___
= 345
-
345
-1
= 345
–(–100) = 100
(- 30) + {(-34) + (- 82)} = {(- 30) + (-34)} + (-82) [साहचर्य गुण से ]
0 – (2112) = –2112
एक ऋणात्मक पूर्णांक के योज्य प्रतिलोम का चिन्ह धनात्मक होगा।
समुद्र तल से 200 मीटर ऊपर = +200 मीटर
सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक 1 है।
अवरोही क्रम का अर्थ है बड़े से छोटे क्रम में लिखना 10 > 2 > -5 > -14 > -17
(–Z) × (–A) = +ZA
सबसे बड़ा ऋणात्मक पूर्णांक -1 है ।
(i) -256 + 328 = 72
(ii) 2002 + (-135) = 2002 - 135 = 1867
(i) 0
– (+512) = -512
(ii) 70 – (-35) = 70 + 35
= 105
प्रश्नानुसार,
1005
– {(-545) + 125}
= 1005 – (-420)
= 1005 + 420
= 1425
खुली नालियाँ रोगकारक परिस्थितियाँ और दुर्गंध पैदा करती हैं । यह मक्खियों मच्छरों और अन्य हानिकारक कीटों के लिए प्रजनन की जगह है । ये कीट कई रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा करते हैं ।
जल से तैरते हुए अपशिष्ट जैसे तैल, ग्रीस आदि को अपमथित्र (स्कीमर) द्वारा पृथक कर लिया जाता है । इस प्रकार प्राप्त जल निर्मलीकृत जल कहलाता है । निर्मलीकृत जल को आगे वायवीय जीवाणुओ द्वारा पृथक कर लिया जाता है ।
अपशिष्ट जल से संदूषकों को पृथक करने की प्रक्रिया 'अपशिष्ट जल उपचार' कहलाती है । ये संदूषक भौतिक, रासायनिक या जैविक हो सकते हैं और इन्हें भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रमों द्वारा पृथक किया जाता है ।
गंदे पानी के तालाबों के पास यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ लगाने चाहिए क्योंकि ये पेड़ गंदे पानी से आसानी से सल्फर सोख लेते हैं और वातावरण मे शुद्ध जलवाष्प मुक्त करते हैं ।
जल जनित बीमारियों से प्रतिवर्ष लगभग 1.8 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है और ये मौतें अनुचित सार्वजनिक सफ़ाई तंत्रों के कारण होती हैं । इसलिए समाज में उचित मल व्यवस्था तंत्र और जल उपचार संयन्त्रों का समावेश इन जल जनित बीमारियों के होने को कम कर सकता है ।
1. कोलेरा
2. टाइफाइड
तेल और वसाएँ वाहितमल में अघुलनशील अशुद्धियाँ हैं । ये कठोर होकर पाइपों को अवरुद्ध कर सकती हैं । ये वाहितमल को बहाने नहीं देती हैं और इससे सम्पूर्ण नाली तंत्र अवरुद्ध हो जाता है । खुली नालियों में यह मृदा के छिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे मृदा की जल को फिल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है ।
स्वच्छता और रोग एक दूसरे से संबन्धित है । अगर कहीं पर स्वच्छता होगी तो बीमारी होने की संभावना बहुत कम होगी । परंतु जहाँ पर स्वच्छता नहीं होगी तो विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न होगी और फैलेंगी । अतः बीमारियो से बचने के लिए उचित स्वच्छता बनाई रखनी चाहिये ।
रसोई से निकले अपशिष्ट में तेल और वसा होती है जो जल में अघुलनशील होते हैं । ये कठोर हो जाते हैं और पाइपों को अवरुद्ध कर देते हैं । खुली नालियों में वसा मृदा के रंध्रों को बंद कर देती है और जल के अंतस्यंदन की दर को कम कर देती है । अपशिष्ट जैसे ठोस खाद्य अवशेष पाइपों में जम जाते हैं और वायवीय जीवाणुओं द्वारा अपघटन कम हो जाता है ।
1. जल में उद्योगों द्वारा रसायन मुक्त किया जाना ।
2. खेतों से काम में नहीं आने वाले रसायनों का जल के साथ बह जाना ।
3. जल में पेट्रोलियम उत्पादों का मुक्त किया जाना ।
किसानों द्वारा फसलों की पैदावार बढ़ाने और फसल की कीटों से सुरक्षा के लिए क्रमशः उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है । इन कीटनाशकों और उर्वरकों में बहुत से रसायन और जहरीले पदार्थ होते हैं जो बहकर नदियों और तालाबों में चले जाते हैं । यह जल प्रदूषण के स्तर को बढ़ा देता है ।
हम निम्न प्रकार से एक क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में सुधार कर सकते हैं
जल के शुद्धिकरण मे निम्न चरण सम्मिलित हैं −
1. अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र मे जल का भौतिक, रासायनिक और जैविक उपचार किया जाता है ।
2. अब जल को ग्रिट और बालू पृथक करने के लिए एक टैंक मे ले जाया जाता है जहाँ अवसादन द्वारा अशुद्धियों को निकाल लिया जाता है ।
3. ठोस अशुद्धियों को जल के नीचे से एकत्रित कर लिया जाता है । एकत्रित ठोस अपशिष्ट स्लज कहलाता है । तैरने वाली ठोस अशुद्धियों को स्कीमर द्वारा पृथक कर लिया जाता है । इस प्रकार प्राप्त साफ जल निर्मलीकृत जल कहलाता है ।
4. निर्मलीकृत जल को आगे जल वातक द्वारा शुद्ध किया जाता है । सभी बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं को क्लोरीनीकरण द्वारा हटा दिया जाता है और फिर जल को विभिन्न जल स्रोतों में प्रवाहित कर दिया जाता है ।
जल प्रदूषण को रोकने के पाँच उपाय निम्न हैं :
1. शौचालयों, सिंक और नालियों में पेंट, तेल, रासायनिक विलायकों, पॉलिश आदि को नहीं बहाना चाहिए । इनमें उपस्थित हानिकारक रसायन जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं ।
2. औद्योगिक अपशिष्टों को जल में बहाने से पूर्व उनको उपचारित करना चाहिए ।
3. वाहित मल को जल में बहाने से पूर्व इसे अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र में उपचारित किया जाना चाहिए ।
4. वनोन्मूलन को रोकना चाहिए तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।
5. जल संग्रहण तंत्रों की नियमित अंतराल पर साफ सफ़ाई करनी चाहिए तथा इनका उचित रख-रखाव करना चाहिए ।
A.
ऑक्सीज़न मुक्त करते हैं।
B.
कई पशुओं को भोजन प्रदान करते हैं।
C.
रंग में हरे हैं।
D.
मृदा अपरदन को रोकता है।
वनों को हरे फेफड़े कहते हैं क्योंकि पादप प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से ऑक्सीज़न मुक्त करते हैं जो जंतुओं के श्वसन के लिए आवश्यक होती है। ये वातावरण में ऑक्सीज़न और कार्बन डाइऑक्साइड के संतुलन को बनाए रखते हैं।
A.
सजावटी पौधों
B.
पवित्र पौधों
C.
ऑर्किड
D.
पेड़ों
वनों में कई बड़े पेड़ों की संख्या पायी जाती है। लेकिन वहाँ झाड़ियाँ, जड़ी बूटियाँ और घास भी देखी जाती हैं।
A.
दलदली
B.
समतल
C.
असमान और कई पेड़ों से आवरित
D.
सूखी और छोटे कीड़ों से आवरित
वनों में भूमि असमान और कई पेड़ों से आवरित होती है। वन के क्षेत्र का परिदृश्य या भौगोलिक जानकारी वहाँ की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग अलग स्थानों में भिन्न होती हैं।
A.
शांतिपूर्ण पर्यावरण होता है।
B.
वनों में कोई कार्बन डाइऑक्साइड नहीं होती है।
C.
वहाँ अंधेरा होता है।
D.
मौसम बहुत ठंडा और आर्द्र होता है।
वनों में हम काफी ताज़गी और ख़ुशी महसूस करते हैं क्योंकि वहाँ शांतिपूर्ण पर्यावरण होता है और ठंडी हवा बह रही होती है।
A.
पशुओं को उनके आने का पता चल जाएगा।
B.
शोर वनों में रहने वाले पशुओं को परेशान कर सकता है।
C.
पशु डर सकते हैं।
D.
पशुओं को परिदर्शक पसंद नहीं हैं।
परिदर्शकों को वनों में चुप रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि शोर वनों में रहने वाले पशुओं को परेशान कर सकता है। पशुओं की सामान्य दिनचर्या व्यवहार वनों में अप्रत्याशित लोगों की उपस्थिति के कारण प्रभावित हो जाता है।
पादप स्वयंपोषी हैं जो प्रकाश संश्लेषण कि प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। शाकाहारी पादपों को खाते हैं और मांसाहारी शाकाहारी जंतुओं को खाते हैं। इसलिए ये सभी पादपों पर निर्भर रहते हैं जो दोनों के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
मृतजीवी वह जीव हैं जो अपने पोषक तत्व निर्जीव पदार्थों सामान्य रूप से मृत और सड़े हुए पादपों या जंतुओं से लेते हैं। जैसे मशरूम ।
खाद्य श्रृंखला भोजन के संबंध को दर्शाती है इसका अर्थ है कि किसने किसको खाया।
पादपों की जड़े मृदा अपरदन को रोकने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भूमि को आवरित करने की सबसे अच्छी विधि अधिक पादपों को लगाना है। पादपों की जड़े मृदा को कसकर पकड़े रखती है और मृदा की ऊपरी परत वायु और जल के द्वारा ले जायी नहीं जा सकती है।
दूसरे वृक्षों से निर्मित कैनोपी के नीचे बढ़ रहे पौधे, विशेष रूप से एक वृक्ष कैनोपी के नीचे शाक और झाड़ियाँ, निमनस्थ वन वितान कहलाते हैं।
जंतु उनके साथी वन्य जंतुओं को असामान्य ध्वनियाँ और व्यवहार दर्शा कर घुसपैठियों के बारे में चेतावनी देते हैं। सभी जंतु अपने प्रकार के जंतुओं के साथ संवाद का एक तरीका रखते हैं। अपनी ध्वनि पिच, शोर, आवृत्ति में परिवर्तन आदि चेतावनी संकेत के रूप में काम में लेते हैं।
पेडों के तने से ऊपर का शाखित भाग, वृक्षों का मुकुट कहलाता है।
साल, सागवान, सेमल, शीशम, नीम, पलाश, खैर आदि वनों में पाये जाने वाले पौधों के कुछ उदाहरण हैं।
वन पशुओं के लिए एक प्राकृतिक आवास हैं। ये अपनी सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए वनों में रहते हैं।
वन हरे फेफड़ों व प्रकृति में जल शुद्धिकरण तंत्र के रूप में कार्य करते हैं।
वन अधिकारी वन में कुछ जंतुओं की उपस्थिति को उनके पैरों के निशान और विष्ठा द्वारा पहचानते हैं।
वन विभिन्न पौधों, जंतुओं और अन्य सजीवों सहित एक प्राकृतिक व्यवस्था है । यह वन्य जंतुओं का प्राकृतिक आवास और प्राकृतिक संसाधनों का एक स्रोत भी है।
सूक्ष्मजीव जो मृत पादपों को ह्यूमस में परिवर्तित करते हैं उन्हें अपघटक के रूप में जाना जाता है। ये वनों में एक बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि ये बहुत सारे सड़े हुए कार्बनिक पदार्थों को ह्यूमस में परिवर्तित कर देते हैं।
हरे पौधे, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से अपने लिए भोजन तैयार करते हैं।
पौधे प्रकाश संश्लेषण के द्वारा ऑक्सीजन मुक्त करते हैं और जंतुओं को ऑक्सीजन प्रदान कर श्वसन की प्रक्रिया में सहायता करते हैं । यही कारण है कि वन "हरे फेफड़े" कहलाते हैं।
स्वयंपोषी पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं। विषमपोषी जंतु अपने भोजन के लिए पूर्णतया पौधों पर निर्भर रहते हैं।
मृदा की उपजाऊ परत का बह जाना मृदा अपरदन के रूप में जाना जाता है। वर्षा के दौरान, वनों की सबसे ऊपरी परत कैनोपी वर्षा की बूंदों का अवरोध करती है और जल वृक्षों के तने और शाखाओं के माध्यम से नीचे आती हैं। अगर वृक्ष उपस्थित नहीं होगे तो वर्षा सीधे भूमि से टकराएगी और मृदा को क्षति पहुंचाएगी। वृक्षों की जड़े मृदा के कणों को पकड़े रखती हैं और मृदा अपरदन को रोकते हैं।
वन एक प्राकृतिक तंत्र है जिसमें कई पादप, जन्तु और सूक्ष्मजीव शामिल हैं। ये सभी एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं और पुनःउत्पादित तथा विकसित होने में वन की सहायता करते हैं। मृत जन्तु गिद्ध, कौवा, सियार और कीटों के लिए भोजन के रूप में कार्य करते हैं। इसके अलावा, अपघटक मृत पादपों और जंतुओं को ह्यूमस में परिवर्तित करते हैं जो मृदा को पोषक तत्वों में समृद्ध बनाते हैं। यहाँ तक की सड़े हुए जंतुओं का गोबर बीजों के विकास के लिए पोषक तत्व प्रदान करता है। इसलिए, वन में कुछ अपशिष्ट नहीं होता है।
नहीं, यह पौधों और जंतुओं का केवल एक घर ही नहीं है बल्कि विभिन्न जनजातियों के लोग भी वनों में रहते हैं। ये लोग भोजन, आश्रय, पानी और दवाईयों के लिए पूर्णतया वनों पर निर्भर रहते हैं । ये आदिवासी लोग वन के पौधों के बारे में अपने परंपरागत ज्ञान का उपयोग करते हैं।
पौधे वाष्पोत्सर्जन के द्वारा पर्यावरण के लिए एक अच्छी मात्रा मुक्त करते हैं और जल चक्र के लिए उत्तरदायी भी होते हैं। वनोन्मूलन की बढ़ती हुई दर के साथ पौधों द्वारा होने वाले वाष्पोत्सर्जन में कमी हो रही है जिससे जल चक्र प्रभावित होता है और वर्षा में कमी करता है।
की
तुल्य भिन्न है
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
A.
![]()
B.
![]()
C.

D.

A.

B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
जीते गए खेल = 6
कुल खेल = 6 + 4 = 10
अभीष्ट भिन्न = 6/10
A.
29/30
B.
29/23
C.
29/27
D.
29/25
सभी भिन्नो के अंश समान हैं इसलिए सबसे छोटी हर वाली भिन्न सबसे बड़ी होगी।
A.
90 लीटर
B.
C.
D.
193/2 लीटर
A.
11/9
B.
11/7
C.
11/18
D.
7/18
5/9 + 6/9 = 11/9
A.
B.
C.
D.
संख्या जिसका एक चौथाई 9/4 में जोड़ने पर योग 4 हो जाता है माना वह संख्या n है |
n /4 +9/4 = 4
n/4 = 4 - 9/4
= 7/4
अर्थात n = 7
A.
B.
C.
D.
3.92×0.1×0× 6.3 = 0 0 का किसी संख्या से गुणा 0 होता है ।
A.
10.1
B.
10.01
C.
1.10
D.
1.01
A.
92.80 रूपए
B.
90.90 रूपए
C.
89.10 रूपए
D.
81.90 रूपए
A.
0.4
B.
0.9
C.
4
D.
9
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
= 8/14
= 4/7
की
समतुल्य भिन्न
ज्ञात कीजिए।

1/3 का व्युत्क्रम 3 है। (क्योंकि 1/3x3 =1)
1 का व्युत्क्रम 1 होता है ।
एक
खाद्य श्रृंखला
वह क्रम है जो हमें
बड़े जंतुओं या
मनुष्य द्वारा
पौधों और छोटे
जंतुओं के उपभोग
को बताती है।
निम्न खाद्य
श्रृंखला एक
उदाहरण है-
घास -->
कीट -->
मेंढक -->
साँप -->
चील
ऐसा इसलिए है क्योंकि बारिश की बूंदें सीधे वनों के तल पर नहीं पड़ती हैं। सबसे पहले, यह वृक्षों की कैनोपी पर पड़ती हैं बाद में शाखाओं के माध्यम से नीचे आती हैं इसके बाद यह शाक और झाड़ियों पर गिरती हैं। इसलिए पानी सतह पर तुरंत एकत्रित नहीं हो पाता है। वन भी वर्षा जल के प्राकृतिक अवशोषक के रूप में कार्य करते हैं।
वन पृथ्वी पर जीवनयापन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि:
यदि धरती से वन लुप्त हो जायेंगे तो निम्न घटनाऐं हो सकती हैं-
1. कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होगी जिससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होगी।
2. यदि कोई भी पेड़-पौधे नहीं होंगे तो, जंतुओं को भोजन और आश्रय नहीं मिलेगा क्यों कि वन ही उनके एक प्राकृतिक आवास हैं ।
3. यदि कोई पेड़ नहीं होगा तो मृदा का नदियों में प्रवाह हो जायेगा और यह बाढ़ की दरों को बढा देगा।
4. यदि वायु कम या ऑक्सीजन रहित, प्रदूषित होगी हमारे जीवन को खतरे हो जाएगा।
वन "गतिशील सजीव इकाई" अर्थात्, जैविक शक्ति और जीवन निम्नलिखित कारणों से कहलाते हैं-
वन में पौधों की अनेक किस्में होती हैं ये शाकाहारियों को भोजन और आवास के लिए अधिक से अधिक अवसर प्रदान करते हैं।
यदि वन में शाकाहारी बड़ी संख्या में है तो वे माँसाहारियों के लिए एक बड़ी मात्रा में भोजन की उपलब्धता बढ़ा देते हैं।
अपघटक वनों में बढ़ रहे पौधों के लिए पोषक तत्वों की आपूर्ति को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
इस प्रकार जीवन पौधों से शुरू होता है, शाकाहारी से माँसाहारियों में गुजरता है और अंत में अपघटक मृत कार्बनिक अपशिष्टों को पोषक तत्वों में विघटित कर देते हैं जिसका पौधे मृदा से उपयोग करते हैं।
A.
B.
C.
D.
चूँकि, 1
1 = 1,
2
1 = 2,
-3
1 = -3
इसलिए, हम कह सकते हैं कि 1 पूर्णांकों के लिए गुणन तत्समक है ।
(-25) +
(-5)
(-6) का गुणनफल है
A.
345
B.
335
C.
-335
D.
-345
15
(-25) +
(-5)
(-6)
चूँकि, a
(-b) =
-(a
b) तथा (-a)
(-b) =
(a
b)
= -(15
25) + (5
6)
= - 375 + 30
= - 345
A.
0
B.
10
C.
-25
D.
25
बड़े परिमाण का ऋणात्मक चिन्ह के साथ मान सबसे छोटा होता है।
A.
B.
C.
D.
यदि हम कथन में -5 रखते हैं तो हमें प्राप्त होता है (-5) + (-8) = (-8) + (-5)
या , -13 = -13
अर्थात बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष
अन्य मानों से परिणाम बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष नहीं होगा।
A.
ऋणात्मक
B.
धनात्मक
C.
D.
कहा नहीं जा सकता है
एक धनात्मक तथा एक ऋणात्मक पूर्णांक का गुणनफल हमेशा ऋणात्मक होता है |
48
= -1, तब x का मान
है
A.
-96
B.
-48
C.
48
D.
96
x
48
= -1
= -1,
x = -1
48 =
-48
A.
(– 1) तथा (– 2)
B.
2 तथा 1
C.
(– 2) तथा 1
D.
2 तथा (– 1)
(– 1) + (– 2) = – 3
A.
B.
C.
D.
सामान्यतः, किन्ही दो पूर्णांकों a, b के लिए हम कह सकते हैं कि, a + b = b + a उदाहरण : (– 2) + 3 = 3 + (– 2)=1
A.
a + (b × c) = (a × b) + c
B.
a + (b + c) = (a + b) + c
C.
a × (b + c) = c × (a + b)
D.
a-(b+c) = (a-b)+c
A.
– xy
B.
x × – y
C.
xy
D.
(-x) × y
(– x ) × (– y) = xy [चूँकि – × – = +]
A.
552
B.
-552
C.
553
D.
–553
A.
गुणन का साहचर्य नियम
B.
गुणन का बंटन नियम
C.
गुणन का क्रम विनमेय नियम
D.
संवृत गुण
A.
58
B.
– 58
C.
1
D.
0
किसी संख्या का निरपेक्ष मान, बिना किसी चिन्ह के उस संख्या का संख्यात्मक मान होता है ।
A.
0
B.
100
C.
1
D.
9
सबसे छोटा धनात्मक पूर्णांक 1 है ।
A.
+ 9
B.
-9
C.
11
D.
– 11
(-144/ 16) = – 9
A. जब दो कोणों का योग 90o होता है।
B. जब दो कोणों का योग 180o होता है।
C. जब दो कोणों का योग 360o होता है।
D. इनमें से कोई नही
यदि दो कोणों का योग 90o है, तब इन कोणों को पूरक कोण कहा जाता है।
A. 50o
B. 48o
C. 36o
D. 30o
54o के पूरक कोण का माप (90 – 54)o अर्थात, 36o है।
A. 35°.
B. 55°.
C. 65°.
D. 90°.
शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते है।
A. एकान्तर अन्तःकोण
B. शीर्षाभिमुख कोण
C. संगत कोण
D. बाह्य कोण
कोण 1 और कोण 2 एकान्तर अन्तःकोण है।
A. असमान
B. एक न्यून कोण और एक अधिक कोण
C. समान कोण
D. पूरक कोण
जब दो रेखाएं एक दूसरे के सम्मुख कोणो को प्रतिच्छेद करती है, तब वे समान होते है।
1,
2 के संलग्न हैं ? कारण दीजिए ।
1 और
2संलग्न
नहीं
हैं
क्योंकि
इनमें
कोई
उभयनिष्ठ
शीर्ष
नहीं
है |