
मान लीजिए दो क्रमानुगत पूर्णांक x और x+1 हैं।
x + x + 1 = 11
या 2x = 10
या x = 5, इसलिए x + 1 = 6
उनमे से सबसे बडा 6 हैं।
यहाँ 7x + 5 = 9
x = -2 रखने
पर
बायां
पक्ष
7 (-2) + 5
अथवा
-14
+ 5
अथवा
-9
दायां
पक्ष
x = -2 दिये
गये
समीकरण
का
हल
नही
है।

हल
करने
पर


माना
संख्या x है
अब 2x - 7 = 45
2x = 52
x= 26




मान
लीजिए
कि
पहला
कोण
x
है।
तब, दूसरे
कोण
की
माप
=
180° - x
दी
गई
स्थिति
के
अनुसार
(180° - x)
- x
= 10°
2x = 170
x = 85°
इसलिए, पहले
कोण
का
माप
85°
है
और
दूसरे
कोण
का
माप
(180
- 85°)
= 95
है।



पासे पर सम संख्याएँ
कुल परिणाम = 6
अभीष्ट प्रायिकता
अँग्रेजी की एक परीक्षा में 15 छात्रों द्वारा प्राप्त अंक 19, 25, 23, 21, 9, 21, 15, 10, 5, 16, 25, 21, 24, 12, 21 हैं |
दिए हुए आंकड़ों का बहुलक, प्रेक्षण का वह मान होता है जो सबसे अधिक बार आता है।
इसलिए इन आंकड़ों का बहुलक

आरोही
क्रम में व्यवस्थित
करने पर
18, 20, 25, 28, 36, 46, 75
यहाँ n = 7 (विषम)
माध्यिका = {(7 + 1)/2} वां पद
= चौथा पद
= 28
माध्यिका 28 है।
दंड आलेख प्रयुक्त संख्याओं का एक समान चौड़ाई के एक समान दूरी पर स्थित दंडो द्वारा निरूपण होता है और दंडो की लम्बाई आपके द्वारा चयन किये गये पैमाने तथा बारम्बारता पर निर्भर करती हैं।
5 के प्रथम पाँच गुणज 5, 10, 15, 20, 25 हैं ।
माध्य =
माध्य
= 15
a)
लाल गेंद निकालने
कि प्रायिकता
= 2/10 = 1/5
b) पीली गेंद निकालने
कि प्रायिकता
= 3/10
c)हरी गेंद निकालने
कि प्रायिकता
= 5/10 = 1/2

आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर 155, 156, 159, 160, 160, 160, 162, 163, 163, 164, 165, 165, 165, 168, 168
(i) परिसर = 168 – 155 = 13
(ii) 160 तथा 165, 3 बार प्राप्त होते हैं, इसलिए बहुलक 160 तथा 165 दोनों हैं। (iii) माध्यिका = 163 (केन्द्रीय मान )






| खिलाडी | खेल 1 | खेल 2 | खेल 3 | खेल 4 |
| A | 14 | 16 | 10 | 10 |
| B | 0 | 8 | 6 | 4 |
| C | 8 | 11 | नहीं खेला | 13 |

|
परिणाम
|
1
|
2
|
3
|
4
|
5
|
6
|
|
बारंबारता
|
39
|
42
|
31
|
15
|
13
|
0
|
(i)
P(3) = 31/150
(ii) P(6) = 0/150 = 0
(iii) P(1) = 39/150
(iv) P(4) = 15/150 = 1/10
| ऊँचाई (सेमी में ) | 165 | 170 | 175 | 180 |
| लड़कियों की संख्या | 2 | 3 | 1 | 4 |
(i) माध्य ऊँचाई
= (165+165+170+170+170+175+180+180+180+180)/10
= 173.5
(ii)चूँकि सबसे अधिक बारंबारता 180 की है जो कि 4 है | अतः बहुलक 180 होगा |
(iii) परिसर = 180 - 165 = 15
A.
3x +2 = 6 और x - 7 = 2
B.
4x - 3 = 17 और 3x + 4 = 19
C.
4x + 4 = 10 और 3x - 11 = 3
D.
2x + 6 = 15 और 4x - 4 = 12
x = 5 हल के लिए
(i) 4x - 3 = 17
बायें पक्ष में x = 5 रखने पर, हमे ज्ञात है
बायां पक्ष = 4 x 5 – 3 = 20 - 3 = 17 = दायां पक्ष
(ii) 3x + 4 = 19
बायें पक्ष में x = 5 रखने पर, हमे ज्ञात है
बायां पक्ष = 3 x 5 + 4 = 15 + 4 = 19 = दायां पक्ष
A.
-7
B.
7
C.
5
D.
2
माना संख्या = x
अब ,x में 38 जोड़ने पर 45 देती है
अर्थात x + 38 = 45
या , x = 45 – 38 (38 का R.H.S में पक्षान्तरण करने पर)
या x = 7
A.
10
B.
12
C.
15
D.
20
माना कि संख्या x है।
प्रश्नानुसार,
5 + 3x = 41
3x
= 41 - 5
3x
= 36
x
= 12
A.
B.
C.
D.
माना छोटी संख्या x है
इसलिए , बड़ी संख्या = x + 22
अब , x + (x + 22) = 80 (दिया हुआ है )
2x+22 = 80
2x = 58
x = 29
इसप्रकार, छोटी संख्या= 29
और बड़ी संख्या = 29 + 22
= 51
तब x का मान होगा
A.
5
B.
7
C.
10
D.
12
ब्रज गुणन विधि द्वारा




5 वर्ष
पूर्व ,माना
पुत्र
की
उम्र x वर्ष
थी
तब,पिता
की
उम्र= 7x
पुत्र
की
वर्तमान
उम्र = x + 5
पिता
की
वर्तमान
उम्र =7x + 5
5 वर्ष
बाद
पुत्र
की
उम्र = (x +
5) + 5 = x + 10
5 वर्ष
बाद
पिता
की
उम्र = (7x +
5) + 5 = 7x + 10
दी
हुई
शर्त
के
अनुसार
7x + 10 = 3(x + 10)
4x = 20
x = 5
इसलिए
,
पुत्र की वर्तमान उम्र = x + 5 = 5 + 5 = 10 वर्ष
पिता की वर्तमान उम्र =7x + 5
= (7
5
+ 5 )= 40 वर्ष
A. 30°, 45°, 105°.
B. 30°, 60°. 90°.
C. 40°, 40°, 100°.
D. 60°, 60°, 60°.
दिया गया है
2x + 3x + 7x = 180°
x = 15°
इसलिए, कोण 30°, 45° और 105°है।
A. 12°.
B. 100°.
C. 300°.
D. 600°.
60° का संपूरक = 180° - 60° = 120°.
माना कि A एक कोण है, तब
दिये गये समीकरण के अनुसार,
A का 20% = 120°

A. 30°.
B. 55°.
C. 60°.
D. 80°.

A. 60°
B. 90°.
C. 100°.
D. 120°.
A. 30°.
B. 45°.
C. 60°.
D. 75°.

A. 60°.
B. 120°.
C. 130°.
D. 180°.
A. X – आकृति
B. Y – आकृति
C. F – आकृति
D. Z – आकृति
यदि, दो समान्तर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा द्वारा काटा जाता है, तब संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
A. (90 – x)°.
B. (145 – x)°.
C. (150 – x)°.
D. 180°.
दो संपूरक कोणों का योग 180° होता है। (x + 35)0 का संपूरक कोण
= 180° - (x + 35)°
= (145 – x)°.
A. 10.
B. 110.
C. 210.
D. 310.
दो पूरक कोणों का योग 900 होता है। इस प्रकार, 890 का पूरक = 890 + 10 = 900.
A. 630.
B. 730.
C. 1530.
D. 2430.
दो पूरक कोणों का योग 900 होता है। इस प्रकार, 270 का पूरक = 900 – 270 = 630

A. एक न्यून कोण
B. एक अधिक कोण
C. एक समकोण
D. एक सरल कोण
A. 150° और 30°.
B. 30° और 60°.
C. 45° और 54°.
D. 30° और 45°.
A. 100o.
B. 110o.
C. 120o.
D. 130o.
70o का संपूरक 110o है चूंकि इनका योग 180o है।
A. 60o.
B. 90o.
C. 170o.
D. 180o.
पूरक कोणों का योग 90o होता है। इसलिए, x = 90o – 30o = 60º




ABC और
DAB में समान भागों के तीनो युग्मों के लिए कथन दीजिए।
निम्नलिखित में से कौनसा कथन सार्थक है?
(i)
ABC
BAD (ii)
ABC
ABD
समान भागो के तीन युग्म हैः
ABC
=
BAD
(= 90°)
AC = BD (दिया है)
AB = BA (उभयनिष्ठ भुजा)
ऊपर
से,
ABC
BAD
(RHS सर्वांगसमता के नियम से).
इसलिए, कथन (i) सही है।
कथन (ii) सार्थक नही है।
AOC
BOD?
दो
त्रिभुजों
AOC
और
BOD
में,
C =
D (प्रत्येक
70°
)
साथ
ही,
AOC =
BOD =
30° (शीर्षाभिमुख
कोण)
इसलिए,
AOC का
A = 180°
– (70° + 30°) = 80° (त्रिभुज
के
कोण
योग
गुणधर्म
के
उपयोग
से)
इसी
प्रकार,
B = 80°
AC = BD (प्रत्येक
3
इकाई)
इसलिए, ASA सर्वांगसम
नियम
से,
AOC
BOD.
A को समद्विभाजित करता है और AB = AD, सिद्व कीजिए कि DC = BC

ACD और
ACB में
AD = AB [दिया है]
DAC =
BAC [दिया है]
AC = CA [उभयनिष्ठ]
ACD
ACB [SAS से]
इसलिए, DC = BC [CPCT से]
PMA =
QMA
दर्शाइये कि
AMP
AMQ
समान भागो के तीन युग्म हैः


AM = AM (उभयनिष्ठ भुजा
इसलिए


B =
C

AB = AC और AD
BC
सिद्व करना है:
B =
C
उपपत्ति:
ABD और
ACD में,
AB = AC [दिया है]
ADB =
ADC [प्रत्येक 90°]
AD = AD [उभयनिष्ठ]
ABD
ACD [RHS से]
इसलिए,
B =
C [CPCT द्वारा]
ABC के शीर्षलम्ब BD और CE इस प्रकार है कि BD = CE
(i)
CBD और
BCE में समान भागों के तीन युग्मों को बताइए।
(ii) क्या
CBD 
BCE? क्यो अथवा क्यों नहीं?
(iii) क्या
DCB =
EBC? क्यो अथवा क्यों नहीं?


समान भागों के तीन युग्म नीचे दिये गये हैः



और


(iii) हाँ 





ABD 
CDB, सर्वांगसम भाग भी बताइए
ABCD एक चतुर्भुजहै जिसमें
तो सिद्ध करना है कि


उपपत्ति
BC= DA [दिया हुआ है
BD= DB [उभयनिष्ठ
इसलिए
सर्वांगसम भाग हैं
BC=DA
BD=DB
और

ADB और
ADC में समान भागों के तीन युग्मों के लिए कथन दीजिए।
(ii) क्या
ADB
ADC? क्यो अथवा क्यो नही?
(iii) क्या
B =
C? क्यो अथवा क्यो नही?
(iv) क्या BD = CD? क्यो अथवा क्यो नही?
(i)
ADB और
ADC में,
समान
भागों
के
तीन
युग्मों
को
नीचे
दिया
गया
हैः
AB = AC
(समद्विबाहु त्रिभुज)
BDA =
CDA
(=90
)
और AD = AD (उभयनिष्ठ)
(ii) हाँ,
ADB
ADC
(RHS सर्वांगसमता के नियम से)
(iii)
B =
C
(सर्वांगसम त्रिभुज के संगत भाग)
(iv) BD=CD
(सर्वांगसम त्रिभुज के संगत भाग)
BCA
?
QRS
?


और
इसलिए








इसलिए




A.
3:10
B.
10:3
C.
3:11
D.
11:3
सर्वप्रथम, हम
दोनो
दूरियों
को
समान
इकाई
में
परिवर्तित
करेंगे।
5 मी = 5
100 सेमी
= 500 सेमी
(चूंकि 1 मी = 100 सेमी)
अभीष्ट
अनुपात
=
5 मी : 150 सेमी
= 500 : 150
=10 : 3
A.
20%
B.
25%
C.
30%
D.
40%
माना
कि
बच्चों
का
प्रतिशत
x
है।
प्रश्नानुसार,
25% + 45% + x = 100%
70% + x = 100%
x = 100% - 70% = 30%
A.
₹110
B.
₹108
C.
₹112
D.
₹132
एक
खिलौने
का
क्रय
मूल्य
₹
120
है।
हानि = ₹120 का
10%
= ₹ 12
विक्रय
मूल्य = क्रय
मूल्य – हानि
= 120 – 12
= ₹108
A.
60%
B.
45%
C.
75%
D.
40%
एक
क्रम
में, 3/4 के
रूप
में
प्रतिशत
को
ज्ञात
करने
के
लिए, हम
इसे
100
से
गुणा
करेंगे।
इस
प्रकार,
3/4
100 =
75%
A.
20:23
B.
33:11
C.
19:52
D.
19:62
570:1560 = 19:52
समकोण त्रिभुज
नहीं त्रिभुज संभव नहीं है क्योंकि त्रिभुज के तीनों कोणो का योग 180 अंश होता है ।
नहीं
त्रिभुज संभव
नहीं है क्योंकि
5+6
< 12.
त्रिभुज की
दो भुजाओं का योग
तीसरी भुजा से
बड़ा होता है।



दो सम्मुख
अन्तः कोणों का
योग =
बहिष्कोण
50
+ x =
110
x
= 60
त्रिभुज
के बहिष्कोण गुण
से हम जानते हैं,
बहिष्कोण =
दो अन्तः सम्मुख
कोणो का योग
30
+ x = 80
x = 50
P का माप ज्ञात
कीजिए ।
त्रिभुज के कोण योग गुण से,
P + 47
+ 52
= 180
इसलिए,
P = 180
– 47
– 52
= 180
– 99
= 81
त्रिभुज
के कोणों का योग
=
180
2x
+ x + 90
= 180
3x = 90
x = 30
त्रिभुज
के बहिष्कोण गुण
से हम जानते हैं,
बहिष्कोण =
दो अन्तः सम्मुख
कोणो का योग
50
+ x = 120
या
x
= 70
अब, त्रिभुज के कोणो
का योग = 180
50
+ y + 70
= 180
y =
60
ABC में कोण C समकोण
है। यदि AC = 5 सेमी
है तथा BC = 12 सेमी
। तो AB की लंबाई
ज्ञात कीजिए।

शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
अब
50° + y + 80° = 180°
y = 50°
शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
अब

शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
अब
3
हम जानते हैं कि एक त्रिभुज की किन्ही दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है।
इसलिए तीसरी भुजा दो भुजाओं के योग से छोटी होनी चाहिए।
इसप्रकार तीसरी भूजा 8 + 6 = 14 सेमी से छोटी है।
हम
जानते हैं कि एक
त्रिभुज की किन्ही
दो भुजाओं का अंतर
हमेशा तीसरी भुजा
से छोटा होता है
।
इसलिए तीसरी
भुजा 8 – 6 = 2 सेमी
से बड़ी होनी चाहिए
।
तीसरी भुजा की लंबाई 2 सेमी से बड़ी तथा 14 सेमी से छोटी कोई भी होसकती है ।
,

इसप्रकार
सीढ़ी दीवार के
पाद से 9 मीटर
की दूरी पर है।
दिया हुआ है : त्रिभुज
तो सिद्ध करना है कि: PQ + QR + RP > 2PS
उपपत्ति :
त्रिभुज PQS में,
PQ + QS > PS … (1) (चूंकि दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है |
त्रिभुज PRS में,
PR + RS > PS … (2) ((चूंकि दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है |
समीकरण
⇒ PQ + QR + PR > 2PS [चूंकि
AC = 10 सेमी तथा BD = 24 सेमी
इसलिए , OB = 24/2 = 12 सेमी, OA = 10/2 = 5 सेमी


पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करने पर ,

AB2 = (12)2 + (5)2
= 144 + 25
= 169
AB = 13 सेमी
इसलिए
= 52 सेमी
माना
त्रिभुज BCD में,


BD2= CD2 + BC2
= (5)2 + (12)2
= 25 + 144
= 169
BD = 13 मीटर
इसलिए, पेड़ की लंबाई AC = AB + BC
= BD + BC [AB = BD]
= 13 + 12
= 25 मीटर
इसप्रकार, पेड़ की ऊँचाई 25 मीटर है ।
त्रिभुज में कोणों का अनुपात
माना पहला कोण = x
त्रिभुज का दूसरा कोण = 2x
त्रिभुज का तीसरा कोण = x
चूंकि त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है, इसलिए x + 2x + x = 180°
4x = 180°
x = 180°/4
= 45°
इसप्रकार त्रिभुज के कोण 45°, 90° तथा 45° हैं ।
चूँकि एक कोण 90° है, इसलिए यह समकोण त्रिभुज है। इसके दो कोण भी बराबर हैं इससे हम कह सकते हैं कि बराबर कोणों के सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं । इसलिए यह एक समद्विबाहु त्रिभुज़ है।

अब
त्रिभुज
ABC में
AC2+BC2=AB2
(पाइथागोरस
प्रमेय से )
122+52
= AB2
144+25=AB2
169=AB2
132=AB2
या AB=13
अब त्रिभुज
BOC में
BO2+OC2=BC2 (पाइथागोरस प्रमेय
से)
BO2
+ 32=52
BO2
= 25 - 9
BO2
= 16
BO2
= 42 या BO = 4
x =
AB-BO = 13 - 4 = 9 सेमी



त्रिभुज AOD में पाइथागोरस प्रमेय से
OD2 = AD2 – OA2
= (26)2 – (10)2
= 676 – 100
= 576
OD = 24 सेमी
BD = 2× 24 = 48 सेमी

माना पेड़ x मीटर की ऊँचाई से बिंदु B से टूट जाता है|
तब त्रिभुज BCD में पाइथागोरस प्रमेय से

अतः पेड़ 9.1 मीटर की ऊँचाई से टूटता है |
A.
B.
C.
D.
AC = PR (दिया है)
BC = QR (दिया है)
ABC =
PQR (प्रत्येक 900)
ABC
PQR, (RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा)
A.
B.
C.
D.