पाषाण अर्थात पत्थर तथा काल अर्थात समय । यह ऐसा ऐसा युग था जिसमे मानव ने पत्थर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया था । मानव ने अपनी रक्षा और अपनी भूख मिटाने के लिए सर्वप्रथम पत्थर के औजारों का ही सबसे अधिक उपयोग किया इसलिए इस युग को पाषाण काल कहते हैं ।
मानव विकास के समय उसमें कुछ महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन आये । जैसे --
१ - खड़े होकर सीधे चलना ।
२ - अंगूठे के कारण वस्तुओं को पकड़ने की क्षमता का पैदा होना जिससे महत्वपूर्ण कार्यों को कर लेना ।
३ - मस्तिष्क के आकार एवं क्षमता में विस्तार ।
क. सही
ख. सही
ग.
घ. सही
क. सही
ख.
ग.
घ. गलत
कृषि महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आया। मनुष्य ने अपना खानाबदोश जीवन का त्याग कर दिया और चयनीत क्षेत्रों में एक ही स्थान पर बस गया। वह अपने स्वयं के भोजन का उत्पादन कर सकता था। वह अब एक खानाबदोश अथवा संग्रहक नहीं रह गया था, और एक ही स्थान पर बस गया था। इस तरह मनुष्य ने विकास की दिशा में पहला कदम आगे रखा था ।
अ. खानाबदोश - मानव जो खाद्य और आश्रय की तलाश में जगह जगह भटकता है और जिसके पास रहने के लिए कोई निश्चित घर नहीं होता है।
ब. पाषाण युग- मानव संस्कृति का प्रारम्भिक काल जब मानव ने पाषाण उपकरणों का इस्तेमाल किया था।
स मानवविज्ञानी- जो लोग मानव जाति के विज्ञान का अध्ययन करते हैं।
किसानों और चरवाहों का समूह छोटी बस्तियों अथवा गांवों में एक साथ रहता था। ऐसे परिवारों का समूह एक जनजाति का गठन करता था। जनजाति में अधिकांश परिवार एक दूसरे से संबंधित थे। जनजाति के सदस्य शिकार, संग्रहण, खेती, पशुपालन और मछली पकड़ने जैसे व्यवसायों का अनुसरण करते थे।
पाषाण युग के उनकी उत्त्पत्ति के क्रम में चरण निम्न हैं:
अ पेलियोलिथिक अथवा पूरा पाषाण युग।
ब मेसोलिथिक अथवा मध्य पाषाण युग।
स नियोलिथिक अथवा नव पाषाण युग।
कृषि महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आया। मनुष्य ने अपना खानाबदोश जीवन का त्याग कर दिया और चयनित क्षेत्रों में एक ही स्थान पर बस गया। वह अपने स्वयं के भोजन का उत्पादन कर सकता था। वह अब एक खानाबदोश अथवा संग्रहक नहीं रह गया था, और एक ही स्थान पर बस गया था। इस तरह मनुष्य ने विकास की दिशा में पहला कदम आगे रखा था ।
किसानों और चरवाहों का समूह छोटी बस्तियों अथवा गांवों में एक साथ रहता था। ऐसे परिवारों का समूह एक जनजाति का गठन करता था। जनजाति में अधिकांश परिवार एक दूसरे से संबंधित थे। जनजाति के सदस्य शिकार, संग्रहण, खेती, पशुपालन और मछली पकड़ने जैसे व्यवसायों का अनुसरण करते थे।
अ. खानाबदोश - मानव जो खाद्य और आश्रय की तलाश में जगह जगह भटकता है और जिसके पास रहने के लिए कोई निश्चित घर नहीं होता है।
ब. पाषाण युग- मानव संस्कृति का प्रारम्भिक काल जब मानव ने पाषाण उपकरणों का इस्तेमाल किया था।
स मानवविज्ञानी- जो लोग मानव जाति के विज्ञान का अध्ययन करते हैं।
पाषाण युग के उनकी उत्त्पत्ति के क्रम में चरण निम्न हैं:
अ पेलियोलिथिक अथवा पूरा पाषाण युग।
ब मेसोलिथिक अथवा मध्य पाषाण युग।
स नियोलिथिक अथवा नव पाषाण युग।
आदि मानव को पाषाण काल में बहुत सी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। मानव को खाने से लेकर जीने तक के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता था । यदि ऐसा न होता तो वह या तो जंगली जानवरों का शिकार बन जाता या बिना खाने के मर जाता । मनुष्य को खाने के लिए जानवरों का शिकार करना पड़ता था और सफलता पाने के लिए उसे झुण्ड में शिकार करना पड़ता था । इस तरह मनुष्य ने झुण्ड में रहना सीख लिया जिससे उसे सहयोग एवं सुरक्षा प्राप्त होती थी ।
A.
पानी का होज
B. पैटर्न होज
C.
महान स्नानघर
D. शाही स्नानघर
महान स्नानघर की दीवारें ईंटों की बनी थीं, उस पर प्लास्टर था तथा एक लेप की परत थी। टैंक के दोनों ओर सीढि़याँ थी।
A.
100 वर्ष पूर्व
B. 80 वर्ष पूर्व
C. 70 वर्ष पूर्व
D. 20 वर्ष पूर्व
लगभग 80 वर्ष पूर्व, पुरातत्वविदों को एक पुरास्थल मिला तथा उन्हें यह एहसास हुआ कि उपमहाद्वीप का सबसे पुराना शहर था।
A. टेराकोटा तथा फाइन्से
B. लकड़ी तथा पत्थर
C. खोल व मट्टी
D. लोहा तथा ताँबा
खोल या पत्थर इसके विपरित प्रकृतिक पाए जाते हैं, फाइन्से एक सामग्री है जिसे कृत्रिम ढंग से उत्पादित किया जाता है।
A. 10,000 वर्ष पूर्व
B. 4,700 वर्ष पूर्व
C. 8,000 वर्ष पूर्व
D. 2,000 वर्ष पूर्व
पुरातत्वविदों के अनुसार हड़प्पा तथा उसके सभी समकालीन शहर लगभग 4,700 वर्ष पूर्व विकसित हुए।
पुरावशेषो के अध्ययन से ज्ञात होता है की हड़प्पा समाज मातृ प्रधान था | उत्तखंनन से जो मानव आकृतियाँ प्राप्त हुई है उनके अध्ययन से पता चलता है की उनमे से अधिकांश स्त्रियों की है | इस आधार पर इतिहासकारों ने यह मत प्रतिपादित किया है |
पुरावशेषों के अध्ययन से प्राप्त जानकारी के आधार पर इतिहासकारों का मत है की हड़प्पा निवासियों ने मनोरंजन को अपनी ज़िंदगी में अपनाया हुआ था | नृतकी की मूर्ती जहाँ सिन्धु कला का एक उत्कृष्ट नमूना है वहीँ वह यह दर्शाती है की सिन्धु निवासी संगीत एवं नृत्य में रूची रखते रहे होंगे | सिन्धु सभ्यता के नगरो के विन्यास एवं जीवन में समरूपता पाई गयी है जो की उसकी समकालीन किसी भी सभ्यता में नहीं मिलाती है | इसको देखते हुए इतिहासकारों एवं विद्वानों ने ऎसी आशंका जाती है की सिन्धु सभ्यता में एक केन्द्रीयकृत शासन अवश्य रहा होगा | इन विद्वानों में मैके भी है जिन्होंने कहा है की मोहनजोदड़ो में कोई प्रतिनिधि शासक रहा होगा जिसका चयन जनता द्वारा हुआ होगा | B. मोहनजोदड़ो से । C. लोथल से । D. कालीबंगा से । मोहनजोदड़ो में स्थित यह विशाल स्नानागार सामूहिक भवनों में से एक था । इतिहासकारों का अनुमान है की इस स्नानागार का उपयोग किसी धार्मिक अवसर पर किया जाता रहा होगा । ऐसा भी माना जाता है की इसका प्रयोग सम्भ्रांत जनों द्वारा किया जाता रहा होगा । B. अल्युमिनियम थी । C. तांबा थी । D. कांसा थी । हडप्पा सभ्यता के नगर तांबा के सबसे धनी क्षेत्र के समीप स्थित थे । राजस्थान स्थित खेत्री की खान से उन्हें प्रचुर मात्र काफी उच्च कोटि का तांबा प्राप्त होता था। इस ताम्बे को जस्ता के साथ मिश्रित कर के वह कांसे को बनाते थे जो ताम्बे से अधिक मजबूत होती थी | हड़प्पा निवासी लौह धातु से पूर्णतया अनभिज्ञ थे । B. चांदी C. कांसा D. तांबा ओमान के अनेक स्थानों से हड़प्पा बर्तन प्राप्त हुए हैं। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि हड़प्पावासियों एवं ओमान के वासियों के मध्य व्यापारिक सम्बन्ध थे।
B. नारंगी रंग से C. काले रंग से D. धूसर रंग से इन बर्तनों पर हड़प्पावासी काले रंग से आकृतियों का निर्माण किया करते थे। कभी कभी, इसे तकनीक को "कोम्बेड स्लिप" (कंघिनुमा परत या आकृति) तकनीक के रूप में भी जाना जाता है। यह कई हड़प्पा स्थलों से प्राप्त हुए हैं।
B. हड़प्पा C. हल्लूर D. भीमबेटका हड़प्पावासियों ने बच्चों के मनोरंजन हेतु वस्तुओं को समान महत्व दिया था। बच्चों के लिए खिलौनों का निर्माण किया जाता था जिससे ज्ञात होता है कि हड़प्पावासी इन वस्तुओं से परिचित थे।
B. पुजारियों C. फैरो D. व्यापारियों ये फैरो दूरस्थ स्थानों पर अपनी सेना भेजा करते थे और वहां से सोना, चांदी, हाथी दांत, लकड़ी, आदि मंगवाते थे, यह अवधि मिस्र के इतिहास में एक महान सांस्कृतिक क्रांति के रूप में चिन्हित है।
B. मोहनजोदड़ो C. लोथल D. कालीबंगा मोहनजोदड़ो में जल निकासी व्यवस्था के नष्ट होने के कारण सड़कों पर कचरे के ढेर बनने लगे थे। बाद के वर्षों में सड़कों पर ही झुग्गीनुमा घर बनाए जाने लगे जो अपेक्षाकृत निम्न कोटी के थे ।
B. वृहद मंदिर C. राजा का महल D. सिंचाई हेतु निर्मित बांध मिस्रवासी उनके राजा कि मृत्यु के बाद उनके शव को इन पिरामिडों में ममी के रूप में संरक्षित रखते थे।
B. लकड़ी का फावड़ा C. लकड़ी का हलवाहा D. लकड़ी का हल हड़प्पा वासी मिट्टी को पलटने के लिए लकड़ी के हल का इस्तेमाल करते थे। विभिन्न स्थलों से खिलौनों के रूप में पाए गए हल प्रारूपों से इस बात की पुष्टि होती है। असली के हल लकड़ी के बनाए जाते थे; यही कारण है कि वे नष्ट हो गए ।
B. 'कोलतार'। C. 'आत्माओं'। D. 'परमार्थ'। उनके शवों के साथ और भी अनेक चीजें दफनायी जाती थीं। इनमें खाद्यान्न, पेय, वस्त्र, गहने, बर्तन, वाद्ययंत्र, हथियार और पशु शामिल हैं।
B. तांबा C. लोहा D. पत्थर उस अवधि के वास्तविक हल अब शेष नहीं रह गए हैं। लेकिन पुरातत्वविदों को उनके अन्वेषण के दौरान खिलौनों के रूप में हल का प्रारूप मिला है।
B. मोहनजोदड़ो C. लोथल D. कालीबंगा एक रजत कलश के ढक्कन में फसे हुए सूती वस्त्र के टुकड़े प्राप्त किए गए हैं ।
B. खंभात C. कच्छ D. जाखू भारत में हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र बंदरगाह शहर लोथल है। हड़प्पा के लिए आवश्यक कच्चे माल का अन्य सभ्यताओं से आयात करने के लिए और तैयार माल का निर्यात करने के लिए इस बंदरगाह शहर का इस्तेमाल किया जाता होगा। लोथल स्वयं उत्पादन केंद्रों में से एक था।
मोहनजोदड़ो में महान स्नानागार अच्छी तरह से पकायी गई ईंटों से निर्मित किया गया है। हड़प्पा सभ्यता के पतन का मुख्य कारण भूकंप, नदियों में बाढ़, सूखा, महामारी आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को माना जाता है। मोहनजोदड़ो के शहर के भग्नावशेषों की खोज वर्ष 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा की गई थी। हड़प्पा सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि अधिकाँश प्राचीन स्थल सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के तट पर खोजे गए थे । हड़प्पा के बर्तनों में लाल सतह पर काले रंग में ज्यामितीय रूपांकन किया गया था। यह आग में पकाये जाते थे और एक पारदर्शी, चमकदार सतह के साथ चमकीले थे । हड़प्पा के बर्तनों में लाल सतह पर काले रंग में ज्यामितीय रूपांकन किया गया था। यह आग में पकाये जाते थे और एक पारदर्शी, चमकदार सतह के साथ चमकीले थे। हड़प्पा सभ्यता के पतन का मुख्य कारण भूकंप, नदियों में बाढ़, सूखा, महामारी आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को माना जाता है। मोहन जोदड़ो में महान स्नानागार अच्छी तरह से पकायी गई ईंटों से निर्मित किया गया है। मोहन जोदड़ो के शहर के भग्नावशेषों की खोज वर्ष 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा की गई थी। ताम्बा हड़प्पा लोगों द्वारा सर्वाधिक इस्तेमाल किये जाने वाले धातुओं में से एक था। हड़प्पा सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि अधिकाँश प्राचीन स्थल सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के तट पर खोजे गए थे।
मनके बनाने का कारखाना लोथल में प्राप्त हुआ है।
विभिन्न प्रकार के पाषाण से निर्मित बाट हड़प्पा शहरों में प्राप्त किये गए थे।
मोहर की छाप एक सील (मुद्रण) के रूप में जानी जाती है।
धोलावीरा को तीन भागों में विभाजित किया गया था और प्रत्येक भाग प्रवेश द्वार के माध्यम से द्वार के साथ, विशाल पाषाण दीवारों के साथ घिरा हुआ था। कच्चा माल या तो प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला या किसानों या चरवाहों द्वारा उत्पादित किया जाने वाला पदार्थ है। ये माल कारीगरों द्वारा परिष्कृत उत्पादों को निर्मित करने हेतु इस्तेमाल किया जाता है।
चीनी मिटटी का मोती, कंगन, झुमके और छोटे जहाज बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
हड़प्पा स्थल वर्तमान समय में पाकिस्तान में लरकाना जिले में स्थित है।
मनका निर्माण लोथल के प्रमुख उद्योगों में से एक था।
टेराकोटा और मिट्टी और चीनी मिट्टी के बने तकला- गोला प्राप्त किये गए थे। यह दर्शाता है कि हड़प्पावासी बुनाई की कला जानते थे। B. लोथल C. लोथल तथा कालीबंगा D. बनवाली तथा लोथल कालीबंगा तथा लोथल जैसे शहरों में अग्निहोत्र के स्थान हैं, जहाँ शायद बली दी जाती थी। B. राजस्थान C. तमिलनाडू D. कर्नाटका आज भी, कर्नाटक में हट्टी और कोलार दो सोने की प्रसिद्ध खानें हैं। B.
विशेष पर्वों पर स्नान के लिए C.
गंदगी का निकास D.
खेती
हड़प्पा सभ्यता में आदिवासियों के लिए ‘महान स्नान’ जल का एक सार्वजनिक भण्डार था। टैंक लगभग उत्तर से दक्षिण 12 मीटर, 7 मीटर चौड़ा तथा अधिकतम 2.4 मीटर गहरा होता था।
B. कृत्रिम राल C. सीमेंट D. सरेस यह विशेष स्नान की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक था। B. गढ़ में C. तटवर्ती क्षेत्रो में D. नदी के किनारे के पास विशेष इमारतों का निर्माण गढ़ में होता था। B.
वर्गाकार C.
मिलाकर लगाना D.
पारस्परिक रखकर
ईंटों का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाता था, जिससे वह हजारों वर्षों तक चलती थीं। खुदाई किए गए पुरास्थलों में, हमें हड़प्पा सभ्यता में मिट्टी की ईंटों, जली हुई ईंटों तथा तराशे हुए पत्थरों से निर्मित अवशेष प्राप्त हुए हैं।
B. ईंटों की चट्टान C. पक्की ईंटें D. मिट्टी की ईंटें पक्की ईंटें उच्च गुणवत्ता की थीं, जिनसे बनाई गई इमारतें हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहती थीं। B. श्रीलंका तथा बर्मा C. चीन तथा ईरान D. बहराइन तथा बर्मा टीन तथा ताँबे को मिलाकर पीतल का उत्पादन किया जाता था। हड़प्पावासी पीतल का उपयोग उपकरण, हथियार, गहनें तथा जहाजों को बनाने में किया करते थे। B. 3900 वर्ष पूर्व C. 2900 वर्ष पूर्व D. 1900 वर्ष पूर्व इस अवधि के आसपास, लोगों ने अनेक शहरों में निवास करना बन्द कर दिया। लेखन, सील तथा भार का उपयोग बन्द हुआ। लम्बी दूरी से कच्चा माल लाना दुर्लभ हो गया। सभ्यता में धीरे धीरे गिरावट शुरू हो गई। B. खाम्बात C. मन्नार D. परसियन
लोथल सभ्यता खम्भात की खाड़ी के समीप स्थित है।
B. कम C. मध्यम D. यहाँ हमेशा सूखे का सामना करना होता था। क्षेत्र में भारी वर्षा नहीं होने के कारण सिंचाई के कुछ साधनों का उपयोग जरूर किया गया होगा। B. 2 C. 3 D. 4
प्रत्येक तीनों भागों के चारों और विशाल पत्थरों की दीवार थी, प्रवेश के लिए दरवाजे बनाए गए थे।
B. नर्मदा C. गोदावरी D. साबरमती लोथल ऐसे क्षेत्रों के समीप स्थित था जहाँ कच्चा माल जैसे अल्प-मूल्यवान पत्थर आसानी से उपलब्ध हो जाते थे। वह खंभात की खाड़ी के समीप स्थित है। B.
स्नान के लिए प्रयुक्त होते थे। C.
सफाई के लिए प्रयुक्त होते थे। D.
उपरोक्त सभी
विद्वानों के अनुसार, विशाल होज गोदी के रूप में प्रयुक्त होते थे। जहाँ समुद्र से जहाज माल लादने व उतारने के लिए आते थे।
B. 5000 वर्ष पूर्व C. 7000 वर्ष पूर्व D. 9000 वर्ष पूर्व मोहनजोदड़ो में एक रजत कलश के ढक्कन व ताँबे के कुछ वस्तुओं के साथ कपड़े के कुछ टुकड़े प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार, कपास की खेती लगभग 7000 वर्ष पूर्व आरम्भ हुई। B. मुद्रण C. शिलालेख D. नक्काशी
सील उन थैलों तथा बण्डलों पर टिकट के रूप में लगाई जाती होगी जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता था।
B.
काले पत्थर C.
भूरा पत्थर D.
लाल पत्थर
सामान्यतः हड़प्पा लिपि सफेद पत्थरों पर प्राप्त हुई है।
B. चार C. तीन D.
दो
हड़प्पा सभ्यता को दो भाग पूर्व तथा पश्चिम में विभक्त किया गया है। समान्यतः पश्चिम का भाग छोटा था किन्तु उच्च था इसलिए उसे गढ़ घोषित किया गया। पूर्व की ओर का भाग बड़ा था किन्तु नीचले हिस्से में था, उसे निम्न शहर कहा गया।
B. कच्छ का रण C. पंजाब D. लाहौर धोलावीरा शहर कच्छ के रण में खादिर बेत पर गुजरात में स्थित है। B.
सोना C. ताँबा D.
कीमती पत्थर
हालाँकि, उन्हें राजस्थान तथा पश्चिमी एशिया में ओमान से ताँबा प्राप्त हुआ।
B. प्रतिरूप टंकी C. महास्नानागार D. शाही स्नान महास्नानागार का निर्माण ईंटों से किया गया था और इसपर प्लास्टर की परत चढ़ाई गई थी। इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए प्लास्टर के ऊपर चारकोल की परत चढ़ाई गई थी। इस सरावेर में दो तरफ से उतरने के लिए सीढियां बनाई गई थीं ।
B. सोना। C. तांबा। D. कीमती पत्थर। हालांकि, वे वर्तमान के राजस्थान और पश्चिम एशिया में ओमान से तांबा प्राप्त करते थे।
B. लकड़ी और पत्थर C. सीप और मृदा D. लोहा और तांबा मोती, कंगन, झुमके, और लघु पात्र का निर्माण करने के लिए प्रकाचित वस्तु का इस्तेमाल किया जाता था।
B. मुद्रा C. बाट D. वस्त्र पत्थर या सीप जो प्राकृतिक रूप में प्राप्त होते हैं के विपरीत मनकों को कृत्रिम रूप से निर्मित किया जाता है।
B. अ –(i), ब –(ii), स –(iii), द –(iv) C. अ –(ii), ब –(i), स –(iii), द –(iv) D. अ–(iii), ब (ii), स –(i), द –(iii) प्राचीन समय में इन स्थानों पर उपरोक्त धातु प्राप्त हुए थे।
B. खंभात C. मन्नार D. फारस लोथल नगर खंभात की खाड़ी के समीप स्थित है।
B. मिट्टी C. सीप D. सेलखडी़ कार्नीलियन एक लाल रंग का पाषाण होता है। पत्थरों को काटकर और तराशकर मनके बनाए गए। इनके बीच में छेद किया जाता था ताकि धागा डालकर माला बनाई जा सके। हड़प्पा स्थल से विभिन्न आकृति और आकार के मनके प्राप्त किए गए हैं।
B. यज्ञ आयोजन में। C. ईंटों को पकाने में। D. पानी उबालने में। अग्निकुण्ड यज्ञ-वेदी हुआ करते थे।
B. मुद्रा C. धातु D. लकड़ी हड़प्पा लिपि उत्कीर्ण श्वेत वृहद पाषाण खंड धोलावीरा में प्राप्त हुआ है। अधिकाँश इतिहासकार इसे सूचना-पट्ट का प्राचीनतम साक्ष्य मानते हैं।
कच्चा माल या तो प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला या किसानों या चरवाहों द्वारा उत्पादित किया जाने वाला पदार्थ है । ये माल कारीगरों द्वारा परिष्कृत उत्पादों को निर्मित करने हेतु इस्तेमाल किया जाता है । धोलावीरा को तीन भागों में विभाजित किया गया था और प्रत्येक भाग प्रवेश द्वार के माध्यम से द्वार सहित, विशाल पाषाण दीवारों के साथ घिरा हुआ था। मोहर की छाप एक सील (मुद्रण) के रूप में जानी जाती है। हड़प्पा शहरों में प्राप्त किये गए विभिन्न प्रकार के बाट पाषाण से निर्मित किये गए थे। मनके बनाने का कारखाना लोथल में प्राप्त हुआ है। पीतल का उत्पादन करने के लिए टिन को तांबे के साथ मिलाया जाता था, इसे वर्तमान अफगानिस्तान और ईरान से प्राप्त किया जाता होगा। यहाँ से टेराकोटा एवं मिट्टी और चीनी मिट्टी से निर्मित तकला- गोला प्राप्त किये गए थे। यह दर्शाता है कि हड़प्पावासी बुनाई की कला जानते थे। मनका निर्माण लोथल के प्रमुख उद्योगों में से एक था । ताम्बा हड़प्पा लोगों द्वारा सर्वाधिक इस्तेमाल किये जाने वाले धातुओं में से एक था। हड़प्पा स्थल वर्तमान समय में पाकिस्तान में लरकाना जिले में स्थित है। चीनी मिटटी का मोती, कंगन, झुमके और छोटे बर्तन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
पीतल का उत्पादन करने के लिए टिन को तांबे के साथ मिलाया जाता था, इसे वर्तमान अफगानिस्तान और ईरान से प्राप्त किया जाता होगा। मुख्य प्राचीन शहरों के नाम हैं: मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कलीबंगा, राखी गढ़ी, चन्हुदड़ो, धोलावीरा,सुरकोटड़ा, लोथल और सुत्कन्गाडोर । हड़प्पावासियों का मुख्य भोजन मांस, दूध और दूध उत्पादों के साथ ही गेहूं, जौ, दालें, मटर, चावल, तिल, अलसी और सरसों था । गुजरात में मुख्य हड़प्पा शहरों में कच्छ के रण में खादिर बैत पर स्थित धोलावीरा, खंभात की खाड़ी के निकट साबरमती की एक सहायक नदी के समीप स्थित लोथल आते थे। कपास मेहरगढ़ में संभवतया 7000 वर्ष पूर्व उत्त्पन्न किया गया था। कृषि गतिविधियों के लिए भी भारत में पहला स्थल मेहरगढ़ था। मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्र की सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता की दो समकालीन सभ्यताओं में से थी। हड़प्पा शहरों में मोहर की बड़ी संख्या प्राप्त हुई है, सिलखड़ी अथवा साबुन के पत्थर से निर्मित मुद्राओं की एक बड़ी संख्या उन पर उत्कीर्ण लघु शिलालेख के साथ प्राप्त की गई है। मोहर व्यापारियों द्वारा मुख्य रूप से व्यापार के प्रयोजनों के लिए अन्य स्थानों पर भेजे जाने वाले सामान पर मुद्रण करने हेतु इस्तेमाल की जाती थी । मुद्राओं पर मुख्य रूप से पशुओं की आकृति उत्कीर्ण होती थी, एवं कुछ देवताओं और पुरुषों जैसी आकृतियों का प्रतिनिधित्व करती थीं ।
A. हड़प्पा से प्राप्त हुई है SOLUTION
SOLUTION
A. रोपड़ से ।SOLUTION
A. लौह थी ।SOLUTION
A. सोनाSOLUTION
A. लाल रंग सेSOLUTION
A. मोहनजोदड़ोSOLUTION
A. सैनिकोंSOLUTION
A. हड़प्पाSOLUTION
A. विशाल मकबरेSOLUTION
A. लकड़ी का कुदालSOLUTION
A. 'ममी'।SOLUTION
A. लकड़ीSOLUTION
A. हड़प्पाSOLUTION
A. मन्नारSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. कालीबंगाSOLUTION
A. पंजाब SOLUTION
A.
पीने का पानी SOLUTION
A. प्राकृतिक राल SOLUTION
A. निम्न कस्बे में SOLUTION
A.
आयताकार SOLUTION
A. ईंटेंSOLUTION
A. अफगानिस्तान तथा ईरान SOLUTION
A. 4900 वर्ष पूर्व SOLUTION
A. म्यांमारSOLUTION
A. अत्यधिकSOLUTION
A. 1SOLUTION
A. तापीSOLUTION
A.
एक गोदी के रूप में प्रयुक्त होते थे। SOLUTION
A. 1000 वर्ष पूर्व SOLUTION
A. भित्तिचित्रSOLUTION
A.
सफेद पत्थर SOLUTION
A. पाँचSOLUTION
A. बिहारSOLUTION
A. लोहाSOLUTION
A. पानी की टंकीSOLUTION
A. लोहा।SOLUTION
A. टेराकोटा और प्रकाचित वस्तुSOLUTION
A. मनकेSOLUTION
A. अ –(iv), ब –(i), स –(ii), द –(iii)SOLUTION
A. म्यांमारSOLUTION
A. कार्नेलियन अथवा इंद्रगोपSOLUTION
A. भोजन पकाने में।SOLUTION
A. पाषणSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
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