DEF
BCA, तब
निम्नलिखित
के
संगत
भागो
को
लिखिए।

ABC 
FED के अन्तर्गत ABC 

ABC 
FED के अन्तर्गत ABC 










दिए गए त्रिभुजों में, AT कोण A तथा T के बीच सम्मिलित भुजा है तथा कोण P तथा N के बीच सम्मिलित भुजा PN है|
अंत: ASA सर्वांगसमता नियम से अन्य दो प्रतिबंध है :
∠A = ∠P , ∠T = ∠N
दो सर्वांगसम कोणों में से एक की माप 70o है, दूसरे कोण की माप 70° है।
उनकी लम्बाई समान हों ।





RAT और
WON में,समान
भागों
के
तीन
युग्म
नीचे
दिए
गए
हैः
AR = OW
(दिया
है)
RAT
=
WON (दिया
है)
AT = ON
(दिया
है)
इसलिए,
RAT
WON
( SAS सर्वांगसमता के नियम से)




A.
B.
C.
D.
बराबर
है
A.
-10/9
B. 10/9
C. 9/10
D.
-9/10
=
9/10 - 9/5
=
- 9/10 [5 तथा 10 का ल.स
= 10]
0) है
A.
B.
C.
D.
पूर्णांक = – 8
परिमेय संख्या के रूप में यह -8/1 है।
A.
2/6
B. 10/8
C. 10/16
D. 5/8
20/32 के अंश तथा हर को 4 से भाग देने पर हमें 5/8 प्राप्त होता है।
बराबर
है
A.
1
B.
-1
C. 1/3
D.
-1/3


-2 का व्युत्क्रम -1/2 है।

का
योज्य
प्रतिलोम
बताइए।

b) -5
को
में से घटाइए।

का गुणनफल ज्ञात कीजिए।
![]()
दी हुई
आरोही
क्रम में संख्याएँ
हैं
:

को सरलतम रूप में लिखिए।

मीटर लंबी एक रस्सी को 12 समान टुकड़ों में काटा जाता है, तो प्रत्येक टुकड़े की लंबाई क्या होगी?

है , उनमें
से एक
है,
तो दूसरी संख्या
ज्ञात कीजिए।
दूसरी संख्या
है।
,तो दूसरी संख्या ज्ञात कीजिए।

अतः दूसरी संख्या -35/4 है।
3/7
का
योज्य प्रतिलोम
= - 3/7 क्योंकि
(3/7) + (-3/7) = 0 = (-3/7)+(3/7)
तथा -4/9 का
योज्य प्रतिलोम
= 4/9 क्योंकि
(4/9) + (-4/9) = 0 = (-4/9)+(4/9)
B = 30°. क्या हम इस त्रिभुज को अद्वितीय रूप से बना सकते हैं ?
नहीं , क्योंकि बिन्दु C को अद्वितीय रूप से नहीं बना सकते हैं ।
नहीं , क्योंकि 4+3< 8
त्रिभुज के गुण से हम जानते हैं कि, ' त्रिभुज की किन्ही दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है' ।
हाँ , यहाँ दिए हुए मापों का प्रयोग करके त्रिभुज का निर्माण संभव है।
त्रिभुज के गुण से हम जानते हैं कि त्रिभुज की किन्ही दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है।
यहाँ इस गुण का पालन हो रहा है ।
हमें ज्ञात है कि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
यहाँ दिए हुए दो कोणों का योग 200° है जो 180° से बड़ा है। अत: त्रिभुज DEF की रचना करना संभव नहीं है।
PQR= 115° तथा
QRP = 30°, क्या हम इन मापों के साथ
PQR की रचना कर सकते हैं ?
हाँ, त्रिभुज के कोण योग गुण का उपयोग करके
PQR की रचना कर सकते हैं ।

असत्य
त्रिभुज के सभी तीनों कोणो का कुल माप 180° होता है ।

दी हुई आकृति एक समद्विबाहु त्रिभुज है ।
रचना के पद :
1. AB = 5 सेमी खींचिए ।
2. A पर, एक रेखाखण्ड AX इसप्रकार खींचिए कि कोण BAX = 30°
3. B पर, एक रेखाखण्ड BY इसप्रकार खींचिए कि कोण ABY = 30°.
4. BY और AX एक दूसरे को C पर काटते हैं ।
5. ABC एक अभीष्ट समद्विबाहु त्रिभुज है ।
रचना के चरण:
1. 6.8 cm लंबाई का एक रेखा खंड QR खींचिए ।
2. बिंदु Q पर एक किरण QX खींचिए, जो QR के साथ 105° का कोण बनाए।
3. बिंदु Q को केंद्र मान कर और 6.8 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए ।
4. यह चाप किरण QX को बिंदु P पर काटती है ।
5. PR को मिलाएं । तब PQR अभीष्ट त्रिभुज है ।


दी हुई आकृति एक समकोण त्रिभुज है ।
रचना के पद :
1. AB = 4 सेमी खींचिए ।
2. B पर, एक रेखाखण्ड BX इस प्रकार खींचिए कि कोण ABX = 90°
3. A को केन्द्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का चाप इस प्रकार लगाइए कि यह BX को C पर काटे ।
4. A और C को मिलाइए ।
5. ABC एक अभीष्ट समकोंण त्रिभुज है ।
रचना के पद :
1. AB = 4.8 सेमी खींचिए।
2. चांदे का उपयोग करके,
ABK = 70° खींचिए।
3. रेखाखण्ड BK पर, BC = 5.2 सेमी काटिए।
4. A तथा C को मिलाइए।
ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

रचना के पद:
1. 4 cm लंबाई का एक रेखा खंड QR खींचिए ।
2. बिंदु Q से, बिंदु P, 5 cm की दुरी पर है । अत: Q को केंद्र मान कर और 5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए।
3. बिंदु R से, बिंदु P, 4.5 cm की दुरी पर है । अत: R को केंद्र मान कर और 4.5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए ।
4. दोनों चापों का प्रतिच्छेद बिंदु P है । अब बिंदु P को अंकित कीजिए ।
5. PQ और PR को जोड़िए।
तब PQR अभीष्ट त्रिभुज है ।
रचना के पद:
1. 6 cm लंबाई का एक रेखा खंड MN खींचिए ।
2. बिंदु M पर एक किरण MX खींचिए जो रेखा MN के साथ 30° का कोण बनाए।
3. बिंदु M को केंद्र मान कर और 4.5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए ।
4. यह किरण MX को बिंदु L पर काटता है।
5. LN को जोड़िए। तब LMN अभीष्ट त्रिभुज है ।

रचना के पद :
पद 1 : एक रेखा XY खींचिए और XY पर एक बिंदु M लीजिए।
पद 2 : बिंदु M से होता हुआ XY पर एक लंब MZ बनाईए।
पद 3 : M को केन्द्र मानकर और 2 सेमी त्रिज्या लेकर एक चाप लगाइए जो MP को P पर काटता है।
पद 4 : ध्यान दीजिए यहाँ कोण PMY का मान 90° है । इसलिए, बिंदु P से XY के समानांतर रेखा खींचने के लिए P पर 90° का कोण, NPM बनाए।
तब, रेखा PN अभीष्ट समानांतर रेखा है।

रचना के पद:
1. 6 cm लंबाई का एक रेखा खंड AB खींचिए ।
2. बिंदु A से, बिंदु C, 5 cm की दुरी पर है । अत: A को केंद्र मान कर और 5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए।
3. बिंदु B से, बिंदु C, 3.5 cm की दुरी पर है । अत: R को केंद्र मान कर और 3.5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए ।
4. दोनों चापों का प्रतिच्छेद बिंदु C है । अब बिंदु C को अंकित कीजिए ।
5. CA और CB को जोड़िए।
तब ABC अभीष्ट त्रिभुज है ।


रचना के पद :
1.एक रेखाखण्ड AB = 5 सेमी खींचिए ।
2. A पर, एक रेखाखण्ड AX इस प्रकार खींचिए कि कोण BAX = 30°
3. A को केन्द्र मानकर, 5 सेमी त्रिज्या का चाप इस प्रकार लगाइये कि यह AX को C पर काटे ।
4. बिंदु C और B को मिलाइए ।
5. ABC एक अभीष्ट समद्विबाहु त्रिभुज है।
रचना के पद :
1.एक रेखाखण्ड BC = 5 सेमी खींचिए ।
2. B पर, एक रेखाखण्ड BX इस प्रकार खींचिए कि ∠CBX = 60° ।
3. C पर, एक रेखाखण्ड CY इस प्रकार खींचिए कि ∠BCY = 60° ।
4. रेखाखण्ड BX और CY एक दूसरे को A पर काटते हैं ।
ABC एक अभीष्ट समबाहु त्रिभुज है ।

|
रचना के पद : पद 1. एक रेखा AB खींचिए । इस पर एक बिंदु P लीजिए और इसके बाहर एक बिन्दु C लीजिए। C को P से मिलाइए। पद 3 . अब C को केन्द्र मानकर और पहले के समान त्रिज्या लेकर एक चाप FG लगाइए जो PC को H पर काटता है। पद 5. रेखा m खींचने के लिए C तथा I को मिलाइए।
|
Q = 90°, एक PR = 6 सेमी तथा QR = 4 सेमी
रचना के पद :
1. QR = 4 सेमी खींचिए।
2. परकार की सहायता से, Q पर RQK = 90° बनाइए।
3. RP = 6 सेमी काटिए ।
4. P तथा R को मिलाइए।
अब
PQR अभीष्ट त्रिभुज है ।


रचना के चरण:
पद 1. एक रेखा YZ =5 सेमी लंबाई की खींचिए ।
पद 2 . Y से, बिन्दु X की दूरी 4.5 सेमी है । इसलिए, Y को केन्द्र मानकर 4.5 सेमी त्रिज्या का एक चाप लगाइए।
पद 3. Z से, बिन्दु X की दूरी 6 सेमी है । इसलिए, Z को केन्द्र मानकर 6 सेमी त्रिज्या का एक चाप लगाइए।
पद 4. बिन्दु X खींचे गए दोनों चापों पर होगा । इसलिए यह चापों का प्रतिच्छेद बिन्दु है । चापों के प्रतिच्छेद बिन्दु को X अंकित कीजिए।
XY तथा XZ को मिलाइए। XYZ एक अभीष्ट त्रिभुज है जैसा कि दिखाया गया है ।

रचना के पद :
1. BC = 6 सेमी खींचिए ।
2. B को केन्द्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का चाप लगाइए ।
3. C को केन्द्र मानकर 7 सेमी त्रिज्या का चाप इस प्रकार लगाइए कि यह पहले वाले चाप को A पर काटे ।
4. बिन्दुओं A और C तथा A और B को मिलाइए।
5. ABC एक अभीष्ट त्रिभुज है ।
6. AB और BC के लम्ब समद्विभाजक खींचिए । ये समद्विभाजक एक दूसरे को O पर प्रतिच्छेदित करते हैं ।
7. त्रिभुज ABC का परिकेन्द्र ‘O ’ है ।
8. OA या OC, या OB त्रिज्या लेकर एक वृत्त बनाइए।
खींचा गया वृत्त ही अभीष्ट परिवृत्त है ।
रचना के पद निम्नलिखित हैं:
(i) एक रेखा l खींचिए और इस पर एक बिंदु A लीजिए। एक बिंदु P लीजिए जो l पर नहीं है ।
A से P को मिलाइए ।
(ii) A को केन्द्र लेकर और उपयुक्त त्रिज्या लेकर,एक चाप लगाइये जो l को B पर और AP को C पर काटता है।
(iii) P को केन्द्र मानकर और पहले ली गई त्रिज्या लेकर, एक चाप DE लगाइए जो AP को F पर काटता है।
(iv) परकार को BC की लम्बाई तक खोलिए। बिना त्रिज्या बदले और F को केंद्र मानकर,एक चाप लगाइए जो पहले वाले चाप DE को G पर काटता है।
(v) रेखा m बनाने के लिए P को G से मिलाइए। रेखा m रेखा l के समान्तर होगी।
(vi) P को रेखा l पर किसी बिंदु Q से मिलाइए । रेखा m पर एक अन्य बिंदु R चुनिए। इसी प्रकार,R से होकर जाने वाली और PQ के समान्तर एक रेखा को खींचा जा सकताहै।

माना यह रेखा l को S पर काटता है।
चतुर्भुज PQSR में ,विपरीत भुजाएँ आपस में समान्तर हैं।
PQ || RS और PR || QS
इस प्रकार,चतुर्भुज PQSR एक समान्तर चतुर्भुज है।
रचना के पद :
पद 1 : एक रेखा PQ खींचिए और PQ के बाहर एक बिन्दु R लीजिए।
पद 2 : PQ पर एक बिंदु S लीजिए और S को R से मिलाइए।
पद 3 : S को केन्द्र मानकर उपयुक्त त्रिज्या लेकर एक चाप लगाइए जो PQ को T तथा SR को U पर काटता है।
पद 4 : अब R को केन्द्र मानकर पद 3 में ली गई त्रिज्या लेकर एक चाप V W लगाइए जो RS को X पर काटता है।
पद 5 : परकार के नुकीले सिरे को T पर रखिए और परकार को इसप्रकार खोलिए कि पेंसिल की नोंक U पर रहे।
पद 6 :पद 5 में ली गई त्रिज्या और X को केन्द्र मानकर एक चाप लगाइए जो VW चाप को Y पर काटता है।
पद 7 : अब RY को मिलाती हुई रेखा RZ खींचिए जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

चूँकि ∠ RST तथा ∠ SRZ एकांतर कोण हैं और बराबर हैं।
इसलिए RZ ॥ PQ
रचना के चरण:
1. 4.5 cm लंबाई का एक रेखा खंड MN खींचिए ।
2. बिंदु M पर एक किरण MX खींचिए, जो MN के साथ 120° का कोण बनाए।
3. बिंदु N से, बिंदु P, 8 cm की दुरी पर है । अत: N को केंद्र मान कर और 8 cm त्रिज्या लेकर एक चाप खिचिएं ।
4. यह चापं MX को बिंदु P पर प्रतिच्छेद करती है । अब बिंदु P को अंकित कीजिए ।
5. PN को जोड़िए। तब MNP अभीष्ट त्रिभुज है।

12 घंटे में अनुरेखित क्षेत्रफल = πr2
= 3.14 x 42
= 50.24 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
सिक्के का क्षेत्रफल =
r2
= 3.14 x 22
= 12.56 सेमी 2.
पॉलिश कराने योग्य भाग का सम्पूर्ण क्षेत्रफल (दोनों तरफ )
= 2 x सिक्के का क्षेत्रफल
= 2 x 12.56
= 25.12 सेमी 2
A. 3.5 सेमी
B. 7 सेमी
C. 11 सेमी
D. 22 सेमी
चूंकि , वृत्त की परिधि (C) =
d,
इसलिए 22 = x d
d = 7 सेमी
हम जानते हैं, d = 2 x r,
इसलिए r = 7/2
= 3.5 सेमी
A.
16 सेमी
B.
25.12 सेमी
C.
26.5 सेमी
D.
26.64 सेमी
= 8 सेमी
इसलिए , वृत्त की
परिधि =
d
= 3.14 x 8
= 25.12 सेमी
दरवाजे का क्षेत्रफल = लंबाई x चौड़ाई
= 12 सेमी x 8 सेमी = 96 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
वर्ग का परिमाप = 4 x वर्ग की भुजा
इसप्रकार,वर्ग की भुजा = ¼ x वर्ग का परिमाप
A.
B.
C.
D.
एक बंद वक्र द्वारा घेरे गए एक विशेष क्षेत्र या एक परिभाषित पृष्ठ के द्विविमीय आकार को व्यक्त करने वाली राशि क्षेत्रफल होती है।
A.
चौड़ाई
B.
परिमाप
C.
क्षेत्रफल
D.
विकर्ण
द्विविमीय आकृति के चारों ओर की लंबाई परिमाप होती है।
A.
B.
C.
D.
1280 वर्ग सेमी
वर्ग का परिमाप = 4 x भुजा
यहाँ, परिमाप = 320 मीटर
4
भुजा = 320,
भुजा = 320/4
= 80 मीटर
वर्ग का क्षेत्रफल = (भुजा)2
यहाँ, भुजा = 80 मीटर
तब, अभीष्ट क्षेत्रफल = (80)2
= 6400 वर्ग मीटर
A.
605
B.
390
C.
460
D.
295
खेत की लंबाई = 84 मीटर
चौड़ाई = 37 मीटर
परिमाप = 2 (l + b)
= 2 (84 + 37)
= 2 × 121
= 242 मीटर
बाड़ लगाने का व्यय= 2.50×242
=
605
A.
15 सेमी
B.
42 सेमी
C.
65 मीटर
D.
90 मीटर
बगीचे का परिमाप, P = 196 मीटर
लंबाई = 56 मीटर
माना चौड़ाई = b मीटर
अब, P = 2 (l + b)
196 = 2 (56 +b) = 112 + 2b
2b = 196 – 112 = 84
b = 84/2 = 42 सेमी
A.
78 सेमी
B.
28 सेमी
C.
49 सेमी
D.
25 सेमी
लंबाई AB = 8 सेमी
ABD में
AD2
= DB2 - AB2
AD2 = 36
AD =
36
A.
8 सेमी, 16 सेमी
B.
12 सेमी, 6 सेमी
C.
8 सेमी, 4 सेमी
D.
15 सेमी, 30 सेमी
परिमाप,P = 36 सेमी
माना चौड़ाई = x सेमी
तब लंबाई = 2x सेमी
अब, P = 2 (l + b)
36= 2 (2x + x)
= 2 × 3x
= 6x
x = 36/6 = 6 सेमी
इसलिए,
लंबाई = 2x
= 2 × 6
= 12 सेमी
चौड़ाई = x = 6 सेमी
A.
B.
C.
D.
लंबाई AB = 6 सेमी
विकर्ण DB = 10 सेमी
प्रत्येक कोण = 90°

ABD में
DB2 = AD2 + AB2
AD2 = DB2 - AB2
= 102 - 62
= 100 -36
= 64
इसलिए, चौड़ाई AD =
64 = 8 सेमी
A.
12 सेमी
B.
15 सेमी
C.
30 सेमी
D.
42 सेमी
पेंटिंग
का परिमाप , P = 56 सेमी
चौड़ाई = 13 सेमी
माना
लंबाई
= x सेमी
अब, P = 2 (l + b)
56
= 2 (x + 13) = 2x + 26
2x
= 56 – 26 = 30
x
= 30/2 = 15 सेमी
A.
5ab + 7bc + 33ca
B.
5ab - 7bc + 33ca
C.
5ab - 9bc + 27ca
D.
5ab - 7bc - 33ca
A.
B.
C.
D.
(–2a7) × (–5a4) = (–2)×(–5) ×a7+4
= 10a11
A.
70
B.
269
C.
350
D.
645
दिया हुआ है कि a – 2b =15 …(1)
तथा ab = 11
समीकरण (1)का वर्ग करने पर, हमें प्राप्त होता है
(a – 2b)2 =(15)2
⇒ a2 – 2(a) (2b) + 4b2 = 225 [(a – b)2 = a2 – 2ab +b2]
a2 – 4ab + 4b2 = 225
a2 + 4b2 = 225 + 4ab
a2 + 4b2 = 225 + 4 × 11 ( दिया है : ab = 11)
= 225 + 44
= 269
(x-y) (y-x) = xy - x2 -y2 + yx = - y2 - x2 + 2xy
A. 25
B. 62
C. 64
D. 75
8a = 352 – 272 [ a2 – b2 = (a – b) (a + b)]
8a = (35 – 27) (35 + 27)
8a = 8 × 62
a = (8 x 62)/8 = 62
A.
3mn - 5
B.
5mn - 3
C.
mn - 15
D.
15 - mn
संख्याओं mतथा n का गुणनफल = m x n = mn
mn का पाँच गुना = 5mn
अब परिणामी में से 3 को घटाइए= 5mn - 3
A.
B.
C.
D.
a तथा b का गुणनफल = a x b = ab
अब परिणामी को 7 में से घटाया जाता है = 7 - ab
A.
-5
B.
0
C.
1
D.
5
3x2 + 2x – a = 10 में x = 1 प्रतिस्थापित करने प, हमें प्राप्त होता है 3(1)2 + 2(1) – a = 10
या a = - 10 + 5
= - 5
A.
B.
C.
D.
माना व्यंजक ‘A’ जोड़ा जाता है, तब
3x2 + 4xy - y2 + A = 5x2 - 3y2
या A = 5x2 - 3y2 - 3x2 – 4xy + y2
या A = 2x2 - 2y2 - 4xy
A.
B.
C.
D.
माना व्यंजक ‘A’ जोड़ा जाता है, तब
5m2 – 7m + 2 + A = 7m2 - 1
या A = 7m2 - 1 – 5m2 + 7m - 2
या A = 2m2 + 7m – 3
A.
B.
C.
D.
दिये हुए प्रश्न के अनुसार,
माना A = [(3x – y – 11) + ( -y – 11)] – (3x – y – 11)
या A = 3x – 2y – 22 – 3x + y + 11
या A = – y - 11
A.
B.
C.
D.
दिये हुए प्रश्न के अनुसार,
2a + 8b + 10 - X = -3a + 7b + 16
या X = 2a + 8b + 10 + 3a – 7b -16
या X = 5a + b - 6
A.
B.
C.
D.
[6a2 + (2a2 – a2) – (a2 – b2)]
= 6a2 + 2a2 – a2 – a2 + b2
= 6a2 + b2
A.
80
B.
90
C.
100
D.
110
r = -9 को r2 – 2r – 9 में प्रतिस्थापित करने पर, हम प्राप्त करते हैं :
r2 – 2r – 9 = (-9)2 – 2(-9) - 9
= 81 + 18 - 9
= 90
A.
2,650
B.
2,655
C.
2,657
D.
2,659
x = 11 को 2x3 – 5(x – 10) में प्रतिस्थापित करने पर, हम प्राप्त करते हैं
2(11)3 – 5(11–10) = 2,662 – 5
= 2,657
y
- 4 में
y=3
रखने
पर
हम प्राप्त
करते हैं
3-4=-1
4x2+2xy–4+7x2–3xy+4
=x2(4+7)+xy(2–3)+4-4
=11x2–xy
y2- (- 5y2 ) = 6y2
इसलिए, अभीष्ट अन्तर= 6y2
A. योगफल
B. अंतर
C. गुणनफल
D.
भागफल
एक त्रिभुज का बाह्यकोण उसके दोनों अभिमुख अंतःकोणों के योगफल के बराबर होता है।
A.
B.
C.
D.
एक दी हुई रेखा के समानांतर रेखा खींचने के लिए हमे पैमाना और परकार दोनों की आवश्यकता होगी।
A.
शीर्षभिमुख कोण बराबर नहीं होते हैं ।
B.
कोण योग गुण त्रिभुज में लागू होता है।
C.
त्रिभुज की दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से छोटा होता है।
D.
त्रिभुज में तीन या अधिक शीर्ष होते हैं।
त्रिभुज में कोण योग गुण हमेशा लागू होता है।
A. एक समद्विबाहु त्रिभुज
B. एक समकोण त्रिभुज
C. एक अधिक कोण त्रिभुज
D. एक समबाहु त्रिभुज
दिए हुए मापं का प्रयोग करके त्रिभुज की रचना कीजिए
कोण B को मापने पर हमे ज्ञात होता है कि वह 90° है।
इसलिए त्रिभुज ABC एक समकोण त्रिभुज है।
A.
एक विषमबाहु त्रिभुज
B.
एक समद्विबाहु त्रिभुज
C.
एक समकोण त्रिभुज
D.
एक समबाहु त्रिभुज
चूँकि दिये हुए त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं इसलिए दिया हुआ त्रिभुज एक समद्विबाहु त्रिभुज होगा।
A.
कभी नहीं
B.
हमेशा
C.
आंकड़े अपर्याप्त हैं
D.
कभी कभी
त्रिभुज की रचना के लिए, हमें इसके कम से कम तीन भागों की आवश्यकता है, यहाँ त्रिभुज के तीन भाग दिए हुए हैं।
A.
SAS
माप दण्ड से
B. SSS माप दण्ड से
C. ASA माप दण्ड से
D. RHS माप दण्ड से