औरंगजेब की दक्षिण-नीति के चार परिणाम निम्न प्रकार है :-
कृषकों को शोषण होने लगा था ।
दक्षिण-नीति के फलस्वरूप कला, साहित्य, संगीत आदि की प्रगति रुक गयी थी ।
दक्षिण नीति के कारण राजकोष रिक्त हो गया उत्तरी भारत में पूर्ण नियंत्रण समाप्त होने लगा ।
उत्तर भारत में सूबेदार निरंकुश हो गये थे।
सन 1739 ई० में नादिरशाह के दिल्ली पर आक्रमण कर मुग़ल सम्राट को बंदी बना लिया था दिल्ली को खुले आम लूटा ।
औरंगजेब ने हिन्दू पर लगाए दो प्रतिबंधों निम्न प्रकार है । औरंगजेब ने हिन्दुओं के अनेक मंदिर तुदवाए तथा उनके स्थान पर मस्जिदों का निर्माण कराया ।
औरंगजेब या हिन्दुओं को प्रशासन में सरकारी नौकोरियों से भी पृथक कर दिया ।
अकबर ने गीता, महाभारत, अथर्ववेद, बाइबिल, कुरान, पंचतंत्र, सिंहासनबत्तीसी व विज्ञान की भी कई पुस्तकों का फारसी भाषा में अनुवाद कराया गया ताकि फारसी बोलने वाले मुसलमान उन्हें पढ़कर समझ सकें।
अकबर ने साम्राज्य के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए साम्राज्य को कई स्तरों में बाँट रखा था। प्रशासन के कार्यों की देख-रेख के लिए केंद्र से लेकर गाँव तक जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
अकबर ने दक्षिण में अहमदनगर की रानी चाँदबीबी को हराया व अहमदनगर के कुछ भागों को अपने अधिकार में कर लिया। उसने गोंडवाना की शासिका दुर्गावती को भी हराया।
हुमायूँ की मृत्यु के समय अकबर केवल तेरह वर्ष का था। हुमायूँ के विश्वास पात्र बैरम खान ने अकबर का राज्याभिषेक किया। अकबर अपने संरक्षक बैरम खान की देख-रेख में राज-काज करने लगा।
बाबर की भारत मुख्य विजयों का नाम निम्न प्रकार है ;-
पानीपत की विजय - बाबर और इब्राहीम लोदी के मध्य
खानवा की विजय - बाबर और राणा सांगा के मध्य
चन्देरी की विजय - बाबर और मेदनीराय के मध्य
घाघरा की विजय - बाबर और बंगाल के शासक नुसरतशाह के मध्य ।
चौसा का युद्ध 1539 ई० में शेरशाह सुरी और हुमायूँ के साथ हुआ था यह युद्ध बहुत भीषण था इसमें हुमायूँ को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था शेरशाह ने दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया तथा शेरशाह सुरी भारत का शासक बना था ।
राणा सांगा और बाबर के बीच युद्ध खानवा नामक स्थान पर 1527 ई० में हुआ इस युद्ध में राणा सांगा पराजित हुआ था और भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना सुनिश्चित हुई
बाबर के चर्तित्र की मुख्य दो विशेषता थी -
वीर योद्धा
कलाप्रमी एवं साहित्यकार ।
क. गलत
ख. गलत
ग. सही
घ. सही
क. गलत
ख.
ग.
घ. गलत
फिरोज तुगलक ने बेरोजगारों के लिए नौकरी का इंतजाम करने के आदेश दिये। गरीब मुस्लिम लोगों को अपनी पुत्री के विवाह में मदद हेतु एक विभाग गठित किया गया। ये सभी कार्य एक नए विभाग दीवान-ए-खैरात के द्वारा किए जाते थे।
1) कुत्वात-उल-इस्लाम - कुतुबउद्धीन ऐबक ने इस मस्जिद का निर्माण दिल्ली में करवाया था ।जो स्थापत्य कला का सुन्दर उदाहरण है।
2) अढ़ाई दिन का झोपड़ा- दास वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर, राजस्थान में अढ़ाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि मस्जिद मस्जिद निर्माण से पूर्व यहाँ एक विशाल मंदिर था जिसे ऐबक ने तोड़कर थोड़े हेर-फेर के साथ मस्जिद में बदलवा दिया।
डॉ. आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक ‘दिल्ली सल्तनत’ में लिखा है, ”दिल्ली सल्तनत कभी भी एक समान प्रान्तों में विभक्त नहीं थी और न ही उन सबकी शासन-व्यवस्था एक ढंग की थी। कभी किसी सुल्तान ने प्रान्तों को समान आधार पर संगठित करने का विचार नहीं किया। 13वीं शताब्दी में सल्तनत सैनिक क्षेत्रों में विभक्त थी, जो ‘इक्ता’ कहलाते थे। प्रत्येक इक्ता एक ‘मुक्ति’ अथवा ‘शक्तिशाली’ सैनिक पदाधिकारी’ के अधीन होता था। “ यह अधिकारी इक्तादार कहलाता था।
अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत में तीन प्रकार के ‘इक्ता’ या ‘प्रान्त’ थे। ये सैनिक प्रांत थे। इसके अधिकारी ‘वली’ और कभी-कभी ‘अमीर’ कहलाते थे। खिलजी तथा तुगलक सुल्तानों के शासनकाल में बंगाल, गुजरात, जौनपुर, मालवा, खानदेश तथा दक्षिण सबसे महत्त्वपूर्ण सैनिक प्रान्त थें ‘भुक्तियों’ तथा ‘वालियों’ दोनों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में सेनाएँ रखनी पड़ती थीं। इनका कार्य अपने प्रान्त में शान्ति तथा सुव्यवस्था स्थापित कर जमींदारों के विद्रोह का दमन करना था । ये अपने अधीनस्थ अधिकारियों को नियुक्त करने का भी अधिकार रखते थे। अपने अधीनस्थ प्रदेशों के शासन का उत्तरदायित्व इन्हीं पर होता था। जब तक वे सुल्तान के आदेशों का पालन करते और आवश्यकतानुसार सैनिक सहायता देते रहते तब तक वे असीमित शक्ति का उपभोग करते थे। उन्हें अपनी आय-व्यय का लेखा रखना पड़ता था और बचत का धन शाही राजकोष में जमा करना पड़ता था।
1219 ई० के बाद से चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोलों ने दिल्ली सल्तनत पर लगातार हमले किये थे। इससे दो शासक अलाउद्दीन खिलजी और मोहम्मद तुगलक, दिल्ली में एक विशाल स्थायी सेना जुटाने के लिए बाध्य हुए थे। अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के दौरान और मोहम्मद तुगलक के शासन के प्रारंभिक वर्षों में इन आक्रमणों की संख्या में वृद्धी हो गई थी।
खलजी और तुगलक सम्राटों ने प्रांतो के राजयपाल के रूप में सैन्य सेनापतियों की नियुक्ति की थी। ये प्रांत-भूमि इक्ता कहलाती थी और भूमि-धारक इक्तेदार अथवा मुक्ति कहलाते थे। मुक्ति की भूमिका सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना और उनके इक्ता में शांति और व्यवस्था बनाए रखना था।
इब्राहिम लोदी, लोदी वंश का अंतिम शासक था उसे 1526 में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में हराकर इस वंश का अंत कर मुग़ल शासन की नींव रखी ।
मुबारक शाह पहला शर्की शासक था जिसने सुल्तान की उपाधि धारण की थी ।
सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया उसका मानना था की आगरा साम्राज्य के केंद्र में स्थित है जहाँ से वह कुशलता पूर्वक नियंत्रण रख सकता था ।
मलिक सरवर को तैमूर ने "सुल्तान उस शर्क" की उपाधि दी थी। वह मालिक की सेवाओं से प्रसन्न था और चूँकि सरवर पूर्व में राज कर रहा था इसलिए उसे पूर्व के सुल्तान की उपाधि मिली ।
क. असत्य
ख. असत्य
ग. सत्य
घ. असत्य
क. गलत
ख. गलत
ग. गलत
घ. सही
मुहम्मद तुगलक ने 1330 ई० में ताँबे के सिक्के प्रचलित करके अपना आदेश जारी किया था इन सिक्कों की प्रचलित करने का उद्देश्य राज्य की आर्थिक स्थिति को संतोषप्रद बनाना तथा संकट काल के लिए राजकोष को भरना था । इस प्रकार की प्रेरणा सुल्तान को चीनी तथा ईरानी शासकों से प्राप्त हुई थी । इन शासकों ने भी अपने देश में आर्थिक संकट का समाधान करने के लिए सांकेतिक मुद्रा के रूप में पीतल और ताँबे के सिक्कों का प्रचलन किया था ।
दिल्ली प्रथमतः तोमर राजपूतों के अन्तर्गत एक राजधानी राज्य बन गया था, वे, अजमेर के चौहानों अथवा चम्हानों द्वारा बारहवीं सदी में पराजित हो गये थे, इस समय दिल्ली एक वाणिज्यिक केंद्र बन गया था, कई जैन व्यापारी शहर में निवास करते थे और उन्होंने यहाँ कईं महत्वपुर्न मंदिरों का निर्माण करवाया, यहाँ पर ढलवाए गये सिक्कों का व्यापक तौर पर प्रचलन था
राजस्व, करों के रूप में एकत्र किया जाता था, ये तीन प्रकार के होते थे :
1. कृषि पर लगाया जाने वाला कर, खराज कहलाता था और यह किसानों से उत्पादन का 50 प्रतिशत तक लिया जाता था।
2. पशु कर।
3. मकान पर लिया जाने वाला कर।
1236 में, सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री रज़िया सुल्तान के पद पर आसीन हुई थी। उस युग के इतिहासकार, मिन्हाज -ए-सिराज, का मानना था कि रज़िया, उसके सभी भाइयों से अधिक सक्षम एवं योग्य थी । लेकिन लिंग भेद और जन्म-प्रदत अधिकार के नियमों और मानदंडों के अनुसार पुरुष वर्ग एक महिला के शासक बनने से नाखुश थे। अमीर वर्ग भी इस बात से खुश नहीं थे। अतः उसे 1240 में सिंहासन से हटा दिया गया था।
तवारीख के लेखक विद्वान पुरुष, सचिव, प्रशासक, कवि और दरबारी थे, जो न्यायपूर्ण शासन के महत्व पर बल देते हुए राजाओं को प्रशासनिक सलाह दिया करते थे। वे साथ ही घटनाओं का वर्णन किया करते थे। तवारीख की रचना, दिल्ली सुल्तानों की भाषा, फारसी में की गई थी।
तैमूर तुर्क सरदार था। इसे इतिहास में 'तैमूरलंग' भी कहा जाता है । महमूद गजनी की भांति तैमूर का भारत पर आक्रमण का उद्देश्य भारत की धन सम्पदा को लूट कर मध्य एशिया ले जाना था। उसने भारत पर १३९८ में आक्रमण किया था । इसके आक्रमण के दो प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित थे -
क. खंडित होते तुगलक वंश पर यह एक बहुत बड़ा धक्का था जिसने तुगलक वंश के विनाश की गति को तीव्रता प्रदान की ।
ख. क्षीण होते तुगलक वंश के अवशेषों पर प्रांतीय शक्तियों का उदय होना प्रारंभ हो गया । इनमे से कुछ ताकतें इतनी शक्तिशाली हो गयी की उन्होंने बाद में भावी वंशों का शासन करना दूभर कर दिया ।
तुगलक वंश के विघटन के कारणों को दो भागों में बांटा गया है जो आतंरिक कारण व बाह्य कारण हैं । आतंरिक कारणों में अयोग्य उत्तराधिकारी, उत्तराधिकार का युद्ध व उत्तराधिकारियों का नैतिक पतन प्रमुख हैं ।
फ़िरोज़ शाह तुगलक के उत्तराधिकारी अयोग्य होने के साथ साथ शक्तिहीन भी थे । इन्होने सुलतान बनाने की चाह में संघर्ष किये जिसके कारण अमीर वर्ग भी आपस में बंट गया था। इन्होने अपना समय मनो विनोद में लगाया व अपने कर्तव्यों से पूर्णतया विमुख हो गए ।
बाह्य कारणों में सबसे प्रमुख कारण 1398 में तैमूर द्वारा किया गया आक्रमण है जिसने तुगलक वंश को बहुत आघात पहुँचाया।

1. अरबी में इस्लामिक प्रार्थना स्थल को मस्जिद कहा जाता है।
2. दिल्ली सुल्तानों ने इस्लाम और मुसलमानों का संरक्षक होने का दावा प्रस्तुत करने के लिए सम्पूर्ण उपमहाद्वीप के शहरों में मस्जिदों का निर्माण करवाया था।
3. मोठ की मस्जिद का निर्माण सिकंदर लोदी के शासनकाल में उसके मंत्री द्वारा किया गया था।
4. मुसलमानों के मध्य समुदाय के विचार को सुदृढ़ करना जरुरी हो गया था, क्योंकि वे भिन्न पृष्ठभूमि से आये थे।
A. एक पद या रैंक
B. क्षेत्रीय पहचान
C. धार्मिक संप्रदाय
D. हिंदू शीर्षक
’मनसब’ प्रणाली एक श्रेणीबद्ध करने की प्रणाली थी, जिसका इस्तेमाल मुगल शासकों द्वारा मनसबदारों, जो मूल रूप से उनके सेनापति थे, उनके पद या वेतन को तय करने के लिए किया जाता था।
A. औरंगज़ेब
B. इब्राहीम लोदी
C. शाहजहाँ
D. बाबर
अहोम भारत के उत्तर पूर्वी भागों में आदिवासी प्रमुख थे। उन्होंने 1663 में विद्रोह कर दिया था लेकिन औरंगजेब उन्हें पराजित कर दिया। 1680 के दशक में उन्होंने फिर से विद्रोह कर दिया।
A. सलीम
B. खुर्रम
C. खुसरौ
D. हिन्दाल
राजकुमार खुर्रम मुगल सम्राट जहांगीर का पुत्र था। उसने अपने भाई खुसरौ को हराकर मार डाला और सिंहासन पर क़ब्ज़ा कर लिया। सिंहासन पर आने के बाद उसने अपना खिताब शाहजहां कर लिया।
A. जोधाबाई
B. हरखाबाई
C. मानबाई
D. मनुबाई
हरखाबाई कच्छुआ राजकुमारी थी और आमेर के राजपूत शासक की पुत्री थी।
A. पहली और दूसरी जिल्द
B. दूसरी और तीसरी जिल्द
C. तीसरी और चौथी जिल्द
D. चौथी और पांचवी जिल्द
चौथी और पांचवी (दफ्तर) किताबों में भारत के लोगों की धार्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में चर्चा है।
A. अकबर का संरक्षक
B. अकबर का चाचा
C. अकबर का बाप
D. अकबर का चचेरा भाई
जब अकबर 14 साल का था तब बैरम खान उसका संरक्षक बना था। वह मुग़ल साम्राज्य का प्रधान मंत्री भी था।
A. मंज़िल -आबादी
B. सिपाह -आबादी
C. मुल्क -आबादी
D. दफ्तर
दूसरी पुस्तक (सिपाह-आबादी) सैन्य और नागरिक प्रशासन और नौकर की स्थापना शामिल हैं। इस में सूचना और शाही अधिकारियों (मनसबदार), विद्वान पुरुषों, कवियों और कलाकारों की लघु जीवनी नमूने भी शामिल है।
A. शाह जहाँ
B. जहांगीर
C. अकबर
D. औरंगज़ेब
दिल्ली में प्रसिद्ध लाल किला शाहजहां ने बनवाया था। लाल किला शाहजहां के बाद मुगल सम्राटों का सरकारी निवास बन गया था। यह लाल बलुआ पत्थर के उपयोग से निर्माण किया गया था।
A. पठानों से
B. अफ़ग़ानों से
C. तुर्कों से
D. ईरानियों से
वर्ष 1500 में मुगल साम्राज्य को कई तरफ से खतरा था लेकिन मुख्य खतरा उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से अफ़ग़ानों से था।
A. साम्राज्य के प्रशासन
B. साम्राज्य के नागरिक प्रशासन
C. साम्राज्य के सांस्कृतिक परंपराओं
D. साम्राज्य का राजकोषीय पक्ष
मुल्क-आबादी, वह भाग है जो साम्राज्य व प्रांतों के वित्तीय पहलुओं तथा राजस्व की दरों के आँकड़ों की विस्तृत जानकारी देने के बाद "बारह प्रांतों का बयान" देता है।
A. चौहान
B. सिसोदिया
C. परमार
D. गहड़वाल
सिसोदिया वंश के राजपूतों ने मुग़ल आधिपत्य न स्वीकार करके उन्हें लंबे समय तक नाराज़ रखा। पर बाद में वह हार गए। लेकिन मुग़ल शासकों ने उनके साथ अच्छा व्यहवार किया और उन्हें जागीरें भी दीं।
A. मुगल
B. खिलजी
C. तुगलक
D. दास
मुगल वंश सन 1526 में स्थापित किया गया था और 1857 तक दिल्ली पर शासन किया। 1707 के बाद मुग़ल शासकों का प्रभाव बहुत कम हो गया था।
A. सुलह-ए-कुल
B. दीन-ए-इलाही
C. ज़वाबित
D. मनसबदारी
यह एक दर्शन था जिसका पालन मुग़ल सम्राटों द्वारा किया गया था। अकबर सभी व्यक्तियों और धर्मों की समानता में विश्वास करते थे। वह अपनी रियाया के धार्मिक विश्वासों का सम्मान करते थे और कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते थे।
A. बाबर
B. जहांगीर
C. शाह जहाँ
D. अकबर
1571 में अकबर ने फतेहपुर सीकरी का निर्माण किया था। यह आगरा में स्थित है। इसके परिसर में कई इमारतें हैं।
A. मेहरुन्निसा
B. नूरुन्निसा
C. ज़ेबुन्निसा
D. शम्सुन्निसा
नूरजहां जिसने 1611 में मुग़ल सम्राट जहांगीर से विवाह किया था, दरअसल मेहरुन्निसा के नाम से जानी जाती थी।
A. अबुल फ़ज़ल
B. फ़ैज़ी
C. टोडर मल
D. अकबर
'आईन-ए-अकबरी' अबुल फ़ज़ल द्वारा लिखी गई अकबरनामा की तीसरी जिल्द है।
A. चौहान राजपूत
B. परमार राजपूत
C. सिसोदिया राजपूत
D. हिन्दूशाही वंश
चित्तौड़ के शासकों ने मुग़लों के अधीन शासन करने की अकबर की पेशकश को ठुकरा दिया था।इस कारण मुग़लों से उनका टकराव हुआ। 1568 में सिसोदिया राजाओं की राजधानी ज़ब्त कर ली गई।
A. जहांगीर
B. शाहजहाँ
C. औरंगजेब
D. हुमायूं
1613 में, जहांगीर ने ईरानी राजा शाह अब्बास के पास एक राजनीयिक दूत भेजा ताकि वह कन्धार के मामले में मुग़ल साम्राज्य की वकालत करे, लेकिन वह बुरी तरह विफल रहा। 1622 में सफ़वी विजयी रहे और मुग़लों ने पूरी तरह कन्धार से अपना नियंत्रण खो दिया।
A. हुमायूँ
B. जहांगीर
C. शाहजहाँ
D. औरंगजेब
राजकुमार अकबर औरंगजेब का ज्येष्ठ पुत्र था। राजकुमार अकबर ने औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह कर दिया और उसे मराठों और दकन सल्तनत का समर्थन भी हासिल था। वह आखिर में सफ़वी ईरान भाग गया।
A. अकबर
B. जहांगीर
C. शाहजहाँ
D. औरंगजेब
1698 से औरंगजेब ने व्यक्तिगत रूप से मराठों, जिन्होंने गोरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया था, के खिलाफ दकन में अभियानों का नेतृत्व किया।
A. भगवान शिव
B. भगवान कृष्ण
C. काली देवी
D. देवी दुर्गा
कृष्णा और कालिया की कहानी भगवद् पुराण में दी गई है।
A. नृत्य
B. गाना
C. बुनाई
D. अभिनय
"सालियर" समुदाय कुशल बुनकर थे। वे अपने क्षेत्र में समृद्ध वर्ग के रूप में उभरे। ये मंदिरों के निर्माण के लिए पैसे दान दिया करते थे।
A. अमयुर
B. कैक्कोलार
C. आमाची
D. ओर्रयी
सालियर समुदाय को कैक्कोलार के रूप में भी जाना जाता था। यह समुदाय मुख्यतः कपास से कपड़ा बनाते थे। इस समुदाय को कताई और रंगाई तकनीकों का बहुत अच्छा ज्ञान था।
A. पीतल
B. तांबा
C. सोना
D. सीसा
स्थापति या मूर्तिकार कांस्य की मूर्तियाँ बनाने में विशेषज्ञता प्राप्त की थी।
A. तंजावुर
B. मदुरा
C. कांची
D. चोलापुरम
चोल साम्राज्य के दौरान तंजावुर मंदिरों के शहर के नाम से लोकप्रिय है। यह शहर ठेठ चोल वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करता है।
A. जीवन
B. धर्म
C. शहरीकरण
D. ब्राह्मणवादी विचार
मध्ययुगीन काल में, शहरी विकास, आर्थिक गतिविधियों या राजनीतिक गतिविधि पर निर्भर था। लर्निंग और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी निखरा। यह सब इन शहरों में तेजी से शहरीकरण के लिए नेतृत्व किया।
A. वेल्ड मोम तकनीक
B. लुप्त मोम तकनीक
C. मिश्रित मोम तकनीक
D. कोबाल्ट मोम तकनीक
यह शिप्ल्कारों द्वारा धातुई मूर्तिकला और अन्य ढलाई बनाने हेतु एक परंपरागत प्रक्रिया थी।
A. मसूलीपटनम
B. भरूच
C. कालीकट
D. सूरत
मुगल काल के दौरान, सूरत प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनकर उभरा। सूरत ओर्मुज़ की खाड़ी के माध्यम से पश्चिम एशिया के साथ व्यापार के लिए प्रवेश द्वार था। इसे मक्का के लिए प्रवेश द्वार बुलाया गया था क्योंकि कई तीर्थ जहाज़ वहाँ से रवाना होते थे।
A. बुनकरी में
B. चित्रकारी में
C. राजमिस्त्री में
D. व्यापार में
इस समुदाय के लोग सुनार, कांस्य कारीगर, लोहार, राजमिस्त्री और बढ़ई के कामो में विशेषज्ञ थे। इस समुदाय के लोगों का महत्वपूर्ण काम मंदिर निर्माण था। उन्होंने महलों, बगीचों, टैंकों और जलाशयों के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
A. गोदावरी घाटी
B. कावेरी घाटी
C. कृष्णा-तुंगभद्र घाटी
D. तुंगभद्रा घाटी
विजयनगर की प्राचीन राजधानी, जिसे हम्पी के नाम से जाना जाता है, कृष्णा-तुंगभद्र घाटी में स्थित है।
A. महानवमी
B. दशमी
C. सप्तमी
D. पंचमी
महानवमी पर देवदासियों द्वारा विशेष रूप से नृत्य प्रदर्शन किया जाता था। इस त्योहार को आजकल दक्षिण भारत में नवरात्र के रूप में मनाया जाता है। यह हम्पी के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक था। पुरातत्वविदों के अनुसार, महानवमी मंच का इस्तेमाल राजा मेहमानों के द्वारा श्रद्धांजलि स्वीकार करते थे।
प्रसिद्ध शहर हम्पी 1346 से 1565 ई. तक, 220 वर्षों के लिए विजयनगर साम्राज्य की राजधानी के रूप में रहा था।
अकबर के शासनकाल के दौरान लगभग 3200 कस्बे और 120 बड़े शहर विद्यमान थे।
राल्फ फिच, मुगल काल में भारत आया था और उसने कहा था कि फतेहपुर सीकरी और आगरा दोनों लंदन से बड़े थे।
अच्छी गुणवत्ता वाली नील का उत्त्पाादन,गुजरात में सरखेज में और आगरा के पास बयाना में किया जाता था, इंडिगो एक प्रमुख उद्योग था।
चीन की दक्षिणी सीमा पर इसकी निकट स्थिति के कारण बंगाल चीन के साथ व्यापार का मुख्य केंद्र था।
गुजरात में खंभात, अपने वस्त्रों के लिए और सोने और चांदी के काम के लिए प्रसिद्ध था।
बंगाल और गुजरात के कसबे कपड़ों की अच्छी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थे।
सोना, चांदी, सीसा, पीतल और कीमती पत्थर अथवा रत्न आदि के उपयोग के साथ अंतर्संबंधित विभिन्न शिल्प अस्तित्व में थे।
फिरोज तुगलक ने उसके कारखाने को 36 विभागों में विभाजित किया था, उन्हें अग्रणीय अमीरों के अधीन रखा गया था।
इब्नबतूता 14 वीं सदी में भारत आया था और वह आठ वर्षों तक मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में रहा था।
ढाका, इसके मलमल के लिए प्रसिद्ध था।
पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद रेशमी वस्त्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा था। वह 1704 ईसवी में बंगाल की राजधानी बन गया।.
आठवी शताब्दी ईस्वी के बाद से दक्षिण भारत में कई संघ उभरे,उनमें सबसे प्रसिद्ध मणिग्रामम और नानादेशी थे।
पुष्कर झील, जिसने प्राचीन काल से तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया है, अजमेर शहर के पास स्थित है।
राजाराज चोले द्वारा निर्मित राजराजेश्वरमंदिर,जो की चोल राजा की राजधानी तंजावुर में स्थित है, को वास्तकुार कुंजरमल्लन राजराज पेरूथच्चन ने बनाया था।
प्रसिद्ध हम्पी शहर 1346 से 1565 ई. तक, 220 वर्षों के लिए विजयनगर साम्राज्य की राजधानी के रूप में रहा था।
अकबर के शासनकाल के दौरान लगभग 3200 कस्बे और 120 बड़े शहर विद्यमान थे।
अच्छी गुणवत्ता वाली नील का उत्त्पाादन, गुजरात में सरखेज में और आगरा के पास बयाना में किया जाता था। इंडिगो एक प्रमुख उद्योग था।
चीन की दक्षिणी सीमा पर इसकी निकट स्थिति के कारण बंगाल चीन के साथ व्यापार का मुख्य केंद्र था।
मध्ययुगीन काल में गुजरात में खंभात, अपने वस्त्रों के लिए और सोने और चांदी के काम के लिए प्रसिद्ध था।
बंगाल और गुजरात के कस्बे कपड़ों की अच्छी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थे।
सोना, चांदी, सीसा, पीतल और कीमती पत्थर अथवा रत्न आदि के उपयोग के साथ अंतर्संबंधित विभिन्न शिल्प अस्तित्व में थे।
फिरोज तुगलक ने कारखाने को 36 विभागों में विभाजित किया था, उन्हें अग्रणीय अमीरों के अधीन रखा गया था।
ढाका मलमल के लिए प्रसिद्ध था।
नील का इस्तेमाल, ऊनी वस्त्रों की रंगाई करने के लिए किया जाता था, विदेशी व्यापारियों के आगमन के साथ नील की मांग में वृद्धि हुई, और यह भारत और यूरोपीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु थी।
कपास विनिर्माण की कुंजी केन्द्रों थे अहमदाबाद में पटना , कैम्बे और गुजरात , खानदेश में बुरहानपुर, बंगाल , कश्मीर , लाहौर और संयुक्त प्रांत, कपास विनिर्माण के मुख्य केन्द्र थे।
मुहम्मद बिन तुगलक ने चांदी के सिक्कों के अभाव की वजह से कांस्य सिक्कों के रूप में सांकेतिक मुद्रा (टोकन मुद्रा) की शुरुआत की थी, इन सिक्कों का मूल्य चांदी के सिक्कों के समतुल्य रखा गया था, अतः व्यापारियों,व्यवसायियों और लोगों ने नकली सिक्कों को ढालना शुरू कर दिया, जिसके कारण अंततः मुहम्मद बिन तुगलक को सांकेतिक मुद्रा का चलन बंद करना पड़ा।
वस्त्र, रंगाई, रेशम बुनाई, शॉल और कालीन बुनाई मध्यकाल के मुख्य उद्योग थे, इसके अलावा, केलिको पेंटिंग, चीनी उद्योग, धातु निर्माण, पाषाण और ईंट का काम, हथियार और कागज उद्योग, वृहद पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों में संलग्न थे।
'कारखाना' निर्माणशाला अथवा वस्तुओं के निर्माण में संलग्न लोगों का संगठित समूह होता था ; वे उत्पादन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण केंद्र थे, ये कारखाने, शाही परिवार के लिए वस्तुओं की आपूर्ति किया करते थे ।
1. चोलाकालीन कांस्य की मूर्तियां बनाने में किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया?
2. काँसा धातु कैसे बनाया गया?
3. घंटा-धातु और कांस्य धातु में क्या अंतर है?
[2+1+2=5]
1. चोलाकालीन कांस्य मूर्तियां ‘लुप्त्मोम’ तकनीक से बनाई जाती थी। सबसे पहले मोम की एक मूर्ति बनाई जाती थी। इसे चिकनी मिट्टी से पुरी तरह लीप कर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता था। जब वह पूरी तरह सूख जाती थी तो उसे गर्म किया जाता था आरै उसके मिट्टी के आवरण में एक छोटा-सा छेद बना कर उस छदे के रास्तेसारा पिघला हुआ मोम बाहर निकाल लिया जाता था। फिर चिकनी मिट्टी के खाली साँचे में उसी छेद के रास्ते पिघली र्हुइ धातु भर दी जाती थी। जब वह धातु ठंडी होकर ठोस हो जाती थी, तो चिकनी मिट्टी के आवरण को सावधानीपवूर्क हटा दिया जाता था आरै उसमें से निकली मूर्ति को साफ करके चमका दिया जाता था।
2. काँस्य एक मिश्रधातु है जो की तांबे आरै राँगे (टिन) के मेल से बना है।
3. घंटा-धातु में राँगे का अनुपात किसी भी अन्य किस्म के काँसे से अधिक होता है।यह घंटे जैसी ध्वनि उत्पन्न करती है।
सूरत मुगलकाल के दौरान पश्चिमी व्यापार का केंद्र बिंदु था। सूरत में लोग ओरमुज़ की खाड़ी के मार्ग से पश्चिम एशिया के साथ व्यापार किया करते थे। सूरत को मक्का का प्रस्थान द्वार भी कहा जाता था, क्योंकि बहतु-से हजयात्री जहाज़ से यहीं से तीर्थयात्रा पे रवाना होते थे। यह एक सर्वदेशीय शहर था और सभी जाती के लोग इस शहर में रहते थे। पुर्तगालीयों और डच व्यापारियों के यहाँ पर कारखाने एवं गोदाम स्थापित थे। एक अंग्रेजी इतिहासकार के अनुसार, एक समय में विभिन्न देशों के औसतन एक सौ जहाज यहाँ के बंदरगाह पर लंगर डाले खड़े देखे जा सकते थे। सूरत में ऐसी अनेक दुकाने थी जो सूती कपड़ा पश्चिमी व्यापारियों को थोक और फुटकर कीमतों पर बेचती थीं। सूरत से जारी की गयी हुंडियों को दूर-दूर तक मान्यता प्राप्त थी, जैसे मिस्र, इराक और बेल्जियम।
i. मध्यकालीन भारत में कई प्रकार के व्यापारी होते थे।
ii. कई तरह के व्यापारियों, जैसे कि घोड़े के व्यापारियों ने अध्यक्ष के साथ संघों का गठन कर रखा था, अध्यक्ष, उनकी तरफ से, योद्धाओं के साथ जो घोड़ों को खरीदते थे, मोल-भाव करता था ।
iii. चिट्टीयार और मारवाड़ी ओसवाल, जैसे भी समुदाय थे, जो देश के प्रमुख व्यापारिक समूह की श्रेणी में आने लगे थे।
iv. हिंदू बनिया और मुस्लिम बोहरा जैसे गुजराती व्यापारियों ने, लाल सागर, फारस की खाड़ी, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और चीन के बंदरगाहों के साथ अत्यधिक व्यापार किया करते थे।
v. वे इन बंदरगाहों में कपड़ों एवं मसालों का विक्रय किया करते थे एवं इन वस्तुओं के बदले में, वे अफ्रीका से, सोना और हाथीदांत और दक्षिण पूर्व एशिया और चीन से मसाले, टिन, चीनी नीली मिट्टी के बर्तन और चांदी लेकर आते थे।
A. मौजा
B. गढ़।
C. चौरासी
D. बारहोत
अबुल-फज़ल की अकबरनामा गढ़कटंगा के गोंड राज्य के प्रशासन का विवरण प्राप्त होता हैIt इन राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था केन्द्रीकृत हो रही थी। राज्य, गढ़ों में विभाजित थे। हर गढ़ किसी खास गोंड कुल के नियंत्रण में था।
A. गोंडवाना
B. कोया
C. बेराद
D. वेतार
गोंड कुल आगे कई इकाइयों में विभाजित था । हर इकाई का अपना राजा होता था।
A. गक्खर
B. गोंड
C. खोखर
D. लंगा
खोखर अपने वंश की उत्पत्ति क्षत्रिय मूल से मानते हैं। वे साहसी लड़ाकू थे जिंहोने अपनी स्वतंत्रता और संकल्प को नहीं खोया।
A. सीब सिंह
B. कमाल खान
C. अमन दास
D. सलबहाँ