के कोण रचना कीजिये । इसका कोण का समद्विभाजक ज्ञात कीजिये ।
पद
बनाइए ।
पद 2: A को केन्द्र मनाकर
प्रतिच्छेद बिन्दुओं को
पद 3: B को केन्द्र मनाकर
एक चाप लगाइये।
पद 4: C को केन्द्र मनाकर उसी त्रिज्या
माना दोनों चाप


कीजिए।

पद 1: एक रेखाखण्ड
= 6.2 सेमी लंबाई का खींचिए।
पद 2: A को केन्द्र लेकर, परकार की सहायता से
, की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर एक वृत्त बनाइए।
पद 3: B को केन्द्र लेकर तथा पहले वाली त्रिज्या लेकर एक और चाप लगाइए,
जो पहले वाले वृत्त को बिन्दुओं C और D पर काटते हैं ।
पद 4:
को मिलाइए। जो
को O पर काटता है । ध्यान दीजिए O,
का
मध्य बिन्दु है तथा
AOD =
BOD = 90
.
इस प्रकार
,
का लम्ब समद्विभाजक है।
खींचिए ।
को बिना नापे
के बराबर नाप
का रेखाखण्ड बनाइए।
पद 1: किसी
भी लंबाई का एक
रेखाखण्ड
खींचिए।
पद
2: परकार
के नुकीले सिरे
को
C पर तथा पेंसिल
वाले सिरे को
D पर स्थिर कीजिए।
अब परकार का यह
खुला हुआ भाग
के बराबर लंबाई का है।
पद 3 : एक रेखा l खींचिए तथा इस पर एक बिन्दु A अंकित कीजिए। परकार के खुले हुए भाग में बदलाव किए बिना नुकीले सिरे को A पर रखिए।
पद
4 : एक
चाप लगाइए जो l को B पर काटता
है। अब,
की लंबाई
के बराबर है।
रचना के पद

अधिक लम्बाई लेकर दो चाप लगाइए।
रचना के पद

2. A और B केन्द्र मानकर
3. ये चाप क्रमशः P और Q बिन्दुओं पर काटते हैं।
4. P और
5. AB का अभीष्ट लम्ब समद्विभाजक PQ है ।
पद 1: 12.8 सेमी लम्बाई का एक रेखाखंड
खींचिए।
पद 2: A को केन्द्र मानकर परकार की सहायता से
की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर
के दोनों ओर चाप लगाइए ।
पद 3: B को केन्द्र मानकर उसी त्रिज्या से पहले वाले चाप को C और D
बिन्दुओं पर काटिए।
पद 4:
को मिलाइये .यह
को O पर काटता है । नोट कीजिये O,
का मध्य बिंदु है। इस प्रकार
,
का लंब समद्विभाजक है ।

इस प्रकार,
चार बराबर भागों विभाजित हो जाता है


खींचिए । इस पर कोई बिंदु P लीजिए । P से होकर जाने वाला
पर एक लम्ब खींचिए ।
पद 1 : एक रेखा l दी हुई है और इस पर कोई बिंदु P है ।
पद 2 : P को केन्द्र मानकर, एक चाप लगाइये जो l को A और B बिन्दुओं पर प्रतिच्छेदित करता है ।
पद 3 : A और B को केन्द्र मानकर उसी त्रिज्या से दो चाप लगाइये जो AB को दूसरी तरफ माना Q पर काटता है
पद 4 : PQ को मिलाइये । इस प्रकार PQ, l के लम्बवत है ।
∴ PQ ⊥ l.

A. कान
B. आँखें
C. हाथ
D. सिर
हाथ से लिखा जाने के कारण इन्हें पांडुलिपि कहा जाता है।
A. किरथर की पहाड़ियों में
B. गारो की पहाड़ियों में
C. चंबल
D. अरावली
लोगों ने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालतू बनाना एवं गांवों में रहना भी शुरू कर दिया था।
A. मगध
B. पटना
C. हस्तिनापुर
D. हड़प्पा
प्रश्न स्पष्टीकरण: मगध के शासक बहुत शक्तिशाली थे और उन्होंने गंगा के पास एक विशाल राज्य की स्थापना की थी।
A. कागज़
B. ताड़ का पत्ता
C. पेड़ की छाल
D. कपडे पर
शब्द ' पांडुलिपि ' शब्द ' मनु ' हाथ अर्थ से आता है और कभी-कभी पेड़ की विशेष रूप से तैयार की छाल पर लिखा गया था।
A. हिंदोस
B. भारत
C. एशिया
D. मगध
यूनानियों और ईरानीयों द्वारा भारत को हिंदोज़ अथवा इंडोज़ के नाम से संबोधित किया गया था ।
|
a. जैसा
कि दर्शाया
गया है की इस
आकृति में
सममिति की
केवल एक रेखा
है । |
हाँ, दी गई आकृति सममितीय है। इसमें सममिति की निम्नांकित रेखाएँ हैं।

हमें दी हुई आकृति के सममित दूसरे अर्द्ध भाग की रचना करनी है। रचना के पद निम्नलिखित हैं ।
1.क्षैतिज रेखा की लम्बाई को नापिए और इसे छेदित रेखा के दूसरे ओर उतनी ही लम्बाई तक आगे बढ़ाइए ।

2. ऊर्ध्व रेखा की लम्बाई को नापिए और परावर्तित क्षैतिज रेखा के अंत्य बिंदु से उतनी ही लम्बाई तक खींचिए ।

3. दो रिक्त बिन्दुओं को मिलाकर आकृति को पूरा कीजिए ।

इस प्रकार दी हुई आकृति के सममित अन्य अर्द्ध भाग की रचना होती है ।
| आकृति | कच्ची आकृति | सममिति की रेखाओं की संख्या |
| समबाहु त्रिभुज | ||
| वर्ग | ||
| आयत | ||
| वृत्त |
|
आकृति |
कच्ची आकृति |
सममिति की रेखाओं की संख्या |
|
समबाहु त्रिभुज |
|
3 |
|
वर्ग |
|
4 |
|
आयत |
|
2 |
|
वृत्त |
|
अनंत |
| (a) | (b) | (c) | (d) |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
दर्पण प्रतिबिंब बनाने पर, हमें निम्न आकृतियाँ प्राप्त होती हैं :
| (a) | (b) | (c) | (d) |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
A.
परकार
B.
चाँदा
C.
दोनों
D.
उनमें से कोई नहीं
परकार तथा चांदे दोनों का उपयोग 900 कोण की रचना में करते हैं ।
A.
70
, 70
, 70
.
B.
90
, 40
, 50
.
C.
105
, 40
, 35
.
D.
110
, 50
, 20
.
क्योंकि
इस स्थिति में
त्रिभुज के कोणो का योग
180
के
बराबर नहीं है
।
70
+ 70
+ 70
180
A.
छेदक रेखा
B.
त्रिज्या
C.
स्पर्श रेखा
D.
स्पर्श बिन्दु
वह रेखा जो वृत्त को दो भिन्न भिन्न बिन्दुओं पर प्रतिच्छेदित करती है, छेदक रेखा कहलाती है।
A.

B.

C.

D.

वह त्रिभुज जिसके सभी कोण न्यूनकोण होते हैं न्यूनकोण त्रिभुज कहलाता है।
A.
अन्तः में
B.
बाह्य में
C.
सीमा रेखा पर
D.
केन्द्र पर
बिन्दु A दी हुई आकृति के अन्तः भाग में स्थित है.
A.
MN.
B.
AO.
C.
BC.
D.
GF.
दी हुई आकृति में, BC वृत्त का व्यास है।
A.
(i)
केवल
B. (ii) केवल
C. (iii) केवल
D. (i) तथा (ii) दोनों
वह कोण जिसका माप 90 अंश से कम होता है लेकिन 0 अंश से अधिक होता है, न्यून कोण कहलाता है। .
A.
पैमाना
B.
विभाजक
C.
सैटस्क्वायर
D.
परकार
परकार का उपयोग वृत्त को बनाने के लिए किया जाता है।
A.
पटरी
B.
परकार
C.
सेट स्क्वायर
D.
चांदा
पटरी का उपयोग रेखाखण्डों को खींचने और उनकी लंबाई नापने के लिए किया जाता है।
A.
BC
B.
AO
C.
ED
D.
MN
चूँकि MN वृत्त को केवल एक बिन्दु P पर स्पर्श करता है, इसलिए यह एक स्पर्श रेखा है
A.
16 सेमी
B.
10 सेमी
C.
8 सेमी
D.
4 सेमी
चूंकि, व्यास = 2
त्रिज्या
इसलिए,त्रिज्या= 8 सेमी(दिया
हुआ है, व्यास
= 16 सेमी)
A.
पटरी
B.
चांदा
C.
विभाजक
D.
सैट स्क्वायर
कोणों को खींचने और मापने के लिए चांदे का उपयोग किया जाता है।
का
कोण है
A.
(
i) केवल
B. (ii) केवल
C. (iii) केवल
D. (i) तथा (ii) दोनों
आकृति (i) में 60 अंश को समद्विभाजित करने पर 30 अंश प्राप्त होता है।
A.
परकार
का
B. विभाजक का
C. सैटस्क्वायर का
D. चांदे का
परकार का का एक सिरा नुकीला होता है तथा इसके दूसरे सिरे पर पेंसिल होती है। यह चापों और वृत्तों को खींचने के काम आता है।
दी हुई आकृति
में बिन्दु C स्थित है
A.
अन्तः में
B.
बाह्य
C.
भुजाओं पर
D.
शीर्ष पर
बिन्दु C आकृति के बाहरी भाग में स्थित है।
A. सिंधु
B. गंगा
C. कृष्णा
D. नर्मदा
करीब 4700 वर्ष पूर्व कुछ प्राचीनतम शहरों का विकास सिंधु और उसकी सहायक नदियों के तट पर हुआ था।
A. पुस्तकालय।
B. संग्रहालय।
C. मंदिर।
D. विद्यालय।
कई पांडुलिपियों को कीड़े-मकोड़ों ने खा लिया है तो कुछ नष्ट हो चुकी हैं। इनमें धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं, राजाओं के जीवन, चिकित्सा और विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों का वर्णन किया गया है।
A. उपलब्धता।
B. धार्मिक विश्वास।
C. लोगों का आहार।
D. बलि।
पुरातत्ववेताओं को कई स्रोतों के माध्यम से अतीत के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। ये स्त्रोत प्राचीन समय के लोगों की जीवन शैली के बारे में जानकारी जुटाने में मददगार होते हैं। पशुओं की हड्डियों से उन्हें प्राचीन समय में लोगों की भोजन की आदतों के बारे में बोध प्राप्त हुआ है।
A. भारत
B. नेपाल
C. भूटान
D. पाकिस्तान
सुलेमान और किरथर पर्वत श्रंखलाओं में बसने वाले पुरुषों और महिलाओं द्वारा करीबन 8000 वर्ष पूर्व गेहूं और जौ जैसी फसलों का उत्पादन किया गया था। उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालतू बनाना आरम्भ कर दिया था और वे लोग गांवों में रहते थे।
A. ताप्ती।
B. गोदावरी।
C. चंबल।
D. नर्मदा।
ये लोग कुशल खाद्य संग्राहक थे। वे इस क्षेत्र में कई सैकड़ों वर्षों तक रहे थे। उन्होंने वनों की अपार संपदा का उपभोग किया और वे कंद-मूल, फलों एवं अन्य वन-उत्पादों का संग्रह करते थे।
A. रावी और ब्यास
B. यमुना और गंडक
C. काबुल और लूनी
D. गोमती और घाघरा
पंजाब मध्ययुगीन फारसी भाषा से लिया गे है जिसमें इसका अर्थ "पांच नदियों की भूमि" बताया गया है। ये पांच नदियाँ हैं - झेलम, चिनाब, रावी, सतलुज, और ब्यास ।
A. 8000 वर्ष पूर्व।
B. 7000 वर्ष पूर्व।
C. 6000 वर्ष पूर्व।
D. 5000 वर्ष पूर्व।
आरंभिक मानव ने सुलेमान और किरथर की पहाड़ियों और उसके आसपास गेहूं और जौ उपजाना आरम्भ किया था। वर्तमान में ये दोनों स्थान पाकिस्तान में स्थित हैं।
A. मगध
B. पटना
C. हस्तिनापुर
D. हड़प्पा
मगध के शासक बहुत शक्तिशाली थे और उन्होंने गंगा के पास एक विशाल राज्य की स्थापना की थी।
A. दो
B. तीन
C. चार
D. पांच
एक खुदा पत्थर रोज़ेटा शिला में पाया गया जिसमें तीन अलग-अलग भाषाओं और लिपि ( ग्रीक और मिस्र के दो रूपों ) हैं।
A. इसाई युग
B. सामान्य युग से पहले
C. सामान्य युग से बाद
D. सामान्य युग
कभी कभी BC के बजाय BCE प्रयोग किया जाता है ।
A. अननो डोमि
B. अनटो डोमिनि
C. अननो डोमिनि
D. अननो डोमिनीक
अननो डोमिनि दो लैटिन शब्द ' अननो ' और ' डोमिनि’ से बना है
A. जोरास्टर
B. जीसस क्राइस्ट
C. गौतम बुद्ध
D. पैगम्बर मोहम्मद
ईसाई धर्म जीसस क्राइस्ट की शिक्षाओं पर आधारित है।
A. एंथ्रोपोलॉजी
B. आर्केऔलोजी
C. इतिहास
D. विज्ञान
आर्केऔलोजी में पुरातत्व इमारतों के अवशेष (पत्थर और ईंट के बने ) , पेंटिंग और मूर्तिकला का अध्ययन किया जाता है ।
A. ऋग्वेद में
B. रामायण में
C. महाभारत में
D. सामवेद में
ऋग्वेद में 3500 साल पहले दिनांकित, संस्कृत में लिखी रचनाएं शामिल हैं।
A.
B. यमुना
C. सरस्वती
D. सिंधू
हमारे देश के लिए दो शब्दों इंडिया और भारत का प्रयोग करते हैं।
A. 2000 वर्ष पूर्व
B. 2500 वर्ष पूर्व
C. 3000 वर्ष पूर्व
D. 3500 वर्ष पूर्व
प्राचीन समय में, गंगा के दक्षिण क्षेत्र मगध के रूप में जाना जाता था।
वेद चार हैं- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद
सहायक नदियाँ छोटी नदियाँ होती हैं जो एक बड़ी नदी में प्रवाहित होती हैं, जैसे कि सोन नदी गंगा की एक सहायक नदी है।
प्राचीन शहर सिंधु नदी के तट पर विकसित हुए थे। बाद में, करीब 2500 वर्ष पूर्व, गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के तट पर एवं समुन्द्र तटों पर शहर विकसित हुए।
पहले के समय में, लेखन पकी हुई मिट्टी, पाषाण अथवा धातु के रूप में अपेक्षाकृत कठोर सतह पर किया जाता था। क्योंकि ये पदार्थ अविनाशी होते थे अतः ये दीर्घकाल तक जीवित रहते थे।
A.
B.
C.
D.
A.
अभीष्ट राशि
B.
दी हुई राशियाँ
C.
इकाई राशि
D.
सभी राशियों का योग
एकिक विधि में, हम सबसे पहले इकाई राशि का मान ज्ञात करते हैं ।
A.
20
B.
25
C.
30
D.
35
7
: 5 :: x : 25
7 / 5 = x / 25
x = (7 / 5)
25
x = 35.
A.
1: 5
B.
2: 3
C.
3: 2
D.
5: 1
कार्यालय में
कर्मचारियों
की कुल संख्या
= 500
पुरुषों की
संख्या = 200 (दिया हुआ
है)
महिलाओं की
संख्या = 500 – 200
=
300
इसलिए, पुरुषों
की संख्या का महिलाओं
की संख्या से अनुपात
= 200 : 300
A.
25
B.
20
C.
15
D.
10
माना तीसरा
पद x है।
6:18 = x : 75
18x = 6
75
x = (6
75)/18
= 25



पहेली हल करने में राहुल द्वारा लिया गया समय = 2 घण्टे
पहेली हल करने में सूरज द्वारा लिया गया समय = 3 घण्टे
अभीष्ट अनुपात = 2:3
असत्य
अनुपात केवल समान
प्रकार की राशियों
के बीच हो सकता
है|
121
: 1331 = (11
11) :
(11
11
11)
= 1 : 11

लड़कियों
की संख्या का कुल
विद्यार्थियो
की संख्या के साथ
अनुपात
= 230 : 432
= 115 : 216




दिए
हुए अनुपात का
न्यूनतम रूप
द्वारा
प्रदत्त है ।
इस
प्रकार
, न्यूनतम रूप = 1
: 3

A.
समांतर रेखाएँ
B.
लम्ब रेखाएँ
C.
संपाती रेखाएँ
D.
कोणीय रेखाएँ
यह आकृति लम्ब रेखाओं को दर्शाती है।
कोण
वाली आकृति है/हैं
(i)
(ii)
(iii)
A.
(i)
केवल
B. ( ii) केवल
C. (iii) केवल
D. (ii) तथा(iii) दोनों
आकृति (i) में 135 अंश के कोण को बनाए के लिए पहले 90 अंश का कोण बनाया जाता है फिर 45 अंश का कोण बनाया जाता है जिससे 135 अंश योग प्राप्त होता है (ii) जबकि आकृति (ii) में 75 अंश के कोण को बनाया गया है तथा आकृति (iii) में (iii) 105 अंश का कोण बनाया गया है।
A.
180
.
B.
170
.
C.
10
.
D.
0
.
कोण
का माप 10
है , क्योंकि बाईं
तरफ मापन 0
से
प्रारम्भ हो जाता
है।
A.
छेदक रेखा
B.
C.
D.
स्पर्श रेखा
वह रेखा जो वृत्त के केवल एक बिन्दु पर मिलती है ,इसकी स्पर्श रेखा कहलाती है।
A.

B.

C.

D. 
आकृतिओं(b) तथा (c)में ,रेखा PQ पर लम्ब नहीं है। दी हुई शर्तों के अनुसार भी बिन्दु R, PQ पर स्थित नहीं है। इसलिए, आकृति(d) सही नहीं है। इसप्रकार आकृति (a) सही विकल्प है
व्यास
वृत्त समतल को तीन भागों में विभाजित करता है
सेटस्क्वेयर का उपयोग, लम्ब तथा समांतर रेखाएँ खींचने में किया जाता है।
किसी भी त्रिज्या का एक वृत्त बनाइए तथा बिन्दुओं A,B तथा C को इसप्रकार अंकित कीजिए कि वे दी गई शर्तों को संतुष्ट करते हैं :

संकेंद्रीय

खण्ड
वृत्त के केन्द्र
रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
वृत्त की त्रिज्या वह रेखाखंड होती है, जिसका एक सिरा केंद्र पर तथा दूसरा सिरा वृत्त पर होता है।
वृत्त पर

एक बिंदु से गुजरने वाले अनंत वृत्त खींचे जा सकते हैं ।
यदि वृत्त के त्रिज्या खंड में दो परस्पर लंबबत त्रिज्याएँ हैं तो यह त्रिज्य खंड वृत्त का चतुर्थांश कहलाता है । वृत्त को चार चतुर्थंशों में विभाजित किया जा सकता है ।

4 .4 सेमी त्रिज्या का वृत्त खींचने के लिए हमें परकार की आवश्यकता है ।
पद 1 : 4. 4 सेमी की त्रिज्या परकार में लीजिए।
पद 2: वृत्त के केन्द्र को महीन पेंसिल से अंकित कीजिये ।इसे O नाम दीजिए।
पद 3: परकार की नोंक को O पर रखिए।
पद 4: वृत्त बनाने के लिए परकार को धीरे धीरे घुमाइए। वृत्त को एक बार में
ही पूरा कीजिए ।

समान केन्द्र तथा भिन्न भिन्न त्रिज्याओं वाले वृत्त संकेंद्रीय वृत्त कहलाते हैं।

दोनों वृत्तों का केन्द्र O है




लम्बाई = 20 मीटर



