




आयत का परिमाप = 2(40 + 10)
= 2(50)
= 100 मीटर
वर्ग का परिमाप = 4(20)
= 80 मीटर
आयत और वर्ग के परिमापो का अनुपात
=100:80
= 5:4


कार्यालय में कुल व्यक्तियों की संख्या = 60
कार्यालय में महिलाओं की संख्या = 35
कार्यालय में पुरुषों की संख्या = 60 –35
= 25
(i) पुरुषों की संख्या का महिलाओं की संख्या से अनुपात
= 25:35
= 5:7
(ii) महिलाओं की संख्या का कुल व्यक्तियों की संख्या
से अनुपात = 35:60
= 7:12
आयत का परिमाप = 2(50 + 30)
= 2(80)
= 160 मीटर
वर्ग का परिमाप = 4(40)
= 160 मीटर
आयत तथा वर्ग के परिमाप का अनुपात
=160:160
= 1:1
A.
क्षैतिज
B.
ऊर्ध्वाधर
C.
विकर्ण
D.
सममिति की कोई रेखा नहीं
आकृति में सममिति की कोई रेखा नहीं है।
A.
एक
B.
दो
C.
तीन
D.
चार
एक वर्ग में सममिति की चार रेखाएँ होती हैं। दो रेखाएँ वर्ग की सम्मुख भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को जोड़ने वाले रेखाखण्डों के अनुदिश तथा दो रेखाएँ विकर्णों के अनुदिश।
A.
शून्य
B.
एक
C.
दो
D.
तीन
समांतर चतुर्भुज में सममिति की कोई रेखा नहीं होती है ।
A.
सममिति की एक रेखा
B.
सममिति की दो रेखाएँ
C.
सममिति की चार रेखाएँ
D.
सममिति की कोई रेखा नहीं
विषमबाहु त्रिभुज में सममिति की कोई रेखा नहीं होती है।
A.
दर्पण दिशा परिवर्तन से
B.
दर्पण परावर्तन से
C.
दर्पण आपतन से
D.
मरीचिका से
सममिति की रेखा दर्पण परावर्तन से निकटता से संबन्धित होती है
A. भेड़
B. बकरी
C. कुक्कुर के पूर्वज
D. सुअर
आदिमानव अपने आश्रय के समीप पशुओं के लिए भोजन रख कर उन्हें पालतू बनाते थे। पालतू कुक्कुर में जटिल सामाजिक पदानुक्रम और व्यवहारिक गुण उनके जंगली पूर्वजों से आए थे।
A. बनवाली और लोथल
B. पैयाम्पल्ली और हल्लूर
C. कुरनूल और भीमबेटका
D. बुर्जहोम
: पुरातत्वविदों को पैयाम्पल्ली और हल्लूर में उत्खनन के दौरान बाजरा उत्पादन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
A. आयताकार
B. वर्गाकार
C. अंडाकार
D. षट्भुजाकार
हर घर में चार या उससे अधिक प्रकोष्ठ(कमरे) थे, जिसमें से कुछ संभवतः भंडारण के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। वे सामान्यतः चौकोर अथवा आयताकार होते थे।
A. 10,000 वर्ष पूर्व
B. 12,000 वर्ष पूर्व
C. 13,000 वर्ष पूर्व
D. 14,000 वर्ष पूर्व
पशुओं को पालतू बनाने की प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति के साथ विश्व के विभिन्न हिस्सों में शुरू हुई थी।
A. कोल्डीहवा
B. गुफकराल
C. बुर्जहोम
D. मेहरगढ़
इन गर्त आवासों को भूमि के नीचे बनाया गया है। इनमें सीढियां भी निर्मित की गई थीं। इसकी संभावना है कि इनका निर्माण ठंडे तापमान से सुरक्षा पाने के लिए किया गया होगा।
A. कश्मीर
B. बिहार।
C. राजस्थान।
D. मध्य प्रदेश।
बुर्जहोम पूर्व हड़प्पा बस्तियों में से एक है जो कश्मीर में स्थित है। इस स्थल से प्राप्त हुए पुरातात्विक साक्ष्यों में गेहूं, दाल, बकरी, भैंस, भेड़ और कुक्कुर शामिल हैं।
'पातलू बनाना' एक प्रक्रिया का नाम है जिसमें लोग पौधों को विकसित करते हैं और पशुओं की देखभाल करते हैं।
गांव एक बस्ती स्थल होता है, जहाँ लोग खाद्य उत्पादन में संलग्न होते हैं।
नवपाषाण काल के पाषाण उपकरण, उदाहरण के लिए, मूसल-ओखली नामक उपकरण अनाज एवं अन्य पादप-उत्पाद को पीसने के लिए प्रयोग में लिया जाता था।
शब्द चाल्कोलिथिक ग्रीक भाषा के खाल्कोस जिसका अर्थ "तांबे" (ताम्र) एवं लिथोस जिसका अर्थ पाषाण होता है से लिया गया है (इसका अर्थ है 'कॉपर एज' )।
नव पाषाण युग के मानव द्वारा मृदा को खोदने हेतु खंती खननी (डिगिंग स्टिक)एवं फसलों की कटाई करने के लिए पाषाण की छड़ का इस्तेमाल किया जाता था ।
कृषि का अभ्यास नव पाषाण युग की अवधि के दौरान आदि मानव ने मृदा में दबे हुए अनाज को खाद्य फसल के रूप में वृद्धि करते एवं उपजते हुए अवलोकन कर यह पता लगाया कि गेहूं और जौ खाद्य भोजन के रूप थे।
उन प्रारम्भिक पशुओं में भेड़ और बकरी थे जिन्हें आदि मानव द्वारा पालतू बनाया गया था ।
पशु, भोजन और मांस का एक महत्वपूर्ण स्रोत थे।
नवपाषाण उपकरण एक तेज धार किनार प्राप्त करने हेतु पॉलिश किये जाते थे ।
जीवाश्म लकड़ी और मृदभांड से निर्मित औजार दाओजली हेडिंग से प्राप्त किये गए हैं।
यह ब्रह्मपुत्र घाटी के निकट पहाड़ियों पर स्थित है।
अन्न, बड़े मिट्टी के बर्तन, गुथी हुई टोकरियों एवं बड़े गड्ढों में जमा किया जाता था।
पहला पालतू बनाया जाने वाला पशु कुक्कुर का वन्य पूर्वज था।
गेहूं और जौ सबसे पहले उगाये जाने वाले पौधे थे।
A.
कोल्दीवा
B. गुफक्राल
C. बुर्जहोम
D. मेहरगढ़
यह तहखाने जमीन में गड्डा खोदकर बनाए गए थे। इनमें सीढि़या भी प्राप्त हुई हैं। संभवतः इनका निर्माण सर्द मौसम से बचने के लिए किया गया था।
A.
कश्मीर
B. बिहार
C. राजस्थान
D. मध्य प्रदेश
बुर्जहोम कश्मीर में स्थित है जो कि एक पूर्व हड़प्पन संस्कृति है। यहाँ से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों में गेंहू, दाल, बकरी, भेंस, भेड़ें व कुत्ते शामिल हैं।
A.
गुफक्राल
B. बुर्जहोम
C. मेहरगढ़
D. चिराण्ड
अपने मालिक के साथ दफन किए हुए कुत्ते के साक्ष्य बुर्जहोम से प्राप्त हुए हैं। यह स्पष्ट साक्ष्य है कि इंसान द्वारा कुत्ते को पालतू बनाया गया था। यह बुर्जहोम में लोगों के अंतिम संस्कार का एक प्रकार माना जाता है।
A.
उत्तर प्रदेश
B. आन्ध्र प्रदेश
C. कश्मीर
D. कर्नाटक
कश्मीर में दो पुरास्थल स्थित हैं, गुफक्राल तथा बुर्जहोम। दालों के साक्ष्य इन दो पुरास्थलों से ही प्राप्त हुए हैं।
A.
पूर्व पाषाण युग
B. मध्य पाषाण युग
C. नया पाषाण युग
D. ताम्र पाषाण युग
नवपाषाण काल लगभग 12000 वर्ष पूर्व आरम्भ हुआ। मानव सभ्यता में इस अवधि के दौरान अत्यधिक परिवर्तन देखा गया है। लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर के उपकरण छोटे थे किन्तु वे तेज व चमकीले थे। इस काल में पशुपालन व कृषि आरम्भ हुई तथा मानव ने एक स्थान पर निवास करना आरम्भ किया।
A.
गुफक्राल
B. चिराण्ड
C. मेहरगढ़
D. कोल्दीवा
मेहरगढ़ बोलन पास के समीप स्थित है। यह इरान को जाने वाले महत्त्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। यह पहला पुरास्थल है जिसने पूर्व हड़प्पा संस्कृतियों के दौरान हुए पशुपालन के साक्ष्य प्रदान किए। यह कपास के उत्पादन के साक्ष्य प्रदान करने वाला भी प्रथम पुरास्थल है।
A.
उड़ीसा
B. उत्तर प्रदेश
C. बिहार
D. मध्य प्रदेश
पुरातात्विक पुरास्थल कोल्दीवा इलाहाबाद के निकट स्थित है। वह इलाका सराय नाहर राय के नाम से जाना जाता है। इस पुरास्थल से भारत में चाँवल के उत्पादन व खपत के प्रारंभिक तथ्य प्राप्त हुए हैं।
A.
बीज
B. बली
C. उपहार
D. भोजन
शिकारी संग्रहकत्ताओं द्वारा अनाज सिर्फ उनकी भूख को शान्त करने या बीज के रूप में ही इस्तेमाल नहीं किया जाता था अपितु वह अनाज को एक दूसरे को उपहार स्वरूप देते थे, यह वस्तु विनिमेय का अपने प्रारंभिक आकार का एक प्रकार था।
A.
सब्जियाँ
B. फल
C. जानवर
जानवर, शिकारी संग्रहकत्ताओं को विविध प्रकार के भोजन प्रदान करते थे। वह उन्हें दूध, मछली व माँस प्रदान करते थे। इसके अलावा, वे प्राकृतिक रूप से प्रजनन क्रिया करते थे तथा उनकी संख्या पौधों की तुलना में कम प्रयासों से बढ़ जाती थी। इसलिए, वे उनके लिए भोजन के भण्डार के रूप में माने जाते थे।
A.
आन्ध्र प्रदेश
B. कर्नाटक
C. तमिलनाडू
D. केरल
हल्लूर आन्ध्र प्रदेश में एक पुरातात्विक स्थल है। यह दक्षिण भारत का प्रारम्भिक लोह काल पुरास्थल है। यह साफ वनस्पती के साथ एक अर्द्ध शुष्क क्षेत्र में निहित है। यह पुरास्थल एक छोटा टीला है जो कि लगभग 6.4 मीटर ऊँचा है। इस स्थल की खोज सर्वप्रथम 1962 में नागराजा राव ने की तथा 1965 में यहाँ खुदाई हुई।
A.
मेहरगढ़
B. कोल्दीवा
C. महागारा
D. हल्लूर
उपमहाद्वीप में सर्वप्रथम पशुपालन मेहरगढ़ में आरम्भ हुआ। पुरातत्वविदों को इस पुरास्थल से जानवरों की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं। जो कि इस बात का समर्थन करती हैं।
A.
हडप्पा पुरास्थल
B. पूर्व हड़प्पन पुरास्थल
C. आरम्भिक हड़प्पन पुरास्थल
प्याम्पल्ली की खोज वर्ष 1977-1978 में हुई थी। यह नवपाषाण काल पुरास्थल तमिलनाडू में स्थित है।
A.
उच्च पाषाण काल
B. मध्य पाषाण काल
C. निम्न पाषाण काल
D. लोह काल
उस समय रेत पर आग जला कर उस पर भोजन बनाया जाता था। अनाज व फलियाँ जैसे फली व मटर को उपयोग में लाने से पहले आग से पकाया जाता था।
A.
पाषाण काल
B. मध्य पाषाण काल
C. नवपाषाण काल
D. लोह पाषाण काल
नवपाषाण काल मानव प्रोद्यौगिकी के विकास की अवधि थी। सबसे प्राचीन नवपाषाण काल पुरास्थल मेहरगढ़ है जो लगभग 7000 ई.पू. में विकसित हुई।
A. हिरण
B. सुअर
C. मवेशी
D. घोड़ा
हमें मेहरगढ़ से मवेशियों की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि वहाँ मवेशियों को पालतू बनाया गया था। पुरास्थल के प्रारम्भिक स्तर से पुरातत्वविदों को जंगली सुअर तथा हिरण की हड्डियाँ भी प्राप्त हुई हैं।
A.
चिता पर दाह संस्कार
B. ताबूत
C. ममी
D. दफन करना
मेहरगढ़ में कुछ कब्रिस्तान प्राप्त हुए हैं। कुछ कब्रों में इन्सानों के साथ बकरियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।
A.
जले हुए घर
B. जली हुई झोपडि़याँ
C. जला हुआ अनाज
D. जले हुए बर्तन
पुरातत्वविदों द्वारा खोजा गया अति महत्त्वपूर्ण अवशेष जला हुआ अनाज है। वह एक दुर्घटना में जला होगा। इससे वैज्ञानिकों ने यह पहचान की कि उपमहाद्वीप में किस प्रकार की फसलों का विकास हुआ।
A.
दक्षिण पश्चिम
B. पश्चिमोत्तर
C. दक्षिण पूर्व
D. उत्तर पूर्व
नीले वर्ग उपमहाद्वीप की पूर्ण उत्तर पश्चिम दिशा में पाए गए थे। यह कश्मीर से खोजे गए थे।
A.
पुजारियों
B. किसानों
C. सैनिकों
D. कृषक
नीले वर्गों के चिन्ह उन पुरास्थलों पर हैं जहाँ से पुरातत्वविदों को आदि चरवाहों व किसानों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यह उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों के भी संकेत देता है।
A.
जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए
B. भोजन प्रदान करने के लिए
C. भोजन के स्त्रोत के रूप में
D. मनोजरंन के स्त्रोत के रूप में
जानवर आदि काल में दूध तथा माँस प्रदान करते थे, इस कारण उनको भोजन के भण्डार के रूप में उपयोग में लिया जाता था।
A.
वृत्ताकार
B. वर्गाकार
C. अंडाकार
D. षटभुजाकार
प्रत्येक घर में चार या चार से अधिक कक्ष होते थे, उनमें से कुछ भण्डारण के रूप में उपयोग किए जाते थे, आमतौर पर यह वर्गाकार या आयत के आकार के होते थे।
A.
मृत्यू के पश्चात दूसरे जीवन के लिए भोजन के रूप में
B. जीवाश्म बनाने के लिए
C. ईश्वर को बली के
D. बकरी को सम्मान देना
विद्वानों के अनुसार वह शायद उन्हें दूसरी दुनिया में भोजन की आपूर्ति के लिए रखते थे।
A.
हाथी
B. बकरी
C. भेड़
D. शेर
एक गड्डे में से एक मानव कंकाल के साथ बकरी का कंकाल भी प्राप्त हुआ है।
A.
मृत्यू के पश्चात भी जीवन होता है
B. ईश्वर नहीं है।
C. सूर्य सौर प्रणाली का केन्द्र है।
D. ईश्वर के अनैक रूप हैं।
मेहरगढ़ के निवासियों का मानना था कि मृत्यू के पश्चात भी एक जीवन होता है।
A.
मेहरगढ़
B. कोल्दीवा
C. महागारा
D. गुफक्राल
यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है। यहाँ हमें मवेशियों के खुर के निशान पाए गए हैं इसके अतिरिक्त यहाँ चांवल की खेती के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, पुरातत्वविदों के अनुसार यहाँ मवेशियों के खुर के निशान पाए जाने से यह निष्कर्ष निकलता है कि यहाँ पर निवास करने वाले आदिवासी पशु पालन करते थे।
A.
बड़े मिट्टी के बर्तन बनाना
B. बड़े भण्डार गृह बनाना
C. धातु के बर्तनों का निर्माण
D. अधिशेष का निर्यात
लोग अनाज का उपयोग स्वंय के उपभोग तथा बीज स्वरूप करते थे। इस कारण उन्हें अनाज के भण्डारण के लिए विभिन्न तरीकों पर ध्यान देना पड़ा।
A. माँस
B. कपास
C. दूध
D. रेशम
कपास पौधों से प्राप्त होती है।
A. पाकिस्तान
B. उत्तर प्रदेश
C. बिहार
D. आन्ध्र प्रदेश
कोल्दीवा वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में स्थित है तथा हमें वहाँ से जानवरों की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं।
A.
भोजन के लिए
B. दान के लिए
C. व्यापार के लिए
D. वितरण के लिए
नवपाषाण युग के वह किसान जो कि एक स्थान पर निवास करते थे वह स्वंय के उपयोग के लिए, उपहार देने के लिए तथा बीज स्वरूप उपयोग में लेने के लिए अनाज का भण्डारण करते थे।
A.
बनवाली तथा लोथल
B. प्याम्पल्ली तथा हल्लूर
C. कर्नूल तथा भिम्बेटका
D. बुर्जहोम
पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान हल्लूर तथा प्याम्पल्ली में बाजरा उत्पादन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
A.
9000 वर्ष पूर्व
B. 8000 वर्ष पूर्व
C. 4000 वर्ष पूर्व
D. 1000 वर्ष पूर्व
8000 वर्ष पूर्व मेहरगढ़ में मानव जाति ने रहना आरम्भ किया। वर्तमान में मेहरगढ़ पाकिस्तान में स्थित है।
A.
पर्याप्त कटाई के लिए चमकीले धारदार उपकरण
B. चाकू
C. गढ्डे
D. धनुष और तीर
पाषाण काल के औजार परिष्कृत थे तथा कुछ नए औजारों का आविष्कार नवपाषाण युग में किया गया।
A.
स्टील
B. लोहा
C. लकड़ी
D. चूल्हा
बुर्जहोम में भोजन बनाने के चूल्हे भवनों के भीतर तथा बाहर दोनों तरफ पाए गए हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि बुर्जहोम के आदिवासी मौसम के अनुकूल अपना भोजन बनाते थे।
A.
मार्बल
B. काँच
C. भूतल में
D. भूसा
पुरातत्वविदों के अनुसार आदिमानवों ने जमीन में गढ्ढे खोदकर अपने निवास बनाए।
A.
भेड़
B. बकरी
C. कुत्तों की जंगली नस्ल
D. सुअर
आदिमानव जानवरों को पालतू बनाने के लिए अपने आश्रयों के बाहर खाना छोड़ दिया करते थे। घरेलू कुत्तों को एक जटील सामाजिक पदानुक्रम अपने पूर्वज भेडि़यों से विरासत में मिला है।
A.
पोधों का पृथक्करण
B. बीज डालना
C. पौधों का वर्गीकरण
D. डाले हुए बीजों से नए पौधे कैसे अंकुरित किए जाऐं
भोजन की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मनुष्य ने पौधों के विकास पर ध्यान दिया, और धीरे धीरे उन्हें विकसित करना आरम्भ किया।
A.
चारा
B. बीज
C. सब्जियाँ
D. फल
अनाज संरक्षित किया जाता था, जिससे वह अपनी भूख को शान्त करते थे तथा फसल को दुबारा तैयार करते थे, प्रारम्भिक काल में वे अनाज को मिट्टी के बड़े बर्तनों व बुनी हुई टोकरियों में भण्डारित किया करते थे।
A.
जम्मू कश्मीर
B. बिहार
C. तमिलनाडु
D. राजस्थान
गुफक्राल एक नवपाषाण काल पुरास्थल है जो कि जम्मू कश्मीर में स्थित है। यह एक वास्तविक मध्यपाषाण पुरास्थल के सभी अनिवार्य लक्षणों को प्रस्तुत करता है।
A.
पंजाब
B. हरियाणा
C. जम्मू एण्ड कश्मीर
D. राजस्थान
यह स्थान श्रीनगर के समीप स्थित है। बुर्जहोम 3000-1500 ई.पू. की नवपाषाण सभ्यता है। इस पुरास्थल के बारे में सबसे रोचक तथ्य यह है कि यहाँ कुत्तों के कंकाल उनके मालिकों के साथ कब्रों में पाए गए हैं।
A.
हड़प्पा
B. मोहनजोदड़ो
C. काली बंगा
D. बुर्जहोम
लोगों ने बुर्जहोम में गड्डों में भवनों का निर्माण किया। इन भवनों को जमीन में गड्डे खोदकर बनाया जाता था, जो सर्द मौसम में उन्हें आश्रय प्रदान करते होंगे।
A.
जंगलों में
B. पहाड़ी इलाकों में
C. झोपडि़यों में
D. जनजातियों में
जनजातियों में आदिमानव अन्य सदस्यों के साथ सदभाव से रहते थे। पुरूषों को किसी भी कार्य का कठिन भाग करना होता था एवम् महिलाओं को आसान कार्य दिये जाते थे। इससे श्रम विभाजन का पता चलता है।
A.
ऊन
B. रेशम
C. कपास
D. जूट
कपास विभिन्न पुरास्थलों पर प्राप्त हुआ है। तथा कपड़े की बुनाई में सबसे अधिक कपास का ही उपयोग किया जाता था।
A. नवपाषाण उपकरण
B. पाषाण काल उपकरण
C. मध्य पाषाण उपकरण
D. आधुनिक उपकरण
नवपाषाण उपकरण अपने पूर्ववर्तियों से अलग थे, वे उन्नत अत्याधुनित व ठीक से काटने योग्य थे।
A. शिकार करना
B. अनाज पीसना
C. मांस काटना
D. जड़ें खोदना
ओखली व मूसली जैसे उपकरण आज भी व नवापाषाण काल के पूर्व भी अनाज पीसने के लिए उपयोग में लिए जाते रहे हैं जब उपकरण प्रौद्योगिकी में उन्नती हुई।
A.
चबूतरे
B. खाना बनाने के चूल्हे
C. बर्तन
D. ईंट या मिट्टी के चूल्हे
खाना बनाने के चूल्हे सबूत के रूप में प्राप्त हुए हैं तथा उससे यह निष्कर्ष निकलता है कि कुछ प्रकार के भोजन आश्रयों के अन्दर बनाये जाते थे तो कुछ आश्रयों के बाहर भी बनाये जाते थे।
A. पुरास्थल
B. अत्यधिक
C. तहखाना
D. गड्डे में बना हुआ मकान
गड्डे में बने मकान बुर्जहोम के निवासियों के आश्रय होते थे जो कि कश्मीर में स्थित बुर्जहोम की एक विशिष्टता है। वे जमीन के नीचे थे और उसमें नीचे जाने के लिए सीढि़याँ होती थीं।
A.
प्रकृति
B. आश्रयों
C. कृषि
D. पशुपालन
जला हुआ और काला अनाज अनैक पुरास्थलों से प्राप्त हुआ है तथा यह आदिमानव द्वारा की जाने वाली कृषि का एक साक्ष्य है। यह अनाज बर्तनों में संग्रहित किया जाता था।
A.
पौधो
B. पालतू बनानने की प्रक्रिया
C. पुरास्थल
D. प्रकृति
आदिमानव की आदतों व उनके आश्रयों से सम्बन्धित जानकारी प्रदान करने के लिए पुरास्थलों का अत्यधिक महत्व है।
A. बांध कर रखना
B. पैक कर के रखना
C. कपड़े के थैले में रखना
D. जमीन में गड्डे खोदकर रखना
अनाज मिट्टी के बर्तनों व जमीन में गड्डे खोदकर संग्रहित किया जाता था। जिससे कि उसे आवश्यकता पड़ने पर उपयोग में लिया जा सके।
A.
कम
B. लगातार
C. बहुत कम
D. समझदारी से
पौधों का बढ़ना एक सतत प्रक्रिया है जिसके कारण आदिमानव को एक स्थान पर रूकना पड़ा। इसलिए वह कम स्थानान्तरित हुए।
A.
घटनाग्रस्त थी
B. तेज गति से थी
C. रोमांचक थी
D. क्रमिक थी
पशुपालन तथा खेतीबाड़ी एक क्रमिक प्रक्रिया थी जिसमें बहुत समय लगा। इसमें पशुओं के खाने की आदतों में परिवर्तन शामिल है।
A.
बड़े जानवर
B. जंगली जानवर
C. अतिकाय जानवर
D. नस्लीय जानवर
पालतू बनाने की प्रक्रिया के दौरान पालतू पशुओं के दाँत व सींग छोटे हो रहे थे। उनके भोजन की आवश्यकता व उनकी आदतें उन्हें पालतू बनाने के दौरान परिवर्तित हो जाती थीं।
A.
संरक्षित करना
B. कटौती करना
C. प्रतिरोपित करना
D. वितरित करना
आदिमानव उन पौधों के बीजों को संरक्षित करते थे, जो उन्हें बेहतर पैदावार उपलब्ध कराते थे जिससे वह भविष्य में दोबारा अच्छी पैदावार पा सकें।
A.
फल
B. फूल
C. डंठल
D. पत्ते
मजबूत शाखा व डंठल पाधे को पके हुए अनाज का भार सहने की क्षमता देते हैं। जो की घरेलू पौधे की पैदावार होगी।
A.
विकास
B. पोषण
C. परसार
D. पालतु बनाना
आदिमानव द्वारा उन पौधों को कृषि के लिए चयनित किया जाने लगा जो कि बड़े अनाज की पैदावार करते थे, जो कि बेहतर था।
A.
आश्रयों में
B. गुफाओं में
C. झुण्ड में
D. पहाड़ो में
अधिकतर पालतू जानवर झुण्ड में रहते थे तथा इससे उन्हें नियंत्रित करने में आसानी होती थी।
A.
उनकी गणना करने हेतु
B. उनकी रक्षा करने हेतु
C. उनकी हत्या करने हेतु
जानवरों को पालने तथा उनको वश में करने की प्रक्रिया क्रमिक थी जो कि सभ्य जानवरों की रक्षा करने से आरम्भ हुआ, जिससे वह उनके करीब आए।
A.
अन्य भक्षक
B. पक्षी
C. जानवर
जब आदिमानव ने पशुपालन करना आरम्भ किया तो उसने अपने आश्रयों के बाहर भोजन खुला छोड़कर विनम्र जानवरों को उनकी समीप आने को प्रोत्साहित किया।
A.
सूखे और पहाड़ी
B. गला और नम
C. ठण्डा और शुष्क
D. बरसात
पशु अपने जीवन यापन के लिए अलग-अलग वातावरण पसन्द करते हैं। सामान्यतः यह पाया गया है कि भेड़ व बकरी सूखे व पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से अपना जीवन यापन करते हैं।
A.
मेहरगढ़
B. दाओजली हैडिंग
C. बुर्जहोम
D. चिराण्ड
दाओजली हैडिंग त्रिपुरा में स्थित है। यहाँ जीवाश्म लकड़ी के बने उपकरण प्राप्त हुए है जो कि पुरातत्वविदों की एक अद्वितीय खोज है। जीवाश्म लकड़ी, लकड़ी का ही एक अन्य अदला हुआ स्वरूप है। लकड़ी के भौतिक गुणों में उच्च तापमान व उच्च दबाव के कारण बदलाव आते हैं।
हम राजाओं और उनके द्वारा लड़े गए युद्धों के विषय इतना कुछ जानते हैं क्योंकि उनके द्वारा किये गए सभी कार्यों की जानकारी सुरक्षित रखी गई जैसे कि राजा के जीवन, उनकी विजयें, उनके विवाह उनके राज्याभिषेक, आदि ।
शिलालेख और एक पांडुलिपि के के मध्य एक महत्वपूर्ण अंतर वह सतह होता था जिस पर उनकी रचना की जाती थी । शिलालेख कठोर सतह पर उत्त्कीर्ण किये जाते थे जबकि पांडुलिपि हस्त-लिखित ग्रन्थ होते हैं, पांडुलिपियों की रचना आमतौर पर ताड़ के पत्ते या पेड़ की छाल पर की जाती थी।
द्रविड़ भाषा समुदाय: इस भाषा समुदाय में तमिल, तेलुगू, कन्नड़, और मलयालम जैसी भाषाएँ सम्मिलित हैं, ये भाषाएँ भारत के दक्षिणी भाग में बोली जाती हैं।
गोल पाषाण शिलाखंड की परिधि अथवा भूमि पर स्थित एकल वृहद पाषाण, भूमि के नीचे स्थित अंत्येष्टि को इंगित करता है।
ऋग्वेदिक युग के महत्वपूर्ण देवता : अग्नि-अग्नि के देवता; इंद्र- एक योद्धा भगवान और सोमा- एक पौधा जिससे एक विशेष पेय तैयार किया जाता था।
ऋग्वेद पढ़ने के स्थान पर सुनाया और सुना जाता था, इसका पहली बार मुद्रण और रचना 200 वर्षों से भी कम समय पूर्व हुई थी, उसके बाद इसे कई सदियों में लिखा गया था