A.
8 सेमी
B.
16 सेमी
C.
20 सेमी
D.
32 सेमी
समपंचभुज
का परिमाप = 5
एक
भुजा की लंबाई
= 5 x 4 सेमी
=
20 सेमी
A.
B.
C.
D.
दिया हुआ है
वर्ग का क्षत्रफल = 49 वर्ग सेमी
हम जानते हैं वर्ग का क्षत्रफल
= भुजा
भुजा
= 49 वर्ग सेमी
(भुजा)2 = (7)2
इसलिए, भुजा बराबर 7 सेमी
A.
लंबाई
चौड़ाई
B.
(लंबाई
चौड़ाई
) का आधा
C.
2
(लंबाई
चौड़ाई
)
D.
2 (लंबाई + चौड़ाई )
आयत
का क्षेत्रफल
=(लंबाई
चौड़ाई
)
A.
3
भुजा
B.
2
भुजा
C.
4
भुजा
D.
भुजा
भुजा
चूँकि समबाहु
त्रिभुज की तीनों
भुजाएँ बराबर
होती हैं
इसलिए,
परिमाप = तीनों
भुजाओं का योग
= 3
भुजा
A.
2(लंबाई + चौड़ाई )
B.
4 x लंबाई
C.
4 x चौड़ाई
D.
2(लंबाई
चौड़ाई)
आयत का परिमाप =2(लंबाई + चौड़ाई)
A.
B.
C.
D.
समद्विबाहु त्रिभुज में दो भुजाएँ बराबर होती हैं। बराबर भुजाओं में से प्रत्येक 8 सेमी है, तीसरी भुजा =6 सेमी । परिमाप = I भुजा + II भुजा + III भुजा = 8 + 8 + 6 = 22 सेमी
A.
2 गुना
B.
4 गुना
C.
5 गुना
D.
6 गुना.
वर्ग का क्षेत्रफल = (भुजा) x (भुजा) यदि वर्ग की भुजाओं को दो गुना कर दिया जाता है, तब, वर्ग का क्षेत्रफल = (2 x भुजा) x (2 x भुजा) = 4 x (भुजा x भुजा) = 4 गुना पहले का क्षेत्रफल|
A.
24000
B.
20000
C.
8000
D.
6000
वर्गाकार पार्क का परिमाप = 4(भुजा )
= 4(300) मीटर
= 1200 मीटर
अब बाड़ लगाने का व्यय = परिमाप x प्रति इकाई व्यय
=
( 1200 x 20)
=
24000
A.
B.
C.
D.
हम जानते हैं, कि वर्ग का परिमाप = 4(भुजा) इसलिए दिये हुए वर्ग का परिमाप = 4(5) सेमी = 20 सेमी
A.
80 सेमी
B.
125 सेमी
C.
150 सेमी
D.
260 सेमी
परिमाप = 360 सेमी,
लंबाई = 100 सेमी
माना लंबाई = x सेमी,
आयत
का परिमाप =
2(लंबाई + चौड़ाई)
360 = 2(100 + x)
360 = 200 + 2x
2x = 360 – 200
2x = 160
x = 80 सेमी
इसलिए
, आयत की चौड़ाई
= 80 सेमी
A.
B.
C.
D.
दिया हुआ है, आयत का क्षेत्रफल = 240 सेमी 2
तथा, लम्बाई = 20 सेमी
हम जानते हैं कि
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई
चौड़ाई
240 सेमी 2 = 20
चौड़ाई
इसलिए, चौड़ाई = 12 सेमी
वर्ग की भुजा = 5 सेमी
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा × भुजा
= 5
5
= 25 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
त्रिभुज का परिमाप = भुजा 1 + भुजा 2 + भुजा 3. दिया हुआ त्रिभुज एक समबाहु त्रिभुज है, इसलिए इसका परिमाप = 9 सेमी + 9 सेमी + 9 सेमी = 27 सेमी
A.
11 सेमी
B.
15 सेमी
C.
24 सेमी
D.
30 सेमी
ABCD का
परिमाप
= AB +
BC + CD + DA
= 2 + 1
+ 5 + 3
= 11 सेमी
A.
सभी भुजाओं का योग
B.
किन्ही दो भुजाओं का योग
C.
सम्मुख भुजाओं का योग
D.
सभी भुजाओं का गुणनफल
बंद रैखिक आकृति का परिमाप हमेशा इसकी सभी भुजाओं का योग होता है।
A.
7 सेमी
B.
9 सेमी
C.
12 सेमी.
D.
13 सेमी
आयत
का क्षेत्रफल
= 225 वर्ग सेमी
चौड़ाई = 25 सेमी
इसलिए, लंबाई =
A.
.
B.
.
C.
.
D.
.
फर्श का क्षेत्रफल = (510/8.5) = 60 वर्ग मीटर चूँकि, लम्बाई = 8 मीटर अतः चौड़ाई = 60/8 मीटर
A.
48 मीटर
B.
40 मीटर
C.
32 मीटर
D.
24 मीटर
समषट्भुज का परिमाप = 6(भुजा )। इसलिए दिए हुए समषट्भुज का परिमाप = 6(8) मीटर = 48 मीटर





परिमाप = 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 = 16 सेमी
परिमाप = 2 + 2 + 2 + 2 + 2 = 10 सेमी
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा 

वर्ग
का क्षेत्रफल
=
भुजा
भुजा
=
1
1
=
1 वर्ग इकाई
वर्ग
की भुजा की लंबाई =
परिमाप
/4
=
104/4
= 26 मी
आयत की लंबाई = (परिमाप /2) – चौड़ाई
= (64 सेमी /2) – 20 सेमी
= (32 –20) सेमी
= 12 सेमी
त्रिभुज का परिमाप = त्रिभुज की सभी भुजाओं का योग
= 5 + 4 + 3
= 12 सेमी
वर्ग का परिमाप
=
4
भुजा
= 4
13
=
52 सेमी
आयत का परिमाप
= 2
(लम्बाई
+ चौड़ाई)
=2
(
30+10)
= 2
40
=
80 सेमी
एक
व्यक्ति द्वारा
तय की गई दूरी = आकृति का परिमाप
= सभी भुजाओं
का योग
परिमाप = 2 + 10 + 2
+ 10
=
24 सेमी
व्यक्ति द्वारा तय की गई दूरी = 24 सेमी
A.
p=32
B. p=24
C. p=7
D. p=4
दाएँ पक्ष में p=24 रखने पर , 24+4 = 28 जो कि बाएँ पक्ष के बराबर है ।
A.
-4
B.
4
C.
8
D.
12
दिए हुए समीकरण में x = 0, y = 1 तथा z = 2 , रखने पर हमें उत्तर 12 प्राप्त होता है

= (2
02
1) + (3
1
22) - (4
02)
= 0 + (3
4) - 0
= 12
A.
4
B.
4x
C.
-4
D.
-4x
संख्याओं तथा अक्षरों के गुणनफल में कोई सा भी गुणनखंड अन्य गुणनखण्डों के गुणनफल का गुणांक कहलाता है।
A.
2
p
q
q
q
q
B.
2
p
q
q
q
C.
2
p
p
q
q
D.
2
p
p
q
q
q
क्योंकि यहाँ p दो बार तथा q तीन बार है ।
A.
11 + z
B.
11 x 2z
C.
11 + 2z
D.
इनमें से कोई नहीं
z
का दो गुना = 2z
11 + 2z
A.
3ab2c
B.
3a2b2c
C.
3a2bc
D.
3ab2c2
क्योंकि a तथा b दो दो बार आए हैं तथा c एक बार आया है।
A.
लंबाई + चौड़ाई
B.
लंबाई x चौड़ाई
C.
2(लंबाई + चौड़ाई)
D.
2(लंबाई – चौड़ाई)
क्योंकि किसी भी आयत की आमने सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं।
इसलिए , आयत का परिमाप = 2 x ABकी लंबाई + 2 x AD की लंबाई
= 2(l + b)
जहाँ, l तथा b क्रमशः आयत की लंबाई तथा चौड़ाई हैं
A.
1
B.
2
C.
3
D.
4
7 + 3(p + 5) = 31
अर्थात 3p + 22 = 31
अर्थात 3p = 31 – 22 [22 का दाएँ पक्ष में पक्षांतरण करने पर ]
अर्थात 3p =9
या p = 3
A.
5
B.
7
C.
10
D.
12
माना संख्या = x
दिये हुए कथन के अनुसार,
6(x + 5) = 102
x+5 = 17
x = 12
A.
एक पदीय
B.
द्विपदीय
C.
त्रिपदीय
D.
चतुष्पदीय
दिए हुए बीजीय व्यंजक में दो पद विद्यमान हैं । इस प्रकार दिया हुआ बीजीय व्यंजक द्विपदीय है।
A.
xy
B.
x + y
C.
x – y
D.
y – x
x तथा y का अंतर = y – x
(शर्त दी गई है कि y बड़ा है xसे )
A.
एक पदीय
B.
द्विपदीय
C.
त्रिपदीय
D.
चतुष्पदीय
उदाहरण के लिए , x2 - 2xy + y2 त्रिपदीय व्यंजक है, क्योंकि इसमें तीन पद; x2, y2 तथा -2xy.
A.
एक पदीय
B.
द्विपदीय
C.
त्रिपदीय
D.
चतुष्पदीय
उदाहरण के लिए , 5x + 2y द्विपदीय व्यंजक है क्योंकि इसमें दो पद 5x तथा 2y हैं ।
A.
एकपदीय
B.
त्रिपदीय
C.
समान पद
D.
असमान पद
वे पद जिनके अक्षर संख्याओं वाले गुणनखंड x तथा y समान होते हैं समान पद कहलाते हैं।
A.
20, 21 तथा 22
B.
22, 23 तथा 24
C.
24, 25 तथा 26
D.
25, 26 तथा 27
तीन क्रमागत प्राकृत संख्यायें x, x + 1 तथा x + 2
दिया हुआ है , x + (x + 1) + (x + 2) = 75
3x+3 = 75
x = 24, x + 1 = 25 तथा x + 2 = 26
कोई
गुणनखंड या गुणनफल
के गुणनखंडों
का समूह, शेष गुणनखंडों
का गुणांक कहलाता
है।
6xy2 में x का गुणांक
6 y2 है।
को हल कीजिए।

p + 2 = 3
p = 3 – 2 = 1
समीकरण में चर का वह मान जो समीकरण को संतुष्ट करता है समीकरण का हल कहलाता है।
x= 80 को समीकरण x+30 = 50 के बाएँ पक्ष में प्रतिस्थापित करने पर हमें प्राप्त होता है
बायाँ पक्ष = 80+30 = 110
दायाँ पक्ष
इसलिए , x= 80 दिए गए समीकरण को संतुष्ट नहीं करता है ।
इसलिए x= 80 समीकरण का हल नहीं है।
A.
एक
B.
दो
C.
तीन
D.
चार
दी
हुई आकृति
में सममिति
की दो रेखाएँ
हैं एक क्षैतिज
तथा एक
ऊर्ध्वाधर ।
A.
एक
B.
दो
C.
तीन
D.
चार
दी हुई
आकृति में
सममिति की
चार रेखाएँ
हैं ।
A.
एक
B.
तीन
C.
चार
D.
सात
समबाहु त्रिभुज में शीर्ष से गुजरने वाली तथा सम्मुख भुजा पर लम्बवत रेखा, सममिति की रेखा होती है। इसप्रकार समबाहु त्रिभुज में सममिति की तीन रेखाएँ होती हैं ।
A.
3
B.
2
C.
1
D.
0
दी गई आकृति में सममिति की कोई रेखा नहीं है।
A.
एक
B.
दो
C.
चार
D.
सात
दी हुई
आकृति में
सममिति की
चार रेखाएँ
हैं ।
A.
एक
B.
चार
C.
आठ
D.
दस
दी
हुई आकृति
में सममिति
की चार
रेखाएँ हैं ।
A.
चार
B.
छः
C.
आठ
D.
बारह
दी हुई आकृति आठ बिन्दुओं वाला एक सितारा है इसलिए इसमें सममिति की आठ रेखाएँ हैं । चार रेखाएँ सम्मुख बिन्दुओं को जोड़ने वाली तथा चार रेखाएँ उनकी भुजाओं के बीच के कोण को समद्विभाजित करती हुई ।
A.
चार
B.
तीन
C.
दो
D.
एक
एक आयत में सम्मुख भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाले रेखाखण्डों के अनुदिश सममिति की दो रेखाएँ होती हैं ।
A.
कोई रेखा नहीं होती
B.
चार रेखाएँ होती है
C.
पाँच रेखाएँ होती है
D.
छः रेखाएँ होती है
एक समपंचभुज में सभी भुजाएँ समान होती हैं इसलिए इसमें सममिति की पाँच रेखाएँ होती हैं।
A.
चार
B.
तीन
C.
दो
D.
एक
दी
हुई आकृति
में सममिति
की एक रेखा
है।
B =
C = 50
, तब इसमें सममिति की रेखाओं की संख्या है
A.
0
B.
1
C.
2
D.
3
त्रिभुज ABC में सममिति की केवल एक रेखा है, जो कोण BAC की समद्विभाजक है।
A.
लम्ब
B.
समांतर
C.
रेखा
D.
कोण
लम्ब समद्विभाजक एक रेखाखण्ड के लिए सममिति की रेखा की तरह व्यवहार करता है।
A.
तीन
B.
दो
C.
एक
D.
सममिति की कोई रेखा नहीं
दिया हुआ
त्रिभुज एक
समद्विबाहु
त्रिभुज है ।
समद्विबाहु
त्रिभुज में सममिति की
केवल एक रेखा
होती है।
A.
दो
B.
चार
C.
छः
D.
आठ
दी हुई
आकृति में
सममिति की छः
रेखाएँ हैं ।
A.
एक
B.
तीन
C.
पाँच
D.
सात
दी हुई आकृति में सममिति की एक रेखा है।
हमें
परिणामी
आकृति
निम्नवत
प्राप्त
होती है :

हाँ, यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है।

उपरोक्त आकृति में सममिति की कोई रेखा नहीं है ।
असत्य। आकृति में सममिति की एक से अधिक रेखाएँ भी हो सकती हैं । उदाहरण के लिए: वर्ग में सममिति की 4 रेखाएँ होती हैं।
यहाँ सममिति की कोई रेखा नहीं है क्योंकि ऐसी कोई रेखा नहीं है जो आकृति को दो अर्ध सर्वसम भागों में विभाजित करती हो।
यह रेखा सममिति की रेखा या सममिति का अक्ष कहलाती है।
सममिति की रेखा के दोनों ओर आकृति को पूरा करने पर, हमें प्राप्त होता है

दी हुई आकृति सममितीय है क्योंकि उसमें सममिति की पाँच रेखाएँ हैं ।
श्यामपट्ट, कैंची, ट्रैफिक लाइट, विद्युत बल्ब इत्यादि।

बिंदुवत
रेखा सममिति
की रेखा है।

सत्य

चूँकि, AB = AC, इसलिए त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है। इसलिए इसमें सममिति की एक रेखा है।
जैसा कि हम देख सकते हैं कि आकृति सममिति के अक्ष के दोनों ओर सर्वसम है, इस प्रकार यह सममितीय है।
सममिति की रेखा के अनुदिश आकृति को पूरा करने पर, हमें प्राप्त होती है:

सममिति के दैनिक जीवन में बहुत से अनुप्रयोग हैं जैसे कला , डिज़ाइन बनाने ,वास्तु, टेक्सटाइल, तकनीक, ज्यामितीय आलेखन, रंगोली इत्यादि में।
यहाँ
सममिति की दो
रेखाएँ हैं
जैसा कि नीचे
के चित्र में
दर्शाया गया
है:

परावर्तन सममिति में बनी आकृति, समान शक्ल, आकार और कोण की होती है लेकिन इसका स्वरूप उल्टा हो जाता है। इसलिए दो प्रतिबिंब आपस में एक दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब जैसे दिखाई देते हैं।
(a) (b) (c) (d)

आकृति
1में
सममिति है,
जबकि
आकृति 2 में
कोई सममिति
नहीं है।
आकृति
सममितीय है।



1.

सममित अक्षों की संख्या = 1
2.

सममित अक्षों की संख्या= 4
3.

सममित अक्षों की संख्या = 2
(i) सममित रेखा
(ii) आकार और कोण
(iii) असीमित

दी हुई आकृति को रेखा l1 के सापेक्ष मोड़ने पर दोनों ही भाग एक दूसरे को पूर्णतया ढँक लेते हैं, जबकि उसी आकृति को रेखा l2 और l3 के सापेक्ष मोड़ने पर दोनों ही भाग एक दूसरे को पूर्णतया नहीं ढंकते हैं |
अतः रेखा l1 दी हुई आकृति के लिए सममित रेखा होगी |
माना दो बिंदु A और B हैं । 6 सेमी लम्बाई का हम एक रेखाखण्ड AB खींचते हैं । फिर हम इसका लम्ब समद्विभाजक खींचते हैं । लम्ब समद्विभाजक ही सममिति की अभीष्ट रेखा है ।

(a)वृत्त के किसी व्यास का नाम दीजिए
'सेटस्क्वेयर ' दो प्रकार के होते हैं । एक प्रकार के सेटस्क्वेयर में शीर्षों पर 45°, 45°, 90° के कोण होते हैं जबकि दूसरे प्रकार के सेटस्क्वेयर में शीर्षों पर 30°, 60°, 90° के कोण होते हैं।
पद 1: एक रेखा l खींचिए । रेखा l पर एक बिंदु अंकित कीजिए ।

पद 2: परकार के नुकीले सिरे को पटरी के शून्य चिन्ह पर रखिए । इसे खोलकर पेंसिल पॉइंट को 3. 9 सेमी पर रखिए ।
पद 3: सावधानी पूर्वक परकार के खुले हुए भाग को बिना बदले , पोइन्टर को A पर रखिए और l में B पर एक चाप काटिए ।
पद 4:
अभीष्ट
लम्बाई का एक रेखा
खंड है ।

अभीष्ट आकृति को नीचे दर्शाया गया है, आकृति को देखने पर हमें प्राप्त होता है कि रेखा खण्ड समकोण पर मिलते हैं।
वृत्त खींचने के लिए हमें परकार की जरूरत है।

4.3 सेमी त्रिज्या का वृत्त खींचने के लिए हमें एक परकार की आवश्यकता है ।
पद 1 : अभीष्ट त्रिज्या 4.3 सेमी के लिए परकार को खोलिए ।
पद 2 :वृत्त के केंद्र को दर्शाने के लिए महीन पेंसिल से एक बिंदु अंकित कीजिये । इसको O.नाम दीजिये ।
पद 3 :परकार की नोंक को O.पर रखिये ।
पद 4 :वृत्त को खींचने के लिए परकार को धीरे धीरे घुमाइए । एक ही बार में पूरा चक्कर घुमाइए।

पद
पद
को A पर काटता है।
पद
बिन्दु पर काटता है।
पद
