हाँ, क्रिस्टलीकरण एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमे कोई नया पदार्थ नहीं बनता है ।
प्रकाश संश्लेषण एक रासायनिक परिवर्तन है ।
वे गुणधर्म जिनका प्रेक्षण या मापन पदार्थ के संघटन में परिवर्तन किये बिना किया जा सकता है पदार्थ के भौतिक गुण कहलाते हैं |
नमक समुद्री जल के वाष्पीकरण से प्राप्त किया जाता है । इस प्रकार प्राप्त किया गया नमक शुद्ध नहीं होता है और इसके क्रिस्टल बहुत छोटे होते हैं । शुद्ध नमक प्राप्त करने के लिए इसका पुनः क्रिस्टलीकरण किया जाता है ।
(i) यशद्लेपन लोहे की वस्तुओं पर ज़िंक धातु की परत चढ़ाने की प्रक्रिया है ।
(ii) जल के संपर्क में आने पर ज़ंग लगने से रोकने के लिए जल की आपूर्ति हेतु यशद्लेपित पाइपों का उपयोग किया जाता है ।
रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनने वाले नए पदार्थों को उत्पाद कहते हैं |

भौतिक परिवर्तन के दो उदाहरण है
1. पानी में चीनी घुलना ।
2. बादलों का बनना ।
दही, दूध में खट्टा पदार्थ डालकर उसे कुछ घंटो तक बिना हिलाये रखने पर बनता है । दही को दूध में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है । यह दूध से अलग पदार्थ है । इसलिए दही का जमना एक रासायनिक परिवर्तन है ।
ज़ंग की रोकथाम के लिए तीन उपाय निम्न हैं-
1. लोहे के उपकरणों को वायु या नमी के संपर्क में आने से रोककर उन्हें ज़ंग लगने से बचाया जा सकता है |
2. लोहे की वस्तुओं पर पेंट करके, तेल या ग्रीज़ की परत चढ़ाकर लोहे को ज़ंग लगने से बचाया जा सकता है |
3. लोहे की वस्तुओं पर जस्ता (ज़िंक) और क्रोमियम जैसी धातुओं की परत चढ़ाकर उन्हें ज़ंग लगने से बचाया जा सकता है |
क्रिस्टलीकरण, वाष्पीकरण से अच्छी तकनीक है क्योंकि चीनी जैसे कुछ ठोस शुष्क होने तक गर्म करने पर अपघटित हो जाते हैं या जल जाते हैं । अतः चीनी क्रिस्टलीकरण विधि द्वारा प्राप्त की जाती है ।
(i) असत्य
(ii) असत्य
(iii) सत्य
(i) भौतिक परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में नए पदार्थ का निर्माण होता है ।
(ii) भौतिक परिवर्तन सामान्यतः उत्क्रमणीय प्रकृति के होते हैं जबकि रासायनिक परिवर्तन सामान्यतः अनुत्क्रमणीय प्रकृति होते हैं ।
जब पेट में अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है तो प्रतिअम्ल लिए जाते हैं । प्रतिअम्ल जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) अधिक अम्लीयता के प्रभाव को उदासीन कर देते हैं और यह अम्लीयता से पीड़ित व्यक्ति को राहत पहुँचाते हैं ।
अम्ल और क्षारक एक दूसरे को उदासीनीकृत करके लवण का निर्माण करते हैं । लवण अम्लीय, क्षारकीय अथवा उदासीन हो सकते हैं । उदाहरण के लिए, सोडियम क्लोराइड ।
3. असत्य
4. सत्य
अम्ल वह रासायनिक पदार्थ है जिनका स्वाद खट्टा होता है । उदाहरण- सिट्रिक अम्ल ।
वह अभिक्रिया जिसमें एक अम्ल क्षार से अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है ।
(अ) कार्बनिक अम्ल
(ब) अम्ल
अम्ल एवं क्षार में तीन-तीन अंतर।
|
अम्ल |
क्षारक |
|
अम्ल का स्वाद खट्टा होता है। |
क्षारक का स्वाद कड़वा होता है। |
|
अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। |
क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। |
|
अम्लों में साबुन जैसी चिकनाहट नहीं होती है। उदाहरण- सिट्रिक अम्ल । |
क्षारक में साबुन जैसी चिकनाहट होती है। उदाहरण- |
1. नीला
2. खट्टा
3. क्षारक
रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी को अम्लीय बना देता है । मिट्टी अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय होने पर पौधों की वृद्धि सही तरह से नहीं होती है । जब मिट्टी बहुत अधिक अम्लीय हो जाती है तो इसे क्षारको जैसे बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) या बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड) से उपचारित किया जाता है । अम्लीय और क्षारीय परिस्थितियों में उत्पादन बहुत कम होता है ।
जब चींटी काटती है तो यह त्वचा में एक अम्ल का स्राव कर देती है जिससे हमें जलन और दर्द का अनुभव होता है । कैलेमाइन विलयन (ज़िंक कार्बोनेट) की प्रकृति क्षारीय होती है । यह अम्ल को उदासीन कर देता है और हमें दर्द से राहत दिलाता है ।
(
(ii) उदासीनीकरण अभिक्रिया के दौरान पात्र का तापमान बढ़ता है क्योंकि इस अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा बाहर निकलती है ।
a. साबुन के निर्माण में ।
b. एन्टैसिड के रूप में ।
c. पूतिरोधी (एंटीसेप्टिक) और प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में ।
d. अपमार्जक और उर्वरक के निर्माण में ।
e. साधारण नमक हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाता है और यह स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है ।
A.
अभिकारक
B.
उत्प्रेरक
C.
घटक
D.
उत्पाद
वे पदार्थ जो एक रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं अभिकारक कहलाते हैं जबकि वे पदार्थ जो एक रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं उत्पाद कहलाते हैं ।
A.
प्रतिस्थापन अभिक्रिया
B.
भौतिक परिवर्तन
C.
रासायनिक परिवर्तन
D.
धीमा परिवर्तन
ऐसा विस्फोट एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि यह वायुमण्डल में ऊष्मा,प्रकाश, ध्वनि और अरूचिकर गैसें उत्पन्न करता है ।
A.
मंद परिवर्तन
B.
रासायनिक परिवर्तन
C.
आवर्ती परिवर्तन
D.
अनावर्ती परिवर्तन
वे परिवर्तन जो एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात होते हैं आवर्ती परिवर्तन कहलाते हैं ।
A.
यशद्लेपन से
B.
वाष्पोत्सर्जन से
C.
क्रिस्टलीकरण से
D.
जंग लगने से
क्रिस्टलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अशुद्ध क्रिस्टलों से शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं । इसमें अशुद्ध क्रिस्टलों का उच्च ताप पर एक संतृप्त विलयन बनाकर इसे ठंडा कर लिया जाता है ।
A.
कैल्शियम कार्बोनेट और जल
B.
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और ऑक्सीजन
C.
कैल्शियम ऑक्साइड और हाइड्रोजन
D.
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड
जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है तो यह कैल्शियम कार्बोनेट के निर्माण के कारण दूधिया हो जाता है ।
A.
कोमल रेशा
B.
तन्तु रेशा
C.
खुरदरा रेशा
D.
पादप रेशा
रेशम एक तन्तु रेशा है । रेशम कीट के कोकून से एक सतत तन्तु प्राप्त किया जा सकता है ।
A.
1kg कच्चा रेशम
B.
2kg कच्चा रेशम
C.
3kg कच्चा रेशम
D.
4kg कच्चा रेशम
प्रत्येक कोकून में उपयोगी रेशम की मात्रा बहुत कम होती है । 1 Kg कच्चे रेशम के उत्पादन के लिए लगभग 5500 रेशम कीटों की आवश्यकता होती है ।
A.
याक से
B.
अंगोरा खरगोश से
C.
अंगोरा बकरी से
D.
ऊंट से
मोहेयर ऊन अंगोरा बकरी के बालों से प्राप्त की जाती है । यह वजन में बहुत हल्की होती है तथा जम्मू और कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाती है ।
A.
रेशम कीट पालन
B.
कटाई
C.
रीलिंग
D.
छँटाई
कोकून से धागा अलग करने की प्रक्रिया रेशम की रीलिंग कहलाती है । यह विशेष मशीनों द्वारा की जाती है ।
A.
लोही
B.
बाखरवाल
C.
रामपुर बुशायर
D.
पाटनवाड़ी
लोही ऊन की एक अच्छी गुणवत्ता वाली किस्म है । यह राजस्थान और पंजाब में पायी जाती है ।
A.
मूंगा रेशम
B.
कच्चा रेशम
C.
टसर रेशम
D.
कोसा रेशम
रीलिंग से प्राप्त धागा कच्चा रेशम कहलाता है । इसका उपयोग कपड़े बुनने के लिए किया जाता है । इन्हें विभिन्न रंगो में रंगा जा सकता है ।
A.
गुजरात में
B.
राजस्थान में
C.
पंजाब में
D.
उत्तरप्रदेश में
यह किस्म मुख्यतः गुजरात में पायी जाती है और इस किस्म से हमें मोटी ऊन प्राप्त होती है ।
A.
रीलिंग
B.
रेशम कीट पालन
C.
रोविंग
D.
निर्मोचन
ऊनी धागे के निर्माण के लिए जाल को पतले तंतुओं में परिवर्तित करने के लिए जिस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है वह रोविंग कहलाती है ।
A.
कच्चा रेशम
B.
काता हुआ रेशम
C.
टसर रेशम
D.
शहतूत रेशम
क्षतिग्रस्त कोकून का उपयोग निम्न गुणवत्ता का रेशम बनाने में किया जाता है यह काता हुआ रेशम कहलाता है ।
A.
मोरस एल्बा
B.
ट्रीटिकम एस्टीवम
C.
जिआ मेज
D.
शहतूत
शहतूत का वैज्ञानिक नाम मोरस एल्बा है । रेशम कीट को केवल शहतूत की पत्तियाँ खिलाई जाती है ।
A.
वसंत और पतझड़ ऋतु
B.
वर्षा ऋतु
C.
ग्रीष्म ऋतु
D.
शरद ऋतु
भारत में भेड़ों के बालों की कटाई एक वर्ष में दो बार की जाती है । इसके लिए वसंत और पतझड़ ऋतु सबसे उपयुक्त समय होता है । इन ऋतुओं में कटाई से भेड़ों को कोई समस्या नहीं होती है ।
A.
प्यूपा
B.
कैटरपिलर
C.
गैमीट
D.
रेशम कीट पालन
रेशम कीट पालन एक अवस्था नहीं है लेकिन रेशम के उत्पादन के लिए रेशम कीट का प्रजनन और प्रबंधन है ।
A.
श्वसन और त्वचा रोग
B.
कैंसर
C.
टी. बी.
D.
निम्न और उच्च रक्तचाप
रेशम कीट पालन उद्योग के कारीगरों में सामान्यतः श्वसन और त्वचा सम्बन्धी रोग हो जाते हैं ।
A.
रेशम कीट
B.
प्यूपा
C.
एन्थ्रैक्स
D.
भेड़
ऊन उद्योग हमारे देश में अनेक व्यक्तियों के लिए जीविकोपार्जन का एक महत्वपूर्ण साधन है । लेकिन छँटाई करने वालों का कार्य जोखिम भरा है, क्योंकि कभी-कभी वे एन्थ्रैक्स नामक जीवाणु द्वारा संक्रमित हो जाते हैं, जो एक घातक रक्त रोग का कारक है, जिसे सोर्टर्स रोग कहते हैं ।
A.
कोकून से प्राप्त रेशा
B.
कृत्रिम रेशा
C.
जन्तु रेशा
D.
पादप रेशा
ऊन भेड़ के बालों से प्राप्त होने वाला एक जन्तु रेशा है । ऊन प्राप्त करने के लिए भेड़ों को पाला जाता है । उनके बालों को काटकर और फिर उन्हें संसाधित करके ऊन बनाई जाती है ।
मूगा रेशम, शहतूत रेशम, टसर रेशम और एरी रेशम ।
कैटरपिलर को खुले हाथो से एकत्रित नहीं करना चाहिए क्योंकि कैटरपिलर की त्वचा से एलर्जी हो सकती है ।
भेड के बालों को त्वचा की पतली परत के साथ शरीर से उतारने की प्रक्रिया ऊन की कटाई कहलाती है।
कटाई, अभिमार्जन, छँटाई, सूखाना, कार्डिंग, रंगाई, रोविंग, कताई और बुनाई ।
अंगोरा ऊन पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू और कश्मीर में पाये जाने वाली अंगोरा बकरी और अंगोरा खरगोश से प्राप्त की जाती है ।
A.
हाइड्रोजन
B.
मैग्नीशियम क्लोराइड
C.
मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड
D.
मैग्नीशियम नाइट्राइड
मैग्नीशियम ऑक्साइड जल के साथ अभिक्रिया करता है और मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)2] देता है । यह एक रासायनिक परिवर्तन है जिसे उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है ।
A.
भौतिक परिवर्तन
B.
रासायनिक परिवर्तन
C.
भौगोलिक परिवर्तन
D.
पर्यावरणीय परिवर्तन
कार्बन को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाने पर नया पदार्थ कार्बन डाइऑक्साइड बनता है जो कार्बन और ऑक्सीजन के गुण नहीं रखता है ।
A.
पानी का जमना
B.
काँच के गिलास का टूटना
C.
वाष्प का संघनन
D.
दूध से दही का बनना
दही के निर्माण में नए पदार्थ बनते हैं । यह नया पदार्थ पुनः अपनी मूल अवस्था में नहीं आ सकता है ।
A.
LPG का जलना
B.
भोजन का पचना
C.
बर्फ का पिघलना
D.
फलों का पकना
बर्फ का पिघलना एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि यह ठंडा करने पर ठोस हो जाती है ।
A.
ऊष्माशोषी परिवर्तन
B.
ऊष्माक्षेपी परिवर्तन
C.
धीमा परिवर्तन
D.
आवर्ती परिवर्तन
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा का मान दी जाने वाली कुल ऊर्जा के मान से अधिक होता है । इसके परिणामस्वरूप अभिक्रिया में ऊष्मा अवशोषित की जाती है ।
A.
ऊष्माशोषी परिवर्तन
B.
ऊष्माक्षेपी परिवर्तन
C.
धीमा परिवर्तन
D.
आवर्ती परिवर्तन
ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के होने के लिए आवश्यक ऊर्जा दी जाने वाली कुल ऊर्जा से कम होती है । इसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त ऊर्जा समान्यतः ऊष्मा के रूप में मुक्त हो जाती है ।
A.
चॉक पाउडर से चॉक का निर्माण
B.
बर्फ का पिघलना
C.
पत्तियों से खाद का निर्माण
D.
कागज़ से हवाई जहाज बनाना
मृदा में सूखी पत्तियों और जीवाणुओं की अभिक्रिया के परिणामस्वरुप खाद का निर्माण होता है । यह एक रासायनिक परिवर्तन है ।
A.
भौतिक परिवर्तन
B.
रासायनिक परिवर्तन
C.
आवर्ती परिवर्तन
D.
धीमा परिवर्तन
यह परिवर्तन प्राकृतिक रूप से होता है और इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है । टूटे हुए गिलास को गर्म करके पुनः उसी आकार में ढाला जा सकता है ।
A.
भौतिक परिवर्तन
B.
आवर्ती परिवर्तन
C.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
D.
रासायनिक परिवर्तन
सजीवों की वृद्धि अनुत्क्रमणीय होती है । इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन है ।
A.
ऊर्ध्वपातन
B.
संघनन
C.
वाष्पोत्सर्जन
D.
वाष्पीकरण
जब एक गैस को ठंडा किया जाता है तो इसके कणों की गतिज ऊर्जा इतनी कम हो जाती है की ये पास आ जाते हैं और आपस में जुड़कर एक द्रव का निर्माण करते हैं ।
A.
भौतिक परिवर्तन
B.
रासायनिक परिवर्तन
C.
जैविक परिवर्तन
D.
सामाजिक परिवर्तन
बादलों का निर्माण वायु में उपस्थित जल वाष्प के संघनन से होता है । जब यह वर्षा जल पृथ्वी पर गिरता है तो कोई नया पदार्थ नहीं बनता है । इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन माना जाता है ।
A.
ऑक्सीजन
B.
नाइट्रोजन
C.
हाइड्रोजन
D.
कार्बन
लोहे पर जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और नमी दोनों आवश्यक होती है ।
A.
ज़ंग लगने से
B.
विकृतगंधिता से
C.
क्रिस्टलीकरण से
D.
यशद्लेपन से
टिन आवरित परते संक्षारित नहीं होती हैं क्योंकि यह डिब्बे को ऑक्सीजन या जल या दोनों के संपर्क में आने से रोकता है ।
A.
भौतिक परिवर्तन
B.
रासायनिक परिवर्तन
C.
पर्यावरणीय परिवर्तन
D.
सामाजिक परिवर्तन
यह एक स्थायी परिवर्तन है जिसे उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है । अतः यह एक रासायनिक परिवर्तन है ।
A.
तीव्र परिवर्तन
B.
भौतिक परिवर्तन
C.
धीमे परिवर्तन
D.
रासायनिक परिवर्तन
एक भौतिक परिवर्तन में जो पदार्थ सम्मिलित होते हैं उनके संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता है । ये कुछ भौतिक प्रक्रियाओं से पुनः अपनी मूल अवस्था में आ जाते हैं ।
पंखे के घूमने के दौरान केवल पंखे की स्थित में परिवर्तन होता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता है अतः पंखे का घूमना भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है ।
वाष्प का द्रव अवस्था में परिवर्तन संघनन कहलाता है |
क्रिस्टलीकरण
सिरके की बेकिंग सोडा से अभिक्रिया के फलस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले बनते हैं ।
लोहे की वस्तुओं को संक्षारण से बचाने के लिए इन्हें क्रोमियम या ज़िंक धातु से आवरित किया जाता है ।
(a) जब कोकून के ढेर को उबाला जाता है या भाप मे रखा जाता है तो रेशम के रेशे अलग हो जाते है ।
(b) रेशम की प्राकृतिक चमक इसे आकर्षक बनाती है ।
(c) शहतूत रेशम कीट ।
(a) पालना :- ऊन प्राप्त करने के लिए भेड़ो की देखभाल और परवरिश करना पालना कहलाता है ।
मादा रेशम कीट अण्डे देती है। इन अण्डों से लार्वा निकलते है ये लार्वा अवस्था रेशम कीट कहलाती है। रेशम कीट पत्तियों को खाते हैं और वृद्धि करते हैं । इसके पश्चात ये प्रोटीन से निर्मित तन्तुओं का स्त्राव करते हैं जो वायु के संपर्क मे आकर कठोर हो जाते हैं । रेशम कीट प्यूपा अवस्था मे स्वयं को इस तन्तु द्वारा आवरित कर लेता है यह चरण प्यूपा चरण कहलाता है। प्यूपा वृद्धि करके कोकून मे परिवर्तित हो जाता है। कुछ सप्ताह पश्चात कोकून खुलता है और व्यस्क कीट बाहर निकल जाता है। रेशम, रेशम कीट की कोकून अवस्था से प्राप्त किया जाता है।

ऊन जिसका उपयोग हम स्वेटर और शॉल बनाने मे करते है एक लंबी प्रक्रिया के पश्चात प्राप्त होने वाला उत्पाद है इस प्रक्रिया मे निम्न चरण सम्मिलित होते हैं :
(i) बालों की कटाई: भेड़ के बालों को इसकी त्वचा की पतली परत के साथ इसके शरीर से उतारा जाता है ।
(ii) अभिमार्जन: बालों के साथ उतारी गयी त्वचा से ग्रीस, धूल और गर्त को हटाने के लिए इसे टैंको मे धोया जाता है । आजकल अभिमार्जन मशीनों से किया जाता है ।
(iii) छँटाई: अभिमार्जन के पश्चात छँटाई होती है । इसके लिए बालों युक्त त्वचा को कारखाने मे भेजा जाता है जहाँ विभिन्न प्रकार के बालों को पृथक किया जाता है ।
(iv) रंगाई: भेड़ों और बकरियों के बाल प्राकृतिक रूप से काले भूरे और सफ़ेद होते हैं इन्हे विभिन्न रंगो से अभिरंजित किया जाता है ।
(v) कताई: इन रेशों को सीधा करके और कात कर धागा बनाया जाता है । लंबे रेशों का उपयोग स्वेटर के निर्माण के लिए और छोटे रेशों को ऊनी कपड़ों की बुनाई और सिलाई मे काम में ले लिया जाता है ।
A.
लाल
B. नीला
C. हरा
D. पीला
जब हल्दी के पेस्ट को साबुन के विलयन डाला जाता है तो यह साबुन के विलयन को लाल कर देता है क्योंकि साबुन में क्षार होता है । यह अम्लीय विलयन में कोई परिवर्तन नहीं करता है ।
A.
मीठा, नमकीन
B.
मीठा, मीठा
C.
नमकीन, नमकीन
D.
खट्टा, कड़वा
सभी अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं जैसे इमली में टार्टरिक अम्ल और सिरके में ऐसीटिक अम्ल जबकि सभी क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं जैसे बेकिंग सोडा ।
A.
इसमें अम्लीय विलयन मिलाया जाता है।
B.
इसमें क्षारकीय विलयन मिलाया जाता है।
C.
इसमें उदासीन विलयन मिलाया जाता है।
D.
उपरोक्त में से कोई नहीं।
अब लिटमस विलयन में उदासीन विलयन मिलाया जाता है तो इसके रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है । अम्लीय और क्षारकीय विलयन लिटमस विलयन का रंग परिवर्तित कर देते हैं ।
A.
मेथिल ऑरेंज
B.
लिट्मस
C.
चाइना रोज
D.
हल्दी
मेथिल ऑरेंज एक संश्लेषित सूचक है । यह अम्लीय माध्यम में लाल रंग और क्षारीय माध्यम में पीला रंग देता है ।
A.
ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड
B.
सोडियम हाइड्रॉक्साइड
C.
मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड
D.
कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड
साबुन क्षारीय प्रकृति के होते हैं और साबुन में पाये जाने वाला क्षार सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड है ।
A.
कड़वा
B.
खट्टा
C.
मीठा
D.
लवणीय
अन्य अम्लों की भाँति टार्टरिक अम्ल भी स्वाद में खट्टा होता है । यह इमली, अंगूर, कच्चे आमों आदि में पाया जाता है ।
A.
अम्ल
B.
क्षार
C.
सोडियम क्लोराइड
D.
क्लोरीन
कई उद्योगो के अपशिष्टो में अम्ल होते हैं । यदि इन्हें जल स्रोतों में बहाया जाता है तो अम्ल मछलियों और अन्य जीवो को मार सकता है । इसलिए औद्योगिक अपशिष्ट को क्षारीय पदार्थ डालकर उदासीन किया जाता है ।
A.
आम के पौधे से
B.
लीची के पौधे से
C.
नींबू के पौधे से
D.
लाइकेन से
सबसे अधिक काम लिया जाने वाला प्राकृतिक सूचक लिट्मस है । यह लाइकेन से प्राप्त किया जाता है ।
A.
नीला
B.
काला
C.
भूरा
D.
गुलाबी
फिनॉलफ्थेलीन अम्लीय विलयनों में रंगहीन और क्षारीय विलयनों (चूने के पानी) में गुलाबी रंग का होता है ।
A.
टार्टरिक अम्ल
B.
ऐसीटिक अम्ल
C.
सिट्रिक अम्ल
D.
लैक्टिक अम्ल
अंगूरों में टार्टरिक अम्ल, सिरके में ऐसीटिक अम्ल, नींबू में सिट्रिक अम्ल और दही में लैक्टिक अम्ल उपस्थित होता है।
A.
विटामिन D
B.
विटामिन C
C.
विटामिन A
D.
विटामिन K
एस्कोर्बिक अम्ल विटामिन C होता है और यह सिट्रस फलों जैसे नारंगी, नींबू आदि में पाया जाता है ।
A.
ऐसीटिक अम्ल
B.
टार्टरिक अम्ल
C.
सल्फ्यूरिक अम्ल
D.
नाइट्रिक अम्ल
सिरके में ऐसीटिक अम्ल उपस्थित होता है और इसका उपयोग भोज्य सामग्रियों जैसे जैम, जैली, सॉस आदि के संरक्षण के लिए किया जाता है ।
A.
नीला
रंग
B. लाल रंग
C. गुलाबी रंग
D. नारंगी रंग
जब एक विलयन क्षारीय होता है तो फिनोलफ्थेलिन गुलाबी रंग देता है और जब विलयन अम्लीय होता है तो यह रंगहीन रहता है ।
A.
मृदा में अमोनियम क्लोराइड (NH4Cl) मिलाकर ।
B.
मृदा में कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) मिलाकर ।
C.
मृदा में सोडियम क्लोराइड (NaCl) मिलाकर ।
D.
मृदा में कार्बनिक पदार्थ मिलाकर ।
इस मृदा को कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) मिलाकर उदासीन किया जाता है जिसकी प्रकृति क्षारीय है ।
A.
सल्फ्यूरिक अम्ल
B.
नाइट्रिक अम्ल
C.
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
D.
फॉस्फोरिक अम्ल
हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उपस्थित होता है और यह पाचन में सहायक होता है । हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का निर्माण नियंत्रित होता है क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अधिकता अम्लीयता का कारण बन सकती है ।
लकड़ी के जलने से धुएँ और राख़ का निर्माण होता है । अत: लकड़ी के गुण परिवर्तित हो जाते है और नए पदार्थ बनते है । इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन है ।
जब लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ो मे काटा जाता है तो कोई नया पदार्थ नहीं बनता । प्रत्येक छोटे टुकड़े मे लकड़ी के गुण होते हैं । इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन है । अत: लकड़ी को जलाना और काटना दो अलग परिवर्तन है ।
जब एक मोमबत्ती जलती है तो भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तन होते हैं ।
मोमबत्ती के जलने पर मोम पिघलता है परन्तु ठंडा होने पर पुनः ठोस में बदल जाता है । यह दर्शाता है कि मोम का पिघलना एक भौतिक परिवर्तन है ।
मोमबत्ती के जलने से प्रकाश और कुछ गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती हैं । इसलिए मोमबत्ती की बत्ती का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है ।
जब मोमबत्ती का मोम पिघलता है तो वह वाष्पीकृत होता है और मोम की वाष्प जलती है । मोम का पिघलना एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि पिघला हुआ मोम पुनः मोम के रूप मे जम सकता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता है । जब मोम की वाष्प जलती है तो धुआँ और कार्बन डाइऑक्साइड बनती है जो नए पदार्थ हैं । अत: यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
जब लोहे के एक टूकड़े को कुछ समय के लिए खुला छोडा जाता है तो इस पर भूरे रंग के पदार्थ की एक परत बन जाती है यह ज़ंग कहलाती है । यह प्रक्रिया ज़ंग लगना कहलाती है ।
आयरन (
ज़ंग लगने के लिए ऑक्सीज़न और जल या जल वाष्प दोनों की आवश्यकता होती है ।
हम ज़ंग लगने को निम्न विधियों द्वारा रोक सकते हैं:
1. पेंट या ग्रीस द्वारा:- लोहे की वस्तुओं पर नियमित रूप से रंग या ग्रीस का एक आवरण लगाकर ।
2. यशद्लेपन द्वारा:- आयरन पर ज़िंक और क्रोमियम की परत चढ़ाने की प्रक्रिया यशद्लेपन कहलाती है ।
A.
बहुत ठंडे
B.
बहुत गरम
C.
मरुस्थल के समान
D.
गरम और आर्द्र
ध्रुवीय क्षेत्रों के तापमान में बहुत ठंडे और वर्ष के अधिकांश समय के लिए बर्फ से ढके होते हैं।
A.
पश्चिमी घाट और असम
B.
पूर्वी घाट और असम
C.
पश्चिमी घाट और मिजोरम
D.
पूर्वी घाट और तमिलनाडू