A.
बहुलिंगी पुष्प
B.
द्विलिंगी पुष्प
C.
एकलिंगी पुष्प
D.
अलैंगिक पुष्प
पुष्प जो या तो जायांग या पुंकेसर रखते हैं लेकिन दोनों एक ही पुष्प में नहीं होते एकलिंगी पुष्प कहलाते हैं।
A.
अलैंगिक जनन
B.
लैंगिक जनन
C.
जनन की विशेष विधियाँ
D.
पुनरुदभवन की विशेष विधियाँ
पादपों में लैंगिक जनन के विपरीत कुछ पुष्पी पौधों में जनन विशेष विधि द्वारा होता है। जैसे संतरा
A.
युग्मनज
B.
युग्मक
C.
बीजांड
D.
भ्रूण
युग्मनज, नर और मादा युग्मकों के संलयन के परिणामस्वरूप बनते हैं ।
A.
पुष्प
B.
बीजांड
C.
बीजाणुधानी
D.
बीजाणु
बीजाणुधानी यह कवकों और शैवालों की बीजाणुधारण करने वाली संरचनाएं हैं।
A.
अँड निर्माण प्रारम्भ होता है
B.
शुक्राणु निर्माण प्रारम्भ होता है
C.
अण्ड और शुक्राणु केन्द्रकों का निर्माण प्रारम्भ होता है
D.
अण्ड और शुक्राणु केन्द्रक संलयित होते हैं
निषेचन अण्ड और शुक्राणु केन्द्रकों के संलयित होने से प्रारम्भ होता है। इसमें युग्मनज का निर्माण होता है।
A.
अर्धसूत्री विभाजन
B.
समसूत्री विभाजन
C.
विखंडन
D.
बीजाणुजनन
अर्धसूत्री विभाजन एक प्रकार का कोशिका विभाजन है जिसके द्वारा जननिक कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं। इसमें जननिक पदार्थ की मात्रा आधी हो जाती है।
A.
परागण
B.
जनन
C.
निषेचन
D.
अंडजनन
जनन सभी सजीवों का मूलभूत लक्षण है इसलिए प्रत्येक जीव अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जनन करता है ।
A.
सूक्ष्म संयुग्मन
B.
सूक्ष्मप्रवर्धन
C.
परागण
D.
भ्रूणोद्भवन
इस विधि द्वारा पादपों के वांछित गुण पीढ़ियों तक बिना क्षति के बने रहते हैं।
A.
सूक्ष्मप्रवर्धन
B.
निषेचन
C.
पुनरुदभवन
D.
संवर्धन
एक जीव या पौधा पुनरुदभवित कहा जा सकता है जबकी उसका खोया हुआ भाग पुनः वृद्धि कर जाए और उसके वास्तविक कार्य कर सके ।
A.
लैंगिक जनन में
B.
अलैंगिक जनन में
C.
द्विलैंगिक जनन में
D.
निषेचन में
अलैंगिक जनन में केवल एक जनक शामिल होता है। इस प्रकार के जनन में अर्धसूत्री विभाजन, बहुगुणिता में न्यूनता या निषेचन नहीं होता है ।
A.
वायु
B.
जल
C.
पक्षी
D.
कीट
जब परागण होता है, जल जलोदभिदों के लिए परागण कारक के रूप में कार्य करता है। उदाहरण- जलीय पौधे
A.
जायांग वर्तिका का भाग है
B.
वर्तिका जायांग का एक भाग है
C.
वर्तिका जायांगों का समूह है
D.
जायांग और वर्तिका समान हैं
जायांग मादा जननांग का एक भाग है जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय और बीजांड होते हैं।
A.
प्रकीर्णन
B.
परागण
C.
निषेचन
D.
अंकुरण
मादा युग्मक बीजांड या अण्ड में उपस्थित होता है। निषेचन के दौरान मादा युग्मक युग्मनज बनाने के लिए संलयित हो जाते हैं।
(a) ग्रीष्मकाल के दौरान, जब तापमान उच्च होता है, पौधे स्व यं को ठण्डाट रखने के लिए अधिक वाष्पित होते हैं, इसलिए अधिक वाष्पोत्सोर्जन होता है और जल का अधिग्रहण बढ जाता है। वाष्पोत्सेर्जन जड़ों पर अधिक दबाव डालता है और यह मिट्टी से जल बाहर खींचता है।
(b) सर्द रातों के दौरान पत्तियों की सतह पर जल की उपस्थिति ओस कहलाती है। यह प्रक्रिया जल के संघनन के कारण उत्पन्न होती है। पत्तीि की उजागर सतह अपनी ऊष्मा विकिरित कर ठण्डीस हो जाती है, वायुमंडलीय नमी अपने वाष्पित हो सकने की दर से अधिक दर से संघनित होती है, परिणामस्वरूप जल की बूंदों का निर्माण होता है।
(a) जल स्तर को प्रभावित करने वाले कारक-
• कम या वर्षा न होना
• कृषि गतिविधियाँ
• जनसंख्या में वृद्धि
(b) जल की कमी कारण इस प्रकार हैं-
• जनसंख्या में वृद्धि
• जलवायु परिवर्तन और परिवर्तनशीलता
• जल का कुप्रबंधन
(c)
• तलछटीकरण प्रक्रिया तेज करने के लिए फिटकरी का उपयोग किया जाता है।
• कोयला रंग, गंध दूर करता है ।
• क्लोरीन जल में उपस्थित कीटाणुओं को नष्ट कर देती है ।
• जल का उपयोग प्रतिदिन पीने, खाना पकाने, सफाई करने, कपड़ा धोने, स्नान करने, सिंचाई आदि में किया जाता है ।
• फलों एवं बीजों के प्रकीर्णन में जल परिवहन एक अच्छा माध्यम है ।
• जल मनोरंजन का भी एक साधन है । जैसे - नौकायन, तैराकी, जल पोलो आदि ।
• आग को बुझाने तथा विद्युत उत्पन्न करने में भी जल का उपयोग किया जाता है ।
• इसके अतिरिक्त घर की पुताई, कूलर, गृह निर्माण, फसलों की सिंचाई, बागवानी, बर्फ बनाने के उद्योग में एवं चमड़ा उद्योग में जल का उपयोग होता है ।
1. हम घरों में बहते जल का संरक्षण, जल संचयन द्वारा कर सकते हैं। यह बहते जल का संग्रहण, संचयन और भंडारण की प्रक्रिया है।
लाभ :
•जल उपलब्धता में वृद्धि
•घरेलू स्तर पर, संचित जल शौचालय में बहाने, पौधों को पानी देने और कपड़े धोने, कार या फर्श धोने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है।
2. संचित जल पीने योग्य नहीं है क्योंकि इसमें अत्यलधिक मात्रा में अशुद्धियों और लवणों की उच्च मात्रा होती है। भंडारण के दौरान मिट्टी के कण और भूमि पर पडे दूसरे अपशिष्टों का जमाव, इसे पीने के लिए अयोग्य बनाता है।
3. इमारतों और उद्योगों की छत पर वर्षा जल का संरक्षण वर्षा जल संचयन कहलाता है। यह संचित जल सीधे उपयोग किया जा सकता या सिंचाई के लिए मिट्टी में डाला जा सकता है। यह प्रक्रिया भौम जलस्त र को बढाती है।
जल का शोधन तीन चरणों में होता है -
• तलछटीकरण - नदी के जल को तलछटीकरण हेतु एक बड़ी टंकी में एकत्रित किया जाता है । कुछ समय बाद टंकी की ताली में निलम्बित अशुद्धियाँ बैठ जाती हैं । प्रक्रिया तेज करने के लिए फिटकरी का उपयोग किया जाता है ।
• छानना - अब जल को कोयला, कंकडों एवं रेत की कई परतों से होकर छानते हैं । जिससे धुल तथा अघुलनशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं । कोयला रंग, गंध दूर करता है ।
• क्लोरीनीकरण - छनित जल में उपस्थित कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए उसमें क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है । क्लोरीन जल में उपस्थित कीटाणुओं को नष्ट कर देती है, इस प्रक्रिया को क्लोरोनीकरण कहते हैं । जल के शोधन में रासायनिक पदार्थ जैसे पोटैशियम परमैंगनेट, ब्लीचिंग पाउडर का भी प्रयोग किया जाता है । शुद्ध जल को पाइपों द्वारा घरों तक पहुंचाया जाता है । घरों में जल को उबालकर भी शुद्ध किया जा सकता है ।
A.
जल का स्वाद बढ़ाने के लिए
B.
वाष्पोत्सर्जन को रोकने के लिए
C.
हानिकारक सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने के लिए
D.
अवसादन को रोकने के लिए
नगरपालिका में जल उपचार में क्लोरीन का उपयोग हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए किया जाता है । क्लोरीनीकरण बहुत से रोग वाहक जीवाणुओं को नष्ट करने में प्रभावी है ।
A.
कृमियों का
B.
मछलियों का
C.
मेंढकों का
D.
मक्खियों का
खुली नाली व्यवस्था मक्खी, मच्छर और अन्य ऐसे जीवों के लिए प्रजनन स्थल है जो रोग उत्पन्न करते हैं ।
A.
दुर्गंध युक्त अपशिष्ट
B.
व्यवसायिक अपशिष्ट
C.
मलिन जल
D.
घरेलू अपशिष्ट
औद्योगिक अपशिष्ट, औद्योगिक और व्यावसायिक संगठनों द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट है । दुर्गंध युक्त अपशिष्ट शौचालयों और मलिन जल रसोई से उत्पन्न होता है ।
A.
प्रवाह में
B.
वाहित मल में
C.
कृषि कार्य अपशिष्ट जल में
D.
आपंक में
कृषि क्रियाकलापों के परिणामस्वरूप उत्पन्न अपशिष्ट जल कृषि कार्य अपशिष्ट जल कहलाता है । प्रवाह उद्योगो से निकला अपशिष्ट होता है ।
A.
अपशिष्ट जल उपचार प्रक्रिया (Waste Water Treatment Process)
B.
अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Waste Water Treatment Plant)
C.
अपशिष्ट जल उपचार सिद्धान्त (Waste Water Treatment Principle)
D.
अपशिष्ट जल उपचार योजना (Waste Water Treatment Plan)
WWTP अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Waste Water Treatment Plant) का संक्षिप्तिकरण है । उद्योगों, घरेलू उपयोग आदि से एकत्रित होने वाले अपशिष्ट जल से स्वच्छ जल प्राप्त करने के लिए इसे इकट्ठा और स्वच्छ किया जाता है ।
A.
पेय जल
B.
जल चक्र
C.
नदी का जल
D.
वाहित मल
घरों, उद्योगों, अस्पतालों, कार्यालयों और अन्य उपयोगों के पश्चात प्रवाहित किया जाने वाला अपशिष्ट जल वाहित मल कहलाता है ।
A. भौतिक
B. रासायनिक
C. जैविक
D. उपरोक्त तीनों
अपशिष्ट जल उपचार में भौतिक, रासायनिक और जैविक चरण सम्मिलित होते हैं जो जल को संदूषित करने वाले भौतिक, रासायनिक और जैविक द्रव्यों को पृथक करने में सहायता करते हैं ।
A.
आपंक
B.
संदूषक
C.
भौतिक अशुद्धियाँ
D.
कार्बनिक अशुद्धियाँ
वाहित मल घरों, उद्योगों, अस्पतालों आदि से उपयोग के पश्चात प्रवाहित किया जाने वाला अपशिष्ट जल होता है । यह द्रव रूपी अपशिष्ट होता है । सड़कों और छतों से बहकर आने वाला वर्षाजल अपने साथ हानिकारक पदार्थों को ले आता है । इसमें घुले हुए और निलंबित अपद्रव्य होते हैं । ये अपद्रव्य संदूषक कहलाते हैं ।
A.
वायवीय जीवाणुओं द्वारा
B.
अवायवीय जीवाणुओं द्वारा
C.
एक अम्ल मिलाकर
D.
ग्रिट द्वारा
निर्मलीकृत जल में पंप द्वारा वायु को गुजारा जाता है जिससे उसमें वायवीय जीवाणुओं की वृद्धि होती है । ये जीवाणु निर्मलीकृत जल में अब भी बचे हुए मानव अपशिष्ट पदार्थों, खाद्य अपशिष्ट, साबुन और अन्य अवांछित पदार्थों का उपभोग कर लेते हैं ।
A.
विसंक्रमण चरण
B.
द्वितीय चरण
C.
प्राथमिक चरण
D.
क्लोरीनीकरण चरण
बड़े ठोसों को प्रथम चरण के दौरान वाहित मल से पृथक कर लिया जाता है । इसके बाद वाहित मल को निपटान टैंक में प्रवाहित किया जाता है जिसमें और अधिक ठोस नीचे बैठ जाते हैं । नीचे बैठने वाले ठोस प्राथमिक आपंक कहलाते हैं ।
A.
शलाका छन्नों से
B.
स्कीमर से
C.
ग्रीट से
D.
सूक्ष्मजीवों से
बड़े अपशिष्ट भौतिक अपशिष्ट पदार्थ कहलाते हैं । अपशिष्ट जल में भौतिक अशुद्धियाँ जैसे कपड़े के टुकड़े, डंडियाँ, प्लास्टिक की थैलियाँ आदि को शलाका छन्नों द्वारा अलग किया जाता है ।
A.
उर्वरक में
B.
कीटनाशकों में
C.
शाकनाशियों में
D.
भोजन में
वाहित मल आपंक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का अंतिम उत्पाद है । यह पदार्थ मृदा के लिए पोषकों का एक अच्छा स्रोत हो सकता है ।
A.
वाहित मल
B.
प्रवाह
C.
उत्सर्जन
D.
आपंक
वाहित मल घरों, उद्योगों, अस्पतालों, कार्यालयों और अन्य उपयोगों के बाद प्रवाहित किए जाने वाला अपशिष्ट जल होता है । इसमें वर्षाजल भी सम्मिलित है, जो तेज वर्षा के समय गलियों में बहता है ।
A.
फॉस्फेट
B.
धातुएँ
C.
जन्तु अपशिष्ट
D.
नाइट्रेट
कार्बनिक अशुद्धियों में जन्तु अपशिष्ट, मानव मल, तेल, फल और सब्जी का कचरा, यूरिया, कीटनाशी, शाकनाशी आदि सम्मिलित हैं । ये वाहित मल में पाये जाते हैं इसमे अकार्बनिक अशुद्धियाँ, पोषक, मृतजीवी और रोग वाहक जीवाणु भी होते हैं ।
A.
आपंक
B.
बायो गैस
C.
कपड़ों के टुकड़े या प्लास्टिक
D.
ग्रीट
अपशिष्ट जल उपचार के दौरान आपंक और बायो गैस का उत्पादन होता है । शुष्क आपंक का उपयोग खाद के रूप में और बायो गैस का उपयोग एक ईंधन के रूप में किया जाता है ।
{55 + (-38)} – (–128)
= (17) – (–128)
= 17 + 128
= 145
दूसरी
संख्या = (–71) – (–32)
= –71 + 32 = –39
(i) 250
(ii) -150 का योज्य प्रतिलोम = 0 – (–150) = +150
जोड़ने पर
प्रारम्भिक बिन्दु के सापेक्ष लड़के की स्थिति 15 मीटर दक्षिण की ओर है ।
माना दूसरा पूर्णांक
दिया हुआ है, x + (-30) = -25
या x = -25 + 30 = 5
इसलिए, दूसरा पूर्णांक 5 है।

= (
= (
=
(i) {(–25) + (–33)} + (–82) = (- 25) + {(-33) + (-82)} (साहचर्य गुण से )
(ii) – (- 77) = (ऋण 77)का ऋणात्मक
4
-6
-6
-7
(i)
2
4
-6 =
(2
4)
(-6)
= 8
-6
= -48
(i) -5
-6
7 =
(-5
-6)
(-7)
= 30
(-7)
= -210
(i)
14 + 7 = 21
(ii) 16 + (-8) = 16 - 8 = 8
(iii) (-23) + (-11) = -23 - 11 = -34
(i) (-25)
11 = -(25
11) = -275.
(ii) (-15)
(-12) = (15
12) = 180.
(iii) 0
(-33) = 0 (क्योंकि
किसी संख्या का
शून्य से गुणा
हमेशा शून्य होता
है)
(i) हमें -6 को -2 में से घटाना है
(-2) – (-6) = (-2) + 6 = 4
इसलिए -2, -6 से 4 अधिक है ।
(ii) माना
अभीष्ट संख्या
x
है।
तब, (-5) – x = (-2)
या , (-5) + 2 = x
या, -3 = x
इसलिए, अभीष्ट संख्या –3 है
(iii) 0 – (-4) = 0 + 4 = 4
इसलिए, -4 को
0 में से घटाने
पर, हमें 4 प्राप्त होता
है।
सही उत्तर के लिए दिये गए अंक
गलत उत्तर के लिए दिये गए अंक = - 1
(i) गुरप्रीत के सही उत्तरों की संख्या
= 9
गुरप्रीत के गलत उत्तरों की संख्या = 15 – 9
= 6
गुरप्रीत का कुल प्राप्तांक = 9 (3) + 6(-1)
= 27 – 6
= 21
(ii) उसके मित्र के सही उत्तरों की संख्या = 5
उसके मित्र के गलत उत्तरों की संख्या = 15 – 5 = 10
=15 – 10 = 5
72
+ (-25)
42
13
+ 8
(-7)
वितरण
नियम का उपयोग
करने पर, हमें
प्राप्त होता
है
(i) (-25)
72
+ (-25)
42
= (-25)
[72
+ 42]
= (-25)
114
= -2850
(ii) 8
13
+ 8
(-7)
= 8
[13
+ (-7)]
= 8
[13
- 7]
= 8
6
= 48
(b
- a)
(i)
a, b तथा c के
मान प्रतिस्थापित
करने पर
(a + b) + c = {(-5) + (-6)} + 8
= (-11) + 8
=
-3
तथा
a + (b + c) = (-5) + {(- 6) + 8}
= (-5) + 2 = -3
(a
+ b) + c = a + (b + c)
(ii) a - b = (-5)
– (-6)
= -5
+ 6 = 1
b
- a = (-6)
– (-5)
=
-6 + 5 = -1
(a
- b)
(b
- a)
A.
10.5525
B.
10.5526
C.
10.5515
D.
10.5425
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
A.
B.
C.
D.
सबसे पहले हम दी गई संख्याओं में दशमलव बिंदु के दाईं ओर अंकों की संख्या को समान करेंगे :
0.5 = 0.50
0.50> 0.05> 0.25> 0.06
उपरोक्त दशमलव संख्याओं में सबसे बड़े दशांश वाली संख्या 0.50 है।
A.
21
B.
2.1
C.
2.01
D.
0.21
A.
B.
C.
D.
(3/4)
= (3/4) x (5/5) = 15/20
(3/4)
> (-11/20) > (-4/5) > -2.
A.
प्रकृति में फेफड़ों
B.
प्रकृति में वृक्क
C.
प्रकृति में थर्मामीटर
D.
प्रकृति में बैरोमीटर
वन प्रकृति में हरे फेफड़ों के रूप में कार्य करता है क्योंकि ये कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीज़न मुक्त करते हैं।
A.
पौधे अन्य पौधों के बीजों को प्रसारित करते हैं।
B.
सड़े हुए पशुओं का गोबर अन्य पशुओं को भोजन प्रदान करता है।
C.
जंतुओं की विस्तृत किस्में वन को पुनःउत्पादित और विकसित होने में सहायता करती हैं।
D.
पादप मृत जंतुओं के सड़ने में सहायता करते हैं।
वन एक गतिशील सजीवों की इकाई है क्योंकि ये जंतुओं द्वारा बीजों के प्रसारित होने के द्वारा विकसित होता रहता है। सड़े हुए जंतुओं का गोबर भी बीज के विकसित होने में सहायता करता है जबकि जंतुओं की विस्तृत किस्में वन को पुनःउत्पादित और विकसित होने में सहायता करती हैं।
A.
जल को बनाए रखता है।
B.
जल को वाष्प के रूप में लुप्त नहीं होने देता है।
C.
पत्तियों के माध्यम से वाष्पीकरण द्वारा जल, वायु में जल वाष्प के रूप में मुक्त होने के द्वारा
D.
जल में जल वाष्प को ठंडा करने के लिए सतह प्रदान करते हैं।
तरल अवस्था में जल, वाष्प के रूप में लुप्त हो जाता है। वाष्प संघनित हो कर वर्षा के रूप में पुनः तरल अवस्था में आ जाता है। पादप पत्तियों के माध्यम से वाष्पीकरण द्वारा जल, वायु में जल वाष्प के रूप में मुक्त करते हैं और जड़ों के माध्यम से मृदा द्वारा जल को पुनः अवशोषित कर लेते हैं।
A.
मृदा में उपस्थित ह्यूमस
B.
मृदा में उपस्थित चट्टानों के कण
C.
मृदा में उपस्थित सजीव
D.
निकटतम पादप
मृत और सड़े हुए पदार्थ अपघटकों की प्रक्रिया द्वारा ह्यूमस में परिवर्तित होते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जटिल कार्बनिक अणु सरल रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। ये पोषक तत्व पादपों द्वारा ले लिए जाते हैं।
A.
मृत और सड़े हुए पदार्थों को खाते हैं।
B.
जीवित पादपों को खाते हैं।
C.
जीवित पशुओं को खाते हैं।
D.
जीवित पादपों को ह्यूमस में परिवर्तित कर देते हैं।
अपघटक वह जीव हैं जो मृत पादपों और पशुओं को ह्यूमस में परिवर्तित करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मुक्त पोषक तत्व पादपों और पशुओं द्वारा ले लिए जाते हैं।
A.
अन्तः संबंधित
B.
एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं
C.
अन्तः संबंधित और एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
D.
अन्तः संबंधित लेकिन एक दूसरे पर निर्भर नहीं रहते हैं।
वनों में पादप, मृदा और अपघटक अन्तः संबंधित और एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं। पादपों को विकास के लिए मृदा जिसमें अपघटक होते हैं, उसकी आवश्यकता होती है। मृदा में अपघटकों द्वारा मुक्त हुए पोषक तत्व पादप ग्रहण करते हैं। मृदा की गुणवत्ता उसमें होने वाली कई जैवरासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा प्रभावित होती है।
A.
पादपों के लिए उपलब्ध खाद्य का प्रकार
B.
जीवों का प्रकार जो अन्य जीवों को खाता है।
C.
जीवों का आवास
D.
जीवों की खाद्य लेने की प्रक्रिया
वनों में कई खाद्य श्रृंखला चल रही हैं। प्रत्येक खाद्य श्रृंखला जीवों की अन्य जीवों को खाने की प्रक्रिया को बताती है। सामान्य रूप से एक खाद्य श्रृंखला में तीन या चार पोषण स्तर सक्रिय होते हैं।
A.
ठंडे और स्पंजी
B.
गर्म और कठोर
C.
नम और ठंडा
D.
गर्म और नम
सड़े हुए पदार्थ सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों के कारण कोमल और स्पंजी हो जाते हैं। सूक्ष्मजीवों के कारण ये सड़े हुए पदार्थों का ताप बढ़ जाता है जिससे ये गर्म होते हैं।
A.
जल की मात्रा
B.
जलवायु की परिस्थितियों
C.
पादप
D.
मृदा के प्रकार
प्रत्येक पादप या पशु में विशेषताएँ होती हैं जो जलवायु की परिस्थितियों के विशेष प्रकार में विकसित होने में सहायता करती हैं। इसलिए, वे उन जलवायु की परिस्थितियों में ही पाये जाते हैं।
A.
पत्तियाँ
B.
प्लास्टिक
C.
केंचुआ
D.
पशु
वनों की सतह गहरे रंग की होती है और मृत और सड़ी हुई पत्तियों, फलों, बीज, टहनियाँ और छोटे पौधों से आवरित होती हैं। सड़े हुए पदार्थ नम और गर्म होते हैं।
A.
वनों में सूर्य के प्रकाश की प्रचुरता होती है।
B.
वन भूमि बीज अंकुरित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती हैं।
C.
वन उन्हें अधिक कार्बन डाइऑक्साइड प्रदान करते हैं।
D.
वनों में पशुओं का कोई खतरा नहीं होता है।
पौधे और पेड़ वनों में विकसित होते हैं क्योंकि ये पर्याप्त बीज उत्पादन करते हैं और वन की भूमि बीज अंकुरित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है। अन्य कारक जैसे जल, मृदा और सूर्य का प्रकाश भी आसानी से उपलब्ध होते हैं।
A.
काष्ठ
B.
चारा
C.
सिंथेटिक फाइबर
D.
कागज़
वन हमें कई उपयोगी वस्तुएँ जैसे काष्ठ, पशुओं के लिए चारा, मसाले और दवाइयाँ प्रदान करते हैं। सिंथेटिक फाइबर मानव निर्मित फाइबर है इसलिए वन ये उपलब्ध नहीं करवाते हैं।
A.
पशुओं द्वारा अधिक चराई
B.
वनों में पशुओं की बढ़ती संख्या
C.
वनों में पादपों की बढ़ती हुई संख्या
D.
अधिक वर्षा
गावों के पास वन पशुओं द्वारा अधिक चराई, वृक्षों की अविवेकी कटाई, सड़कों और इमारतों के निर्माण तथा अन्य कई कारकों के कारण लुप्त होने की सीमा पर है।
A.
500 J
B.
50 J
C.
5 J
D.
0.5 J
केवल 10% ऊर्जा खाद्य श्रृंखला के अगले स्तर में स्थानांतरित होती है इसका अर्थ है की उत्पादक स्तर पर पादपों में 500 J ऊर्जा होती है।
A.
500 J
B.
50 J
C.
5 J
D.
0.5 J
केवल 10% ऊर्जा, खाद्य श्रृंखला के अगले स्तर में स्थानांतरित होती है।
वनोन्मूलन के दो प्राकृतिक कारण, आग और गंभीर सूखे की स्थिति हैं।
उपजाऊ भूमि का, अनुपजाऊ मरूस्थल में रूपांतरण मरूस्थलीकरण कहलाता है।
वन्य भूमि का अन्य प्रयोजनों में उपयोग के लिए वनों की कटाई वनोन्मूलन कहलाता है।
विभिन्न वृक्षों से खाद्य और ईंधन के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए मनुष्य वनों पर निर्भर रहता है।
सूक्ष्मजीव मृत पादप और जंतुओं के ऊतक को खाते हैं उन्हें एक गहरे रंग के पदार्थ में परिवर्तित कर देते हैं जिसे ह्यूमस कहते हैं।
हम
जानते हैं कि
1 लीटर
= 1000 मिली
लीटर
1 मिली
लीटर = 1/1000 लीटर
755
मिली
लीटर = 755/1000 = 0.755 लीटर
=_____

1000
/ 0.001 = 10,00,000
1

1
इसलिए, 654
165 पैसा = 1.65 रुपए (क्योंकि 1 रुपया = 100 पैसा)
___

1243.075
= 1000 +200 +a+3+7/100 + 5/1000.
1243.075
= 1000+200 + a + 3 +.075
1243.075
= 1203.075 + a
a
=1243.075 - 1203.075
a
= 40
अवरोही क्रम: 7.07 > 0.77 > 0.7 > 0.07 > 0.007

48
– 28.3 = 19.7.
इसलिए 28.3
से 48, 19.7 अधिक है


को किस
संख्या से भाग
दें कि
प्राप्त
हो जाए ?
माना अभीष्ट संख्या x है तब

(0.3
0.03)
0.003
= 0.009
0.003
= 0.000027


परिमाप =
2(l
+ b)
= 2(17.23 + 13.5)
=
2
(30.73)
=
61.46 सेमी
क्षेत्रफल
=
l
b
= 17.23
13.5
= 232.605 सेमी
2
कुल मिठाइयाँ = 175
उसकी बहन को दी गई मिठाइयाँ = 175 का 1/5
= 1/5
175 = 35
शेष = 175 – 35 = 140
भाई को दी गई मिठाइयाँ = 140 का 2/7
= 2/7
140 = 40
अब शेष बची मिठाइयाँ = 140 – 40 = 100
A.
-718
B.
0
C.
1
D.
718
किसी पूर्णांक a का योज्य प्रतिलोम – a होता है तथा (– a) का योज्य प्रतिलोम a होता है।
का व्युत्क्रम
है
A.
B. 0
C.
1
D.
8
का व्युत्क्रम
8है।
का सरल मान
है
A.
B.
.
C.
.
D.

A.
1/30 किमी पूर्व
B.
-30 किमी
C.
+30 किमी
D.
30-1 किमी
पूर्व धनात्मक होता है तथा पश्चिम ऋणात्मक होता है।
A.
+12
B. 0
C. –1
D. –12
-16+(4) = -12
(1331) / (-11) = -121
200 = 0, तो a ज्ञात कीजिए।