आवर्ती परिवर्तन- वह परिवर्तन जो एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात होता है, आवर्ती परिवर्तन कहलाता है। सूर्य का उगना, हृदय-स्पंदन आदि।
अनावर्ती परिवर्तन- वह परिवर्तन जो एक निश्चित समय अंतराल के बाद पुनः नहीं होता है, अनावर्ती परिवर्तन कहलाता है। उदाहरणः भूकंप, बाढ़ इत्यादि।
(अ) रबर बैंड को खींचना, बर्फ का पिघलना
(ब) दही का जमना, कागज का जलना
|
भौतिक परिवर्तन |
रासायनिक परिवर्तन |
|
पदार्थ के सिर्फ भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है। |
पदार्थ के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है। |
|
इस परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। |
इस परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है। |
|
ये अस्थायी परिवर्तन है | |
ये स्थायी परिवर्तन है | |
(i) अनुत्क्रमणीय परिवर्तन- ऐसे परिवर्तन जिनमें पदार्थ पुनः अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लाया जा सकता है, अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
(ii) रासायनिक परिवर्तन- ऐसे परिवर्तन जिनमें एक या एक से अधिक नये पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाते हैं।
(iii) मानव-निर्मित परिवर्तन- ऐसे परिवर्तन जिन पर हमारा नियंत्रण रहता हो, मानव-निर्मित परिवर्तन कहलाते हैं।
अनुत्क्रमणीय/उत्क्रमणीय
परिवर्तन
1. उत्क्रमणीय
2. उत्क्रमणीय
3. अनुत्क्रमणीय
4. अनुत्क्रमणीय
5. अनुत्क्रमणीय
(अ) वांछित परिवर्तन
(ब) अवांछित परिवर्तन
(स) प्राकृतिक परिवर्तन
(द) अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
(य) (i) भौतिक परिवर्तन प्रायः उत्क्रमणीय होते हैं।
(ii) भौतिक परिवर्तन अस्थायी परिवर्तन होते हैं।
2. तीव्र
3. अवांछित
4. पदार्थों के गुण
5. रासायनिक
A.
अंडाशय
B.
वर्तिकाग्र
C.
वर्तिका
D.
तन्तु
अंडाशय में बीजांड होते हैं जो निषेचन के बाद बीज में परिवर्तित हो जाते हैं और अंडाशय फल में परिवर्तित हो जाती है।
A.
वर्तिकाग्र, दल और पराग कोश
B.
वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय
C.
पराग कोश, तन्तु और वर्तिका
D.
वर्तिकाग्र, अंडाशय, पराग कोश और वर्तिका
स्त्रीकेसर पुष्प का मादा भाग है। इसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय शामिल होते हैं।
A.
स्त्रीकेसर
B.
पुंकेसर
C.
दल
D.
बाह्यदल
स्त्रीकेसर पुष्प का मादा भाग है जो पुष्प का सबसे आंतरिक भाग है।
A.
दल
B.
स्त्रीकेसर
C.
पुंकेसर
D.
बाह्यदल
बाह्यदल रंग में हरे होते हैं और पुष्प का सबसे बाहरी भाग होता है। ये पुष्प की कलिका अवस्था में रक्षा करते हैं।
A.
ग्लूकोज़
B.
वसा
C.
स्टार्च
D.
ग्लाइकोजन
आलू में पत्तियों द्वारा तैयार भोजन स्टार्च के रूप में संग्रहित होता है।
A.
कार्बन डाइऑक्साइड और जल
B.
जल और ऑक्सीज़न
C.
ऑक्सीज़न और नाइट्रोजन
D.
ऑक्सीज़न और कार्बन डाइऑक्साइड
पत्तियों द्वारा भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। यह प्रक्रिया जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होती है।
कमजोर तने
वाले पौधे
सीधे खड़े
नहीं हो सकते
हैं और ये
भूमि पर फैल
जाते हैं,
ऐसे पौधों को
विसर्पी लता
कहते हैं।
उदाहरण अंगूर
की बेल।
पौधे जो आस
पास की
संरचनाओं का
सहारा लेते
हैं और ऊपर
चढ़ते हैं
उन्हें
आरोही कहते
हैं। उदाहरण-
मनीप्लांट,
बीनस्टॉक
आदि।
पौधों की
विशेषताएँ
इस प्रकार
हैं-
• ये
अपने स्थान
से दूसरे
स्थान पर जा
नहीं सकते
हैं।
• ये
अपना भोजन
स्वयं बना
सकते हैं।
• ये
पृथ्वी पर
सजीव हैं जो
प्रत्यक्ष
या अप्रत्यक्ष
रूप से सभी
अन्य जीवों
के लिए भोजन
का निर्माण करने
के लिए
उत्तरदायी
होते हैं।
• सभी
अन्य जीव
पृथ्वी पर
अपने जीवन के
लिए पौधों या
उनके
उत्पादों पर
निर्भर रहते
हैं।
• ये
जीवित वस्तु
मृदा में
विकसित होती
है जहाँ वृद्धि
और विकास के
लिए उन्हें
पोषक तत्व
प्राप्त
होते हैं।
पत्ती तने के एक पर्व से निकली बाहर की ओर फैली हुई पतली अतिवृद्धि है। पत्ती का भाग जो तने से जुड़ा होता है उसे पर्णवृन्त कहते हैं। पत्ती का विस्तृत हरा भाग पर्णफलक कहलाता है। पत्तियों पर रेखाएँ शिरा कहलाती हैं। पत्ती के मध्य मेन मोटी शिरा को मध्य शिरा कहते हैं। पत्तियों पर शिराओं से बनी डिजाइन को शिराविन्यास कहते हैं। अगर डिजाइन जाल के समान होती है तो उसे जालिकारूपी शिरा विन्यास कहते हैं जबकि शिराएँ एक दूसरे के समांतर होती हैं तो उसे समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।

नर भाग − पुंकेसर
मादा भाग − स्त्रीकेसर
A.
जांघ की अस्थि
B.
करोटि की अस्थि
C.
कंधे की अस्थि
D.
भुजा की अस्थि
जांघ की अस्थि या फीमर शरीर की सबसे लंबी, बड़ी और मजबूत अस्थि है।
A.
कांटे
B.
ब्रिस्टल्स
C.
श्लेषमी स्त्राव
D.
फिन्स
ब्रिस्टल्स मांसपेशियों से जुड़े होते हैं जो उनकी जमीन से जकड़ छुड़ाने में सहायता करते हैं।
A.
गिल्स
B.
फिन्स
C.
शल्क
D.
अग्रपाद
फिन्स मछली की आगे की धकेलने की एक श्रृंखला द्वारा तैरने में सहायता करते हैं।
A.
फिन्स
B.
हाथ
C.
पैर
D.
पंख
पक्षी उड़ने में सक्षम होते हैं क्योंकि उनकी हड्डियाँ खोखली और अग्रपाद पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं।
A.
साँप में
B.
मछली में
C.
केंचुए में
D.
घेंघे में
धारारेखित शरीर दोनों सिरों पर से सँकरा आकार होता है। ऐसा आकार मछली में पाया जाता है जो इन्हें जल में आसानी से गमन करने में सहायता करता है।
A.
उड़ने और तैरने
B.
सरकना
C.
ऊंचाई पर चढ़ना
D.
रेंगना
अग्रपाद उड़ने के लिए पंखों में रूपांतरित होता है जबकि पश्चपाद चलने और ऊंचाई पर बैठने में सहायता करते हैं।
A.
अग्रपाद
B.
पश्चपाद
C. पंख
D. अस्थियाँ
पक्षी उड़ सकते हैं क्योंकि उनके अग्रपाद पंखों में रूपांतरित होते हैं। जबकि पश्च पाद चलने में सहायता करता हैं।
A.
बाह्य कंकाल
B.
स्पाइरेकल
C.
एंटीना
D. अग्रपाद और पश्चपाद
कॉकरोच का शरीर बाहरी कंकाल से ढका होता है, जो की विभिन्न ईकाइयों के जुडने से बना होता है। यह बाहरी कंकाल गमन में सहायता करता है।
A.
हृदयी मांसपेशियाँ
B.
वक्ष मांसपेशियाँ
C.
पैरों की मांसपेशियाँ
D.
पंखों की मांसपेशियाँ
वक्ष मांसपेशियाँ मुड़ती हैं, जब कॉकरोच उड़ता है ।
A.
2, 3.
B.
3, 3.
C.
3, 2.
D.
2, 2.
कॉकरोच में चलने के लिए तीन जोड़ी पैर और दो जोड़ी पंख होते हैं, जो उसके वक्ष से जुड़े होते हैं उर उड़ने में सहायता करते हैं।
A.
कवच
B.
करोटि
C.
मेरुदंड
D.
उपास्थि
कवच घेंघे का बाहरी आवरण है। यह एक एकल इकाई है और अस्थियों की नहीं बनी होती और गमन में भी सहायता करती है।
A.
वृद्धि
B.
गमन
C.
पाचन
D.
उत्सर्जन
गमन के दौरान मांसपेशियों में संकुचन और प्रसारण करता है साथ ही एक श्लेषमी पदार्थ स्त्रावित करता है जो गमन में भी सहायता करता है।
A.
केंचुआ
B.
पक्षी
C.
हाथी
D.
मछली
एक केंचुए में कोई अस्थि नहीं होती। इसमें मांसपेशियाँ होती हैं जो प्रसारित और संकुचित होती हैं जिससे गमन में सहायता मिलती है।
A.
मेरुदंड
B.
कूल्हे की अस्थि
C.
कंधे की अस्थि
D.
पसली पिंजर
पसली पिंजर 12 जोड़ी अस्थियों से मिलकर बना होता है जो हृदय और फेफड़ों को सुरक्षा देता है।
A.
कशेरुक दंड
B.
पसली पिंजर
C.
श्रोणि अस्थि
D.
करोटि अस्थि
कशेरुक दंड या मेरुदंड अनेक छोटी-छोटी अस्थियों के जुडने से बना होता है यह मेरुरज्जु को सुरक्षा देती है और पूरे शरीर को सहारा देती है।
A.
कब्जा संधि
B.
घुराग्र संधि
C.
कंदुक खल्लिका संधि
D.
स्थिर संधि
घुरगर संधि वह संधि है जिसमें शरीर के भाग आगे-पीछे और इधर-उधर गति करने में सहायता करते हैं। यह ग्रीवा और कशेरुक दंड के बीच स्थित होती है।
(अ) परखनली के पदार्थ में जल डालेंगे । यदि यह घुल जाता है तो इसमें नमक है । यदि यह नहीं घुलता है तो इसमें चॉक है ।
(ब) लकड़ी के बुरादे एवं चीनी का पृथक्करण निम्न पदों में किया जाता हैः
1) मिश्रण में जल मिलाइये ।
2) मिश्रण में उपस्थित चीनी जल में घुल जाती है, लेकिन बुरादा नहीं घुलता है।
3) विलयन को इसके बाद फिल्टर पेपर से छान लिया जाता है ।
4) छनित्र के रूप में चीनी का विलयन प्राप्त होता है एवं बुरादा फिल्टर पेपर पर ही रह जाता है ।
5) इसके बाद विलयन को गर्म किया जाता है एवं जब जल पूर्णतया वाष्पित हो जाता है तो पीछे चीनी शेष रह जाती है ।
6) इस प्रकार, चीनी एवं लकड़ी के बुरादे को पृथक कर लिया जाता है ।
2. दो
3. समांगी
4. विषमांगी
5. निस्तारण
(अ) असत्य
मंथन विधि का उपयोग द्रव में निलंबित हल्के ठोस कणों को पृथक करने के लिए किया जाता है ।
(ब) सत्य
(स) असत्य
लकड़ी के बुरादे एवं जल के मिश्रण का पृथक्करण निस्यंदन से किया जाता है ।
(द) असत्य
कणों को भारी करके तली में बैठाने की प्रक्रिया को तीव्र करना अवसादन कहलाता है ।
(य) सत्य
(अ) हस्त चयन
(ब) निस्यंदन
(स) अवक्षेप
(द) निस्तारण
(य) निष्पावन
A.
जंतुओं द्वारा उत्सर्जित अपशिष्ट से खाद का बनना
B.
दही का बनना
C.
बर्तनों की सफाई
D.
नदियों में बाढ़ आना
नदियों में बाढ़ आना हमारे लिए एक लाभदायक परिवर्तन नहीं है | इससे जान और माल की हानि होती है इसलिए यह एक अवांछित परिवर्तन है |
A.
गर्म करके
B.
अभिकारकों को पृथक पात्रों में रखकर
C.
पदार्थों को छूकर
D.
पदार्थों को देखकर
परिवर्तन पदार्थों को मिलाकर, उन्हें गर्म करके अथवा बल लगाकर किये जा सकते हैं |
A.
दूध से दही का बनना
B.
ईंधन का जलना
C.
कपड़ों का सूखना
D.
ऋतुओं का बदलना
ऋतुओं का बदलना एक प्राकृतिक परिवर्तन है क्योंकि यह प्रकृति में स्वयं ही होता है |
रासायनिक परिवर्तन स्थायी परिवर्तन होते हैं | इन्हें परिस्थितियों को बदल कर उत्क्रमित नहीं किया जा सकता है |
A.
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
B.
आवर्ती परिवर्तन
C.
भौतिक परिवर्तन
D.
रासायनिक परिवर्तन
एक आवर्ती परिवर्तन वह होता है जो एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात बार-बार होता है । सूर्य प्रतिदिन पूर्व से निकलता है और शाम को पश्चिम में अस्त होता है । अतः यह एक आवर्ती परिवर्तन है ।
A.
कागज़ का जलना
B.
गूँथे हुए आटे से चपाती बनाना
C.
जल से जल-वाष्प का बनना
D.
एक कागज़ को काटकर डिज़ाइन बनाना
जल को वाष्प में परिवर्तित किया जा सकता है और वाष्प को भी पुनः जल में परिवर्तित किया जा सकता है । अतः यह एक उत्क्रमणीय परिवर्तन है ।
A.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
B.
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
C.
आवर्ती परिवर्तन
D.
अनावर्ती परिवर्तन
जब एक क्रियाकलाप के मूल पदार्थों को पुनः प्राप्त किया जा सकता हो तो यह एक उत्क्रमणीय पदार्थ होता है और जब मूल पदार्थों को प्राप्त नहीं किया जा सकता हो यह एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाता है ।
A.
तीव्र परिवर्तन
B.
मंद परिवर्तन
C.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
D.
अनावर्ती परिवर्तन
एक छोटा पौधा बड़े पौधे में विकसित होता है और कुछ वर्षो बाद इस पर फल भी लगने लगते हैं । यह एक मंद परिवर्तन है जो एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन है क्योंकि एक पेड़ पुनः पौधा नहीं बन सकता है ।
A.
आवर्ती परिवर्तन
B.
भौतिक परिवर्तन
C.
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
D.
रासायनिक परिवर्तन
चन्द्रमा की कलाएँ एक आवर्ती परिवर्तन है | इन परिवर्तनों के दौरान चन्द्रमा का आकार घटता और बढ़ता है |
A.
रासायनिक परिवर्तन
B.
वांछित परिवर्तन
C.
आवर्ती परिवर्तन
D.
तीव्र परिवर्तन
आवर्ती परिवर्तन एक परिवर्तन है जिसकी एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात पुनरावृति होती है । उदाहरण- हृदय का धड़कना ।
A.
कागज़ के टुकड़े करना
B.
चॉक का चूर्ण बनाना
C.
लोहे पर ज़ंग लगना
D.
सब्जियाँ काटना
लोहे पर ज़ंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि नया पदार्थ अर्थात ज़ंग बनता है ।
A.
उत्क्रमणीय प्रक्रिया
B.
अनुत्क्रमणीय प्रक्रिया
C.
रासायनिक प्रक्रिया
D.
आवर्ती प्रक्रिया
चीनी को पानी में घोलना एक उत्क्रमणीय परिवर्तन है क्योंकि जल को वाष्पित करके चीनी पुनः प्राप्त की जा सकती है । वाष्पित होने वाले जल को भी ठंडा करके पुनः प्राप्त किया जा सकता है ।
A.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
B.
तीव्र परिवर्तन
C.
अनावर्ती परिवर्तन
D.
आवर्ती परिवर्तन
आवर्ती परिवर्तन वे परिवर्तन होते हैं जो एक निश्चित समय अंतराल के पश्चात होते रहते हैं | हमारे नाख़ून भी एक निश्चित अंतराल से बढ़ते रहते हैं अतः यह एक आवर्ती परिवर्तन है |
A.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
B.
तीव्र परिवर्तन
C.
आवर्ती परिवर्तन
D.
रासायनिक परिवर्तन
ऋतुएँ एक निश्चित अंतराल के पश्चात बदलती रहती हैं अतः यह एक आवर्ती परिवर्तन है |
A.
आवर्ती परिवर्तन
B.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
C.
रासायनिक परिवर्तन
D.
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
पिघली हुई बर्फ को पुनः जमाया जा सकता है और इसीलिए यह एक उत्क्रमणीय परिवर्तन है |
A.
तीव्र परिवर्तन
B.
धीमा परिवर्तन
C.
अनावर्ती परिवर्तन
D.
आवर्ती परिवर्तन
कोयले का निर्माण एक धीमा परिवर्तन है क्योंकि इसमे एक बहुत लंबा समय लगता है ।
A.
B.
C.
केवल
D.
केवल
जब एक गुब्बारे हवा भरी जाती है तो यह अपने प्रत्यास्थता के गुण के कारण फैलकर अपने आकार में वृद्धि करता है ।
A.
आवर्ती परिवर्तन
B.
उत्क्रमणीय परिवर्तन
C.
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
D.
भौतिक परिवर्तन
भोजन का पाचन एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन है । पाचन के दौरान भोजन में कई रासायनिक अभिक्रियाएँ होती है और नए पदार्थ बनते हैं । ये नए पदार्थ वापस मूल पदार्थों में परिवर्तित नहीं हो सकते हैं, अतः यह एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन है ।
A.
वाष्पीकरण
B.
पिघलना
C.
संघनन
D.
जमना
जल के जलवाष्प में परिवर्तित होने प्रक्रिया वाष्पीकरण कहलाती है । जब इस वाष्प को जब ठंडा किया जाता है तो यह जल की बूंदों में परिवर्तित हो जाती है । यह प्रक्रिया संघनन कहलाती है ।
A.
पहले संकुचित और फिर प्रसारित होती है ।
B.
पहले प्रसारित और फिर संकुचित होती है ।
C.
पहले प्रसारित और फिर पिघल जाती है ।
D.
कठोर और भंगुर हो जाती है ।
जब एक धातु को गर्म किया जाता है यह पहले प्रसारित होती है और जब इसे ठंडा किया जाता है यह संकुचित होती है । यह गुण अधिकांश धातुओं द्वारा दर्शाया जाता है और इसका उपयोग लकड़ी के पहिये पर लोहे की रिम चढ़ाने और अन्य स्थानो पर किया जाता है ।
वह परिवर्तन जिसमें कोई नया उत्पाद नहीं बनता है केवल भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरणः मोम का पिघलना।
(i) चंद्रमा की कलाएँ
(ii) हृदय स्पंदन
ज्वालामुखी विस्फोट एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि इन प्रक्रिया में धुआँ, ऊर्जा आदि मुक्त होते हैं ।
(i) काँच की बोतल का टूटना
(ii) अकाल या सूखा
कली के फूल बनने के दौरान एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन होता है क्योंकि एक फूल को पुनः एक कली में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है ।
हाँ, इस परिवर्तन को कागज के हवाई जहाज को खोलकर उत्क्रमित किया जा सकता है ।
लकड़ी के पहिये पर लोहे की रिम कसने के लिए इसे गर्म किया जाता है जिससे इसके आकार में वृद्धि होती है यह भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है |
1. गर्म करना
2. बल लगाना
हम नींबू का आचार बनाते हैं क्योंकि आचार हमारे भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं । इसलिए नींबू का आचार बनना एक वांछित परिवर्तन है ।
पेन्डुलम की गति आवर्ती परिवर्तन का एक उदाहरण है |
आम का पकना एक प्राकृतिक, धीमा एवं उत्क्रमणीय परिवर्तन है।
वह परिवर्तन जिसकी एक निश्चित अंतराल के पश्चात पुनरावृत्ति होती है, आवर्ती परिवर्तन कहलाता है।
रासायनिक परिवर्तन स्थायी होते हैं, क्योंकि इसमें पूर्णतया भिन्न गुणधर्मों वाले नये पदार्थ बनते हैं।
जब दो या अधिक पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया कर नए पदार्थ का निर्माण करते हैं, तो इसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।
बीज का अंकुरण ।
(क) रासायनिक परिवर्तन
(ख) भौतिक परिवर्तन
A.
पर्णफ़लक
B.
वृन्त
C.
पर्णवृन्त
D.
शिरा
पत्ती पर्णवृन्त के माध्यम से तने से जुड़ी होती है जबकि पत्ती का चपटा भाग पर्णफलक कहलाता है।
A.
पहले से ही संग्रहित स्टार्च को हटा देता है।
B.
पौधे को अस्वस्थ बना देता है।
C.
पत्तियों को पीले रंग का बना देता है।
D.
स्टार्च के निर्माण को रोकता है।
यह सूर्य के प्रकाश से पौधे को दूर रख कर स्टार्च के निर्माण को रोकने के लिए किया जाता है।
A.
स्प्रिट
B.
आयोडीन
C.
NaOH
D.
जल
आयोडीन स्टार्च की उपस्थिति का परीक्षण करने के लिए प्रयोग किया जाता है। जब आयोडीन विलयन की बूँदें, सामग्री जिसमें स्टार्च होता उसमें डाली जाती है तो सामग्री नीले-काले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
A.
O2
B.
CO2
C.
H2
D.
N2
प्रकाश संश्लेषण के दौरान पौधे सूर्य के प्रकाश में जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से भोजन बनाते हैं और मनुष्यों तथा जंतुओं के श्वसन के लिए ऑक्सीज़न गैस मुक्त करते हैं।
A.
जड़
B.
तना
C.
कली
D.
पत्ती
वाष्पोत्सर्जन सामान्य रूप से पत्तियों के माध्यम से होता है। यही कारण है कि रेगिस्तान के पौधों जैसे कैक्टस में पत्तियाँ जल की हानि को रोकने के लिए छोटी होती है।
A.
पसीने
B.
वाष्पोत्सर्जन
C.
वाष्पीकरण
D.
संघनन
वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रम है जिसमें पौधों के वायवीय भागों से जल की हानि, वाष्प के रूप में होती है।
A.
समांतर शिरा विन्यास
B.
सरल शिरा विन्यास
C.
जालिकारूपी शिरा विन्यास
D.
अनियमित शिरा विन्यास
शिराओं का डिजाइन जो मध्य शिरा के दोनों ओर जाल जैसा दिखाई देता है वह जालिकारूपी शिरा विन्यास कहलाता है। जबकि समांतर शिरा विन्यास में शिराएँ एक दूसरे के और मध्य शिराओं के समांतर होती हैं।
A.
मध्य शिरा
B.
मध्यम शिरा
C.
मध्य वाहिनी
D.
शिरिका
मध्य शिरा पत्ती के बीच में उपस्थित एक मोटी शिरा है जिससे अन्य शिराओं का जाल निकलता है।
A.
पत्ती
B.
तना
C.
जड़
D.
पुष्प
तना जड़ों से पत्तियों में जल और खनिज़ पदार्थों का संचालन करता है। पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा सम्पूर्ण पौधे के लिए भोजन तैयार करती हैं।
A.
भोजन बनाना
B.
पत्तियाँ रखना
C.
जल और खनिज पदार्थों का अवशोषण
D.
जल का संचालन
जड़े मृदा से जल और खनिज पदार्थों का अवशोषण करती हैं और भूमि से पौधों को जोड़े रखती हैं।
A.
शाक
B.
विसर्पी लता
C.
आरोही
D.
झाड़ी
आरोही वह पौधे हैं जो आस पास के पौधों या अन्य वस्तुओं का सहारा लेते हैं और ऊपर चढ़ जाते हैं।
A.
शाक
B.
झाड़ी
C.
आरोही
D.
वृक्ष
हरे और कोमल तनों के साथ पौधे शाक कहलाते हैं। ये बहुत कम शाखाओं के साथ छोटे होते हैं। झाड़ियों में आधार पर शाखाओं के साथ तना होता है। इनका तना कठोर होता है लेकिन मोटा नहीं होता।
A.
पौधा कमजोर हो जाता है।
B.
अत्यधिक वाष्पोत्सर्जन होता है।
C.
अत्यधिक प्रकाश संश्लेषण होता है।
D.
वाष्पोत्सर्जन नहीं होता है।
एक गर्म गर्मी के दिन में अत्यधिक वाष्पोत्सर्जन होने के कारण पत्तियाँ सुख कर नीचे गिर जाती हैं। इसलिए, पौधों को गर्मी के दिनों में अधिक जल की आवश्यकता होती है क्योंकि अधिकतम जल वाष्पीकरण के द्वारा लुप्त हो जाता है।
A.
रेशेदार जड़े
B.
सहायक जड़े
C.
मूसला जड़े
D.
अपस्थानिक जड़े
पौधे जिनमें जालिकारूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है उनमें मुख्य जड़ को मूसला जड़े कहते हैं जिनसे अनेक छोटी जड़े उत्पन्न होती हैं।
धतूरा ।
पराग कोश पराग कणों का उत्पादन करते हैं जो परागण की प्रक्रिया के लिए वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित हो जाते हैं।
पादपों में गैसीय विनिमय, छोटे छिद्रों द्वारा होता है जो रंध्र कहलाते हैं।
पौधे की मुख्यत: हरी पत्ती प्रकाशसंश्लेषण द्वारा इसका भोजन बनाती है।
पुष्प के मूलभूत भाग बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर हैं।
पौधों के
तीन प्रकार
इस प्रकार
हैं-
1. शाक
2. झाड़ी
3. वृक्ष
जब चाय को छानते हैं तो चाय की पत्ती छन्नी में रह जाती है |
मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों से पृथक किया जा सकता है ।
वायु
हस्त चयन एवं निष्पावन ।
जल वाष्प की द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया, संघनन कहलाती है ।
मलमल का कपड़ा एवं फिल्टर पेपर ।