नाम राजपूत शब्द " राजपुत्र " जिसका तात्पर्य एक शासक का पुत्र होता है, से लिया गया है। योद्धाओं का एक समूह जो क्षत्रिय जाति की सामाजिक स्थिति के अधिकार के दावेदार थे, को राजपूत के रूप में सम्बोधित किया जाता था।
व्यापारी और प्रवासी, पवित्र कुरान की शिक्षाओं को भारत लेकर आये थे।
शिया मुसलमान पैगंबर के दामाद अली को मानते थे और सुन्नी मुसलमान, प्रारंभिक नेताओं अथवा "खलीफाओं" की सत्ता को स्वीकार करते थे।
मराठा, सिख, जाट, अहोम, और कायस्थ जैसे लोगों के समूह ने इस अवधि के दौरान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनने के लिए इस युग के अवसरों का उपयोग किया था।
अतीत का अध्ययन करने हेतु इतिहासकारों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले स्त्रोतों में- सिक्के, शिलालेख, स्थापत्य, मौलिक दस्तावेज, पांडुलिपियाँ,यात्रा-वृतांत और मूल्य और राजस्व के दस्तावेज थे। ये दस्तावेज इतिहासकारों को बहुत विस्तृत जानकारी प्रदान किया करते थे।
उस समय कोई प्रिंटिंग प्रेस (मुद्रणालय) नहीं थी। लेखक हाथ से पांडुलिपियों की प्रतिलिपि तैयार किया करते थे,जिसके परिणामस्वरूप पांडुलिपियों में सूक्ष्म किन्तु महत्वपूर्ण अंतर प्रकट हो जाते थे। सूक्ष्म परिवर्तनों में यथा- शब्द एवं वाक्यांश इधर-उधर हो जाते थे। सदियों से इस तरह की पांडुलिपियों का अध्य्यन करना अपने-आप में मुश्किल साबित हुआ, एवं इतिहासकारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
शब्द ''हिंदुस्तान'' जिसे हम भारत-एक आधुनिक राष्ट्र राज्य,के रूप में इस्तेमाल करते हैं, का सर्वप्रथम प्रयोग मिन्हाज़-उस-सिराज, ने किया जो एक इतिहासकार था जिसने फ़ारसी भाषा में लेखन किया था। जिन क्षेत्रो के लिए उसने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। वे थे- पंजाब , हरियाणा, और गंगा और यमुना के बीच का भू-भाग। उसने इन क्षेत्रों के लिए राजनीतिक अर्थ में इस शब्द का इस्तेमाल किया था। ये क्षेत्र दिल्ली सल्तनत में सम्मिलित थे।
एक इतिहासकार को अतीत से दस्तावेज और मानचित्र का अध्ययन करते समय विभिन्न ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उस सन्दर्भ का जिसके अंतर्गत अतीत के बारे में जानकारी उत्त्पन्न हुई थी, का ज्ञान रखना चाहिए ।
मिन्हाज़-उस-सिराज द्वारा 13 वीं सदी में इस्तेमाल किये गए शब्द 'हिन्दुस्तान' में, पंजाब, हरियाणा और गंगा और यमुना के बीच का भू-क्षेत्र सम्मिलित था। उसने क्षेत्र के लिए राजनीतिक अर्थ में इस शब्द का इस्तेमाल किया था। वो क्षेत्र दिल्ली सुल्तान के अधिकार क्षेत्र में सम्मिलित थे।
वनवासी चले गए और दो महत्वपूर्ण कारकों की वजह से अपना निवास स्थान बदल दिया था :
1.जंगलों का शनेः-शनेः सफाया (कटाई)
2.कृषि का विस्तार
ब्राह्मण निम्नलिखित कारणों से इस अवधि के दौरान महत्वपूर्ण बन गए थे :
1.उन्हें संस्कृत ग्रंथों का ज्ञान था, जिसने समाज में उन्हें सम्मान दिलवाया
2.उन्हें, उनके संरक्षकों का संरक्षण प्राप्त था, जो कि नए शासक थे और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की तलाश में थे
कवि "अमीर खुसरो" द्वारा कहा गया था, ऐसा उन्होंने भारत में मौजूद विभिन्न भाषाओं के संदर्भ में कहा था, उन्होंने कहा था कि इन भाषाओं के विपरीत संस्कृत सर्वाधिक पुरातन भाषा थी और केवल ब्राह्मण इसे जानते थे। आम लोग इसे नहीं जानते थे।
इस अवधि के दौरान धर्म में अनेक परिवर्तन हुए। परमात्मा में लोगों का विश्वास कभी-कभी व्यक्तिगत एवं कभी-कभी सामूहिक हुआ करता था। अन्य परिवर्तन वर्तमान में हिन्दू धर्म कहलाने वाले धर्म में दृष्टिगोचर हुए थे। समाज में ब्राह्मण के महत्व में अत्यधिक अभिवृद्धि हुई थी। एक प्रिय व्यक्तिगत देवता की भक्ति की अवधारणा की उत्त्पत्ति हुई थी, जिसमें श्रद्धालुओं को उनके व्यक्तिगत देवता तक पहुँचने के लिए पुजारियों अथवा जटिल अनुष्ठानों की सहायता की आवश्यकता नहीं होती थी।
फारसी के महान विद्वान 'अलबेरूनी' ने प्रसिद्ध पुस्तक 'तहकिक-ए-हिंद' की रचना की थी।
'किताब अल हिंद', अलबेरूनी की एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध रचना थी।
उसने भारत पर सत्रह छापे मारे थे।
गजनी के महमूद द्वारा 1025 ईसवी में काठियावाड़ में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया गया था।
पृथ्वीराज तृतीय चौहान वंश का सर्वाधिक बहादुर शासक था।
तराइन की पहली लड़ाई मोहम्मद गौरी एवं पृथ्वीराज चौहान के बीच 1191 ई० में लड़ी गई थी।
ऊर, सभी वर्गों के लोगों की एक परिषद हुआ करती थी, जो गांव में ही भूमि के स्वामी हुआ करते थे। व्यापारियों के संघ, नगरम के रूप में जाने जाते थे। ये संघ कभी-कभी शहरों में प्रशासनिक कार्य भी किया करते थे।
चोल काल में 'कृषि' जीवन बहुत समृद्ध था। निरंतर बहने वाली कावेरी नदी खेतों में उपजाऊ मिट्टी पहुंचाती है। कई क्षेत्रों में एक वर्ष में दो फसलों को एक साथ उगाया जाता था। कई क्षेत्रों में फसलों को कृत्रिम रूप से पानी पिलाया जाता था और सिंचाई हेतु विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था।
चोल मंदिर, तंजावुर और गंगेकोण्ड के वृहद मंदिरों में शिल्प उत्पादन के केंद्र थे। राजराज और राजेंद्र द्वारा निर्मित चोलपुरम, वास्तु और मूर्तिकला संबंधी चमत्कार का एक विशेष उदाहरण हैं। मंदिर मात्र पूजा स्थल ही नहीं थे वरन, वे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के केंद्र थे। चोल कांस्य प्रतिमाओं को दुनिया की बेहतरीन कलाकृतियों में माना जाता है।
चोल प्रशासन अत्यधिक संगठित और कुशल था। राजा एक महत्वपूर्ण व्यक्ति था। नाडु, जो कि गांवों का समूह होता था। न्याय और करों के संग्रहण सहित इसे विभिन्न प्रशासनिक कार्य करने होते थे। 'उर' एक ग्राम-सभा थी और वह गांव के प्रशासन का संचालन करती थी।
'प्रशस्ति' हमें शासकों द्वारा स्वयं का किस रूप में वर्णन किया गया है जैसे कि वीर, विजयी योद्धा आदि विद्वान ब्राह्मण वो थे जो प्रशासन में सहायता प्रदान करते थे, अतः 'प्रशस्ति' अक्षरशः सत्य नहीं हो सकती।
राज्य में राजस्व किसानों, पशु-पालकों, कारीगरों और व्यापारियों से एकत्र किया जाता था। राजस्व एकत्र करने हेतु राजा द्वारा प्रभावशाली परिवार के सदस्यों को नियुक्त किया जाता था। ये पद प्रायः वंशानुगत होते थे।
प्रतिहार वंश को अग्रणी राजपूत राजवंशों में माना जाता है। ये गुर्जर प्रतिहार कहलाते हैं क्योंकि ये राजस्थान की गुजर जनजाति से सम्बंधित हैं।
ब्राह्मण को दी गई कर-मुक्त भूमि को ब्रह्मदेय कहा जाता था
`नौवीं से तेरहवीं शताब्दी तक, तीन शक्तियाँ - पश्चिमी भारत के गुर्जर प्रतिहार, उत्तर-पश्चिमी दक्कन के राष्ट्रकूट और बंगाल के पाल, ने कन्नौज पर अपना नियंत्रण स्थापित करने हेतु लड़ाई लड़ी क्योंकि इस दीर्घावधिक संघर्ष में तीन शक्तियाँ संलग्न थी। अतः इतिहासकार प्रायः इसका वर्णन "त्रिपक्षीय संघर्ष 'के रूप में करते हैं।
तराइन की दूसरी लड़ाई मोहम्मद गोरी और पृथ्वीराज के बीच लड़ी गई थी, इस युद्ध में गौरी ने पृथ्वीराज को पराजित किया था।
सिंचाई उदेश्यों के लिए चोलों द्वारा विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया गया था, जैसे कि :
1. चोल शासकों ने कई स्थानों पर कुओं को खुदवाया था।
2. कुछ स्थानों में वर्षा का जल संगृहीत करने के लिए, टेंक का निर्माण किया गया था।
3. इन सिंचाई कार्यों के लिए योजना आवश्यक थी। चोल शासकों द्वारा श्रम और संसाधनों का निर्माण करने, इन कार्यों की व्यवस्था करने और इस बात का निर्णय लेने कि जल का वितरण कैसे किया जाएगा, में सकारात्मक रुचि ली जाती थी।
राज्य के लोगों से एकत्र संसाधनों का उपयोग विभिन्न प्रयोजन के लिए किया जाता था, जैसे कि- :
1. राजकीय कार्यों की स्थापना की वितापूर्ति हेतु।
2. मंदिरों और दुर्गों का निर्माण करने के लिए।
3. युद्ध लड़ने के लिए यह आशा की जाती थी, कि इन युद्धों से राजा को लूट के रूप में धन और भूमि की प्राप्ति होगी एवं नए व्यापार मार्गों तक पंहुच स्थापित होगी।
'चोल काल ' भूमि की कई श्रेणियों का उल्लेख करता है-
1. वेल्लंवेगई - गैर ब्राह्मण किसान मालिकों की भूमि।
2. ब्रह्मदेय - ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि।
3. शालाभोगा - एक विद्यालय के रखरखाव के लिए भूमि।
4. देवदान, तिरुनामात्तुक्कनि - मंदिरों को उपहार में दी गई भूमि।
5. पाल्लीच्छंदम - जैन संस्थाओं को दान में दी गई भूमि।
1. मंदिर मात्र पूजा स्थल ही नहीं थे बल्कि वे प्रायः उनके आसपास जो बस्तियां विकसित हुई थी। उनका केंद्र बन गए थे।
2. ब्राह्मण पुजारी इन मंदिरों में संस्कृत में भाषा में शिक्षा दिया करते थे। मंदिर परिसर के भीतर कभी-कभी महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया जाता था। ये शिल्प उत्पादन का भी केंद्र थे। धार्मिक त्योहारों के दौरान मेलों का भी आयोजन किया जाता था।
3. मंदिर पुजारियों, माला बनाने वालों, रसोइयों, सफाई कर्मचारीयों, संगीतकारों, नर्तकों आदि सहित लोगों की एक बड़ी संख्या को रोजगार दिया करते थे। तो हम कह सकते हैं, कि मंदिर मात्र पूजा स्थल ही नहीं थे वरन, वे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के केंद्र भी थे।
सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ हैं-
1जयदेव - इन्होनें 'गीत गोविन्द' की रचना की थी।
2 कल्हड़ - राजतरंगिणी इनकी ऐतिहासिक रचना थी, जो 1140 ईसवी तक की कश्मीर की कहानी का वर्णन प्रस्तुत करता है।
3 चन्द बरदाई - इन्होनें पृथ्वीराज रासो की रचना की थी, जिसमें इन्होनें महान चौहान राजा पृथ्वीराज के साहसिक कार्यों का वर्णन किया है।
निम्न शर्तों को पूरा करने वाला कोई भी व्यक्ति सभा में भाग ले सकता था-
1 वे सभी जो सभा का सदस्य बनना चाहते थे, उनके लिए भूमि का स्वामी होना आवश्यक होता था।
2. उनके पास स्वयं का घर होना जरूरी होता था।
3 उनकी आयु 35 और 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए थी।
4 उन्हें वेदों का ज्ञान होना चाहिए था।
5 उन्हें प्रशासनिक मामलों में निपुण एवं ईमानदार होना चाहिए था। यदि कोई पिछले तीन साल में किसी भी समिति का सदस्य रह चुका है तो वह आगामी वर्षों में एक और समिति का सदस्य बन सकता था।
राजा उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में प्रायः बड़े जमींदारों या योद्धा प्रमुखों को उनके मातहत या सामंतों के रूप में मानते थे। वे राजा को सैन्य सहायता प्रदान करते थे। राजा इन प्रमुखों पर अधिकाधिक निर्भर होता चला गया। जब राजा की शक्ति का ह्वास हुआ तो इन योद्धा प्रमुखों में से कुछ अत्यधिक महत्वाकांक्षी बन गए एवं कुछ स्वतंत्र हो गए। उदाहरण के लिए राष्ट्रकूट कर्नाटक के चालुक्यों के अधीनस्थ थे, जिन्होनें उनके अधिपतियों को अपदस्थ कर सत्ता अधिकृत कर ली थी।
गजनी का सुल्तान महमूद अफगानिस्तान का शासक था । उसने 997 से 1030 ईसवी तक शासन किया था और मध्य एशिया ईरान और उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिमी भाग के हिस्सों पर अपने नियंत्रण का विस्तार किया एवं लगभग हर साल उपमहाद्वीप पर छापा मारा। उसके परवर्ती आक्रमण विशेष रूप से सोमनाथ, गुजरात सहित मंदिर शहरों पर केंद्रित थे क्योंकि भारतीय मंदिर अपार धन के भण्डार थे, जो धन महमूद अपने साथ लूट कर ले गया था अधिकांशतः उसका उपयोग गजनी के भव्य राजधानी शहर के निर्माण हेतु किया गया था। उसने उपमहाद्वीप का विवरण लिखने का कार्य अलबेरूनी नामक एक विद्वान को सौंपा था। अरबी में लिखित यह रचना किताब अल हिंद के रूप में जानी जाती है, यह रचना इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में है।
1.किस शासक ने गंगेकोण्ड की उपाधी धारण की थी?
2."गंगेकोण्ड" का शाब्दिक अर्थ क्या है?
3.गंगेकोण्डचोलपुरम कहां स्थित है?
4.गंगेकोण्डचोलपुरम का निर्माण किसने करवाया था?
1.राजेंद्र चोल ने गंगेकोण्ड की उपाधी धारण की थी।
2.'गंगा का विजेता', "गंगेकोण्ड" का शाब्दिक अर्थ है।
3.गंगेकोण्डचोलपुरम, तंजावुर के निकट स्थित मंदिरों का शहर है।
4.राजेंद्र चोल ने, गंगेकोण्डचोलपुरम का निर्माण करवाया था।
1.तांग साम्राज्य का प्रशासन, स्वयं शासक के मार्गदर्शन में एक परीक्षा के माध्यम से नियुक्त एक नौकरशाही द्वारा चलाया जाता था। परीक्षा में वो हर व्यक्ति भाग ले सकता था, जो इसमें इच्छुक होता था।
2.आम तौर पर राजसी परीक्षा प्रणाली एक प्रगतिशील परीक्षा थी जो कि निर्धन परिवारों में उत्त्पन हुए बुद्धिजीवियों को दरबार में एक अधिकारी बनने के अवसर की स्वीकृति प्रदान करती थी।
3.साम्राज्यीय दृष्टिकोण से इस परीक्षा प्रणाली ने साम्राज्यवादी शक्ति के केंद्रीकरण को बढ़ाने में सहायता की थी।
4.अधिकारियों के चयन की यह प्रणाली कुछ बदलाव के साथ 1911 तक बनी रही थी।
चह्वाण बाद में चौहान राजपूतों के रूप में पहचाने जाने लगे थे। उन्होंने दिल्ली और अजमेर के आसपास के क्षेत्र पर शासन किया था। उन्होंने पश्चिम और पूर्व में अपने नियंत्रण के विस्तार हेतु प्रयास किया। जहाँ पर उनका गुजरात के चालुक्यों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गहड़वालों द्वारा विरोध किया गया। पृथ्वीराज तृतीय सर्वाधिक प्रसिद्ध चह्माण शासक था। उसने 1191 में तराईन के प्रथम युद्ध में एक अफगान शासक सुल्तान मोहम्मद गोरी को पराजित किया था, लेकिन अगले ही वर्ष 1192 में तराईन की दूसरी लड़ाई में वह इसी अफगान शासक द्वारा पराजित हो गया था।
चोल प्रशासन में किसानों के बंदोबस्त को उर के रूप में जाना जाता था। सिंचाई कृषि के प्रसार के साथ ये बस्तियां समृद्ध बन गई थी। ऐसे गांवों के समूह को नाडू कहलाने वाली अपेक्षाकृत बड़ी प्रशासनिक इकाइयों में संगठित किया गया था। प्रत्येक नाडू में एक ग्राम परिषद होती थी और वे आम किसानों से करों का संग्रह करने हेतु उत्तरदायी होते थे। वे न्याय करने के लिए भी जिम्मेदार होते थे।
वेल्लाला जाति के धनी किसानों का नाडू प्रशासन पर अत्यधिक नियंत्रण होता था। केंद्रीय चोल सरकार द्वारा उनका निरिक्षण किया जाता था। ब्राह्मणों को काफी भूमि अनुदान अथवा ब्रह्मदेय प्राप्त हुआ करता था। प्रत्येक ब्रह्मदेय की देख-रेख प्रमुख ब्राह्मण भू-धारकों की एक सभा द्वारा की जाती थी। नगरम नामक व्यापारियों का संघ भी शहर में प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया करते थे।
चोल शासक, कला के सक्रिय संरक्षक थे। चोल मंदिर शिल्प उत्पादन के केंद्र थे। मंदिरों के साथ जुड़ी कलाओं में,कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण अत्यधिक अद्वितीय था। सुंदर नटराज प्रतिमा की कल्पना सर्वप्रथम चोल साम्राज्य के दौरान की गई थी। चोल कांस्य प्रतिमाओं को दुनिया की उत्कृष्टतम कलाकृतियों में माना जाता है, हालांकि कारीगरों द्वारा निर्मित की गई अधिकाँश प्रतिमाएं देवी- देवताओं की थी, किन्तु कभी-कभी उनके द्वारा उपासकों की प्रतिमाओं को भी निर्मित किया जाता था। उन्होंने, चोल कारीगरों द्वारा, दैनिक अनुष्ठान, जुलूस और मंदिर समारोहों जैसे उत्सवों में भाग लेने हेतु, मंदिर के बाहर ले जाने के लिए वृहद कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण किया गया था।
A. जहांगीरी मस्जिद।
B. बेगमपुरी मस्जिद।
C. अकबरी मस्जिद।
D. जामा मस्जिद।
बेगमपुरी मस्जिद मुहम्मद तुगलक के राज्यकाल में, दिल्ली में उसकी नयी राजधानी जहाँपनाह (विश्व की शरणस्थली) की मुख्य मस्जिद के तौर पर बनाई गई भारत की पहली इस्लामिक मस्जिद थी। मुहम्मद तुगलक द्वारा इस राजधानी शहर का निर्माण किया गया था।
A. इब्राहिम लोदी।
B. शेरशाह।
C. बहलोल खान लोदी।
D. सिकंदर लोदी।
मोठ की मस्जिद का निर्माण सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान उसके एक मंत्री द्वारा किया गया था।
A. आराम शाह।
B. बलबन।
C. मुहम्मद तुगलक।
D. फिरोज शाह तुगलक।
उसने इस क्षेत्र के लोगों को उच्च करों का भुगतान करने के आदेश दिए। क्योंकि वे पहले से ही सूखे से पीड़ित थे और अधिक करों का भुगतान करने में असमर्थ थे, अतः लोगों ने कृषि को छोड़ दिया।
A. निम्न वर्ग में उत्पन्न व्यक्ति को उच्च पद पर ।
B. उच्च वर्ग में उत्पन्न व्यक्ति को निम्न पद पर ।
C. मध्यम वर्ग में उत्पन्न व्यक्ति को निम्न पद पर ।
D. निम्न वर्ग में उत्पन्न व्यक्ति को मध्यम पद पर ।
इस प्रथा का पालन विशेष रूप से मुहम्मद तुगलक के शासन में किया गया था। इसके तहत बहुत से निम्न वर्ग में उत्पन्न हुए हिंदू और मुस्लिम दोनों को प्रशासन में उच्च पद दिए गए थे।
A. अरबी।
B. उर्दू।
C. फारसी।
D. हिंदवी।
तवारीख़ सल्तनत काल के दौरान रचित जीवनीयां होती थी। फारसी दरबार की आधिकारिक भाषा थी, अतः इनकी रचना फारसी भाषा में की गई थी।
A. 1414 मे
B. 1415 मे
C. 1416 मे
D. 1417 मे
तैमूर ने 1398 ईस्वी में भारत पर आक्रमण किया था और उसने तुगलक को पराजित किया। जब तैमूर ने दिल्ली छोड़ दिया, तो उसने अपने द्वारा विजित प्रान्तों की देखरेख के लिए खिज्र खान सैयद को अपना गवर्नर नियुक्त किया। खिज्र खान तेमुर के प्रति निष्ठावान रहा और उसने उसके नाम से शासन किया।
A. मोहम्मद तुगलक।
B. अलाउद्दीन खिलजी।
C. फिरोज़शाह तुगलक।
D. जलालूद्दीन खिलजी।
मंगोलों के साम्राज्य पर लगातार हमले हो रहे थे; इसलिए, अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों के खिलाफ लड़ने के लिए इस दुर्ग शहर का निर्माण किया। सीमांत दुर्गों को आपस में जोड़ा गया था और राजधानी को गैरीसन शहर (दुर्ग क्षेत्र) में सुरक्षा कारणों से स्थानांतरित कर दिया गया था।
A. कुतुबुद्दीन ऐबक।
B. बहाउद्दीन बलबन।
C. शम्सुद्दीन इल्तुतमिश।
D. आराम शाह।
रज़िया सल्तनत काल में प्रथम महिला मुस्लिम शासक थी। वह सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थी। वह 1236 ईसवी में सिंहासन पर बैठी थी।
A. फारसी।
B. हिंदवी।
C. उर्दू।
D. अरबी।
दिल्ली के सुल्तान कोई अन्य भाषा नहीं जानते थे। इसलिए, फारसी को उनके शासनकाल के दौरान प्रमुखता प्राप्त थी । शासक वर्ग से निकटता बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे इसे लोगों द्वारा अपनाया लिया गया था।
A. मुहम्मद तुगलक।
B. अलाउद्दीन खिलजी।
C. फिरोज शाह तुगलक।
D. सिकंदर लोदी।
इक्ता प्रणाली का मुहम्मद तुगलक के शासनकाल के अंतर्गत आधुनिकीकरण किया गया था। उसे तत्कालीन शासन व्यवस्था में दोष नज़र आए थे और इस मामले की जांच के लिए उसने एक आयोग का गठन किया था और अंत में उसने एक नई प्रणाली लागू की।
A. अजमेर।
B. दिल्ली।
C. आगरा।
D. फिरोजाबाद।
कुव्वत अल-इस्लाम मस्जिद दिल्ली में स्थित है। कुतबुद्दीन एबक ने इसका निर्माण करवाया था।
A. पारसी शब्द
B. अरबिक शब्द
C. हिंदी शब्द
D. उर्दू शब्द
अजनबी एक ठेठ पारसी शब्द है। यह एक अज्ञात व्यक्ति को दर्शाता है।
A. बिहार
B. उत्तर प्रदेश
C. महाराष्ट्र
D. राजस्थान
भारत में आर्यों के परिवार में, यह भाषा काफी प्रसिद्ध थी।
A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. रज़िया
D. क़ुतुबुद्दीन
बलबन का विशाल साम्राज्य था जिसकी पहुँच बंगाल से दक्षिण भारत तक थी।
A. गोदाम
B. पुस्तकालय
C. संग्रह
D. अजायबघर
रास्ट्रीय संग्रह नए दिल्ली में स्थित है।
A. कनौज
B. गौड़ा
C. दिल्ली
D. कलिंगा
मुहम्मद तुगलक सन 1325 में दिल्ली का सुल्तान बने थे।
A. राजनीतिक भावना
B. भौगोलिक भावना
C. सामाजिक भावना
D. सांस्कृतिक भावना
बाबर भूगोल, वनस्पति, जीव और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृतियों निर्दिष्ट करने के लिए 'हिन्दुस्तान' शब्दका इस्तेमाल किया था ।
A. ब्राह्मण
B. क्षत्रिय
C. शुद्र
D. वैश्य
राजपूत, सरदारों, सैनिकों और योद्धाओं क्षत्रियो के अंतर्गत आते है।
A. प्रिंटिंग मशीन
B. हाथो
C. विदेशी
D. लिखवाई
मध्यकालीन युग के दौरान प्रिंटिंग मशीन कि उपलब्धि ना होने के कारण, पांडुलिपियों हाथो के माध्यम से लिखी जाती थी।
A. तमिल नाडू
B. उत्तर प्रदेश
C. आंध्र प्रदेश
D. कर्नाटक
मशहूर कवी आमिर खुसरू, के मुताबिक प्राचीन काल में कई भाषाओ का प्रयोग हुआ करता था, द्वारासमुद्र भाषा उन्ही में से एक है।
A. 1356
B. 1358
C. 1456
D. 1458
ज़ियासुद्दीन बरनी अपना इतिवृत्त सन 1356 में लिखी थी।
A. तमिल नाडू
B. आंध्र प्रदेश
C. कर्नाटक
D. पूर्वी उत्तर प्रदेश
अमीर खुसरो,मध्यकालीन भारत के एक प्रसिद्ध कवि थे। वे मबारी को तमिलनाडु कि भाषा के रूप में हवाला किया था ।
A. संस्कृत
B. पाली
C. हिंदी
D. प्राक्रित
प्राचीन और मध्ययुगीन काल में अधिकांश ग्रंथों संस्कृत भाषा में लिखी जाती थी।
A. 7 वीं सदी
B. 6 वीं सदी
C. 5 वीं सदी
D. 4 वीं सदी
व्यापारी एवं प्रवासियों के द्वारा पहली बार 7 वीं शताब्दी में भारत में पवित्र कुरान की परिचय हुई थी।
A. 11 वीं सदी
B. 12 वीं सदी
C. 13 वीं सदी
D. 14 वीं सदी
'हिंदुस्तान'शब्द पहली बार तबाक़त-ए-नसीरी में पाया गया,जिसे इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज ने लिखा था।
A. 6अवधि
B. 5अवधि
C. 4 अवधि
D. 3 अवधि
ब्रिटिश इतिहासकारों ने भारत को हिन्दू, मुस्लिम, और ब्रिटिश अवधियो में विभाजित किया ।
ज़ियाउद्दीन बर्नी, चौदहवीं सदी का इतिहासकार था, वह गियासुद्दीन तुगलक, मोहम्मद तुगलक, फिरोज तुगलक जैसे दिल्ली सल्तनत शासकों का समकालीन था। उसने वर्ष 1356 से अपना वृतांत लिखा था।
पुरातन भाषा "संस्कृत" किसी भी क्षेत्र से संबंधित नहीं थी
एक प्रभावशाली धनी व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति जैसे कि एक कलाकार, एक शिल्पकार, एक विद्वान व्यक्ति, अथवा एक श्रेष्ठ जन को अपना समर्थन प्रदान करता है, एक संरक्षक कहलाता है।
ब्रिटिश इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को तीन अवधियों यथा हिन्दू, मुस्लिम और ब्रिटिश काल में विभाजित किया था।
मुसलमानों का पवित्र ग्रंथ, पवित्र कुरान है।
A. चोल।
B. चालुक्य।
C. पांडय।
D. मौर्य।
शुरुआत में राष्ट्रकूट कर्नाटक के चालुक्य राजाओं के अधीनस्थ थे। राष्ट्रकूट प्रधान दंतीदुर्ग के अधीन उन्होने स्वतंत्र स्थिति प्राप्त की और दक्कन में स्वयं को एक शासक वर्ग के रूप में प्रतिस्थापित किया।
A. अल्बेरूनी
B. अमीर-खुसरो
C. फिरदौसी
D. इसामी
अल-बेरूनी ने किताब अल-हिन्द की रचना की थी जो महमूद गजनी के समय भारत आया था। उसकी भारतीय दर्शन और विज्ञान में बहुत रुचि थी।
A. 1191
B. 1192
C. 1195
D. 1199
मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज तृतीय के विरुद्ध दो युद्ध लड़े थे। पृथ्वीराज तृतीय ने सुलतान मुहम्मद गोरी को 1191 में हराया, लेकिन दूसरे ही साल 1192 में उसके हाथों हार गया।
A. राजाओं के बारे में
B. रानियों के विषय में
C. योद्धाओं के विषय में
D. आम लोगों के विषय में
एक ओर जहां शिलालेखों से हमें राजाओं और शक्तिशाली व्यक्तियों के बारे में ज्ञात होता है वहीं बारहवीं सदी के एक विशिष्ट शिलालेख से हमें साधारण पुरुषों और महिलाओं के जीवन के बारे में विदित होता है।
A. नकद।
B. अनाज।
C. बेगार।
D. सिंचाई कर।
घर का छप्पर डालने, खजूर के वृक्ष पर चढ़ने हेतु सीढ़ी का उपयोग करने के लिए, पारिवारिक संपत्ति पर उत्तराधिकार प्राप्त करने पर भी कर आरोपित किए गए थे। चोलों के शिलालेखों में सर्वाधिक उल्लेखित कर 'वेत्ति' था।
A. गोदावरी
B. कृष्णा
C. तुंगभद्रा
D. कावेरी
कावेरी नदी बेसिन 27,700 वर्ग मील तक विस्तुत है। यह नदी तंजावुर के पूरे क्षेत्र को सिंचित करती थी और इसने चोल शासन के दौरान इस क्षेत्र को समृद्ध बनाया। यह नदी कर्नाटक राज्य में निकलती है।
A. दक्कन।
B. वारंगल।
C. कलिंग।
D. कर्नाटक।
राष्ट्रकूट वंश की स्थापना दक्कन में की गई थी और मान्यखेत उसकी राजधानी थी। यह 753 में दक्षिण भारत में सत्ता में आया और दो शताब्दियों से भी अधिक समय तक सत्ता में रहा।
A. नरसिंह
B. कूर्म
C. वराह
D. कृष्णा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने दस अवतार लिए थे; ये थे- मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (सूअर), नरसिंह (शेर + नर), वामन (बौने), परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि (प्रतीक्षा में) । राष्ट्रकूट वंश के अधीन एलोरा गुफाओं का निर्माण किया गया था।
A. अमोघवर्ष प्रथम
B. दंतिदुर्ग
C. इंद्र-तृतीय
D. कृष्ण-प्रथम
दंतिदुर्ग राष्ट्रकूट वंश का संस्थापक था। उन्होंने 753 ईसवी में राजवंश की स्थापना की जिसकी राजधानी मान्यखेत रखी।
A. दंतिदुर्ग
B. विग्रहराज
C. कृष्णा प्रथम
D. नागभट्ट
संस्कृत में रचित ग्वालियर प्रशस्ति प्रतिहार राजा, नागभट्ट के अभियानों की जानकारी प्रदान करती है।
दन्तिदुर्ग के रूप में भी पहचाने जाने वाले दन्तिवर्मन, राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक थे।
'जियान' तांग राजवंश की राजधानी थी।
विजयालय चोल (846-871), चोल साम्राज्य का संस्थापक था।
राजराज और उसका पुत्र राजेंद्र दो शक्तिशाली चोल शासक थे।
'महमूद गजनी' पहला तुर्की आक्रमणकारी था, जिसने पश्चिमोत्तर की ओर से भारत पर आक्रमण किया था
पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट त्रिपक्षीय संघर्ष में संलग्न तीन दल थे।
दिल्ली और अजमेर चह्वाणों के नियंत्रण के अधीन दो प्रमुख शहर थे।
गजनी ने भारत का धन लूटने एवं भारत में मुस्लिम शासन की स्थापना करने के लिए भारत पर आक्रमण किया था।
"वेत्ति", का कईं बार उल्लेख किया गया है। यह चोलों द्वारा नकदी के स्थान पर बेगार के रूप में लिया जाता था।
'सुल्तान' एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है शासक।
A. मुगलों।
B. तोमर।
C. पाल।
D. खिलजी।
अजमेर के चौहान आरंभिक मध्ययुगीन काल के सबसे शक्तिशाली हिंदू शासकों के रूप में माना जाते हैं। उन्होने 1165 में तोमर राजपूतों को पराजित कर अपने शासन की स्थापना की थी और 1192 ईसवी तक शासन किया था जब तक कि तराइन की दूसरी लड़ाई में मोहम्मद गोरी द्वारा उन्हें पराजित नहीं कर दिया गया था।
A. अमीरों को प्रदत भत्ते।
B. अमीरों को प्रदत उपाधि।
C. सैनिक भत्ते ।
D. सेनाधिपतियों को प्रदत भूमि।
इक्ता भिन्न-भिन्न आकार के क्षेत्र अथवा प्रांत होते थे। राजस्व प्रशासन की सुविधा के लिए इन्हें इक्ता में बाटा गया था। ये इलाके इक़्ता कहलाते थे और इन्हें सँभालने वाले अधिकारी इक्तादार या मुक़्ती कहे जाते थे। अपनी सैनिक सेवाओं के बदले वेतन के रूप में मुक़्ती अपने इलाकों से राजस्व की वसूली किया करते थे।।
A. दिल्ली सुल्तानों।
B. मुगलों।
C. तोमर राजपूतों।
D. चौहानों।
दिल्ली शहर, जो बारहवीं सदी के बाद से महत्वपूर्ण बन गया था ने एक राजधानी का दर्जा प्रथमतः तोमर राजपूत शासकों के अधीन प्राप्त किया था।
A. खिज्र खान
B. बहलोल
C. मुर्तजा खान
D. एत्माद्दौला
तैमूर ने 1398 ईस्वी में भारत पर आक्रमण किया था और बाद में उसने तुगलक को पराजित किया। जब तैमूर ने दिल्ली छोड़ दिया, तो उसने अपने द्वारा विजित प्रान्तों की देखरेख के लिए अपने गवर्नर को नियुक्त किया। तेमुर की मृत्यु के बाद खिज्र खान ने अपने आपको स्वतंत्रत घोषित कर स्वयं को दिल्ली का शासक घोषित कर दिया।
A. दौलताबाद
B. साहिबाबाद
C. फिरोजाबाद
D. तुगलकाबाद
मुहम्मद तुगलक ने प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनी राजधानी का स्थानांतरण किया था। दौलताबाद साम्राज्य के केंद्र में स्थित था। नव विजित दक्षिणी भारत पर दृढ़ नियंत्रण स्थापित करने के लिए, उसने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित कर दी थी।
A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. गयासुद्दीन बलबन
D. मोहम्मद तुगलक
मोहम्मद तुगलक ने भारत में दिल्ली सल्तनत की सीमा का दूर-दूर तक विस्तार किया था। जैसे ही साम्राज्य अपने चरम पर पहुंचा वहाँ सुल्तान द्वारा नियुक्त गवर्नरों के अधीन क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा विद्रोहों की एक लंबी श्रृंखला छेड़ दी गई थी।
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. मुहम्मद तुगलक
D. अलाउद्दीन तुगलक