महात्मा बुद्ध ने सरल मानवता पूर्ण व्यवहार के लिए अष्टांगिक मार्ग का नियम दिया :-
जीवन को सुचारू रूप से चलने के लिए सही सोच होना |
सही बात और कार्य करना |
सत्य बोलना |
अच्छा कार्य करना |
अच्छे कार्य द्वारा जीविका अर्जित करना |
मानसिक और नैतिक उन्नति के लिए प्रयास करना |
अपने कार्य व्यवहार पर हमेशा नजर रखना |
ज्ञान प्राप्ति के लिए ध्यान केन्द्रित करना |
महावीर स्वामी ने अच्छे व्यवहार व आचरण के लिए पाँच महाव्रतों का पालन करने के लिए कहा ये महाव्रत हैं -
1 - जीवों को न मरना |
2 - सच बोलना |
3 - चोरी न करना |
4 - अनुचित धन न जुटाना |
5 - इनिद्रयों को वश में रखना |
उपनिषद का शाब्दिक अर्थ आग्रह एवं समीप बैठने से है, जैसे कि आश्रम में विद्यार्थी गुरु के समीप बैठते थे।
बुद्ध के समय के दौरान एवं प्राचीन काल में, कई विचारकों ने कुछ कठिन प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयत्न किया था । आत्मा अथवा व्यक्ति की आत्मा की अवधारणा, एवं ब्रह्म अथवा सार्वभौमिक आत्मा एवं उनके मृत्यु के बाद जीवन के विषय में विचार उपनिषदों में संकलित किए गए थे। उपनिषद उत्तर वैदिक ग्रंथों का एक भाग था।
उपनिषद विचारक पुरुषों में विशेष रूप से ब्राह्मण और राजा थे। कहीं-कहीं गार्गी जैसी महिला विचारकों का उल्लेख किया गया है जो उनके विद्या एवं शाही दरबार में वाद-विवाद में भाग लेने के लिए विख्यात थीं। निर्धन जन कदाचित ही इन चर्चाओं में भाग लिया करते थे ।
महावीर स्वामी ने अपनी शिक्षाओं में मनुष्य का सबसे बड़ा लक्ष्य जन्म-मरण के चक्कर से छुटकारा पाकर मोक्ष प्राप्त करना है | जीवन के विकास के लिए उन्होंने मन, वचन, कर्म से शुद्ध रहकर तीन बातों को मानने पर विशेष बल दिया |
1 - सही बातों में विश्वास |
2 - सही बातों को ठीक से समझना |
3 - उचित कर्म |
जैन धर्म में इन्हें त्रिरत्न कहा जाता है |
महावीर स्वामी ने अच्छे व्यवहार व आचरण के लिए पाँच महाव्रतों का पालन करने के लिए कहा | ये महाव्रत हैं :-
महावीर स्वामी ने अच्छे व्यवहार व आचरण के लिए पाँच महाव्रतों का पालन करने के लिए कहा ये महाव्रत हैं -
1 - जीवों को न मरना |
2 - सच बोलना |
3 - चोरी न करना |
4 - अनुचित धन न जुटाना |
5 - इनिद्रयों को वश में रखना |
महात्मा बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं में दुःख से छुटकारा पाने को निर्वाण कहा है | उनके उपदेशों से मानव सोच में बहुत बड़ा बदलाव आया | उनके उपदेश सरल पाली भाषा में थे | उन्होंने बताया की व्यक्ति का अच्छा या बुरा होना उसके व्यवहार पर निर्भर करता है न कि उसकी जाति पर | उनके सदाचरण से आम लोग अति प्रभावित हुए और दूर-दूर तक उनके अनुयायी हो गए | दो हजार वर्ष बीत जाने के बाद भी महात्मा बुद्ध के विचारों का अनुकरण आज भी हो रहा है | भारत की अहिंसावादी छवि इन्ही के कारण हुई | इन धर्मो के आने से शाकाहारी संस्कृति को बढावा मिला |
A. चंद्रगुप्त
B. बिन्दुसार
C. अशोक
D. सम्प्रती
धम्म आचार संहिता थी। उसने अपनी जनता का नैतिक उत्थान करने के लिए इस नीति का पालन किया था। हालांकि उसने बौद्ध धर्म को राज्य धर्म के रूप में घोषित नहीं किया था।
A. महावीर
B. नागार्जुन
C. अश्वघोष
D. बुद्ध
कलिंग के युद्ध के बाद अशोक का बौद्ध धर्म के प्रति झुकाव बढ़ गया था। उसने युद्ध के बाद विजय की नीति का त्याग कर दिया था। वह धीरे धीरे बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया और उसने अहिंसा का मार्ग अपना लिया।
A. संस्कृत भाषा
B. प्राकृत भाषा
C. मगधी भाषा
D. अर्द्ध-मगधी भाषा
संस्कृत शब्द धर्म के लिए प्राकृत शब्द धम्म है। अशोक के शासनकाल के दौरान शिलालेख इस भाषा में उत्कीर्ण किए गए थे। पाली भाषा का जन्म प्राकृत भाषा से हुआ था।
A. दुर्ग
B. छावनी
C. निगरानी के लिए बुर्ज
D. द्वार
निगरानी बुर्ज एक प्रकार का दुर्गीकरण होता है जो दुनिया के कई हिस्सों में प्रयोग किया जाता है। यह एक साधारण बुर्ज से भिन्न होता है। इसका मुख्यतः सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह दुर्ग एक पृथक खड़ी स्वतन्त्र इमारत की भाँती दिखता है।
A. वेदव्यास
B. बीरबल
C. तेनाली राम
D. चाणक्य
चाणक्य ने सम्राट चंद्रगुप्त को अपना समर्थन दिया था। कौटिल्य और विष्णुगुप्त उसके अन्य नाम हैं। उसने राजनीति और अर्थशास्त्र पर अर्थशास्त्र नामक एक पुस्तक की रचना की थी।
A. वह संन्यास ग्रहण करना चाहता था।
B. वह युद्ध के कारण हुई हिंसा और रक्तपात से भयभीत हो चुका था।
C. उसकी वृद्धावस्था के कारण वह और विजय प्राप्त नहीं कर सकता था।
D. उसे बुद्ध द्वारा युद्ध परित्याग करने की सलाह दी गई थी।
विश्व इतिहास में अशोक ही एकमात्र ऐसा राजा है जिसने युद्ध जीतने के उपरान्त युद्दों का त्याग कर दिया था।
A. धम्म
B. माया
C. धरती
D. अद्वैत
अशोक ने बोद्ध धर्म की अवधारणा धम्म का प्रचार किया था लेकिन उसके धर्म में हिन्दू धर्म की तरह ईश्वर की पूजा अथवा यज्ञ करना शामिल नहीं था।
A. राजकुमार
B. राजकुमारीयाँ
C. कुलीन
D. धम्म महामात्य
विशाल मौर्य साम्राज्य प्रांतों में विभाजित था। अधिकाँश महत्वपूर्ण प्रांतों को कुमार कहलाने वाले शाही परिवार के राजकुमारों के नियंत्रण में रखा गया था। वे वायसराय या राजा के प्रतिनिधि के रूप में प्रांतों पर शासन करते थे।
चन्द्रगुप्त मौर्य को भारतीय इतिहास का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट कहा जा सकता है। उसी के समय में ही भारत की राजनीतिक घटनाएँ तिथियुक्त एवं क्रमबद्ध रूप मिलता है।
चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रारम्भिक जीवन के सम्बन्ध में संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है । चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रारम्भिक जीवन के संबंध में विद्वानों में भारी मतभेद है । कुछ विद्वानों के अनुसार वह मगध के नन्द राजा की शूद्र रानी मुरा से उत्पन्न वर्णसंकर पुत्र था लेकिन अधिकांश विद्वान चन्द्रगुप्त मौर्य के कुल व जाति के संबंध में बौद्ध साहित्य के विवरण को अधिक विश्वसनीय मानते है। इन विद्वानों के अनुसार चन्द्रगुप्त का जन्म एक मोरिया नाम के क्षत्रिय वंश से हुआ था। इसी शब्द मोरिया से मौर्य शब्द बना था।
बौद्ध ग्रंथों के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ई० पू० में मोरिया जाति के मुखिया के यहाँ हुआ था। उसका पिता किसी सीमांत युद्ध में मारा गया था। इसके बाद की माता ने जो गर्भवती थी । वह पाटलिपुत्र गयी। जहाँ पर उसने चन्द्रगुप्त मौर्य को जन्म दिया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के उसके परिवार से छोड़ देने का कारण एक गडरिये ने इसका पालन पोषण किया। चन्द्रगुप्त मौर्य एक बार राजकीलम खेल रहा था तभी चाणक्य की दृष्टि उसपर पड़ी वह चन्द्रगुप्त मौर्य को अपने साथ ले गया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य को राजनीतिक और कूटनीति की शिक्षा दी।
चन्द्रगुप्त मौर्य की प्रशासन व्यवस्था बहुत सुदृढ़ व संगठित थी। इस का संचालन चन्द्रगुप्त मौर्य स्वयं करता था। चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता के लिए साम्राज्य में एक मंत्रिपरिषद गठित थी जो राज्य के कार्यों से संपादन में अपने दायित्व का निवाह करते थे। मंत्रिपरिषद के सदस्य राजा को सलाह देते थे।
मौर्य प्रशासन व्यवस्था:- मौर्य प्रशासन व्यवस्था के लिए तीन स्तरों की शासन व्यवस्था थी।
प्रांतीय शासन :- चन्द्रगुप्त मौर्य शासन की सुविधा के लिए अपने साम्राज्य को विभिन्न प्रदेशों में विभाजित किया । इन प्रान्तों की संख्या में मतभेद है अशोक के अभिलेख के अनुसार साम्राज्य के पाँच प्रान्त थे।
जनपद का शासन :- चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में जनपद के मुख्य पदाधिकारी समाहर्त्ता होता था । समाहर्त्ता केंद्रीय मन्त्री के अधीन होता था। समाहर्त्ता अनेक अधिकारियों को सहायता से जनपद का प्रशासन का संचालन करता था।
नगर का शासन :- मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इण्डिका में पाटलिपुत्र को एक सुशोभित नगर बताया है। कौटिल्य ने नगर-शासन का उल्लेख किया है। नगर के शासन के लिए छह समितिया का गठन किया गया था।
A. अरिकामेडू
B. कावेरिपत्तिनम
C. मथुरा
D. पुहार
ये पात्र मूलतः रोमन साम्राज्य के हैं। इससे अरिकामेडु के रोमन व्यापारियों के साथ व्यापारिक संबंधों के बारे में पता चलता है क्योंकि अरिकामेडु में बहुत से ऐसे पात्र मिले हैं।
A. भोज
B. गोप
C. ग्राम भोजक
D. गृहपति
गांव के मुखिया को बहुत से कार्य सौपें जाते थे। प्रायः राजा कर एकत्र करने का कार्य इन्हें ही सौंप देते थे। ये न्यायाधीश का और कभी-कभी पुलिस का काम भी करते थे।
A. अदिमई
B. कडैसियार
C. उझावर
D. वेल्लालर
वेल्लालर लोगों के कुलीन वर्ग के साथ करीबी संबंध थे। उनके पास बड़े भू-खंड होते थे और उन्हें भूमि से करों की वसूली का अधिकार था।
A. 3000 वर्ष पूर्व
B. 3500 वर्ष पूर्व
C. 4000 वर्ष पूर्व
D. 4500 वर्ष पूर्व
उपमहाद्वीप में लोहे के प्रयोग की शुरुआत करीब 3000 वर्ष पूर्व हुई थी।
A. कोचीन
B. भड़ौच
C. पाण्डिचेरी
D. मद्रास
लगभग 2200 से 1900 साल पहले अरिकामेडु एक पत्तन था, व्हीलर के अनुसार , अरिकामेडु तमिल गांव था जहाँ मछलियाँ पकड़ी जाती थी, यह पूर्व में एक प्रमुख चोल बंदरगाह था जहाँ मनका निर्माण और रोम व्यापारियों के साथ व्यापार होता था।
A. ऐहोल
B. कावेरिपत्तिनम
C. मदुरै
D. पुहार
इन सभाओं का आयोजन पाण्डेय राजाओं के संरक्षण में होता था। मदुरै पाण्डेय राजाओं की राजधानी थी। संगम साहित्य की रचना मदुरै में आयोजित तीन सभाओं में की जाती थी।
A. प्रतिष्ठान
B. वृन्दावन
C. मथुरा
D. द्वारका
लगभग प्रथम शताब्दी ईस्वी में कुषाणों ने शासन किया था मथुरा उनकी राजधानी बनी क्योंकि यह यातायात और व्यापार के दो मुख्य रास्तों पर स्थित था। कुषाणों का लाभदायक रेशम मार्ग पर नियंत्रण था जिसकी एक शाखा भारत में मथुरा से गुजरती है। यह आज भी कृष्ण भक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
A. भाष्य
B. कविता
C. कथाएँ
D. लोक कथाएँ
जातक का अर्थ उन कहानियों से है जिनकी रचना आम लोगों द्वारा की जाती थी।
A. उन्हें मध्य भाग पर पंच किया जाता था।
B. धातु के सिक्कों पर विभिन्न आकृतियों को आहत कर बनाया जाता था।
C. सिक्के के एक तरफ छेद होता था।
D. दो सिक्कों को एकसाथ दबाव डालकर बनाया जाता था।
चाँदी या सोने के सिक्कों पर विभिन्न आकृतियों को आहत कर बनाए जाने के कारण इन्हें आहत सिक्का कहा जाता था।
A. गुप्त शासकों की
B. कुषाणों की
C. मौर्यों की
D. पल्लवों की
लगभग 2000 साल पहले मथुरा कुषाणों की की दूसरी राजधानी बना था।
A. मुखिया
B. दास
C. हलवाहा
D. भू-स्वामी
उज्हावर साधारण हलवाहे होते थे। वे कृषि कार्यों में संलग्न रहते थे। उनके पास में स्वयं की भूमि नहीं होती थी। वे वेल्लालर की भूमी पर कार्य किया करते थे।
A. ग्राम भोजक
B. गृहपति
C. अदिमई
D. कडैसियार
गृहपति स्वतंत्र कृषक होते थे। इनमें ज्यादातर छोटे किसान ही होते थे। उत्तर भारत के गांवों में लोगों के कई समूह बसे हुए थे। ये लोग कृषि कार्य में संलग्न थे और उनमें से कुछ कारीगरों के रूप में भी कार्यरत थे।
A. अदिमई
B. उझावर
C. कर्मकार
D. दास कर्मकार
दास कर्मकार उत्तर भारत में, भूमिहीन लोग थे जो अन्य भू-स्वामियों के खेतों पर काम कर अपनी आजीविका चलते थे।
A. पाली
B. महाभारत
C. संगम साहित्य
D. इलाक्कियम
तमिल की प्राचीनतम रचना संगम साहित्य की रचना करीब 2300 वर्ष पूर्व की गई थी।
A. जैन साहित्य
B. संस्कृत साहित्य
C. बुद्ध साहित्य
D. संगम साहित्य
जातक कथाएँ आम लोगों में प्रचलित थीं। बौद्ध भिक्षुओं ने इनका संकलन किया जिनमें बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियां हैं।
A. बर्बरिकम
B. बेरिगाज़ा
C. पुहार
D. मुज़िरिस
किसी अज्ञात यूनानी नाविक ने गुजरात में स्थित भड़ोच का एक तटीय व्यापारिक शहर के रूप में वर्णन किया है। उसने लिखा है कि बेरिगाज़ा की संकरी खाड़ी में समुद्र से आने वालों के लिए नाव चला पाना बहुत मुश्किल होता है।केवल कुशल नाविक ही ऐसा कर सकते हैं।उसने बंदरगाह से निर्यातीत वस्तुओं का भी उल्लेख किया है।
A. प्रशिक्षण प्रदान करना, कच्चे माल का क्रय करना और तैयार माल का वितरण करना।
B. राज दरबार में उपस्थिति दर्ज करना।
C. केवल बैंकों के रूप में कार्य करना।
D. जाति नियामकों के रूप में कार्य करना।
शिल्पकारों की श्रेणियों का काम प्रशिक्षण देना, कच्चा माल उपलब्ध् कराना तथा तैयार माल का वितरण करना था। जबकि व्यापारियों की श्रेणियाँ व्यापार का संचालन करती थीं। श्रेणियाँ बैंकों के रूप में काम करती थीं, जहाँ लोग पैसे जमा करते थे।
A. लाल मृदभांड
B. चमकीले मृदभांड
C. धूसर मृदभांड
D. एरेटाइन पात्र
‘एरेटाइन’ पात्रा के नाम से जाना जाता है। इसे मुहर लगे साँचे पर गीली चिकनी मिट्टी को दबा कर बनाया जाता था। ये अधिक कीमती धातु की वस्तुओं की नक़ल कर तैयार किए जाते थे।
देश के उत्तरी भाग में, भूमिहीन महीलाएँ और पुरुष थे जो दूसरों की मालिकाना भूमि पर कार्य किया करते थे, वे दास और कर्मकार के रूप में जाने जाते थे।
गृहपति, स्वतंत्र किसान थे और उनमें से ज्यादातर उत्तरी भाग में स्थित गांवों में छोटे भू-स्वामी थे
लगभग 2500 साल पहले, कुल्हाड़ी जैसे लौह-उपकरणो का प्रयोग जंगल साफ़ करने और लोहे के हल के फल का प्रयोग कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया गया था।
कई शहरों में, जो कि 2500 साल पहले के आसपास विकसित हुए,पुरातत्वविदों को चीनी मिट्टी के बर्तन याछल्ले पंक्तियाँ में व्यवस्थित मिले हैं,जो की कहीं पर शौचालय के रूप में तो कहीं पर गंदे पानी व कूड़े-कचरे की निकासी के लिए प्रोयाग में लिए गए लगते हैं।ये रिंगवेलआमतौर पर अलग-अलग घरों में पाए गए।
देश के उत्तरी भाग के गांवों में बसे लोगों में ज्यादातर लोग गांव के मुखिया, किसान, खेत मजदूर और कारीगर थे।गांव का मुखिया ग्राम भोजक के रूप में जाना जाता था।वह सबसे बड़ी भूमि का मालिक और आम तौर पर बहुत शक्तिशाली था।स्वतंत्र किसानों को गृहपति कहते थे, ये लोग ज्यादातर छोटी ज़मीनों के मालिक होते थे।कुछ लोग जमीन के मालिक नहीं होते थे, अपितु दूसरों के खेतों में काम करके अपनी रोज़ी-रोटी कमाते थे।इस तबके के लोग दास कर्मकार के नाम से जाने जाते थे।अधिकांश गांवों में कुछ हस्तशिल्पकार होते थे, जैसे की लोहार, कुम्हार, बढ़ई और बुनकर।
निम्नलिखित तथ्य प्राचीन शहरों कीजीवनशैली के बारे में हमें बताते हैं:
1.मूर्तिकार ज्यादातर रेलिंग, स्तंभों और भवनों के प्रवेश द्वार को सजाने पर जादा ध्यान देते थे। वे कस्बों, गांवों और वनों में रह रहे लोगों के जीवन को दर्शाते थे। 2. उन यात्रियों और नाविकों का विस्तृत विवरण जिन्होंने इन प्राचीन शहरों का भ्रमण किया। 3. पंक्तियाँ में व्यवस्थित चीनी मिट्टी के बर्तन याछल्ले पुरातत्वविदों को खुदाई में मिले हैं, जो की कहीं पर शौचालय के रूप में तो कहीं पर गंदे पानी व कूड़े-कचरे की निकासी के लिए प्रोयाग में लिए गए लगते हैं ।इस अवधि के दौरान (2500-2000 ईसा पूर्व),कई शिल्पकरों और व्यापारियों ने मिलकर कुछ संघों का गठन किया जो श्रेणि के नाम से जाने जाते थे।इनका कार्य प्रशिक्षण देना, सामग्री की खरीद और संग्रह और तैयार उत्पाद को वितरित करना था।तब इन श्रेणियों के व्यापारि व्यापार का आयोजन करते थे।यहीश्रेणियांबैंक की तरह कार्यकरतीथींजहांधनी स्त्री-पुरुषअपना धन जमाकरतेथे।यह धन व्यापार में निवेश किया जाता था और ब्याज का कुछ हिस्सा या तो लौटा दिया जाता था या धार्मिक संस्थानों जैसे मठों को चलाने में लगता था।
अरिकामेडू एक तटीय व्यवस्था थी जहाँ दूर देशों से आया माल जहाज़ों से उतारा जाता था।एक बहुत बड़ा ईंट का ढांचा,जो कभी एक गोदाम रहा होगा, इस साइट पर पाया गया। रोमन लैंप, कांच के बर्तन एवं रत्न; भूमध्य क्षेत्र से मिट्टी के बर्तन जैसे लाल चमकदार सील युक्त बर्तन यहाँ पाए गए हैं।शीशे और अर्ध-बहुमूल्य पत्थरों से मनके बनाने के पर्याप्त साक्ष्य भी यहाँ प्राप्त हुए हैं।इन सभी सबूतों से पता चलता है कि अरिकामेडू एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था।
समृद्ध गांवों के समर्थन के बिना, राजा और राज्य का अस्तित्व नहीं हो सकता था, उत्पादन में वृद्धि हेतु विभिन्न प्रभावी कदम उठाए गए थे-
1 नए उपकरण और प्रत्यारोपण की प्रणाली शुरू की गई थी
2 इन के अलावा, सिंचाई व्यवस्था भी इस्तेमाल की गई थी
3.इस समय के दौरान सिंचाई हेतु नहरों, कुओं, तालाबों और कृत्रिम झीलों का निर्माण किया गया था ।

1. जलसेतु जल की आपूर्ति करने के लिए बनाये गए विशाल चैनलों को कहते थे। 2. रोमन सम्राटों ने ये जलसेतु शहर में जल लाने के लिए बनाये जो की स्नान, फव्वारे और शौचालय में उपयोग होता था। 3. एम्फीथियेटरखुले हुए मंच को कहते थे जहाँ नागरिक चारो ओर लगी सीढियों पर बैठ कर सभी प्रकार के उत्सवों का आनंद लेते थे। 4. राजा ऑगस्टस रोमन साम्राज्य के कुछ महत्वपूर्ण सम्राटों में से एक था।
1. व्यापारि लोग राजा के लिए चांदी के बर्तन, पुरुष गायक, सुंदर महिलाएं, उच्च गुणवत्ता की वाइन और कपड़े उपहार स्वरुप लाए। 2. बरीगाज़ा में शराब, तांबा, टिन, सीसा, मूंगा, पुखराज, कपड़ा, सोने और चांदी के सिक्कों का आयात होता था। जबकि शहर से निर्यात होने वाली सामग्री में हिमालय में उगने वाले पौधे, हाथी दांत, सुलेमानी, कपास, रेशम और इत्र शामिल थे।
3 कुशल और अनुभवी स्थानीय मछुआरे ही खाड़ी में जहाजों को
चलाते थे।
कई ख़ास विशेषताओं ने मथुरा को एक महत्वपूर्ण बस्ती बना दिया था, कुछ ऐसी विशेषताएं निम्न हैं :
1 उत्तर पश्चिम से पूरब तक और उत्तर से दक्षिण तक - यात्रा और व्यापार के दो प्रमुख मार्गों के चौराहे पर इसकी स्थिति।
2 शहर के आसपास किलेबंदी की गई थी।
3 यह कुछ अत्यधिक उत्कृष्ट मूर्तिकला के उत्पादन हेतु एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
4 यह लगभग 2000 साल पहले कुषाणों की दूसरी राजधानी बन गया था।
5 पाषाण खंड और मूर्तियों की सतहों पर कई उत्त्कीर्ण शिलालेख मथुरा में प्राप्त किये गए थे।
6 बौद्ध मठों और जैन मंदिरों ने मथुरा को एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बना दिया था और यह भगवान कृष्ण की पूजा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
A. काली मिर्च
B. चावल
C. बांस
D. चंदन की लकड़ी
व्यापार के साक्ष्य संगम कविताओं में पाये जाते है। संगम कविताओं में से एक में वर्णन है कि पश्चिमी पहाड़िया चंदन की लकड़ी का एक समृद्ध स्रोत थे।
A. चेर
B. चोल
C. पंड्या
D. सातवाहन
संगम साहित्य पंड्या के शाही संरक्षण में मदुरै में आयोजित तीन तमिल संगम में तमिल विद्वानों द्वारा संकलित किया गया।
A. साका राजवंश
B. कुषाण वंश
C. मौर्य वंश
D. सातवाहन वंश
सातवाहन का पहला उल्लेख ऐतर्य ब्रहामाना में पाया जाता है।
A. संस्कृत शब्द
B. तमिल शब्द
C. प्राकृत शब्द
D. पाली शब्द
संस्कृत शब्द 'भज' का मतलब है बाटना या साझा करना है ।
A. पेड़ है जिसके तहत बुद्ध का उपदेश
B. उन लोगों को जो ज्ञान की प्राप्ति हुई थी
C. बुद्ध के अनुयायियों
D. बुद्ध के निकट सहयोगियों का खिताब
बोधिसत्व का मतलब प्रबुद्ध प्राप्त करना है । एक बार जब वे ज्ञान प्राप्त कर लेते है, वे पूरी तरह से अलगाव में रहते हैं और शांति में ध्यान सकता है।
A. लंदन
B. पेरिस
C. रोम
D. टोक्यो
रोम के बाजारों में रेशमी परिधान बहुत अधिक कीमत पर बेचे जाते थे। रेशम की वस्तुओं की कीमत में इस वृद्धि के बावजूद, नागरिक मुख्य रूप से शासक वर्ग इनका भारी मात्रा में क्रय करते थे।
A. उत्तर प्रदेश
B. बिहार
C. मध्य प्रदेश
D. उड़ीसा
नालंदस्थल बिहार में पटना के पास स्थित है। यह 427 ईसा पूर्व से 1197 ईसा पूर्व तक बौद्ध शिक्षा का केंद्र था।
A. विष्णु
B. इंद्र
C. शिव
D. गणेश
हिन्दू धर्म में नयनार भगवान शिव के भक्त सन्त थे। इनकी कुल सख्यां 63 थी। नयनार के अनुसार भगवान् शिव पृथ्वी के सबसे महान देवता हैं।
A. वेल्लालर समुदाय
B. उझावर समुदाय
C. कडैसियार समुदाय
D. अदिमई समुदाय
तमिलनाडु में वेल्लालर समाज का एक प्रभावशाली वर्ग था। वे किसानों के समुदाय से सम्बंधित थे। वे अधिकतर बड़े भू-स्वामी थे।
A. सीरियाई ईसाई
B. मिस्र के ईसाई
C. मेसोपोटेमिया के ईसाई
D. लेबनान के ईसाई
केरल के ईसाईयों को ‘सिरियाई ईसाई’ कहा जाता था क्योंकि संभवतः वे पश्चिम एशिया से आए थे, वे विश्व के सबसे पुराने ईसाईयों में से थे।
A. कावेरीपट्टिनम,
B. मदुरै
C. सांची
D. कोचीन
कावेरीपट्टिनम एक चोल बंदरगाह था। यह पुहार के रूप में भी जाना जाता था।
A. दक्षिणापथ के स्वामी
B. उत्तरापथ के स्वामी
C. पूरब के स्वामी
D. मध्यदेश के स्वामी
सभी सातवाहन शासक दक्षिणापथ के स्वामी कहलाते थे क्योंकि वे पश्चिम में सत्तारूढ़ थे और प्रायः दक्षिणी क्षेत्रों के मार्ग को नियंत्रित करते थे।
A. गोदावरी
B. कावेरी
C. तापी
D. नर्मदा
प्रमुख और राजा जिन्हें कावेरी नदी घाटीयों और तटों पर नियंत्रण प्राप्त था, वे अमीर और शक्तिशाली बन गए थे।
A. चन्द्रगुप्त मौर्य
B. गौतमीपुत्र सातकर्णी
C. गौतमी बलश्री
D. कनिष्क
सातवाहनों का सबसे प्रमुख राजा गौतमी पुत्र श्री सातकर्णी था। उसके बारे में जानकारी का पता हमें उसकी माँ, गौतमी बलश्री के एक अभिलेख से चलता है।
A. 3 मुखिया
B. 5 मुखिया
C. 6 मुखिया
D. 2 मुखिया
मुवेंदार एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ तीन मुखिया होता है। इसका प्रयोग तीन शासक परिवारों के मुखियाओं के लिए किया गया है। ये थे -चोल, चेर तथा पांड्य। ये करीब 2300 साल पहले दक्षिण भारत में काफी शक्तिशाली बन गए थे।
A. चोल
B. चेर
C. पांडय
D. मौर्य
मदुरै पाण्डय राजाओं की राजधानी थी। ये करीब 2300 साल पहले दक्षिण भारत में काफी शक्तिशाली बन गए थे।
A. मथुरा और पेशावर
B. तक्षशिला और पेशावर
C.
D. तक्षशिला और मथुरा
पेशावर और मथुरा कुषाणों के दो मुख्य शक्तिशाली केंद्र थे। तक्षशिला भी इनके ही राज्य का हिस्सा था। क्योंकि वे भारत के उत्तरी भाग पर भी शासन करते थे।
A. मौर्य
B. चोल
C. चेर
D. कुषाण
सबसे पहले स्वर्ण मुद्राएँ जारी करने वाले शासक कुषाण थे। रेशम मार्ग पर व्यापारियों द्वारा स्वर्ण मुद्राओं का इस्तेमाल किया जाता था।
A. इत्सिंग
B. अश्वघोष
C. फाह्यान
D. कनिष्क
अश्वघोष जो कुषाण राजा कनिष्क के दरबार में एक कवि था, ने बुद्ध की जीवनी की रचना की थी।
A. बुद्ध की पत्नी का नाम
B. बुद्ध के पुत्र का नाम
C. बुद्ध की जीवनी का नाम
D. बुद्ध के जीवन पर संकलित कथा
यह बुद्ध की जीवनी है।
दक्षिण भारत सोने, मसालों, विशेष रूप से काली मिर्च और कीमती पत्थरों के लिए प्रसिद्ध था।
काली मिर्च को रोमन साम्राज्य में बहुत अधिक मूल्यवान समझा जाता था और वे इसे काले सोने के रूप में सम्बोधित किया करते थे।
चोलों के बंदरगाह का नाम पुहार अथवा कावेरिपत्तिनम था।
पांडय शासकों की राजधानी मदुरै थी।
गौतमीपुत्र श्री सातकर्णी सातवाहन वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक था।
हमें गौतमीपुत्र श्री सातकर्णी के बारे में जानकारी उसकी माता गौतमी बालाश्री द्वारा रचित एक शिलालेख से प्राप्त होती है।
रेशम बनाने की तकनीक का सर्वप्रथम आविष्कार लगभग 7000 वर्ष पूर्व चीन में किया गया था।
चीनी शासकों द्वारा ईरान और पश्चिम एशिया के शासकों को रेशम के उपहार भेजे जाते थे और यहीं से रेशम के ज्ञान का पश्चिम में प्रसार हुआ था।
A. धम्म महामात्य
B. महात्मा धम्म
C. धर्म आयुक्त
D. धम्म आयुक्त
अशोक द्वारा विशेष अधिकारियों के रूप में धम्म महामात्यों की नियुक्ति की गई थी। वे धम्म की अवधारणा का प्रसार करने के लिए एक स्थान से दुसरे स्थान पर यात्रा किया करते थे।
A. प्रशासनिक ग्रन्थ
B. पवित्र पुस्तक
C. काव्य ग्रन्थ
D. धार्मिक विचार
चाणक्य के विचारों का अर्थशास्त्र पुस्तक में उल्लेख किया गया था। यह एक प्रशासनिक पुस्तक है।
A. 1,200 वर्ष पूर्व
B. 1,400 वर्ष पूर्व
C. 2,000 वर्ष पूर्व
D. 2,300 वर्ष पूर्व
मौर्य साम्राज्य की स्थापना 2300 से भी अधिक वर्षों पूर्व अशोक के दादा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी।
A. राष्ट्रपति भवन
B. दिल्ली संग्रहालय
C. लंदन की कला दीर्घा
D. सांची
रामपुरवा वृष मौर्य साम्राज्य के मूर्तिकारों के महान कौशल को प्रदर्शित करने वाला सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। वर्तमान में यह राजधानी में राष्ट्रपति भवन में संरक्षित है।
A. इटली
B. ग्रीस
C. फारस
D. मेसोपोटामिया
सेल्यूकस निकेटर के पिता एण्टियोकस जो ओरेस्टिस से थे। वह सिकंदर के एशिया विजय अभियान में उसके साथ गए थे।327 ईसा पूर्व में, वह सिकंदर की पैदल सेना के प्रधान सेनापति थे। उन्हें सिल्वर शील्ड की उपाधि प्रदान की गई थी।
A. दक्षिण पश्चिम
B. दक्षिण-पूर्व
C. उत्तर पश्चिम
D. दक्षिण पश्चिम
मौर्य काल के दौरान, आधुनिक समय के अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सिंध, राजस्थान, गुजरात, कश्मीर आदि क्षेत्रों सहित उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में कंबल का निर्माण व्यापक रूप से किया जाता था। सम्राट अशोक ने कश्मीर को अधिकृत कर लिया था जो इस क्षेत्र में व्यापार और वाणिज्य के विकास में सहायक सिद्ध हुआ। कश्मीर आज भी कंबल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
A. निर्भर राज्य
B. अधीनस्थ राज्य
C. स्वतंत्र राज्य
D. संरक्षित राज्य
ये वन्य क्षेत्र आंतरिक प्रशासन के मामलों में स्वतंत्र थे। राज्य उनकी परंपराओं और नियमोंकानून में हस्तक्षेप नहीं करते थे। राजा युद्ध के समय में उनसे सहायता की अपेक्षा करता था और साथ ही यह अपेक्षा की जाती थी कि वे मौर्य अधिकारियों को लकड़ी, शहद और मोम जैसी वस्तुएं उपलब्द्ध कराएंगे।
A. अरेमाइक लिपि
B. ब्राह्मी लिपि
C. खरोष्ठी लिपि
D. देवनागरी लिपि
ब्राह्मी लिपि का प्राचीनतम साक्ष्य 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व का प्राप्त होता है। अशोक के शिलालेखों में ब्राह्मी लिपि का प्राचीनतम विवरण प्राप्त होता है। इसमें मगधी भाषा का प्रयोग हुआ था। अशोक ने सरल लेखन विधि के रूप में इसका इस्तेमाल किया था और अपनी जनता को लाभान्वित किया।
A. सेनापति
B. उच्च मंत्री
C. राज्यपाल
D. प्रांतों के विशेष राजदूत
प्रांतीय प्रशासन के प्रमुख कुमार (राजकुमार) थे। इस तरह की नियुक्ति का उल्लेख कौटिल्य कृत अर्थशास्त्र में मिलता है। यहाँ तक कि अशोक ने भी अपने पिता बिन्दुसार के शासन में प्रांतीय गवर्नर के रूप में कार्य किया था।
A. उज्जैन
B. तक्षशिला
C. पाटलिपुत्र
D. गांधार
उसने लिखा है कि यह शहर एक विशाल प्राचीर से घिरा हुआ है जिसमें 570 बुर्ज और 64 द्वार हैं। दो और तीन मंजिल वाले घर, लकड़ी और कच्ची ईंटों से निर्मित हैं।
A. बिन्दुसार
B. सम्प्रति
C. चन्द्रगुप्त
D. अशोक
चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान, मेगस्थनीज यूनान के राजा सेल्यूकस निकेटर के राजदूत के रूप में आया था। उसने पाटलिपुत्र शहर का विषद विवरण प्रस्तुत किया है। प्रशासन के बारे में जानकारी प्राप्त करने में उसका विवरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
A. चन्द्रगुप्त मौर्य
B. बिन्दुसार
C. सम्प्रति
D. अशोक
अशोक ने आक्रमण कर कलिंग को परास्त कर दिया था लेकिन युद्ध में हुई हिंसा और रक्तपात को देखकर वो इतना भयभीत हो गया था कि उसने युद्ध परित्याग करने का निर्णय लिया। कलिंग युद्ध ने अशोक के जीवन की दिशा ही बदल दी।
पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी।
राजधानी शहर पाटलिपुत्र, तक्षशिला, और उज्जैन मौर्य साम्राज्य के महत्वपूर्ण शहरों में से थे।
उज्जैन शहर उत्तर-पश्चिम के लिए प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता था।
पाटलिपुत्र के आसपास का क्षेत्र सम्राट के सीधे नियंत्रण में था।
सेल्यूकस निकेटर नामक पश्चिम एशिया के यूनानी शासक द्वारा मेगस्थनीस को एक राजदूत के रूप में भेजा गया था।
सर्वाधिक प्रसिद्ध मौर्य शासक अशोक था।
अशोक ने शिलालेख और अपने अधिकारियों के माध्यम से अपना संदेश संप्रेषित किया था।
अशोक के अधिकाँश शिलालेख प्राकृत में थे और ब्राह्मी लिपि में लिखित थे।
कलिंग तटवर्ती उड़ीसा का प्राचीन नाम था।
अशोक के शिलालेख के अनुसार, उन्होंने राजा बनने के वर्ष उपरांत कलिंग पर विजय प्राप्त की थी।
धर्म एक प्राकृत शब्द है जो धम्म के समतुल्य शब्द है।
अशोक के दादा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा 2300 से अधिक वर्ष पूर्व मौर्य साम्राज्य की स्थापना की गई थी।
चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य का समर्थन किया था । कौटिल्य और विष्णुगुप्त उसके अन्य नाम थे।
करीब डेढ़ लाख लोगों को बंदी बनाया गया था एवं एक लाख से भी अधिक लोग कलिंग युद्ध में मारे गए थे।