A.
81/256
B.
256/81
C.
-256/81
D.
0
[(-3)/4]4 = (-3)4/44
= [(-3) x (-3) x (-3) x (-3)]/(4 x 4 x 4 x 4)
= 81/256
का सरलीकरण है
A.
B.
C.
D.
का
सरलीकरण है
A.
36
B.
27
C.
8
D.
3
74 का मान है
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
(-2)4 का मान है
A.
B.
C.
D.
(-5)3
(-2)4 = [(-5)
(-5)
(-5)]
[(-2)
(-2)
(-2)
(-2)]
= (-125)
(16)
= -2000
A.
B.
C.
D.
74 = 7
7
7
7 = 2401
का मान है
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
729 = 3
3
3
3
3
3 = 36
109 बराबर है
A.
10010000
B.
1001000000
C.
10010000000
D.
100100000000
का मान है
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
[(-12)/11]2 = (-12)2/112 = 144/121
A.
B.
C.
D.

70,040,000,000 = 7.004 X 10,000,000,000 = 7.004 X 1010
एक पूरे चक्कर( 360° का ) में कोई वस्तु जितनी बार ठीक अपनी प्रारम्भिक स्थिति के जैसी दिखाई देती है, वह संख्या घूर्णन सममिति का क्रम कहलाती है |
घूर्णन वस्तु को उसके जिस स्थिर बिंदु के चारों ओर घुमाता है वह स्थिर बिंदु घूर्णन का केन्द्र होता है |
यदि घूर्णन के बाद वस्तु ठीक अपनी प्रारम्भिक स्थिति के जैसी दिखाई देती है तो हम कहते हैं कि इसमें घूर्णन सममिति है |
हाँ, समबाहु त्रिभुज में तीन सममित रेखाएँ होती हैं और इसकी घूर्णन सममिति का क्रम 3 है ।

सत्य.
वर्ग में उसके केंद्र के चारों ओर घूर्णन सममिति का क्रम 4 होता है।

वृत्त में सममिति की असीमित रेखाएँ होती हैं।
जिस कोण से कोई वस्तु घूमती है वह घूर्णन कोण कहलाता है ।
(a) घूर्णन सममिति का क्रम 3 है |
(b ) घूर्णन सममिति का क्रम 6 है |

दो
उदहारण
(i) समान्तर
चतुर्भुज
(ii) वर्णाक्षर Z
(a)माध्यिका
(b) व्यास
पूर्ण की गई आकृति का नाम पंचभुज है।
अभीष्ट आकृति निम्न प्रकार है:

सममित रेखाओं के साथ अभीष्ट आकृति निम्न प्रकार है:

वर्ग
इसमें 4 सममिति की रेखाएँ होती हैं तथा घूर्णन सममिति का क्रम 4 होता है।

(a)
घूर्णन सममिति का क्रम 4 है।
(b) घूर्णन सममिति का क्रम 2 है।
(c) घूर्णन सममिति का क्रम 2 है।
(a) A, M, T, U, V, W, Y
(b) B, C, D, E, K
(c) H, I, O, X
H: सममित रेखाओं की संख्या 2 तथा घूर्णन सममिति का क्रम भी 2 है |
N: कोई सममित रेखा नहीं तथा घूर्णन सममिति का क्रम 2 है |
Z: कोई सममित रेखा नहीं तथा घूर्णन सममिति का क्रम 2 है |
S: कोई सममित रेखा नहीं तथा घूर्णन सममिति का क्रम 2 है |
C: एक सममित रेखा तथा घूर्णन सममिति का क्रम 1 है |
E: एक सममित रेखा तथा घूर्णन सममिति का क्रम 1 है |
x
+ 4 में x = 2 रखने
पर
हमें प्राप्त
होता है
x + 4 = 2 + 4 = 6
z को y में से घटाना 'y – z' द्वारा प्रदत्त है।
जब पदों के समान बीजीय गुणनखंड होते हैं
4x ज्यामितीय रूप
से क्या निरूपित
करता है ?
गुणनफल
3x
4x ज्यामितीय रूप से एक आयत के क्षेत्रफल को निरूपित करता है,जिसकी भुजाएँ 3x तथा 4x हैं।
2a
3a = 2
3
a
a
= 6a2
(5x+2y) -
= 5x+2y -
चूँकि, 3, 3x, 3y, 3xy, 3x2y, x, y, x2, xy और x2y से 3x2y पूर्णतयाः विभाज्य है । इसलिए ये सभी 3x2y के गुणनखंड हैं ।
4a2 – 81 = 4(4)2 – 81 = – 17
व्यंजक : xy + 7x + y2
पद : xy
गुणनखंड : x, y
पद : 7x
गुणनखंड : 7, x
पद : y2
गुणनखंड : y, y

(5x2
- xy ) - (x2 + xy )
= 5x2 - xy - x2 - xy
= 4x2 - 2xy
इसलिए , 5x2 – xy प्राप्त करने
के लिए x2 + xy में
(4x2 - 2xy) जोड़ा जाना
चाहिए।
a2 + 2ab + b2
= 32 + 2
3
2 + 22
= 9 + 12 + 4
= 25
100
– 10x3
= 100 – (10
23)
= 100 – (10
8)
= 100 – 80
= 20


a.
a(x
+ y)
b.
(m
+ n)(x2 + y2)
c.
m2
+ 2mn + n2
d.
m2
- 2mn + n2



(150
m +11 n)2 – (150 m – 11 n)2
= (150
3
+11
1)2
– (150
3
- 11
1)2
= (450 +11)2 - (450 - 11)2
= 4612 - 4392
= 212521 - 192721
= 19800
(i) घूर्णन सममिति का क्रम 4 है |
(ii) घूर्णन सममिति का क्रम 6 है |
(iii) घूर्णन सममिति का क्रम 3 है |
समबाहु त्रिभुज में सममिति की तीन रेखाएँ होती हैं, समद्विबाहु त्रिभुज में सममिति की एक रेखा होती है तथा विषमबाहु त्रिभुज में सममिति की कोई रेखा नहीं होती है।
आकृतिओं
को नीचे बनाया
गया है :




A.

B.

C.

D.

सामान्य रूप
से बेलन के आधार
तथा शीर्ष को काटिए।
आपको इसका जाल
प्राप्त होगा।
A.
केवल 1 तथा 2
B.
केवल 1, 2 तथा 3
C.
केवल 2 तथा 4
D.
उपरोक्त सभी
वर्ग तथा वृत्त द्विविमीय आकृतियाँ हैं ।
A.
B.
C.
D.
आकृति (1) एक आयत को निरूपित करती है।
A. 
B. 
C. 
D. 
यह समतल में उन बिन्दुओं का समुच्चय होता है जो एक दिये हुए बिन्दु( केन्द्र) से दी हुई दूरी पर होते हैं; यह एक वक्र होता है जो एक बिन्दु के एक समतल में इस प्रकार घूमने से बनता है कि इसकी एक दिये हुए बिन्दु से दूरी अचर रहती है। वृत्त पर किसी भी बिन्दु तथा केन्द्र के बीच की दूरी त्रिज्या कहलाती है।
A.
B.
C.
D.
घन में कुल 6 फ़लक होते हैं।
A.
घन का
B.
घनाभ का
C.
शंकु का
D.
बेलन का
गैस का पाइप बेलनाकार होता है। बेलन में एक वक्र पृष्ठ होता है तथा इसके सिरों पर दो वृत्ताकार फ़लक होते हैं ।
A.
B.
C.
D.
यह ठोस वस्तु को बनाने वाले 5 घनों का संयोजन है।
A.
एक शीर्ष
B.
दो शीर्ष
C.
चार शीर्ष
D.
पाँच शीर्ष
शंकु में केवल एक शीर्ष होता है।(जोकर की टोपी की आकृति या आइस क्रीम कोन की आकृति को देखिये।)
A.
1-विमीय आकृति का
B.
2- विमीय आकृति का
C.
3- विमीय आकृति का
D.
बहु विमीय आकृति का
गेंद एक त्रिविमीय आकृति है क्योंकि गेंद की आकृति एक गोले जैसी दिखाई देती है तथा गोला एक त्रिविमीय आकृति है।
A.
किनारा
B.
समतल
C.
फ़लक
D.
ठोस
जब आप एक आकृति को बनाते हो तो इसके सभी सपाट पृष्ठ, फ़लक कहलाते हैं।
A.
6 शीर्ष
B.
8 शीर्ष
C.
10 शीर्ष
D.
12 शीर्ष
घनाभ में 8 शीर्ष होते हैं क्योंकि जब घनाभ को बनाते हो तब आप देखते हो कि घनाभ में 8 शीर्ष होते हैं।
A.
किनारे
B.
फ़लक
C.
शीर्ष
D.
बिन्दु
शीर्ष कोने होते हैं और ये तीन या अधिक फलकों के प्रतिच्छेद बिन्दुओं द्वारा निर्मित होते हैं।
A.
6 किनारे
B.
8 किनारे
C.
10 किनारे
D.
12 किनारे
घनाभ बनाते समय हम देख सकते हैं कि जहाँ दो फ़लक साथ साथ होते हैं उसके अनुदिश एक रेखा होती है जिसे किनारा कहते हैं। इसप्रका घनाभ में हम 12 किनारे प्राप्त करते हैं।
A.
8
B.
10
C.
12
D.
16
घन में 12 किनारे होते हैं।
A.
वृत्त
B.
घन
C.
वर्ग
D.
त्रिभुज
त्रिविमीय आकृतियों में लंबाई, चौड़ाई तथा ऊँचाई होती हैं ।घन एक ठोस त्रिविमीय आकृति होती है जो 6 वर्गाकार फलकों से घिरी होती है जिसमें तीन प्रत्येक शीर्ष पर मिलते हैं।

210 = (2 








चूँकि, 1024 > 100
इसलिए, 210 > 102




1011
= 10011
(ii) 30 =
(1000)0
(i)
असत्य; 10
1011
= 1012 तथा (100)11
=(102)11 = 1022
(ii) सत्य; 30
= 1, (1000)0 = 1
16000 = 16
1000
= (2
2
2
2)
1000
= 24
103
= (2
2
2
2)
(2
5
2
5
2
5)
[क्योंकि 10 = 2
5]
= (2
2
2
2
2
2
2 )
(5
5
5)
इसलिए, 16000 = 27
53 .






को
सरल कीजिए।



A.
A
B.
B
C.
K
D.
X
हम
देखते हैं कि अक्षर
X में
ऊर्ध्वाधर
तथा क्षैतिज दोनों
प्रकार की सममिति
की रेखा होती है।
A.
B.
C.

D.
दर्पण
परावर्तन में
एक आकृति के अभिमुखों
में दाएँ-बाएँ
परिवर्तन हो जाता
है।
A.

B.

C.

D.

यहाँ
आकृति 90° कोण
से घूमती है। इसलिए
अगली आकृति होगी
A.
1
B.
2
C.
3
D.
4
आयत
में सममिति की
दो रेखाएँ होती
हैं।
का सरलीकरण है
A.
5t/8
B.
5t4/8
C.
5t-4/8
D.
5t-1/8
का मान है
A.
B.
C.
D.
50 का मान है
A.
0
B.
1
C.
2
D.
5
(30 + 20)
50 = (1 + 1)
1 [∵ x0 = 1, जहाँ x कोई एक संख्या है ]
= 2
1
= 2
का सरलीकरण है
A.

B.

C.

D.

A. xm × xn = xm+n
B. 1/xm = x-m
C. xm / xn = xm–n
D. (xm)n = xmn
क्योंकि घातांक के भाग नियम के अनुसार, xm / xn = xm-n
माना संख्या x है।
