72
75 तथा उत्तर को घातांक रूप में लिखिए।
72
75= 710
22
55
तथा उत्तर को घातांक
रूप में लिखिए।
का मान ज्ञात कीजिए।


(-9)3
(-4)2
=[(-9)
(-9)
(-9)]
[(-4)
(-4)]
=
(-729)
(16)
= -11664


(-3)3 x (7)2 = (-3 x -3 x -3) x (7 x 7)
= (-27) x (49)
= -1323
अतः, (-3)3 x (7)2 = -1323
104278
=1
100,000
+ 0
10,000
+ 4
1000
+ 2
100
+ 7
10
+ 8
1
= 1
105
+ 0
104
+ 4
103
+ 2
102
+ 7
101
+ 8
100
= 1
105
+ 4
103
+ 2
102
+ 7
101
+ 8
100
A.
सर्वांगसम
B.
समांतर
C.
लम्बवत
D.
असमान
6 सर्वांगसम वर्गाकार फलकों को उनके किनारों के अनुदिश एक बंद आकृति में जोड़कर एक घन बनाया जाता है।
A.
B.
C.
D.
एक त्रिभुजाकार पिरामिड में 3 त्रिभुजाकार पार्श्व फ़लक तथा केवल 1 त्रिभुजाकार फ़लक (आधार ) होते हैं ।
दी हुई आकृति का नाम है
A.
B.
C.
D.
एक त्रिभुजाकार प्रिज्म में 3 आयताकार पार्श्व फ़लक तथा 2 त्रिभुजाकार फ़लक (आधार) होते हैं।
A.
रेखा
B.
त्रिविमीय आकृतियाँ
C.
समतल आकृतियाँ
D.
ठोस आकृतियाँ
द्विविमीय आकृतियाँ समतल आकृतियाँ होती हैं जिनमें दो मापें अर्थात लंबाई तथा चौड़ाई होती हैं ।
A.
B.
C.
D.
त्रिविमीय आकृतियों में लंबाई, चौड़ाई तथा ऊँचाई होती हैं जो एक ठोस बनाती हैं।
सामने का दृश्य, पाश्र्व दृश्य और शीर्ष दृश्य।
यहाँ एक त्रिभुजाकार प्रिज्म में 5 फलक हैं।

समदूरीक चित्र को समदूरीक बिन्दुकित कागज पर खींचा जाता है।
एक तिर्यक चित्र में लम्बाइयाँ समानुपात में नहीं होती हैं।
घन के सभी 6 फ़लक सर्वांगसम होते हैं तथा संलग्न फ़लक आपस में लम्बवत होते हैं।
घनाभ के शीर्षों की संख्या 8 होती है ।
एक घन में 4 विकर्ण होते हैं।
असत्य
एक
ठोस के सपाट पृष्ठ
इसके किनारे कहलाते
हैं ।
(i)
गोला
(ii) बेलन
एक ठोस आकृति के कोने इसके शीर्ष कहलाते हैं ।
ठोस का एक जाल एक ऐसा ढाँचा( या रूप रेखा )है जिसे मोड़कर वह ठोस प्राप्त हो जाता है।
वृत्त तथा वर्ग समतल आकृतियों के दो उदाहरण है।
(i)
सम्मुख दृश्य
/ पार्श्व दृश्य
(ii)शीर्ष दृश्य
(iii)पार्श्व दृश्य
/ सम्मुख दृश्य
दो तरीके हैं :




नहीं यह जाल एक पासे के लिए नहीं हो सकता है, क्योंकि विपरीत फलकों के एक जोड़े पर 1 तथा 4 होंगे जिनका योग 7 नहीं है, तथा विपरीत फलकों के एक अन्य जोड़े पर 3 तथा 6 होंगे जिनका योग भी 7 के बराबर नहीं है।
केवल
दी
हुई आकृतियों
को बनाने में उपयोग
किए जाने वाले
जाल(नेट )निम्न
प्रकार से हैं
:

(a) षट्भुजीय प्रिज्म
(b) त्रिभुजाकार प्रिज्म

(a)
– (ii)
(b) – (iii)
(c) – (i)
1. फलकों की संख्या =5, शीर्षों की संख्या = 6, किनारों की संख्या = 9
2. फलकों की संख्या =7, शीर्षों की संख्या = 10, किनारों की संख्या = 15
3. फलकों की संख्या =8, शीर्षों की संख्या = 12, किनारों की संख्या = 18
चित्र (a) में घनों की संख्या 5 है | इसका ऊपर से दृश्य निम्नप्रकार है |

चित्र (b) में घनों की संख्या 20 है | इसका ऊपर से दृश्य निम्नप्रकार है |

चित्र (c) में घनों की संख्या 14 है | इसका ऊपर से दृश्य निम्नप्रकार है |

आकृतियों
का मिलान नीचे
दिया गया है:

निम्नलिखित
आकृतियों को ऊर्ध्वाधर
काटने पर प्राप्त
अनुप्रस्थ काट
की आकृतियां नीचे
दी गई हैं :

|
|
घन |
पिरामिड |
प्रिज्म |
|
|
फलकों |
|
|
|
|
|
किनारे |
|
|
|
|
|
शीर्ष |
|
|
|
|

A. जेंट अवेस्ता
B. कुरान
C. बाइबिल
D. भगवत गीता
'गजनी' 'गज्जना' नमक शब्द से भी जाना जाता था। यह अफगानिस्तान का हिस्सा था।
A. उत्तर दिशा
B. पश्चिमी दिशा
C. पूर्व दिशा
D. दक्षिण दिशा
'गजनी' 'गज्जना' नमक शब्द से भी जाना जाता था। यह अफगानिस्तान का हिस्सा था।
A. भूगोलिक
B.
C. मानचित्रकार
D. विकिरण चिकित्सक
यह शब्द ग्रीक शब्द '’चर्तिस” से लीगई थी।
A. उलेमा
B. काज़ी
C. खलीफा
D. सदर
सुन्नी मुसलमानों का यह मानना था कि नए पैगंबर का निर्वाचन उन लोगो के बीच होनी चाहिए जो अपने काम में सक्षम हों।
A. राजस्थान
B. रजा रजा चोला
C. राजपूत
D. राजेंद्र चोला
“'राजपुत्र “का मतलब है '’रजा का पुत्र”
700 और 1750 ईसवी के मध्य होने वाले सामाजिक परिवर्तनों ने समाज को बहुत जटिल बना दिया था। नई प्रौद्योगिकी जैसे कि सिंचाई में पर्शियन व्हील, कताई में चरखा, युद्ध में आग्नेयास्त्रों का विकास हुआ। नए खाद्य और पेय पदार्थों जैसे कि आलू, मक्का, मिर्ची, चाय एवं कॉफी का उपयोग शुरू हुआ। ये नव-विकास यहाँ आकर इन नए भू-क्षेत्र में बसने वाले यात्रियों द्वारा लाए गए थे। लोग उनकी पृष्ठभूमि एवं पेशों के आधार पर जाति अथवा उपजाति में समूहीकृत थे। राजपूत सर्वाधिक शक्तिशाली बन गए एवं शिष्ट आचार संहिता विकसित हुई। तीव्र आवृत्ति के साथ अस्तित्व में आ गए थे। मराठा, सिख, जाट, अहोम और कायस्थ को भी महत्ता प्राप्त थी।
नाम राजपूत शब्द " राजपुत्र " जिसका तात्पर्य एक शासक का पुत्र होता है, से लिया गया है। आठवीं और चौदहवी सदियों के मध्य योद्धाओं का एक समूह जो जाति से क्षत्रिय होते थे, को राजपूत के रूप में सम्बोधित किया जाता था। राजपूत सिर्फ शासक और प्रधान-पुरुष नहीं थे बल्कि उपमहाद्वीप पर विभिन्न राजाओं की सेनाओं में सेवा करने वाले सैनिक और सेनापति भी हुआ करते थे। इस अवधि में लोगों का यह समूह महत्वपूर्ण बन गया था। इन राजपूत शासकों के कवि और भाट कुछ महान गुणों से युक्त होते थे, जैसे कि अत्यधिक पराक्रम एवं इन शासकों के प्रति निष्ठा की अपार भावना।
700 और 1750 के मध्य के हजार वर्ष विकास एवं नई प्रौद्योगिकियों से युक्त था। सिंचाई में व्हील, कताई में चरखा, युद्ध में आग्नेयास्त्रों, नए खाद्य और पेय पदार्थों का आगमन उप महाद्वीप में नया था। इस अवधि का अध्ययन चुनौतिपूर्ण था। क्योंकि अनेक नव-विकास तीव्र आवृत्ति के साथ अस्तित्व में आ गए थे।
700 और 1750 के मध्य धार्मिक परंपराओं में अनेक प्रमुख विकास दृष्टिगोचर हुए थे।
1.इस अवधि के दौरान हिंदू धर्म में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। नए देवताओं की पूजा एवं राजाओं द्वारा मंदिरों का निर्माण करना आरम्भ हुआ। ब्राह्मण और पुजारियों के महत्व में अभिवृद्धि हुई। वे समाज में वर्चस्व रखने वाले समूह बन गए।
2.एक अन्य प्रमुख विकास भक्ति की अवधारणा की उत्त्पत्ति के रूप में हुआ था, जिसमें श्रद्धालुओं को उनके व्यक्तिगत देवता तक पहुँचने के लिए पुजारियों अथवा जटिल अनुष्ठानों की सहायता की आवश्यकता नहीं होती थी।
3.इस अवधि के दौरान उपमहाद्वीप में नए धर्मों का भी आविर्भाव हुआ था। 7 वीं शताब्दी में पवित्र कुरान की शिक्षाओं को व्यापारियों और प्रवासियों द्वारा भारत लाया गया था।
इस अवधि के दौरान कागज सस्ता और व्यापक रूप से उपलब्ध था, जिसके परिणामस्वरूप यह 700 से 1750 ईसवी के मध्य विविध मौलिक दस्तावेज़ों में आकस्मिक वृद्धि हुई। लोगों ने पवित्र ग्रंथों शासकों के वृतांत, पत्र और संतों की शिक्षाओं, याचिकाओं और न्यायिक दस्तावेज़ों, एवं यात्रा-विवरण और ग्रंथों को आलेखबद्ध करने हेतु कागज़ का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।
स्रोत, प्राचीन दस्तावेजों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, विभिन्न प्रकार के स्त्रोतों में - सिक्के, शिलालेख, वास्तुकला और मौलिक दस्तावेज सम्मिलित हैं, ऐतिहासिक घटनाओं और परंपराओं के संदर्भ कईं प्राचीन भारतीय ग्रंथों में बिखरे हुए हैं। इतिहासकार, अतीत के बारे में जानने के लिए उनके अध्ययन काल और उनके परीक्षण की प्रकृति के आधार पर इन स्रोतों का उपयोग करते हैं।
समाज अधिक विभेदित हो गया था, अतः लोग उनकी पृष्ठभूमि एवं पेशों के आधार पर जाति अथवा उपजाति में समूहीकृत हो गए थे। एक ही जाति की सामाजिक स्थिति क्षेत्रगत भिन्न हो सकती थी।
1.अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए जाति के अपने स्वयं के नियम और विनियम निर्मित किये जाते थे। कुछ क्षेत्रों में जाति पंचायत के रूप में में वर्णित वयस्क लोगों की परिषद इन नियमों को लागू करती थी।
2.इसके अलावा उन्हें अपने गांव के नियमों का पालन करना होता था। कई गांवों का प्रशासन एक मुखिया द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
1.अमीर खुसरो एक चौदहवीं सदी के कवि थे।
2.उसने प्रत्येक क्षेत्र के लिए भिन्न भाषा का उल्लेख किया था। उदाहरणतः सिंधी, लाहोरी, कश्मीरी, द्वारसमुद्री, तेलंगानी, गुजराती, अवधी और हिन्दवी भाषाएँ प्रचलित थीं ।
3.अमीर खुसरो का विचार था कि संस्कृत किसी क्षेत्र विशेष से संबन्धित नहीं थी, यह एक पुरातन भाषा थी और यह ब्राह्मणों की भाषा थी। आम लोग इसे नहीं जानते थे।
प्रौद्योगिकी ने हजार वर्ष की अवधि के भीतर लोगों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए थे। लोगों ने अवसरों की तलाश में लंबी दूरी की यात्रा करना आरम्भ कर दिया था। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकी आविष्कारों के कारण भारतीय उप महाद्वीप में नयी खाद्य फसलों का आगमन हुआ। सिंचाई में पर्शियन व्हील एवं कताई में चरखे का उपयोग प्रारम्भ हुआ। धीरे-धीरे जंगलों का सफाया किया गया और आधुनिक यांत्रिक उपकरणों के माध्यम से कृषि का विस्तार हुआ। कई वनवासियों ने पलायन करना एवं 'किसानों' की पदवी के साथ भूमि जोतना शुरू कर दिया। ये किसान क्षेत्रीय बाजार की गतिशीलता और पुजारियों से प्रभावित थे। नतीजतन, समाज अधिक विभेदित हो गया और लोग उनकी पृष्ठभूमि एवं पेशों के आधार पर जाति अथवा उपजाति में समूहीकृत हो गए थे।
इस अवधि के दौरान राजपूतों ने भारत के उत्तरी और पश्चिमी भागों में एक प्रमुख भूमिका निभाना शुरू कर दिया था। इस अवधि के दौरान अधिकाँश भारतीय राज्यों पर राजपूतों का शासन था। राजपूत सिर्फ शासक और प्रधान-पुरुष, नहीं थे बल्कि उपमहाद्वीप पर विभिन्न राजाओं की सेनाओं में सेवा करने वाले सैनिक और सेनापति भी हुआ करते थे। एक राजपूत का सम्पूर्ण जीवन युद्ध के लिए समर्पित होता था। उन्हें बहादुर और निष्ठावान लोगों के रूप में माना जाता था। उनमें अन्य अनेक उल्लेखनीय गुण होते थे। उनमें शिष्टता की भावना होती थी और कठिनाइयों के बावजूद वे इस पर स्थिर रहते थे।
A. राजस्थान
B. महाराष्ट्र .
C. मध्य प्रदेश
D. गुजरात
भारतीय उपमहाद्वीप में महमूद ने जिन मंदिरों को अपना निशाना बनाया था उनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी शामिल था। यह मंदिर वर्तमान के गुजरात राज्य में स्थित है।
A. कावेरी डेल्टा।
B. कृष्णा डेल्टा।
C. तुंगभद्रा डेल्टा।
D. गोदावरी डेल्टा।
कावेरी डेल्टा में मूट्टरियार एक छोटे-से मुखिया परिवार से संबन्धित थे। वे कांचीपुरम के पल्लव राजाओं के सामंत प्रमुख थे।
A. राजेन्द्र प्रथम
B. परांतक
C. राजराज प्रथम
D. कुलुत्तुंग
राजराज का शासन तंजावुर में भव्य शिव मंदिर के निर्माण के लिए स्मरण किया जाता है जो राजराजेश्वरम के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर को अब यूनेस्को के वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
A. चांदी की प्रतिमा।
B. कांस्य प्रतिमा।
C. तांबे की प्रतिमा।
D. लोह प्रतिमा।
चोल काल में निर्मित कांस्य प्रतिमाएँ संसार की सबसे उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमाओं में गिनी जाती हैं। अधिकतर प्रतिमाएँ देवी-देवताओं की ही होती थीं, लेकिन कुछ प्रतिमाएँ भक्तों की भी बनाई जाती थीं।
A. उरिवेली
B. नाडु
C. मौज़ा
D. वालनाडु
नाडु, न्याय करने और कर वसूलने जैसे कई प्रशासकीय कार्य करते थे।
A. किसानों को
B. व्यापारियों को
C. भूस्वामियों को
D. दस्तकारों को
चोल राजाओं ने धनी भूस्वामियों को इस उपाधी से विभूषित किया था। ये उपाधी सम्मान और विश्वास का प्रतीक होती थीं।इसका अक्षरशः अर्थ -तीन राजाओं की सेवा करने वाला किसान था।
A. बंगाल
B. कश्मीर
C. लखनऊ
D. दिल्ली
कल्हण ने प्रसिद्ध ग्रंथ राजतरंगिणी की रचना की थी। इस पुस्तक में उसने कश्मीर पर शासन करने वाले राजाओं का इतिहास दर्ज किया है।
A. क्षत्रिय।
B. सामंत।
C. ब्राह्मण।
D. महा- सामंत।
ये प्रशस्तियां विद्वान ब्राह्मणों द्वारा रची गई थीं, जो प्रायः प्रशासन में मदद करते थे। प्रशस्तियों के ब्यौरे अक्षरशः सत्य हों ये आवश्यक नहीं था।
A. महान व्यक्ति
B. प्रमुख
C. श्रेष्ठ व्यक्ति
D. अधीनस्थ व्यक्ति
चोल राजाओं ने धनी भूस्वामियों को कई उपाधियों से विभूषित किया था। इनमें से ‘अरइयार’ अथवा प्रधान एक थी। ये उपाधियाँ सम्मान और विश्वास का प्रतीक होती थीं।
A. तीर्थयात्रियों का संघ
B. व्यापारियों का संघ
C. बुनकरों का संघ
D. नागरिकों का संघ
‘नगरम’ नामक व्यापारियों के संघ प्रायः शहरों में प्रशासनिक कार्य भी संपादित करते थे।
A. चोल।
B. चालुक्य।
C. पांडय।
D. मौर्य।
शुरुआत में राष्ट्रकूट कर्नाटक के चालुक्य राजाओं के अधीनस्थ थे। राष्ट्रकूट प्रधान दंतीदुर्ग के अधीन उन्होने स्वतंत्र स्थिति प्राप्त की और दक्कन में स्वयं को एक शासक वर्ग के रूप में प्रतिस्थापित किया।
A. अल्बेरूनी
B. अमीर-खुसरो
C. फिरदौसी
D. इसामी
अल-बेरूनी ने किताब अल-हिन्द की रचना की थी जो महमूद गजनी के समय भारत आया था। उसकी भारतीय दर्शन और विज्ञान में बहुत रुचि थी।
A. 1191
B. 1192
C. 1195
D. 1199
मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज तृतीय के विरुद्ध दो युद्ध लड़े थे। पृथ्वीराज तृतीय ने सुलतान मुहम्मद गोरी को 1191 में हराया, लेकिन दूसरे ही साल 1192 में उसके हाथों हार गया।
A. राजाओं के बारे में
B. रानियों के विषय में
C. योद्धाओं के विषय में
D. आम लोगों के विषय में
एक ओर जहां शिलालेखों से हमें राजाओं और शक्तिशाली व्यक्तियों के बारे में ज्ञात होता है वहीं बारहवीं सदी के एक विशिष्ट शिलालेख से हमें साधारण पुरुषों और महिलाओं के जीवन के बारे में विदित होता है।
A. नकद।
B. अनाज।
C. बेगार।
D. सिंचाई कर।
घर का छप्पर डालने, खजूर के वृक्ष पर चढ़ने हेतु सीढ़ी का उपयोग करने के लिए, पारिवारिक संपत्ति पर उत्तराधिकार प्राप्त करने पर भी कर आरोपित किए गए थे। चोलों के शिलालेखों में सर्वाधिक उल्लेखित कर 'वेत्ति' था।
A. गोदावरी
B. कृष्णा
C. तुंगभद्रा
D. कावेरी
कावेरी नदी बेसिन 27,700 वर्ग मील तक विस्तुत है। यह नदी तंजावुर के पूरे क्षेत्र को सिंचित करती थी और इसने चोल शासन के दौरान इस क्षेत्र को समृद्ध बनाया। यह नदी कर्नाटक राज्य में निकलती है।
A. दक्कन।
B. वारंगल।
C. कलिंग।
D. कर्नाटक।
राष्ट्रकूट वंश की स्थापना दक्कन में की गई थी और मान्यखेत उसकी राजधानी थी। यह 753 में दक्षिण भारत में सत्ता में आया और दो शताब्दियों से भी अधिक समय तक सत्ता में रहा।
A. नरसिंह
B. कूर्म
C. वराह
D. कृष्णा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने दस अवतार लिए थे; ये थे- मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (सूअर), नरसिंह (शेर + नर), वामन (बौने), परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि (प्रतीक्षा में) । राष्ट्रकूट वंश के अधीन एलोरा गुफाओं का निर्माण किया गया था।
A. अमोघवर्ष प्रथम
B. दंतिदुर्ग
C. इंद्र-तृतीय
D. कृष्ण-प्रथम
दंतिदुर्ग राष्ट्रकूट वंश का संस्थापक था। उन्होंने 753 ईसवी में राजवंश की स्थापना की जिसकी राजधानी मान्यखेत रखी।
A. दंतिदुर्ग
B. विग्रहराज
C. कृष्णा प्रथम
D. नागभट्ट
संस्कृत में रचित ग्वालियर प्रशस्ति प्रतिहार राजा, नागभट्ट के अभियानों की जानकारी प्रदान करती है।
A. राजस्थान
B. महाराष्ट्र .
C. मध्य प्रदेश
D. गुजरात
भारतीय उपमहाद्वीप में महमूद ने जिन मंदिरों को अपना निशाना बनाया था उनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी शामिल था। यह मंदिर वर्तमान के गुजरात राज्य में स्थित है।
A. कावेरी डेल्टा।
B. कृष्णा डेल्टा।
C. तुंगभद्रा डेल्टा।
D. गोदावरी डेल्टा।
कावेरी डेल्टा में मूट्टरियार एक छोटे-से मुखिया परिवार से संबन्धित थे। वे कांचीपुरम के पल्लव राजाओं के सामंत प्रमुख थे।
A. राजेन्द्र प्रथम
B. परांतक
C. राजराज प्रथम
D. कुलुत्तुंग
राजराज का शासन तंजावुर में भव्य शिव मंदिर के निर्माण के लिए स्मरण किया जाता है जो राजराजेश्वरम के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर को अब यूनेस्को के वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
A. चांदी की प्रतिमा।
B. कांस्य प्रतिमा।
C. तांबे की प्रतिमा।
D. लोह प्रतिमा।
चोल काल में निर्मित कांस्य प्रतिमाएँ संसार की सबसे उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमाओं में गिनी जाती हैं। अधिकतर प्रतिमाएँ देवी-देवताओं की ही होती थीं, लेकिन कुछ प्रतिमाएँ भक्तों की भी बनाई जाती थीं।
A. उरिवेली
B. नाडु
C. मौज़ा
D. वालनाडु
नाडु, न्याय करने और कर वसूलने जैसे कई प्रशासकीय कार्य करते थे।
A. किसानों को
B. व्यापारियों को
C. भूस्वामियों को
D. दस्तकारों को
चोल राजाओं ने धनी भूस्वामियों को इस उपाधी से विभूषित किया था। ये उपाधी सम्मान और विश्वास का प्रतीक होती थीं।इसका अक्षरशः अर्थ -तीन राजाओं की सेवा करने वाला किसान था।
A. बंगाल
B. कश्मीर
C. लखनऊ
D. दिल्ली
कल्हण ने प्रसिद्ध ग्रंथ राजतरंगिणी की रचना की थी। इस पुस्तक में उसने कश्मीर पर शासन करने वाले राजाओं का इतिहास दर्ज किया है।
A. क्षत्रिय।
B. सामंत।
C. ब्राह्मण।
D. महा- सामंत।
ये प्रशस्तियां विद्वान ब्राह्मणों द्वारा रची गई थीं, जो प्रायः प्रशासन में मदद करते थे। प्रशस्तियों के ब्यौरे अक्षरशः सत्य हों ये आवश्यक नहीं था।
A. महान व्यक्ति
B. प्रमुख
C. श्रेष्ठ व्यक्ति
D. अधीनस्थ व्यक्ति
चोल राजाओं ने धनी भूस्वामियों को कई उपाधियों से विभूषित किया था। इनमें से ‘अरइयार’ अथवा प्रधान एक थी। ये उपाधियाँ सम्मान और विश्वास का प्रतीक होती थीं।
A. तीर्थयात्रियों का संघ
B. व्यापारियों का संघ
C. बुनकरों का संघ
D. नागरिकों का संघ
‘नगरम’ नामक व्यापारियों के संघ प्रायः शहरों में प्रशासनिक कार्य भी संपादित करते थे।
अतीत में 'विदेशी' 'किसी भी परदेसी' को समझा जाता था। जो कि उस समाज अथवा संस्कृति का हिस्सा नहीं होता था, एक शहरी निवासी, किसी वन निवासी को एक विदेशी के रूप में सम्बोधित कर सकता था। एक ही गांव में दो किसानों को विदेशी नहीं समझा जाता था। फिर भले ही वे भिन्न समुदायों से सम्बंधित होते थे।
इस काल में प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न भाषाओं का प्रयोग किया जाता था, उदाहरणतः सिंधी, लाहोरी, कश्मीरी, द्वारसमुद्री, तेलंगानी, गुजराती, अवधी और हिन्दवी भाषाएँ प्रचलित थीं।
एक व्यक्ति, जो मानचित्र बनाता है। नक्शानवीस कहलाता है।
अरब भूगोलवेत्ता अल इद्रिसी ने 1154 ई. में मानचित्र का निर्माण किया था।
एक स्थान जहाँ पर दस्तावेजों और पांडुलिपियों को ज्ञान हेतु सुरक्षित रखा जाता है, लेखागार कहलाता है।
विभिन्न प्रकार की लिखावट फारसी और अरबी भाषा के पठन को क्लिष्ट बना सकती है, नस्तलिक़ शैली अधिक घुमावदार एवं पढ़ने में अधिक सहज होती है। शिकास्ते शैली गहरी और पास-पास, एवं पढ़ने में अधिक मुश्किल होती थी।