हड़प्पा शहरों में मोहर की बड़ी संख्या प्राप्त हुई है, सिलखड़ी अथवा साबुन के पत्थर से निर्मित मुद्राओं की एक बड़ी संख्या उन पर उत्कीर्ण लघु शिलालेख के साथ प्राप्त की गई हैं। मोहर व्यापारियों द्वारा मुख्य रूप से व्यापार के प्रयोजनों के लिए अन्य स्थानों पर भेजे जाने वाले सामान पर मुद्रण करने हेतु इस्तेमाल की जाती थी । मुद्राओं पर मुख्य रूप से पशुओं की आकृति उत्कीर्ण होती थी, एवं कुछ देवताओं और पुरुषों जैसी आकृतियों का प्रतिनिधित्व करती थीं।
मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्र की सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता की दो समकालीन सभ्यताओं में से थी।
कपास मेहरगढ़ में संभवतया 7000 वर्षपूर्व उत्त्पन्न किया गया था। कृषि गतिविधियों के लिए भी भारत में पहला स्थल मेहरगढ़ था।
गुजरात में मुख्य हड़प्पा शहरों में कच्छ के रण में खादिर बैत पर स्थित धोलावीरा, खंभात की खाड़ी के निकट साबरमती की एक सहायक नदी के समीप स्थित लोथल आते थे।
हड़प्पावासियों का मुख्य भोजन मांस, दूध और दूध उत्पादों के साथ ही गेहूं, जौ, दालों, मटर, चावल, तिल, अलसी और सरसों था।
मुख्य प्राचीन शहरों के नाम हैं: मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कलीबंगा, राखी गढ़ी, चन्हुदड़ो, धोलावीरा,सुरकोटड़ा, लोथल और सुत्कन्गाडोर ।
प्राप्त पुरावशेषों के अध्ययन से पता चला है कि सैन्धव धर्म के निवासी देवी में मातृदेवी और देवताओं में पशुपति शिव की पूजा करते थे।
सिन्धु घाटी सभ्यता के भवनों का निर्माण दो प्रकार से हुआ है :-
1 - आवासीय भवन
2 - सार्वजनिक भवन
सिन्धु सभ्यता के स्थल भारत, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान देशों में पाये गये है।
मोहनजोदड़ों का उत्खन्न राखल दस बनर्जी ने 1922 ई० में किया था।
या गलत
का निशान लगायो। 
2. कागज का अविष्कार सर्वप्रथम भारत में हुआ। 
3. ताँबा और जस्ता को मिलकर कांसा धातु बनाई जाती है । 

धोलावीरा शहर गुजरात में कच्छ के रण में खादिर बैत पर स्थित था। यहाँ ताजा पानी उपलब्ध था और मिट्टी बहुत उपजाऊ थी ।
1.कुछ अन्य हड़प्पा शहर जो दो भागों में विभाजित थे के विपरीत धोलावीरा को तीन भागों में विभाजित किया गया था।
2. प्रत्येक भाग प्रवेश द्वार के माध्यम से द्वार के साथ, विशाल पाषाण प्राचीरों के साथ घिरा हुआ था।
3. बस्ती में एक विशाल खुला क्षेत्र भी था जहाँ पर सार्वजनिक समारोहों का आयोजन किया जा सकता था ।
धोलावीरा शहर गुजरात में कच्छ के रण में खादिर बैत पर स्थित था। यहाँ ताजा पानी उपलब्ध था और मिट्टी बहुत उपजाऊ थी।
1. कुछ अन्य हड़प्पा शहर जो दो भागों में विभाजित थे, के विपरीत धोलावीरा को तीन भागों में विभाजित किया गया था।
2.प्रत्येक भाग प्रवेश द्वार के माध्यम से द्वार के साथ, विशाल पाषाण प्राचीरों के साथ घिरा हुआ था।
3.बस्ती में एक विशाल खुला क्षेत्र भी था जहाँ पर सार्वजनिक समारोहों का आयोजन किया जा सकता था।
आदि मानव के धार्मिक विश्वासों के विषय मे पक्की तरह से कुछ कहा नहीं जा सकता परन्तु पुरावेत्ता उनके शवों को दफ़नाने के ढंग से इनके धार्मिक
आइस एज के पश्चात वातावरण में जलवायु परिवर्तन से पौधों और पशुओं में परिवर्तन आया। समय के साथ-साथ मानव के आहार में भी परिवर्तन दृष्टिगोचर होना शुरू हो गया, मानव ने पौधों के व्यवहार का अवलोकन किया, - जिस तरह से बीज ड़ाली से पृथक हुआ, भूमि पर गिरा और उसमे से नया पौधा अंकुरित हुआ, उन्होंने खाद्य पौधों की पशुओं से रक्षा करना भी शुरू कर दी ।
मानव ने अपने आश्रय के पास भोजन रखकर पशुओं को पालना शुरू किया, कुक्कुर पालतू बनाया जाने वाला पहला पशु था,मनुष्य ने अन्य जंगली पशुओं के हमलों से भी इनकी रक्षा करी, इस प्रकार, एक सहजीवी रिश्ता पौधों, पशुओं एवं मनुष्यों के मध्य साझा किया गया था।
आइस एज के पश्चात वातावरण में जलवायु परिवर्तन से पौधों और पशुओं में परिवर्तन आया। समय के साथ-साथ मानव के आहार में भी परिवर्तन दृष्टिगोचर होना शुरू हो गया, मानव ने पौधों के व्यवहार का अवलोकन किया, - जिस तरह से बीज ड़ाली से पृथक हुआ, भूमि पर गिरा और उसमे से नया पौधा अंकुरित हुआ, उन्होंने खाद्य पौधों की पशुओं से रक्षा करना भी शुरू कर दी ।
मानव ने अपने आश्रय के पास भोजन रखकर पशुओं को पालना शुरू किया, कुक्कुर पालतू बनाया जाने वाला पहला पशु था,मनुष्य ने अन्य जंगली पशुओं के हमलों से भी इनकी रक्षा करी, इस प्रकार, एक सहजीवी रिश्ता पौधों, पशुओं एवं मनुष्यों के मध्य साझा किया गया था।
मध्य पाषाण युग -- मध्य पाषाण काल के औजार पुरा पाषाण काल की अपेक्षा आकार में छोटे हो गए। इस समय प्रकृति में अनेक परिवर्तन हुए जिसका प्रभाव मानव जीवन पर पड़ा. नयी परिस्थिति से तालमेल बैठाने में ही उसने उपकरण छोटे बनाना प्रारम्भ किया। मानव अपने आप उगी घासों को इकटठा करने लगा. इन घासों में कई आज के अनाजों की पूर्वज थी। इनका प्रयोग मानव ने अपने भोजन में किया । इस प्रकार वह अब संग्राहक बन गया। मानव ने इसी समय कुत्ते को पालतू बनाया । कुत्ता मानव का प्रथम पालतू पशु है।
नव पाषाण काल -- पुरातत्वविदों का यह मानना है कि मानव ने जब से भली भांति खेती करना प्राप्त कर दिया तभी से नव पाषाण काल प्रारम्भ होता है। खेती के कारण मानव अब भोजन संग्राहक से भोजन उत्पादक बन गया। इस समय उसके पत्थर के उपकरण अधिक उपयोगी एवं सुडौल थे क्योंकि उन्हें अधिक कुशलता से बनाया गया था. यह उपकरण घिसकर चमकदार बनाये गए थे।हत्थेदार कुल्हाड़ी एवं हसिया इस समय के महत्वपूर्ण औजार थे । खेती के साथ पशुपालन भी प्रारम्भ हुआ। पशुओं का प्रयोग मांस व दूध प्राप्त करने में किया जाता था। मानव अब खेतों के आस -पास मिटटी के घरों एवं घास-फूस के छप्पर वाले घरों में रहने लगा । धीरे-धीरे ये बस्तियां गाँव बन गए।
मानव ने अपनी रक्षा और अपनी भूख मिटाने के लिए सर्वप्रथम पत्थर के औजारों का ही सबसे अधिक उपयोग किया इसलिए इस युग को पाषाण काल कहते हैं। पत्थर से बने औजारों में समय-समय पर परिवर्तन हुए हैं। इसलिए पाषाण युग को तीन भागों में बांटा गया है-
१ - पुरापाषाण काल
२ - मध्य पाषाण काल
३ - नव पाषाण काल
पुरापाषाण काल
|
क. |
कृषि का प्रारंभ |
मध्य पाषाण युग |
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ख. |
आग की खोज |
मानव शास्त्री |
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ग. |
पत्थर के साथ धातु के औजार |
पुरा पाषाण युग |
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घ. |
मानव बस्तियों की स्थापना |
धातु काल |
|
ड़. |
मानव के विकास की जानकारी |
ताम्र पाषाण युग |
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च. |
मिश्रित धातु का उपयोग |
नव पाषाण युग |
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क. |
कृषि का प्रारंभ |
मध्य पाषाण युग |
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ख. |
आग |
पुरा पाषाण युग |
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ग. |
पत्थर के साथ धातु के औजार |
ताम्र पाषाण युग |
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घ. |
मानव |
नव पाषाण युग |
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ड़. |
मानव के विकास की जानकारी |
मानव शास्त्री |
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च. |
मिश्रित धातु का उपयोग |
धातु काल |
क. २ करोड़ वर्ष पूर्व
ख. पत्थर
ग. गुफाओं
घ. छोटा
ड़. मध्य पाषाण
च. तांबा
A. तमिलनाडू
B. कर्नाटका
C. आन्ध्र प्रदेश
D. गुजरात
हड़प्पावासियों को सोना कोलार मील से प्राप्त हुआ जो कि वर्तमान में कर्नाटका राज्य में स्थित है। इस राज्य से हाथिदांत भी प्राप्त किए गए हैं।
A. मोहनजोदड़ो
B. हड़प्पा
C. हल्लूर
D. कोल्दीवा
मोहनजोदड़ों में ताँबे की अनेक वस्तुऐं प्राप्त हुई हैं जिनमें एक नृत्य करती हुई लड़की की मूर्ती भी सम्मिलित है।
A. हड़प्पा
B. मोहनजोदड़ो
C. कालीबंगा
D. धोलावीरा
यह विशेष टैंक ‘महान स्नान’ के नाम से जाने जाते थे। इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘महान स्नान’ प्राचीन विश्व का सार्वजनिक जल का स़्त्रोत था।
A. लाल रंग
B. नारंगी रंग
C. काला रंग
D. ग्रे रंग
इन बर्तनों पर हड़प्पवासी काले रंग से छवियाँ बनाया करते थे। इस तकनीक को ‘काम्ब्ड स्लीप’ तकनीक के नाम से भी जाना जाता है। यह हड़प्पा के अनेक पुरास्थलों पर प्राप्त हुआ है।
A.
पौधों का
B. जानवरों का
C. समुद्र का
D. नदियों का
सील साबुत के पत्थर से बनाई जाती थी। अत्यधिक सील आयताकार तथा उन पर जानवरों जैसे - गेंढ़ा, बेल, तांगा, इत्यादि की छवियां बनी हुई थीं। इस संकेत से स्पष्ट होता है कि हड़प्पा निवासी अपने जानवरों से घुल मिल कर रहते थे।
A.
मोहनजोदड़ो
B. हड़प्पा
C. हल्लूर
D. भिम्बेटका
हड़प्पावासियों ने बच्चों के मनोरंजन के खेलों को समान महत्ता दी है। बच्चों के लिए खिलौनों का निर्माण किया जाता था जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि हड़प्पा के लोग अपनी वस्तुओं जैसे कार आदि के प्रति समर्पित होते थे।
A. बाढ़
B. नदियों का सूखना
C. वनों की कटाई
D. आर्यों का आक्रमण
कुछ हड़प्पा शहरों के लिए यह सभी पतन के कारण बने।
A. हड़प्पा लिपि के विशाल पत्र
B. महान स्नान
C. डाक
D. मानक फैक्ट्री
अन्य सभ्यताओं में लिपि सूक्ष्म वस्तुओं पर सूक्ष्म अक्षरों से लिखी पाई गई है।
A.
वर्गाकार
B. आयताकार
C. गोलाकार
D. त्रिभुजाकार
हड़प्पा की सील तथा जानवरों के चित्र जो की एक गीले तथा दलदली वातावरण से सम्बन्ध रखते हैं। गैंड़े, हाथी तथा बाघ दलदली पौधों के बीच रहते थे।
A. ताँबा
B. पीतल
C. सोना तथा चाँदी
D. लोहा
यह मुख्य धातु थी जो कि पुरातत्वविदों को इन पुरास्थलों से प्राप्त नही हुई।
A. लकड़ी
B. ताँबा
C. लोहा
D. पत्थर
उस काल के वास्तविक हल अस्तित्व में नहीं हैं। किन्तु पुरातत्वविदों को खोज के दौरान उनके खिलाने प्रारूप प्राप्त हुए हैं।
A.
पक्की ईंटें
B. निकास व्यवस्था
C. महान स्नान
D. अग्नि कुण्ड़
हड़प्पा सभ्यता के भवनों में एक यथार्थ निकास की व्यवस्था थी। यह विशेषता सिंधु घाटी सभ्यताओं की सबसे उन्नत विशेषताओं में से एक थी।
A.
भोजन बनाने के लिए
B. बलि देने के लिए
C. ईंटें पक्की करने के लिए
D. जंगली जानवरों को डराने के लिए
अग्निहोत्र बलि देने के लिए उपयोग में लिए जाते थे।
आर्य लोग पहले पशुपालन करते थे ये लोग युद्ध से प्राप्त सम्पति पर ही हमेशा निर्भर रहते थे । आर्यों ने अपनी आवश्यकता पूर्ण करने के लिए कृषि पर ध्यान दिया और वे लोग नदियों के किनारे गेहूँ, धान, दाल व तिलहन भी उगाने लगे थे ।
वैदिक काल में घर में ही रहकर घरेलू कार्यों, संगीत व नृत्य की शिक्षा प्राप्त करती थीं । यद्यपि महिलाओं की स्थिति पुरषों के बराबर नहीं थी किन्तु घर में उनका सम्मान था ।
ऋग्वेदिक युग के तीन महत्वपूर्ण देवता निम्न थे:
1. अग्नि-अग्नि के देवता;
2. इंद्र- एक योद्धा भगवान
3. सोमा- एक पौधा जिससे एक विशेष पेय तैयार किया जाता था।
ऋग्वेद पढ़ने के स्थान पर सुनाया और सुना जाता था, इसका पहली बार मुद्रण और रचना 200 वर्षों से भी कम समय पूर्व हुई थी, उसके बाद इसे कई सदियों में लिखा गया था
आर्य संभवतः काला सागर और कैस्पियन सागर के पास के मैदानों में रहते थे । आर्यों के पास पालतू जानवरों की संख्या अधिक होने के कारण वे जहाँ चारा-पानी मिल जाता वही बस जाते थे । जब चारा-पानी कम पड़ने लगता तो कुछ लोग जानवरों को लेकर आगे निकल जाते थे । जहाँ चारा मिलता आर्य लोग वहां पर ही बस जाते थे।
आर्य सभ्यता का पारिवारिक स्वरुप निम्न प्रकार था -
2. आर्य सभ्यता के परिवारों में संयुक्त परिवार प्रचलित थे।
इनामगाँव भीम की एक सहायक घोड़ नदी पर एक स्थल है, इनामगाँव, में शवाधान तीन विधियों से किया जाता था जो निम्नानुसार है :
1वयस्कों को आम तौर पर उत्तर दिशा में सिर के साथ, भूमी में दफन कर दिया जाता था।
2 कभी-कभी मृतकों को घरों के अंदर ही दफन कर दिया जाता था, घड़े जिनमें संभवतया भोजन और पानी निहित होता था, मृतकों के साथ रखे जाते थे।
3.एक पांच कक्षों वाले घर के आंगन में एक बड़े, चार पैर वाले मिट्टी के बर्तन में दफन एक आदमी के साक्ष्य भी प्राप्त किये किये गए हैं, यह दर्शाता है कि इनामगाँव में लोगों को मिट्टी के जार में भी दफनाया जाता था।
सभी शवाधानों की कुछ आम विशेषताएं निम्नानुसार हैं:
1 आम तौर पर, मृतकों को काले और लाल मृदभांड़ वाले विशिष्ट बर्तनों के साथ दफनाया गया था।
2 मृतकों के साथ उपकरण और लोहे के हथियार भी दफन किये गए थे।
3 कभी कभी, घोड़ों के कंकाल, पाषाण एवं सोने के उपकरण एवं आभूषण भी मृतकों के साथ दफ़न किये हुए प्राप्त हुए थे।
वैदिक काल में शिक्षा-दीक्षा ऋषियों के माध्यम से ही संपन्न होती थी । उन दिनों लोग जंगलो में आश्रम में रहकर ही शिक्षा प्राप्त करते थे। शिक्षा ऋषियों द्वारा ही गुरुकुल में रहकर दी जाती थी।
वैदिक काल में जीवन को व्यवस्थित करने के लिए आश्रम व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान था । जीवन को चार अवस्था में बांटा गया था । पहली अवस्था ब्रह्मचर्य आश्रम की थी । इसमें बच्चा आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करता था । दूसरी अवस्था गृहस्थ आश्रम की थी । इस अवस्था में वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित होते थे । तीसरी अवस्था वानप्रस्थ आश्रम की थी । इस अवस्था में घर त्याग कर वनों में जाना पड़ता था । चौथी अवस्था सन्यास आश्रम की थी । इसमें व्यक्ति आत्म चिंतन द्वारा ईश्वर को प्राप्त करने की कोशिश करता था।
कुछ कब्रों में अन्य की तुलना में अधिक वस्तुएं प्राप्त की गई थी, ब्रह्मगिरि में एक कंकाल को 33 सोने के मनकों, 2 पाषाण मनकों, 4 ताम्बे की चूड़ियों और एक शंख के साथ दफनाया गया था, अन्य कंकालों के साथ केवल कुछ बर्तन ही रखे गए थे, ये सबूत दफनाया गया, ये साक्ष्य सुझाते हैं कि दफनाए गए लोगों की स्थिती में कुछ अंतर व्याप्त था।
ऋग वैदिक काल में अनेक कारणों से युद्ध लड़े जाते थे:
1.मवेशियों को पकड़ने के लिए युद्ध लड़े जाते थे
2.वे भूमि के लिए जो कि चराई एवं उस पर जौ के रूप में अच्छी फसल उपजाने एवं शीघ्रता से फसल पकाने के लिए महत्वपूर्ण होती थी, युद्ध लड़ते थे।
3.कुछ युद्ध पानी के लिए एवं लोगों को अधिकृत करने हेतु भी लड़े गए थे।
आर्य एक पशुपालक बस्ती के रूप में रहते थे । आर्य लोग गाय, बैल, भेड़, बकरी आदि पशुओं को पालते थे । आर्यों के पास हजारों की संख्या में पालतू पशु होते थे । जहाँ चारा-पानी मिल जाता वही बस जाते थे । जब चारा-पानी कम पड़ने लगता तो कुछ लोग जानवरों को लेकर आगे निकल जाते थे । जहाँ चारा मिलता आर्य लोग वहां पर ही बस जाते थे । इस तरह आर्य समूहों में कई खेपों में आये और अपने पशुओं के साथ नई-नई जगहों पर बसते गये । आर्यों ने पशुओं से सम्बंधित व्यवसाय जैसे उन कातना व बुनना, घोड़े के रथ-जोतना तथा लकड़ी की वस्तुएं बनाना आदि कार्य करते थे । लगभग 1200 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व तक आर्य सिन्धु, सतलज, व्यास और सरस्वती नदियों के किनारे आ बसे ।
वैदिक काल में साहित्यिक जीवन में अभूतपूर्व प्रगति हुई थी। इस काल में रामायण और महाभारत की रचना हुई । इन महाकाव्यों से उस समय की सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक स्थितियों का पता चलता है, इस समय आर्यों का समाज व्यवस्थित हो गया था।
रामायण :- रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में की गयी थी ।इस ग्रन्थ में कोसल के राजा दशरथ के पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन और कार्यों का वर्णन किया गया है । आज भी रामचंद्र जी के जीवन पर आधारित रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है ।
महाभारत :- महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की । इस महाकाव्य में कुरु वंश के कौरवों तथा पांडु वंश के पांडवों की कथा मुख्य रूप से दी गयी है।
इस समय संस्कृत में तीन और वेड रचे गये । इनके नाम यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद हैं इन वेदों में यज्ञों और मन्त्रों का उल्लेख है । वेदों में ईश्वर से प्रार्थना भी किए जाने का वर्णन है । इस समय संस्कृत में तीन और वेड रचे गये। इनके नाम यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद हैं इन वेदों में यज्ञों और मन्त्रों का उल्लेख है। वेदों में ईश्वर से प्रार्थना भी किए जाने का वर्णन है । ईश्वर से प्रार्थना की जाती थी कि अच्छी वर्षा हो और अच्छी धुप खिले जिससे फसल अच्छी पैदा हो ।
वैदिक काल में लोग गंगा-यमुना नदियों के किनारे बसने लगे थे इन इंदियों में मैदान में जन खेती करने लगे थे । सामान्यतः एक जन के लोग समूह में आकर बस जाते थे जिस क्षेत्र में वे आते थे । वहीँ गाँव बसाकर रहने लगते और खेती करने लगे । इस प्रकार एक इलाका एक जन का जनपद कहलाता था। आर्य लोगों ने गाँव के अन्य लोगों से मिलकर रहने लगे और उनके देवी-देवताओं और भी मानने लगे । इन लोगो में एक दूसरे की जमीनों में खेती कर लेते थे और एक दूसरे की फसल लूट लेना या पशुओं की चौरी करने से आपस में युद्ध भी होने लगे थे । युद्धों का संचालन राजन्यों और राजा के नेतृत्व में होता थे। खेती करने वालों को गृहपति कटे थे । गाँव के मुखिया को सुमंत कहते थे । राजा के रिश्तेदार राजन्य कहलाते थे। राजन्य देखभाल के लिए गाँव-गाँव जाते थे । आर्य लोग यज्ञ भी करने लगे थे। इस समय राजसूय यज्ञ होते थे । पुरोहित राजा को राज्य करने का अधिकार प्रदान करते थे । इसके अलावा अश्वमेघ यज्ञ में राजा एक घोडा छोड़ता था । वह जिन क्षेत्रों से गुजर जाता था उस क्षेत्र पर राजा का अधिकार हो जाता था। इस प्रकार धीरे-धीरे आर्य सभ्यता और संस्कृति का विकास होने लगा ।
पुरातात्विक उत्त्खनन के दौरान, महापाषाण (मेगालिथ),गोल पाषाण शिलाखंड की परिधि अथवा भूमि पर स्थित एकल वृहद पाषाण के रूप में प्राप्त किये गए थे जो कि भूमि के नीचे अंत्येष्टि को इंगित करता है। आम तौर पर, मृतकों को काले और लाल मृदभांड़ वाले विशिष्ट बर्तनों के साथ दफनाया गया था। मृतकों के साथ उपकरण और लोहे के हथियार, घोड़ों के कंकाल, अश्व-उपकरण, पाषाण एवं सोने के उपकरण एवं आभूषण भी मृतकों के साथ दफ़न किये गए थे। कभी कभी, मेगालिथ में एक से अधिक कंकाल निहित होते थे, यह संकेत देता है कि एक ही परिवार से संबंधित लोगों को अलग-अलग समय में एक ही स्थान पर दफनाया गया था, मेगालिथ, स्मृतिस्वरूप इर्द-गीर्द गोल पाषाण शिलाखंड की परिधि के साथ चिन्हित अंत्येष्टि स्थल होते थे।

1 गोल वृहद पाषाण मेगालिथ के रूप में जाने जाते हैं।
2 ये मेगालिथ अन्तेष्टि स्थलों को चिह्नित करने हेतु इस्तेमाल किये जाते थे।
3 महापाषाण (मेगालिथ) स्थापित करने का प्रचलन 3000 साल पहले शुरू हुआ था और यह सम्पूर्ण दक्कन, दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और कश्मीर में प्रचलित था।
A. 1500 साल पहले
B. 2500 साल पहले
C. 2300 साल पहले
D. 3000 साल पहले
शक्तिशाली राज्यों के राजाओं और गणों के बीच युद्ध बहुत लंबे समय तक चला। यह 1,500 साल पहले अंतिम गणों पर गुप्त शासकों द्वारा विजय प्राप्त की गयी थी।
A. विश्वामित्र
B. बुद्ध
C. वस्सकार
D. कम्मकार
अजातशत्रु वज्जी पर हमला करना चाहता था। उन्होंने इस मामले पर बुद्ध की सलाह पाने के लिए अपने मंत्री वस्सकार को भेजा था।
A. शूद्र
B. ब्राह्मण
C. क्षत्रिय
D. वैश्य
क्षत्रिय वर्ण पदानुक्रम में से एक था, और बुद्ध और महावीर क्षत्रिय वर्ण से थे।
A. उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में।
B. उपमहाद्वीप के उत्तर-पूर्व में।
C. उपमहाद्वीप के दक्षिण-पश्चिम में।
D. उपमहाद्वीप के दक्षिण-पूर्व में।
ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद - इनमें से सबसे पुराना वेद ऋग्वेद है, जिसकी रचना लगभग 3500 साल पहले हुई थी।
A. दास
B. ऋषि
C. गुलाम
D. आर्य
दास अथवा दस्यु वे लोग थे जो यज्ञ नहीं करते थे और संभवतः दूसरी भाषाएँ बोलते थे, जो आर्यों की समझ के परे थी। वे आर्यों के विरोधियों (प्रतिपक्षी) के रूप में माने गए।
A. सोमा
B. सुरा
C. दूध
D. छाछ
आर्य मादक पेय पदार्थ भी बनाते थे। आम उत्सवों पर 'सुरा' का उपभोग किया जाता था । एक अन्य लोकप्रिय पेय पदार्थ 'सोमा' होता था जिसे दूध और एक दुर्लभ पौधे के रस से तैयार किया जाता था। विशेष धार्मिक आनुष्ठानिक अवसरों पर ही इस पेय का उपभोग किया जाता था।
A. उत्तर–पूर्व
B. दक्षिण भारत और कश्मीर
C. कश्मीर
D. उत्तर–पश्चिम
महापाषाण के निर्माण की शुरुआत लगभग 3000 साल पहले हुई थी। इस संस्कृति में अन्त्येष्टियों (कब्रों) को वृहद शिलाखण्ड जिसे महापाषाण कहा जाता था द्वारा चिन्हित किया जाता था। महापाषणिक कब्रों में लौह उपकरण और हथियार भी दफनाए गए थे। कुछ कब्रों में विभिन्न पात्र भी मिले हैं।
A. देवी देवताओं को प्रसन्न करने हेतु
B. राजाओं को प्रसन्न करने हेतु
C. सभासदों को प्रसन्न करने हेतु
D. विजित राज्यों के लोगों को प्रसन्न करने हेतु
आर्य सूर्य, पृथ्वी, आकाश, वायु, वर्षा, अग्नि आदि जैसी विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों की उपासना देवी-देवताओं के रूप में करते थे। घी, अनाज आदि की अग्नि में आहुति देकर यज्ञों का आयोजन देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए किया जाता था ।
A. 10 कमरे
B. 6 कमरे
C. 5 कमरे
D. 4 कमरे
एक पाँच कमरों वाले मकान के आँगन के बीचोंबीच, एक बड़े से चौपाया मृद पात्र में दफन एक मानव कंकाल प्राप्त हुआ है। यह शासक प्रमुख का मकान प्रतीत होता है। महापाषाण के निर्माण की शुरुआत लगभग 3000 साल पहले हुई थी। इस संस्कृति में अन्त्येष्टियों (कब्रों) को वृहद शिलाखण्ड, जिसे महापाषाण कहा जाता था द्वारा चिन्हित किया जाता था। महापाषणिक कब्रों में लौह उपकरण और हथियार भी दफनाए गए थे। कुछ कब्रों में विभिन्न पात्र भी मिले हैं।
A. 200
B. 400
C. 360
D. 350
आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व चरक नाम के प्रसिद्द चिकित्सक ने चिकित्सा शास्त्र पर चरक संहिता नामक ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ में उन्होंने वर्णित किया है कि मानव शरीर में 360 अस्थियां होती हैं।
A. इतिहासकार
B. इंजीनियर
C. शासक
D. चिकित्सक
लगभग 2000 वर्ष पूर्व , चरक नामक एक प्रसिद्ध चिकित्सक था, जिसने चिकित्सा पर चरक संहिता नाम से एक पुस्तक की रचना की थी। यह प्राचीनतम सुरक्षित संस्कृत हस्तलिखित चिकित्सा ग्रन्थ है, और यह सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रन्थ के रूप में है।
A. कुक्कूर
B. गाय
C. बैल
D. बिल्ली
आर्य सुनियोजित गांवों में निवास करते थे। वे झोपड़ियों में रहते थे। इन झोपड़ियों के चारों ओर मेडबंदी की जाती थी। खेत झोपड़ियों के समीप स्थित होते थे। आर्यों के जीवन में गायों का महत्वपूर्ण स्थान था। प्रत्येक घर में अनेक गायें होती थी।
A. रुद्र
B. ब्रह्मा
C. इंद्र
D. वरुण
प्रारंभिक आर्य सूर्य, पृथ्वी, आकाश, वायु, वर्षा, अग्नि आदि जैसी विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों की उपासना करते थे। ये सभी उनके देवी-देवता के रूप में थे। इन देवताओं को मानव-रूप दिया गया था एक मनुष्य के रूप में दिया गया। ऋग्वेद में भगवान इंद्र को सर्वश्रेष्ठ देवताओं में से एक के रूप में पूजा जाता था। उसे साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता था। भगवान इंद्र ब्रह्मांड के तमाम देवताओं के राजा थे और उन्हें पुरंदर- 'शत्रु विनाशक' कहा जाता था।
A. इण्डो-चाइना
B. इण्डो-रशिया
C. इण्डो-यूरोपीयन
D. इण्डो-अरेबियन
कुछ भारतीय और यूरोपीय भाषा इस भाषाई समूह की हैं। वे एक भाषा समूह की कहलाती हैं क्योंकि इनमें मूलतः कुछ शब्दों में समानता पाई जाती है। संस्कृत इंडो-यूरोपीय भाषा समूह का हिस्सा है।
A. इनामगाँव।
B. कुरनूल।
C. चिरांद।
D. मेहरगढ़।
महाराष्ट्र में इनामगाँव, भारत में सबसे बड़ी ताम्र-पाषणिक बस्तियों में से एक है। यह अनुमान है कि इसकी चरमावस्था में करीब 1,000 लोग यहाँ रहते होंगे। यह बस्ती 1,500 ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसा पूर्व तक लगभग 900 वर्षों तक अस्तित्व में रही थी।
पुराणों और महाभारत का संकलन व्यास द्वारा किया गया था।
ब्राह्मणों द्वारा आश्रम व्यवस्था विकसित की गई थी।
तीर्थयात्री पवित्र स्थानों की यात्रा करने करने वाले पुरुष और महिलाएं होते हैं।
वेद चार हैं- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।
आर्य लोग लगभग 1200 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व तक निम्नलिखित नदियों के किनारे बसे थे -
1. सिन्धु
2. सतलज
3. व्यास
4. सरस्वती
आर्य लोगों के मुख्य व्यवसाय थे -
1. कृषि करना ।
2. पशु पालन करना ।
यज्ञ के बाद जन की एक सभा होती थी सभा में सब लोग चुने गये। राजा को बधाई देते थे जन के लोग अपने घर से उसके लिए कुछ भेंट व चढ़ाव लाते थे । कोई घी, गाय या सोने के जेवर देते थे । इस भेंट को आर्य लोग बलि कहते थे । राजा इन भेटों को जरुरत के अनुसार बाँट देता था ।
वैदिकालीन युद्धों में जन के सभी लोग मिलकर लड़ते थे । युद्ध की अगुवाई करने के लिए जन का राजा चुना जाता था । जन को युद्ध में विजय दिलाना राजा का काम था ।
A. गांधार-कम्बोज।
B. मगध-अंग।
C. गांधार-शूरसेन।
D. कम्बोज-अवन्ति ।
भारत के उत्तर-पश्चिम सीमावर्ती क्षेत्र अथवा उत्तरापथ के महाजनपद थे गांधार और कम्बोज| पाकिस्तान के पेशावर और रावलपिन्डी के क्षेत्र को गांधार महाजनपद कहा जाता था। इसकी राजधानी तक्षशिला थी यह अपने समय में विद्या और व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था ।
A. मगध था।
B. गांधार था।
C. पांचाल था।
D. अश्मक था।
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में सोलह जनपद में दक्षिण भारत का जनपद था अश्मक| यह गोदावरी (आंध्र प्रदेश ) नदी के तट पर यह महाजनपद स्थित था। इसकी राजधानी पोतन (पौदन्य) थी बुद्ध काल में अवन्ति ने इसे जीतकर अपनी सीमा के अंतर्गत समाहित कर लिया।
A. वत्स महाजनपद था।
B. कोसल महाजनपद था।
C. काशी महाजनपद था।
D. पांचाल महाजनपद था ।
वत्स महाजनपद गंगा के दक्षिण में स्थित था । इसकी सीमाएं कौशल राज्य को स्पर्श करती थीं । इसकी राजधानी कौशाम्बी थी पुराणों में भी वत्स राज्य का वर्णन मिलता है। बुद्ध के काल में यहाँ का राजा उदयन था वत्स का राज्य भी बुद्ध के समय चार प्रमुख राजतंत्रों में था ।
A. पाटलिपुत्र थी।
B. चम्पा थी।
C. गिरिवज्र थी।
D. महिष्मती थी ।
मगध का राज्य उत्तर में गंगा, दक्षिण में विंध्य पर्वत तक तथा पूर्व में चम्पा से पश्चिम में सोन नदी तक फैला हुआ था। इसकी राजधानी गिरिवज्र थी। बिम्बिसार के बाद इसका नाम बदलकर राजगृह रखा गया।
पुजारियों द्वारा वर्ण व्यवस्था को जन्माधारित बताकर उचित ठहराया गया था ।
बहुत से राजाओं ने ब्राह्मणों द्वारा निर्धारित वर्ण प्रणाली को स्वीकार नहीं किया। कुछ राजाओं ने कहा कि वे पुजारियों पर वर्चस्व रखते हैं ।
राजा जो अश्वमेध जैसे बड़े बलिदान किया करते थे, को शक्तिशाली माना जाता था, और वे जनपद के राजा बन गए ।
लगभग 2500 वर्ष पूर्व, कुछ जनपद दूसरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली और विशाल बन गए, अधिकाँश महाजनपद के राजधानी राज्य थे, एवं इनमे से कईं दुर्गीकृत थे।
इतिहासकारों के अनुसार, इतनी विशाल प्राचीरों के निर्माण में हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का श्रम लगा था। इतने विशाल निर्माण में हजारों ईंटों और पाषाणों के उपयोग की आवश्यकता पड़ी ।
विशाल किलों के निर्माण और विशाल सेनाओं के रखरखाव हेतु शासकों को और अधिक संसाधनों की आवश्यकता थी। अतः शासकों ने सामयिक उपहारों पर निर्भर रहने के स्थान पर नियमित कर एकत्र किये ।
गुलाम पुरुषों और महिलाओं (दास और दासी) और भूमिहीन मजदूरों (कम्मकर) को कृषि भूमि पर काम करना पड़ता था और इसलिए इन्होनें श्रम उपलब्ध कराया।
मगध सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था और लगभग दो सौ वर्षों तक ऐसा बना रहा।
महापदम नंद, मगध के नन्द वंश का शासक था। उसने उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम हिस्से में अपने नियंत्रण का विस्तार किया ।
बिहार में राजगृह (वर्तमान राजगीर) कई वर्षों तक मगध की राजधानी थी। बाद में पाटलीपुत्र इसकी राजधानी बन गई ।
मगध की राजधानी राजगृह से पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) स्थानांतरित कर दी गई थी ।
महिला, दास और कम्मकर, गण या संघ की विधानसभाओं में भाग नहीं ले सकते थे।
भगवान बुद्ध और भगवान महावीर गण या संघ से सम्बद्ध थे ।
हम बौद्ध और जैन ग्रंथों में संघ का सम्पूर्ण विवरण प्राप्त कर सकते हैं।
गण कई सदस्यों के एक समूह के लिए प्रयोग किया जाता है, और संघ का तात्पर्य महाजनपद के विभिन्न समूहों के लोगों के संगठन अथवा संस्था से है।
जब अजातशत्रु वज्जी पर आक्रमण करना चाहता था, तो उसने बुद्ध की सलाह प्राप्त करने के लिए, वस्सकर नामक अपने मंत्री को भेजा था।
A. भारत
B. चीन
C. मेसिडोनिया
D. अमेरिका
सिकंदर 2300 साल पहले एक विश्व विजेता बनना चाहता था। वह मेसिडोनिया, जो यूरोप में है,का रहने वाला था।
A. महिलाओं, वैश्य, दास
B. केवल महिलायें और वैश्य
C. महिलाओं, दास और क्म्मकार
D. वैश्य और क्म्मकार
गण या संघ पर कई शासकों का शासन होता था। सभी राजा सभाओं में विभिन्न मुद्दों पर बहस और चर्चाओं को आयोजित करते थे। दास, महिलाओं और क्म्मकारों को इन सभाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।
A. लोहे के हल का उपयोग
B. उर्वरकों का उपयोग
C. सिंचाई का उपयोग
D. बैल का उपयोग
कृषि में एक बड़ा परिवर्तन लोहे के हल का प्रयोग था।
A. प्रोत्साहन राशी
B. अधिलाभ
C. वेतन
D. अनाज
महाजनपद में राजा युद्ध और शांति के दौरान एक बड़ी अच्छी तरह से सुसज्जित और नियमितसेना को बनाए रखने के लिए वेतन का भुगतान करते थे।
A. अपनी राजधानी का दुर्गीकरण
B. सेना को भारी वेतन देना
C. प्रशासन के लिए विभिन्न अधिकारियों को नियुक्त करना
D. ब्राह्मणों को कर मुक्त गांव देना
किलों को बनाया गया था, क्योंकि शायद लोगों को हमलों का डर था और संरक्षण की जरूरत थी। यह भी संभावना है कि कुछ शासक उनके धन का दिखावा करना चाहते थे।
A. काले और लाल रंग के पात्र
B. चित्रित धूसर पात्र
C. गुलाबी रंग के पात्र
D. सफेद पात्र
चित्रित धूसर पात्र, जिन्हें आम तौर पर सरल रेखाओं और ज्यामितीय पैटर्न द्वारा चित्रित किया था।
A. दो समूहों
B. तीन समूहों
C. चार समूहों
D. छह समूहों