A. सामवेद
B. ब्राह्मण
C. पुराणों
D. महाभारत
उत्तर वैदिक पुस्तकों को गंगा और यमुना के क्षेत्रों में विशेष रूप से भारत के उत्तरी भाग में लिखा गया था। सामवेद को भी बाद में वैदिक साहित्य में शामिल किया गया था।
A. भूमिहीन कृषि मजदूर
B. लोहार
C. क्षत्रिय
D. किसान
धान के प्रत्यारोपण का काम एक थकाने वाला काम था। यह काम आम तौर पर क्म्मकार या दास द्वारा किया जाता था।
A. ब्राह्मण
B. क्षत्रिय
C. वैश्य
D. शूद्र
इस तरह के लोगों को पुजारियों द्वारा शूद्र के रूप में माना गया था व उन्हें कई अनुष्ठानों से बाहर रखा गया था।
A. पुजारी
B. क्षत्रिय
C. शूद्र
D. वैश्य
उत्तर वैदिक पुस्तकों को पुजारियों द्वारा लिखा गया था। ये किताबें सोमवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद हैं। इन किताबों को उत्तर वैदिक पुस्तक कहा जाता है क्योंकि वे ऋग्वेद के बाद लिखी गयी थी।
A. सारथी
B. गार्ड
C. दास
D. कुम्बकार
सारथी राजा के कारनामों को देखता था और उसकी महिमा के किस्से सुनाता था।
A. अध्यापक
B. घोड़े का बलिदान
C. राजा
D. लोग
कुछ राजाओं द्वारा अश्वमेध या घोड़े के बलिदान के द्वारा उनके पराक्रम दिखाने के लिए अनुष्ठान किया जाता था।
A. 1000 साल पहले
B. 2000 साल पहले
C. 3000 साल पहले
D. 4000 साल पहले
प्रारंभ में राजा लोगों द्वारा चुने गए थे। लेकिन कुछ साल बाद, उस तरीके में परिवर्तन किया गया था।
A. पल्लव शासकों
B. चोल शासकों
C. मौर्य शासकों
D. गुप्त शासकों
एक गण या संघ में एक नहीं बल्कि कई शासक थे।
A. चित्रितलाल पात्र
B. काले पात्र
C. चितित्र धूसर पात्र
D. चिकने काले पात्र
चित्रित धूसर पात्र को अक्सर काले या लाल रंग से सरल डिजाइन के साथ सजाया गया था। यह उत्तरी भारत की गंगा सभ्यताओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी।
A. भूमि जहाँ जनों ने अपने पैर रखें थे
B. शूद्र की भूमि
C. ऐतिहासिक स्मारकों की भूमि
D. संग्रहालयों
जनपद एक गणतंत्र या एक राजशाही हो सकता था। कुछ जनपदों ने बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया और वे महाजनपद बन गयें थे।
A. सताबाधी
B. मगधी
C. पाली
D. संस्कृत
मगधी सामान्यतः लेखन में देवनागरी लिपी का प्रयोग करते थे। मगधी की एक विकसित लिपी कैथी थी।
A. मगध
B. मल्ला
C. सूरसेना
D. कम्बोजा
मगध साम्राज्य मोटे तोर पर आधुनिक बिहार के पटना, गया तथा पूर्व बंगाल के कुछ भागों से बना था।
A.
एक कबीला जो कि वज्जी जनपद का एक भाग था।
B. एक कबीला जो कि छेदी जनपद का एक भाग था।
C. एक कबीला जो कि वत्स जनपद का एक भाग था।
D. एक कबीला जो कि मगध जनपद का एक भाग था।
वज्जी एक आठ वेदों के कबीलों के महासंघ का प्रतिनिधित्व करते थे, लिच्छावी तथा जनात्रिकास सबसे अच्छी तरह से जाने जाते थे। महावीर लिच्छावी कबीला का एक क्षत्रीय राजा था। लिच्छावियों के मुख्यालय वैशाली में थे।
पहले अजातशत्रु ने गण अथवा संघ पर 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में विजय प्राप्त की थी, तत्पश्चात उसने 4 शताब्दी ईस्वी के आसपास गुप्त शासक समुद्रगुप्त के राज्य पर विजय प्राप्त की थी। इस तरह विजय पूर्ण हो गई।
जनपद के लोग मृदभांडो (मिट्टी) का निर्माण करते थे। इनमें से कुछ धूसर रंग के एवं अन्य लाल रंग के थे। इन स्थलों पर एक विशेष प्रकार के मृदभांड प्राप्त किये गए हैं, जो चित्रित धूसर मृदभांड कहलाते हैं, जैसा कि नाम से स्पष्ट है ये धूसर रंग के मृदभांड थे एवं इन पर साधारणतया सरल रेखाएं और ज्यामितीय पद्धति में आकृतियां चित्रित थी।
महाजनपद के राजधानी शहर को लोगों को चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की विशाल प्राचीरों के साथ दुर्गीकृत किया गया था क्योंकि लोगों को अन्य राजाओं की ओर से आक्रमण का भय था एवं वे संरक्षण चाहते थे, कुछ शासक विशाल प्राचीरों और किलों के निर्माण द्वारा उनके धन एवं शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते थे।
दुर्ग ने कई मायनों में राजाओं की सहायता की; वे दुर्ग के भीतर लोगों और भूमि को नियंत्रित करने में सक्षम थे। क्षेत्र पर नियंत्रण ने उनकी अपने प्रदेशों के विस्तार के लिए विशाल सेनाओं के रख-रखाव हेतु अधिक संसाधन प्राप्त करने में उनकी सहायता की ।
महाजनपद युग के दौरान कृषि के क्षेत्र में हुए दो बड़े बदलाव थे :
(1 ) हल के लोहे के फल का बढ़ता उपयोग
(2) लोगों ने धान की रोपाई शुरू कर दी।
बिम्बिसार और अजातशत्रु मगध के दो बहुत ही शक्तिशाली शासक थे, जिन्होनें उनके महान नेतृत्व कौशल, धन और शक्ति के साथ अंग, कोसल आदि जैसे अन्य महाजनपदों पर विजय प्राप्त की ।
सिकंदर यूरोप में मैसेडोनिया में रहता था एवं सम्पूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त करना चाहता था। लेकिन वह मिस्र, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ भागों पर विजय प्राप्त करने में सक्षम रहा था।
सिन्धु सभ्यता के बाद छठी शताब्दी ई० पू० में जाकर पुनः नगरों का विकास हुआ | इसे इतिहास में द्वितीय नगरीकरण के नाम से जानते हैं |
सिकंदर का युद्ध पुरू के साथ झेलम और रावी नदी के बीच हुआ था |
घनानंद मगध महाजनपद के नन्द वंश का अंतिम शासक था |
1. सही
2. सही
3. सही
4. गलत
बिम्बिसार और अजातशत्रु मगध के दो बहुत ही शक्तिशाली शासक थे, उन्होंने अन्य जनपदों को जीतने के लिए सभी संभव साधनों का इस्तेमाल किया। महापदम नंद, एक अन्य महत्वपूर्ण शासक था। उसने उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम हिस्से में अपने नियंत्रण का विस्तार किया । बिहार में राजगृह (वर्तमान राजगीर) कई वर्षों तक मगध की राजधानी था । बाद में पाटलीपुत्र इसकी राजधानी बन गई ।
वज्जि में सरकार की प्रणाली गण या संघ के रूप में जानी जाती थी।वज्जि का प्रशासन एक शासक नहीं अपितु अनेक शासकों द्वारा चलाया जाता था, प्रत्येक शासक एक राजा के रूप में जाना जाता था। ये राजा सभी अनुष्ठानों का आयोजन एक साथ किया करते थे। ये सभी राजा सभाओं में परस्पर भेंट किया करते थे । इन सभाओं में विचार-विमर्श एवं चर्चा के माध्यम से वे ‘क्या एवं कैसे किया जाना है’ का निर्णय लेते थे । भगवान बुद्ध और भगवान महावीर गण या संघ से सम्बद्ध थे ।
राजतन्त्र :- जिन महाजनपदों का संचालन राजा द्वारा होता था उन्हें राजतन्त्र कहा गया| ये वंशानुगत होते थे |गणतंत्र :- इसमें शासन जनता द्वारा चुने प्रतिनिधि अथवा राजा चलते थे |
जनपद का अर्थ है वह स्थान जहाँ लोग निवास करते है | कुछ जनों ने कृषि, उद्योग, वाणिज्य आदि का विकास किया | इनके जुड़ने से जनपद का निर्माण हुआ | ईसा पूर्व छठी तक आते-आते जनपद महाजनपदों के रूप में विकसित हो गये |
महाजनपद में शहर के बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए एवं शहर की सुरक्षा हेतु विशाल सेना का रख-रखाव करने के लिए साधारण लोगों से कर एकत्र किए जाते थे। फसल से प्राप्त कर राजा के अधिकारियों के लिए राजस्व का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत था। उपज या भाग (अंश) का 1/6 भाग फसल कर के रूप में निश्चित किया गया था, शिल्पकारों को भी राजा को एक दिन के श्रम के रूप में कर अदा करना होता था, चरवाहों को भी वस्तु के रूप में कर अदा करना पड़ता था एवं पशु अथवा पशु-उत्पाद का भुगतान करना पड़ता था। व्यापार योग्य वस्तुओं और वन उपज पर भी करारोपण किया गया था। राजा इन करों का मुख्य लाभार्थी था।
सिकन्दर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव राजनैतिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र पर पड़ा |
राजनैतिक क्षेत्र :- सिकन्दर का भारत पर आक्रमण 326 ई० पू० में हुआ इससे भारतीय इतिहास की तिथि निर्धारण में सहायता मिलती है | सिकन्दर के आक्रमण से भारत और यूनान में मित्रता कायम हुई जिससे भारत के द्वार यूनानी सम्पर्क के लिए खोले |
सांस्कृतिक क्षेत्र :- विदेशों से व्यापारिक बड़ा और सांस्कृतिक सम्बन्ध स्थापित हुए |
भारतीय शिल्पकला और ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में यूनानी लेखकों का प्रभाव पड़ा |
भारतीय सिक्कों पर यूनानी सिक्कों की निर्माण शैली का प्रभाव दिखा |
महाजनपद काल में राजा की शक्ति बढ़ गई थी | यह एक अतिविशिष्ट व्यक्ति बन गया था और यह समाज का रक्षक था | यह प्रजा की रक्षा, राज्य में शांति व्यवस्था, कल्याण और न्याय करता था |राज्य की आय के लिए प्रजा से कर वसूला जाता था | व्यापार के द्वारा भी आय प्राप्त होती थी | इस समय वस्तुओं की खरीद एवं बिक्री रूपये-पैसे द्वारा होने लगी थी | इस युग में शहरों का विकास प्रायः शिल्प केन्द्रों, व्यापारी-केन्द्रों और राजधानियों के आस-पास हुआ | धीरे धीरे शिल्पकला विकसित हुई | शिल्पकार एक स्थान पर रहकर कार्य करने लगे | रोजगार वंशानुगत होने लगे | गाँवों और शहरों का विकास भी हुआ |
1. वत्स इलाहाबाद
2. लोहे की खाने सिंहभूमि
3. मगध मुंगेर, गया
4. सिकंदर मेसिडोनियाs
5. अवन्ति मालवा
6. कोशल फ़ैजाबाद
हम कह सकते है कि सैन्धव लिपि आज भी एक पहेली बनी है क्योकि इतिहासकार एवं पुराविद सैन्धव सभ्यता लिपि को पढ़ने में असफल रहे हैं और जो साक्ष्य मिले है। उसपर विद्वानों का एक मत नहीं है इसलिए हम कह सकते है। यह एक पहेली है।
हड़प्पा सभ्यता में मोहरों को मूल्यवान माना है इससे सामान की सुरक्षा के लिए और भेजने वाला के व्यापारी की पहचान के लिए व्यापारी सामान की पहचान बनाने के लिए करते थे। पार्सल को ठीक प्रकार से बांधकर उस पर गीली मिटटी लगायी जाती थी। पार्सल को दूसरे देशों को भेज देते थे।
1. महान स्नान का क्या उपयोग था?
2. महान स्नान में क्या सामग्री इस्तेमाल की जाती थी?
3. टंकी में पानी कहाँ से लाया जाता था?
उत्तर :
1. महत्वपूर्ण लोग (पुजारी, शासक) इस टैंक में अनुष्ठान स्नान किया करते थे।
2. टैंक का निर्माण उसमें जल रोकने हेतु भट्ठे में पकायी गई ईंटों, जिप्सम और कोलतार के लेप के साथ किया गया था।
3. जल संभवतया कुओं से लाया जाता था और इस्तेमाल के बाद बाहर की ओर बहा दिया जाता था।
1.महान स्नान का क्या उपयोग था?
उत्तर :
1. महत्वपूर्ण लोग (पुजारी, शासक) इस टैंक में अनुष्ठान स्नान किया करते थे।
2. टैंक का निर्माण उसमें जल रोकने हेतु भट्ठे में पकायी गई ईंटों, जिप्सम और कोलतार के लेप के साथ किया गया था।
3. जल संभवतया कुओं से लाया जाता था और इस्तेमाल के बाद बाहर की ओर बहा दिया जाता था।
हड़प्पा सभ्यता के नगरों में अपनायी गई नगर योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न थी :
• सड़कें, गलियां और पथ एक दूसरे से चौड़ाई के एक निश्चित अनुपात में निर्मित की गई थी, सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी, इस प्रकार आयताकार जाल पद्धति में शहर को अनुपात में विभाजित किया गया था।
• भवनों का निर्माण दीर्घावधिक स्थायीत्व हेतु अधिकांशतया पकी हुई ईटों से किया गया था, ईंटों के आकार का भी एक निश्चित माप तय किया गया था ।
• कुछ शहर दुर्गीकृत प्राचीरों एवं रक्षा बुर्ज के साक्ष्य भी दर्शाते हैं।
हड़प्पा शहरों को दो या दो से अधिक भागों में विभाजित किया गया था। पश्चिमी भाग अधिक ऊँचा था और यह गढ़ कहलाता था। पूर्वी भाग या निचले शहर निर्माण पकी हुई ईंटों से किया गया था। इन ईंटों को एक साथ गूंथे हुए रूप में बिछाया गया था,जिससे दीवार मजबूती से बनी थी, कुछ शहरों में एक विशाल बड़ी पानी की टंकी या 'महान स्नानागर' था। इन टैंकों में पूजा के लिए अग्नि वेदियां भी प्राप्त की गई हैं ।
अधिकाँश घर एक या दो मंजील ऊँचे होते थे। वे एक आंगन के चारों ओर निर्मित किये गए थे । शहरों में ढकी हुई जल निकासी व्यवस्था भी थी। जल निकासी व्यवस्था में नियमित अंतराल पर सफाई हेतु मैनहोल (मुख्य नाला) भी स्थित था।
हड़प्पा शहरों को दो या दो से अधिक भागों में विभाजित किया गया था। पश्चिमी भाग अधिक ऊँचा था और यह गढ़ कहलाता था। पूर्वी भाग या निचले शहर निर्माण पकी हुई ईंटों से किया गया था। इन ईंटों को एक साथ गूंथे हुए रूप में बिछाया गया था,जिससे दीवार मजबूती से बनी थी, कुछ शहरों में एक विशाल बड़ी पानी की टंकी या 'महान स्नानागर' था। इन टैंकों में पूजा के लिए अग्नि वेदियां भी प्राप्त की गई हैं ।
अधिकाँश घर एक या दो मंजील ऊँचे होते थे। वे एक आंगन के चारों ओर निर्मित किये गए थे। शहरों में ढकी हुई जल निकासी व्यवस्था भी थी। जल निकासी व्यवस्था में नियमित अंतराल पर सफाई हेतु मैनहोल (मुख्य नाला) भी स्थित था।
हड़प्पा सभ्यता के नगरों में अपनायी गई नगर योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न थी :
• नगर आम तौर दो भागों में विभाजित थे- गढ़ और निम्न शहर जिसमें महत्वपूर्ण इमारतें और लोगों के दो मंजिला आवास थे।
• सड़कें, गलियां और पथ एक दूसरे से चौड़ाई के एक निश्चित अनुपात में निर्मित की गई थी, सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी, इस प्रकार आयताकार जाल पद्धति में शहर को अनुपात में विभाजित किया गया था।
• भवनों का निर्माण दीर्घावधिक स्थायित्व हेतु अधिकांशतय: पकी हुई ईटों से किया गया था, ईंटों के आकार का भी एक निश्चित माप तय किया गया था।
• कुछ शहर दुर्गीकृत प्राचीरों एवं रक्षा बुर्ज के साक्ष्य भी दर्शाते हैं।
सैन्धव सभ्यता के निवासी देवी-देवता की आराधना करते थे पुरावशेषों के अध्ययन से पता चला है की खुदाई में मिटटी की मूर्ति प्राप्त हुई है । यह मूर्ति उन लोगो की देवी की मूर्ति थी। पत्थर के चौकोर पट्टे पर एक आकृति के सिर पर एक भैसे के सींग की तस्वीर है। इसके चारों तरफ अन्य जानवरों के चित्र बने है। यह कोई देवता ही रहा होगा इसे सिन्धुवासी पशुओं का देवता मानते होगे और उसकी पूजा करते होगे इसके आलावा कुछ मुहरों पर पीपल की पत्तियों और सांप की आकृतियों जैसी भी बनी मिली है। शायद वे इन सबकी पूजा करते होगे लेकिन इन सबके कोई साक्ष्य प्रमाण नहीं मिले है। इतिहासकार एवं पुराविद सैन्धव सभ्यता लिपि को पढ़ने में असफल रहे हैं। कवल पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर विभिन्न अनुमान लगाये गये है।
विद्वानों के अनुमान के आधार पर सैन्धव धर्म के अभिन्न अंग निम्न लिखित थे :-
मातृदेवी की उपासना
पशुपति (शिव) के रूप में देवता की पूजा
लिंग तथा योनि-पूजा
वृक्ष पूजा
पशु की पूजा ।
सिन्धु घाटी सभ्यता की नगर योजना की निम्न लिखित विशेषताएं थी।
सुव्यवस्थित नगर योजना - नगरीय सभ्यता भव्य रूप प्रस्तुत करती है। नगरो के अवशेषों से प्रमाण मिलता है की निवासी नगर निर्माण कला से भली भाति प्रचिलत थे। भग्नावशेषों के अध्ययन से ज्ञात होता है की भवन निर्माण कला बहुत ही विकसित थी। भवन के स्वरुप को देखते हुए यह पता चलता है की दो प्रकार के भवनों का निर्माण हुआ था - आवासीय भवन सार्वजानिक भवन।
भवनों का स्थापत्य - मकान छोटे व बड़े दोनों ही प्रकार के थे एक मकान में 30 कमरे मिले हैं
घरों के दरवाजे मुख्य सड़क पर न खुल कर गली में खुलते थे दीवारे मोटी होती थी कुछ दीवार पर प्लास्टर के साक्ष्य मिलें है आँगन घर के बीचों-बीच होता था व चारों तरफ कमरे होते थे। मकान की छतों से संबंधित साक्ष्यों का आभाव है। अनुमान है की सरकंडे घांस फूंस व मिटटी का लप का इस्तेमाल किया गया था। मकान में पकी ईटों का बहुलता से प्रयोग हुआ है।
विशाल अन्नागार - इसकी लम्बाई 169 फीट तथा चौड़ाई 133 फीट है। इसमें अनाज व भूंसी के साक्ष्य प्राप्त हुए है । माना जाता है की यह राजकीय अन्न भंडार गृह रहा होगा।
विशाल स्नानागार - इसकी लम्बाई 54 मीटर है चौड़ाई 33 मीटर है। यह चौकोर आँगन में स्थित इसके चारो तरफ गैलरी तथा कमरे बनें हुए है इस आँगन के मध्य में मुख्य स्नानकुंड है। सड़के व गलियाँ सीधी बनी हुई हैं। एक दूसरे को समकोण पर काटती थी जल निकासी का समुचित प्रबंध किया गया था छोटी नाली बड़ी नाली में तथा बड़ी नाली नाले में मिलती थी।
A. पुरुष
B. महिला
C. बच्चे
D. पशु
लगभग 3500 वर्ष पूर्व हमें चीन में लेखन कला के प्राचीनतम साक्ष्य मिलते हैं। यह लेखन पशुओं की हड्डियों पर किया जाता था। इन्हें भविष्यवाणी करने वाली हड्डियाँ कहा जाता है, क्योंकि इनके बारे में यह मान्यता थी कि ये भविष्य बताती हैं।
A. ऋग्वेद
B. सामवेद
C. यजुर्वेद
D. अथर्ववेद
सबसे पुराना वेद ऋग्वेद है जिसकी रचना लगभग 3500 साल पहले हुई थी। यह इण्डो-यूरोपीय भाषा का सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ है। इसे सुना और सुनाया जाता था, अतः इसे श्रुति साहित्य भी कहा जाता है।
A. भीम
B. तुंगभद्रा
C. मंजरा
D. माही
घोड़ नदी महाराष्ट्र राज्य से प्रवाहित होती है। यह भीमा नदी की ऊपरी घाटी से बहना आरम्भ होती है।
A. झारखंड में बोली जाने वाली भाषाएँ
B. गोआ में बोली जाने वाली भाषाएँ
C. मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली भाषाएँ
D. कश्मीर में बोली जाने वाली भाषाएँ
ग्रीक भाषा में ऑस्ट्रो का तात्पर्य साउथ होता है और इसलिए इसे ऑस्ट्रो-एशियाटिक कहा गया है। झारखंड और मध्य भारत के कई हिस्सों में बोली जाने वाली भाषाएँ ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार से सम्बंधित हैं।
A. सूर्य देवता
B. योद्धाओं का देवता
C. वन्य देवता
D. पानी के देवता
ऋग्वैदिक काल के दौरान, केवल इन्हें ही देव की उपाधि प्राप्त थी। वह युद्ध और मौसम का देवता था और सभी देवताओं का राजा था। उसे ऋग्वैदिक परंपरा में उसे पुरंदर अर्थात 'दुर्ग संहारक' के रूप में वर्णित किया गया था।
A. पाषाण
B. गुफा
C. झोपड़ी
D. महापाषणिक कब्र
सिस्ट शवाधान हेतु पाषाण से निर्मित एक लघु ताबूत होता था। महापाषणिक सिस्ट में एक पोर्ट-होल होता था, जो एक प्रवेश द्वार के रूप में होता था।
A. गोदावरी
B. भीम
C. तुंगभद्रा
D. माही
भीमा नदी का उदगम स्थल महाराष्ट्र राज्य में है। यह नदी पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग सहयाद्रि पर कर्जत के समीप स्थित भीमशंकर पहाड़ियों से निकलती है। इस जगह पर 3600 से 2700 साल पहले लोग रहते थे।
A. दासी
B. दस्यु
C. दासस
D. द्रविड़
दास शब्द की पहचान ऋग्वेद में इंडो-आर्यन जनजातियों के शत्रु के रूप में की गई थी। बाद में, इस शब्द ने दास या नौकर के रूप में भिन्न अभिप्राय ले लिया। पुरुष दास को 'दास' और स्त्री दास को 'दासी' संबोधित किया जाता था।
1. सौलह महाजनपद
2. राजा या प्रतिनिधि
3. अन्तिम
4. 326 ई० पू०
5. कर
6. यूनान
A. महावीर
B. बुद्ध
C. अशोका
D. कालाशोका
किसागोतमी के पुत्र की मृत्यु हो गई थी। एक व्यक्ति ने उसे बुद्ध से मिलने की सलाह दी। बुद्ध ने उसे किसी ऐसे घर से सरसो की एक मुट्ठी लाने को कहा जिस घर में परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु ना हुई हो। उसने दर ब दर भीख मांगी किन्तु वह इसे प्राप्त करने में असफल रही। इससे उसे एक सीख मिली कि यदि एक बार कोई मनुष्य मर जाता है तो वह कभी वापस नहीं आता है।
A.
वैदिक विचारों के लिए
B. पौराणिक विचारों के लिए
C. उपनिषद विचारों के लिए
D. ब्राह्मणिक विचारों के लिए
उपनिषद विचारों के शोध हमारे ध्यान को खींचकर इस ओर ले जाता है कि किसी भी निर्णय तक पहुंचने के लिए कार्य तथा ज्ञान दोनों समान महत्त्वपूर्ण होते हैं।
A. वाराणसी
B. कुशीनगर
C. सारनाथ
D. लुंबिनी
बौद्ध धर्म के इतिहास में यह शिक्षा ‘धर्म चक्र परिवर्तन’ कहलाती है। इस महान शिक्षा के पश्चात, बुद्ध पहली बार अपने शिष्य बनाने में सफल हुए।
A.
इजिप्ट
B. जापान
C. चीन
D. ईरान
जोरास्टर एक नबी थे, जो ईरान से थे। उनके द्वारा दी गई शिक्षाऐं एक पुस्तक में हैं जिसका नाम अवेस्ता है।
A.
सुत्त पिताका
B. जताका
C. ब्रह्माणा
D. विनाया पिताका
यह पुस्तक हमें बताती है कि सभी मर्द संघ में शामिल हो सकते हैं। यहाँ तक की बच्चे अपने माता पिता की आज्ञा लेकर तथा गुलाम अपने आकाओं की आज्ञा से संघ से जुड़ सकते हैं।
A.
राजस्थान में
B. बिहार में
C. गुजरात में
D. पंजाब में
लगभग 150 वर्ष पूर्व, महावीर की शिक्षाऐं लिखी गई, वलाभी, गुजरात में वह आज भी उपलब्ध है।
A.
जीवन कष्ठों और खुशियों से भरा हुआ है
B. जीवन कष्ठों और दुखों से भरा हुआ है
C. जीवन खुशियों से भरा है
D. जीवन में कठोर नियन्त्रण का नेतृत्व होना चाहिए
बुद्ध ने बताया कि जीवन कष्ठों तथा दुखों से भरा हुआ है क्योंकि हमारी असीमित इच्छाऐं व लालसा हैं। बुद्ध इसे प्यास के रूप में व्यक्त करते हैं।
A.
बरगद का वृक्ष
B. आम का वृक्ष
C. सेब का वृक्ष
D. पीपल का वृक्ष
बुद्ध ने बौध तथा चिन्तन के लिए अपना स्वंय का मार्ग अपनाया और वह बोध गया गये जो बिहार में स्तिथ है। उन्हे पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।
A. सिद्धार्थ
B. महावीर
C. अजातशत्रु
D. बिम्बसार
सिद्धार्थ, गौतम के नाम से भी जाने जाते हैं, बौर्द्ध धर्म के संस्थापक थे तथा उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था।
A. माया
B. लालच
C. तन्हा
D. तारा
बुद्ध का सिद्धान्त था कि हम कभी भी सन्तुष्ट नहीं हो सकते यहाँ तक की हमें जो चाहिए वह हम प्राप्त कर लें उसके बाद भी नहीं। उनके अनुसार, इन बढ़ती हुई इच्छाओं को धैर्य के मार्ग पर चलकर अपने जीवन के प्रत्येक कार्य से हटाया जा सकता है।
A.
मगधी भाषा
B. मैथली भाषा
C. प्राकृत भाषा
D. संस्कृत भाषा
पनीनी स्वंय एक ब्राह्मण था। उस समय में संस्कृत सिर्फ उच्च वर्ग द्वारा ही बोली व लिखी जाती थी। इसे परोक्ष रूप से बौद्धिक वर्ग की भाषा कहा जाता था।
A.
जिन
B. ज्ञान
C. जिना
D. जीन
जैन पाठ में, जिना पद का अर्थ विजैता होता है। कई वर्षों तक गंभीर चिन्तन करने के कारण महावीर अपनी इंद्रियों का नियंत्रित करने में सक्षम थे। इसके पश्चात उन्हें अरिहन्तदेव कहा गया। वह 24वें जैन तीर्थंकर थे।
A. वैयाकरण
B. चिकित्सक
C. बहुभाषी
D. दरबारी कवि
पनानी एक व्याकरण लिखी थी जिसका नाम अष्ठाधयी था। इस पुस्तक में, उसने स्वरों तथा व्यंजकों को एक विशेष क्रम में व्यवस्थित किया तथा फिर उन्हें एक सूत्र बनाने के लिए प्रयोग में लिया।
A.
जैन धर्म
B. हिन्दू धर्म
C. बौद्ध धर्म
D. सिक्ख धर्म
बौद्ध संघ के लिए जो नियम बनाए गए थे वह एक पुस्तक में लिखे गए थे। विनय पिताका, त्रिपिताका का एक भाग है। इसमें बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पालन किए जाने वाले नियम तथा विनियम लिखे हुए हैं। वर्तमान में पाठ के केवल 6 संस्करण उपलब्ध हैं।
A.
अवधी
B. मगधी
C. संस्कृत
D. प्राकृत
महावीर प्राकृत भाषा का प्रयोग करते थे जो कि आम लोगों की भाषा थी। उन्होने इस भाषा का चुनाव इस लिए किया क्योंकि वह इस भाषा से अपना संदेश जनसमूह तक आसानी से पहुंचा सके।
A. जैन
B. बौद्ध
C. हिन्दू
D. मुस्लिम
जैनी बहुत ही सरल जीवन व्यतीत करते हैं। वह जैन तिर्थांकरों द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का अनुसरण करते थे।
A.
पवापुरी
B. वलाभी
C. अहमदाबाद
D. राजकोट
दुसरी जैन सभा वलाभी, गुजरात में देवार्धी श्यामाश्रमण के नेतृत्व में आयोजित हुई थी। इस सभा में, महावीर की शिक्षाओं के ग्रंथ को 12 अंगों तथा 12 उपअंगों में अर्द्ध मगधी भाषा में सुव्यवस्थित कर दिया था।
A. पाठशाला
B. आश्रम
C. विहार
D. मठ
विहार शब्द ‘बिहार’ शब्द से उत्पन्न हुआ है। जिसका वास्तविक अर्थ आराम करने का स्थान होता है। सभी बौद्ध विहारों की पूरी जानकारी सांची में प्राप्त हुई है।
A. हिंसा
B. केवला
C. अहिंसा
D. धम्मा
महावीर के अहिंसा पद का अर्थ यह है कि किसी भी जीवित को चोट न पहुंचाई जाए ना ही किसी जीव की हत्या की जाए। महावीर ने अहिंसा की अवधारणा में एक और विशेषता जोड दी थी। जिसे अनेकान्तवाद कहा जाता था। इससे उनका तात्पर्य था कि सत्य के अनेक पहलू होते हैं।
A. भारत
B. चीन
C. मेसिडोनिया
D. अमेरिका
सिकंदर 2300 साल पहले एक विश्व विजेता बनना चाहता था। वह मेसिडोनिया, जो यूरोप में है,का रहने वाला था।
A. महिलाओं, वैश्य, दास
B. केवल महिलायें और वैश्य
C. महिलाओं, दास और क्म्मकार
D. वैश्य और क्म्मकार
गण या संघ पर कई शासकों का शासन होता था। सभी राजा सभाओं में विभिन्न मुद्दों पर बहस और चर्चाओं को आयोजित करते थे। दास, महिलाओं और क्म्मकारों को इन सभाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।
A. लोहे के हल का उपयोग
B. उर्वरकों का उपयोग
C. सिंचाई का उपयोग
D. बैल का उपयोग
कृषि में एक बड़ा परिवर्तन लोहे के हल का प्रयोग था।
A. प्रोत्साहन राशी
B. अधिलाभ
C. वेतन
D. अनाज
महाजनपद में राजा युद्ध और शांति के दौरान एक बड़ी अच्छी तरह से सुसज्जित और नियमितसेना को बनाए रखने के लिए वेतन का भुगतान करते थे।
A. अपनी राजधानी का दुर्गीकरण
B. सेना को भारी वेतन देना
C. प्रशासन के लिए विभिन्न अधिकारियों को नियुक्त करना
D. ब्राह्मणों को कर मुक्त गांव देना
किलों को बनाया गया था, क्योंकि शायद लोगों को हमलों का डर था और संरक्षण की जरूरत थी। यह भी संभावना है कि कुछ शासक उनके धन का दिखावा करना चाहते थे।
A. काले और लाल रंग के पात्र
B. चित्रित धूसर पात्र
C. गुलाबी रंग के पात्र
D. सफेद पात्र
चित्रित धूसर पात्र, जिन्हें आम तौर पर सरल रेखाओं और ज्यामितीय पैटर्न द्वारा चित्रित किया था।
A. दो समूहों
B. तीन समूहों
C. चार समूहों
D. छह समूहों
उत्तर वैदिक समाज पुजारियों द्वारा चार समूहों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) में विभाजित किया गया था।
A. सोमवेद
B. ब्राह्मण
C. पुराणों
D. महाभारत
उत्तर वैदिक पुस्तकों को गंगा और यमुना के क्षेत्रों में विशेष रूप से भारत के उत्तरी भाग में लिखा गया था। सोमवेद को भी बाद में वैदिक साहित्य में शामिल किया गया था।
A. भूमिहीन कृषि मजदूर
B. लोहार
C. क्षत्रिय
D. किसान
धान के प्रत्यारोपण का काम एक थकाने वाला काम था। यह काम आम तौर पर क्म्मकार या दास द्वारा किया जाता था।
A. ब्राह्मण
B. क्षत्रिय
C. वैश्य
D. शूद्र
इस तरह के लोगों को पुजारियों द्वारा शूद्र के रूप में माना गया था व उन्हें कई अनुष्ठानों से बाहर रखा गया था।
A. पुजारी
B. क्षत्रिय
C. शूद्र
D. वैश्य
उत्तर वैदिक पुस्तकों को पुजारियों द्वारा लिखा गया था। ये किताबें सोमवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद हैं। इन किताबों को उत्तर वैदिक पुस्तक कहा जाता है क्योंकि वे ऋग्वेद के बाद लिखी गयी थी।
A. सारथी
B. गार्ड
C. दास
D. कुम्बकार
सारथी राजा के कारनामों को देखता था और उसकी महिमा के किस्से सुनाता था।
A. अध्यापक
B. घोड़े का बलिदान
C. राजा
D. लोग
कुछ राजाओं द्वारा अश्वमेध या घोड़े के बलिदान के द्वारा उनके पराक्रम दिखाने के लिए अनुष्ठान किया जाता था।
A. 1000 साल पहले
B. 2000 साल पहले
C. 3000 साल पहले
D. 4000 साल पहले
प्रारंभ में राजा लोगों द्वारा चुने गए थे। लेकिन कुछ साल बाद, उस तरीके में परिवर्तन किया गया था।
A. पल्लव शासकों
B. चोल शासकों
C. मौर्य शासकों
D. गुप्त शासकों
एक गण या संघ में एक नहीं बल्कि कई शासक थे।
A. चित्रितलाल पात्र
B. काले पात्र
C. चित्रित धूसर पात्र
D. चिकने काले पात्र
चित्रित धूसर पात्र को अक्सर काले या लाल रंग से सरल डिजाइन के साथ सजाया गया था। यह उत्तरी भारत की गंगा सभ्यताओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी।
A. भूमि जहाँ जनों ने अपने पैर रखें थे
B. शूद्र की भूमि
C. ऐतिहासिक स्मारकों की भूमि
D. संग्रहालयों
जनपद एक गणतंत्र या एक राजशाही हो सकता था। कुछ जनपदों ने बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया और वे महाजनपद बन गयें थे।
A. 1500 साल पहले
B. 2500 साल पहले
C. 2300 साल पहले
D. 3000 साल पहले
शक्तिशाली राज्यों के राजाओं और गणों के बीच युद्ध बहुत लंबे समय तक चला। यह 1,500 साल पहले अंतिम गणों पर गुप्त शासकों द्वारा विजय प्राप्त की गयी थी।
A. विश्वामित्र
B. बुद्ध
C. वस्सकार
D. कम्मकार
अजातशत्रु वज्जी पर हमला करना चाहता था। उन्होंने इस मामले पर बुद्ध की सलाह पाने के लिए अपने मंत्री वस्सकार को भेजा था।
A. शूद्र
B. ब्राह्मण
C. क्षत्रिय
D. वैश्य
क्षत्रिय वर्ण पदानुक्रम में से एक था, और बुद्ध और महावीर क्षत्रिय वर्ण से थे।
जैन धर्म दो सम्प्रदाय में बटा था ये निम्नलिखित है :- 1 - श्वेताम्बर 2 - दिगम्बर
महावीर स्वामी ने तपस्या करके अपनी इनिद्र्यों पर विजय प्राप्त कर लेने के कारण वे महावीर और जिन अर्थात विजेता कहलाये | उन्होंने अपने सिद्धांतों का प्रचार प्राकृत भाषा में किया जो आम बोलचाल की भाषा थी |
सिद्धार्थ का मन चार द्रश्य को देखकर विचलित हो गया था ये निम्न प्रकार है :-
1 बूढा व्यक्ति
2 बीमार व्यक्ति
3 एक शव को ले जाते लोग
4 प्रसन्न मुद्रा में साधु
सत्यकाम जाबाला बुद्ध के समय के एक प्रसिद्ध विचारक थे। वे जबाली नाम की एक दासी के पुत्र थे। वह उस समय में एक विचारक बने जब गरीब व आम लोगों को शायद ही कभी चर्चा में भाग लेने का मौक़ा मिलता था। उन्हें वास्तविकता जानने की तीव्र इच्छा थी और ब्राह्मण शिक्षक गौतम ने उन्हें एक छात्र के रूप में स्वीकार किया।
पाणिनी ने संस्कृत व्याकरण की रचना की।
उन्होंने स्वर और व्यंजन की एक विशेष क्रम में व्यवस्था की और फिर बीजगणित में पाए जाने वाले फार्मूले की तरह इन का इस्तेमाल किया। उन्होंने इसका इस्तेमाल भाषा के नियमों को लघु सूत्रों के रूप में लिखने में करा।
बौद्ध धर्म के प्रसार में विभिन्न कारक सहायक रहे थे-
1 ) बुद्ध ने पाली भाषा में उपदेश दिए जो आसानी से जनसाधारण की समझ में आए ।
2 ) सरल शिक्षाओं एवं समानता के सिद्धांत ने जनसाधारण को आकर्षित किया।
3 ) बौद्ध भिक्षुओं, नन(भिक्षुणियों), व्यापारी, विदेशी तीर्थयात्रियों और मिशनरियों ने भारत और चीन, जापान, बर्मा, श्रीलंका, नेपाल और तिब्बत जैसे अन्य देशों में बौद्ध धर्म के प्रसार में सहायता की।
4 ) बौद्ध मठ भी शिक्षा और ज्ञान के केंद्र थे जिन्होनें धर्म के प्रसार में सहायता की।
5) अशोक जैसे राजाओं के राजकीय संरक्षण और नालंदा जैसे बौद्ध विश्वविद्यालयों की स्थापना ने धर्म के प्रसार में सहायता की।
जैन दर्शन के अनुसार एक व्यक्ति की आत्मा का उसके जीवन कर्मों के अनुसार बार बार जन्म होता है। जैन मोक्ष को व्यक्ति के जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य के रूप में मानते हैं जो जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्रदान करता है । जैन धर्म के त्रिरत्न अथवा तीन रत्नों का अनुसरण करके मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। तीन रत्न हैं -
1 ) सम्यक ज्ञान
2 ) सम्यक विश्वास
3 ) सम्यक आचरण (सम्यक आचरण में अहिंसा और कठिन तपस्या का पालन करना सम्मिलित है। )