A. दक्षिण पूर्व
B. उत्तर-पूर्व
C. दक्षिण पश्चिम
D. उत्तर पश्चिम
हिमालय और पारहिमालय क्षेत्र में कई खानाबदोश आदिवासी समुदाय रहते थे।ऐसी ही एक जनजाति थी- बलोच। ये लोग अलग-अलग मुखियों वाले कई छोटे-छोटे कुलों में बँटे हुए थे।
A. भिक्षुक
B. व्यापारी
C. मनोरंजनकर्ता
D. चरवाहा
पश्चिमी हिमालय में गड्डी गड़रियों की जनजाति रहती थी। वे अपने भेड़ों के झुंड के साथ अलग समूह में घूमते थे।
A. 10,000 गाँव
B. 20,000 गाँव
C. 50,000 गाँव
D. 70,000 गाँव
अकबर के शासनकाल के एक इतिहास अकबरनामा में उल्लिखित है कि गढ़ कटंगा के गोंड राज्य में 70, 000 गाँव थे।
A. 82 गाँव
B. 83 गाँव
C. 84 गाँव
D. 85 गाँव
गोंड राजाओं का प्रशासन विकेंद्रीकृत था। राज्य, गढ़ों में विभाजित थे। हर गढ़ किसी खास गोंड कुल के नियंत्रण में था। ये पुनःचैरासी गाँवों की इकाइयों में विभाजित होते थे, जिन्हें चौरासी कहा जाता था। चौरासी का उप-विभाजन बरहोतों में होता था, जो बारह-बारह गाँवों को मिला कर बनते थे।
A. ब्राह्मणों को
B. क्षत्रियों को
C. शूद्रों को
D. वैश्यों को
बड़े राज्यों के उदय ने गोंड समाज के चरित्र को बदल डाला। राजाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने एवं क्षत्रीय जाति की स्थिति प्राप्त करने और स्वयं को रक्षक के रूप में दर्शाने के लिए ब्राह्मण लोगों को भू-अनुदान दिए।
A. 1545
B. 1555
C. 1565
D. 1575
1565 में आसिफ खान के नेतृत्व में मुगल सेनाओं ने गढ़ कटंगा पर हमला किया और उसे पराजित कर दिया।
A. जोतदार
B. भू-स्वामी
C. ख़ानाबदोश
D. शासक
अहोमों ने भुइयाँ (भूस्वामी) लोगों की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था का दमन करके नए राज्य की स्थापना की।
A. गोंड राज्य।
B. अहोम राज्य।
C. संथाल राज्य।
D. परगना राज्य।
अहोम राज्य ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पर स्थित था। राज्य पने कार्यों के लिए बहुत भारी मात्रा में अ बेगार श्रम पर आधारित था। इसलिए, हर साल जनगणना ली जाती थी और गांवों को राज्य को अपने यहाँ श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बारी बारी से अनेक श्रमिक भेजने पड़ते थे।
A. बाबर
B.
शाहजहाँ
C. अकबर
D. जहांगीर
मुगल बादशाह जहाँगीर ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि बंजारे विभिन्न इलाकों से अपने बैलों पर अनाज ले जाकर शहरों में बेचते थे।
A. अहोमों का
B. गोंड का
C. भीलों का
D. कोली का
सिब सिंह (1714-1744) के शासनकाल में, हिंदू धर्म प्रमुख धर्म बन गया था, हालांकि हिन्दू धर्म के साथ-साथ जनजातीय धर्म भी अस्तित्व में था ।
A. अकबर
B. राजा मान सिंह
C. राजा अजीत सींह
D. औरंगजेब
वर्तमान बिहार और झारखंड के कई इलाकों में बारहवीं सदी तक चेर सरदारशाहियों का उदय हो चुका था। राजा मान सिंह बादशाह अकबर का सेनापति था । उसने जनजातीय समूह को अपने अधीन कर लिया और क्षेत्र में मुगल साम्राज्य का विस्तार किया ।
A. राजकुमार खुर्रम
B. औरंगजेब
C. माधो सिंह
D. मीर जुमला
अहोम साम्राज्य ने मीर जुमला के कई हमलों का सामना किया था और मीर जुमला ने अहोमो को अपने अधीन कर दिया था। लेकिन जल्द ही अहोमों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी। मीर जुमला शाहजहाँ के अधीन एक अमीर था।
A. सत्रहवीं सदी
B. सोलहवीं सदी
C. अठारहवीं सदी
D. उन्नीसवीं सदी
उसने अपने विवरण में लिखा है कि इस अवधि के शासकों द्वारा बंजारा जनजाति से अनाज ढोने का काम करवाया जाता था ।
A. फारसी शैली
B. गोथिक शैली
C. बेबीलोन शैली
D. असीरियन शैली
बारहवीं शताब्दी से फ्रांस में आरंभिक भवनों की तुलना में अधिक ऊँचे व हल्के चर्चों के निर्माण के प्रयास शुरू हुए। वास्तुकला की यह शैली ‘गोथिक’ नाम से जानी जाती है। इस शैली की विशिष्टताएँ हैं- नुकीले ऊँचे मेहराब, रंगीन काँच का प्रयोग, जिसमें प्रायः बाइबिल से लिए गए दृश्यों का चित्रण है तथा उड़ते हुए पुश्ते। इस वास्तुकलात्मक शैली के सर्वोत्कृष्ट ज्ञात उदाहरणों में से एक पेरिस का नाट्रेडम चर्च है।
मध्यकालीन मंदिर एक ऐसे विश्व का लघु मॉडल होता था जो की राजा और उसके सहयोगी दलों द्वारा शासित था। जैसे की वे शाही मंदिरों में एक साथ अपने देवताओं की पूजा करते थे, ऐसा लगता था मानो वे पृथ्वी पर देवताओं के द्वारा बनाये नियमों को ही लागू करते हों।
मुग़ल शासक बाबर द्वारा निर्माण कराये गए बागों को चारबाग कहते थे क्यूंकि इन बागों को कृत्रिम नेहरों द्वारा चार भागों में विभाजित किया था।
इस इमारत का निर्माण कुतबुद्दीन ऐबक ने शुरू किया और 1229 ईस्वी के आस-पास इल्तुतमिश ने पूरा करा।
विजयनगर में राजाओं द्वारा बनायीं गयी गजशालाओं पर बीजापुर और गोलकोंडा की सल्तनत की वास्तकुलात्मक शैली का बहतु प्रभाव था।
हुमायूं के मकबरे का निर्माण (आठ स्वर्गों) हश्त बिहिश्त की परम्परा में हुआ था ,जिसमें एक केन्द्रीय कक्ष, आठ कमरों से घिरा होता है।
ताजमहल का निर्माण, मुगल शासक शाहजहां ने अपनी पूर्व राजधानी आगरा में 1643 ईस्वी में पूरा कराया।
कंदरिया महादेव मंदिर, जो की भगवन शिव को समर्पित था, और जिसका 999 ईस्वी में निर्माण हुआ, को चंदेल राजवंश के राजा धंगदेव ने बनवाया।
मंदिरों का निर्माण करवा के शासक भगवन से खुद के करीबी रिश्तों का प्रचार करते थे।
उत्तर: शाहजहां की अवधि के दौरान वास्तुकला अपने चरमोत्कर्ष पर थी। आगरा में स्थित ताजमहल, दिल्ली में लाल किला, दिल्ली में जामा मस्जिद, मोती मस्जिद और आगरा के किले में मुसम्मन बुर्ज, आदि इसके कुछ उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उत्तर: गजनी का सुल्तान महमूद राजेंद्र प्रथम का समकालीन था।
फतेहपुर सीकरी की सबसे शानदार इमारतों में मस्जिद और प्रवेश द्वार हैं। यह 'बुलंद दरवाजा' कहलाता है। यह अकबर द्वारा गुजरात विजय की स्मृति के रूप में बनाया गया था। बुलंद दरवाजा की मेहराब (तोरण पथ) 41 मीटर की है। यह एक 'अर्ध गुम्बदीय द्वार' शैली का दरवाज़ा है।
लाहौर और श्रीनगर में स्थित शालीमार बाग, श्रीनगर में स्थित निशात बाग, पानीपत में स्थित काबुल बाग और पंजाब में स्थित पिंजौर गार्डन मुगल काल के महत्वपूर्ण मुगल उद्यान हैं जो वर्तमान में भी संरक्षित हैं।
अकबर पहला मुगल सम्राट था जिसके पास बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जैसे कि लाल किला (आगरा), फतेहपुर सीकरी आदि का जिम्मा उठाने हेतु पर्याप्त समय एवं संसाधन थे ।
हुमायूं के मकबरे का निर्माण हुमायूं की पत्नी हमीदा बानो द्वारा करवाया गया था। इसका निर्माण फ़ारसी विधि से किया गया था। पाषाण और संगमरमर का उपयोग इस पर भारतीय प्रभाव को दर्शाता है। इसका निर्माण कार्य 1564 ईसवी में शुरू किया गया था और इसे पूरा होने में आठ वर्षों का समय लगा।
'पंच महल' फतेहपुर सीकरी का एक भाग है। पंच महल का निर्माण शुद्ध एवं ताजी हवा का आनंद लेने के लिए किया गया था, यह पांच मंजिला इमारत है। इसमें कई डिजाइन में सुंदर स्तम्भों से युक्त विभिन्न मंदिर निर्मित हैं।
जहांगीर की स्थापत्य की अपेक्षा चित्रकला में अधिक रुचि थी। इस के बावजूद उसके शासनकाल के दौरान निर्मित दो इमारतें- सिकंदरा में अकबर का मकबरा और आगरा में एत्माद-उद-दौला का मकबरा काफी प्रसिद्ध हैं।
अकबर के मकबरे का निर्माण कार्य स्वयं अकबर द्वारा शुरू करवाया गया था किन्तु इसे पूरा जहांगीर द्वारा करवाया गया था। मक़बरा एक विशाल बगीचे के केंद्र में स्थित है और यह वर्गाकार है। इसमें पांच मंजिलें हैं। इसकी दीवारों पर भित्तिचित्र(फ्रेस्को)निर्मित हैं एवं पत्थर की टाइल्स पर पवित्र कुरान की आयतें उत्कीर्ण हैं।
उत्तर: बीजापुर में आदिल शाह की जामा मस्जिद, आदिल शाह द्वितीय का मकबरा, कुछ शाही महल और सातमंजिला इमारतें हिन्दू और मुस्लिम शैली की वास्तुकला के समन्वय के सुंदर उदाहरण हैं।
लाहौर में बादशाही मस्जिद, दिल्ली में मोती मस्जिद और बीबी का मकबरा (ताजमहल की नकल पर निर्मित की गई काले रंग की इमारत) आदि भवनों का निर्माण औरंगजेब द्वारा करवाया गया था।
यमुना नदी पर सभी अभिजातोंकी पहुँच पर नियंत्रण हेतु शाहजहाँ नेशाहजहाँनाबाद के निर्माण के लिए नदी-तट-बाग़ की योजना अपनाई। आगरा में ताजमहल के निर्माण की तरह, शाहजहाँ ने दिल्ली में अपनी नई राजधानी शाहजहाँनाबाद के निर्माण में इस रणनीति का प्रयोग किया। यहाँ, शाही महल नदी पर स्थित था। केवल विशिष्ट कृपा-प्राप्तअभिजातों,जैसे की दाराशिकोह कोहीनदीपरजानेकीअनुमतिथी।अन्य सभी को अपने घर का निर्माण यमनुा नदी से दूर, शहर में करवाना पडत़ा था।
क्यूंकि राजा मंदिरों का निर्माण अपनी शक्ति, धन-संपदा, और इश्वर के प्रति निष्ठा के प्रदर्शन हेतु करते थे।इन इमारतों को अक्सर दुसरे राज्यों पर हमलों के दौरान निशाना बनाया गया।
मध्यकालीन राजनीतिक सस्ंवफृति में ज्यादातर शासक अपनेराजनैतिक बल व सैनिक सफलता का प्रदर्शन पराजित शासकों के उपासना स्थलों पर आक्रमण करके आरै उन्हें लटू कर करते थे।
हुमायूं का मकबरा, जो की 1562 और 1571 के बीच में बनाया गया, एक विशालऔपचारिक चारबाग के केंद्र में रखा गया था। इसका निर्माण (आठ स्वर्गों) हश्त बिहिश्तकी परम्परा में हुआ था, जिसमें एक केन्द्रीय कक्ष, आठ कमरों से घिरा होता है। इस इमारत का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से हुआ था तथा इसके किनारे सफ़ेद संगमरमर से बने थे। हुमायूँ के मकबरे में सबसेपहली बार दिखनेवाला केन्द्रीय गुम्बद,(जो बहतु ऊँचा था) आरै ऊँचा महेराबदार प्रवेशद्वार (पिश्तक) मुग़ल वास्तुकला के महत्त्वपूर्ण रूप बन गए।
अकबर ने कई भवनों और किलों का निर्माण करवाया था, लेकिन उनमें से सबसे प्रभावशाली आगरा का किला है जो 1571 ईसवी में बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। इसमें अनेक द्वार-अमर सिंह द्वार, हाथी द्वार आदि निर्मित हैं।जहांगीर महल, मरियम महल आदि आगरा के किले में निर्मित स्थलों में से हैं। आगरा के किले के निर्माण में 2,000 संगतराशों, 2,000 सीमेंट और चूना-पत्थर निर्माताओं एवं 8,000 मजदूरों की आवश्यकता पड़ीं थी।
भारतीय मंदिर वास्तुकला को तीन अलग-अलग शैलियों में वर्गीकृत किया गया है:
उत्तर भारतीय शैली अथवा नागर।
दक्षिण भारतीय शैली अथवा द्रविड़।
उत्तर और दक्षिण भारतीय शैली के संयोजन को वेसर शैली कहा जाता है।
वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और दास अवतार मंदिर उत्तर भारतीय शैली के मंदिर के उदाहरण हैं। खजुराहो (मध्य प्रदेश) और भुवनेश्वर (उड़ीसा) में मंदिरों के समूह नागर शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं। द्रविड़ शैली का सर्वप्रमुख उदाहरण शोर मंदिर (मामल्ल्पुरम) और मीनाक्षी मंदिर(मदुरै) के रूप में है।
1. शाहजहाँके शासनकाल के दौरान मुग़ल वास्तुकला के विभिन तत्वों को एक विशाल सदभावपूर्ण संश्लेषण में मिला दिया गया।
2. शाहजहाँने अपने शासनकाल में भव्य ताज महल को बनाने के लिए नदी-तट-बाग़ की योजना अपनाई।.
3.यहा सफ़ेद संगमरमर का मकबरा नदी तट के एक चबतूरेपर तथा बाग इसके दक्षिण में बनाया गया था।
4. नदी पर सभी अभिजातों की पहुँच पर नियंत्रण हेतु शाहजहाँ ने इस वास्तकुलात्मक रूप को विकसित किया।
5. दिल्ली के शाहजहाँनाबादमें शाही महल नदी के तट पर स्थित था। केवल विशिष्ट कृपा-प्राप्त अभिजातों को ही नदी पर जाने की अनुमति थी।अन्य सभी को अपने घर का निर्माण यमनुा नदी से दूर, शहर में करवाना पडत़ा था।
शाहजहाँनेदिल्ली के लालकिले के अपनेनवनिमिर्त दरबार में राजकीय न्याय आरै शाही दरबार के अन्तःसंबंधों पर बहतु बल दिया। बादशाह के सिंहासन के पीछेपितरा-दुरा के जडा़ऊ काम की एक श्रंखला बनाई गयी थी, जिसमें पौराणिक यनूानी दवेता आर्फियस को वीणा बजाते हुए दिखाया गया था। ऐसा माना जाता था कि आर्फियस का संगीत आक्रामक जानवरों को भी शांत कर सकता है और वह शांतिपूर्वक एक-दुसरे के साथ रहने लगते हैं।शाहजहाँ के सावर्जनिक सभा भवन का निर्माण यह सूचित करता था कि न्याय करतेसमय राजा ऊँचे आरै निम्न सभी प्रकार के लोगों के साथ समान व्यवहार करेगा और सभी सद्भाव के साथ रह सकेंगे।
मुगलों के शासनकाल में वास्तुकला और अधिक जटिल हो गयी थी। मुगल वास्तुकारों का ध्यान बागों की योजना बनाने और इनके निर्माण पर केंद्रित था। बगीचों को आयताकार बाड़ों के भीतर बनाया गया था और कृत्रिम नेहरों द्वारा चार भागों में विभाजित किया था। इन बागानों को चारबाग भी कहते थे। केन्द्रीय गुंबद (जो बहुत उंचा था) और ऊँचा मेहराबदार प्रवेशद्वार (पिश्तक) मुग़ल वास्तुकला के महत्वपूर्ण रूप बन गए।कब्रों की तरह इमारतों का निर्माण हश्त बिहिश्त की परम्परा में हुआ था, जिसमें एक केन्द्रीय कक्ष, आठ कमरों से घिरा होता था। शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान सार्वजनिक और व्यक्तिगत सभा हेतु बनाये गए समारोह कक्ष (दीवान-ए-ख़ास) और दीवान-ए-आम) मुग़लों की ही देन थी।ये दरबार चिहिल सुतुन(चालीस खम्बो के सभा भवन) के नाम से भी जाने जाते थे।
सफेद संगमरमर का एक सामग्री के रूप में और जडाऊ सजावटी आकृति के रूप में व्यापक उपयोग भी नविन आविष्कारों में से एक था।
1.कुतुब मीनार की पहली मंजिल का निर्माण किसने करवाया था ?
2.शेष निर्माण कार्य को किसने पूरा करवाया था ?
3.कुतुब मीनार में कितनी मंजिलें हैं?
4.पहली बालकनी में स्थित शिलालेख की दो तख्तियां किस भाषा में उत्कीर्ण हैं?
1. पहली मंजिल का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा करवाया गया था।
2. शेष निर्माण कार्य को 1229 में इल्तुतमिश द्वारा पूरा करवाया गया था।
3. कुतुब मीनार में पांच मंजिलें हैं।
4. पहली बालकनी में स्थित शिलालेख की दो तख्तियां अरबी भाषा में हैं।
1. कन्दारिया महादेव मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
2. कन्दारिया महादेव मंदिर किस देवता को समर्पित है?
3. मंदिर में प्रधान देवता की प्रतिमा को कहाँ स्थापित किया गया था?
4. सभी अनुष्ठानिक पूजा में कौन-कौन लोग भाग लेते थे?
1.कन्दारिया महादेव मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के राजा धंगदेव द्वारा 999 ईसवी में किया गया था।
2.कन्दारिया महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
3.मुख्य देवता की प्रतिमा को मुख्य मंदिर (गर्भगृह) में स्थापित किया गया था।
4.अनुष्ठान पूजा का आयोजन मुख्य मंदिर (गर्भगृह) में किया जाता था, जहाँ पर केवल राजा, उसका परिवार और पुजारी एकत्रित होते थे।
A. उत्तरी भारत
B. पश्चिमी भारत
C. दक्षिण भारत
D. पूर्वी भारत
ये समाज दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ वस्तुओं की कीमत का फैसला किया करते थे और अन्य दूर के क्षेत्रों के साथ कारोबार किया करते थे।
A. गोदावरी घाटी
B. कृष्णा-तुंगभद्र घाटी
C. नर्मदा–तापी घाटी
D. महानदी घाटी
हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी के रूप में उभरा।
A. शिव
B. विष्णु
C. कृष्णा
D. इंद्र
विरुपक्ष मंदिर, भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है ।
A. 1336 ईस्वी
B. 1337 ईस्वी
C. 1338 ईस्वी
D. 1339 ईस्वी
हरिहर और बुक्का ने 1336 ईस्वी में, संत विद्या नारायण के आशीर्वाद के साथ, विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की|
"देवदासियाँ"मन्दिरों की नर्तकियाँ थी| वे मन्दिरों और महलों के अन्दर नृत्य किया करती थी|
A. कृष्णदेवराय
B. देवराय प्रथम
C. देवराय द्वितीय
D. गजपति शासकों
महानवमी मंच की विशाल संरचना श्री कृष्णदेवराय द्वारा की गई थी। उन्होंने इसकी संरचना उडीशा के गजपतियों पर अपनी जीत के बाद की।
A. मंदिरों का शहर
B. चोल राजधानी
C. स्थानीय मुख्यालय
D. बंदरगाह शहर
मध्ययुगीन काल में, मंदिर आर्थिक गतिविधि के केंद्र के रूप में उभरे। कई कस्बों को मंदिरों के शहर के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जैसे: कांचीपुरम, तंजावुर, वाराणसी, मथुरा आदि।
A. अफ्रीका
B. यूरोप
C. ऑस्ट्रेलिया
D. अमेरिका
गुजरात के 'बोहरा’ अफ्रीका से सोना और हाथी दाँत आयात करते थे। उन्होंने लाल सागर के पास स्थित देशों के साथ एक प्रभावी व्यापार संबंध बना रखा।
A. अरब
B. दक्षिण पूर्व एशिया और चीन
C. फारस
D. इराक
मुस्लिम "बोहरा" समुदाय के दक्षिण पूर्व एशिया और चीन से टिन, चीनी मिट्टी के नीले बर्तनों और चांदी का आयात करते थे, क्योंकि ये देश खनिज संसाधनों में समृद्ध थे।
A. राजा अमन दास
B. राणा सांगा
C. पृथ्वीराज चौहान।
D. राजा संग्राम सिंह
अमन दास गढ़कटंगा का गोंड राजा था । राजपूतों के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए गढ़ कटंगा के गोंड राजा अमन दास ने संग्राम शाह की उपाधि धारण की थी।
A. एतिहासिक
B. बुर्जनीस
C. बुरंजिस
D. अहोमकथा
अहोम समाज, एक अत्यंत परिष्कृत समाज था। कवियों और विद्वानों को अनुदान में जमीन दी जाती थी। नाट्य-कर्म को प्रोत्साहन दिया जाता था। संस्कृत की महत्त्वपूर्ण कृतियों का स्थानीय भाषा में अनुवाद किया गया था। बुरंजी नामक ऐतिहासिक कृतियों को पहले अहोम भाषा में और फिर असमिया में लिखा गया था।
A. स्थानांतरित
B. टेरेस फ़ार्मिंग
C. परंपरागत
D. स्थायी
एक वन क्षेत्र में वृक्षों एवं झाड़ियों को पहले काटा और जलाया जाता है, फसल को राख में बोया जाता है, जब यह क्षेत्र अपनी उत्पादक क्षमता खो देता है इस देश में अपनी प्रजनन क्षमता खो देता है। भूमि के अन्य भू-खंड को इसी तरह से साफ़ किया जाता है और फसल को बोया जाता है, इसे स्थानांतरण कृषि कहा जाता है।
इसने जंगली हाथियों को पकड़ कर एवं अन्य राज्यों को उनका निर्यात कर अत्यधिक धन अर्जित किया था
बुरंजिस अहोम और असमिया भाषाओं में रचित ऐतिहासिक वृतांतों का एक वर्ग हैं।
अकबर के प्रसिद्ध सेनापति राजा मान सिंह ने 1591 में आक्रमण कर चेरो को पराजित किया था।
आदिवासी लोग कृषि, शिकार, संग्रहण एवं पशु चारण के द्वारा अपनी आजीविका प्राप्त करते थे
उपमहाद्वीप के बड़े क्षेत्रों में, समाज वर्ण के नियमों के अनुसार विभाजित किया गया था
अहोम ब्रह्मपुत्र घाटी में प्रवास करने से पूर्व म्यांमार में रहते थे।
राज्य हेतु काम करने के लिए बाध्य किये जाने वाले श्रमिकों को पाइक कहा जाता था।
बंजारों का कारवां टांडा कहलाता था।
कुल एक ही पूर्वज के वंश के दावेदार परिवारों का एक समूह अथवा परिवार होता है
लंगाह और अरघुन का मुगलों के द्वारा अधीनस्थ होने से पूर्व मुल्तान और सिंध क्षेत्रों पर वर्चस्व था
कमाल खान गक्खर को सम्राट अकबर द्वारा प्रभावशाली बना दिया गया था। अकबरनामा में, शाही न्यायालय में कमाल खान की बढ़ती लोकप्रियता को लेखबद्ध किया गया है।
इसने जंगली हाथियों को पकड़ कर एवं अन्य राज्यों को उनका निर्यात कर अत्यधिक धन अर्जित किया था
बुरंजिस अहोम और असमिया भाषाओं में रचित ऐतिहासिक वृतांतों का एक वर्ग हैं।
अकबर के प्रसिद्ध सेनापति राजा मान सिंह ने 1591 में आक्रमण कर चेरो को पराजित किया था।
आदिवासी लोग कृषि, शिकार, संग्रहण एवं पशु चारण के द्वारा अपनी आजीविका प्राप्त करते थे
उपमहाद्वीप के बड़े क्षेत्रों में, समाज वर्ण के नियमों के अनुसार विभाजित किया गया था
अहोम ब्रह्मपुत्र घाटी में प्रवास करने से पूर्व म्यांमार में रहते थे।
राज्य हेतु काम करने के लिए बाध्य किये जाने वाले श्रमिकों को पाइक कहा जाता था।
बंजारों का कारवां टांडा कहलाता था।
कुल एक ही पूर्वज के वंश के दावेदार परिवारों का एक समूह अथवा परिवार होता है
लंगाह और अरघुन का मुगलों के द्वारा अधीनस्थ होने से पूर्व मुल्तान और सिंध क्षेत्रों पर वर्चस्व था
कमाल खान गक्खर को सम्राट अकबर द्वारा प्रभावशाली बना दिया गया था। अकबरनामा में, शाही न्यायालय में कमाल खान की बढ़ती लोकप्रियता को लेखबद्ध किया गया है।
कई बड़ी जनजातियां उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में फली-फूली थीं । वे आम तौर पर जंगलों, पहाड़ों, रेगिस्तान और दुर्गम स्थानों में निवास करती थीं।
सुहुंगमुंग अहोम राज्य के वास्तविक निर्माताओं में से एक के रूप में माना जाता है। उसने अपने राज्य की पहली जनगणना करने का बीड़ा उठाया और अपने राज्य के बाहर से विभिन्न वर्गों से कारीगरों को लेकर आया और उन्हें अपने राज्य में प्रतिष्ठापित किया।
शब्द 'खानाबदोश " का अर्थ लोगों के घुमंतू समूह से है जो शिकार, पशु-चारण एवं संग्रहण द्वारा अपना जीवनयापन करते हैं। ये समूह सर्वदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण करते थे एवं ये कुशल घुड़सवार होते थे।
उपमहाद्वीप में कई समाज ब्राह्मण द्वारा निर्धारित सामाजिक नियमों और अनुष्ठानों का पालन नहीं करते थे, न ही वे कई असमान वर्गों में विभाजित थे। इस तरह के समाजों को प्रायः आदिवासी समाज कहा जाता है।
खानाबदोश चरवाहे वे लोग होते हैं जो चारे की तलाश में अपने पशुओं के साथ लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, जो लोग कर रहे हैं. वे दूध और अन्य पशु सम्बन्धी उत्पादों पर जीवित रहते हैं, वे अनाज, कपड़ा, बर्तन और अन्य उत्पादों के लिए स्थाई समुदायों के साथ ऊन, घी आदि का विनिमय भी करते हैं।
एक वन क्षेत्र में वृक्षों एवं झाड़ियों को पहले काटा और जलाया जाता है, फसल को राख में बोया जाता है, जब यह क्षेत्र अपनी उत्पादक क्षमता खो देता है। भूमि के अन्य भू-खंड को इसी तरह से साफ़ किया जाता है और फसल को बोया जाता है। इसे स्थानांतरण कृषि कहा जाता है।
आदिवासी समाज की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं:
1 जनजातीय समाज नातेदारी सम्बन्धों द्वारा एकजुट होते हैं।
2 आदिवासी समाज में पुरुषों और समूहों के बीच कोई पदानुक्रम नहीं होता है।
3 आदिवासी समाजों में मजबूत, जटिल, औपचारिक संगठन अनुपस्थित होता है।
4 आदिवासी समाजों में भूमि पर सामुदायिक स्वामित्व होता है।
प्राचीन अहोम राज्य की एक साधारण अर्थव्यवस्था थी, अहोमों का प्राथमिक व्यवसाय कृषि था, उन्होंने आर्द्र चावल की खेती करने का एक नया तरीका ईजाद किया, युद्ध के दौरान लगभग अधिकांश पुरुष सेना में अपनी सेवाएं देते थे। सामान्य स्थिति में वे स्वयं को तटबंधों, सिंचाई प्रणाली के निर्माण और अन्य सार्वजनिक कार्यों के निर्माण में व्यस्त रखते थे।
पंजाब की दो प्रभावशाली जनजातियां थीं :
(क) खोखर जनजाति- यह 13 वीं और 14 वीं सदी में एक प्रभावशाली जनजाति थी।
(ख) गक्खर जनजाति।
कई बड़ी जनजातियां उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में फली-फूली थीं । वे आम तौर पर जंगलों, पहाड़ों, रेगिस्तान और दुर्गम स्थानों में निवास करती थीं।
सुहुंगमुंग अहोम राज्य के वास्तविक निर्माताओं में से एक के रूप में माना जाता है। उसने अपने राज्य की पहली जनगणना करने का बीड़ा उठाया और अपने राज्य के बाहर से विभिन्न वर्गों से कारीगरों को लेकर आया और उन्हें अपने राज्य में प्रतिष्ठापित किया।
शब्द 'खानाबदोश " का अर्थ लोगों के घुमंतू समूह से है जो शिकार, पशु-चारण एवं संग्रहण द्वारा अपना जीवनयापन करते हैं। ये समूह सर्वदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण करते थे एवं ये कुशल घुड़सवार होते थे।
उपमहाद्वीप में कई समाज ब्राह्मण द्वारा निर्धारित सामाजिक नियमों और अनुष्ठानों का पालन नहीं करते थे, न ही वे कई असमान वर्गों में विभाजित थे। इस तरह के समाजों को प्रायः आदिवासी समाज कहा जाता है।
खानाबदोश चरवाहे वे लोग होते हैं जो चारे की तलाश में अपने पशुओं के साथ लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, जो लोग कर रहे हैं. वे दूध और अन्य पशु सम्बन्धी उत्पादों पर जीवित रहते हैं, वे अनाज, कपड़ा, बर्तन और अन्य उत्पादों के लिए स्थाई समुदायों के साथ ऊन, घी आदि का विनिमय भी करते हैं।
एक वन क्षेत्र में वृक्षों एवं झाड़ियों को पहले काटा और जलाया जाता है, फसल को राख में बोया जाता है, जब यह क्षेत्र अपनी उत्पादक क्षमता खो देता है। भूमि के अन्य भू-खंड को इसी तरह से साफ़ किया जाता है और फसल को बोया जाता है। इसे स्थानांतरण कृषि कहा जाता है।
चांदी का टंका,दिल्ली सल्तनत के प्रथम वास्तविक शासक इल्लतुत्मिश द्वारा प्रारम्भ किया गया था, कांसे का सिक्का,मोहम्मद बिन तुगलक द्वारा सांकेतिक मुद्रा के रूप में चलाया गया था।
बर्नियर ने कहा था कि आगरा दिल्ली से बड़ा था, अहमदाबाद एक बड़ा विनिर्माण केंद्र था, मुल्तान, बुरहानपुर, ढाका और राजमहल अपेक्षाकृत बड़े शहर थे, और पटना एक छोटा शहर था।
नील का इस्तेमाल, ऊनी वस्त्रों की रंगाई करने के लिए किया जाता था, विदेशी व्यापारियों के आगमन के साथ नील की मांग में वृद्धि हुई, और यह भारत और यूरोपीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु थी।
कपास विनिर्माण की कुंजी केन्द्रों थे अहमदाबाद में पटना, कैम्बे और गुजरात, खानदेश में बुरहानपुर, बंगाल, कश्मीर, लाहौर और संयुक्त प्रांत, कपास विनिर्माण के मुख्य केन्द्र थे।
मुहम्मद बिन तुगलक ने चांदी के सिक्कों के अभाव की वजह से कांस्य सिक्कों के रूप में सांकेतिक मुद्रा (टोकन मुद्रा) की शुरुआत की थी। इन सिक्कों का मूल्य चांदी के सिक्कों के समतुल्य रखा गया था। अतः व्यापारियों,व्यवसायियों और लोगों ने नकली सिक्कों को ढालना शुरू कर दिया, जिसके कारण अंततः मुहम्मद बिन तुगलक को सांकेतिक मुद्रा का चलन बंद करना पड़ा।
वस्त्र, रंगाई, रेशम बुनाई, शॉल और कालीन बुनाई मध्यकाल के मुख्य उद्योग थे, इसके अलावा, केलिको पेंटिंग, चीनी उद्योग, धातु निर्माण, पाषाण और ईंट का काम, हथियार और कागज उद्योग, वृहद पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों में संलग्न थे।