असत्य। (चूंकि दो न्यून कोणों का योग 180° के बराबर नही हो सकता है।)
असत्य। (चूंकि दो अधिक कोणों का योग 180° के बराबर नही हो सकता है।)
असत्य
कोणों के ऐसे युग्म जिनमें एक उभयनिष्ठ शीर्ष हो, एक उभयनिष्ठ भुजा हों और जो भुजाएं उभयनिष्ठ नहीं हैं, वें उभयनिष्ठ भुजा के एक - एक तरफ हो, आसन्न कोण कहलाते है।
दो पूरक कोणों का योग होता 90°है।
इसलिए, 70° का पूरक कोण = 90° - 70° = 20°.

1,
5;
2,
6;
4,
8;
3,
7
रेखाओं या रेखाखंड या किरणें।
असत्य
संपूरक
कोणों
का
योग = 180º
उनमें
से
एक
कोण = 75º
दूसरा
कोण =
180°-75° = 105°

दो
पूरक
कोणों
का
योग
=
90º
माना
कि
एक
कोण
x
है।
इसका
पूरक
कोण = 90°-x
दिया
गया
है
कि
x = 90°-x
2x = 90°
x = 45°.
(i)20°
का
पूरक
कोण = 90
- 20
= 70
(ii)63° का
पूरक
कोण =90
- 63
= 27
A.
B.
C.
D.
16 + 4(p - 6) = 0 (दिया है)
4(p – 6) = 0 - 16 (बायें पक्ष से दायें पक्ष में 16 को स्थानापन्न करने पर)
4(p - 6) = -16
p - 6 = -4 (दोनो पक्षो को 4 से विभाजित करने पर)
p = -4 + 6 (बायें पक्ष से दायें पक्ष में -6 को स्थानापन्न करने पर)
p = 2
A.
B.
C.
D.
4 + 3(a + 5) = 28 (दिया है)
3(a + 5) = 28 - 4 (4 को बायें पक्ष से दायें पक्ष में स्थानापन्न करने पर
3(a + 5) = 24
a + 5 = 8 (दोनो पक्षो को 3 से विभाजित करने पर)
a = 8 - 5 (बायें पक्ष से दायें पक्ष में 5 को स्थानापन्न करने पर)
a = 3
A.
a + b + 4
B.
2a + 8b + 4
C.
6a + 2b - 20
D.
6a + 8b - 20
X
- Y = (4a + 5b - 8) - (2a – 3b - 12)
= 4a + 5b – 8 – 2a + 3b + 12
= 2a + 8b + 4
A.
12 और 13
B.
13 और 14
C.
13 और 15
D.
14 और 15
माना कि सबसे छोटी विषम प्राकृत संख्या x है।
इसलिए, दूसरी विषम प्राकृत संख्या = (x + 2)
दिया है, x + (x + 2) =
28
2x + 2 = 28
x = 13
इसलिए संख्याएं 13 और 15 है।
A.
8 मीटर और 13मीटर
B.
10 मीटर और 14मीटर
C.
13 मीटर और 8मीटर
D.
1 मीटर और 10मीटर
माना आयत की चौड़ाई x मीटर है
इसकी लम्बाई = (x + 5) मीटर
दिया हुआ है , 2[x + (x + 5)] = 42
2(2x+5) = 42
2x+5 = 21
2x = 16
x = 8 मीटर
चौड़ाई = 8 मीटर
लम्बाई = (x + 5) मीटर
= (8 + 5) = 13 मीटर
A.
25
B.
26
C.
27
D.
28
माना संख्या x है
प्रश्नानुसार ,
x + 9 = 36
इसलिए , x = 27
A.
B.
C.
D.
x का तीन गुना = 3x
y का 7 गुना = 7y
x के तीन गुने को y के 7 गुने में जोड़ने पर 3x + 7y प्राप्त होता है |
A.
5
B.
7
C.
10
D.
12
माना संख्या = x
दिए हुए कथन के अनुसार , हमें ज्ञात है
6(x + 5) = 102
x+5 = 17
x = 12
A.
1
B.
2
C.
3
D.
4
28 = 4 + 3(p + 5)
28
= 4 + 3p + 15
28
= 3p + 19
28 – 19 = 3p
9
= 3p
p
= 3
A.
9,11
B.
11,13
C.
11,19
D.
9, 13
माना पहली संख्या = x तब दूसरी संख्या = 2x – 3 (x + 2x –3)+ 7 = 37 3x = 33 x = 11 दूसरी संख्या 22-3 = 19 है।
A.
4
B.
6
C.
10
D.
14
xवर्ष बाद पुत्री की उम्र= (x + 5)वर्ष और माँ की उम्र = (x + 32)वर्ष
अब , (32 + x) = 4(5 + x)
(दिया हुआ है )
32 + x = 20 + 4x
3x =
12
x = 4
A.
p = 8, m = 6
B.
p = 6, m = 7
C.
p = 6, m = 6
D.
p = 4, m = –6
3p –1 = 23
3p = 23 + 1
p = 8
और
6m –2 = 34
6m = 36
m = 6
A.
B.
C.
D.
माना कि पुत्र की वर्तमान आयु = x वर्ष आदमी की वर्तमान आयु = 3x छह वर्ष पहले आदमी की आयु = 3x –6 पुत्र की आयु = x –6 3x –6= 4(x –6) 3x –6= 4x –24 x = 18 छह वर्ष बाद आदमी की आयु = 3 × 18 + 6 = 60 पुत्र की आयु = 18 + 6 = 24 अभीष्ट अनुपात= 60 : 24 = 5 : 2
A.
B.
C.
D.
माना कि 4 क्रमागत पूर्णांक x, x + 1, x + 2, x + 3 है। 4 क्रमागत पूर्णांको का योग = x + (x + 1) + (x + 2) + (x + 3) ⇒70 = 4x + 6 ⇒4x = 70 - 6 ⇒4x = 64 ⇒x = 16 अतः पूर्णांक 16, 17, 18 और 19 है और उनमें से सबसे बड़ा पूर्णांक 19 है।
A.
112°
B. 106°
C. 102°
D. 100°
माना कि कोण x, (x – 44°)है। इसलिए x +( x – 44°) = 180° 2x = 224° x = 112°
(y/3)
+ 5 = 12
या (y/3) = 12 – 5
या (y/3) = 7
या y = 7 x 3
या y = 21
2p-1 = 23+p
2p-p =
23+1
p
= 24
2
x
= 2
x = 2/2 = 1
से m का मान ज्ञात कीजिए।
या
समीकरण के दोनो पक्षो में
⇒ x = 3
A.
2
B.
3
C.
5
D.
9
आंकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर, 2,2,2,3,3,4,5,5,5,6,6,7,7,8,9 आंकड़ों का मध्य पद माध्यिका होती है, इसलिए माध्यिका 5 है ।
A.
2
B. 3
C.
4
D.
6
प्रथम 9 पूर्ण संख्याओं का माध्य = (0 + 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8)/9 = 36/9 = 4
A.
45
B.
48
C.
52
D.
47
आरोही क्रम में अंकों को व्यवस्थित करने पर, हमारे पास 48, 56, 72, 75, 76, 80, 85, 89, 90, 95 हैं, अंकों का परिसर = (95 –48) = 47
A.
B.
C.
D.
यहाँ अच्छी तरह फेंटी हुई 52 ताश की गड्डी में 4 इक्के हैं ।
इसलिए, इक्का प्राप्त करने की प्रायिकता = 4/52 = 1/13
A.
4
B.
5
C.
6
D.
7
प्रथम 10 पूर्ण संख्याएँ
0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 तथा 10 हैं।
दिये हुए प्रेक्षणों
का मध्य पेक्षण
माध्यिका होती
है। यहाँ, मध्य
प्रेक्षण = 5
पदों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर
14,21,22,27,38,48,72
माध्यिका = मध्य पद = 27
माध्य =(1+3+5)/3 = 3
समांतर माध्य या औसत को या साधारण रूप से माध्य को निम्नप्रकार परिभाषित कर सकते हैं:
माध्य = सभी प्रेक्षणों का योग / प्रेक्षणों की संख्या
प्रेक्षण का वह मान जो सबसे अधिक बार आता है, बहुलक कहलाता है।
माध्यिका
असत्य
यहाँ हम पाते हैं कि 3.75 आंकड़ों में नहीं है।
संख्याओं के वे
लाल गेंद
निकाले जाने की
प्रायिकता
संख्याओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर
27,28,32,35,36,38,39,40,41,42,46,46
अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या
2
है।
छात्रों द्वारा प्राप्त
अधिकतम अंक = 46
पासे पर 6 से छोटी संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 5 हैं।
कुल परिणाम = 6
पासे पर 6 से छोटी संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता = 5/6
11
की बारंबारता
सबसे अधिक अर्थात
5 है।
इसलिए, बहुलक = 11
माध्य
1) अधिकतम
अंक = 49.5
2) परिसर
= अधिकतम
अंक - न्यूनतम
अंक =
49.5 – 15
=
34.5
प्रथम तीन
अभाज्य संख्याएँ
2,
3, 5
माध्य
=
आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर
1, 1, 1, 2, 2, 2, 2, 3, 5, 5
यहाँ हम देखते हैं कि 2 की बारंबारता 4 है जो कि सबसे अधिक है इसलिए बहुलक = 2.
पढ़े गए पेज = x का 5/8
x - 5x/8 = 168



1)
सत्य
2) असत्य : (1/2)
36
= 18
3) असत्य : चूँकि
3.3 + 3.3 + 3.3 = 9.9 सेमी


केलों की कुल संख्या = 12 दर्जन
= 12
12 = 144
सड़े हुए केलों की संख्या= 144 का (5/24)
= (5/24)
144 = 30
वापस करने योग्य केलों की संख्या=144 का (1/3) = (1/3)
144 = 48
चूँकि 30 + 48 = 78
उपयोग में लाए जा सकने वाले केलों की संख्या = 144 - 78 = 66
A.
1 से 2
B.
2 से 3
C.
0 से 1
D.
-1 से 1
प्रायिकता हमेशा 0 से 1 के बीच होती है।
A.
4
B.
5
C.
6
D.
7
A.
1
B.
2
C. 3
D.
5
प्रथम
पाँच पूर्ण संख्याएँ:
0, 1, 2, 3, 4
प्रथम पाँच पूर्ण संख्याओं का माध्य
= (0 + 1 + 2 + 3 + 4)/5 = 10/5 = 2
A.
45
B.
43
C.
42
D.
39
माध्य = (13 +
5 + 22 + 28 + 42 + 45 + 50 + 80 + 45 + 60)/10
= 390/10
= 39
A.
25
B.
24
C.
35
D.
22
आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए। हम पाते हैं: 18, 18, 22,24,25,35,42,47,49 प्रेक्षण का मध्य पद माध्यिका होती है। इसलिए, माध्यिका 25 है ।
A.
15
B.
14
C.
13
D.
12
चूँकि, 15 सबसे अधिक बार आया है । इसलिए, दिए हुए आँकड़ों का बहुलक 15 है ।
A.
B.
C.
D.
दी हुई उम्रों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर 27, 28, 32, 32, 35,36,39,40,41,42,45,46, हम देखते हैं कि सबसे अधिक उम्र के छात्र की उम्र 46 वर्ष है।
A.
0
B.
48
C.
50
D.
60
रनों का माध्य = (58 + 75 + 40 + 36 + 47 + 46 + 0 + 98)/8
= 400/8
= 50
A.
B.
C.
D.
चूँकि दिए गए आँकड़ों में 35 तथा 37 सबसे अधिक बार तथा समान संख्या में प्राप्त हुए हैं। इसलिए दोनों ही आँकड़ों के बहुलक हैं।
A.
15.9
B.
14.1
C.
2.4
D.
1.5
संख्याओं का योग = = 10
15 = 150
संख्याओं का सही योग = 150 – 12 + 21= 159
A.
6
B.
5
C.
4
D.
3
चूँकि 5 की आवृति सबसे अधिक बार होती है, इसलिए दिये हुए आंकड़ों का बहुलक 5 है ।
दिन |
सोम |
मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
| वर्षा का स्तर (मिमी) | 0.3 | 11.4 | 7.1 | 2.9 | 4.5 | 9.1 | 11.2 |
A.
2
B.
3
C.
4
D.
5
माध्य वर्षा = (0.3 + 11.4 + 7.1 + 2.9 + 4.5 + 9.1 + 11.2)/ 7
= 46.5/ 7
=
6.6 (लगभग )
सोमवार = 0.3 मिमी , गुरुवार
= 2.9 मिमी , शुक्रवार
= 4.5
A.
1/2
B.
1/3
C.
1/5
D.
1/6
प्रायिकता = अनुकूल परीक्षण /परीक्षणों की कुल संख्या = 1/6
A.
0
B.
1/4
C.
1/2
D.
1
जब एक सिक्के को फेंका जाता है, तब दो संभव परिणाम अर्थात चित या पट होते हैं ।इसलिए, अभीष्ट प्रायिकता = 1/2
A.
1/2
B.
1/3
C.
1/5
D.
1/6
यदि
एक पासे को फेंका
जाता है, तो
इसके सम्भावित
परिणामों की
संख्या 6
है सम्भावित
प्राप्तांक
हैं : 1, 2, 3, 4, 5 या
6.
यहाँ 1, 3 तथा
5 विषम संख्याएँ
हैं ।
इसलिए, अभीष्ट
प्रायिकता = 3/6
= 1/2






माना कि अभीष्ट कोण
तब

इसलिए

हम जानते है कि जब दो समान्तर रेखाओं को एक तिर्यक छेदी रेखा के द्वारा काटा जाता है
यहाँ

![]()
(i)
1 और
4;
5और (
3 +
2)
(ii)
1 और
5;
4और
5
ABC = 70
, तो ज्ञात कीजिए- (i)
DGC
DEF
(i)
ABC और
DGC संगत
कोण
हैं
DGC =
ABC = 70
(ii)
DEF =
DGC = 70
(संगत
कोण
हैं )
माना
पहला कोण का
मान X हैं।
इसलिए दूसरा
कोण (2X + 45°)
हम जानते हैं
कि दो
सम्पूरक
कोणों का योग 180°
होता है
X + (2X + 45°) = 180°
3X + 45° = 180°
3X = 180° – 45° = 135°
X = 135°/3 = 45°
अतः पहला
कोण 45° तथा
दूसरा कोण 135° है।







यहाँ
(i)
तथा
संगत कोण है।
[दिया है ]
तथा
और x रैखिक युग्म बनाते है।
![]()
इसलिए , ![]()
(ii) यहाँ ,
x और 2x तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण है।
इसलिए ,x + 2x = 180o
![]()
(iii) यहाँ ,
और
संगत कोण है।
= 100°
1 =
5.
4 =
6, तब a
2 +
5 = 180
, तब
a
(i) संगत कोण गुणधर्म । [जब दो रेखाए समान्तर होती है, संगत कोणो के युग्म समान होते है।]
(ii) एकान्तर बहिष्कोण गुणधर्म । [जब एकान्तर बहिष्कोण युग्म समान होते है, तब रेखाएं समान्तर हेाती है। ]
(iii) तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण पूरक होते है।
(1) l और m समान्तर हैं।
(2) l और m समान्तर नहीं हैं।
(3) l और m समान्तर हैं।

(i) x और
इसलिए


y और


इसलिए
(ii) 40o, xऔर















= 140
, y और







इसलिए


(1) शीर्षाभिमुख अधिक कोण
(2) संलग्न कोटि पूरक कोण
(3) समान सम्पूरक कोण
(4) असमान सम्पूरक कोण ।


A. न्यून कोण त्रिभुज
B. समकोण त्रिभुज
C. अधिक कोण त्रिभुज
D. समबाहु त्रिभुज
दिया हुआ त्रिभुज ABC एक न्यून कोण त्रिभुज है क्योंकि इसके सभी कोण 90° से कम हैं ।
A. AB
B. BC
C. AC
D. कोण C
दिये हुए त्रिभुज ABC में , कोण B के सामने की भुजा AC है ।
A. 1
B. 2
C. 3
D. 4
चूँकि त्रिभुज में 3 शीर्ष होते हैं, इसलिए त्रिभुज में 3 माध्यिकाए हो सकती हैं।
A. समकोण त्रिभुज
B. समद्विबाहु
C. विषमबाहु
D. समबाहु
दिए हुए त्रिभुज में दो भुजाएँ बराबर हैं इसलिए यह त्रिभुज समद्विबाहु त्रिभुज होगा ।
A. 100°
B. 90°
C. 80°
D. 70°
माना तीसरा कोण x है ।
तब
30°+ 70°+ x = 180°
(त्रिभुज के कोण योग गुण से )
x = 180° - 100°
= 80°
माना
कि
संख्या
x
है, तब
अभीष्ट
समीकरण
है
x+3 = 4
माना
कि
संख्या
x
है, तब
अभीष्ट
समीकरण
है
x- 3 = 4
चूंकि एक समबाहु त्रिभुज में सभी कोणों बराबर होते है। माना कि एक कोण
⇒ 3x = 180°
⇒ x = 60°
एक संख्या से चार को घटाने पर परिणाम 5 प्राप्त होता है।
माना कि अज्ञात संख्या x है |
प्रश्नानुसार x + 6 = 20
अतः x = 20 – 6 = 14
माना संख्याएँ
तो
⇒13x = 182
⇒ x = 14
इसलिए
एक संख्या
दूसरी संख्या
दिए गए चित्र से समीकरण बनाइये और x का मान ज्ञात कीजिए।