बुनाई के लिए धागे के दो सेटों का उपयोग किया जाता है ।
कपास के रेशों से बीजों को कंकतन द्वारा पृथक करना कपास ओटना कहलाता है ।
बुनाई और बंधाई का इस्तेमाल तागों से वस्त्र बनाने में किया जाता है। बुनाई तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया है । बंधाई वह प्रक्रिया है जिसमे एक वस्त्र के निर्माण हेतु केवल एक ही तागे का उपयोग किया जाता है।
दो हस्तचालित उपकरण है:
महात्मा गाँधी ने चरखे को लोकप्रिय किया था ।
|
रेशा |
प्राकृतिक/संश्लिष्ट |
|
रुई |
प्राकृतिक |
|
नायलॉन |
संश्लिष्ट |
|
जूट |
प्राकृतिक |
|
एक्रिलिक |
संश्लिष्ट |
असत्य
नही जूट पटसन के पौधे से प्राप्त किया जाता है।
रूई कपास गोलक से प्राप्त की जाती है ।
जूट के रेशे जूट के पौधे के तने से प्राप्त किए जाते है ।
पौधों और जन्तुओं से प्राप्त रेशे प्राकृतिक रेशे कहलाते हैं। रुई

वसा युक्त भोजन का अत्यधिक सेवन करना मोटापे का कारण बनता है। तला हुआ भोजन जैसे समोसा, पूरी, मलाई और घी मोटापे का कारण हैं।
खाद्य की छोटी मात्रा ले और उसमें तनु आयोडीन विलयन की 2 से 3 बुँदे डाले। अगर इसमें नीला काला रंग दिखाई देता है तो ये स्टार्च की उपस्थिति को दर्शाता है।
a) एनिमिया
b) दृष्टि की हानि
c) बेरी-बेरी
d) स्कर्वी
प्रोटीन हमारे शरीर की वृद्धि और मरम्मत में सहायता करता है। हीमोग्लोबिन रक्त में उपस्थित प्रोटीन है।
ग्लूकोज़ सीधे रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है और तुरंत श्वसन के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करता है। इसलिए ये तत्काल ऊर्जा के स्रोत के रूप में जाना जाता है।
1. 1100 कैलोरी
2. दालें और मांस
3. एनिमिया
भोजन के कुछ प्रमुख कार्य हैं-
i. खाद्य शरीर की विभिन्न गतिविधियों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
ii. शरीर की वृद्धि में सहायक है।
iii. यह शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत और प्रतिस्थापन में सहायता करता है।
1. रिकेट्स
2. कबूतरनुमा छाति के साथ मुड़ी हुई टांगें
3. कोड लीवर ऑयल विटामिन D का एक अच्छा स्त्रोत है।
| पोषक तत्व | रोग |
| विटामिन A | |
| विटामिन B1 | |
| कैल्शियम | |
| विटामिन C | |
| प्रोटीन | |
| आयोडीन |
|
पोषक तत्व |
रोग |
|
विटामिन A |
रतौंधी |
|
विटामिन B1 |
बेरी-बेरी |
|
कैल्शियम |
दंत क्षय और कमजोर हड्डियाँ |
|
विटामिन C |
स्कर्वी |
|
प्रोटीन |
क्वाशियोरकॉर |
|
आयोडीन |
घेंघा |
भोजन, जंतु और पादपों दोनों से प्राप्त होता है। जंतुओं से प्राप्त वसा, घी और कोड (मछली) लिवर ऑयल हैं। सरसों का तेल, मूंगफली का तेल पादपों से प्राप्त वसा हैं।
विटामिन
जटिल
कार्बनिक
यौगिक हैं जो
शरीर की वृद्धि
के लिए
आवश्यक होते
हैं। ये
ऊर्जा प्रदान
नहीं करते
हैं।
विटामिन A हमारी
आँखों और
त्वचा को स्वस्थ
रखती है।
विटामिन C शरीर
को रोगों से
लड़ने में
सहायता करता
है।
1. दूध में अत्यधिक प्रोटीन (जिनमें कैसीन अत्यधिक महत्वपूर्ण है) और कुछ मात्रा वसा की होती है। दूध फास्फोरस और कैल्शियम जैसे खनिज पदार्थों जो हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक हैं का समृद्ध स्रोत है। यह एक ऊर्जादायक पेय है जो मांसपेशियों और हड्डियों के निर्माण में और शरीर के विकास में भी सहायता करता है। दूध एक पूर्ण भोजन के रूप में माना जाता है।
2. दुग्ध उत्पाद दही, चीज, बटर, और घी हमारे दैनिक आहार में काम आते हैं।
3. किसी खाद्य को बनाने के लिए आवश्यक पदार्थ, सामग्री कहलाते हैं।
एक परखनली में खड़ी पदार्थ की चोटी मात्रा ले। उसमें पानी की 10 बुँदे डाले और मिलाए। ड्रोपर की सहायता से परखनली में कॉपर सल्फेट विलयन की दो बुँदे डाले और कास्टिक सोड़ा विलयन की दस बुँदे डाले। परखनली को हिलाए और कुछ मिनटों के लिए स्थान पर छोड़ दें। बैंगनी रंग का दिखाई देना खाद्य पदार्थ में प्रोटीन की उपस्थिति को दर्शाता है।
(a) कार्बोहाइड्रेट्स
ऑक्सीज़न,
हाइड्रोजन
और कार्बन से
बना एक यौगिक
है। ये पादपों
में प्रकाश
संश्लेषण की
प्रक्रिया द्वारा
निर्मित
होते हैं
जैसे
ग्लूकोज़।
(b) कार्बोहाइड्रेट्स
हमारे भोजन
में स्टार्च और
शर्करा के
रूप में पाये
जाते हैं।
(c) आयोडीन
वह अभिकर्मक
है जो भोजन
में स्टार्च
का पता लगाने
में उपयोग
होता है।
A.
बुनाई
B.
कताई
C.
बंधाई
D.
ओसाई
रेशो से धागे का निर्माण कताई कहलाता है । इस प्रक्रिया में रूई के एक पुंज से रेशों को खींचकर ऐंठते हैं । इस प्रक्रिया से धागे का निर्माण होता है ।
A.
जूट
B.
नारियल
C.
केला
D.
फ्लेक्स
प्राचीन मिस्रवासी फ्लेक्स के रेशों से बने वस्त्रों का उपयोग करते थे । वे नील नदी के किनारे कपास की खेती भी करते थे और कपास के वस्त्रों का उपयोग भी करते थे ।
A.
पेन्ट
B.
पगड़ी
C.
जैकेट
D.
कमीज़
पगड़ी एक सिर पर पहनने का वस्त्र है यह एक लंबे बिना सिले वस्त्र की बनी होती है और सिर के चारों ओर पहनी जाती है । भारत में यह मुख्यतः राजस्थान और पंजाब में पहनी जाती है ।
A.
जूट
B.
रेयॉन
C.
नाइलॉन
D.
कपास
कपास एक पादप रेशा है । इसका उपयोग डेनिम के निर्माण के लिए किया जाता है जो एक टिकाऊ कपड़ा है । जींस डेनिम की बनी होती है ।
A.
रेयॉन
B.
रेशम
C.
नाइलॉन
D.
कपास
रेयॉन, रेशम और नाइलॉन के रेशे मुलायम होते हैं । कपास के रेशे छिद्रित और खुरदरे होते हैं ।
A.
चमड़ा
B.
रबर
C.
नाइलॉन
D.
प्लास्टिक
नाइलॉन एक संश्लेषित रेशा है जबकि दूसरे नहीं । संश्लेषित रेशे मानव निर्मित रेशे होते हैं जो रसायनों के बने होते हैं ।
A.
नारियल का तेल
B.
मिट्टी का तेल
C.
सिरका
D.
सरसों का तेल
जब सिरका जल में मिलाया जाता है तो यह जल में पूर्णतः मिश्रित हो जाता है |
A.
रबर
B.
लकड़ी
C.
तांबा
D.
प्लास्टिक
समान्यतः धातुएँ चमकदार सतह रखती हैं । तांबा एक कठोर, अपारदर्शी और चमकदार सतह युक्त धातु है ।
A.
वर्गीकरण
B.
गुणों में विभिन्नता
C.
अनुपात
D.
जटिलता
हमारे चारो ओर की वस्तुओं में विविधता पदार्थ के गुणों में भिन्नता के कारण होती है । प्रत्येक पदार्थ एक-दूसरे से अलग होता है । ये सभी अंतर विविधता उत्पन्न करते हैं ।
A.
नमक
B.
चीनी
C.
लकड़ी का बुरादा
D.
नींबू का रस
वे पदार्थ जो जल में घुल जाते हैं जल विलेय पदार्थ कहलाते हैं । अघुलनशील पदार्थ जल में नहीं घुलते हैं । लकड़ी के बुरादे को जब जल में डाला जाता है तो यह नही घुलता है । इसलिए यह जल में अघुलनशील है ।
(i) लोहे की कील
(ii) पत्थर का एक टुकड़ा ।
मेज़ और कुर्सी ।
लोहे के पात्र अपारदर्शी होते हैं ।
समूहन वस्तुओं के समान गुणों के आधार पर उनके समूह बनाने की प्रक्रिया है ।
कील तथा ऐलुमिनियम का पात्र
कुर्सी और मेज दोनों लकड़ी के बने होते है।
जल में घुली हुई ऑक्सीजन जलीय जंतुओं और पौधों के जीवित रहने के लिए आवश्यक होती है क्योंकि वे इसकी सहायता से श्वसन करते हैं ।
(i)
नारियल का
तेल
(ii) मिट्टी का
तेल
लकड़ी, कागज ।
वस्तुओं का समूहन उनके गुणधर्मों में समानता और अंतर के आधार पर किया जाता है ।
वे पदार्थ जो चमकदार सतह रखते हैं चमकदार पदार्थ कहलाते हैं । सोना और चाँदी चमकदार पदार्थों के उदाहरण है ।
(i)
चीनी
(ii) साधारण
नमक
लकड़ी जल से हल्की होती है । इसलिए यह जल पर तैरती है ।
(i)
जल
(ii) काँच
हमें वस्तुओं के व्यवस्थित अध्ययन के लिए वस्तुओं के समूहन की आवश्यकता होती है ।
हवा से भरी प्लास्टिक की गेंद एवं रूई दो कोमल वस्तुएँ हैं ।
रेशों से धागा बनाने की प्रक्रिया कताई कहलाती है । इस प्रक्रिया मे रुई या ऊन के ढेर से रेशे को खींचा और ऐंठा जाता है । इससे रेशे एक दूसरे के पास आकर धागे का निर्माण कर लेते हैं । तकली और चरखा कताई में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण हैं
जूट के निम्न उपयोग है:
1. जूट का उपयोग बोरे तथा मोटे कपडों को बनाने मे किया जाता है।
2. जूट का उपयोग रस्सी तथा कालीन बनाने मे किया जाता है।
3. जूट का उपयोग शॉपिंग बैग बनाने मे भी किया जाता है।
4. उच्च गुणवता की जूट का उपयोग कपडे बनाने मे भी किया जाता है।
5. जूट की चटाई का उपयोग बाढ़ के कटाव को रोकने मे किया जाता है।
जूट के प्रसंस्करण मे निम्नलिखित चरण सम्मिलित होते है:
A.
जल में घुलनशील है ।
B.
जल में डूब जाता है ।
C.
जल में अघुलनशील है ।
D.
जल पर तैरता है ।
जब पानी में सिरका डाला जाता है तो यह इसमें घुल जाता है । अतएव सिरका जल में घुलनशील है ।
A.
लकड़ी
B.
काँच
C.
लोहा
D.
गत्ता
वे पदार्थ जिनमें से वस्तुओं को देखा जा सकता है पारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं । चूंकि हम काँच के पीछे राखी वस्तुओं को देख सकते हैं अतः यह एक पारदर्शी पदार्थ है । अपारदर्शी पदार्थ प्रकाश को अपने में से गुजरने नहीं देते हैं ।
A.
लकड़ी
B.
सोना
C.
कागज़
D.
सल्फर
बहुत सी वस्तुएँ होती है जो चमकती हैं अर्थात वे चमक रखती हैं । पदार्थ जो चमकते हैं चमकीले पदार्थ कहलाते हैं । यहाँ सोना अकेला पदार्थ है जो चमकीला है ।
A.
समूह बनाना
B.
विविधता
C.
व्यवस्था
D.
वितरण
हमारे आस-पास बहुत से पदार्थ पाये जाते हैं | वस्तुओं को उनके सामान्य गुणों के आधार पर समूहित किया जा सकता है |
A.
नींबू का रस
B.
दूध
C.
चीनी का विलयन
D.
सरसों का तेल
सरसों का तेल जल में अघुलनशील होता है और यह जल से हल्का होने के कारण जल के ऊपर तैरने लगता है |
A.
स्पंज
B.
धातु का टुकड़ा
C.
मेज
D.
पेन्सिल बॉक्स
एक स्पंज में वायु से भरे हुए बहुत से छोटे-छोटे छिद्र होने के कारण इसके संपीडित किया जा सकता है | जब हम स्पंज को संपीडित करते हैं तो इसके छिद्रों में भरी हुई वायु बाहर निकल जाती है |
A.
अपारदर्शी
B.
पारदर्शी
C.
पारभासी
D.
तन्य
पारभासी पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जो प्रकाश के कुछ ही भाग को पारगमित होने देते हैं | उदाहरण- तेल लगा हुआ कागज़ |
A.
स्वच्छ जल
B.
वायु
C.
तेल लगा कागज़
D.
धातुएँ
एक पारभासी पदार्थ प्रकाश के केवल कुछ भाग को अपने में से पारगमित होने देता है और इसमें से वस्तुओं को स्पष्टतः नहीं देखा जा सकता है | तेल लगा हुआ कागज़ इसका एक उदाहरण है |
A.
पारदर्शी
B.
अपारदर्शी
C.
पारभासी
D.
कोमल
धातुएँ अपने में से प्रकाश को पारगमित नहीं होने देती हैं | इसलिए धातु का बना पात्र अपारदर्शी होता है |
A.
गत्ते का बॉक्स
B.
चाँदी की चम्मच
C.
सूती कपड़े की कमीज़
D.
लकड़ी की कुर्सी
सामान्यतः धातुओं की सतह चमकदार होती है और चाँदी एक धातु है | इसलिए चाँदी की चम्मच में चमक होती है |
A.
आयरन
B.
प्लास्टिक
C.
स्पंज
D.
लकड़ी
वे पदार्थ जिन्हें आसानी से संपीडित किया जा सकता है कोमल पदार्थ कहलाते हैं जबकि कुछ अन्य पदार्थ जिन्हें संपीडित करना मुश्किल होता है कठोर पदार्थ कहलाते हैं । रुई, स्पंज आदि कोमल पदार्थ हैं और आयरन एक कठोर पदार्थ है ।
A.
सोना
B.
तांबा
C.
कोयला
D.
चाँदी
कोयले की सतह चमकदार नहीं होती है | अतः यह द्युतिहीन होता है |
A.
हीरा
B.
तांबा
C.
लोहा
D.
सोना
हीरा प्रकृति में पाया जाने वाला कठोरतम पदार्थ है |
A.
लकड़ी
B.
लोहे की कील
C.
कागज़
D.
तेल
एक लोहे की कील पानी से भारी होती है और इसलिए यह पानी में डूब जाती है |
A.
मसालों में
B.
सब्जियों में
C.
सूखे मेवों में
D.
फलों में
काजू, खजूर, रेजिन और बादाम को सूखे मेवों में समूहित किया जाता है |
A.
रबर एक प्राकृतिक पदार्थ है ।
B.
रबर सस्ता और आसानी से उपलब्ध है ।
C.
रबर विद्युत का कुचालक है ।
D.
रबर कोमल और लचीला होता है और प्रत्यास्थता का गुण रखता है ।
रबर कोमल और लचीला होता है और प्रत्यास्थता का गुण रखता है । प्रत्यास्थता रबर का वह गुणधर्म है जिसके कारण यह अपना मूल आकार पुनः प्राप्त कर लेता है ।
|
पदार्थ |
विलेयता |
|
नींबू का रस |
विलेय |
|
सरसों का तेल |
अविलेय |
|
नारियल का तेल |
अविलेय |
|
रेत |
अविलेय |
सिलोफ़ेन पेपर पारदर्शी, बटर पेपर पारभासी तथा थर्माकोल और गत्ता अपारदर्शी होते हैं ।
एक अपारदर्शी सफेद कागज पर तेल की कुछ बूंदे डालकर इसे एक पारभासी कागज में परिवर्तित किया जा सकता है ।
1.
असत्य
2. सत्य
3. सत्य
4. असत्य
जल में अघुलनशील दो पदार्थों के नाम बालू एवं मिट्टी का तेल हैं।
2. किसी द्रव (जैसे जल) में ना घुलने वाले पदार्थों को अघुलनशील पदार्थ कहते हैं ।
कठोरता पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण पदार्थ संपीडित होने का विरोध करता है । एक पदार्थ कोमल या कठोर हो सकता है ।
कोमल पदार्थ- वे पदार्थ जिन्हें आसानी से संपीडित किया जा सकता है कोमल पदार्थ कहलाते हैं । उदाहरण के लिए- रूई
कठोर पदार्थ- वे पदार्थ जिन्हें संपीडित करना कठिन होता है कठोर पदार्थ कहलाते हैं । उदाहरण के लिए- लोहा
1. द्युतिवान द्युतिहीन
तांबा लकड़ी, काँच, कागज़, चीनी
2. जल में विलेय जल में अविलेय
चीनी लकड़ी, काँच, कागज़, तांबा
3. पारदर्शी अपारदर्शी
काँच तांबा, लकड़ी, कागज़, चीनी
1. समूहन वस्तुओं की व्यवस्थित जानकारी रखने में सहायक होता है ।
2. यह एक समूह के सभी सदस्यों के बारे में सामान्य जानकारी देता है और दूसरे समूह से भिन्नता बताता है ।
3. यह एक समूह के गुणों का ज्ञान प्रदान करके काम को आसान बना देता है ।
पदार्थों को निम्नलिखित गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है-
(1) भौतिक अवस्था
(2) जल में विलेयता
वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग समूह में रखना समूहन कहलाता है। वस्तुओं को उनके गुणों में समानता एवं असमानता के आधार पर समूहित किया जाता है।
समूहन
के पाँच लाभ।
1. समूहन से
वस्तुओं का
व्यवस्थित
ज्ञान प्राप्त
होता है।
2. समूहन से
एक समूह की
सामान्य
जानकारी
आसानी से
प्राप्त हो
जाती है।
3. समूहन से
एक समूह की
वस्तुओं को
दूसरे समूह
की वस्तुओं से आसानी से
पृथक किया
जा सकता है।
4. दैनिक
जीवन में
समूहन से
वस्तुएँ
सुविधानुसार प्राप्त हो जाती
हैं।
5. समूहन
द्वारा समय
की बचत होती
है।
2. लकड़ी
1. वर्गीकरण
2. पदार्थों
3. लकड़ी, लोहा
4. अपारदर्शी
5. पारदर्शी
A.
निस्यंदक
B.
संघनक
C.
चूल्हे का
D.
मथनी का
चाय से चाय की पत्तियों का पृथक्करण निस्यंदन का उदाहरण है, अतः चाय से चाय पत्ती को पृथक करने के लिए उपयोग किया जाने वाला चालनी (छलनी) एक निस्यंदक का कार्य करता है ।
A.
संघनन में
B.
भारण में
C.
निस्यंदन में
D.
वाष्पीकरण में
जब मटमैले जल में फिटकरी डाली जाती है तो छोटे मिट्टी के कणों का फिटकरी द्वारा भारण हो जाता है और ये बड़े समूह बना लेते हैं । ये बड़े समूह पैंदे में बैठ जाते हैं और स्वच्छ जल प्राप्त होता है ।
A.
चालन
B.
निष्पावन
C.
निस्यंदन
D.
ऊर्ध्वपातन
एक द्रव-ठोस मिश्रण के घटकों को पृथक करने के लिए निस्यंदन का उपयोग किया जाता है जबकि चालन, निष्पावन और ऊर्ध्वपातन का उपयोग ठोस-ठोस मिश्रण को पृथक करने के लिए किया जाता है ।
A.
जल से अभिक्रिया कर लेते हैं ।
B.
जल में घुल जाते हैं ।
C.
भारी हो जाते हैं ।
D.
जल पर तैरने लगते हैं ।
धूल के कण जल में अघुलनशील होते हैं और जल पर तैरने लगते हैं । अतः अशुद्धि के रूप में उपस्थित धूल के कणों को पृथक करना आसान होता है ।
A.
चाय में चाय की पत्ती
B.
फलों के जूस में इसका गूदा
C.
समुद्री जल में नमक
D.
जल में चॉक पाउडर
वे ठोस जो जल में घुले होते हैं उन्हें वाष्पीकरण द्वारा पृथक किया जा सकता है । जल में नमक के मिश्रण को वाष्पीकरण द्वारा पृथक किया जा सकता है जबकि अन्य सभी को निस्यंदन द्वारा पृथक किया जा सकता है ।
A.
निष्पावन
B.
थ्रेशिंग
C.
मथना
D.
चालन
थ्रेशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें डंडियों को पत्थर पर पीटकर दानों को डंडियों से पृथक किया जाता है जबकि निष्पावन का उपयोग पवन की सहायता से गेहूँ को भूसी से पृथक करने में किया जाता है ।
जब हम पटाखों को जलाते हैं तो इनमें विस्फोट होता है और इसके बाद ऊष्मा, प्रकाश एवं धुआँ बाहर निकलता है। इससे कई नए उत्पाद बनते हैं। इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।
(i) रासायनिक परिवर्तन के दौरान पदार्थ के आण्विक संघटन में परिवर्तन होता है |
(ii) रासायनिक परिवर्तन के दौरान या तो ऊष्मा अवशोषित होती है या उत्सर्जित होती है |
(अ) भौतिक परिवर्तन
(ब) रासायनिक परिवर्तन
(स) रासायनिक परिवर्तन
(द) भौतिक परिवर्तन
2. असत्य
3. सत्य
4. सत्य
वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ की अवस्था परिवर्तित हो जाती है लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरण- मोम का पिघलना।
परिवर्तन जिन्हें परिस्थितियों को परिवर्तित कर उत्क्रमित किया जा सकता है, उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
उदाहरणः
(I) बर्फ का पिघलना
(II) रबर बैंड को खींचना