम्ब की दूरी होती है|
A. यह ISI मान्यता प्राप्त होता है ।
B. यह विद्युत की क्षति को कम करता है ।
C. इसमें मरकरी पाया जाता है ।
D. यह आसानी से उपलब्ध होता है ।
विद्युत बल्बों का उपयोग प्रकाश के लिए किया जाता है , परन्तु बल्ब उष्मा भी देते हैं , जो लाभदायक नहीं है। इससे विद्युत की क्षति होती है, तथा प्रतिदीप्त लैंप (CFL) विद्युत की क्षति में कमी करता है और बल्ब के मुकाबले ज़्यादा प्रकाश देता है ।
A. परिपथ खुल जाता है ।
B. परिपथ बंद हो जाता है ।
C. बल्ब प्रज्वलित नहीं होता।
D. बैटरी द्वारा विद्युत धारा प्रवाह नहीं होती ।
जब स्विच ‘ऑन’ स्थिति में होता है, तो यह परिपथ बंद परिपथ कहलाता है। बंद परिपथ एक पूर्ण परिपथ होता है। बंद परिपथ में से धारा प्रवाहित होती है इस प्रकार, इस परिपथ में बल्ब जलेगा।
दिया गया चित्र यह दर्शाता है कि
A. यह एक विद्युत बल्ब है।
B. यह एक बैटरी है।
C. यह एक स्विच है जो ऑन स्थिति में है।
D. यह एक स्विच है जो ऑफ - ऑन स्थिति में है।
यह चित्र एक स्विच की ऑन स्थिति को दर्शाता है । ऑन अवथा में परिपथ पूरा हो जाता है जिससे विद्युत प्रवाहित होती है ।
दिया गया चित्र यह दर्शाता है कि
A. यह एक विद्युत सेल है।
B. यह एक विद्युत स्विच है।
C. यह एक विद्युत बल्ब है।
D. यह एक बैटरी है।
यह चित्र एक विद्युत बैटरी को दर्शाता है जिसमें तीन जोड़े सेल्स के संयोजन लगे हुए हैं।
दिया गया चित्र यह दर्शाता है कि
A. यह एक बैटरी है ।
B. यह एक बल्ब है ।
C. यह विद्युत घंटी है ।
D. यह स्विच है ।
यह चित्र एक विद्युत बल्ब को दर्शाता हैं जिसमें मुड़े हुए पतले तार फिलामेंट हैं ।
A. एक एलिमेंट है।
B. एक कुंजी है ।
C. एक होल्डर है ।
D. एक फिलामेंट है ।
तारों कि कुंडली को विद्युत तापन अवयव तथा एलिमेंट भी कहते हैं ।यह कुंडली गर्म हो जाती है जब विद्युत धारा का प्रवाह होता है।
A. क्योंकि यह विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का पालन करता है ।
B. क्योंकि फिलामेंट एक बहुत पतली नली होती है ।
C. क्योंकि बल्ब के भित्तर रासायनिक प्रक्रिया होती है ।
D. क्योंकि यह विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव का पालन करता है ।
जब किसी तार से कोई विद्युत धारा प्रवाहित होती है , तो वह तप्त हो जाता है। विद्युत बल्ब में तंतु उपयोग होता है जो विद्युत धारा प्रवाहित होने से बहुत अधिक ताप तक तप्त हो जाता है तथा दीप्त होकर प्रकाश देना आरंभ कर देता है।
A. हेन्स क्रिश्चियन ओरस्टेड
B. कूलम्ब
C. सी.वी. रमण
D. थॉमस अल्वा एडिसन
हेन्स क्रिश्चियन ओरस्टेड ने विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की सर्वप्रथम खोज की थी।
A. कमज़ोर हो जाता है।
B. एक स्विच कि तरह व्यवहार करता है।
C. गर्म हो जाता है ।
D. ठंडा हो जाता है ।
जब विद्युत धारा तार के माध्यम से प्रवाहित होती है तो यह विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के कारण गर्म हो जाता है।
A. विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिधांत पर कार्य करता है।
B. को विद्युत चुंबक की तरह हम प्रयोग कर सकते हैं ।
C. विद्युत धारा के उष्मीय प्रभाव के सिधांत पर कार्य करता हैं।
D. प्रकाश का स्त्रोत है ।
विद्युत हीटर वह उपकरण है जो विद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के सिद्धान्त पर आधारित होता है। विद्युत उपकरण तारों की कुंडलियों से मिलकर बना होता है जिसे तन्तु के नाम से जाना जाता है। जब विद्युत हीटर का स्विच ‘ऑन’ करते है तो इसके माध्यम से धारा के गुज़रने से तन्तु रक्त तप्त हो जाता है। यह रक्त तप्त तन्तु बाहर ऊष्मा प्रदान करता है।
A. एक विद्युत हीटर है ।
B. एक विद्युत इस्त्री है ।
C. एक विद्युत फ्यूज़ है।
D. एक विद्युत घंटी है ।
जब विद्युत धारा तार के माध्यम से प्रवाहित की जाती है तो धारावाही तार चुम्बक की तरह व्यवहार करता है। यह प्रभाव विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहलाता है।विद्युत घंटी में विद्युत चुंबक मौजूद होता है। इस तरह यह विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिधांत पर कार्य करता है ।
A. चुंबक की तरह बर्ताव करता है ।
B. स्वयं परिपथ को बंद केर देता है जब कभी अत्यधिक विद्युत प्रवाह होती है ।
C. सुरक्षा व्यवस्था में सहायता नहीं करता है।
D. इनमें विशेष तरह की तारें प्रयोग की जाती हैं जिसका गलनांक बहुत ही कम होता है।
लघु परिपथ विच्छेदक (MCB) एक प्रकार के स्विच होते हैं | जो परिपथ में विद्युत धारा के अधिक हो जाने के कारण स्वतः ही बंद हो जाते हैं। चालू करने पर, यह परिपथ पुनः पूर्ण हो जाता है और धारा प्रवाहित होने लगती है।
A. वह जल्दी पिघल जाती है।
B. वह बहुत मोटी तार होती है।
C. वह प्लास्टिक की बनी होती है ।
D. वह लघुपथन अर्थात (शोर्ट सर्किट) के कारण होते हैं।
विद्युत फ्यूज़ में जो तार प्रयोग की जाती है वह विशेष धातुओं से बनी होती है जिसका गलनांक बहुत ही कम होता है ।जैसे कि अत्यधिक विद्युत धारा किसी परिपथ से प्रवाहित होने से, यह तार पिघल जाती है।
A. जब विद्युन्मय तार और उदासीन तार एक दुसरे के संपर्क में आते हैं।
B. जब किसी तार से विद्युत प्रवाह होती है।
C. जब फ्यूज़ पिघल जाता है ।
D. जब कभी सॉकेट में तार आपस में ढीले हो जाते हैं।
जब विद्युन्मय तार और उदासीन तार एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो लघुपथन होता है ।इसके वजह से अत्यधिक विद्युत धारा प्रवाह हो सकती है।
A. केवल दो सेल हो सकते हैं।
B. एक सेल के धनात्मक टर्मिनल से दूसरे सेल का धनात्मक टर्मिनल जुड़ा हुआ होता है ।
C. दो या दो से ज्यदा सेल मौजूद हो सकते हैं।
D. केवल एक सेल मौजूद होता हैं ।
दो या दो से अधिक सेलों का संयोजन बैटरी कहलाता है। दो सेलों की एक बैटरी, प्रथम सेल के ऋणात्मक टर्मिनल को द्वितीय सेल के धनात्मक टर्मिनल से जोड़कर बना सकते हैं।
A. बैटरी में केवल एक सेल मौजूद है।
B. बैटरी में तीन सेल मौजूद हैं।
C. बैटरी में दो सेल मौजूद है।
D. बैटरी में चार सेल मौजूद हैं।
विद्युत सेल के प्रतिक में लम्बी रेखा धन टर्मिनल को तथा छोटी और मोटी रेखा ऋण टर्मिनल को निरुपित करती है।यहाँ दिए गई बैटरी में तीन जोड़े लम्बी तथा छोटी रेखाएं है इसका अर्थ यह हुआ कि इस बैटरी में तीन सेल मौजूद हैं।
A. एक प्रकार का फ्यूज़ है ।
B. एक कम्पास सुई है ।
C. एक लघु परिपथ विच्छेदक (MCB) है ।
D. चुम्बक की तरह व्यवहार करता है।
जब विद्युत धारा तार के माध्यम से प्रवाहित की जाती है तो धारावाही तार चुम्बक की तरह व्यवहार करता है।
A. का उपयोग चुंबकीय पदार्थ को जंक से अलग करने में काम होता है ।
B. सेल कि शक्ति को बढ़ाने के लिए काम आती है ।
C. फ्यूज़ की तरह उपयोग की जा सकती है ।
D. विद्युत बल्ब में उपयोग किया जाता है ।
जब विद्युत धारा तार के माध्यम से प्रवाहित की जाती है तो धारावाही तार चुम्बक की तरह व्यवहार करता है। जब चुम्बकीय सुई इसके पास लाते हैं तो सुई विक्षेपण दिखाती है। इसका उपयोग हम चुंबकीय पदार्थ को जंक से अलग करने के लिए करते हैं ।
A. उष्मा ।
B. ध्वनि ।
C. रासायनिक क्रिया ।
D. ठंडक।
जब किसी तार से कोई विद्युत धारा प्रवाहित होती है , तो वह तप्त हो जाती है। विद्युत बल्ब में तंतु उपयोग होती है जो विद्युत धारा प्रवाह होने से इतने अधिक ताप तक तप्त हो जाते है कि दीप्त होकर प्रकाश देना आरम्भ कर देता हैं।
A. में फिलामेंट होता है।
B. में एक विद्युत चुंबक होता है।
C. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के सिधांत पर काम करती है।
D. स्विच कि तरह हम इसे उपयोग कर सकते हैं।
विद्युत घंटी में लोहे के टुकड़े पर तांबे के तार की कुंडली लिपटी होती है जो एक विद्युत चुंबक होती है। जब लोहे की पत्ती इस संपर्क पेच के संपर्क में आती है तो विद्युत परिपथ पूरा हो जाता है तथा कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। जिससे वह विद्युत चुंबक बन जाती है।
A. यह परिपथ खुला है ।
B. यह परिपथ बन्द है।
C. इस परिपथ में एक कुंजी है ।
D. इस परिपथ में कोई बैटरी नहीं है ।
जब स्विच ‘ऑफ’ की स्थिति में होता है, तो यह परिपथ खुला परिपथ कहलाता है। खुला परिपथ अपूर्ण परिपथ होता है। खुले परिपथ के माध्यम से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
स्विच, विद्युत परिपथ को बंद करने या खोलने करने के लिए उपयोग किया जाता है।
टोर्च , ट्रांजिस्टर , रेडियो, खिलौने ,टीवी रिमोट कण्ट्रोल जैसी कई युक्तियों में बैटरी उपयोग की जाती है।
विद्युत सेल के प्रतिक में लम्बी रेखा धन टर्मिनल को तथा छोटी और मोटी रेखा ऋण टर्मिनल को निरुपित करती है।
जब विद्युत धारा तार के माध्यम से प्रवाहित होती है तो यह विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के कारण गर्म हो जाता है।
विद्युत फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है जो विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित है।
बल्ब में एक पतला तार होता है जिसे हम तन्तु अथवा फिलामेन्ट कहते हैं।
हेन्स क्रिश्चियन ओरस्टेड ने विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज की।
दो या दो से अधिक सेलों का संयोजन बैटरी कहलाता है।
लोहे के किसी टुकड़े पर विद्युत रोधी तार से लिपटी विद्युत धारावाही कुंडली को विद्युत चुंबक कहते हैं।
थॉमस अल्वा एडिसन विलक्षण प्रतिभा के व्यक्ति थे, उन्होंने विद्युत बल्ब का अविष्कार किया था।
यह विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के सिद्धान्त पर आधारित होता है।
जब विद्युन्मय तार और उदासीन तार एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तब लघुपथन होता है ।
अत्यधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण से सॉकेट से कई युक्तियों को संयोजित करना अतिभारण कि स्थिति है।
चालक उस पदार्थ का बना होता है जो अपने में से विद्युत धारा को प्रवाहित होने की अनुमति देते हैं। उदाहरण:
1. कॉपर।
2. लौहा।
विद्युत मीटर एक उपकरण है जो प्रयुक्त की गई विद्युत ऊर्जा की मात्रा को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
A.
हरा
B.
काला
C.
मैजेंटा
D.
नीला
वे पदार्थ जिनका उपयोग एक पदार्थ के अम्लीय या क्षारीय होने का परीक्षण करने में किया जाता है । ये पदार्थ सूचक कहलाते हैं । चाइना रोज सूचक अम्लीय विलयन में मैजेंटा रंग में और क्षारीय विलयन में हरे रंग में परिवर्तित हो जाता है ।
A.
ऐसीटिक अम्ल
B.
फॉर्मिक अम्ल
C.
लैक्टिक अम्ल
D.
एस्कोर्बिक अम्ल
एक चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल उपस्थित होता है । इसके प्रभाव को प्रभावित क्षेत्र पर आर्द्र बेकिंग सोडा रगड़ कर उदासीन किया जा सकता है ।
A.
बढ़ जाता है ।
B.
घट जाता है ।
C.
समान रहता है ।
D.
पहले बढ़ता है फिर घटता है ।
उदासीनीकरण अभिक्रिया में ऊष्मा सदैव निष्कासित होती है । निकलने वाली ऊष्मा अभिक्रिया मिश्रण के ताप को बढ़ा देती है ।
A. ऐसीटिक अम्ल
B.
सिट्रिक अम्ल
C.
बेकिंग सोडा
D.
टार्टरिक अम्ल
चींटी के डंक में फार्मिक अम्ल उपस्थित होता है जिसे क्षार जैसे बेकिंग सोडा, कैलेमाइन आदि द्वारा उदासीन किया जा सकता है |
A.
ऑक्सीकरण
B.
अपचयन
C.
उदासीनीकरण
D.
क्रिस्टलीकरण
जब इन क्षारों में उपस्थित धातु अम्ल से हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित कर देती है तो यह संयुक्त होकर लवण और जल बनाती है । इस प्रकार क्षार अम्ल को उदासीन कर देता है और इसकी अम्लीयता को नष्ट कर देता है ।
चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल पाया जाता है।
धातु ऑक्साइड को जल में घोलने पर क्षारीय विलयन बनाते है । यह क्षारीय विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है ।
साबुन के विलयन की प्रकृति क्षारकीय होती है ।
सोडियम हाइड्रॉक्साइड और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षार होते है ।
क्षार – ज़िंक ऑक्साइड , कास्टिक सोडा और मिल्क ऑफ मैग्नीशिया ।
लवण – सोडियम क्लोराइड ।
वे पदार्थ जिनका स्वाद कड़वा होता है और जो छूने पर साबुन जैसे महसूस होते हैं क्षारक कहलाते हैं ।
धोने के सोडे का रासायनिक नाम और सूत्र सोडियम कार्बोनेट (
कास्टिक सोडा का रासायनिक नाम और सूत्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड (
हल्दी पेस्ट एवं लाल बंद गोभी के सत (रस) को घर पर ही तैयार किया जा सकता है।
संतरे में सिट्रिक अम्ल एवं अंगूरों में टार्टरिक अम्ल पाया जाता है।
अमोनियम हाइड्रॉक्साइड ।
सोडियम क्लोराइड की उच्च सांद्रता का जलीय विलयन लवण जल कहलाता है ।
शहतूत का वैज्ञानिक नाम मोरस एल्बा है।
इसके लिए कोकून को उबाला या भाप में रखा जाता है ।
ऊन के रेशों मे वायु भरी रहती है जबकि रेशम के रेशों में ऐसा नहीं होता है । इसलिए ऊन रेशम की तुलना में मोटी होती है ।
ऑस्ट्रेलिया कच्ची ऊन का उत्पादन करने वाला विश्व का सबसे बड़ा देश है जो मुख्यतः मेरिनो भेड़ से प्राप्त की जाती है । विश्व मेरिनो ऊन का लगभग 80% उत्पादन ऑस्ट्रेलिया करता है ।
ऊन एक प्राकृतिक रेशा है |
एक मादा रेशम कीट एक बार में सैंकडों अंडे देती है।
शहतूत रेशम कीट ।
अभिमार्जन के पश्चात विभिन्न गठन वाले बालों को पृथक करने की प्रक्रिया छँटाई कहलाती है ।
सर्दियों में भेड़ों को घरों में रखा जाता है ।
भेड़ की बालो के साथ उतारी गयी त्वचा से ग्रीस, धूल और गर्त को हटाने के लिए इसे टैंको मे धोया जाता है । यह अभिमार्जन कहलाता है ।
रेशम कीट पालन उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों में होने वाला सामान्य रोग अस्थमा है क्योंकि वे निरंतर कोकून को वाष्प से गुजरने और रिलिंग से उत्पन्न होने वाली दुर्गंध में श्वसन करते हैं । इसके कारण उन्हे साँस लेने में कठिनाई होती है ।
कैटरपिलर वृद्धि प्रावस्था के दौरान अपनी त्वचा को खाते हैं और उनके पास भोजन का अन्य कोई विकल्प नहीं होता है । अतः जब वे बड़े होते हैं उन्हें अपनी त्वचा को उतारना आवश्यक होता है ।
रेशम उत्पन्न करने वाले कीट अलग-अलग प्रकार की पत्तियाँ खाते हैं जिसके कारण रेशम विभिन्न प्रकार का होता है । इस कारण विभिन्न प्रकार के रेशम कीटों के कोकून से विभिन्न प्रकार के रेशम जैसे टसर रेशम
भेड़ की बाल युक्त त्वचा से प्राप्त होने वाले दो प्रकार के बाल के नाम है :
(a) दाढ़ी के रूखे बाल ।
(b) त्वचा के निकट अवस्थित तंतुरूपी मुलायम बाल ।
कोकून से धागा अलग करने की प्रक्रिया रीलिंग कहलाती है|
ऊन प्रदान करने वाले जन्तु है :
वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं अभिकारक कहलाते हैं |
जलीय फेरिक (III) ऑक्साइड (Fe2O3. xH2O) ज़ंग कहलाता है ।
रासायनिक परिवर्तन
एक पदार्थ की आकृति, आकार, रंग और अवस्था इसके भौतिक गुणधर्म कहलाते हैं ।
भौतिक परिवर्तन
वह परिवर्तन जिसे पूरा होने मे बहुत अधिक समय लगता है धीमा परिवर्तन कहलाता है । इस अभिक्रिया मे अभिकारक से उत्पाद बनने मे बहुत अधिक समय लगता है ।