जब दिन के दौरान भूमि गर्म हो जाती है, इससे सतह के पास की हवा भी गरम हो जाती है और ऊपर उठती है। जबकि ठंडी नीचे ही रहती है और केवल गरम हवा दबाव के साथ ऊपर उठती है। इस प्रकार एक संवहनीय धारा बन जाती है और जब तापमान ओस से नीचे तक पहुँचता है जब बिंदु इकट्ठा होकर बादलों का निर्माण करते हैं।
पृथ्वी की सतह के चारो ओर की वायु को हवा के रूप में जाना जाता है। यह उच्च दबाव के क्षेत्र से कम दबाव के क्षेत्र की और बहती है। जब हवा गर्म होती है, तो वह ऊपर उठती है, और कम दबाव का क्षेत्र पैदा करती है। हालांकि, ठंडी हवा बैठ जाती है और उच्च दबाव का कारण बनती है क्योंकि वहाँ हवा का दबाव नीचे की ओर अधिक होता है जब दो स्थानों में हवा के दबाव के बीच का अंतर अधिक होता है तो हवा दृढ़ता से और तेजी से चलती है।
उपग्रह चित्रो का उपयोग तूफानों की तीव्रता, गति और दिशा को दिखाने के लिए किया जाता है। वे हमें किसी भी क्षेत्र की मौसम की स्थिति के बारे में अधिक सटीकता और विस्तार से बताते है। उपग्रह चित्रों को देख कर भविष्यवक्ता किसी भी क्षेत्र में होने वाले मौसम में परिवर्तन की भविष्यवाणी कर सकते हैं।
1) समताप मंडल की परत पृथ्वी की सतह से ऊपर 50 किमी तक शोभ मंडल तक फैली हुई है।
2) इस परत पर बादल साफ है और मौसम की घटनाए शांत है।
1) धूल अवरोध उतपन्न पैदा करके और आने वाली आतपन को परावर्तित करता है।
2) धूल के कण और जल वाष्प संघनित हो कर बादलों और कोहरे का निर्माण करती है।
जल वाष्प बादल और वर्षा का स्रोत है जो पौधों और जानवरों के लिए नमी प्रदान करता है। यह बारिश, धुंध, बर्फ आदि का निर्माण करके भी जलवायु की स्थितियो निर्धारित करता है। जल वाष्प की मात्रा ध्रुव की ओर भूमध्य रेखा से कम होती है।
1) मध्यम मंडल समताप मंडल के ऊपर है और 80 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है।
2) तापमान इस परत में ऊंचाई के साथ कम हो जाता है।
जब पानी भाप बनकर उड़ जाता है और यह ठंडा होना शुरू होता है। इसके परिणामस्वरूप जल वाष्प पानी की बूंदों के रूप में संघनित होती है। ये बूंदे इकट्ठा होकर बादलों बनती है।
आतपन शब्द से in + sol + ation, से बना है अर्थात ' in' का अर्थ है ‘आना’, ‘sol’ का अर्थ है 'सौर’ और 'ation' का अर्थ है विकिरण। तो आतपन का अर्थ है सूर्य से आने वाली विकिरण।
शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात दोनों गोलार्द्धों में उष्ण कटिबंन्धीय क्षेत्रों में चलते है । इनकी उत्पति तापमान द्वारा मानी जाती है । ये दोनो गोलार्द्धों में लगभग 10 प्रतिशत अक्षांशों पर महासागरीय उष्ण जल में उत्पन्न होते है। इन चक्रवातों के आगमन से पूर्व मौसम उष्ण एवं शान्त होने लगता है। आकाश में धीरे-धीरे श्वेत बादल छाने लगते है। चक्रवात के प्रवेश करते समय बादलों का रंग परिवर्तित हो जाता है। बादलों की गर्जना तथा विद्युत की चमक के साथ घनघोर वर्षा होती है ।
जब तेज हवाए सर्पिल रेखा के रूप में कम दबाव के क्षेत्र की दिशा में बहती है। तो चक्रवात का निर्माण होता है। उत्तरी गोलार्द्ध में हवाऍ घड़ी की विपरीत दिशा में और दक्षिणी गोलार्द्ध में हवाऍ चक्रवात के केंद्र के चारों ओर घड़ी की दिशा में बहती है। प्रतिचक्रवात केंद्र में उच्च दबाव के आसपास के क्षेत्र हवाओं का बहाव है और उत्तरी दिशा में घड़ी की दिशा में घूमता है और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की विपरीत दिशा में दक्षिणावर्त बहती है।
तापमान मुख्य रूप से विभिन्न स्थानो पर अक्षांश में बदलाव, समुद्र से ऊंचाई और दूरी की वजह से भिन्न होता है।
• उच्च अक्षांश वाले स्थानो पर तापमान कम होता है।
• अत्यधिक ऊंचाई पर तापमान कम होता है।
• समुद्र से अधिक दूरी पर उच्च तापमान।
ये रेखाए मानचित्र पर दुनिया की सामान्य मौसम की स्थिति को दर्शाती हैं:
क) समदाब रेखा समान तापमान वाले स्थानों की रेखाएँ हैं।
ख) समताप रेखा समान औसत तापमान वाले स्थानों की रेखाएँ हैं।
ग) समवर्षा रेखा समान औसत वर्षा वाले स्थानों की रेखाएँ हैं।
जब नदी मैदानी क्षेत्रो में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्ही बड़े मोड़ो को विसर्प कहते है।
कभी-कभी नदी अपने तटो से बाहर बहने लगती है। फलस्वरूप निकटवर्ती क्षेत्रो में बाढ़ आ जाती है। बाढ़ के कारण नदी के तटों के निकटवर्ती क्षेत्रो में महीन मिट्टी एवं अन्य पदार्थो का निक्षेपण करती है। ऐसी मिट्टी एवं पदार्थो को अवसाद कहते है। जिससे समतल उपजाऊ बाढ़कृत मैदानों का निर्माण होता है।
नदी के उत्थित तटों को तटबंध कहते है।
गुफाओ के बड़े होते जाने पर इनमे केवल छत ही बचती है जिससे तटीय मेहराब बनते है।
लगातार अपरदन से छत टूट जाती है और केवल दीवारे बचती है इन बचे हुए शेष अंशो को स्टैक कहा जाता है।
समुद्री जल के ऊपर लगभग ऊर्ध्वाधर उठे हुए उँचे शैलीय तटो को समुद्री भृगु कहा जाता है।
समुद्र की लहरे समुद्र के किनारे अवसादों को जमा कर समुद्र तटों का निर्माण करती है।
बाढ़ आने पर नदी के किनारो पर मिट्टी की परत और अन्य सामग्री जमा हो हो जाती है जिसे अवसाद कहा जाता है। ये अवसाद ताजा और बहुत उपजाऊ मिट्टी होते हैं।
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान गैसे, राख, भाप और चट्टानों के टुकड़े बाहर निकलते हैं। धीरे-धीरे इनका और पिघले हुए लावा का ढेर आसपास जम जाता है यह शंक्वाकार पहाड़ी का निर्माण करता है और इसे ज्वालामुखी शंकु के रूप में जाना जाता है।
भूकंप कोई भी प्रमुख भू-आकृति का निर्माण नही करता है। इससे मौजूदा भू-आकृतियों में परिवर्तन हो सकता है। उदाहरण के लिए, यह इमारतों में दरारें पैदा कर सकता है।
प्लेटो की गति दो प्रकार की होती हैं: अभिसरण और विचलन।
क) भू-पर्पटी के नीचे वह स्थान जहाँ कंपन आरंभ होता है, उदगम केंद्र कहलाता है।
ख) उदगम केंद्र के भूसतह पर उसके निकटतम स्थान को अधिकेंद्र कहते है।
स्थलमंडल प्लेटों के घूमने की वजह से भूमि के निर्माण की प्रक्रिया।
नदी – वी-आकार घाटी और डेल्टा
ग्लेशियर - यू-आकार घाटी और हिमोढ़
पवन - छत्रक शैल और रेत के टीले
समुद्र की लहरों - गुफा और समुद्र तट
नदी के जल से दृश्य भूमि का अपरदन होता है। जब नदी किसी खड़े ढाल वाले स्थान से अत्यधिक कठोर शैल या खड़े ढाल वाली घाटी मे गिरती है, तो यह जल प्रपात बनाती है। नियाग्रा का जल प्रपात दुनिया का सबसे बड़ा झरना हैं।
विसर्पो के किनारों पर लगातार अपरदन और निक्षेपण से विसर्प लूप के सिरे निकट आते जाते है। समय के साथ विसर्प लूप नदी से कट जाते है और एक अलग झील बनाते है, जिसे चाप झील कहते है।
जैसे ही नदियाँ समुद्र तक पहुँचती है, पानी बहने की गति कम हो जाती है और नदी असंख्य धाराओं में टूटना शुरू हो जाती है इसे वितरिका कहा जाता है। नदी की गति इतनी धीमी हो जाती है कि यह अपने मलबे का निक्षेपण शुरू कर कर देती है। प्रत्येक वितरिका अपने मुहाने निर्माण करती है। सभी मुहानों के अवसादों के संग्रह से डेल्टा का निर्माण होता है।
समुद्र की लहरे लगातार शैलो से टकराती रहती है जिससे दरार विकसित होती है। समय के साथ ये बड़ी और चौड़ी होती जाती है। इस प्रकार गुफाओं की तरह खोखली चट्टाने बनती हैं। इन्हे समुद्र गुफाऍ कहा जाता है।
ग्लेशियरों नदियों की बर्फ हैं हिमनद अपने नीचे की कठोर चट्टानों से गोलश्मी मिट्टी और पत्थरो का अपरदन कर देती है। हिमनद द्वारा लाए गए पदार्थो का निक्षेपित होकर हिमनद हिमोढ़ का निर्माण करते है।
जब हवा चलती है, तो रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है। जब पवन का बहाव रुकता है, तो रेत गिर कर छोटी पहाड़ी निर्माण करती है, इन संरचनाओं को रेत के टीले कहा जाता है। रेत के टीलों की उत्पत्ति बहुत जटिल है लेकिन इनककी तीन आवश्यक विशेषताऐ हैं:
(1) वनस्पति विहीन क्षेत्रो में आम तौर पर ढीली रेत की आपूर्ति की भरमार होती है।
(2) पवन ऊर्जा के स्रोत रेत के कणो को ले जाने के लिए पर्याप्त है।
(3) एक स्थलाकृति रेत कण जहां अपनी गति खो देते हैं और बहुत अधिक संख्या में एकत्र हो जाते है जैसे झाड़ियाँ, चट्टाने या बाड़।
A.
स्थायी
B. मौसमी
C. स्थानीय
D. पछुवा
लू, भारत की बहुत प्रसिद्ध स्थानीय पवन है। ये गर्म, शुष्क और दमित पवनें हैं। ये मई और जून के दौरान उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बहती हैं।
A.
पश्चिम
से पूर्व
B. पूर्व से पश्चिम
C. उत्तर-पूर्व से उत्तर-पश्चिम
D. दक्षिण-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम
पश्चिमी पवनें पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं।
A.
व्यापारिक
पवन
B. चक्रवाती पवन
C. समुद्री समीर
D. मानसूनी पवन
स्थायी पवनें वे हैं, जो वर्ष भर लगातार निश्चित दिशा में चलती रहती रहती हैं। व्यापारिक, पश्चिमी एवं पूर्वी पवनें स्थायी पवनें हैं।
A.
30ºउत्तर से 35ºउत्तर और 30ºदक्षिण से 35ºदक्षिण
B.
30ºदक्षिण से 35ºदक्षिण
C.
30ºउत्तर से 35ºउत्तर
D.
0ºउत्तर से 35ºउत्तर - 0ºदक्षिण से 35ºदक्षिण
हार्स अक्षांश 30ºउत्तर से 35ºउत्तर और 30ºदक्षिण से 35ºदक्षिण अक्षांशों के मध्य होता है।
A.
क्षोभमंडल
B.
समतापमंडल
C.
बाह्य वायुमंडल
D.
बहिर्मंडल
पायलट हवाई जहाज समतापमंडल क्षेत्र में उड़ाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह परत बादलों एवं मौसम संबंधी घटनाओं से लगभग मुक्त होती है।
A.
समतापमंडल
B. मध्यमंडल
C. बाह्य वायुमंडल
D. बहिर्मंडल
रेडियो प्रसारण बाह्य वायुमंडल में घटित होता है। आयनमंडल जो बाह्य वायुमंडल का भाग होता है, उसका सौर विकिरण द्वारा आयनीकरण होता है। आमतौर पर आयनमंडल बाह्य वायुमंडल और बहिर्मंडल में परस्पर व्याप्त होता है।
A.
वायुमंडल
B. जलमंडल
C. जैवमंडल
D. स्थलमंडल
हवा अनेक गैसों का मिश्रण होती है। कुछ गैसें बड़ी मात्रा में जबकि कुछ अंश के रूप में मौजूद होती हैं। इसमें जल वाष्प और धूल कण भी मौजूद होते हैं, जो बादलों के निर्माण में मदद करते हैं।
A.
आयनमंडल
B. बाह्य वायुमंडल
C. मध्यमंडल
D. समतापमंडल
इस परत में, आण्विक द्रव्यमान के अनुसार गैसें क्रमबद्ध तरीके से परत में होती हैं। बढ़ती ऊँचाई के साथ तापमान में वृद्धि होती जाती है। तापमान सौर गतिविधि पर अत्यधिक निर्भर होता है, और 1500 डिग्री सेल्सियस (2,730 ° F) तक बढ़ सकता है।
A.
भूकंप
B. चक्रवात
C. ज्वालामुखी
D. सूनामी
ज्वालामुखी के विस्फोट से वातावरण में धूल, राख और जहरीली गैसों का भारी मात्रा में उत्सर्जन होता है, जिसके कारण वायु प्रदूषण बढ़ता है|
A.
यूनानी
B. फ्रांसीसी
C. डच
D. जापानी
क्षोभमंडल (Troposphere) के नाम को यूनानी भाषा के शब्द 'ट्रोपोस' से लिया गया है, जिसका अर्थ मोड़ होता है।
A.
स्थायी
पवनें
B. मौसमी पवनें
C. स्थानीय पवनें
D. प्रचलित पवनें
मानसूनी पवनें मौसमी पवनें होती हैं। ये महासागर और महाद्वीप की ताप स्थितियों में भिन्नता के कारण बनती हैं। ये पवनें विभिन्न ऋतुओं में अपनी दिशा बदलती रहती हैं। ये दक्षिण पूर्व एशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में बहती हैं।
A.
तुषार
B.
हिमपात
C.
ओस
D.
बारिश
वर्षण पृथ्वी पर विभिन्न रूपों, जैसे - बारिश, ओले, बर्फ, आदि के रूप में होती है। यह ठोस या तरल रूप में हो सकती है। वर्षण के तरल रूप को वर्षा कहा जाता है।
संवहनीय वर्षा भूमध्य क्षेत्र में आम है।
तापमान जिस पर हवा जल वाष्प के साथ संतृप्त हो जाती है उसे ओस बिंदु कहा जाता है।
हवा की क्षैतिज गति को पवन कहा जाता है।
पवन-वेग-मापी का उपयोग हवा की गति को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।
दबाव के मापने की इकाई 'मिलीबार' (एमबी) है।
यह अलग-अलग स्थानों पर जमीन पर हवा का वजन है। यह तापमान में अंतर के साथ बदलता रहता है।
मौसम के महत्वपूर्ण तत्व हैं:
1.तापमान
2. पवन
3. वर्षा
4. बादल
5. धूप
बारिश की राशि वर्षा मापी यंत्र नामक एक साधन के द्वारा मापी जाती है।
A.
लगुना बीच पर
B.
लक्षद्वीप द्वीपसमूह पर
C.
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर
D.
केरल में
इंदिरा प्वाइंट अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है। यह 2004 में सुनामी के दौरान डूब गया था।
A.
22 मार्च
B.
23 मार्च
C.
24 मार्च
D.
25 मार्च
22 मार्च ‘विश्व जल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है और इस दिन जल संरक्षण की विभिन्न विधियों को प्रबलित किया जाता है।
A.
34
B. 35
C. 36
D. 37
महासागर की औसत लवणता, 35 भाग प्रति हजार ग्राम है।
A.
विघटित लवणों की विशाल मात्रा
B.
सभी औद्योगिक कचरे लवणयुक्त होते है।
C.
लवणीय जानवर
D.
पादप
महासागरों का जल लवणीय होता है क्योंकि इसमें विघटित लवणों की विशाल मात्रा होती है। अधिकांश लवण, सोडियम क्लोराइड या खाने में उपयोग किया जाने वाला नमक होता है।
A.
महासागर
B.
नदी
C.
समुद्र
D.
जल की टंकी
स्वच्छ जल के मुख्य स्रोत नदियाँ, तालाब, झरने एवं हिमनद हैं।
A.
पौधों को घर में रखा जाता है और उन्हें स्वाभाविक रूप से बढ़ने दिया जाता है।
B.
पानी के स्वरुप एवं संचलन में लगातार परिवर्तन
C.
जिसमें पानी सभी ओर फैल जाता है।
D.
जल निस्पंदन
जल चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है।
A.
छोटे, घर के पौधे रखने का कृत्रिम आहाता
B.
बढ़ने और गलने-सड़ने की स्वचालित प्रणाली
C.
मत्स्यालय
D.
सूखी झील
यह छोटे, घर के पौधे रखने का कृत्रिम आहाता होता है। हमारी पृथ्वी एक थलशाला के समान है।
A.
बृहत् ज्वार-भाटा
B.
लघु ज्वार-भाटा
C.
निम्न ज्वार-भाटा
D.
ग्रीष्म ज्वार-भाटा
जब सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी तीनों एक सीध में होते हैं तो इस समय सबसे ऊँचे ज्वार उठते हैं। इस ज्वार को बृहत् ज्वार कहते हैं।
A.
लघु ज्वार-भाटा
B.
बृहत् ज्वार-भाटा
C.
मध्यम ज्वार-भाटा
D.
निम्नतम ज्वार-भाटा
जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है एवं तट से पीछे चला जाता है, तो इसे लघु ज्वार-भाटा कहा जाता है।
A.
हिंदी शब्द
B.
फ्रांसीसी शब्द
C.
जापानी शब्द
D.
संस्कृत शब्द
सुनामी जापानी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ पोताश्रय तरंगें है।
A.
हिंद महासागर
B.
प्रशांत महासागर
C.
आर्कटिक महासागर
D.
अंटार्कटिक महासागर
प्रशांत महासागर की तुलना में हिन्द महासागर में सुनामी कभी-कभी ही आती है। लगभग 90 प्रतिशत सुनामी प्रशांत महासागर में आती हैं।
1. गायन के निकट यह अधिक गहरा है। ब्लैक डीप की अधिकतम गहराई 4,561 फैदम है। (1 फैदम =60 फीट )
2. इसके तल की प्रमुख विशेषता मध्य अटलांटिक कटक है। जो उत्तर से दक्षिण तक फैला है। उत्तर में इसे डाल्फिन कटक और दक्षिण में चैलेंजर कटक कहते हैं। यह टीला सामान्यत: 2 कि.मी. गहरा है, तथा 14,400 कि.मी. लम्बा और 800 कि.मी. चौड़ा है।
महाद्वीपीय मग्न का औसत ढाल 5 डिग्री. का होता है। किन्तु कहीं– कहीं यह 40 डिग्री. तक पहुँच जाता है। इसकी गहराई 200 से 3,600 मीटर तक मानी जाती है, किन्तु इसकी चौड़ाई कम है। समस्त महासागरीय क्षेत्रफल के केवल 8.5 प्रतिशत भाग पर ही मग्न ढाल पाये जाते हैं। अटलांटिक महासागर में 12.4 प्रतिशत, प्रशान्त महासागर में 7 प्रतिशत तथा हिन्द महासागर में 6.5 प्रतिशत भाग पर मग्न ढाल का विस्तार पाया जाता है।
इस महासागर के नितल का क्षेत्रफल 8.24 करोड़ वर्ग कि.मी., औसत गहराई 3,150 मीटर और औसत चौड़ाई 3,560 कि.मी. है। इसका विस्तार s आकृति का है। यह दक्षिण की ओर अधिक चौड़ा तथा उत्तर की ओर संकरा है। इस महासागर की तलहटी अत्यंत विषम और असमान है।
d. बड़ी मात्रा में मछलियाँ पकड़ी जाती हैं।
हिमानिकृत मैदानों के निकट के तट अधिक चौड़े पाये जाते हैं; जैसे न्यूफाउंडलैंड के निकट, उत्तरी सागर, उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, जापान तथा अलास्का के तट। इन तटों पर हिमोढ़ निक्षेप और फियोर्ड पाए जाते हैं। हडसन नदी के मुहाने पर अन्त: केनियन और पर्वत तटों के निकट सैकड़ों मग्न तट पाये जाते हैं।
ढाल के आधार पर समुद्रों के नितल को निम्न भागों में बांटा जा सकता है :
a. महाद्वीपीय मग्न तट
b. महाद्वीपीय मग्न ढाल
c. गम्भीर सागरीय मैदान
d. महासागरीय गर्त
महासागरों की तली भूमि के धरातल की भांति, ऊँची–नीची मानी जाती है। यह जानकार आश्चर्य होगा कि भूमि की ऊँचाई की अपेक्षा महासागरों की गहराई अधिक है। जहाँ उच्चतम शिखर एवरेस्ट की ऊँचाई
इस जलमंडल के अंतर्गत महासागर, सागर, खड़ियां आदि सम्मिलित किये जाते हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में
जो धाराएं ध्रुवों की ओर से विषुवत रेखा की ओर बहती हैं उनके जल का तापमान कम होता है, उन्हें ठंडी धारा कहते हैं | उदाहरण – (i)क्यूराइल की धारा, (ii) लैब्राडोर की धारा, तथा (iii) अटलांटिक ड्रिफ्ट |
A.
अपरदन
B.
अपक्षय
C.
उन्नयन
D.
निक्षेप
अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें कुछ कारकों द्वारा अपक्षयी कण एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाए जाते हैं।
A.
ओ तरंगें, एम तरंगें, आर तरंगें
B.
क्यू तरंगें, एन तरंगें, ओ तरंगें
C.
पी तरंगें, एस तरंगें, एल तरंगें
D.
ए तरंगें, बी तरंगें, सी तरंगें
भूकंपीय तरंगों के तीन प्रकार पी तरंगें अथवा अनुदैर्ध्य तरंगें, एस तरंगें अथवा अनुप्रस्थ तरंगें, और एल तरंगें अथवा पृष्ठीय तरंगें होती हैं।
A.
2 या उससे कम
B.
3 या उससे कम
C.
4 या उससे कम
D.
5 से ऊपर
भूकंपलेखी पर जिस भूकंप की तीव्रता 5.0 होती है, वह वस्तुओं के गिरने से क्षति पहुँचा सकता है। 6.0 तीव्रता का भूकंप बहुत शक्तिशाली और 7.0 तीव्रता का भूकंप सर्वाधिक शक्तिशाली समझा जाता है।
A.
रिक्टर स्केल
B.
मार्केली स्केल
C.
ब्रिटिश स्केल
D.
मेट्रिक स्केल
भूकंप की तीव्रता मार्केली स्केल पर मापी जाती है। यह स्केल 1 से 12 तक की संख्या प्रदान करता है। प्रत्येक संख्या का विशेष अर्थ होता है।
A.
भूकंपलेखी
B.
क्रेस्कोग्राफ़
C.
रेक्टोग्राफ़
D.
बैरोमीटर
भूकंपलेखी एक यंत्र होता है जो पृथ्वी के अंदर भूकम्पीय गतिविधियों के मापन में सहायता करता है।
A.
अधिकेंद्र
B.
भूकंपीय बिंदु
C.
भ्रंश सतह
D.
उद्गम केंद्र
भू-पर्पटी के नीचे वह स्थान जहाँ कंपन्न आरंभ होता है, उद्गम केंद्र कहलाता है। शब्द अधिकेंद्र उस बिंदु को संदर्भित करता है जो उद्गम केंद्र के भू-सतह पर उसके निकटतम होता है।
A.
पृथ्वी की प्लेटें गति करती हैं।
B.
पवनों का तेज बहाव होता है।
C.
पिघले हुए पदार्थ अचानक निकलते हैं।
D.
सूर्य की किरणें अधिक गर्म हो जाती हैं।
ज्वालामुखी भू-पर्पटी पर खुला एक छिद्र होता है, जिससे पिघले हुए पदार्थ अचानक निकलते हैं।
A.
पवन
B.
हिमनद
C.
नदी
D.
भूकंप
बालू टिब्बे का निर्माण पवन के कार्य से होता है। पवनें बालू के कणों को उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाती हैं और उन्हें वहीं निक्षेपित कर देती हैं।
A.
पिघला हुआ मैग्मा
B.
वनों की कटाई
C.
वर्षा
D.
ज्वालामुखीय गतिविधियाँ
पृथ्वी के अंदर पिघले हुए मैग्मा की गति के कारण स्थलमंडलीय प्लेटें स्थानांतरित होती रहती हैं।
A.
अंतर्जनित बल
B.
कॉरियोलिस बल
C.
सशत्र बल
D.
वायुमंडलीय बल
पृथ्वी की गति अंतर्जनित बल एवं बहिर्जनित बल के कारण होती है।
A.
ड्रमलिन
B.
तलछट
C.
टिब्बे
D.
हिमोढ़
हिमोढ़ मैदानी इलाकों में प्रवेश करने से पहले पर्वत के अंत में हिमनदों के द्वारा गठित निक्षेपित विशेषता है।
A.
अंतर्जनित बल
B.
बहिर्जनित बल
C.
कोरिओलिस बल
D.
गुरुत्वाकर्षण बल
पर्वत गठन प्लेट विवर्तनिक से सम्बंधित होता है। वलन, भ्रंश, ज्वालामुखीय क्रियाकलाप, आग्नेय अतिक्रमण और कायांतरण, अंतर्जनित प्रक्रिया के भाग हैं जो पर्वत गठन के लिए उत्तरदायी हैं।
A.
नदी
B.
ज्वालामुखी
C.
पवन
D.
हिमनद
बल जो पृथ्वी के आंतरिक भाग में घटित होते हैं उन्हें अंतर्जनित बल कहते हैं। उदाहरण: ज्वालामुखी, भूस्खलन और भूकंप।
ज्वालामुखी भू-पर्पटी पर खुला एक ऐसा छिद्र होता है, जिससे पिघले हुए पदार्थ अचानक निकलते है।
स्थलमंडलीय प्लेटों के गति करने पर पृथ्वी की सतह पर कम्पन होता है। यह कंपन पृथ्वी के चारो ओर गति कर सकता है। इस कम्पन को भूकम्प कहते है।
अधिकेंद्र से कम्पन बाहर की ओर तरंगो रूप में गमन करती है। अधिकेंद्र के निकटतम भाग में सर्वाधिक हानि होती है एवं अधिकेंद्र से दूरी बढ़ने के साथ भूकंप की तीव्रता धीरे-धीरे कम होती जाती है।
भूकंप की भविष्यवाणी की सामान्य विधि पशुओं के व्यवहार का अध्ययन है। उदाहरण के लिए तालाबों में मछली का उत्तेजित होना और सांप सतह पर आ जाते हैं।
भूकम्प का मापन एक यंत्र से किया जाता है, जिसे भूकम्पलेखी कहते है। भूकम्प की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है।
नदी यहाँ पर विसर्प बना रही है।
दो बाहरी ताकते अपक्षय और अपरदन हैं।
(1) पृथ्वी की सतह पर शैलो के टूटने से अपक्षय की क्रिया होती है।
(2) भू-दृश्य पर विभिन्न घटको के द्वारा होने वाले क्षय को अपरदन कहते है।
दीर्घ ज्वार की उत्पत्ति पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के एक सीध में आने से होती है| यह स्थिति पूर्णमासी तथा अमावस्या को होती है |
समुंद्र की गहराई के अनुसार भी तापमान में अन्तर पाया जाता है। समुंद्र की ऊपरी परत का औषत तापमान 26.6 डिग्री. होता है। किन्तु 1,0
ii. प्रचलित पवनें : स्थानीय अथवा जलीय पवनें समुद्र जल के तापमान को पर्याप्त रूप से प्रभावित करती हैं। नित्यवाहिनी पवनों के कारण जल में निरंतर गति होती रहती है। जिससे ठंडा जल, गरम जल का स्थान ले लेता है और इस प्रकार उसका तापमान नहीं बढ़ता ।
i. इसका महाद्वीपीय मग्न तट अन्यन्त संकरा है। किन्तु पूर्व की ओर यह चौड़ा हो गया है।
ii. यह कम गहरा और मध्यमवर्तीय भाग छिछला है। जिसके दोनों ओर गहरी सागरीय परत पाई जाती है, जो 3,390 मीटर तक गहरी है।
iii. मध्यमवर्तीय क्षेत्र में टीला फैला हुआ है, जिसके उभरे भाग पर श्रीलंका, मालद्वीप, सिलेबीज, आदि द्वीप स्थित हैं। ये द्वीप समान्यतः प्रवाल और ज्वालामुखी के हैं।
iv. इसकी तट रेखा कटी-फटी है और किनारे पर छोटी–बड़ी कई खड़ियां और बंद सागर पाये जाते हैं।
यह 3,600 मीटर से 5,4
मछलियों के